बुधवार, 14 जनवरी 2026

महाराणा प्रताप चौक से धरणा टैंट हटाओ.सूरतगढ़ की विशेष रिपोर्ट.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 14 जनवरी 2026.

महाराणा प्रताप चौक पर लगे धरणा टैंट को हटाए जाने की मांग चौक के विभिन्न व्यवसायों में लगे दुकानदारों ने उपखंड अधिकारी और पुलिस से की है। दुकानदारों की मांग में लिखा गया है कि उनकी दुकानदारी व्यवसाय में टैंट के कारण प्रभावित हो रहा है।

 दुकानदारों का यह मानना है और आरोप भी है कि टैंट लगने से उनके यहां खरीदारी करने वाले नहीं आते। हालांकि मांग पत्र में कुछ दुकानदारों के हस्ताक्षर हैं लेकिन चौक के लगभग सभी दुकानदार प्रभावित हो रहे हैं। 

धरनार्थियों की मांग नगरपालिका से संबंधित है। नगरपालिका के आगे ही धरणा टैंट लगा हुआ था और ईओ काम नहीं कर रही तो वहां से हटा कर नगरपालिका प्रशासक उपखंड अधिकारी कार्यालय के आगे लगाना चाहिए था।  महाराणा प्रताप चौक पर धरणा लोगों को दिखाने के लिए लगाया गया है और फालतू समय वाले वहां एकत्रित होते रहें।

* दुकानदारों ने तो अपनी व्यथा प्रशासन के आगे रखी है लेकिन एक सच्च अधिक प्रभावी महत्वपूर्ण है कि वहां से आवागमन बाधित हो रहा है। आवागमन को सुचारू रखना और हर आदमी वाहन बिना परेशानी के निकले की जिम्मेदारी उपखंड अधिकारी और पुलिस उप अधीक्षक की बनती है। हालात और मांग को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है कि 15-16 जनवरी को हर हालत में धरणा टैंट हटाने की कार्यवाही कर दुकानदारों की सही मांग को पूरा करे। 

* सबसे बड़ा तथ्य यह है कि जो धरणा बाजार में लगाते हैं, सड़कें बाधित करते हैं, उनकी किसी भी व्यक्ति की यहां दुकानें नहीं है। 

👌सबसे बड़ा सवाल है कि प्रशासन यहां टैंट लगने ही क्यों देता है? 

( प्रशासन सड़क जाम करने,पुतला फूंकने,टायर जलाने आदि की खतरनाक  दुर्घटनाओं की आशंकाओं वाली प्रदर्शन  कार्वाईयों की विडिओ ग्राफी कर मुकदमें भी दर्ज करे। यहां ऐसे कार्य होते रहे हैं इसलिए सतर्कता बरती जाए। यह चौक मुख्य बाजार में है जहां हजारों की आवागमन भीड़ रहती है और दुकानों में अरबों रूपयों का माल है। कांग्रेस के पदाधिकारी नेता यहां पहुंच कर भड़का रहे हैं, यह प्रशासन और पुलिस की नोलेज में है)

* वार्ड नं 3 और 26 में पट्टे दिए जाने की मांग जिलाकलेक्टर के पास पहुंच गई और जिलाकलेक्टर ने कमेटी गठित कर दी तब चौक पर धरणा लगाने का कोई मतलब नहीं। कमेटी कि ही रिपोर्ट पर अब पट्टे देना और किसे देना है तय होगा। कमेटी यह रिपोर्ट भी जिलाकलेक्टर को सौंपेगी। यह सब धर्णार्थियों को अच्छे तरीके से मालुम है और शहर के नेताओं को भी मालुम है।

वहां पट्टों में कुछ आवेदन ही गलत हैं इसलिए उन अतिक्रमियों सरकारी नौकरों पर कानूनी कार्वाई, मुकदमें होने चाहिए और अतिक्रमण ध्वस्त किए जाकर जमीन नगरपालिका के कब्जे में ली जानी चाहिए। सरकारी कर्मचारियों के विभागों को भी लिखित में कार्वाई करने के पत्र अधिशासी अधिकारी की ओर से जारी किए जाने चाहिए। सब कुछ मालुम पड़ जाने के बाद कार्वाई करना नगरपालिका संपत्ति को बचाना अधिशासी अधिकारी की पहली जिम्मेदार ड्युटी बनती है।०0०






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