मंगलवार, 3 नवंबर 2015

गुरूशरण छाबड़ा को नमन:श्रद्धांजलियां: लगातार:


सूरतगढ़,3 नवम्बर 2015.
गुरूशरण छाबड़ा के मरणव्रत पूरे होने के समाचार से इलाका स्तब्ध रह गया। सूरतगढ़ से लेकर अनूपगढ़ घड़साना तक व अन्य स्थानों पर उनका कर्मक्षेत्र था वहां के लोगों ने एक प्रकार से महान क्षति महसूस की।
उनके साथ आंदोलनों में रहने वाले,मित्र,संस्थाओं के लोगों ने सभाएं की और श्रद्धांजलिया अर्पित की।
पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु,पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया,मालचंद जैन व अन्य जनों के आग्रह पर यहां शराब की दुकानें व बार बंद हुए।
कांग्रेसी नेता बलराम वर्मा ने छाबड़ा को सादगी वाला व जीवनपर्यंत गरीबों के लिए तथा जनहित के मुद्दों की राजनीति करने वाला मसीहा बतलाया।
अणुव्रत समिति ने तेरापंथ सभा भवन में सभा कर श्रद्धांजलि अर्पित की। अनिल रांका ने कहा कि राजकीय महाविद्यालय छाबड़ा की देन है और छाबड़ा सदैव याद किए जाते रहेंगे। राजस्थान सरकार की धीमी गति की कार्य प्रणाली से लोकपाल नहीं आ पाया और छाबड़ा जी संसार त्याग गए।
जैन श्वेतामबर तेरापंथ सभा के अध्यक्ष मांगीलाल रांका ने छाबड़ा को मूल्यों की राजनीति करने वाला बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। तेरापंथ समाज ने इसे सूरतगढ़ की अपूर्णीय क्षति बताया।
नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष सोहनलाल रांका ने कहा कि भाई छाबड़ा के शहीद होने का समाचार करणी इंडिया प्रेस से लगा। उनके निधन से स्वच्छ राजनीति को धक्का लगा है। छाबड़ा नैतिक मूल्यों के प्रति सदा जागरूक रहे। रांका ने कहा है कि राजस्थान सरकार अपनी हठधर्मिता को छोड़ कर छाबड़ा जी के बलिदान को सन्मान प्रदान करे।

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