Sunday, February 8, 2015

कहाणी-राजस्थानी: बडे चौधरी री चौधर




- करणीदानसिंह राजपूत -

पंचायतां रा चुनाव हैलो मार मार हुया। गंवारू कहीजता गांव ढाणी मांय रेत मांय रमता लोगां नुवां पंच अर सिरेपंच चुन्या। देखो बठीनै एक भांत री चरचा अर बातां। पुराणा चालीस पचास सालां सूं चौधर करण वाळा नै ठुकरा नाख्या परै। कोई कैवे चौधरी री मिसरी ठंडी कर नाखी। कोई कैवे चौधरी नै माटी रळया दियौ। बातां रो कांई।
पण इण चुनावां मांय एक बात सगळी जिग्या दिखी। चालीस पचास सालां सूं जका भोळै भाळै लोगां नै मूरख मान पगरखी समझया करता हा, बां री चौधराहट रो तो इसो किनारो कर दिन्यौ कै आगै कई सालां नीं पांघरै। 



मरूदेस मांयनै सेवण घास कितरो अकाळ पड़ जावतौ पण दो बूंद पड़ता ही पांघर जावै। इण चौधरियां री गत सेवण घास सूं भी माड़ी कर दीनी।
पाछला जका भी चुनाव आया एक चौधरी जावतो अर जावणै सूं पैला आपरे बेटे बेटी नै थरप जावतो। बिचारा लोग उडीकता कदैई म्हारो नम्बर लागसी कदैई  महारी बेटी रो नम्बर लागसी। पण गांव गांव मांय चौधरी ईसा हा कै नम्बर कदैई आवण नीं दियौ।
हां एक कहावत है कि बारह सालां बाद तो घूरै रा दिन भी फिरै। तो गांवां मांय रैवण वाळा तो घूरै सूं माळा कोनी हा। मिनख हा। मिनखां मिनखां चुप चुपाटै आप आप रे घरां मांय दिल दिमाग एक करया। मगज खपाई करी। पासौ पलट्यो जा सकै है।
आसै पासै चुनाव लड़ण वाळा चौधरियां सूं भी बात छिपी नईं रह सकी। चौधरी एक एक कर बडे चौधरी खनै गया अर इमदाद मांगी। म्हारे इलाके मांय आवौ अर लोगां रो मन बणावौ जकै सूं जीत पक्की हू सकै। म्हें थानै जीताया हा अब थै म्हानै जीतवाओ।
बातां मांय दम हो। छोटा छोटां चौधरी एकमतां होय रै बडे चौधरी नै और बडो बनायौ हो।
बडो चौधरी कीं ज्यादा ही अक्ल वाळौ हो। बो चुनावां मांय गांव गांव ढ़ाणी ढ़ाणी घूम्यौ भाषण दीया। पण कान्या मांय भी कीं कै जावतो। बोलतो थारै वास्ते वोट मांग्या है। लोगां रै सामीं इसी बातां चौड़े कोनी करणी। लोग हांजी हांजी करता। चौधरी बडो आच्छो है। आपणी जीत पक्की कर दी है। आप आप रै घरां मांय खुसी सूं पेग सैग मारणिया खुद भी पैग मारता अर यार बेलियां नै भी पैग मरवाता। सिरैपंची तो आई पड़ी है। बस। रिजल्ट आणो बाकी है। रिजल्ट आयौ तो घणी घणी चौधर छांटणियां सगळा चौधरी पछाळ खा खा पड्या। गांवा मांय तो नुंवां नुंवा टींगर टींगरी सरीखा सिरेपंच चुणीज गया।
आ पछे कियां होई।
आपणी चौधर चालीस सालां सूं ।
आपणी चौधर पचास सालां सूं।
आपणी चौधर दादा परदादा सूं।
आपणी चौधर गांव बसयो जद सूं।
आ किंया हो सकै है।
काल का टींगर टींगरी अब आपणै ऊपर सिरेपंची करसी।
कीं न कीं गड़बड़ जरूर होई है। बडे चौधरी री बात कोनी राखी। मामलो गड़बड़ तो है।
अंदर खानै मालूम करण लाग्या।
बात आवै जकी पर बिसवास किंया होवै।
पण सगळा झूठ तो नीं बोलै।
बडो चौधरी आ क्यं चावै कै गांव गांव मांय छोटा छोटा नुंवा चौधरी पनप जावै। बडे चौधरी पुराणा नै छोड नुंवा नुंवा लोगां नै सागै कर लीया। बींया नै चाहै टींगर कहवो अर टींगरी कहवो। अब बै सिरेपंच बण गया है।
बडो चौधरी सगळां नै एकै सागै तेलो दे दियौ। नुंवा चौधरी गांव मांय मिले तद बडे चौधरी रै दुरवाजै कुण चढै।
चौधर तो एक री ही चालैगी। बडे चौधरी री। बस। लोगां री समझ मांय आ गई।

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