हर्ष कॉन्वेंट स्कूल,सूरतगढ़.सीबीएसई 12वीं में सफलता के आकाश पर.समीक्षा रिपोर्ट.
* करणीदानसिंह राजपूत *
* निष्ठा 98.2 प्रतिशत अंकों के साथ बनीं टॉपर
17 विद्यार्थियों ने 90% से अधिक अंक किये प्राप्त वहीं 53 विद्यार्थियों ने 80% से अधिक अंक पाकर रचा इतिहास।
*राजनीति विज्ञान और भूगोल में विद्यार्थियों ने बनाया 'शतक' *
सूरतगढ । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित होते ही हर्ष कॉन्वेंट स्कूल परिसर उत्सव में सराबोर हो गया।
विद्यालय के विद्यार्थियों ने अपनी मेधा और कठिन परिश्रम के दम पर आकाश को स्पर्श किया।
*शानदार आंकड़े: मेधावियों की लगी कतार*
निष्ठा: 98.2% अंकों के साथ प्रथम स्थान पर
प्राची: 97.2% अंकों के साथ द्वितीय स्थान पर
काजल: 96.6% अंकों के साथ तृतीय स्थान पर रही ।
वहीं जान्हवी शर्मा और नंदिनी सारस्वत ने राजनीति विज्ञान में 100 में से 100 अंक प्राप्त कर वहीं,यशोदा ने भूगोल विषय में शत-प्रतिशत अंक हासिल कर विषय पर अपनी पकड़ को साबित किया।
* विद्यालय के कुल 17 विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। वहीं, 54 विद्यार्थियों ने 80 प्रतिशत से ऊपर अंक प्राप्त कर विद्यालय की औसत सफलता दर को नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया है।
प्रबंधन और शिक्षकों का *अनुशासन ही सफलता की नींव*
विद्यालय की इस अभूतपूर्व सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए निदेशक अनिल धानुका ने कहा की
आज हमारे विद्यार्थियों ने जो मुकाम हासिल किया है, वह रातों-रात नहीं मिला। यह वर्षों के अनुशासन और संयम का परिणाम है। हर्ष कॉन्वेंट में हम केवल किताबी ज्ञान पर जोर नहीं देते, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित करते हैं। अनुशासन का अर्थ केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि अपने लक्ष्यों के प्रति ईमानदार होना है। हमारे शिक्षकों और छात्रों के बीच जो जीवंत संवाद है, वही हमारी असली ताकत है।
*टीम वर्क से मिलती है सफलता*
प्रधानाचार्य डॉ. एपी सिंह ने इस उपलब्धि को एक सामूहिक जीत करार दिया। उन्होंने कहा:
यह सफलता हमारे टीम वर्क का जीवंत उदाहरण है। जब शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक एक ही दिशा में प्रयास करते हैं, तो परिणाम ऐसे ही सुखद होते हैं। हमने सत्र की शुरुआत से ही कमजोर और मेधावी दोनों वर्गों के छात्रों के लिए अलग-अलग रणनीतियां बनाई थीं। नियमित काउंसिलिंग और छात्रों के साथ निरंतर संवाद ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। मैं उन सभी शिक्षकों को बधाई देता हूँ जिन्होंने दिन-रात एक कर बच्चों के भविष्य को संवारा है।
*सफलता की त्रिमूर्ति: आईएएस बनने का है सपना*
विद्यालय की तीनों शीर्ष मेधावियों—निष्ठा, प्राची और काजल—का लक्ष्य साझा है। तीनों देश की सेवा के लिए आईएएस (IAS) अधिकारी बनना चाहती हैं।
*मोबाइल से दूरी और निरंतरता:-निष्ठा*
अपनी सफलता साझा करते हुए निष्ठा ने कहा:
"मेरी सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं था। मैंने प्रतिदिन 6 से 8 घंटे गहन अध्ययन किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मैंने सोशल मीडिया और मोबाइल फोन से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। बार-बार रिवीजन करना और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करना मेरे लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। माता-पिता और गुरुजनों के मार्गदर्शन के बिना यह संभव नहीं था। गौरतलब है कि निष्ठा गांव रामपुरा की रहने वाली है और बिना किसी ट्यूशन के स्कूल में करवाई गई पढ़ाई को बार-बार रिवीजन कर सफलता प्राप्त की
*मानसिक स्वास्थ्य और एकाग्रता:-प्राची*
प्राची ने अपनी तैयारी के बारे में बताया कि
पढ़ाई के साथ-साथ खुद को शांत रखना बहुत जरूरी है। मैंने अपनी दिनचर्या में योगा और मॉर्निंग वॉक को अनिवार्य रूप से शामिल किया। इससे एकाग्रता बढ़ती है। जब भी मुझे तनाव महसूस होता, मैं अपने शिक्षकों से बात करती। उन्होंने मुझे हमेशा प्रेरित किया कि अंकों के पीछे मत भागो, केवल विषय को समझने पर ध्यान दो।
रिवीजन ही सफलता की कुंजी:-काजल
काजल ने अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा
मेरा मानना है कि आप कितना पढ़ते हैं, उससे ज्यादा जरूरी है कि आप कितना याद रख पाते हैं। मैंने अपने नोट्स खुद तैयार किए और गुरुजनों द्वारा बताए गए हर छोटे निर्देश का पालन किया। मेरा लक्ष्य शुरू से स्पष्ट था, और आज की सफलता ने मेरे आईएएस बनने के संकल्प को और भी मजबूत कर दिया है।"
*शुभकामनाओं का तांता*
इस अवसर पर निदेशक राकेश धानुका ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी प्रतिभाओं का यह संगम हर्ष कॉन्वेंट को विशिष्ट बनाता है। उप प्राचार्य नरेश कश्यप ने भी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह परिणाम हमारी शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रमाण है।
*विद्यालय में जश्न का माहौल*
जैसे ही परिणाम पोर्टल पर अपडेट हुए, स्कूल में मिठाई बाँटने और ढोल-नगाड़ों का दौर शुरू हो गया। टॉपर विद्यार्थियों को फूल-मालाओं से लाद दिया गया। अभिभावकों की आँखों में खुशी के आँसू थे और शिक्षकों के चेहरों पर संतोष। हर्ष कॉन्वेंट स्कूल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और मार्गदर्शन सही हो तो सफलता निश्चित मिलती है।
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