शुक्रवार, 6 मार्च 2026

विधायक डुंगर राम गेदर बोले:बजट बड़े उद्योगपतियों के लिए.

 

* करणीदानसिंह राजपूत * 

जयपुर, 5 मार्च। सूरतगढ़ के विधायक डुंगरराम गेदर ( कांग्रेस) विधानसभा में राजस्थान की भाजपा सरकार के कार्यों की अनेक खामियों को उजागर करते रहे हैं। सरकार के बजट 2026-27 पर भी जनहित की आवाज रखी। 

राजस्थान विधानसभा में आज राजस्थान जन विश्वास अपबंधों का संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान विधायक श्री डूंगर राम गेदर ने विधेयक पर अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रस्तावित संशोधन मुख्य रूप से वन अधिनियम 1953 से जुड़े प्रावधानों में बदलाव से संबंधित हैं, जिनसे पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।

विधायक श्री गेदर ने कहा कि वर्तमान स्वरूप में यह संशोधन बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाला प्रतीत होता है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यदि आपराधिक दंड के स्थान पर केवल अर्थदंड का प्रावधान रखा जाएगा तो प्रभावशाली और बड़े कारोबारी इसे निवेश की तरह मानकर नियमों का उल्लंघन कर सकते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और पर्यावरण को नुकसान होने का खतरा बढ़ जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कई अपराधों को गैर-अपराधीकरण करने की बात कही गई है, लेकिन जवाबदेही सुनिश्चित करने के स्पष्ट प्रावधान विधेयक में दिखाई नहीं देते। इससे कानून के उद्देश्य और अनुशासन की व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।

विधायक गेदर ने राज्य में तेजी से लग रहे सौर ऊर्जा संयंत्रों और औद्योगिक गतिविधियों से पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने गंगानगर जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले जहां तापमान और जल स्थिति बेहतर थी, वहीं अब किसानों को सिंचाई, ऊर्जा और फसलों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को खेजड़ी जैसे महत्वपूर्ण वृक्षों के संरक्षण के लिए स्पष्ट और कड़ा कानून लाना चाहिए था। ऐसा नहीं होने से यह प्रतीत होता है कि सरकार अपने पूर्व में किए गए वादों को पूरा करने में गंभीर नहीं है।

विधायक श्री गेदर ने कहा कि इस विधेयक में छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, कारीगरों और स्थानीय उद्योगों के हितों की स्पष्ट सुरक्षा दिखाई नहीं देती। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं ऐसा न हो कि बड़े उद्योगों को राहत देने के लिए छोटे व्यापारियों पर नियमों का अतिरिक्त बोझ डाल दिया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी विभाग की लापरवाही या देरी के कारण किसी नागरिक या व्यापारी को नुकसान होता है तो प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का स्पष्ट प्रावधान कानून में होना चाहिए। साथ ही लाइसेंस, पंजीकरण और अन्य प्रक्रियाओं को वास्तव में सरल बनाया जाना चाहिए ताकि छोटे व्यापारियों और कामगारों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।

अंत में विधायक डूंगर राम गेदर ने कहा कि कानून का मूल उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं में बदलाव करना नहीं, बल्कि जनता का विश्वास मजबूत करना होता है। इसलिए इस विधेयक में मौजूद कमियों को दूर करते हुए पारदर्शिता, जवाबदेही और छोटे व्यापारियों के हितों की स्पष्ट सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि इस विधेयक को व्यापक जनमत प्राप्त करने के लिए छह माह के लिए वापस लिया जाए, ताकि सभी वर्गों की राय लेकर एक संतुलित और जनहितकारी कानून बनाया जा सके।०0०







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