बुधवार, 18 फ़रवरी 2026

ओबीसी को आबादी के अनुपात में आरक्षण देने की मांग:विधायक डूंगर राम गेदर

 


* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 18 फरवरी 2026.

राजस्थान विधानसभा में आज सूरतगढ़ विधायक डूंगर राम गेदर ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अधिकारों और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। 

* उन्होंने कहा कि 16 नवंबर 1992 को सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद मंडल आयोग की सिफारिशें लागू होने से ओबीसी वर्ग को आंशिक लाभ मिला, लेकिन शिक्षा, पदोन्नति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अब भी पूर्ण न्याय नहीं मिल पाया है।

* विधायक गेदर ने 5 अप्रैल 2006 को तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री श्री अर्जुन सिंह द्वारा केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों—जैसे आईआईटी, आईआईएम, एम्स, दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों—में ओबीसी आरक्षण लागू किए जाने के ऐतिहासिक निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे ओबीसी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में आगे बढ़ने का अवसर मिला।

* उन्होंने सदन को अवगत कराया कि राजस्थान में ओबीसी की आबादी लगभग 54% होने के बावजूद आरक्षण केवल 21% है, जो न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेरिट के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों को भी आरक्षित वर्ग में गिनने से एससी, एसटी और ओबीसी के वास्तविक आरक्षित पद कम हो जाते हैं। 

*उन्होंने एलडीसी भर्ती में ओबीसी के 500 पद तथा चतुर्थ श्रेणी भर्ती में 700 पद कम किए जाने पर भी चिंता व्यक्त की।

* विधायक गेदर ने कहा कि ओबीसी के 21% आरक्षण के भीतर दिव्यांग, खिलाड़ी, नॉन-गजेटेड कोटा, मंत्रालय कर्मचारी एवं अनुकंपा नियुक्तियों को शामिल करने से वास्तविक लाभार्थियों को अवसर नहीं मिल पाता।

*उन्होंने क्रीमी लेयर की सीमा 8 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये करने, ओबीसी प्रमाण पत्र की वैधता कम से कम 5 वर्ष करने तथा बार-बार एफिडेविट की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की। साथ ही, अन्य राज्यों से विवाह कर राजस्थान आने वाली ओबीसी महिलाओं को राज्य में ओबीसी प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया।

विधायक गेदर ने ओबीसी को आबादी के अनुपात में आरक्षण देने, पदोन्नति में आरक्षण लागू करने, एससी/एसटी की तर्ज पर विधायक एवं सांसद स्तर पर आरक्षण प्रदान करने तथा वेटिंग लिस्ट में आरक्षण नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग रखी। उन्होंने दस्तकारी जातियों को क्रीमी लेयर से बाहर रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

अंत में उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की अवधारणा तभी सार्थक होगी जब ओबीसी वर्ग को समान अवसर और समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।०0०





            

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