पट्टा संघर्ष: नेता नेतियां, प्रशासन हालात स्पष्ट करें.लेटेस्ट हालात.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 23 जनवरी 2026.
स्थानीय वार्डों 3 और 26 में अतिक्रमण की जमीनों के आवासीय पट्टे दिए जाने की मांग को लेकर महाराणाप्रताप चौक पर धरणे के टैंट में भयानक शीत और बरसात में संघर्षरत लोग डटे थे। बरसात में प्रमोद ज्याणी के बोलते हुए एक विडिओ सोशल मीडिया फेसबुक पर चलता हुआ अनेक लोगों ने देखा होगा। 22 जनवरी की रात में तूफानी हवा और बरसात चलती रही।
नगरपालिका प्रशासन स्पष्ट नहीं कर रहा कि पट्टे देने हैं या नहीं देने हैं। जो सही है और दस्तावेज पूरे हैं उन आवेदकों को तो पट्टे देने में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए।
जो गलत हैं दस्तावेज की कमी है और जमीन स्पष्ट नहीं है उन आवेदनों पर जो स्थिति है वह नोट लगाए जाने चाहिए। यह स्थिति नगरपालिका प्रशासन को सार्वजनिक सूचना विज्ञापन के तहत जारी करनी चाहिए। सार्वजनिक सूचना के अलावा मीडिया में भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अभी हर मीडिया कर्मी अपने तरीके से जानकारी लेता है और प्रकाशित प्रसारित करता है। ऐसी जानकारियों से संघर्षरत लोग, पट्टा आवेदक और शहर के आम लोग संतुष्ट नहीं हो रहे। यह इसलिए होता है कि प्रशासन अधिकारी नगरपालिका अधिकारी आदि शहर के तो होते नहीं है और न शहर की समस्याओं को दूर करने में कोई रुचि होती है। ये केवल नौकरी के लिए आते हैं और मामलों को बीच में लटकता छोड़ कर चले जाते हैं। पुराना रिकॉर्ड नहीं मिलता है तो उसकी जांच नहीं होती कि वह कहां गायब हो गया और उसकी जिम्मेदारी किसकी थी? फाईलें अधूरी, पेजिंग नहीं, किस फाईल में कितने पत्र थे का ब्यौरा ही नहीं। दस्तावेजों का ही मेल नहीं हो रहा कि आवेदक जिस जमीन पर घर बना कर सालों से रह रहा है, वह नगरपालिका की है या नहीं है। सूरतगढ़ नगरपालिका तो वर्षों से अस्थायी कर्मचारियों या फिर सफाई शाखा व दमकल कर्मचारियों द्वारा संचालित हो रही है।आश्चर्य तो यह है कि गलत आवेदकों और सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों की फाईलें नहीं रुकी,उनको हर चैयरमेन व ईओ ने पट्टे दे दिए।
* नगरपालिका प्रशासन में ईओ पूजा शर्मा और उपखंड अधिकारी भरतजयप्रकाश मीणा हैं जो स्पष्ट नहीं कर रहे।
* भाजपा जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह मान मामले को जिला कलेक्टर तक पहुंचा कर भी स्पष्ट निर्णय नहीं करा पाए।
* शराबबंदी नशामुक्ति आंदोलन की राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा नेता पूजा छाबड़ा ने स्वायत्त शासन मंत्री झाबरमल खर्रा से भेंट कर वार्ड नं 3 और 26 में पट्टे देने का मांग का मामला मंत्री तक पहुंचा दिया। पूजा छाबड़ा की तरफ यह नहीं बताया गया कि मंत्री ने क्या कहा? छाबड़ा को यह स्पष्ट बताना चाहिए कि पट्टे दिए जाने का क्या कहा? मंत्री ने कुछ नहीं कहा और पूजा ने पूछा नहीं। क्या मंत्री ने टालने जैसा साधारण उत्तर दिया कि दिखाते है। मंत्री ने कुछ तो नोट लगाया होगा और वह नोट क्या था? मंत्री ने पत्र किसको मार्क किया? मामला जब सरकार तक पहुंचा दिया गया तो उसकी स्थिति पूजा छाबड़ा को भी हर हालत में अविलम्ब हो सके तो 24 जनवरी 2026 तक संघर्षरत व आम जन को लिखित ब्यौरे से बतानी चाहिए।
* आंदोलन में परसराम भाटिया भी जुड़े हैं। कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष हैं भाटिया जो 120 दिन नगरपालिका के अध्यक्ष नियुक्त रहे तथा सैंकड़ों पट्टे दिए। सूरतगढ़ से बाहर अन्य गांवों के निवासियों को सूरतगढ़ की फर्जी वोटर लीस्ट से दिए। जानकीदास वाला और मानकसर वासियों को दिए। मानकसर का पट्टा लेने वाला राजाराम धारणिया तो सूरतगढ़ विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रमोद ज्याणी के नजदीकी रिश्ते में है। प्रमोद को सचिव राधेश्याम उपाध्याय को यह मालुम है। भाटिया ने शिक्षा अधिकारी, शिक्षकों तक को गलत पट्टे जारी किए। भाटिया ने तो नगरपालिका के पंप हाऊस की भूमि का मुफ्त में पट्टा जारी कर दिया जिसका मुकदमा सिटी पुलिस थाने में था जिसे अब हनुमानगढ़ पुलिस जांच कर रही है। जानकीदास वाला पट्टे का मुकदमा नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा की ओर से दर्ज करवाया हुआ है जो सिटी पुलिस थाने में जांच चल रही है। अभी जो मांग है उसमें भी 4 शिक्षकों की फाईलें हैं और मालुम होने के बावजूद नगरपालिका प्रशासन रद्द नहीं कर रहा और भूमि नगरपालिका के कब्जे में नहीं ले रहा।
👌 अब बात आती है भाषण बाज नेताओं की जो धरणा स्थल पर ऊंची ललकार में उत्तेजित भाषण देते हैं और भाषण देकर चले जाते हैं। ये नेता अपने आलीशान घरों कोठियों में सोने के बजाय धरणा टैंट में सर्दी में रातें गुजारें। अभी नेता इस संघर्ष में गंभीरता से कुछ भी न सोच पाए हैं न प्रशासन से यहां तक की ईओ से भी कुछ नहीं करा पाए हैं।
विधायक डुंगरराम गेदर,सांसद कुलदीप इंदौरा, पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह भादु सभी कांग्रेस से हैं और भाषण देकर चल दिए में हैं। ये परसराम भाटिया की ही स्थिति स्पष्ट कर दें कि सीट पर होते समय गलत पट्टे दिए और सही थे तो अन्य लोगों को क्यों नहीं दिए?०0०