दुकानदारों के आगे पट्टों की मांग का धरना और कब तक चलेगा?
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 20 जनवरी 2026.
स्थानीय वार्ड 3 और 26 में पट्टे दिए जाने की मांग नगरपालिका से है और धरना महाराणा प्रताप चौक पर बाजार के मध्य लगाया हुआ दुकानदारी को खराब कर रहा है। पट्टे मिलने में अनेक अड़चनें हैं और कोई निश्चित समय अवधि भी नहीं है तब दुकिनदारी को आगे कब तक और खराब करने की छूट प्रशासन यानि उपखंड अधिकारी देते रहेंगे। दुकानदारों ने उपखंड अधिकारी और उप अधीक्षक पुलिस को लिखित में दिया था जिसके बाद रास्ता जाम भी कर दिया था। आश्चर्य यह है कि रास्ता जाम करने के लिए एक घंटे तक तो सड़क पर चटाईयां बिछाने में लगा और उनको रोका नहीं गया। भाषण बाजी के समय पचास साठ लोग थे जिनको हटाने के बजाय पुलिस देखती रही तथा वाहनों को ही डाईवर्ट कर गुजारा गया। दुकानदारों ने उपखंड अधिकारी भरत जयप्रकाश मीणा और पुलिस उप अधीक्षक प्रतीक मील को मांग पत्र दिया था तो ड्युटी बनती थी कि सड़क जाम किए जाने को रोका जाता और आवागमन शुरू कराया जाता। अब यह कार्य तो हो चुका है लेकिन अब आगे के लिए कब तक प्रशासन ढीला रवैया अपनाए हुए दुकानदारी और बाजार को खराब कराता रहेगा। उपखंड अधिकारी और पुलिस उप अधीक्षक दोनों की ही ड्युटी शांति और कानून व्यवस्था बनाने की है और दुकानदारों के व्यवसाय अधिकार की रक्षा करना भी ड्युटी है। धरना टैंट सड़क को रोक रहा है और आवागमन को भी प्रभावित कर रहा है। यदि कोई वाहन चालक आगे से गुजरते हुए चूक गया और टैंट से टकरा गया या सड़क चलते लोगों से टकरा गया तो टैंट लगाने वालों पर मुकदमा तो हो जाएगा मगर जान माल का नुकसान हुआ तब अधिकारी कौन कौन जिम्मेदार होंगे? सूरतगढ़ विकास संघर्ष समिति केवल दो वार्डो के पट्टों के लिए धरणा लगाए हुए है और इनके हटने के बाद फिर किसी एक दो वार्डों की मांगों पर यहीं धरना लग गया तब ऐसे ये हालात चलते रहेंगे। धरणा लगाने वालों की यहां दुकानें हैं नहीं सो उनको दुकानदारों के घाटे से कोई मतलब नहीं है। यदि दुकानदारों ने भी दबाव के लिए सड़क रोक दी तब क्या होगा?
* यदि धरणार्थी सड़क पर से टैंट नहीं हटाते हैं तो प्रशासन को तुरंत ही टैंट को पुलिस कब्जे में ले लिया जाना चाहिए और दुकानदारों की मांग पूरी करनी चाहिए। प्रशासन दुकानदारों की मांग को साधारण समझना बंद करे और सड़क पर टैंट लगाने वालों पर सख्ती करे।
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