बुधवार, 25 नवंबर 2020

राजस्थान के पूर्व वितमंत्री माणिक चन्द सुराणा का निधन-लोकप्रिय नेता थे- करणीदानसिंह राजपूत

 



बीकानेर के लोकप्रिय जन नेता पूर्व वितमंत्री  माणिक चंद सुराणा का 25 नवंबर 2020 सुबह जयपुर के चिकित्सालय में स्वर्गवास हो गया। उनकाअन्तिम संस्कार  बीकानेर में 26 नवंबर को किया जाएगा।
वे अभी पिछले कई  दिनों से अस्वस्थ थे और सघन चिकित्सा इकाई में भर्ती थे।
वे कोरोना ग्रसित भी रहे लेकिन उसमें स्वस्थ हो गए थे। 
89 वर्षीय माणिक चन्द  सुराणा  जन्म 31 मार्च 1931 को हुआ था।  अपने छात्र जीवन से राजनीती में आने वाले सुराणा डूंगर कॉलेज के अध्यक्ष रहे।
 2018 तक  लूणकरणसर से विधायक रहने के बाद इस बार चुनाव नहीं लड़ा था। लूणकरणसर,  कोलायत , नोखा व बीकानेर से विधानसभा के चुनाव लड़कर अपनी लोकप्रियता साबित करने वाले  एकमात्र राजनेता हुए। राजनीति में  जातिवाद के मिथक को  तोड़ते हुए जाट बाहुल्य क्षेत्र से स्वतन्त्र  प्रत्याशी  के रूप  विजय प्राप्त करने वाले एकमात्र जननेता थे।

1977 , 1985 में जनता पार्टी से  ,2000   भाजपा व 2013 में स्वतंत्र रूप से लूणकरणसर से विधायक रहे।   अन्तिम समय  सक्रीय रहे।
इसी वर्ष  पत्नी विमलादेवी ( भंवरीदेवी ) का अप्रैल 2020 को  स्वर्गवास हुआ था।
बीकानेर  में उनका मूल  बड़ेबाज़ार क्षेत्र  हैं। उनका जन्म कोलकता  हुआ परन्तु शिक्षा MA , LLB ,MDS तक की  बीकानेर में प्राप्त की  व  जयपुर में प्रवास  किया।     माणिक चंद सुराणा देश के अनेक अखबारों सहित  थार एक्सप्रेस में भी समसामयिक विषयों  बेबाक लिखते थे।
सन 1977 में जनता पार्टी की मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की सरकार में वित्त मंत्री रहे। मूल रूप में समाजवादी थे। भाजपा में रहे और असंतुष्ट होने पर लूणकरणसर से निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ा था।
**
मैं उनसे अनेक बार मिला। 1977-78 में उनकी पत्रकार वार्ता डागा बिल्डिंग ( केईएम रोड बाद में इसका नाम महात्मा गांधी मार्ग किया गया) में थी। प्रख्यात पत्रकार शुभु पटवा ( अब स्वर्गीय) ने दो बहुत तीखे प्रश्न किए। पत्रकार वार्ता के बाद जब कमरे मे चाय पी रहे तब उन्होंने शुभु पटवा को उन प्रश्नों बाबत कहा कि खाल उधेड़ने वाले प्रश्न थे,ऐसे क्यों पूछते हो,मित्र हो।
शुभू पटवा ने उत्तर दिया। मित्र हूं मगर पत्रकार वार्ता में पत्रकार हूं। वहां मेरा पत्रकारिता का फर्ज है।
मानिकचंद सुराणा पर आम जनता को भरोसा था। जनता का हर व्यक्ति सीधे अपनी बात उनके आगे रखता था। उनका हरेक की पीड़ा समस्या से सीधा संबंध रहा।
सूरतगढ़ में इंजीनियर एम.एल.सिडाना श्रीमती राजेश सिडाना परिवार के नजदीकी मित्रता में थे। सिडाना परिवार में आना रूकना पचासों बार हुआ। सनसिटी नये आवास में ही पन्द्रह सोलह बार आए ठहरे। सिडाना के यहां पत्रकार वार्ता भी कई बार हुई जिनमें मैं शामिल हुआ। मानिकचंद जी सूरतगढ़ आते तब मेरे पास सिडाना परिवार से फोन आता, मानिक जी आए हैं और मैं पहुंच जाता, उनसे बातचीत करने।
एम.एल.सिडाना की परसों 23 नवंबर को ही सुराणा जी से मोबाईल फोन पर बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि हालत इसबार गंभीर है।
मानिकचंद सुराणा जैसे नेता हों। जनता के नेता।
मेरा नमन!
करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ ( राजस्थान )
94143 71356.
------------------






कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

यह ब्लॉग खोजें