शनिवार, 3 अक्तूबर 2020

* राजस्थानी रचनाकारां मोहन आलोक मनोजकुमार स्वामी अर करणीदानसिंह राजपूत री बंतळ *

  



राजस्थानी रा लूंठा रचनाकार मोहन जी आलोक राजस्थानी रचनाकार मनोज कुमार स्वामी रे घरां सूरतगढ़ पधारिया।
म्हूं एक छोटो सो रचनाकार करणीदानसिंह राजपूत। सनेशो मिलता पाण पांख सा लाग गिया। बस दो मिनटां माय पूंचूं अर धोक लगाऊं आशीष लेऊं।
सोचण लाग रैयो हो कै मनोज रो छोटको अशोक फटफटियो ले र हाजर हो।
हड़मान बाबै खेजड़ी मंदर रे धोरियों नेड़े मनोज रो बासो। धोरियां माथै नजरां लागी अर मनोज रै बासे आगे फटफटियो थमयो।

म्हूं मोहन जी रै धोक लगाऊं बीं सू पैलां तो मनोज नीं चूक्यो। म्हारा पग थाम लिया अर धपाऊ आशीष ले र छोड्या। म्हूं तो कैवतो ही रैग्यो।भाईड़ा कांई करै..भाईड़ा कांई करै।
मनोज री आदत तो म्हूं जाणतो ही हो। आशीष लियां बिनां पग नीं छोडै।

मोहन जी आलोक सोफे माथै सुसता रैया हा। मनैं देखते पाण खड्या होया। आपरा पग नीं  पकड़न दिया। म्हूं झुक्यो पण मोहन जी बांथ घाल अर सोफे पर बरोबर बिठायो।
रामा सामा हुई।
मोहन जी सूं मिल्या तीन चार साल हो ग्या। मनोज सामीं मूढे माथै जम ग्यो।
मोहन जी रे डांखळै सूं बात सरू हुयी अर राजस्थानी मान्यता कद मिलैगी तक जा पूंची।
राजस्थान पत्रिका री इतवारी पत्रिका मांय हर हफ्ते मोहन आलोक जी रो एक डांखळो छपतो।  राजस्थानी मांय गजब रो होवतो। डांखळो तीर सी चोट मारतो,मसखरी करतो अर सीख भी धपाऊ देतो। लोग हर हफ्ते  उडीक कर् या  करता हा।
दूजां रचनाकारां डांखळै री नकल भी घणी उतारी पण किण री पार नीं पड़ी।
मोहन जी अर म्हूं मनोज री रचनावां पर टीका टिप्पणी करण लाग्या। पंजाबी उपन्यास कोठे खड़कसिंह रो राजस्थानी उलथो अर मलयालम उपन्यास मछुआरे रो राजस्थानी उलथो नाव अर जाळ माथै घणी हथाई करी। नाव अर जाळ पर मनोज स्वामी नै केन्द्रीय साहित्य अकादमी रो अनुवाद पुरस्कार मिल्यो। अपणे आप मांई लूंठो सन्मान हो। मनोज  री राजस्थानी रामलीला माथै चरचा भी होई। मोहन जी आलोक नै माल्या पुरस्कारां री कांई चरचा करां बां खनै तो भंडार है।

बात सूं बात  निकळती बात  राजस्थानी साहित्य रचना बीकानेर संभाग गंगानगर हनुमानगढ़ सूरतगढ़ अर राजस्थानी नै मान्यता कद मिलसी तक आ र ठमी।

मोहन जी आलोक अर मनोज कुमार स्वामी दोनां रचनाकार बीस तीस साल पुराणो इतिहास एक दूसरे सूं सुणै अर सुणावै। म्हूं हुंकारा देवूं।

मोहन जी आलोक अस्सी बरसां रै नेड़े पूंच ग्या। म्हूं पचहतर पूरा होवणे मांय अठारह दिन ही बाकी। मनोज अठावन साल रै नेड़े।

1 अक्टूबर 2020 रो दिन।  दुनिया 1 अक्टूबर वृद्ध सम्मान दिन रूप में मनावै। इण दिन मोहन जी आलोक सूरतगढ़ पधारिया।  ओ मेळगजब रो हो।
मनोज कुमार स्वामी दिल रो साफ आदमी। बींरै हीये मांय तो मोहन जी आलोक पधार्। बस समझो देवता पधार् या। मोहन जी आलोक देवता होवै या न ई़  होवै पण म्हें राजस्थानी रचनावां अर आदर सूं देवता मानां। बड़ां री आशीष भागी लोगां नै मिलै। आशीष देवण आळो देवता।

मोहन जी आलोक मनोज कुमार स्वामी अर म्हूं  मीठो मूं करयो। ओ भोजन तो बस देवता रो प्रसाद बरगो ही लाग्यो। 
मोहन जी आलोक मनोज कुमार स्वामी अर म्हारी तीनुंआ री फोटू अशोक खींची। मोहन जी आलोक अर मनोज कुमार स्वामी राजस्थानी रा लूंठा रचनाकार थरपीज्योड़ा है। म्हूं अभी दोनुवां सूं सीखण लाग र् यो हूं।
करणीदानसिंह राजपूत
पत्रकार लेखक
सूरतगढ़ ( राजस्थान )
94143 81356.
******


कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

यह ब्लॉग खोजें