सोमवार, 31 अगस्त 2020

👌 कपड़े क्यों उड़ते भीगते हैं? काव्यशब्द-करणीदानसिंह राजपूत.


मौसम गर्मी हो या बरसात

आंधी में उड़ते बरखा में भीगते

अपने कपड़ों को कैसे संभाले

दूर सैर करते या गचागच होते।


भतूलिया उड़ा देता है जब तुम

गर्मी में दुपहरी की नींद में होते

बरखा भिगो देती है जब तुम

रात को गहरी नींद में सोते हो।


आंधी में उड़े कपड़े तुम्हारे

पड़ोसी के घर में मिलते हैं

या झाड़ियों में पड़े हुए

घर से दूर कचरे में मिलते हैं।


मौसम का इसमेँ दोष नहीं

मौसम तो आएगा जाएगा

इसमें कपड़ों का ही है दोष

वे क्यों उड़ते और भीगते हैं।


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करणीदानसिंह राजपूत,

सूरतगढ़।

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