शुक्रवार, 3 मई 2019

वह निकल पड़ा युद्ध को, वह युद्ध जीतेगा।- कविता- * करणीदानसिंह राजपूत *


भारतवासियों पहचान करलो।

कौन अवसरवादी और कौन राष्ट्रवादी,

करलो पहचान ओ भारतवासी।

एक मौका है,पहचान करलो।

कौन हैं हितैषी देश के और

कौन हैं दुश्मन देश के।

एक मौका है पहचान लो

यह सामने हैं  राष्ट्रवादी

और 70 सालों के अवसरवादी।


संकट में जूझते रहे साथ साथ राष्ट्रवादी

और भेष बदल आए गए अवसरवादी।

राष्ट्रवादी करें भारत का जयघोष

अवसरवादी कान सुनें उसमें चीन 

पाकिस्तान।

अवसरवादी आग लगाते रहे जलाते रहे

राष्ट्रवादी खुद जले और बचाते रहे।


सीमा पर आए संकटों पर ,

शहीदों के साथ रहे राष्ट्रवादी

और सवाल करते रहे अवसरवादी।

देश की आन बान शान पर

प्राण न्यौछावर करते रहे राष्ट्रवादी

और मुखौटों में छिपे रहे अवसरवादी।


देश पर हमलाकर लूटते रहे विदेशी,

मुगल विदेशी और अंग्रेज विदेशी 

हजारों सालों तक सोनचिरैया के

पंख नख सब नौचते रहे,

दीवारों में चिनवाया,

कड़ाहों में तलवाया।

गोलियों से भूना फांसी लटकाया।

राष्ट्रवादियों ने काले पानी की सजा भोगी,

देश पर वंश कुर्बान कर दिए,

आन पर मरते रहे।

और अवसरवादी सम्राट बने,

ऐश करते रहे।


अब फिर विदेशी नया मुखौटा,

नाम बदल हुए देशी सम्राट।

उनकी सोच समझ सब विदेशी,

फर्म विदेशी नागरिकता दोहरी

ये नए अवसरवादी। 


पहचानों राष्ट्रवादी की हुंकार

सब देशों में गूंज उठी है।

वह बन सेनापति,

युद्ध को चल पड़ा है।

आओ, उसकी सेना बनें।

घर घर से निकलें

शहरों गांवों से निकलें। 

हर परिवार से जयघोष करें।


आपके सहयोग से

वह निश्चित युद्ध जीतेगा।

फिर कोई अवसरवादी 

सोनचिरैया के पंख नख

नहीं नोच पाएगा।


वह निकल पड़ा युद्ध को,

वह युद्ध जीतेगा।

आओ, जयघोष करें।

उस सेनापति का जयघोष करें,

भारतमाता का जयघोष करें।

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करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,

सूरतगढ़( राजस्थान, भारत)

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