शनिवार, 26 जनवरी 2019

राजेन्द्र भादू काल व कार्यों पर कांग्रेस की नई सत्ता के तीखी नजर *

  *करणी दान सिंह राजपूत *

सूरतगढ़ के विधायक पद पर रह चुके राजेंद्र सिंह भादू के काल (2013-2018)और कार्यों पर कांग्रेस सरकार की तीखी नजर की झलक नगर पालिका में में स्थानांतरण से सामने प्रकट हुई है। लोगों का मानना है कि भादू के काल और कार्यों कार्यों पर अन्य विभागों में भी कुछ समय बाद उठापटक से स्थिति और अधिक सामने आने की आशंका है।  नगर पालिका के अलावा राजस्व विभाग पुलिस महत्वपूर्ण महकमें हैं तथा अन्य महकमों में भी स्थानांतरण के समाचार आ सकते हैं। इसके अलावा भादू के या भादू से संबंधित अन्य कार्यों से संबंधित अन्य कार्यों पर भी कोई तीखे तेवर जाहिर हो सकते हैं।विदित रहे की राजस्थान में कांग्रेस पार्टी ने यह संदेश दिया है कि जहां पर उसके विधायक हैं और जहां पर विधायक प्रत्याशी पराजित हो गए उन की राजकाज में सलाह लेना देना होता रहेगा  । सन 2013 में राजेंद्र सिंह भादू ने भाजपा टिकट से कांग्रेस के गंगाजल मील को पटखनी दी दी और मील तीसरे क्रम पर पहुंच गए थे। इस बार 2018 के चुनाव में गंगाजल मील के बजाय उनके  भतीजे हनुमान मील को प्रत्याशी बनकर मैदान में उतारा गया था उधर भाजपा ने राजेंद्र सिंह को टिकट नहीं दिया और रामप्रताप कसनिया को टिकट दिया जो विजय ही रहे। 2013 में गंगा जल की पराजय और 2018 में हनुमान मील की पराजय की टीस तो होना स्वाभाविक माना जा रहा है।चुनाव प्रचार के समय कांग्रेस पार्टी की मंचों पर गंगाजल मील की तरफ से यह कहा जाता रहा था कि हनुमान जयपुर में रहेंगे लेकिन जनता के बीच गंगाजल मील सारे कार्य करवाते रहेंगे। हालांकि राजेंद्र सिंह भादू अब विधायक नहीं है लेकिन 2013 से 2018 के बीच में विधायक थे और सभी कार्य उनकी सलाह और देखरेख में ही सूरतगढ़ शहर में और ग्रामीण क्षेत्र में हुए। विधायक के कहने से ही आमतौर पर विभागों में नियुक्तियां होती है। यह माना जा रहा है कि स्थानांतरण और पद स्थापन मील के ईशारे पर होंगे और अधिकारी कर्मचारी उनके ईशारे पर  राजेंद्र सिंह भादू के कार्यकाल में हुए हर कार्य पर कागजों की उलटा पलटी करेंगे और इसके अलावा भी शंकाएं हैं।कांग्रेस के पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल का निलंबन भादू के द्वारा करवाने की टीस भी प्रमुख है।चर्चा है कि सीवरेज के निर्माण में कांग्रेस के आरोप थे तथा उसके लिए धरना भी दिया गया था। अभी शंकाएं और चर्चाएं हैं और आगे क्या होगा। भादू राजनीति के खिलाड़ी हैं इसलिए उनसे टक्कर लेना आसान नहीं होगा।

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