रविवार, 17 जून 2018

गंगाजल मील को टिकट मिलना मुश्किल




* करणीदानसिंह राजपूत *


-  मील पिछला चुनाव 32593 वोटों से हारे और तीसरे क्रम पर धकेले गए -


- अमित कड़वासरा को भी टिकट मिलना मुश्किल पिछला चुनाव जमीदारा पार्टी से लड़ा और 48 491 वोटों से हारे

 लेकिन इस बार कांग्रेस में आकर के बने हैं दावेदार -


* करणीदानसिंह राजपूत *


कांग्रेस पार्टी आगामी 2018 का चुनाव उन नेताओं के बल पर नहीं लड़ना चाहती जो 2013 के चुनाव में 20 हजार वोटों से हारे। ऐसे नेता टिकट पर दावेदारी जता रहे हैं।


सूरतगढ़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस की टिकट पर 2008 में जीत कर विधायक बने गंगाजल मील 2013 के चुनाव में तीसरे क्रम पर रहे। गंगाजल मील फिर से 2018 में दावेदार हैं मगर इस बार टिकट मिलना मुश्किल है।

 कांग्रेस 108 सीटों पर बदलाव करने का प्रयत्न करने वाली है जहां पर प्रत्याशी 20,000 वोटों से हारे। सूरतगढ़ सीट पर गंगाजल मील 32593 वोटों से हारे और तीसरे नंबर पर पहुंचा दिए गए इसलिए गंगाजल मील को 2018 में कांग्रेस की टिकट मिलना बहुत ही मुश्किल है।

यह मानकर चलना चाहिए कि गंगाजल मील को टिकट मिलने की रत्ती भर भी गुंजाइश नहीं है। 

 गंगाजल मील 2003 में पीलीबंगा से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े। भाजपा के दिग्गज नेता प्रमोद महाजन ने पीलीबंगा में प्रभावशाली भाषण दिया लेकिन आजाद उम्मीदवार रामप्रताप कासनिया ने मील की बुरी गत बनादी। भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर नाराज होकर आजाद उम्मीदवार के रूप में उतरे रामप्रताप कासनिया ने मील को पटखनी दी।


मील ने इसके बाद  2008 में सूरतगढ़ में कांग्रेस की टिकट पर भाग्य आजमाया और जीत हासिल की। लेकिन पूरा कार्यकाल विवादों में रहा और भ्रष्टाचार व्यापक रूप से हुआ। परेशान जनता ने 2013 में मील को करारी मात दी और तीसरे नंबर पर पहुंचा दिया।

 गंगाजल मील ने हारने के बाद पिछले 5 सालों में कोई विशेष उल्लेखनीय कार्य फील्ड में नहीं किया। भारतीय जनता पार्टी के विधायक राजेंद्र सिंह भादू के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार पर चुप्पी धारण करके एक प्रकार से भाजपा के भ्रष्टाचार को खुली छूट दे दी। किसी एक भ्रष्टाचार पर भी और राजेंद्र भादू के कार्यकलापों पर अपना मुंह नहीं खोला और कोई कार्यवाही कहीं लिखित रूप में नहीं की। चुनाव पराजय के बाद कम से कम प्रत्याशी की पार्टी के प्रति कर्तव्यनिष्ठा के रूप में जो कार्य मील को करने चाहिए थे, उससे मील दूर रहे। कांग्रेस पार्टी और मील के नहीं बोलने के कारण, विरोध नहीं करने के कारण भारतीय जनता पार्टी के राज में भ्रष्टाचार और लूट-खसोट को खुली छूट मिली जिसकी जिम्मेवारी मील पर आती है।


 इसके अलावा कांग्रेस पार्टी में अमित कड़वासरा ने भी टिकट की दावेदारी जताई है जो जमींदारा पार्टी से कांग्रेस में घुसे हैं। अमित ने पिछला  2013 का चुनाव सूरतगढ़ सीट से जमींदारा पार्टी के टिकट पर लड़ा और बुरी तरह से मात खाई जिससे 48 491 वोटों से पराजय मिली। अमित कड़वासरा को 18 275 वोट ही मिल पाए। कांग्रेस पार्टी 20000 वोटों से पराजित कांग्रेसी को टिकट नहीं देने की प्रक्रिया अपनाने वाली है,ऐसी स्थिति में 48491 वोटों से हारे हुए  अमित कड़वासरा को टिकट मिलना असंभव है। अमित कड़वासरा ने भी भाजपा के भ्रष्टाचार घोटालों व विधायक राजेंद्र भादू के कार्यकाल पर मुंह नहीं खोला।

कांग्रेस पार्टी सूरतगढ़ से पुराने कांग्रेसी को उतार सकती है जो लगातार 20- 25 सालों से कांग्रेस पार्टी में रहा हो। 




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