मंगलवार, 19 सितंबर 2017

मोबाइल काल 1अक्टूबर2017 से क्या होगी-आवश्यक सूचना:जरूर जान लें



‌आपका मोबाइल बिल आगामी माह 1 अक्टूबर से और भी कम हो सकता है। टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने मोबाइल से मोबाइल कॉलिंग पर इंटरकनेक्शन यूसेज चार्ज (आईयूसी) को घटाने का ऐलान कर दिया है। 1 अक्टूबर से 14 पैसे प्रति मिनट की बजाय यह सिर्फ 6 पैसे प्रति मिनट चार्ज किया जाएगा। इसके अलावा 1 जनवरी 2020 से इसे पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। हालांकि रिलायंस जियो को छोड़कर दूसरी कंपनियां इसे बढ़ाने की मांग कर रही थीं।आईयूसी वह फीस होती है, जिसे टेलिकॉम कंपनियां उस दूसरी कंपनी को देती है, जिसके नेटवर्क पर कॉल खत्म होती है। यह चार्ज फिलहाल 14 पैसे प्रति मिनट है यानी मौजूदा टेलिकॉम कंपनियों की एवरेज कॉल कॉस्ट का तकरीबन आधा। भारती एयरटेल, आइडिया और वोडाफोन जैसी कंपनियां इंटरकनेक्शन शुल्क को बढ़ाने की मांग कर रहीं थीं, जबकि रिलायंस जियो ने इसे खत्म करने की मांग की थी। एयरटेल सहित दूसरी कंपनियों ने अंतर मंत्रालयी समूह के सामने भी इस मुद्दे को उठाया था। प्रतिद्वंद्वी जियो के खिलाफ एकजुट तीनों दूरसंचार कंपनियों (एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया सेल्यूलर) ने कहा था कि मौजूदा आईयूसी 14 पैसे प्रति मिनट है जो लागत से कम है और इसे ठीक किए जाने की जरूरत है। पिछले साल सितंबर में जब मुकेश अंबानी ने अपने रिलायंस जियो के जरिये लाइफटाइम मुफ्त कॉल का प्लान लॉन्च किया, तब से लगातार आईयूसी एक मुद्दा बना हुआ था। जियो, जो उपभोक्ताओं को फ्री कॉल की सुविधा देता है पर आईयूसी का भार बढ़ता जा रहा था। कंपनी आईयूसी की दरों में कमी चाहती थी। जियो की नजर में आईयूसी वर्तमान ऑपरेटरों द्वारा बनाई गई कृत्रिम बाधा है। माना जा रहा है कि TRAI के फैसले से सीधा फायदा जियो को पहुंचेगा, क्योंकि उसका इस बाबत खर्च कम हो जाएगा। दरअसल, एयरटेल, वोडाफोन इंडिया और आइडिया जैसे बड़े टेलिकॉम ऑपरेटर्स पर जियो की काफी आउटगोइंग कॉल जाती है। जियो 'बिल ऐंड कीप' (BAK) तरीका अपनाने की पक्षधर है। इसमें कंपनियां एक-दूसरे के बजाय ग्राहकों से वसूली कर सकती है। जियो वाइस कॉल के लिए 4जी आधारित (VoLTE) तकनीक का इस्तेमाल करती है। कंपनी का कहना है कि आईयूसी की कोई प्रासंगिकता नहीं है चूंकि सारी इंडस्ट्री आईपी-आधारित (इंटरनेट प्रोटोकॉल) मॉडल्स की ओर बढ़ रही है। इस तरह होती गई कटौती

आईयूसी की शुरुआत 2003 में हुई थी जब इनकमिंग कॉल फ्री होने के बाद ट्राई ने कॉल करने वाले ऑपरेटर से भुगतान करने का नियम बनाया था। शुरुआत में इसकी दर 15 पैसे प्रति मिनट से 50 पैसे प्रति मिनट तक थी। यह दर दूरी पर आधारित होती थी। इसके अलावा 20 पैसे से लेकर 1.10 प्रति मिनट तक कैरिज चार्ज भी रखा गया था। ट्राई ने फरवरी 2004 में इस दर को घटाकर 20 पैसे प्रति मिनट किया और अंत में 1 मार्च 2015 को इस दर को 14 पैसे प्रति मिनट कर दिया गया। ट्राई का  अच्छा निर्णय है और इसको पूरी तरह से खतम कर देना चाहिये था। 

नई दिल्ली
19.9.2017.

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