Sunday, January 31, 2016

एडीएम एसडीएम तहसीलदार कार्यालयों का पूरा क्षेत्र बदबू से घिरा


-प्रतिदिन हजारों लोग इन कार्यालयों में पहुंचते हैं तब उनका स्वागत होता है मूत्र की गंध से और दृश्य में आते हैं  किसी दीवार या कोने में मूत्र त्याग करते लोग:इन कार्यालयों में जो टायलेट हैं उनका भी बुरा हाल है। ताले तक लगे मिलते हैं। शर्मनाक यह है कि महिलाएं यह सुविधा कहां से प्राप्त करें?
- यहां की बदबू से इनकी कॉलोनियां और आसपास के लोग भी प्रभावित हो रहे हैं।
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। अतिरिक्त जिला कलक्टर,उपखंड अधिकारी व राजस्व तहसीलदार के कार्यालयों में कार्यों के लिए पहुंचने वाले लोगों को बड़ी परेशानी और मजबूरी में समय व्यतीत करना पड़ता है। प्रशासनिक कार्यालयों में पहुंचने वाले लोगों को सार्वजनिक निरीक्षण गृह के पास की सड़क से जाना आना होता है। कार्यालयों की ओर आने वाली सड़क पर घुसते ही सार्वजनिक निरीक्षण गृह की दीवार के पास खुला मूत्र त्याग की सुविधा लोगों ने ले रखी है। 
यहां पर झाडिय़ों को काट कर लगाया हुआ है लेकिन मृत्र के वेग को रोकना तो संभव नहीं। कितनी ही लगादो झाडिय़ां लोग मजबूरी में वहां पर गरदन नीची कर अपना काम कर लेते हैं। 
इसके कुछ कदम आगे ही सरकारी आवास से जुड़ा हुआ एक खुला नोहरा पड़ा है जो खुला मूत्र स्थान और मल त्याग स्थान बना हुआ है या लोगों ने अपनी मजबूरी में बना लिया है। इसके आगे इन कार्यालयों की दीवारें भी मूत्र त्याग की सुविधाएं प्रदान करने वाली बनी हुई हैं। इन कार्यालयों में भी बने हुए शौचालयों मूत्रालयों की हालत अच्छी नहीं है। सभी कार्यालयों में महिला कर्मचारियों को भी परेशानी होती है। बाहर से कार्य कराने के लिए पहुंचने वाली महिलाओं के लिए भी सुविधा नहीं है।
तीनों अधिकारी मजिस्ट्रेट हैं और पावरफुल होते हैं। इनके आवास कोठियां और कर्मचारियों के आवास भी इसी क्षेत्र में है। इनको अधिकारी तौर पर तथा व्यक्तिगत रूप से इस हालत में सुधार कराने के लिए उचित कदम सख्त कदम उठाना चाहिए।
    अतिरिक्त जिला कलक्टर का पद जिला कलक्टर से कोई कम नहीं होता। यह केवल प्रशासनिक दृष्टि से ही व्यवस्था होती है।
नगरपालिका की सफाई व्यवस्था के लिए इन मजिस्ट्रेटों को अर्जियां दी जाती है लेकिन इनके दफ्तरों के आसपास का हाल इतना बुरा है कि सोचना पड़ेगा कि इस इलाके में रहने वाले बुद्धिजीवी कैसे पूरा दिन व्यतीत कर पाते हैं? एक सवाल जनता में से और उठा है कि महिलाएं भी इन कार्यालयों में आती जाती हंै,वे कितनी परेशानी भोगती हैंï?
अभी गणतंत्र दिवस समारोह के कारण इन कार्यालयों के आगे कुछ सफाई हो पाई है, लेकिन वहां से टूटे हुए सीमेंट के टी गार्ड हटाए नहीं गए। 


दीवारों पर लोगों के पोस्टर लगे हुए पड़े हैं। किसी को भय नहीं है दीवारें खराब करने का। तहसील और पास की पीडब्ल्यूडी कार्यालशें की दीवारों पर पोस्टर लगे हुए हैं। नारे लिखे हुए पड़े हैं।


अखबारों में सूरतगढ़ की गंदगी पर आए दिन कुछ न कुछ सचित्र छपता रहता है ताकि प्रशासन कोई कार्यवाही करे लेकिन कोई जागता नहीं है। नगरपालिका ने जो अव्यवस्था पूरे शहर में फैला रखी है वह अपने आप में चर्चा की जाने वाली है। सुभाष चौक पर एक मूत्रालय बना हुआ है। इसके महिला वाले मूत्रालय पर पोस्टरों की गंदगी है जिसे नगरपालिका साफ नहीं कराती और पोस्टर लगवाने वालों पर कानूनी कार्यवाही नहीं करती। यह मूत्रालय शाम को चार बजे के बाद फास्ट फूड की रेहडिय़ों से घिर जाता है। महिलाओं को तो सुविधा तक नहीं मिल पाती। वैसे भी वहां पर ताला लटका हुआ रहता है।






Tuesday, January 26, 2016

गणतंत्र दिवस मुख्य समारोह सूरतगढ 2016.


अतिरिक्त जिला कलक्टर हरविन्द्रकुमार शर्मा ने ध्वजारोहण किया:
उपखंड अधिकारी रामचन्द्र पोटलिया,विधायक राजेन्द्रसिंह भादू व नगरपालिका अध्यक्ष काजल छाबड़ा भी समारोह में उपस्थित हुए:
सूरतगढ़ 26 जनवरी 2016.
गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह बस स्टैंड परिसर में आयोजित हुआ जिसमें अतिरिक्त जिला कलक्टर हरविन्द्रकुमार शर्मा ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। स्कूली बच्चों ने व्यायाम प्रदर्शन किया। परेड व ध्वज सलामी हुई।
अतिरिक्त जिला कलक्टर हरविन्द्रकुमार शर्मा व उपखंड अधिकारी रामचन्द्र पोटलिया ने विभिन्न कार्यों में खास उपलब्धियां प्राप्त करने वाले सरकारी व गैर सरकारी लोगों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
नगरपालिका में पालिका बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती काजल  छाबड़ा ने ध्वजारोहण किया।
चित्र देखने के लिए नीचे निर्देशित स्थान पर क्लिक करें।


Sunday, January 24, 2016

नेताजी गुरूशरण छाबड़ा के बिना मनाई गई नेताजी सुभाष की जयंती:


लोगों व समाजसेवी संस्थाओं के पास दान करने को एक कागज का टुकड़ा नहीं था
- करणीदानसिंह राजपूत -
गुरूशरण छाबड़ा शराबबंदी की माँग पर दृढ मरणव्रत पर थे और दानी महादानी मेरे शहर के लोगों व समाजसेवी संस्थाओं के पास दान करने को एक कागज का टुकड़ा नहीं था। करोड़पति लोगों को कागज पर शराबबंदी के लिए सरकार को लिख कर ही देना था कि छाबड़ा जी के अनमोल जीवन को बचाए व उनके साथ जो समझौता हुआ है वह लागू करे। छाबड़ा कोई राजनीति नहीं कर रहा था और न उसको चुनाव लडऩा था। केवल समाज को सुधारने का एक संकल्प जिससे वर्तमान समाज और आगे की पीढिय़ां बरबाद होने से बचने वाली थी। छाबड़ा मेरा मित्र और मैं उनके कई आँदोलनों में सहयोगी था और इलाके के अनेक लोग उनके साथी रहे थे। शराबबंदी के लिए छाबड़ा जी मरणव्रत पर जयपुर में बैठे थे। उनकी दशा की सूचनाएं पल पल की आती रहती थी। मैंने केवल समाचार के लिए कार्य नहीं किया था। मैं लोगों से लगातार अपील पर अपील कर रहा था कि लोग व संस्थाएं जल्दी से जल्दी लिख कर सरकार को सचेत करें ताकि जल्दी से कोई कदम उठाकर छाबड़ा जी के जीवन को बचाया जाए।
संरतगढ़ के नामी गिरामी लोगों की समाजसेवी कहलाने वाली संस्थाएं और उनके संचालकों व कार्यकर्ताओं को केवल पत्र लिख कर स्थानीय अधिकारियों एडीएम या एसडीएम को ही सौंपना था लेकिन किसी के पास कागज का एक टुकड़ा नहीं था। मैंने न जाने कितने समाचार रपटें सचित्र इन संस्थाओं की छपवाई और समय भी दिया लेकिन इन्होंने छाबड़ा के जीवन के लिए पल भर का समय नहीं निकाला। संस्थाएं तो सर्दी गर्मी से बचाने के लिए ही दान करने में लगी रहती है लेकिन छाबड़ा तो सारा जीवन बचाने को संकल्प पर थे। उनको कुछ भी मिलने वाला नहीं था। वे तो अपनी देह भी दान कर चुके थे। उनके जाने के बाद उन्हीं के विधायक कार्य काल में खुले राजकीय महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर किए जाने की बात सरकार ने स्वीकारी थी। छाबड़ा का ही प्रयत्न था जिसके कारण यहां पर राजकीय महाविद्यालय खुल पाया था वरना  सरकारी क्षेत्र में महाविद्यालय खोलने को सरकार राजी ही नहीं थी।
गुरूशरण छाबड़ा का सूरतगढ़ से लगाव था और उन्हीं के विधायक काल में रेलवे स्टेशन के आगे नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की प्रतिमा स्थापित की गई थी और शहीद भगतसिंह की बहन ने प्रतिमा का लोकार्पण किया था। छाबड़ा जी जब भी जयपुर से सूरतगढ़ आते तब इस प्रतिमा को नमन करने के लिए जरूर पहुंचते। गुरूशरण छाबड़ा को भी उनके आदर्श एवं संघर्षशील व्यक्तित्व के कारण नेताजी पुकारा जाने लगा था।
महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के जीवन की गुप्त रखी गई पत्रावलियों को प्रधानमंत्री सार्वजनिक कर रहे थे लेकिन सुभाष की इस जयंती पर इलाके के नेताजी गुरूशरण छाबड़ा इस दुनिया में नहीं थे।

तुम्हें देखेंगे तुम्हारी तस्वीर से :कविता









तुम्हें देखेंगे तुम्हारी तस्वीर से
तुमसे बोलेंगे तुम्हारी तस्वीर से
तुमसे मिलेंगे तुम्हारी तस्वीर से।

तुम्हारी तस्वीर में खूबी है
मेरे हां कहने से हां कहेगी
मेरे ना कहने से ना।

तस्वीर का न दिन होगा न रात
हर दम हर समय होगी मेरे साथ
वह हंसेगी मुस्कुराएगी मेरे संग ।

मेरे लब मिलेंगे तस्वीर के लबों से
समय की कोई सीमा नहीं होगी
मेरे चाहने तक चिपटी रहेगी।

मेरे तुम्हारे मिलन पर पहरे संभव
तस्वीर से मिलन पर होंगे असंभव
अच्छा है जल्दी से तस्वीर भेज दो।

तुम्हारी तस्वीर मेरे सामने होगी
मेरी तस्वीर तुम्हारे सामने होगी
आगे तुम्हारी मेरी सोच होगी।

तस्वीरों के जरिए प्रेम कहानी
धीमे धीमे आगे बढेगी
यह तुम जानोगी मैं जानूंगा।


- करणीदानसिंह राजपूत,
विजयश्री करणी भवन,
सूर्यवंशी विद्यालय के पास,
मिनि मार्केट,सूर्याेदयनगरी,
सूरतगढ़।

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Saturday, January 23, 2016

कांग्रेस के धनपति नेताओं के पास न समय है न संघर्ष का मादा :


अपने अपने व्यवसायों में लगे हुए हैं भाजपा के विरूद्ध मोर्चा कौन खोले?
जनता ही अन्न पैदा करे,पीसे,पकाए और कांग्रेसी नेताओं के मुह में डाले:
- करणीदानसिंह राजपूत -
राजस्थान में भाजपा की वसुंधरा राजे की मुख्यमंत्री वाली सरकार के 2 साल पूर्ण होने पर जयपुर में समारोह आयोजित होने पर कांग्रेस के जयपुर से लेकर ठेठ ग्राम तक के नेताओं ने खूब पेट कूटे तथा हाय तौबा मचाई। एक दो दिन तक पेट कूटा गया और उनके समाचार अखबारों में छपे व चेनलों पर आए। इस एक दो दिन के बाद कांगे्रस के नेताओं की कहीं आवाज तक सुनाई नहीं पड़ी। पेट कूटने में इतने थक गए कि अभी तक वह थकावट नहीं उतरी है।
असल तस्वीर यह भी है कि कांग्रेस के नताओं के पास में खूब धन दौलत है लेकिन उनके पास संघर्ष के लिए मादा यानि ताकत नहीं है जो वे लोग सड़कों पर उतर जाएं। इसकी चेतावनी जरूर समय समय पर देते रहते हैं लेकिन भाजपा उसे केवल भभकी मानती है। कांग्रेस के नेताओं के पास में समय भी नहीं है कि वे संघर्ष कर सकें। वे अपने समय का सदुपयोग जनता के लिए नहीं करते बल्कि अपने व्यवसायों को बढ़ाने में और अधिक धन कमाने में लगाते हैं।
अपने आसपास के कांग्रेसी नेताओं पर नजर डाल कर देखलें ओर ज्यादा ही प्रमाण चाहिए तो किसी को मुद्दों पर संघर्ष करने का कह कर देखलें कि क्या जवाब मिलता है?
कांग्रेस के छोटे नेताओं को भी देख लें जो कहीं पर पार्षद हैं या कहीं पर सरपंच पंच या पंचायत जिला परिषद के डायरेक्टर हैं। उनमे अधिकांश भाजपा के दुमछल्ले बने मिलेंगे। भाजपा जो चाहे वह इनसे लिखवा लेती है और ठेकेदारी में चुग्गा डाल कर अपना पिछलग्गू बना लेती है।
ऐसे में कांग्रेस के नेताओं के जो प्रेस वक्तव्य आते हैं वे एक दिन बाद रद्दी बन जाते हैं।

Friday, January 22, 2016

खेचळ अर खेचळ:राजस्थानी रे नामी रचनाकार मनोजकुमार स्वामी री आत्मकथा:


मनैं लागै है के इण जिसी आत्मकथा हिन्दी रे नामी लिखारां की भी नईं मिली।भगवान जाणै कित्ता दरद दरद दरद अर कित्ती कित्ती अबखाईयां आगे अर आगे मनोज सहन करतो रैसी। मनोज भी करड़कूं  मांय जिको लिख्यो है बो आपरै सांमी है।
मनोज आपरो दिल दिमाग खोल दिया अर म्हूं म्हारे जिसी दिल मांय लागी बिसा सबदां मांय परोस दी आ किताब लोगों रे सामीं।

 करणीदानसिंह राजपूत

Tuesday, January 19, 2016

राजस्थान मीसा रासुका पेंशन स्टे टूटा:पेंशन मिलने लगेगी:


आपातकाल 1975 में जेलों में रहे थे:सूरतगढ़ के जूझारू भी थे:
-स्पेशल न्यूज-
सूरतगढ़,19 जनवरी 2016.
राजस्थान में आपातकाल के बंदियों को दी जा रही पेंशन पर एक रिट पर राजस्थान उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी जो आज हटा दी गई।
इस रिट पर 18 जनवरी को दोनों पक्षों की ओर से बहस हुई तथा अपनी अपनी दलीलें दी गई।
आज उच्च न्यायालय ने रोक हटा दी।
माकपा के लक्ष्मण शर्मा और कांग्रेस के बलराम वर्मा ने इस रोक के हटाए जाने पर प्रसन्नता प्रगट की है। दोनों नेता आपातकाल में जेल में बंद थे। इनके अलावा भी दस कार्यकर्ता रासुका में बंद थे। सूरतगढ़ से शांतिभंग के आरोप में भी आपातकाल में कई जने जेल में बंद रहे थे। उनकी मांग भी पेशन की सरकार के विचाराधीन है।

Sunday, January 17, 2016

प्रीत की दावत में तुम आओ :कविता





 



तुम्हारा एकाकी जीवन
खारे स्वाद का समंदर
मिलन से मीठा होता
समय आया था ऐसा।

दोनों थे आमने सामने
निकल रही थी पुरानी
बातें रसीली सुरीली
सालों साल पुरानी।

हर बात में चेहरों के
छुपे रूप दिख रहे थे
कौन कितना चतुर था
सामने आ रहा था।

एक रूप था सामने का
बड़े अच्छे रिश्तों का
दूसरा रूप था परदे का
उसका सच्च और था।

परदे का रूप लचीला
मिलन को उकसाता
उसका आकर्षण अजब
बस लिपटा ही जाता।

रिश्तों में नए रिश्ते
बनते देह मिलन के
अजब गजब कैसे कैसे
नित सामने आते।

उनके मोह लालसा
दूर रूकने नहीं देते
आपस में गडमड
कर देते मिलते ही।

पुराने रिश्तों का आदर्श
नई परिभाषा से दब जाता
नया मिलन और देह सुख
नया नाम दे जाता।

तुम्हें बता दिए रिश्ते
नए नाम नए आदर्श
प्रीत की दावत में तुम
आओ वह इंतजार है।

तुम्हारी तस्वीर से बातें
होंगी दिन हो या रात
तस्वीर को सुनाते रहेंगे
अपने दिल की कहानी।

- करणीदानसिंह राजपूत,
विजयश्री करणी भवन,
सूर्यवंशी विद्यालय के पास,
मिनि मार्केट,सूर्याेदयनगरी,
सूरतगढ़।
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Thursday, January 14, 2016

ईओ पृथ्वी जाखड़ व राजाराम गोदारा के विरूद्ध वकील सिद्धु के बयान दर्ज:



सूरतगढ़ नगरपालिका में करोड़ों के घोटालों के आरोप:परिवाद सं 314/15.
पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु ने नवम्बर 2015 में परिवाद पेश किया था:

स्पेशल रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 14 जनवरी 2016.
ईओ पृथ्वीराज जाखड़ और पूर्व पार्षद राजाराम गोदारा के विरूद्ध घोटाले व षडय़ंत्र कर फर्जी दस्तावेजों से नगरपालिका सूरतगढ़ को करोड़ों रूपए की हानि पहुंचाने के आरोप में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में परिवादी स.हरचंदसिंह सिद्धु के बयान 14 जनवरी को दर्ज हुए हैं।
पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु ने नवम्बर 2015 में ब्यूरो के जयपुर कार्यालय में कई दस्तावेजी सबूतों के साथ परिवाद पेश किया था। ब्यूरो के अपर पुलिस अधीक्षक ने बयान दर्ज किए।
उक्त परिवाद में राजाराम गोदारा के परिवार के मकानों,बीकानेर रोड की संतोषी माता मंदिर के पास की दुकानों,कॉलोनी,पालिका में ठेकों आदि में घोटालों के आरोप लगाए हुए हैं। सिद्धु ने बयान में अपने आरोपों को दोहराया।
आरोप यह भी लगाया गया कि पृथ्वी राज जाखड़ व राजाराम गोदारा एक ही ग्राम रामसरा जाखड़ान के रहने वाले हैं तथा सूरतगढ़ में दोनों ने घोटाले किए हैं। पृथ्वीराज जाखड़ वर्तमान में रावतसर में नियुक्त है।

Sunday, January 10, 2016

तुम रूप की डली सांवली मनमोहिनी:कविता




तुम रूप की डली
सांवली मनमोहिनी देह
मद बिखरता यौवन
जब पहली बार देखा।
नजरें छुपा छुपा कर
दीदार किया करता
कोई देख न ले
बच कर भी रहता।
तुम्हारी पायल के घुंघरू
दिल में हलचल मचाते
जब निकलती आगे से
बस कुछ बाकी न रहता।
तुम मुस्कराती मंद मंद
चंदा तारों से खेलता
छू लूं देह कैसी है
दिल मचलता रहता।
तुम्हारे हुस्न के चर्चे
सुन सुन मैं खुश होता
हर चर्चा को चुपके से
दिल में संजो लेता।
तुम्हें अन्दाजा तो होगा
कोई हद से ज्यादा
तुमको चाहता है
ऐसी नजरें छुपती नहीं।
एक बात कहूं दिल से
तुम रूप की डली हो
कोई नहीं दूजी तुमसी।
समंदर का तूफान और
जवानी का उफान
इनसे बचना मुश्किल

जमाना यह कहता है।
यह सच्च मैं भोग रहा हूं
तुम्हारी मीठी बातों में
मैं चिपका हूं कब से
कितना रस है मधु जैसा।

 - करणीदानसिंह राजपूत,
विजयश्री करणी भवन,
मिनी मार्केट,
सूर्याेदय नगरी,सूरतगढ़।
94143 81356.
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Wednesday, January 6, 2016

पुस्तक मनुष्य का निर्माण करती है-साहित्यकार डा.कृष्ण आशू- पुस्तक प्रदर्शनी

 


सूरतगढ़ 6 जनवरी 2015- पुस्तक प्रदर्शनी एवं साहित्य समारोह के पांचवें समापन दिवस पर मुख्य अतिथि डा. कृष्ण कुमार आशू ने कहा कि पुस्तकें मनुष्य का निर्माण करती हैं संस्कार देती हंै। आप भले ही ही मंदिर या किसी भी धार्मिक स्थान पर नहीं गए हों लेकिन पुस्तकालय गए हों तो आपका जीवन सार्थक है।
डाक्टर मंगत बादल ने कहा कि लिखे हुए अक्षरों की कीमत सदैव रहती है। इसकी बराबरी व्हाटसअप या फैसबुक नहीं कर सकते।
वरिष्ठ कवि जनक राज पारीक ने गीत प्रस्तुत कर समाबांधा।
इस समारोह में मुख्य अतिथि भारत विकास परिषद के डा.के.एल बंसल थे। समारोह की अध्यक्षता व्यापार मण्डल सचिव दर्शन भगत परनामी ने की। संयोजन राजेश चड्ढा का था।


समापन समारोह से पहले टैगोर महिला बीएड कॉलेज की छात्राअध्यापिकाओं ने कार्यक्रम में भाग लिया।
इस मौके पर व्याख्याता महेन्द्र सिंह शेखावत, मनोजकुमार स्वामी ने अपने विचार रखे।

डा.भरत ओळा की 4 पोथियों का विमोचन:पुस्तक प्रदर्शनी सूरतगढ़:


- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 5 जनवरी 2016.
बोधि प्रकाशन की पुस्तक प्रर्दशनी में राजस्थानी हिन्दी के जानेमाने साहित्यकार डा.भरत ओळा की चार पोथियों घुळगांठ माथै घुळगांठ,कित्ती कहाणी खत्म,भरत ओळा की चुनिन्दा कहाणियां और गोगा गाथा का एक साथ विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम में अध्यक्षता कृष्ण स्याग ने की एवं मुख्य अतिथि मालचंद तिवाड़ी व विशिष्ट अतिथि मोहनजी डेलू,पूर्ण शर्मा पूरण और रामेश्वर गोदारा थे।

 पत्र वाचन पूर्ण शर्मा पूर्ण नें किया।
 मुख्य अतिथी के रूप में मालचंद तिवाडी नें कहा कि कहानी लिखना किसी सच को परोसना नहीं है। पहले कहानीकार  घटना को अंगीकार करता है तब पाठको के सामने रखता है। ओळा अपने आस-पास के वातावरण के परिचित है। वे अपने आस पास मटियां मेंट हो चुके पात्रों में से कथानक उठाकर सृजन करते है। इनका सपना है राजस्थानी कहानी को विश्व स्तर पर स्थापित कर देना। 
 लेखक भरत ओळा नें अपनी रचना प्रक्रिया पर प्रकाश डाला।

Monday, January 4, 2016

ओम पुरोहित कागद राजस्थानी कवि:सूरतगढ़ पुस्तक प्रदर्शनी:


- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 4 जनवरी 2016.
पांच दिवसीय साहित्य समारोह के चौथे दिन रचनाकार से मिलिए कार्यक्रम के तहत राजस्थानी के सिरमौर कवि ओम पुरोहित कागद से भेंट करवाई गई। कागद ने अपने जीवन के हर पहलू और रचना यात्रा का विस्तृत वर्णन किया।
पुरोहित ने बहा कि पत्रकार और लेखक एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों रचनाधर्म निभाते हैं। ऐसे लोग भी हैं जो दोनों धर्म एक साथ भी निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि लेखक व पत्रकार को पैसे के बल पर स्तुतिगान करते हुए चापलूसी का धर्म नहीं निभाना चाहिए। जो सच्च है उसी का लेखन करना चाहिए। लेकिन आज पैसे वालों व राजनैतिक लोगों के लिए लिखा जाने लगा है जो समाज के लिए और राष्ट्र के लिए घातक है।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सोहनलाल रांका ने की एवं मुख्य अतिथि लाजपतराय भाटिया थे। कार्यक्रम का संयोजन राजेश चड्ढा ने किया।
ओम पुरोहित की एक रचना 35 वर्ष पहले श्याम चुघ के अखबार शाश्वत सत्य श्रीगंगानगर में 15 दिसम्बर 1980 में छपी थी जो यहां फोटो पेश है। डाकघर की मुहर देखें जो 16 दिसम्बर की लगी हुई है। यह अखबार मेरे संग्रह में मौजूद था।




 

आतंककारी पाक को जा रहा पानी नहीं रोका जाता:सबक क्या सिखलाएंगे?


नरेन्द्र मोदी प्रकाशसिंह बादल और वसुंधरा राजे सभी दोषी:


भारत के खेत प्यासे और पाक को सालों से 7 हजार क्यूसेक पानी:

- करणीदानसिंह राजपूत -
पाकिस्तान लगातार सीमा पर गोली बारी कर और आतंकवादियों को भेज कर भारत को नुकसान पहुंचा रहा है। सीमा पर हमारे सैनिकों को घात लगा का मार रहा है और आतंकवादियों से खून खराबा करवा रहा है। हमारे सैनिकों की शहादत के बावजूद भी हमारे सत्ताधारी नेताओं व पार्टियों की आँखें नहीं खुलती।
हमारे नेता सबक सिखलाने के थोथे भाषण देते रहते हैं। जब भी सीमा पर गोलीबारी होती है और जब भी कोई आतंकारी घटना होती है तब भाषण होते हैं तथा कुछ देर बाद भूल जाते हैं।
बड़ी दुखद हालत है कि पाक को सबक सिखलाने के भाषण देने वाले हमारे नेता व सरकारें सबक सिखलाना तो दूर रहा,पाक को हमारा पानी जा रहा है  वह बंद नहीं कर पा रहे हैं। सालों से 7 हजार क्यूसेक पानी बह कर पाकिस्तान जा रहा है और हम उसे रोकने के लिए कुछ लाख रूपए लगा कर प्रबंध का निर्माण नहीं करवा रहे।
कितना दुखद है कि हिन्दुस्तान के खेत प्यासे रहते हैं और पाकिस्तान के खेतों में हमारे पानी से सिंचाई होती है वह लहलहाते हैं। हमारे किसान सालों से इस पानी को रोकने की मांग करते रहे हैं। लेकिन किसी भी पार्टी की सरकार के नेताओं के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है।
नरेन्द्र मोदी 19 फरवरी को सूरतगढ़ में अपने भाषण में पानी की कमी बतलाते हुए कम पानी प्रयोग का आह्वान कर गए। उन्होंने कहा कि अधिक पानी के इस्तेमाल से यहां की जमीनें बेकार बंजर हो गई है। उस दिन मंच पर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे व पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल भी मौजूद थे।
हुसैनीवाला हेड से यह पानी छोड़ा जा रहा है।
किसान संघर्ष समिति मांग करती रही है कि यह पानी पाकिस्तान को छोडऩे के बजाय गंगनहर,भाखड़ा नहर, इंदिरागांधी नहर में छोड़ दिया जाए।
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27~7~2015
up Date 4-1-2016

Sunday, January 3, 2016

राजस्थानी उपन्यास खिन्डता मोती का विमोचन


सूरतगढ़ 4 जनवरी- पांच दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी व साहित्यिक आयोजन की कड़ी में दूसरे दिन आकाशवाणी के वरिष्ठ उदघोषक बीरू राम चावरियां के राजस्थानी उपन्यास खिन्डता मोती का विमोचन कार्यक्रम हुआ।
 विमोचन समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार करणीदानसिंह राजपूत ने की एवं अध्यक्षीय उदबोधन में इस उपन्यास में ग्रामीण अंचल की सभ्यता व संस्कृति की बारीकियों के उल्लेख की सराहना की।
मुख्य अतिथी डाक्टर जितेन्द्र बोगिया ने कहा कि उहोंने पत्र वाचव को सुना है और इसमें बखान हुई विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए चाहेंगे कि इससे समाज में नई करवट आएगी।
इस कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि मनोजकुमार स्वामी व प्रहलादराय पारीक थे। उपन्यास पर पत्र वाचन मांगीलाल शर्मा ने किया। बलराम कुक्कडवाल ने कार्यक्रम  का  संचालन किया।
कार्यक्रम को सांस्कृतिक आयाम देते हुए हरीश स्वामी, इन्द्र सैन सिंह बैंस, रेणु स्वामी ने गीत प्रस्तुत किए।
मंचासिन अतिथियों के अलावा राजेश चावरियां व डूंगर राम गेधर ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए खिंडता मोती उपन्यास को राजस्थानी भाषा का सशक्त उपन्यास बताया।

Saturday, January 2, 2016

सूरतगढ़ में 5 दिवसीय साहित्य समारोह:2016


बोधि प्रकाशन की ओर से पुस्तक प्रदर्शनी:

सूरतगढ़,2 जनवरी 2016.
राजस्थानी साहित्य पे्रमियों की ओर से यहां 5 दिन का साहित्य समारोह का आयोजन किया गया। चौपड़ा धर्मशाला में आयोजित इस समारोह में पहले दिन पहले कार्यक्रम में पुस्तक प्रदर्शनी का उदघाटन हुआ। प्रदर्शनी का उदघाटन समाजिक चिंतक दिलातम प्रकाश जैन,रोटेट के संस्थापक डा.सुशील जेतली और जेलर प्रभुसिंह चौहान ने किया। इस कार्यक्रम का संयोजन महेन्द्रसिंह शेखावत ने किया। 



......
दूसरे सत्र में मनोजकुमार स्वामी की आत्म कथा राजस्थानी पोथी का 


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