Wednesday, October 15, 2014

नेता पारिवारों के सूरतगढ़ पालिका जमीन पर विशाल कब्जे बाग खेत रूप में:


सरकारी जमीन के लाखों के पेड़  इन कब्जों में घेर लिए गए
आरसीपी की विशाल डिग्गी वाला इलाका:

- ब्लास्ट की आवाज  29 सितम्बर 2014 की स्पेशल रिपोर्ट -हमारे पाठकों वास्ते साभार -
 






सूरतगढ़। आरसीपी की विशाल डिग्गी जो उजड़ गई तथा आरसीपी के ईंट भट्टों के बंद होने के बाद विशाल क्षेत्र में गहरे गड्ढे जो गंदे पानी के तालाब बन गए थे के किनारों पर जंगल रूप में हजारों पेड़ ऊग गए और उस विशाल जमीन पर भू माफिया नेताओं ने कब्जे किए और बेचते हुए करोड़ों रूपए कमाए। इस जमीन पर गंदे पानी का तालाब बन गया जिसे गंदगी मच्छरों व बीमारियों का हवाला देते हुए पालिका पर दबाव बना कर खाली रखवाया गया।
जब किनारे खाली होने लगे तब बड़े बड़े कब्जे कर आगे बेचे जाने लगे।
अभी भी इस विशाल क्षेत्र में बहुत बड़े बड़े खेत और बागनुमा कब्जे हैं। इन कब्जों में सैंकडों की संख्या में लाखों रूपए के विभिन्न किस्मों के पेड़ भी घेराबंदी में ले लिए गए जो सरकारी संपत्ति में ही आते हैं जिनकी कीमत हर कब्जें में लाखों रूपए बनती है।
वहां पर नगरपालिका ने प्लॉट बेचने की योजना में कुछ भूखंड नीलाम भी किए जो लाखों रूपए में बिके थे। वहां लाखों रूपए देकर रहने वाले परिवारों को इसका विरोध है कि कब्जेधारी भूमाफिया नेता लोगों के परिवार विशाल भूखंडों पर अवैध अतिक्रमण कर बाग और खेत का रूप दिए काबिज हैं और उनके बड़े बड़े घर अलग से कब्जों में स्थापित हैं। नगरपालिका राजनैतिक दलों के लोगों के परिवारों को जानते बूझते नहीं हटा रही।
भारतीय जनता पार्टी के कुछ वफादार कार्यकर्ताओं ने बताया कि ये कब्जे इतने विशाल हैं कि इनका पालिका के किसी कानून में नियमन तक नहीं हो सकता और वैसे भी कब्जेधारियों के घर अलग से बने हुए हैं। यह भी बताया गया कि पालिका की मिली भगती से कब्जों के पास से सड़कें निकाली गई हैं ताकि उन लोगों को अनैतिक लाभ दिया जा सके। 


एक सड़क का चित्र यहां दिया जा रहा जो रेखांकित 1 नम्बर से जोड़ी जानी चाहिए थी लेकिन उसे छोड़ दिया गया। सड़क को रेखांकित 2 नम्बर से आगे बढ़ाया गया लेकिन उसे भी बीच में ही छोड़ दिया गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने बताया कि बड़े नेता भू माफियाओं ने सड़क आगे नहीं बढऩे दी कि वहां आगे उनके कब्जे हैं जबकि सच्च यह है कि आगे खाली जगह है और वह कोई रोकना चाहता है।
वहां पर जिन लोगों के विशाल कब्जे हैं उनके नाम भी लेने में लोगों को हिचक नहीं है। उनमें भाजपा नेता परिवार और कांग्रेस के नेताओं के नाम हैं।
नगरपालिका व उच्च प्रशासन इन कब्जों की बाड़ व कच्ची दीवारों के रूप के घेरे हटवा कर इनको मुक्त करवाए तथा वन विभाग से पेड़ों का आंकलन करवा कर अपने कब्जे में ले।
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15-10-2014
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