Monday, November 14, 2016

नगरपालिका सूरतगढ़ में महा घोटाला: 500 करोड़ से ज्यादा की भूमी पर कब्जे करवा दिए:



नगरपालिका सूरतगढ़ में महा घोटाला: 500 करोड़ से ज्यादा की भूमी पर कब्जे करवा दिए:
मानकसर रोड,मुख्य सडक़ों के कब्जे तुड़वाए वहीं पर फिर से अतिक्रमण-
करोड़ों रूपए के काम बिना टेंडरों के करवाने के बाद टेंडर अखबारों में छपवाए:



31-12-2012.
update 14-11-2016.
नगरपालिका सूरतगढ़ में प्रतिदिन घोटाले चल रहे हैं और उससे लगता है कि राज नाम की कोई पावर नहीं है। यहां पर पालिका के अधिशाषी अधिकारी पृथ्वीराज जाखड़ के आने के बाद कुछ ही महीनों में नगरपालिका की मुख्य सडक़ों के पास की बेशकीमती जमीनों पर कब्जे करवा दिए गए जिनकी मार्केट वेल्यू 500 करोड़ रूपयों से भी अधिक है। नगरपालिका मानकसर रोड के अतिक्रमण जेसीबी से हटवा कर अखबारों में विज्ञप्तियां छपवाई थी कि पालिका की करोड़ों रूपए की जमीनें अतिक्रमियों से मुक्त करवाई गई हैं। अब उन्हीं जमीनों पर पिछले कुछ दिनों से खुले रूप से दुबारा अतिक्रमण करवा दिए गए हैं। अतिक्रमण करने वालों को शह होती है कि शनिवार रविवार के अवकाश उमें अतिक्रमण करें,ताकि शिकायत भी ना की जा सके। मानकसर रोड पर सामुदायिक भवन के पास में कुछ समय पहले ही अतिक्रमण तोड़े गए थे और अब 29 दिसम्बर को वहां पर दिन रात अतिक्रमण हो गए। पालिका प्रशासन की शह के बिना ये अतिक्रमण दुबारा हो ही नहीं सकते। इनके ताजा फोटो यहां दिए जा रहे हैं। कुछ जगह निर्माण किया जा रहा है तथा कुछ जगह तो ऊंची चारदीवारी बना दी गई है।
इसके अलावा नई आवासन मंडल का्लोनी के पश्चिम में जलदाय विभाग की टंकी के पास में बहुत बड़े क्षेत्र में पालिका ने अतिक्रमण हटवाए थे वहां पर भी अतिक्रमण दुबारा खुले आम हुए। उस समय के फोटो आदि समाचारों के साथ में छपे,मगर पालिका की मिली भगती के कारण वहां पर चार दिवारियां बनाई गई और कमरे भी बनवा दिए गए।
राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 के आसपास भी बहुत बड़े निर्माण चल रहे हैं। शहर में करीब सैंकड़ों नोहरे बन गए हैं और आवासन मंडल कॉलोनी में घरों के बाहर सडक़ों के साथ में खुली छोड़ी गई जमीनों पर गैर कानूनी कब्जे हो गए हैं। आवास से अधिक की भूमि पर ये अतिक्रमण हुए हैं तथा अभी हो रहे हैं।
नगरपालिका में करोड़ों के काम अभी दिसम्बर में करवा लिए गए हें जो बिना टैंडरों के अपने चहेते ठेकेदारों से करवाए गए हें जिनके टेंडर अखबारों में अभी छपे हैं तथा उनकी जमा करवाने की तिथियां तो अभी कुछ दिन बाद नए साल में जनवरी माह में आऐंगी। इतनी अधिक अंधेरगर्दी पहले नहीं हुई। ये निर्माण कई करोड़ के हैं। निर्माण में भी घटिया ईंटें और सडक़ों पर तारकोल कंक्रीट की परत के बजाय लगता है कि सडक़ों पर काला किया जा रहा है।
नगरपालिका के महा घोटोले में पार्षदों की भी मिली भगती है जिसके कारण लूट मची है। सभी ने यह सोचा है कि चुनावी साल शुरू हो चुका है इसके पांच सात महीनों में जितना बना सकें बनालो। इसलिए सभी चुप हैं। पार्षदों के दिमाग में है कि हम लोगो को ही पालिका बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पारित कर सच्चे झूठे भगतानों पर मोहर लगानी है। इसके बाद कोई जांच नहीं कांई आंच नहीं। लेकिन पालिका बोर्ड भी इस गलतफहमी में है,कि उसके पारित कर दिए जाने पर कोई जांच नहीं होगी या हम नहीं फंसेंगे? घोटोलों के बिलों को पारित करने वाले भी कानून के शिकंजे में आने पर सरकार सारा उगलवा भी लेती है।
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अधिशाषी अधिकारी पृथ्वीराज जाखड़ कानून से बड़े:
सरकार की सख्त रोक के बावजूद उदघाटन शिलान्यास पट्टों पर लिखाया खुद का नाम
सूरतगढ़। राज्य सरकार ने एक सख्त आदेश जारी कर रखा है कि उदघाटन और शिलान्यास पट्टों पर कोई अधिकारी अपना नाम नहीं लिखवाएगा और कोई अधिकारी ऐसा कार्य करेगा तो उसके विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी।
अधिशाषी अधिकारी पृथ्वीराज जाखड़ सरकार के इस आदेश को क्यों ठुकरा रहे हैं। ये बात तो वे ही जान सकते हैं लेकिन उनका यह कार्य उनको संकट में डालने वाला साबित हो सकता है।
नगरपालिका के नए कार्यालय भवन के शिलान्यास पट्ट पर उनका नाम अंकित है और इससे पूर्व सूरतगढ़ सिटी थाने के मुख्य द्वार पर सीसीटीवी कैमरों के उदघाटन दिवस पर लगाए गए पट्ट पर भी पृथ्वीराज जाखड़ का नाम अंकित है।
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