Tuesday, June 20, 2017

राजस्थानी साहित्य अकादमी रो अध्यक्ष पद: बींद बनण नै तयार । पण लिखे कोनी अर बोले कोनी

राजी राखां तो कदई अध्यक्षी मिल जावै। इण वास्तै सरकार री भी आलोचना कोनी करां।

कईयां रा नाम निकाळ दिया कै थारो नांव घोषित हो सकै है। बस। ईयां रै मुंडे पर तो पाटी बंधवा दी।

करणीदानसिंह राजपूत

आपां कैहवां हां के अमेरिकी व्हाईट हाऊस में भासा विभाग मांयनै राजस्थानी रे विशेषज्ञ रो पद स्थापित करयौ गयो है। नेपाल राजस्थानी नै अपनाई है। पण आपां कितरा आगै बढय़ा हां। आपणै सूं तो राजस्थानी री पत्रिका जागती जोत भी बखत सूं कोनी निकाळिजे। चुप हां। राजस्थानी साहित्य अकादमी सूं ईनाम रो कोई टुकड़ो मिल जावै। इण वास्तै बीं रा गळत सळत कामां पर  मूंडो कोनी खोलां, लिखण रो तो मादो ही कोनी। अकादमी नाराज हो जावै, ना जाणै कितो नुकसान हो जावै। आपणी पोथी पर पुरस्कार ना देवै। राजी राखां तो कदई अध्यक्षी मिल जावै। इण वास्तै सरकार री भी आलोचना कोनी करां। इतो डर। सूरवीर रणबांकुरे राजस्थान मांयनै। सच तो ओ भी है के, राजस्थानी साहित्यकार आपरी लिखी रचनावां भी अलमारियां मांय बंद कर राखी है। किते लोगां नै पढ़ण वास्ते देवे है। सवाल ओ है के ईयां राजस्थानी रो विकास करो हो जणा ही तो आ बेजा हालत हो री है।

    अकादमी रो अध्यक्ष सरकार मनोनीत करै कोनी अर राजस्थानी रा लिखारा जबान खोले कोनी कलम चलावै कोनी। जिका न बड़ा बड़ा रचनाकार माना हां बै तो आपरो मूंडो सिल राख्यो है अर कलम चलावै कोनी।

केन्द्र सरकार सूं तो मांग करां हां के संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामल करो। आपणी राजस्थान री सरकार अध्यक्ष मनोनीत करण रो काम भी नहीं कर सकै तो ओ धिक्कार किण नै जावै?

    राजस्थान रा मुख्यमंत्री कांई चावै है? अध्यक्ष मनोनीत करण वास्तै कोई गिफ्ट भेजां? अध्यक्ष बणानै रे वास्ते घणकरां री राळ टपकै है? बींद बनण नै अर घोड़ी चढ़ण नै कई तयार है पण चुप है। जिण मांय सरकारी नौकरी करण वाला रचनाकार भी है अर ब सरकार री ढ़ील माथै नीं बोलै। आपरा सरकारी लाभ ना खुस जावै। खुद भी कई जणा अध्यक्ष मनोनीत होवण वास्तै मुंह धो राख्यो है। कईयां रा नाम निकाळ दिया कै थारो नांव घोषित हो सकै है। बस। ईयां रै मुंडे पर तो पाटी बंधवा दी। राजस्थानी रै वास्तै के बोलेगा? राजस्थानी साहित्य अकादमी रो अध्यक्ष सरकारी कर्मचारी अधिकारी होणो नहीं चाहिजे। राजस्थानी रचनाकारां ने भी सलाह है के आपरी रचनावां रो फैलाव करै अर दूजां रा अखबार अर पत्रिकावां पोथियां आवै जणा आगे पढण वास्तै बांटे। संदूकां अलमारियां मांय बंद कर ताळा ना मारै।

एक बात और लिख दूं। आज अखिल भारतीय राजस्थानी भासा संघर्ष समिति रो हाल भी बेहाल हो रयो है। समिति रो काम काज ठप है।

देखां कद जागे ला म्हारा कलम रा धणी।


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पैली बार 7-10-2011.
अपडेट 30-3-2017.
अपडेट 20-6-2017.
 हाल तांई कीं बदलयोड़ो नीं लागै।

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