मंगलवार, 28 सितंबर 2021

पुराने जोहड़ पर बने निर्माणों को हटाए बिना जीर्णशीर्ण तालकालोनी को बनाएं नया तालाब

 

* करणीदानसिंह राजपूत *


सूरतगढ़ के प्राचीन जोहड़े पर बने मकान सड़क कालोनियों आदि को हटाकर प्राकृतिक रूप में स्थापित करने पर हजारों लोगों के सामने आने वाले संकट को दूर करने के लिए अरबों रूपयों के निर्माणों को ध्वस्त किए बिना पास ही में जोहड़ स्थानांतरित कर विशाल विकसित नया रूप दिया जा सकता है।

इंदिरा गांधी नहर ताल कॉलोनी करीब साठ साल पहले बनाई गई थी जो जीर्ण शीर्ण हो चुकी है।आधे आवास खाली पड़े हैं। पूरी कालोनी को रहने के काबिल नहीं माना जा सकता। 

कुछ क्वार्टरों में विभिन्न विभागों के सरकारी कर्मचारी रहते हैं,जिन्हें अन्यत्र स्थानांतरित किया जा सकता है। 

ताल कालोनी का यह स्थान बहुत विस्तृत और चौकोर है इसमें बने हुए पुराने मकानों को हटाया जा सकता है और बहुत बड़ी रकम सरकार जुटा सकती है। इतने विशाल स्थान को पांच से दस फिट गहराई तक खुदाई करके नया तालाब बनाया जा सकता है। अभी कालोनी के चारों तरफ डोले (बंधे) व सड़कें हैं। वहीं पर खुदाई की मिट्टी चारों तरफ डालकर उसी स्थान को बगीचों में विकसित किया जा सकता है। इस नए जोहड़े में पानी भरने के लिए कोई परेशानी भी नहीं होगी क्योंकि वर्षा कालीन स्थिति में घग्घर बाढ़ के पानी भरा जा सकता है। एक उतरी बंधा तो घग्घर पानी को छूता है।

यह भाखड़ा की पीबीएन माइनर के पास में है।यह नया रूप आमोद प्रमोद के लिए मेले मगरिया के लिए भी बहुत उपयुक्त जगह है। घग्घर बाढ़ के दिनों में यहां सैर सपाटे के लिए लोग आते रहते थे। यहां टैंकरों आदि में पानी भरने की व्यवस्था भी की जा सकती है।


यहां नया जोहड़ बनाने में सरकारी स्तर पर कोई परेशानी नहीं हो सकती। पुराने जोहड़ सूरत सागर में जो मकान बने हुए हैं सड़कें कॉलोनियां बनी हुई है उन्हें हटाए बिना यह काम किया जा सकता है। मतलब पुराने जोहड़ को यहां स्थानांतरित करना सरकार के लिए कोई बड़ी बात नहीं। बस सुझाने नेता लोग व संस्थाएं ताकत दबाव और प्रभाव का पूरे जोर से इस्तेमाल करें।

प्राचीन जोहड़ में जो खाली जगह है वह अभी बची हुई है और आसपास गरीबों अल्प आय वालों के घर हैं जिनके पट्टे लेने के लिए भी पैसे नहीं है। ऐसे लोग उजड़े तो दूसरा घर नहीं बना पाएंगे। कालोनियों में रहने वाले भी अपने जीवन भर की कमाई लगा चुके हैं और उनके पास भी अब नया निर्माण करने के लिए न धन है न ताकत है। ऐसे लोग हैं जो अपनी आधी उम्र पार कर चुके हैं। पचास से ऊपर सतर अस्सी साल। सभी की उम्मीदें हैं कि अब कोई परेशानी न हो। 

नगरपालिका द्वारा नए तालाब क्षेत्र को विकसित करके वहां होटलों आदि से बहुत बड़ी रकम जुटा कर वहीं पर लगाई जा सकती है।


 इस तरह से हजारों लोगों को परेशानी से मुक्त किया जा सकता है और बहुत बड़ी अरबों रुपए की संपत्ति को हटाने के बजाय हूबहू निर्मित हालत में बचाया जा सकता है। 

जहां तक सवाल है कानूनी रूलिंग का उसको समय और काल के हिसाब से कुछ परिवर्तित किया जा सकता है। 

अन्य स्थानों पर बहुत बड़ा स्थान उपलब्ध होने में कठिनाई रही होगी लेकिन सूरतगढ़ में यह बहुत बड़ा स्थान एकदम काम में लिया जा सकता है। यहां से जीर्ण शीर्ण मकानों को हटाने में बहुत अधिक समय नहीं लगेगा और यह कार्य सरकार और नगर पालिका प्रभावित होने वाले लोग आपस में मिलकर तय करें तो शहर में नया विशाल क्षेत्र आधुनिक तालाब विकसित हो सकता है। जिसमें पार्क और उसके पास में होटल आदि हो सकते हैं। तालाब में पानी में खेले जाने वाले खेल नौकायन आदि भी हो सकते हैं। 

शहर के समझदार इस पर विचार कर सकते हैं और इस स्थान का अवलोकन कर सकते हैं।


( यह प्रारंभिक विचार है और इसमें अन्य लोग भी अपनी सोच से और विकसित कर सकते हैं)

दि. 28 सितंबर 2021.

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करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार (राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

 सूरतगढ़।

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