अचानक दिल ब्लॉक की शिकायतें बढी. सूरतगढ़ की आबोहवा रोगीली होने का बड़ा कारण .

* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 14 नवंबर 2025.
खतरे में हो चुका है सूरततगढ़ शहर जहां आदमी को अचानक घबराहट होती है और चिकित्सालय जांच में मालुम पड़ता है कि हृदय की खून की नसें 98-99 परसेंट ब्लॉक है। शहर में या शहर के निवासी को बाहर अन्य शहर में अचानक इन हालातों की घटनाएं बहुत बढी है जिसे चिंता वाली हालत की संख्या माना जा सकता है। ऐसी घटनाएं होने पर
साधन सम्पन्न ही तुरंत चिकित्सालय तक पहुंचकर जांच करवा पाता है और स्थानीय स्तर पर या जयपुर जैसे बड़े शहर में स्टंट डलवा ईलाज आपरेशन करवा सकता है। आखिर क्या कारण है ऐसी घटनाएं बढने का जो अब हर व्यक्ति को सोचने को मजबूर कर रही है?
इसके साथ यह भी जान लेना चाहिए कि शहर में खांसी श्वांस रोग व मां बच्चों के रोग भी चिंताजनक हालत में फैल चुके हैं। खांसी और श्वांस रोग सर्द मौसम में अधिक होते हैं लेकिन दो तीन साल तक भी नौजवानों की भी खांसी न टूटे तो निश्चित है कि उक्त खांसी साधारण नहीं है। खांसी में गंभीरता है जिसकी डाक्टरी जांच जरूरी है और ऐसे रोगी से अन्य को बचना ही उचित होता है। अगर खांसते हुए से मिलना हो तो मास्क लगाकर मिलना ही उचित होता है। शहर में श्वांस रोग भी बहुत बढ गया है। श्वांस रोग पहले बुड्ढों को होता था लेकिन अब तो जवान भी घिरे हैं। * विभिन्न प्रकार के कैंसर रोगी भी सामान्य से अधिक हैं। कैंसर का ईलाज केवल बाहर ही होता है इसलिए इसके फैलाव का आसपास भी मालुम नहीं हो रहा। अन्य रोग भी बढे हैं तो फिर अधिक फैलाव का कारण क्या है?
* सूरतगढ़ की आबोहवा यानि जलवायु खराब होती हुई रोगीली हो चुकी है। आबोहवा खराब होने का बड़ा कारण है गंदगी जिसके प्रति लोग और संस्थाएं लापरवाह हैं जो ध्यान ही नहीं दे रहे कि शहर में हर प्रकार से साफ सफाई हर रोज हर स्थान पर आवश्यक है लेकिन सफाई की नहीं जाती। सड़कें नाले नालियां कचरे गंदगी से भरे हों और कालोनियों व मोहल्लों में अधूरे खंडहर मकानों खाली पड़े नोहरों में गंदगी से किटाणुओं के उत्पन्न पर सभी चुप और मृत हों तो नगरपालिका प्रशासन और सफाई कर्मचारियों के निकम्मेपन रुख से आबोहवा ही खराब होगी तथा इस स्तर पर रोगीली हो जाएगी जो सूरतगढ़ में हैं।
* लोगों और सामाजिक संस्थाओं से एक प्रश्न है कि ऐसी गंभीरता पर जागना चाहेंगे या सोते रहेंगे? यह प्रश्न राजनैतिक नेताओं नेतियों व राजनैतिक पार्टियों से नहीं है, क्योंकि स्थिति को ध्यान में रखते उत्तर मिलता है कि वे शहर के हर संकट के प्रति सो रहे हैं। अंत में यह भी सोचना चाहिए कि पेयजल कितना स्वच्छ है या कितना अशुद्ध है? पेट की हर बीमारी से जुड़ा है यह कारण।०0०