रविवार, 2 मई 2021

* कोरोना संकट में लाशों से लूटखसोट! कहां है इंसान और इंसानियत.लेख- करणीदानसिंह राजपूत.

 




* चिकित्सक और चिकित्सालय मुफ्त ईलाज शुरू करें। व्यापारी साधारण लाभ पर वस्तुएं बेचें.ऐसे ही और लोग चराचर जगत को बचाने को निकलें.अब देरी नहीं।बस शुरू करें।मिसाल बनें।*

कोरोना वायरस अपना रूप स्वरूप बदल रहा है और उसके लक्षण भी प्रगट नहीं होने से इलाज से बाहर है।  जिसको पकड़ता है उसको 10- 12 घंटे में ही परिणाम मिल जाता है। यह परिणाम बढ़ती मृत्यु दर और बढ़ती रोगियों की संख्या से चिंताजनक स्थिति सामने आ रही है।

आज सारा देश भयानक चिंता में और परेशानी में जी रहा है। इस विकट स्थिति में जब कोई क्षेत्र कोई शहर छोटा या बड़ा कोरोना वायरस के संक्रमण से वंचित नहीं है,तब आम व्यक्ति जन साधारण व्यक्ति आखिर क्या करें?
बाजारों को बंद करके देख लिया। रेलों को बसों को बंद करके देख लिया। पाबंदियां लगा कर देख लिया फिर भी कोरोना संक्रमण बढ़ना चिंता का विषय है। आखिर वैज्ञानिक युग में पैसे की मारामारी के युग में हमारी क्या स्थिति है? पैसा है, साधन है लेकिन बचाने का पक्का गारंटी वाला वाक्य कोई भी कहने की स्थिति में नहीं है।
प्राचीन आयुर्वेद के नुस्खे दवाइयां और आधुनिक एलोपैथिक होम्योपैथिक इलाज चल रहे हैं। सभी चाहते हैं कि संक्रमण न हो और जो संक्रमित हो गए हैं उन्हें किसी भी प्रकार से चिकित्सा सेवाएं देकर स्वस्थ किया जाए। जीवित रखा जाए।

सबसे बड़ा सवाल तो सरकार के बजाय आम जनता से है कि कोरोना के बचाव में मास्क लगाना और 6 फीट की दूरी रखना साधारण सा कार्य है जिसे करने में लोग दूर भाग रहे हैं। यही लापरवाही करने वाले दूसरे लोगों को खराब कर रहे है। ऐसी स्थिति में जब कोरोना के लक्षण प्रकट नहीं हो रहे लेकिन जांच रिपोर्ट में प्रयोगशाला की जांच में कोरोना संक्रमित पाया जाता है तो आश्चर्य होना चाहिए।
कोरोना का यह छलावा रूप कितना भयानक है। इससे बचाव कैसे किया जाए?  स्पष्ट रूप से मास्क और 6 फीट की दूरी अनिवार्य है। उसका पालन करना है और जानबूझकर केवल तफरी करने के लिए घर से बाहर निकलकर यत्र तत्र घूमना बंद करना है।
आज इस खतरनाक मोड़ पर कालाबाजारियों से भी उम्मीद करनी चाहिए कि वे देश के इस संकट में अपने आचरण को सुधारें,जानबूझकर वस्तुओं की कमी करना और फिर दुगुने तिगुने दाम पर बेचना खतरनाक कार्य है इसको बंद करें। हमारे देश में यह शर्मनाक कार्य करने में लोग मिनटों में पैदा हो जाते हैं। उनको सोचना चाहिए कि कोरोना संकट में वे दूसरे का गला काट कर अपना ऐशोआराम करना चाहते हैं। यदि उनको कोरोना हो गया तब क्या होगा?
यह काला बाजार की कमाई यहीं धरी रह जाएगी। यह संकट का समय है।

हमारे देश में एक और कमजोरी है कि चिकित्सक और चिकित्सालय खूब कमाते हैं लेकिन संकट में महामारी में बिना पैसे मुफ्त में इलाज करने की घोषणाएं करने के लिए, कार्य करने के लिए आगे नहीं आते। दवाइयों इंजेक्शनों की ब्लैक शुरू हो जाती है और उनके पीछे चिकित्सक और चिकित्सालय होते हैं। यह बहुत शर्मनाक स्थिति है।  ऐसे संकट की घड़ी में जब देश और आम जनता पीड़ित है। तब क्या बड़े और क्या छोटे।  चिकित्सालय अपनी पूरी फीस वसूल करते हैं दवाइयों के पैसे वसूल करते हैं। हर साधन का खर्च वसूल करते हैं।
क्या थोड़ी बहुत भी मानवीयता नहीं बची है कि चिकित्सक और चिकित्सालय इस संकट की घड़ी में मुफ्त में इलाज करने की घोषणा करें और अपने यहां इलाज करने का पूरा प्रबंध भी करें।
इस जनता से बहुत कमाया है बड़े बड़े हॉस्पिटल बनाए हैं तो क्या इस जनता के लिए अब मुफ्त में इलाज करके कुछ कर्जा चुकाने का भी वक्त आया है। कोरोना खत्म हुआ तो फिर से चिकित्सक और चिकित्सालय बहुत कुछ कमा लेंगे। यह सोच कर कार्य करना चाहिए।
आम दुकानदार आदि भी यह सोचें  कि इस संकट की घड़ी में 10,15, 20 परसेंट कमाई के बजाय अगर मामूली कमाई कर लेंगे कालाबाजारी नहीं करेंगे वस्तुओं का संकट पैदा नहीं करेंगे तो इस देश का बहुत बड़ा कल्याण हो जाएगा.
व्यापारिक संगठनों को अपने अपने शहर में बैठकें आयोजित करके और यह घोषणाएं करनी चाहिए कि वस्तुओं के दाम अत्यधिक लाभ में नहीं रखे जाकर बहुत कम लाभ की दरें घोषित की जाएगी ताकि इस संकट की घड़ी में आम आदमी को हर चीज सस्ते में सुलभ हो सके।
ऐसे ही अनेक साधन हैं जिनको हम जनता के लिए उपयोगी बना सकते हैं।
अब मैं बात करता हूं संकट की घड़ी जब मृत्यु हो जाती है तब एंबुलेंस नहीं देना,उसके मनमाने किराए वसूल करना, कल्याण भूमि में भी उचित व्यवस्था नहीं मिल पाना  तो हम आदमी कहलाने के लायक कहां बचे हैं।

जब हम हर जगह लूट और खसोट कर रहे हैं,देख रहे हैं, बोल नहीं रहे, रोकटोक नहीं कर रहे, तब अपने आप को आदमी कैसे कह सकते हैं।
हमारे एक तरफ सेवा कार्य चलें और पास में ही एक तरफ लूट चले यह सोचनीय स्थिति है।

* संकट की घड़ी में अपना इंसान और इंसानियत को जगाएं ताकि आदमी कहलाने के लायक इंसान कहलाने के लायक बने रहें।
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दि. 2 मई 2021.
सामयिक लेख.
करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार ( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ ( राजस्थान )
94143 81356.
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* अखबारों व सोशल मीडिया में लगा सकते हैं।

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