शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

लॉक डाउन तोड़ने वालों का साथ दिया तो आपके चिपट सकता है कोरोना- चुनौती लेख -करणीदानसिंह राजपूत.


भगवान कुदरत नियम तोड़कर बेमौसम बरखा तूफान औले गिरा दे तो उसे कोसते हैं लेकिन यदि कोई नेता छोटू भैया नियम तोड़ देता है तो उससे पूछने में भी डरते हैं।
ईश्वर कुदरत सबसे बड़े को कोसने में डर नहीं लगता तो फिर मामूली से और कुछ काल के लिए लिए के लिए पद पर आए हुए से डर क्यों लगता है? सच कुछ और है।
वाह रे इंसान तू इतना स्वार्थी हो गया! भगवान को तो कोसता है मगर मामूली से आदमी से डर जाता है।
यह डर नहीं यह तेरा स्वार्थ है।
नेता या कोई अधिकारी नियम तोड़ता है और उसका असर किसी और पर होता है तो महसूस नहीं होता क्योंकि
उसके नजदीक चिपके हुए रहते हैं। लेकिन नियम तोड़ने का नुकसान कभी तुम्हारे तक आ गया तब क्या होगा ?
जंगल की आग का भरोसा नहीं होता कि दूर लगी हुई है और कब खुद तक पहुंच जाए।
उससे भी भयानक है कोरोना वायरस। नेताओं को नियम तोड़ने की छूट दी बोले नहीं। लॉक डाउन में नेता ने भीड़ की बोले नहीं।समारोह किया आप बोले नहीं।
यदि उस भीड़ से उपजा,नेता के चिपटा कोरोना तुम्हारे तक आ गया तुम्हारे चिपट गया तो क्या होगा?
जरा सोचो! नेताओं को और किसी भीअधिकारी को नियम तोड़ने की छूट नहीं है। वे लोग जो नियम तोड़ने वाले को बचाते हैं,जांच को दबाते हैं। वे किसी का भला नहीं कर रहे। असल में वे एक ऐसे खतरे को पैदा कर रहे हैं जो दिखाई नहीं देता।
उन्हें लगता है कि कोरोना वायरस दूर है। हमारे क्यों लगेगा?हमारे क्यों चिपटेगा? लेकिन कानून तोड़ने वाले नेताओं और अधिकारियों के साथ में जब मेल मिलाप होगा बातचीत होगी तो वहां से कोरोना आपके भी चिपट सकता है।
इस बात को याद रखना कि जो नियम तोड़ने वालों का साथ देते हैं। ईश्वर उनका भला कभी नहीं करता। उनका समय भी बदल सकता है। उनका संकट काल आ सकता है  जो अपने स्वार्थों के कारण नियम तोड़ने वालों का साथ देते हैं।
*पत्रकार,
राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत*
सूरतगढ़. 94143 81356.*
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