सोमवार, 29 अप्रैल 2019

मतदान दिवस! मोदी प्रकाट्य दिवस!! कविता-करणीदानसिंह राजपूत.


मुझे लग रहा है।
जब जब अवतार हुए
उस समय प्रकृति बदली
वातावरण बदला,
लोगों ने माना कि
कुछ अलौकिक होने वाला है।
हुआ था ऐसा ही,
लोगों की सोच
सच्च सिद्ध हुई।
धरा पर महान आत्माएं प्रगट हुई,
जिन्हें लोगों ने अवतार माना।
अब फिर यह बदलाव का नजारा
और बदलाव का वातावरण
कुछ न कुछ होने वाला है।
कोई विशिष्ट प्रगट होने वाला है।
मैं ही नहीं लोगों से भरे
नगर डगर मान रहे हैं
देश ही नहीं विश्व में भी
यह हलचल समझी जा रही है,
भारत में मोदी शक्ति का विस्तार
अब किसी के रोके रुकने वाला नहीं है,
मोदी अवतार नहीं,
मोदी तो आदर्श पुरुष है।
मतदान दिवस
लोगों को नजर आए मोदी दिवस,
मतदान दिवस जब हर नगर डगर में
बन जाए मोदी दिवस,
जब अधि संख्य विचार में गूँज उठे
मोदी ही मोदी,
आगे मोदी पीछे मोदी,
बीच में मोदी और दूर दूर तक मोदी।
बस यही है मोदी प्रकट्य दिवस।
मोदी अवतार नहीं है
आदर्श पुरुष है।


-- 



करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़
94143 81356.
*********





रविवार, 28 अप्रैल 2019

जॉनसन एंड जॉनसन बेबी शैम्पू एवं पाउडर की बिक्री पर रोक



राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सभी राज्यों से बिक्री रोकने और बाजार से उत्पाद हटाने के लिए कहा

27अप्रैल 2019.

नई दिल्ली. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने बहुराष्ट्रीय कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी शैम्पू और टेलकम पाउडर में हानिकारक तत्व होने के कारण सभी राज्यों से इनकी बिक्री रोकने एवं संबंधित उत्पादों को बाजार से हटाने को कहा है। 

अमेरिका में पूर्व में इस कंपनी के उत्पाद पर रोक लग चुकी है। भारत में पहली बार प्रतिबंध लगाया गया है। 

सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को जारी किए गए निर्देश  सूत्रों ने शनिवार को बताया कि आयोग ने जॉनसन एंड जॉनसन बेबी टेलकम पाउडर एवं शैम्पू में एस्बेस्टस के तत्व पाये जाने के खबरों के बाद सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है। पत्र में अफसरों को अपने-अपने क्षेत्रों से इन उत्पादों की बिक्री रोकने के निर्देश दिये हैं। आयोग ने बाजार में उपलब्ध जॉनसन एंड जॉनसन बेबी टेलकम पाउडर और शैम्पू को भी दुकानों से हटाने को कहा है। 

 राजस्थान में कैंसरकारी तत्व मिलने पर हुई कार्रवाई   खबरों के अनुसार राजस्थान में एक बाजार से जॉनसन एंड जॉनसन बेबी शैम्पू एवं टेलकम पाउडर में एस्बेस्टस और कैंसरकारी तत्व मिले हैं।  आयोग ने आंध्रप्रदेश, राजस्थान, झारखंड, मध्यप्रदेश और असम के मुख्य सचिवों से इन उत्पादों के नमूने बाजार से लेने और कार्रवाई रिपोर्ट भेजने को भी कहा है।


 विदेशों में लग चुका है करोड़ों रुपए का जुर्माना  

 पहले भी जॉनसन एंड जॉनसन के कई प्रोडक्ट्स पर बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक कैंसरकारी तत्वों के होने की बात सामने आई हैं। विदेशो में इसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई भी हुई हैं और कंपनी को करोड़ों का जुर्माना भी देना पड़ा हैं। । इसका खुलासा रूटर्स की इन्वेस्टीगेशन से हुआ जिसे करने की वजह थी 9000 से अधिक पीड़ितों द्वारा किये गए जॉनसन कंपनी पर केस है। इन लोगों ने इलज़ाम लगाया है की इसमें  एस्बेस्टस होता है जिससे ओवेरियन एवम दूसरी तरह के कैंसर को बढ़ावा मिलता है। कोर्ट ने पीड़ित परिवारों एवं महिलाओं को नुक्सान की भरपाई के लिए करीब 4.7 अरब डॉलर दिलवाए जिन लोगों ने पाउडर में एस्बेस्टस होने एवं कैंसर का आरोप लगाया था।


 एस्बेस्टस ?

एस्बेस्टस एक बहुत ही खतरनाक अवयव है। अगर हम इसे स्वांस के साथ अपने अन्दर लेते है तो यह कई तरह की खतरनाक बिमारी जैसे फेफड़ों की घटक बिमारी अस्बेस्तोसिस, फेफड़े का कैंसर तथा ओवेरियन कैंसर को जन्म दे सकता है।

बेबी पाउडर से सिर्फ शिशु को ही नहीं बल्कि उसकी माँ को भी ख़तरा होता है क्योंकि उसके संपर्क में दोनों होते हैं। तो यह सिर्फ शिशु को ही नहीं बल्कि उसकी माँ को भी बीमारियाँ दे सकता है।



शनिवार, 27 अप्रैल 2019

सूरतगढ़ के हॉस्टलों व पीजी हॉस्टलों में सबकुछ गैर कानूनी: * लड़के लड़कियों की सुरक्षा पर प्रशासन व पुलिस गंभीर*

^^ संचालकों को कानून पालन की पहली सख्त चेतावनी भरी समझाईस ^^

** विशेष रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत **
सूरतगढ़ में कोचिंग और शिक्षण के लिए आए हुए लड़के लड़कियों के अभिभावकों ने ध्यान नहीं दिया तो उनके बच्चे कब किस दुर्घटना,अनहोनी या अनैतिक,गैर कानूनी कार्यों नशा व आपराधिक गतिविधियों की लिप्तता में जा सकते हैं या फुसलाए जा सकते हैं। अधिकांश लड़के लड़कियां नियम विरुद्ध संचालित हो रहे हॉस्टलों व पीजी हॉस्टलों में किरायों में रहते हैं जहां देर रात तक बाहर रहने, कहीं आने जाने पर न रोकटोक है न कोई व्यवस्था है और न कोई समय,न दुर्घटना अनहोनी में बचाव के साधन हैं। सूरतगढ़ में पिछले कुछ सालों में अनेक घटनाएं हुई जिनकी चर्चाएं बनती और खत्म होती रही व  पुलिस रिकॉर्ड तक पहुंच नहीं पाई जिससे हालात विस्फोटक स्थिति की ओर बढते रहे हैं। कुछ मामले पुलिस तक पहुंचे।
उपखंड मजिस्ट्रेट रामावतार कुमावत ने सूरतगढ़ में आने के बाद कानून व्यवस्था व शहर व ग्रामीण क्षेत्र की विभिन्न गतिविधियों पर ध्यान दिया तब शिक्षा के हब प्रचारित हो रहे शहर के हॉस्टलों व पीजी हॉस्टलों की अनियमितताएं सामने आई।
उपखंड मजिस्ट्रेट ने पड़ताल शुरू की तो विस्फोटक स्थिति सामने आई है कि  सभी हॉस्टलों व पीजी हॉस्टलों का संचालन बिना मंजूरी के हो रहा है तथा अभिभावक बेखबर हैं।
प्रशासन और पुलिस ने शिक्षा के लिए आए लड़के लड़कियों के शैक्षणिक जीवन को सुरक्षित रखने की ओर ध्यान देते हुए 25 अप्रैल 2019 को बैठक आयोजित कर हॉस्टलों व पीजी हॉस्टलों के संचालकों को पहली सख्त  समझाईस की है कि सभी नियमों का पालन करें और सब कुछ रिकॉर्ड पर हो।
उपखण्ड मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में नगरपालिका सभागार में दिनांक 25.04.2019 को शहर में संचालित हॉस्टल/निजी पुस्तकालय के सम्बन्ध में बैठक आयोजित हुई।
उपखण्ड मजिस्ट्रेट सूरतगढ़ द्वारा सर्वप्रथम उपस्थित हुए सभी अधिकारियों/हॉस्टल संचालकों का स्वागत सहित परिचय प्राप्त किया गया।
उपखण्ड मजिस्ट्रेट ने संचालकों को बताया कि कोई भी व्यवस्था कानून सम्मत तरीके से संचालित होती है। व्यवस्था बनाये रखने में सभी का सहयोग अपेक्षित है। व्यवस्था में नियम, कायदे, एक्ट तय होते है, प्रशासन को पालना करानी होती है। नियम एवं कायदे, कानून के सिस्टम से ही व्यवस्था चलती है। जो काम जिस ऑथोरिटी ( अधिकृत विभाग) को करना था उसके द्वारा नहीं किया जा रहा है तो इसके लिये वही ऑथोरिटी जिम्मेवार है। हम सभी सिस्टम (व्यवस्था) में है हमारा थीम (ध्येय) एक होता है कि हम सभी मिलकर कानून व्यवस्था बनाएं।
हॉस्टल संचालकों द्वारा हॉस्टल में रह रहे कुल बच्चों की संख्या , हॉस्टल का नाम, स्वयं मालिक या वार्डन का नाम, कब से चल रहा है तथा इसके अनुरूप कुल सीटों के बारे में जानकारी व परिचय दिया गया। हॉस्टल संचालकों से पूछा गया कि हॉस्टल में सीटें किस ऑथोरिटी से स्वीकृत कराई गई है तो कोई जवाब नहीं दिया गया। यह स्थिति उजागर हुई कि सरकारी नियमों के बजाय संचालकों के अपने ही नियम हैं जिनका आधार केवल कमाई करना है।
1.बैठक में बताया गया कि हॉस्टल वाणिज्यिक गतिविधि में आता है तथा हॉस्टल पंजीकृत होना आवश्यक है तथा जिस भवन में है वह भवन भी आवासीय की बजाय वाणिज्यिक में परिवर्तित कराया जाना आवश्यक है। अधिशाषी अधिकारी नगरपालिका को निर्देश दिये गये कि शहर में संचालित हॉस्टलों का वार्डवाईज सर्वे कराया जाकर रिपोर्ट तैयार की जावे कि वार्ड में किस स्थान पर हॉस्टल है व उसमें कमरों की संख्या तथा उसमें बच्चे (लड़के/लड़कियों) की संख्या तथा कब से रह रहे हैं  तथा वार्डन व मालिक कौन है इसकी जानकारी ली जाकर रिपोर्ट तैयार करवायी जावे।
2 लाईब्रेरी संचालकों से जानकारी ली गई कि उक्त लाईब्रेरी किस नियमों के तहत तथा किसकी अनुमति से संचालित की जा रही है लिखित में अवगत करावें। 

3.पीजी के सम्बन्ध में बताया गया कि पीजी (पेईग गेस्ट) वह होता है जो कुछ दिवसों  (सीमित समयावधि) हेतु किसी मकान मालिक के यहां परिवार के सदस्य के रूप में रहता है तथा अपने पर हुए खर्चें का भुगतान करके सीमित समयावधि के बाद चला जाता है। परन्तु शहर में चल रहे पीजी उसकी परिभाषा में नहीं आते है। यह हॉस्टल की श्रेणी में आते है जो वाणिज्यिक गतिविधि है।




4. यदि मकान मालिक द्वारा अपने घर के कमरे किसी को किराये पर दे रखे हैं तो वह गतिविधि किराया अधिनियम के तहत आती है। जिसकी अपील सुनने का क्षेत्राधिकार उपखण्ड मजिस्ट्रेट को है। मकान मालिक द्वारा किरायेदार का डाटा पुलिस को उपलब्ध कराना होगा, उसके बाद पुलिस सत्यापन होगा ताकि किसी प्रकार की आपराधिक गतिविधि में संलिप्त होने की स्थिति में कानूनी कार्यवाही की जा सके।
     5.उपखण्ड मजिस्ट्रेट द्वारा बताया गया कि जब किसी भूमि पर कोई गतिविधि वाणिज्यिक रूप में की जाती है तो उस भूमि का वाणिज्यिक में संपरिवर्तन होना आवश्यक है फिर वाणिज्यिक पंजीयन होता है। इससे होने वाली आय राजकोष में नियमानुसार जमा होती है।              
     6.हॉस्टल संचालकों को बताया गया कि स्थानीय प्रशासन को सामान्य कानून व्यवस्था की स्थिति को भी बनाये रखना होता है। शहर में अत्यधिक संख्या में हॉस्टल होने के कारण तथा एक ही हॉस्टल में अत्याधिक भीड़ की वजह से हॉस्टल में रहने वाले बच्चों को नैसंर्गिक जीवन  जीने की आवश्कताओं में कमी आती हैं। डिप्रेशन( अवसाद)जैसी नकारात्मक प्रभाव बच्चों में आना शुरू हो जाते है। तथा भीड़ वाले एरिया में होने से सही वेंटिलेशन नहीं मिल पाता है तथा पानी बिजली आपूर्ती की समस्या रहती है। इसका उदाहरण वर्तमान में कोटा शहर है।
     7.लाईब्रेरी संचालकों से पूछा गया कि लाईब्रेरी किन नियमों के तहत संचालित की जा रही है तो वे इसका कोई उत्तर ही नहीं दे सके।
8. हॉस्टल संचालक किराये तक सीमित रहते है तथा अभिभावक किराया अदा करके मुक्त हो जाते है। हॉस्टल में रहने वाले बच्चे वाहन तेज गति से चलाते हैं  या बिना परिवहन ड्राईविंग लाईसेंस के व्हीकल या टू व्हीलर चलाते है तो यह समस्त जिम्मेवारी पुलिस प्रशासन तथा स्थानीय निकाय पर आती है।
9. सभी हॉस्टल/लाईब्रेरी संचालक निर्धारित नियम तथा कायदों से कार्य करें। मकान किराये पर चलाने के राज्य सरकार का किराया अधिनियम लागू होता है। नगरपालिका ऐसे मकानों का सर्वे कर नियमों के तहत वांछित कार्यवाही करें।
      10.उपखण्ड मजिस्ट्रेट द्वारा सभी हॉस्टल संचालकों से कानूनी रूप से हॉस्टल संचालन हेतु सुझाव प्राप्त किये गये। हॉस्टल संचालकों ने बताया कि हमें हॉस्टल संचालन के नियम तथा प्रक्रिया की पूर्ण जानकारी नहीं है। जितने नियमों की जानकारी है उनकी पालना की जा रही है व कार्यवाही की जा रही है। इसके अलावा प्रशासन , पुलिस एवं नगरपालिका द्वारा जो नियम बताये जायेंगे उसी अनुसार हॉस्टल का संचालन किया जावेगा।
11. उपखण्ड मजिस्ट्रेट द्वारा संचालकों को बताया गया कि पूर्व में जो चल रहा है वह गलत है या नहीं, यह तय होना चाहिये। हॉस्टल में रहने वाले बच्चे की किसी कारणवश  दुर्घटना या मिसहैपनिंग( अनहोनी घटना) होने पर पूरी जांच होगी। इसलिए संचालकों को रहने वाले बच्चों की पूरी जानकारी रखनी चाहिये। किसी भवन में हॉस्टल संचालित किया जा रहा है तो नियमानुसार  नगरपालिका वांछित कार्यवाही करेगी। हॉस्टल के सम्बन्ध में नियम कायदे होते हैं यथा हॉस्टल के उपर से तार नहीं जाने चाहिये, हाईवे आदि से कितनी दूरी पर होने चाहिए, अस्पताल पास में होना चाहिये इत्यादि। राज्य सरकार सभी प्रकार के नियम बनाकर पालन करवाती है। हॉस्टल संचालक नियमों का पालन करें।
12.यदि हॉस्टल में कोई आपराधिक प्रवृति का व्यक्ति रहना पाया जाता है तो पुलिस कार्यवाही होती है।
13.संचालकों को हॉस्टल में मेडिकल फैसिलिटी व अग्नि शमन की व्यवस्था भी रखनी होती है। यहां जो इंस्टीटयूट संचालित है, वे लिगल फोरम में है या नहीं है इसकी सूची आवश्यक है।
14. अधिशाषी अधिकारी नगरपालिका नियमों को लागू कराया जाना सूनिश्चित करें। यदि हॉस्टल में रहने वाले किसी बच्चे को कोई परेशान करना पाया गया तो उपखण्ड मजिस्ट्रेट या पुलिस उप अधीक्षक द्वारा औचक निरीक्षण किया जा सकता है। प्रशासन सकारात्मक तरीके से काम करना चाहता है,लेकिन नियमों का पालन जरूरी है।
    
15.पुलिस उप अधीक्षक वृत सूरतगढ़ ने बताया कि हॉस्टल वाणिज्यिक गतिविधि में आता है तथा जिस भवन में संचालित हो रहा है वह भवन भी व्यवसायिक में परिवर्तन होना चाहिये तथा बिजली, पानी बिल का भुगतान भी वाणिज्यिक की दर से होता है। समस्त हॉस्टल संचालकों द्वारा एक रजिस्टर का संधारण किया जावे जिसमें रहने वाले बच्चे के पहचान का दस्तावेज, मोबाईल नम्बर, फोटो रजिस्टर में चस्पा होनी चाहिये तथा अलग से प्रत्येक की एक फाईल बनाई जावे। स्थानीय गारजियन, माता पिता का मोबाईल नम्बर भी लिखा जाना चाहिये। हॉस्टल में सीसीटीवी कैमरे आवश्यक रूप से होने चाहिये। संचालकों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिये कि जो बच्चा रह रहा है वह डिप्रेशन में तो नहीं है। यदि वह किसी कारणवश  डिप्रेशन में होने से सुसाइड करने तक की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसा कई स्थानों पर पूर्व में हो चुका है। कुछ समय पूर्व हॉस्टल जांच करवाये गये थे जिनमें अनियमिततायें पाई गई थी। पंजाब का गेंगस्टर सूरतगढ़ में रहना पाया गया था। हॉस्टल में बच्चों के आने जाने का समय निर्धारित होना चाहिये। लाईब्रेरी का भी खुलने व बन्द होने का समय निर्धारित होना चाहिये। हॉस्टल का एक गेट होगा जो बंद रहेगा। लाईब्रेरी में जिसका रजिस्ट्रेशन होगा वही रहेगा अन्य साथी नहीं रह सकते, इसलिए  रिकार्ड अपडेट संधारित रखा जाना आवश्यक है,जिससे संचालक स्वयं भी परेशानी से बचे रहेंगे।
16.उपखण्ड मजिस्ट्रेट के ध्यान में लाया गया है कि पूरी पूरी रात लाईब्रेरी केे नाम पर कथित लाईब्रेरियां खुली रहती है तथा पढ़ने वाले लड़के, लड़कियां बिना सुरक्षा उनमें रहते हैं। घर से दूर पढ़ने वाले बच्चों की सेहत एवं अनैतिक कोई घटना ना घटे इसके लिए यह अति आवश्यक है कि इनका संचालन  राजकीय (जिला) पुस्तकालय नियमों के तहत संचालन हो व अवैध व अनैतिक गतिविधि पर कानूनी कार्यवाही हो।
17.अधिशाषी अधिकारी नगरपालिका ने समस्त हॉस्टल संचालकों को बताया कि सूरतगढ़ में काफी संख्या में हॉस्टल संचालित हो रहे है। अनेक हॉस्टल व कोचिंग सेंटर अब हाल ही में खुले हैं  जिनकी किसी को जानकारी नहीं है। कोई अपराध होने के बाद ही हॉस्टल संचालित होने का पता चलता है। शहर में हॉस्टल की संख्या बहुत है। किसी भवन में हॉस्टल चलाने पर आवासीय से व्यावसायिक में परिवर्तन करवाना होगा। यदि हॉस्टल नियमों के प्रतिकूल चलना पाया जाता है तथा किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो सीज किया जा सकता है। हॉस्टल चलने की दिनांक से जुर्माना वसूला जावेगा। हर वार्ड में सर्वे करवाया जावेगा तथा सर्वे के बाद अलग से रजिस्टर संधारण होगा। हॉस्टल भवन को वाणिज्यिक में परिवर्तन करवाया जावे तथा पंजीकरण भी करवायें। पालिका को आय होने पर पालिका द्वारा सुविधाओं में भी विस्तार किया जावेगा। यदि कोई हॉस्टल नियम कायदों के विपरीत संचालित होना पाया जावेगा तो नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जावेगी।
18. उपखण्ड मजिस्ट्रेट द्वारा अधिशाषी अधिकारी नगरपालिका को निर्देश दिये गये कि जिन हॉस्टल संचालकों को मीटिंग में आने हेतु सुचित किया गया लेकिन सूचना के  बावजूद बैठक में उपस्थित नहीं हुए,उनको नोटिस जारी किया जावे।
19.निर्देश दिए गए कि हॉस्टलों के अन्दर व बाहर नियमित सफाई व्यवस्था हो। देखने में आया है कि हॉस्टल संचालकों द्वारा कचरा डालने की कोई डस्टबीन आदि की कोई व्यवस्था नहीं  है। खुले में कचरा व सब्जियों आदि के वेस्ट फेंकने से गंदगी व बीमारियां फैलती है व आवारा पशु ऐसे कचरे के कारण गली-गली घूमते हैं ।
20.हॉस्टलों व लाईब्रेरी में आगजनी व सुरक्षा से निपटने की पूर्ण माकूल व्यवस्था का जिम्मा संचालकों पर हैं। कोई दुर्घटना न हो इस बाबत् अग्निशमन यंत्र लगाए जावें।
21. पड़ोसियों को कोई अव्यवस्था नहीं हो तथा उनके सामान्य जीवन में कोई व्यवधान हॉस्टल संचालकों व लाईब्रेरी संचालकों की गतिविधियों से या उसमें रहने वालों के कारण ना हो,यह भी  सुनिश्चित किया जावे। हॉस्टलों में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था हो।
22.अनाधिकृत रूप से देर रात्रि में (ओड ऑवर्स ) में लड़के, लड़कियां बाहर जायेंगें तो अनैतिक व आपराधिक गतिविधियां होने से इन्कार नहीं किया जा सकता। अतः प्रत्येक हॉस्टल संचालक व प्रत्येक लाईब्रेरी संचालक इसका समय तय करके अवगत करायेंगे, अन्यथा आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन द्वारा समय तय कर दिया जावेगा।
23.अधिशाषी अधिकारी नगरपालिका को निर्देशित किया गया कि शहर में चल रहे कोचिंग संस्थानों/शिक्षण संस्थानों की भी उपरोक्त नियमों के तहत परीक्षण व सर्वे करावें व नियमानुसार कार्यवाही कराने के निर्देश दिए गए।
24. तहसीलदार सूरतगढ़ को निर्देशिदत किया गया कि राजस्व नियमों के तहत समस्त तहसील क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियों पर नियमानुसार कार्यवाही करें व प्रगति से अवगत् करावें।
25.अधिशाषी अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि अभी तैयार सूची में शहर में 62 हॉस्टल व 10 लाईब्रेरियां संचालित की जा रही है,लेकिन बैठक में 42  हॉस्टल/पीजी संचालक व 5 लाईब्रेरी संचालक  उपस्थित हुए हैं।
अधिशाषी अधिकारी ने बताया कि शहर के अन्दर लगभग 200 हॉस्टल/पीजी व लगभग 20 लाईब्रेरी संचालित हो रही है। सही आंकड़ा वार्ड वाईज सर्वे के बाद ही आ पायेगा। प्रत्येक वार्ड वाईज गहन सर्वे शीघ्र ही उपखण्ड मजिस्ट्रेट महोदय के समक्ष पेश कर दिया जायेगा। इसके अलावा मिटिंग में दिये गए आदेशों (ऊपर वर्णित) की नियमों के तहत पालनाएं भी पेश कर दी जायेगी।
26.सभी को कानून व्यवस्था बनाये रखने व सूरतगढ़ शहर को खूबसूरत बनाने की शपथ दिलायी गयी।
बैठक में  पुलिस उप अधीक्षक श्री विद्या प्रकाश, तहसीलदार प्रदीप कुमार, सिटी पुलिस थाने के एएसआई श्री धर्मेन्द्रसिंह, अधिशाषी अधिकारी नगरपालिका श्री लालचंद सांखला, व हॉस्टल मालिक/प्रतिनिधि/ वार्डन तथा लाईब्रेरी संचालक उपस्थित हुए।

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शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019

चीन ने अब अरुणाचल प्रदेश और POK को बताया भारत का हिस्सा


Apr 26, 2019.ण
भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश पर हमेशा अपना दावा जताने वाले चीन ने आखिरकार इसे भारत का हिस्सा मान ही लिया है।
चीन ने अपने नक्शे में पाक अधिकृत कश्मीर को और अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा दिखा दिया है।
चीन की राजधानी बीजिंग में 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI)' के दूसरे समिट में चीन ने नक्शा प्रदर्शित किया  है। इस नक्शे में भारत को भी BRI का हिस्सा दिखाया गया है।
बता दें कि भारत ने इस समिट का बहिष्कार किया है। इससे पहले 2017 में BRI के पहले समिट में भी भारत शामिल नहीं हुआ था। BRI समिट में 37 देश शामिल हो रहे हैं।
इसका मकसद राजमार्गों, रेल लाइनों, बंदरगाहों और सी-लेन के नेटवर्क के माध्यम से एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ने का लक्ष्य है। तीन दिन तक चलने वाले इस समिट की शुरुआत गुरुवार 25-4-2019 को हुई। ये नक्शा चीन की कॉमर्स मिनिस्ट्री ने पेश किया, जिसमें जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा बताया गया है।
दरअसल जम्मू और कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत में शामिल करना चीन का ये कदम हैरान कर देने वाला है। दरअसल हाल ही में चीन ने अरुणाचल प्रदेश और ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा ना दिखाने को लेकर देश में छपे 30,000 विश्व मानचित्रों को नष्ट कर दिया है। चीन अकसर भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश पर दक्षिण तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता रहा है। वह  अपने रुख को उजागर करने के लिए आए दिन अरुणाचल प्रदेश में भारतीय नेताओं के आने पर आपत्ति जताता रहता है।
भारत का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न हिस्सा है और भारतीय नेता देश के अन्य हिस्सों की तरह समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश जाते रहते हैं। दोनों देशों ने 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े सीमा विवाद को हल करने के लिए अभी 21 चरणों की वार्ता की है। चीन उससे अलग हुए ताइवान पर भी अपना दावा जताता है।

( आन लाइन पंजाब केसरी से साभार)

गुरुवार, 25 अप्रैल 2019

सूरतगढ़ थर्मल के कार्यप्रभारी XEN सतीष बतरा की दुर्घटना में मृत्यु




सूरतगढ़ 25 अप्रैल 2019.

सूरतगढ़ तापीय विद्युत परियोजना से रावतसर को जाने वाली  सड़क पर कारों की आमने सामने की टक्कर में सूरतगढ़ थर्मल के अधिशासी अभियंता की मौत हो गई। 

 गुरुवार सुबह करीब आठ बजे सूरतगढ़ तापीय विद्युत परियोजना के अधिशासी अभियंता सतीश कुमार बतरा कार से रावतसर जा रहे थे। एक सामने से आ रही कार और बतरा की कार की टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में सतीष बतरा की मृत्यु हो गई व दूसरी कार में सवार दो व्यक्ति घायल हो गए। यह दुर्घटना

थर्मल से मेगा हाइवे को जोड़ने वाली सड़क पर धन्नासर कैंची के नजदीक हुई। 

बतरा की पत्नी रावतसर के राजकीय विद्यालय में अध्यापिका है। अधिशाषी अभियंता गुरुवार को साप्ताहिक अवकाश के कारण रावतसर जा रहे थे। दुर्घटना की सूचना मिलने पर ग्रामीणों ने घायलों को रावतसर के राजकीय चिकित्सालय पहुंचाया जहां चिकित्सको ने बतरा को मृत घोषित कर दिया। बतरा श्रीकरणपुर के रहनेवाले थे।


वही बतरा की कार से भिडऩे वाली कार में सवार दोनों घायलों को गंभीर चोटों के कारण अन्यत्र रेफर करने की सूचना है। 

घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में थर्मल के अधिकारी और कर्मचारी रावतसर के चिकित्सालय पहुंचे। बतरा 

25-6-2016 से थर्मल में as a xen ड्यूटी कर रहे थे।

मंगलवार, 23 अप्रैल 2019

चौकीदार की लाठी से डर और ललकार से भी डर


 

** करणीदानसिंह राजपूत **


चौकीदार तो हर युग में रहा है। जहां चौकसी की आवश्यकता हुई या जहां गड़बड़ी हुई, वहां पर चौकीदार की मौजूदगी मिली है।पुरातन ग्रंथ और इतिहास साक्षी है।

 सतयुग त्रेता द्वापर से लेकर कलयुग तक चौकीदार रहे हैं।

आजतक चौकीदार है।फिर चौकीदार नाम से घृणा क्यों हो रही है?

इसका कारण है।

मोदी ने यह बोल दिया,

मोदी चौकीदार बन गया।

चौकीदार कोई भी बन जाता और कुछ भी करता।

बस,मोदी नहीं बनना चाहिए था।

मोदी चौकीदार बन गया,यहां तक भी चल जाता,

मगर यह तो चौकीदारी करने लग गया।

अब,मरना यह है कि इस चौकीदार की लाठी से तो डर लगता ही है। इसकी ललकार से भी डर लगता है।**

सोमवार, 22 अप्रैल 2019

मोदी के साथ वह कौन?


** करणीदानसिंह राजपूत **


- मोदी की खास उपलब्धि?

- सबको खड़ा कर रखा है।

- गुजरात का सीएम बना तो बनता ही चला। सीएम की कुर्सी अपनी ईच्छा तक अपने पास रखी। अपनी ईच्छा से छोड़ी।

-ओह! तो अब पीएम की कुर्सी पर अपनी ईच्छा तक बैठेगा।

-समझ में आया मगर देर से।

-फिर भी कब तक बैठेगा?

-जब तक मोदी की ईच्छा।

-ऐसा कैसे हो सकता है? भगवान चाहेगा फिर कैसे रहेगा?

-वह साथ है।

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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019

सूरतगढ़ रेलवे स्टेशन पर बिजली से चलेंगी गाड़ियां:पटरियों के विद्युतीकरण में तेजी

 ^^ करणी दान सिंह राजपूत ^^

सूरतगढ़ 19 अप्रैल 2019.

 मॉडल स्टेशन सूरतगढ़ में रेल पटरियों पर विद्युत उपकरण लगाने का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। कार्य पूर्ण होने के बाद यहां रेलगाड़ियां का आवागमन विद्युत से शुरू हो जाएगा। 

 सूरतगढ़ से बठिंडा तक रेल लाइन का विद्युतीकरण कार्य लगभग पूर्ण है।  बठिंडा से हनुमानगढ़ तक पूर्व में इंजन चला कर जांच की जा चुकी है।  हनुमानगढ़ से रंग महल स्टेशन तक की जांच कुछ दिनों पहले हो चुकी है।  वर्तमान में रेलवे स्टेशन यार्ड में और प्लेटफार्म के पास तेज गति से कार्य हो रहा है। रेल पटरी का विद्युतीकरण थर्मल पावर स्टेशन तक होगा ताकि कोयले के रेक वहां पर आसानी से पहुंच सकें। 

 रेल पटरी के विद्युतीकरण के बाद बठिंडा सूरतगढ़ के बीच रेलों की गति में और तेजी आएगी।

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बुधवार, 17 अप्रैल 2019

सूरतगढ़:अवैध खनन व ढुलाई पर सख्ती:अनुमति स्थल के अलावा खनन अवैध:जिप्सम का होता है अवैध खनन.



^^ जिप्सम के अवैध खनन ढुलाई में माफिया और भ्रष्ट अधिकारी मालामाल होते रहे, अब लगेगी रोक ^^
** करणीदानसिंह राजपूत **
 सूरतगढ़। उपखण्ड अधिकारी रामावतार  कुमावत  की अध्यक्षता में तहसील क्षेत्र सूरतगढ़ में अवैध खनन व निर्गमन पर रोकथाम हेतु 16 अप्रैल 2019 को एक बैठक का आयोजन किया गया। 
उपखण्ड अधिकारी ने तहसीलदार सूरतगढ़ को निर्देशित किया कि वे उपखण्ड क्षेत्र सूरतगढ़ में जिन स्थानों पर खान विभाग द्वारा खनन करने का अनुमति पत्र दे रखा है, उसकी सूची प्रस्तुत करें व कनिष्ठ अभिंयता खान विभाग को निर्देशित किया कि उनके विभाग द्वारा उपखण्ड क्षेत्र सूरतगढ़ में कितने खनिज परमिट जारी किये गये हैं  उनकी सम्पूर्ण सूची दो दिवस में प्रस्तुत करें। 
कुमावत ने कहा कि खान विभाग द्वारा जारी खनन परमिट में शर्ते दी हुई होती है, लेकिन लीजधारक खनन परमिट में दी गई शर्तो की पालना नहीं करता है। खनिज परमिट अनुसार खनिज की जाने वाली भूमि पर सम्पूर्ण विवरण सहित बोर्ड व तकनीकी व्यक्ति होना आवश्यक है व अनुमति पत्रधारित भूमि पर सीमांकन आवश्यक है। लेकिन लीजधारक उक्त शर्तो की पालना नही करता है। उन्होंने ऐसे लीजधारक के विरूद्ध नियमानुसार सख्त कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये। 
उन्होंने कहा कि लीजधारक खान विभाग द्वारा जारी परमिट से ज्यादा क्षेत्र में खनन करता है तो वह अवैध खनन की श्रेणी में आता है इसलिये संबंधित लीजधारक के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाए है व अवैध खनन करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं  जावे।

  परिवहन विभाग व पुलिस विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया ओवरलोडैड वाहनों पर यातायात नियमों से कठोर कार्यवाही की जावे, अवैध खनन के परिवहन में लिप्त वाहनों के परमिट निलम्बन/निरस्त करने की कार्यवाही नियमानुसार की जाने के साथ ही वाहन चालक का लाईसेन्स भी जब्त करने की कार्यवाही की जावे। तहसीलदार सूरतगढ़ को निर्देशित किया कि वे अपने अधीनस्थ गिरदावर व पटवारियों को निर्देशित कर रिपोर्ट प्राप्त करें कि कहां-कहां अवैध खनन किया जा रहा है तथा खातेदारी भूमि पर अवैध खनन होने पर एवं खान विभाग की अथवा अन्यथा रिपोर्ट प्राप्त होने पर राजस्व अधिकारी नियमों का अनुसरण कर खातेदारी निरस्त करने की कार्यवाही करें। उन्होने कहा कि राजस्व/पुलिस/खान/वन/परिवहन विभाग निचले स्तर पर सामंजस्य रखेगें, निर्दिष्ट स्थान के अतिरिक्त पास में कही से कोई अवैध खनन की सूचना किसी स्त्रोत द्वारा प्राप्त होती है तो उसे नजरन्दाज न कर कार्यवही करेगें। पंचायतीराज विभाग के प्रतिनिधी को निर्देश दिये कि वे अपने अधिकार क्षेत्र की भूमि को सुरक्षित करें यदि कहीं अवैध माईनिंग हो रही है तो पंचायतीराज अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्यवाही करें। 
श्री कुमावत ने कहा कि खातेदार कृषक द्वारा अपनी खातेदारी भूमि में खनन करना भी अवैध है, ऐसा करने पर उसके विरूद्ध राजस्थान काश्तकारी अधिनियम के तहत नियमानुसार खातेदारी निरस्त करने की कार्यवाही की जावेगी। यदि कोई व्यक्ति अवैध खनन करते पाया गया तो उसके विरूद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जावेगी। 
      बैठक में श्री रामेश्वरलाल बिश्नोई, उप निरीक्षक सूरतगढ़, श्री ओमप्रकाश रेंजर वन विभाग, श्री सतवीर सिंह, उपनिरीक्षक, परिवहन विभाग, श्री एम0एस0 परिहार, वरिष्ठ प्रबन्धक, एफसीआई, श्री बजरंगसिंह, कनिष्ठ अभियंता, खान विभाग, श्री पवनकुमार, काूननगो तहसील कार्यालय, श्री कुलदीप सिंह रीडर उपखण्ड कार्यालय, श्री रोशनलाल, थाना राजियासर, श्री राजेन्द्रकुमार थाना सूरतगढ़ सदर व श्री तेजाराम, पंचायत प्रसार अधिकारी, सूरतगढ़ उपस्थित रहे।





रविवार, 14 अप्रैल 2019

भादू कटले के निर्माण की स्वीकृति में गड़बड़ी- पूरा पढें

** करणीदानसिंह राजपूत **

^^ आरोप-सरकारी नियमों में निर्माण स्वीकृति मिलना असंभव था,मगर पूर्व के एक  पालिका अधिकारी ने तथ्यों की अनदेखी कर नियमों को ताक पर रख,स्वीकृति जारी करदी- दस्तावेजों की नकलें लेने वालों के सामने ऐसी स्थिति स्पष्ट हुई है।बात का निचोड़ यह है कि कटले का निर्माण द्रुत गति से चल रहा है और ऐसे में कौन बिल्ली के गले में घंटी बांधे। इस निर्माण को लेकर चर्चाएं हैं और राजनीतिक बड़े लोग एकदम चुप हैं और शहर उनकी ओर देख रहा है। राजनीतिक नेताओं में जिन्होंने सीधे संघर्ष करने से मना किया था,उनके समाचार ब्लास्ट की आवाज में बहुत पहले छप चुके।


**कानूनी रूप में किसी ने भी कटले के निर्माण को रोकने के लिये पालिका में कोई आवेदन नहीं दिया और संघर्ष करने को सामने नहीं आया। **

सूरतगढ।  मुख्य बाजार में बीकानेर रोड से सटी जमीन पर तेज गति से बनाए जा रहे भादू शॉपिंग कांपलेक्स की नगर पालिका द्वारा जारी की गई निर्माण स्वीकृति में गड़बड़ी है। जिस भूखंड पर निर्माण चल रहा है, उस पर दस्तावेज की अनदेखी की जाने की चर्चा है। नगरपालिका की ओर से मौजूद स्थिति दस्तावेजों व आवेदन पर निर्माण की स्वीकृति गलत दी गई की चर्चा अब होने लगी है जब निर्माण धरती के ऊपर नजर आने लगा है। 

संपूर्ण भूखंड की मालिकाना अधिकारिता में जो आवेदन किया गया, उसमें निर्माण की स्वीकृति दी नहीं जा सकती लेकिन गलत दे दी। आरोप है कि आवेदन कीअसलियत और मौजूद भूखंड के तथ्यों में अंतर है, मेल नहीं है,जिसके कारण निर्माण की स्वीकृति दी नहीं जा सकती थी।

 दस्तावेजों में मौजूद तथ्यों की वजह से नियमों की पालना की जाती तो स्वीकृति जारी नहीं होती लेकिन नगर पालिका की ओर से अनदेखी कर निर्माण करने की स्वीकृति मालिकों को दी गई। भूखंड पर निर्माण स्वीकृति के बाद निर्माण कार्य तेज गति से चलता हुआ भूमिगत कार्य के बाद जब भूमि से ऊपर शुरू हुआ तो नजरों में आने लगा। 

 इस निर्माण कार्य को लेकर चर्चाएं तो आम हैं मगर गलत स्वीकृति और अनेक तथ्यों को नजर बंद रखते हुए स्वीकृति जारी कर दी गई। वर्तमान अधिशासी अधिकारी से पहले यह स्वीकृति जारी की गई कटले की भूमि और सड़कों गलियों के बारे में भी गड़बड़ी के आरोप हैं। राजनीतिक दृष्टि से शहर में चर्चाओं के बावजूद भी कोई राजनीतिक नेता इस मामले पर मुंह खोलना नहीं चाहता। लोग दस्तावेज प्राप्त करते हैं और पढ़ कर के रह जाते हैं। समाचार भी छपते हैं पढ़े जाते हैं मगर कोई भी व्यक्ति इस प्रकरण में पक्की कार्यवाही करने को आगे नहीं आता। अभी भी यही स्थिति बनी हुई है चर्चाएं गर्म है और चर्चाओं से कुछ होने वाला नहीं है।

 कोई भी बड़ा आदमी या राजनीति पार्टी का नेता और कार्यकर्ता दूसरे बड़े आदमी या राजनीति परिवार के विरुद्ध संघर्ष करने के बजाय अनजान बने रहना अच्छा समझता है। लेकिन राजनीतिक नेताओं के अलावा भी लोग रहते हैं जो नजरों में नहीं आकर भी काम करते हैं। ऐसा अनेक स्थानों पर हो चुका है।***

( ब्लास्ट की आवाज 15-4-2019 में)






शुक्रवार, 12 अप्रैल 2019

गहलोत जोधपुर से अपने पुत्र वैभव को भी जीताने की स्थिति में नहीं हैं।

 

* प्रधानमंत्री मोदी पर अभद्र टिप्पणी करने से बाज आएं सीएम गहलोत -प्रो. सारस्वत।*

भाजपा पर हमले के लिए तिवाड़ी का सहारा ले रहे हैं गहलोत। 

370 पर सचिन पायलट स्थिति स्पष्ट करें-जैन।

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अजमेर जिला देहात भाजपा के अध्यक्ष प्रो. बीपी सारस्वत ने प्रदेश के सीएम अशोक गहलोत पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अभद्र टिप्पणियां करने का आरोप लगाया है। प्रो. सारस्वत ने कहा कि गहलोत संवैधानिक पद पर बैठे हैं, उन्हें देश के प्रधानमंत्री पर गैर मर्यादित टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए। प्रो. सारस्वत ने कहा कि 11 अप्रैल को जयपुर की चुनावी सभा में भी गहलोत ने प्रधानमंत्री के लिए झूठा जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है। गहलोत कभी प्रधानमंत्री मोदी को नाटकबाज कहते हैं तो कभी चोर। भाषणों में मोदी साम्प्रदायिक और राहुल गांधी को धर्मनिरपेक्ष बता रहे हैं। राजस्थान में कांग्रेस का शासन होने के बाद भी मोदी की वजह से भय का वातावरण बताया जा रहा है। गहलोत कह रहे हैं कि इस बार मोदी जीत गया तो फिर देश में चुनाव नहीं होगा। प्रो. सारस्वत ने कहा कि प्रधानमंत्री पर अमर्यादित टिप्पणियां करने से पहले गहलोत को अपने गिरेबां में झांक लेना चाहिए। 2013 में जब गहलोत प्रदेश के सीएम थे, तब कांग्रेस को 200 में से मात्र 21 सीटों पर ही जीत मिली। यदि गहलोत का शासन अच्छा होता तो कांग्रेस की इतनी दुगर्ति नहीं होती। गत विधानसभा के चुनाव में भले ही कांग्रेस की सरकार बन गई है, लेकिन कांग्रेस का भाजपा से मात्र 1 लाख 86 हजार वोट अधिक मिले हैं। गहलोत जो इतना बढ़ चढ़ कर बोल रहे हैं उसकी हवा लोकसभा चुनाव में निकल जाएगी। गहलोत जोधपुर से अपने पुत्र वैभव को भी जीताने की स्थिति में  नहीं हैं। गहलोत एक तरफ कहते हैं कि उन्हें राजनीति में चालीस वर्षों का अनुभव है, लेकिन गहलोत बचकानी बात करने से बाज नहीं आते। गहलोत जिन शब्दों का उपयोग कर रहे हैं वो प्रधानमंत्री पद की गरिमा गिरा रहे हैं। गहलोत को भाजपा पर हमला करने के लिए अब घनश्याम तिवाड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। लम्बे अर्से तक भाजपा में रहे तिवाड़ी को कांग्रेस में शामिल कर गहलोत अपनी बड़ी सफलता समझ रहे हैं। गहलोत कह रहे हैं कि यदि भाजपा में लोकतंत्र होता तो संघनिष्ठ तिवाड़ी कांग्रेस में शामिल नहीं होते। सारस्वत ने कहा कि तिवाड़ी व्यक्तिगत कारणों से कांग्रेस में शामिल हुए हैं। तिवाड़ी के कांगे्रस में शामिल होने से पूरी भाजपा खराब नहीं हो जाती। गहलोत प्रधानमंत्री मोदी के मुकाबले में राहुल गांधी की प्रशंसा कर रहे हैं, जबकि पूरा देश जानता है कि राहुल गांधी के परिवार के सभी सदस्य जमानत पर हैं। सोनिया गांधी से लेकर दामाद रॉबर्ट वाड्रा तक पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। वहीं पीएम मोदी और उनके परिवार के किसी भी सदस्य पर कोई आरोप नहीं हैं। राफेल विमान सौदे में भी सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के निर्णय में कोई बदलाव नहीं किया है। पुनर्विचार भी केन्द्र सरकार की याचिका पर किया जा रहा है।  गहलोत स्वयं प्रदेश के सीएम हैं, लेकिन मोदी की वजह से भय और डर का वातावरण बता रहे हैं। प्रो. सारस्वत ने कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के मन में भय होना ही चाहिए। गहलोत का यह कहना है कि मोदी दोबारा से पीएम बन गए तो देश में कभी भी चुनाव नहीं होंगे, यह लोगों को डराने वाली बात है। पूरा प्रदेश जानता है कि कांग्रेस के तीन माह के शासन में विकास ठप हो गया है। गहलोत राजनीति दुर्भावना से सरकार चला रहे हैं, इसलिए केन्द्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना का लाभ प्रदेश के गरीब लोगों को नहीं दिलवा रहे। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में प्रदेश के पात्र किसानों को सूची भी केन्द्र को नहीं भेजी हैं। वायदे के मुताबिक सरकारी बैंकों का किसानों का ऋण अभी तक भी माफ नहीं किया है। 

पायलट जवाब दें:

अजमेर नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष रहे और भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्मेश जैन ने कश्मीर के मुद्दे पर अनुच्छेद 370 पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सचिन पायलट से स्थिति स्पष्ट करने का कहा है। पायलट को यह बताना चाहिए कि वे अनुच्छेद 370 को लागू रखने के पक्ष में हैं या विरोध में। भाजपा ने जब अपने संकल्प पत्र से अनुच्छेद 370 को कश्मीर से हटाने की बात कही तो कश्मीर के पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला ने राष्ट्र विरोधी बयान दिया। फारुख का कहना रहा कि यदि अनुच्छेद 370 को हटाया गया तो कश्मीर भारत से अलग हो जाएगा। चूंकि सचिन पायलट फारुख अब्दुल्ला के दामाद हैं, इसलिए उन्हें राजनीतिक तौर पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। राजस्थान में पहले चरण का मतदान 29 अप्रैल को है उम्मीद है कि पायलट मतदान से पहले अपनी स्थिति स्पष्ट कर देंगे। सब जानते हैं कि 370 की वजह से कश्मीर में आतंकवाद पनपा है। प्रदेश के मतदाताओं को भी पता चलना चाहिए कि सत्तारुढ़ पार्टी के अध्यक्ष की 370 पर क्या राय है। 

एस.पी.मित्तल) (11-04-19)




बुधवार, 10 अप्रैल 2019

सूरतगढ़ एसडीएम कार्यालय के आगे खड़ी गैरकानूनी सफेद बालवाहिनियां



सूरतगढ़ में परिवहन विभाग और यातायात पुलिस दोनों के सामने प्रतिदिन गैरकानूनी बालवाहिनियां गुजरती है। 

बाल वाहिनियोंके लिए सख्त नियम हैं, लेकिन स्कूल संचालन समितियां वाले पालन नहीं करते और संबंधित विभाग भी किसी न किसी कारण से मेहरबान बने छूट दिए हुए हैं। 

कभी भी कोई हादसा हुआ तो सूरतगढ़ का परिवहन विभाग और यातायात पुलिस सीधे रुप से जिम्मेदार होंगे।


 उपखंड कार्यालय के आगे सड़क के किनारे पेड़ों की छाया में अनेक बाल वाहिनी खड़ी रहती हैंं । कुछ का रंग नियमानुसार पीला है मगर कुछ सफेद और लाल भी है,जिन पर बालवाहिनी लिखा है। कुछ पर स्कूलों के नाम भी लिखे हैं। यह स्थान भी पार्किंग के लिए नहीं है।

स्कूल वाले बच्चों के आने जाने के लिए भारी भरकम फीस वसूल करते हैं। लेकिन बाल वाहिनियों के लिए निर्धारित नियमों का पालन नहीं करते।

अभिभावक भी अपने बच्चों के जीवन की सुरक्षा बाबत घोर लापरवाह हैं। गैरकानूनी वाहनों में बच्चों को स्कूलों में भेजने से रोकना चाहिए।

मासूम बच्चों को तो मालूम नहीं है कि वे गैर कानूनी बालवाहिनियों में आते जाते हैं,लेकिन संबंधित विभागों के अधिकारियों कर्म देखना है कि विभाग नियमों का पालन करते हुए गैर कानूनी बालवाहिनियां सीज करेगा?



पत्नियां उत्पीड़न का मुकदमा पीहर से भी दर्ज करा सकती हैं -सर्वोच्च न्यायालय


नई दिल्ली।10 अप्रैल 2019.


सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि पति अथवा रिश्तेदारों की क्रूरता के कारण ससुराल से निकाली गईं पीड़ित पत्नियां अपने आश्रय स्थल या अपने माता-पिता के घर से आईपीसी की धारा 498 ए के तहत मुकदमा दर्ज करा सकती हैं। 


मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन जजों की वृह्द पीठ ने यह फैसला सात वर्ष बाद दिया है। तीन जजों की पीठ को यह रेफरेंस दो जजों की पीठ ने 2012 में भेजा था। इसमें सवाल यह था कि धारा 498 ए के तहत दहेज प्रताड़ना का केस वैवाहिक घर के क्षेत्राधिकार के बाहर पंजीकृत और जांच किया जा सकता है या नहीं?


दो जजों की पीठ ने इस सवाल को महत्वपूर्ण मानते हुए बड़ी पीठ को रेफर किया था। यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील में सुप्रीम कोर्ट आया था। हाइकोर्ट ने कहा था कि धारा 498 ए के तहत क्रूरता एक जारी रहने वाला अपराध नहीं है। इसलिए इससे संबंधित मामले को वैवाहिक घर के क्षेत्राधिकार के बाहर के दर्ज और जांच नहीं किया जा सकता। यह कहकर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा अभियुक्तों के खिलाफ  मुकदमे के संज्ञान को रद्द कर दिया था।


इस मामले में पीठ ने कहा कि उत्पीड़न की शिकार हुई महिलाएं बेशक वैवाहिक घर छोड़ देती हैं, लेकिन भावनात्मक तनाव, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का दंश उनको पिता के घर में भी कचोटता रहता है। हमारी सुविचारिक राय है कि धारा 498 ए लाने का उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ उसके पत्नी और रिश्तेदारों की हिंसा को रोकने का है, जिससे आत्महत्याएं और गंभीर चोटों के मामले भी समाने आते हैं। यदि उसे पति के घर में ही केस दायर करने तक सीमित कर दिया जाएगा, तो इस संशोधन (1983) का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। न्यायिक प्रयास हमेशा यही होना चाहिए कि कानूनों का प्रभाव स्पष्ट और सतत बना रहे। इसलिए हमारी राय है कि निष्कासित पत्नी अपने पिता के घर से भी आईपीसी की धारा 498 ए के तहत केस दायर कर सकती है और सीआरपीसी की धारा 179 के तहत कोर्ट इस पर संज्ञान ले सकता है।

रविवार, 7 अप्रैल 2019

मैं भी चौकीदार नारे से कांग्रेस में डर की लहर:सामयिक- करणीदानसिंह राजपूत

***** करणीदानसिंह राजपूत *

मैं भी चौकीदार नारा देश का नारा बनता जा रहा है। इस नारे से कांग्रेस पार्टी और  अन्य दल बुरी तरह से भयभीत होकर बौखला रहे हैं। 

 देश में मोदी लहर हो या ना हो मगर कांग्रेस व अन्य दलों में  डर की लहर दौड़ रही है।

कांग्रेस में डर कुछ ज्यादा ही घात कर रहा है जिससे नेता विचलित हो रहे हैं। मैं भी चौकीदार नारा नहीं एक तूफान बन गया है जिसकी गति दिन प्रतिदिन तेज हो रही है। यह नारा मोदी से अधिक ताकतवर बन गया है।

कांग्रेस को इस नारे की कोई काट नजर नहीं आ रही जिसके कारण नेताओं के  विचलित होने के प्रमाण भाषणों में आ रहे हैं। 

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तो अपने भाषणों में बार बार कहा है कि मोदी को सरकार बनाने के लिए वोट दिया गया तो आने वाले 50 सालों तक चुनाव होने की कोई संभावना नहीं है। यह कांग्रेस का भय है जो झलक रहा है।इससे बड़ा डर और कोई नहीं हो सकता। कांग्रेस की सोच है कि इस बयान से मतदाता यानि जनता प्रभावित होगी और अपना निर्णय बदल कर मोदी के पक्ष में वोट नहीं करेगी।

जनता कांग्रेस के डर को जान चुकी है और उसे कमजोर मान रही है। आखिर कांग्रेस को यह डर क्यों हुआ है कि वह जनता को भी डराने लगी है कि इसबार 2019 में मोदी आ गया तो फिर आने वाले 50 सालों में मोदी पक्ष की सरकार को गिरा पाना संभव नहीं हो पाएगा। इसका दूसरा मतलब भी निकल रहा है कि कांग्रेस इतनी अधिक कमजोर हो जाएगी कि फिर 50 साल तक उठ नहीं पाएगी।


डरी हुई कांग्रेस के पक्ष में कोई भी वोट क्यों डालना चाहेगा? डरपोक कमजोर को कभी कोई साथ नहीं देता। राजनीति में तो बिल्कुल ही नहीं। मोदी को तानाशाही वाला बता कर  कांग्रेस पार्टी झूठ बोल कर जनता को गुमराह कर रही है। तानाशाही से प्रजातंत्र को खूंटी पर टांगने वाली इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए आपातकाल लगाकर देश के संविधान को दरकिनार कर दिया था, मूल अधिकार खत्म कर दिए गए, अखबारों पर सेंसर लगा दिया गया और विपक्ष के नेताओं को रात्रि में जेलों में ठूंस दिया गया और यह प्रक्रिया कई महीनों तक चलती रही थी। कांग्रेस की ओर से लगाया गया यह आपातकाल 26 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक रहा था।  देशभर में लाखों लोगों को जेलों में ठूंस दिया गया व क्रूर अत्याचार किए गए थे।  कांग्रेस पार्टी खुद मानती है कि आपातकाल लगाना सही नहीं था। पूरे विश्व में उसकी आलोचना हुई थी। प्रजातंत्र पर लगाया हुआ काला धब्बा इतिहास में लिखा गया है। कांग्रेस पार्टी इस आपातकाल वाले अत्याचार के इतिहास को भुलाना चाहती है और मोदी पर आरोप लगाती है कि इस बार सत्ता में आए तो भविष्य में चुनाव भी नहीं हो पाएंगे। यह भय कांग्रेस पार्टी जनता में पैदा करना चाहती है ताकि मोदी सरकार पुनः न आ पाए लेकिन सच यह है कि कांग्रेस पार्टी और उसका हर नेता नरेंद्र मोदी की सरकार से भयभीत है। कांग्रेस व अन्य दल 'मैं भी चौकीदार' नारे से डरे हुए हैं। यह नारा देश का नारा बन चुका है।

 (लेखक भी आपातकाल में सवा चार माह जेल में बंद रहा। अखबार भारतजन पर सेंसर लगाया गया और जब्त कर  लिया गया था।)


शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

उन्मुक्त नारी का यौवन प्रदर्शन!

अनोखा पेड़,

अजब डालियां

कर रही है

नारी का उन्मुक्त यौवन प्रदर्शन!

( चित्र- व्हाट्स अप)

शब्द- करणीदानसिंह राजपूत.

गुरुवार, 4 अप्रैल 2019

घनश्याम शर्मा भाविप के राष्ट्रीय मंत्री बनाए गए- सूरतगढ़ निवासी हैं-कई पदों पर रह चुके हैं.

^^ करणीदानसिंह राजपूत ^^

भारत विकास परिषद्  के केंद्रीय कार्यालय नई दिल्ली मे 30-31 मार्च 2019 को राष्ट्रीय कार्यकरणी की बैठक संपन हुई जिसमें  घनश्याम शर्मा को राष्ट्रीय मन्त्री संस्कार का दायित्त्व दिया गया।

इससे पूर्व शर्मा  परिषद् के प्रांतीय सचिव, जोन अध्यक्ष एवं मध्य रीजन के राष्ट्रीय मन्त्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। शर्मा परिषद के अलावा एपेक्स के अध्यक्ष सेवा भारती के जिला सेवा प्रमुख भी रह चुके हैं।

शर्मा के दिल्ली से सूरतगढ पहुंचने पर भारत विकास परिषद् के सदस्यों द्वारा शर्मा का स्वागत किया गया एवं सूरतगढ का गौरव बढ़ाने के लिए धन्यवाद दिया।

 इसके अलावा केंद्रीय कार्यकारिणी को भी बधाई दी गई। 

शर्मा के स्थानीय होने के कारण परिषद् के सदस्यों को उनका मार्गदर्शन मिलेगा जिससे परिषद के सदस्य अधिक उत्साह से सामाजिक सरोकार के कार्य कर सकेंगे जिसका समाज के जरुरत मन्द लोग लाभ ले सकेंगे।


बुधवार, 3 अप्रैल 2019

राहुल बोस्टन हवाईअड्डे पर 1.60 लाख डॉलर के साथ पकड़े गए थे , चार देशों का रखते हैं पासपोर्ट: सुब्रमण्यम स्वामी


*सोनिया गांधी के शैक्षिक योग्यता पर सवाल उठाते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि, 'सोनियां गांधी अपने एफिडेविट में लिखा था कि कैंब्रिज से इंग्लिश की डिग्री ली है। लेकिन उन्होंने इसे अब हटा दिया है, क्योंकि मैं इसके खिलाफ कोर्ट चला गया था- सुब्रमण्यम स्वामी*

भाजपा नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने एक बार फिर सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर प्रहार किया है। हाल ही में न्यूज नेशन टीवी चैनल के एक कार्यक्रम में स्वामी ने हमला करते हुए कहा कि सिर्फ पांचवीं पास हैं। साल 1963-68 तक सोनिया गांधी इंग्लैंड में काम कर रही थीं। 16 वर्ष की उम्र में वो काम करने भारत चलीं आईं। सोनिया गांधी के शैक्षिक योग्यता पर सवाल उठाते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि, ‘सोनियां गांधी अपने एफिडेविट में लिखा है कि कैंब्रिज से इंग्लिश की डिग्री ली है। लेकिन उन्होंने इसे अब हटा दिया है, क्योंकि मैं इसके खिलाफ कोर्ट चला गया था।’

स्वामी ने आगे कहा कि इसका खुलासा तब हुआ जब मैं कैंब्रिज में लेक्चर देने गया और वहां के लोगों से पूछा कि कैसी वो स्टूडेंट थी, उन्होंने बताया कि वह कभी यहां की स्टूडेंट थी ही नहीं। जब चोरी पकड़ी गई तो सोनिया ने लोकसभा को दिए एक्सप्लेनेशन में इसे प्रिटिंग की गलती बता दी।

 सोनिया पर लगाए उनके आरोपों पर सरकार द्वारा सहयोग नहीं करने की बात भी स्वामी ने कही। कहा कि, ‘सरकार ने सोनिया को लेकर कुछ मदद नहीं की। सोनिया, चिदंबरम को बेल तक ला दिया है। उनपर कार्रवाई का काम तो प्रधानमंत्री ही कर सकते हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर संघ, विश्वहिंदू परिषद तक का मुझे सहयोग मिलता है सिर्फ सरकार की तरफ से मदद नहीं मिलती।’

भाजपा सांसद ने कांग्रेस परिवार पर एक और गंभीर आरोप लगाया। प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा की शादी को लेकर उन्होंने कहा कि, प्रियंका गांधी की शादी रॉबर्ट वाड्रा से हुई शादी के रिसेप्शन में सिर्फ 25 लोग थे। जिसकी अध्यक्षता तासीर रायवी , फरीदा अताउला, मुनीर अताउला ये तीन लोग कर रहे थे। ये कौन लोग हैं, ये आईएसआई के लोग हैं। इन्होंने क्यों अध्यक्षता क्यों की मीडिया ने आज तक सवाल नहीं किया। 

प्रियंका के हर संडे को चर्च जाने वाली बात को लेकर सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि वो चर्च नहीं जाती बल्कि घर में ही छोटा सा चर्च (चैपल) है। वह बैप्टाइस क्रिश्चियन है। पूरा परिवार ही क्रिश्चियन है। हिंदू बनने का ढोंग करतीं हैं। और संडे को प्रायश्चित करतीं है ।

राहुल गांधी के जनेऊ पहनने वाली बात पर उन्होंने कहा कि, जनेऊ पंडित का ट्रेड मार्क नहीं है। तमिलनाडु में जेवर बनाने वाले अंसारी भी जनेऊ पहनते हैं। चेटियार जनेऊ पहनते हैं। कायस्थ भी जनेऊ पहनते हैं। ब्राह्मण का एक ही ट्रेड मार्क है ज्ञानी और त्यागी। वहीं राहुल गाँधी के गरीबी रेखा के नीचे वाले लोगों को हर साल 72 हजार रुपए देने वाले सवाल पर स्वामी ने कहा कि, चार लाख करोड़ एक साल में खर्च होंगे। ये कहां से आएगा ये राहुल गांधी से पूछो? ये संभव है लेकिन उनके अक्ल में ये नहीं आएगा। 

अटल बिहारी सरकार के समय की बात को शेयर करते हुए स्वामी ने कहा, राहुल बोस्टन एयरपोर्ट पर एक लाख 60 हजार डॉलर कैश के साथ पकड़े गए थे। वाजपेयी ने उनको छुड़वाया था, नहीं तो जेल चले जातें। आगे कहा कि, राहुल गाधी के पास चार देशों का पासपोर्ट है। इंडिया के दो, एक इटली का और एक लंदन का है। इंडिया का दूसरा पासपोर्ट राहुल विंची नाम से है।

राजीव गांधी और सोनिया गांधी पर एक संगीन आरोप लगाते हुए सुब्रमण्यम ने कहा कि 1990 में अमेरिका जाते वक्त राजीव ने मुझे ट्यूनिश में रुकते हुए जाने को कहा। वो बोले कि आरिफ से मिलकर जाना। आरिफ इजरायल आतंकियों से जुड़ा व्यक्ति था। मैंने जब राजीव से आरिफ से मुलाकात की वजह पूछी तो पता चला कि सोनिया पिछले 10 सालों से पैलिस्टिनियन के आत्महत्या करने वाले आतंकवादियों के परिवार को पैसा भेजती थीं, वो मिलता है कि नहीं बस यही पूछना है।’

जनसत्ता ऑनलाइन 3-4-2019.


मंगलवार, 2 अप्रैल 2019

61वां केन्द्रीय खेलकूद प्रशिक्षण 18 व 21 मई से


श्रीगंगानगर, 2 अप्रेल,2019.

राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद जयपुर द्वारा 61वां केन्द्रीय खेलकूद प्रशिक्षण शिविर 18 मई से 7 जून तक माउंट आबू में तथा 21 मई से 10 जून तक जयपुर मुख्यालय पर विभिन्न खेलों में बालक-बालिकाओ खिलाड़ियों के लिये आयोजित किया जायेंगे। ये शिविर 14 से 17 आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं के लिये होंगे। इच्छुक खिलाड़ी आवेदन पत्र जिला खेलकूद प्रशिक्षण केन्द्र गंगासिंह स्टेडियम से प्राप्त कर सकते है। केन्द्रीय प्रशिक्षण में हैण्डबाल, कबड्डी, वॉलीबाल, फुटबाल, क्रिकेट, एथलेटिक्स व बाक्सिंग के खेल रहेंगे। केन्द्रीय प्रशिक्षण शिविर जयपुर में तीरंदाजी, खोखो, जिम्नास्टिक, जुडो, कुश्ती, हॉकी, टेबलटेनिस, बेडमिंटन, तैराकी, भारोतोलन, बास्केटबॉल, साईक्लिंग शूटिंग व घुडसवारी के खेल शिविर होंगे। 

मिनखां री हवस माथै सवाल पढणै सूं छूट ना जावै -कहाणी संग्रै 'मनगत'- रचना मनोज स्वामी

      


                                                

 परख - राजाराम स्वर्णकार


मनोज स्वामी राजस्थानी भासा रा एक घणाचावा, टाळवां अर रससिद्ध कथाकार है । कथाकारां री भीड् में ऐ आपरी निजू ओळखाण कायम राख सकै । ऐ आपरी कहाणियां रो रचाव अलायदै ढंग सूं करै । आं’नै मिनख रै मनोविग्यान रो सखरो अर ओपतो ग्यान है । आं’री आछी अर असरदार कहाणियां पाठकां नै इण सारु दाय आवै क्यूंकै इण कहाणियां में नीं तो दुसराव हुवै, नीं अणूतो विस्तार अर नीं अभिधात्मक सपाटबयानी । मनगत री बातां तो हुवै पण अमूरतन रो फालतू बघार नीं हुवै । मन री अन्धारी गळियां में अणूतै भटकण-भटकावण रा भाव नीं हुवै । मनोज स्वामी कहाणी री सरुआत ई इण ढंग सूं करै कै पाठक रो ध्यान आपो आप खिंचीज जावै।   वै भूमिका री लाम्बी चवडी पडत नीं बांचै । कहाणी रै पातरां रै सागै एकमेक हुय’र घटनावां रै मोड् अर विगसाव रै सागै पाठक ज्यूं ज्यूं आगै बधतो जावै, कहाणी री कथा सैली, संवाद अर ट्रीटमेंट रै कारण जिग्यासा रा कपाट ई खुलता जावै । जाणणै री एक ई धुन रैवै के आगै कांई हुवैला....कांई हुवैला । पाठक आपरै मन में सोचे के कहाणी रो अंत इण तरै रो हुवणो चाईजै पण उणरा सगळा अनुमान धरिया रैय जावै अर कहाणी अचाणचक इसो मोड लेवै, एक इसी कौन्ध पैदा करै कै पाठक रै अनुमान रै धुर विपरीत कहाणी रो अंत एक साव नुवादै ढंग सूं हुय जावै । आई तो है कथाकार रै हुनर री कुसलता, आई तो है कहाणी रै ट्रीटमेंट री एक टाळवीं खासियत ।
  ‘मनगत’ कहाणी संग्रै में 13 कहाणियां हैं यूं तो हरेक कहाणी रो फलक अलायदो है पण फेरुं ई पांच बिन्दुआं माथै इण रचाव नै आंकियो जाय सकै । ऐ पांच तत्व इण तरै है :- (1) लुगाई जात री दुरदसा (2) भूख अर गरीबी (3) सरकारी तंत्र री राफडलीलावां (4) जातिगत ओछा भाव अर (5 निपट स्वारथ परता रा दरसाव । संग्रै री पांच रै अडैगडै कहाणियां में मिनख रे मिजळापणै रा अर लुगाई रै दुरभाग रा दरसाव है । ऐ कहाणियां हैं:- मनगत, मिजळा लोग, दुसराइजतो इतिहास, गोदनामो अर सीर सैंस्कार । नारी जीवण री पारखी सीमोन द बोउवाह एकर कैयो हो कै ONE IS NOT BORN RATHER BECOMES A WOMAN. लुगाई जैविक इकाई होवण री जागा एक सामाजिक सांस्कृतिक इकाई है । समाज उणनै जिकै ढाळै ढाळणो चावै वा ढळ जावै जिकै सांचे में फिट कर दै वा वोई रूप धारण करलै । आ बात मनगत में जियां मेम्बर सा’ब रै बीनडती, माथै लागू हुवै उणी तरै रूप-रंग बदळ’र दुसराइजतो इतिहास री शायर अर विमला माथै, गोदनामै री राधा माथै, अर सीर सैंस्कार री राधा अर सीता माथै ई लागू होवै । आं सगळी कहाणियां में जुलम री सिकार लुगायां है । मिनखां री इच्छावां अर हवस रै नांव माथै हुवो चावै मिजळापणै रै नांव माथै चक्कू अर खरबूजै री पीडा तो लुगाई नै ई भुगतणी पडै । लुगायां रै अभिसप्त जीवण रा रूंगटा ऊभा करणै वाळा चितराम साम्ही आवता रैवै । साफ देखियो जाय सकै कै लुगाई जूण री एक जीव नी हुय’र एक जिनस है, जिनावर सूं ई माडी अदला-बदली या अट्टै सट्टै री सामग्री है । उमर भर तकलीफ भोगियां पाण उथळो देवण री हीमत तो करै पण उण उथळै में कीं सार नीं हुवै । उद्धरण (1) बनेइ जी, छोरया री तकदीर इती माडी क्यूं होवै ? क्यूं म्हारो कोई वजूद कोनी होवै ? क्यूं म्हानै डांगर पसुवां दांई अदला-बदली करगे घर सूं धक्को देइजतो रैहवै ? अर कदतांई देइजतो रैहसी..... कद तांई.......अर कद तांई ओ इतिहास दुसराइजतो रैहसी ? (2) छेकड् म्हनै उमर तो नरेन्द्र रै सागै ई काटणी है । पण जद आदमियां रो व्यवस्था पर जोर नीं चालै तो सगळो दोस लुगायां पर मंढता ई दिस्सै । के ठा ओ समाज लुगायां री पीड्, उणरो अणमाप दुख कुण देखसी, कुण अर कद समझसी । राधा रै चुप हुवतै ई सगळां रा मुंडा धोळा पडग्या । किणी खनै उण सवाल रो उथळो कोनी हो । थारै खनै है के ? आतम गिलानी जरुर हुवै । खुद माथै घिन ई आवै पण उथळो देवण री हीमत कोनी हुवै । इण कहाणी संग्रै में इण ढाळै री पीडा रा अंतर द्वंद्वा रा अर त्रासदियां रा केई दूजा उदाहरण ई है- भूख सूं भचीडा खावंतो मिनख जमारो कांई कांई नीं करै ? इणरी विगत पिंडदान, फीस, सीर सैंस्कार, मनगत अर मिजळा लोग कहाणियां में मिलै । मनगत में मेम्बर सा’ब रै भाणजै वाळी बीनडती टाबरां रा पेट पाळन सारु धानमंडी मांय दाणा चुगती फिरै । मामा भाणजा रात रा मैफल जमावै,धणी खरचो घालै नहीं, टाबर भूख सूं कुरळावै । गरीबी अर भूख रो एक चितराम इण भांत है :-उद्धरण (1) “दूसरै दिन सिंझ्या एक मगसै भेस आळी लुगाई डाक्टर री दुकान पर आई । एक टाबर आप मतो ई भाज्यो बगै, एक री आंगळी पकड राखी ही, एक गोदयां में अर एक उण रै पेट मांय हो । टाबरां रा सिरकेसा नै तेल कदी दिखायोडो ई कोनी हो । टाबरां अर लुगाई री आंख्या पितळाइजैडी । जाणै मंतरेडा सा जी हुवै । बस जीवंता हा ।“ उद्धरण (2) “इण कचरे रो के करस्यो ?” म्हारलै पाडोसी बां सूं पूछ्यो । बो आदमी कटियै रो मूंडो पकडै-पकडै बोल्यो, “इण में मांस रो अंस हुवै । के करां गरीब हां पेट री लाय किंया नें किंया तो ठंडी करणी ई पडै है । पण अबै...... ? थांनै आ कथा (कहाणी) सुणाया पछै म्हनै यूं लागै जाणै मुरगी अर बकरियां बाढणिया रो, बीं कचरै सूं पेट भरणियां रो अर बां साथै म्हारो भी पिंडदान हुग्यो । फीस कहाणी में भतीजी रै कॉलेज री फीस भरण सारू जाजा जतन करियां पछै ई जद सगळा दरवाजा बन्द हुय जावै तो आखर प्रैस मालक सूं पन्द्रै हजार रिपिया,  दो रिपिया सैकडै सूं ब्याजूणा चकणा पडै । एक बरस तांई रकम नीं चूकीजै, करजो बाकी रैवै अर अजै कॉलेज रै तीजै बरस री फीस बाकी । उद्धरण (3):- “म्है गरीब आदमी हां । म्हारी बेटी आपरै कॉलेज में भणै है । फीस माफ करवावणी है ।
“म्हे के अठै माफी घर खोल राख्यो है । फीस तो देवणी ई पड्सी । बातां सूं कोनी चालै कॉलेज । सौ कीं अळो-थळो लगायो है जणां बण्यो है । ठा है नीं । आ जी सी ........ । अर उण धड देणी सी क्याड् भेड लिया । गरीबी रे जीवण में इसा दरसावां रो तो नाभी नाळ सम्बन्ध हुया करै ।
संग्रै में तीन कहाण्यां सरकारी तंत्र री राफडलीला री, देखावटी प्रचार री अर भिस्टाचार री है । कहाणियां रा नांव है “गोदनामो, प्रचार अर बारा’ आना । गोदनामो रो चिमनो पटवारी दोनूं हाथां सूं सूतो मारै । नाळी री जमीन री उपज मांयसूं ट्रॉलियां भर भर चिणा रा कट्टा पटवारी रै घरां पूगै । भिस्टाचार रै पाण सहैर में मकान, प्लोट, शॉरूम बणग्या । जीप आयगी । अथाक धन, धपाऊ गैणा, कोठी अर जाणै क्या क्या हुयग्या चिमनै पटवारी रै खनै । प्रचार कहाणी सरकारी दिखावै री पोल खोलण वाळी है । प्रचार सारू लोक कलाकारां ने बुलाईज्या पण उणां में के बीती पढियांई जाणीज सकै । आ एक तरै री संस्मरणात्मक कहाणी है । सगळा अफसर काम नै एक दूजै माथै टाळता रैवै । कलाकारां री गिनार कोई नीं करै । एक उद्धरण :- अरे तुम क्या हो ? तुम क्या हो ? मैं यहां का एसडीएम खड़ा हूं और तुम कुरसियों पर बैठे चाय पी रहे हो ।  “साब म्हे आदमी हां.... अर साब म्हानै के सोरम आवै के, थे कलेक्टर हो या एसडीएम हो.... म्हे  खड्यो हुय’र कैयो । बो उकळ चुकळ हुयग्यो ।“ कहाणी इती रोचक है कै पाठक सुरु सूं आखर तांई रस लेय सके । इण संस्मरणत्मक कहाणी जियांई एक दूजी कहाणी “ओळ्यूं” रेखाचित्रात्मक है । मिरासी वाळी कहाणी बारा’आना में राजस्व मैकमै में खुलै भिस्टाचार रो बखाण है । पटवारयां री कलम री धार रै धक्कै जो लाग जावै उणनै तो चौरासी में चक्कर काटणा ई पडै । आखै देस में इण मैकमै रो ओ ई ढंग ढाळो है । जाणै किता गोता खावणा पड्या इंतकाल री बात दरज करावण में । पढियांई ठाह लागसी ।

एक कहाणी जात पांत री है । मेघवाळ रै बेटै रो नांव निकाळण में बिरामण दादा धन्नाराम जिण तरै सूं हाथ झड्काय दिया अर जात सुणतां ही बिदकग्यो उणरो जीवतो जागतो चित्रण है इण कहाणी में । कहाणी रो अंत इण तरै हुवै- “छोरो साईकिल सूं पडग्यो हो अर सिर फूटग्यो हो । डॉक्टर देख भाळ’र म्हनै कैयो ऐ दवाईयां लगा’र पाटी कर दे” । म्हे पाटी करण लाग्यो तो उण छोरै रै सागै दादो धन्नाराम खड्यो हो मूंडो उतारयां । म्हारै एक चढै अर एक उतरै । स्यात दादे म्हनै देख’र पिछाण लियो हो । म्है एकर तो करडी रीस सूं दादै साम्ही ताक्यो पण पछै म्हारै काम लागग्यो । पाटी करगे दादै नै कैयो “दादा, माणस जात सूं मोटी कोई जात कोनी हुवै । दादो तळै तकावण लागग्यो । “म्है पाछो म्हारै काम लागग्यो” । (जात पृष्ठ 50) दो कहाण्यां निपट स्वारथ री है । रोटी खरचो अर फीस । जापै में बेटी हुई तो बडोडै छोरै री बीनणी सासू नै कैयो “आ ल्यो थांरी लीद नै, थांरै बेटे सूं तो म्हानै ई पूरा सूरा टुकडा कोनी घालीजै । “म्है सगळा हाका-बाका, पण उण तो पाछो मुड’र कोनी देख्यो । पण जद दूजै जापै में बेटो हुयो तो खुद रै कनै ई राखियो (फीस-पृष्ठ 64-65) रोटी खरचो रो राजू बिना किसी खास जाण पिछाण रै सहैर में आय’र किणी रै घरां ठैरग्यो । दिनूगे सिंझ्या चाय अर दोनूं वेळा रोटियां जीमै पण जद रोटी खरचै रो चिन्होसी’क ई संकेत कियो तो आपरा गूदडा चक’र बईर हुयग्यो । जांवते जांवते कैयो “थारै अठै रैवण रो धरम कोनी, बणा कैयो ।  क्यूं भाई म्है के इस्यो माडो काम कर दियो ? छोरयां  सूं काम करवावे । माटी ढुवावै । म्है कोनी रैहसूं इसी ठौड । ठीक है भाई । घणोई आछो, पधारो ।“ अर एक म्हीनै तांई फोकट रा चौखा रोट पाडगे राजू जांवतो रैयो ।


मनोज कुमार स्वामी

कहाणी संग्रै में आछै लोगां रा ई केई चरित्र चित्रण है । पण कुरूप चैरो अर बद शक्ल काया री झलक ई साम्ही आंवती रैवै । पोथी रे पूठै रो चितराम भोत प्रभावी है अर छपाई सांतरी हुवण सूं लगोतार पढण रो मन करै । पेपर बैक हुवण सूं पढण में सोरप बरतीजै । इणरै वास्तै पोथी ने छापणिया बोधि प्रकाशन ने भी घणैमान लखदाद है । 
भांत-भांत री सैलियां रो प्रयोग जियां संवाद सैली, फ्लैश बैक सैली, प्रश्नोतर सैली, मनोवैग्यानिक सैली आद रै सागै कसियोडा कथानक, शिल्प री सुघड्ता, भासा रो रूडो रळकवों प्रवाह, उपमावां री ताजगी, प्रतीकां री सोवणी छटा, मुहावरां री कोरणी अर छळछळावंतो कथा रस पाठकां रै मन नै रिझांवतो रैवै । गांव रे परिवेस री इसी प्रामाणिक रचना एक उस्ताद रचनाकार ने टाळ’र कोई नीं लिख सकै । म्है मनोज स्वामी नै इसै रूडै. रंजक अर टिकाऊ रचनावां सारू लखदाद देऊं ।

-- राजाराम स्वर्णकार
शिव-निवास, बर्तन बाजार, बीकानेर
मो.न. 8209463275
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प्रकासक- बोद्धि प्रकाशन, जयपुर.
पेपरबैक संस्करण.
                      

सोमवार, 1 अप्रैल 2019

डा.राजेंद्र छाबड़ा का निधन:सूरतगढ़ चिकित्सा क्षेत्र को अपूर्णीय क्षति:सदैव याद रहेंगे

 


-- करणीदानसिंह राजपूत -

एपेक्स मल्टीस्पेशलिटी हास्पीटल सूरतगढ़ के सुप्रसिद्ध डा.राजेंद्र छाबड़ा का करीब 62 वर्ष की उम्र में 1 अप्रैल को दिल्ली के एम्स हास्पीटल में निधन हो गया।

डॉक्टर राजेंद्र छाबड़ा पिछले कुछ महीनों से गंभीर रोग से ग्रस्त थे। सूरतगढ़ इलाके में करीब 35 सालों से चिकित्सक के रूप में अपनी सर्वोत्तम सेवाएं देने में लगे हुए थे। 

करीब 35 वर्ष पहले सूरतगढ़ की मेन बाजार की  सब्जी मंडी के पीछे उन्होंने अपना बीकानेर हॉस्पिटल शुरू किया जो कुछ वर्ष तक वहां चलाया और उसके बाद रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार के पास उनके निजी भूखंड स्थल पर स्थानांतरित हुआ। कुछ वर्ष वहां रहने के बाद बीकानेर रोड पर सिद्धु सदन के पीछे बीकानेर हॉस्पिटल स्थानांतरित हुआ। 

उन्होंने अन्य चिकित्सकों के साथ मिल कर अनेक चिकित्सा सुविधाओं का एपेक्स मल्टीस्पेशलिटी हास्पीटल सूरतगढ़ शुरू किया और वहीं से अपनी सेवाएं देने लगे। बीकानेर हॉस्पिटल नाम से संस्थान बंद कर दिया गया। 

इलाके में डॉक्टर राजेंद्र छाबड़ा का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उनके  निधन से इलाके को बहुत बड़ी क्षति हुई है, जिसकी पूर्ति नहीं की जा सकती। सूचना है कि उनका अंतिम संस्कार कल 2 अप्रैल को सूरतगढ़ में किया जाएगा। वे निरंकारी पंथ के मानने वाले थे। वे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदों पर भी रहे। एक कलरफुल मेडिकल बुलेटिन भी काफी समय तक निकालते रहे थे।

राजेंद्र छाबड़ा के निधन के समाचार से सूरतगढ़ शहर में शोक की लहर है। चिकित्सालय मेडिकल स्टोर अन्य सभी जगह राजेंद्र छाबड़ा के निधन की ही चर्चाएं हैं। 

लोग सोशल साइटों पर इस दुखद समाचार पर नमन कर रहे हैं।

 डॉ राजेंद्र छाबड़ा की चिकित्सा सेवाओं को याद करते हुए हम नमन करते हैं।

राजेंद्र छाबड़ा का निधन:दिल्ली एम्स में अंतिम सांस ली:


-- करणीदानसिंह राजपूत -

एपेक्स मल्टीस्पेशलिटी हास्पीटल सूरतगढ़ के सुप्रसिद्ध डा.राजेंद्र छाबड़ा का करीब 62 वर्ष की उम्र में 1 अप्रैल को दिल्ली के एम्स हास्पीटल में निधन हो गया।

डॉक्टर राजेंद्र छाबड़ा पिछले कुछ महीनों से गंभीर रोग से ग्रस्त थे। सूरतगढ़ इलाके में करीब 35 सालों से चिकित्सक के रूप में अपनी सर्वोत्तम सेवाएं देने में लगे हुए थे। 

करीब 35 वर्ष पहले सूरतगढ़ की मेन बाजार की  सब्जी मंडी के पीछे उन्होंने अपना बीकानेर हॉस्पिटल शुरू किया जो कुछ वर्ष तक वहां चलाया और उसके बाद रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार के पास उनके निजी भूखंड स्थल पर स्थानांतरित हुआ। कुछ वर्ष वहां रहने के बाद बीकानेर रोड पर सिद्धु सदन के पीछे बीकानेर हॉस्पिटल स्थानांतरित हुआ। 

उन्होंने अन्य चिकित्सकों के साथ मिल कर अनेक चिकित्सा सुविधाओं का एपेक्स मल्टीस्पेशलिटी हास्पीटल सूरतगढ़ शुरू किया और वहीं से अपनी सेवाएं देने लगे। बीकानेर हॉस्पिटल नाम से संस्थान बंद कर दिया गया। 

इलाके में डॉक्टर राजेंद्र छाबड़ा का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उनके  निधन से इलाके को बहुत बड़ी क्षति हुई है, जिसकी पूर्ति नहीं की जा सकती। सूचना है कि उनका अंतिम संस्कार कल 2 अप्रैल को सूरतगढ़ में किया जाएगा। वे निरंकारी पंथ के मानने वाले थे। वे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदों पर भी रहे। एक कलरफुल मेडिकल बुलेटिन भी काफी समय तक निकालते रहे थे।

राजेंद्र छाबड़ा के निधन के समाचार से सूरतगढ़ शहर में शोक की लहर है। चिकित्सालय मेडिकल स्टोर अन्य सभी जगह राजेंद्र छाबड़ा के निधन की ही चर्चाएं हैं। 

लोग सोशल साइटों पर इस दुखद समाचार पर नमन कर रहे हैं।

 डॉ राजेंद्र छाबड़ा की चिकित्सा सेवाओं को याद करते हुए हम नमन करते हैं।

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