मंगलवार, 19 अप्रैल 2016

सरकार की नीयत साफ हो तो देखें कौनसा पुलिस अधिकारी काम नहीं करता:राजस्थान का गृहमंत्री लाचार

अपराधियों के पास आधुनिक हथियार और राजस्थान का गृहमंत्री लाचार
हथियारों से निपटने वाले संपूर्ण राजस्थान में सौ भी नहीं होंगे लेकिन कागजी भ्रष्टाचार व दुराचार की फाईलें क्यों पेंडिंग हैं और चालान की मंजूरी क्यों नहीं दी जाती?
- करणीदानसिंह राजपूत -
राजस्थान में आनन्दपाल का मामला सरकार का पीछा नहीं छोड़ रहा है और पावरफुल सरकार के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया लाचारी में वक्तव्य देते रहे हैं मानो उनके पास देने को सख्त आदेश नहीं है और पुलिस के पास हथियारों के नाम पर केवल तिनका है।
राजस्थान में भाजपा की वसुंधराराजे सरकार आने के बाद से अपराधियों के हांैसले बुलंद हैं। अपराधी मान कर चलते हैं कि उनके विरूद्ध कार्यवाही जब चाहे ठप करवाई जा सकती है और ऐसा प्रमाणित भी हो रहा है।
मान लिया जाए कि राजस्थान पुलिस के पास आधुनिक हथियार नहीं हैं, लेकिन हर अनुसंधन में तो हथियारों को कोई काम नहीं होता। जहां कागजी कार्यवाहियों का अपराधों का दुराचारों के अपराधों का अनुसंधान करना होता है वहां पर भी पुलिस चींटी चाल से चलती प्रमाणित होती है। महीनों तक तो पुलिस अधिकारी पत्रावली खोल कर ही नहीं देखते। मुस्तगीस को ही चक्कर लगवा लगवा कर परेशान कर डालते हैं।
किसी भी अधिकारी से देरी का पूछा नहीं जाता और न उसको नोटिस दिया जाता।
कई सालों के बाद जैसे तैसे अनुसंधान पूर्ण होता है और राज्य सरकार के अधिकारियों व कर्मचारियों के विरूद्ध चालान करने की अनुमति मांगी जाती है तब संबंधित विभाग के प्रमुख अनुमति नहीं देते। स्वायत्त शायन विभाग,जलदाय विभाग, राजस्व विभाग आदि इसके प्रमाण हैं। राजस्थान में नगरपालिकाओं,नगरपरिषदों,नगर विकास न्यासों में सर्वाधिक भ्रष्टाचार है। सरकार की करोड़ों रूपयों की जमीनें इधर उधर कर देने वाले,योजनाओं में करोड़ों रूपयों का हेरफेर कर योजनाओं को खत्म कर देने वाले अधिशाषी अधिकारी,अभियंता गण व संस्था के अध्यक्ष आदि के विरूद्ध अदालत में चालान करने की अनुमति देते सरकार दबाव से पीछे हट जाती है।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो व गुप्तचर शाखाएं तो बिना हथियारों के ही अपराधों का अनुसंधान करती हैं इनमें तेजी क्यों नहीं लाई जाती? इन शाखाओं में पूरा स्टाफ नहीं दिया जाता और समीक्षा भी कम होती है। पहले तो प्रकरण दर्ज होने में ही महीनों लग जाते हैं और उसके बाद अनुसंधान और फिर चालान की अनुमति में सालों का खेल चलता है। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ऐसे प्रकरणों में भी लाचार क्यों दिखाई देते हैं? गृहमंत्री पावरफुल होता है लेकिन कटारिया जब तब लाचारी प्रगट करते रहते हैं। इतनी ही लाचारी है तो इस पद से चिपटे हुए क्यों बैठे हैं? कोई काम नहीं हो रहा है तो उसको छोडऩे में भी देरी क्यों?
अगर पद छोड़ नहीं सकते तो अपने आदेश निर्णय सख्त करें। उनके मंत्रालय में अपराधियों को कानून के हवाले करने में तो शायद कोई ीाी रोक नहीं रहा है। मुख्यमंत्री भी भी नहीं रोकती होंगी।
गृह मंत्रालय मालूम करले कि जयपुर में कितने प्रकरण पड़े हैं। स्वायत्त शासन विभाग का निदेशालय सर्वाधिक लिप्त है। जिन अधिकारियों व कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार आदि के आरोप हैं किसी की जाँच चल रही है तो उनको फील्ड ड्यूटी दी नहीं जा सकती लेकिन आदेश के बावजूद ऐसा किया जा रहा है। ऐसा मंत्रियों की कमजोरियों के बिना तो संभव नहीं है।
राजस्थान सरकार का चाहे कोई भी मंत्री हो वह लाचारी प्रगट करने के बजाए जो संसाधन हैं उनके तहत ही बहुत कुछ कर सकता है। 

 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यह ब्लॉग खोजें