Friday, April 22, 2016

सूरतगढ़ थर्मल पर 24 को महापड़ाव संभव नहीं:कड़ी सुरक्षा को भेदना असंभव:

टकराव की आशंका पर धारा 144 लगाई गई: ऐटा सिंगरासर माइनर आँदोलन:
शांति नहीं रही तो आँदोलन भटक जाएगा:
स्पेशल रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़,22 अप्रेल 2016.
अभी तक की जानकारियों और सामने आए तथ्यों को देखते हुए ऐटा सिंगरासर माइनर का निर्माण संभव नजर नहीं आता। आँदोलनकारी नेता और जुड़े हुए कार्यकर्ता भी यह सब जानते हैं लेकिन एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां से वापस लौटना संभव नहीं है। सरकार एकदम से इन्कार नहीं कर सकती सो उसने कमेटी का निर्माण कर दिया है जिसकी रिपोर्ट के बाद जनता को बताया जाएगा कि क्या कुछ हो सकता है? वैसे वसृुंधरा राजे ने कह दिया है कि माइनर बनवाने में सरकार का इन्कार नहीं है मगर उसके लिए पहले पानी का इंतजाम तो हो कि कहां से मिल पाएगा? प्यासे इलाके को नेताओं ने दिन में सपने दिखलाए जिनमें भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल हैं तथा अब रिमोट माकपा नेताओं के हाथ में है। माकपा के नेता संघर्ष चला सकते हैं और अच्छा खासा चला सकते हैं यह सभी जानते हैं लेकिन उनके संघर्ष का चरम समय शांतिमय नहीं रह पाता। यह एक इतिहास है जिसमें कई आँदोलन कई संघर्ष और घटनाएं जुड़ी हुई है। घड़साना रावला का पानी आँदोलन सबसे बड़ा प्रमाण है। माकपा ऐसे आँदोलनों में ही जमीन तलासती है। अब कई दिनों से ग्राम ग्राम में माकपा के नेता ही सभाएं और नुक्कड़़ सभाएं करने में लगे हैं। उनके साथ अन्य पार्टियों के भी कुछ कार्यकर्ता  हैं मगर जो बयान या लच्छेदार प्रभावी भाषा माकपा वाले बोलते हैं वह अन्य नहीं बोल पाते। माकपा वाले सीधे साफ आक्रमक शब्दों में नेताओं को निशाना बना लेते हें वहीं अन्य नेता दब्बू नजर आते हैं कि स्थानीय सत्ताधारी का नाम तक लेने से कतराते हैं या अपने संबंधों को देखने परखने लगते हैं। पिछले कुछ दिनों से माकपा नेता ही समाचारों में छाए हुए हैं। न्यूज भी उन्हीं के नाम से बनती है अन्यथा बन ही नहीं पाती। इस आँदोलन में कांग्रेस किस जगह पर है और उसके बड़े नेता कहां पर हैं? यह किसी को बतलाने की जरूरत नहीं है।
 ऐटा सिंगरासर माइनर पर जल संसाधन मंत्री डा.रामप्रताप ने हनुमानगढ़ में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि दारू की बोतल में पानी देख कर माइनर नहीं निकाला जा सकता। यह शब्द किस संदर्भ में कहे गए होंगे और किसके लिए कहे गए होंगे?
इसके पहले विधानसभा में भी कहा कि यह बिन दल्हे का ब्याह है। हमने बहुत पहले कांग्रेस सत्ता और मील के विधायक काल में एक लेख लिखा था कि बिना दुल्हन की ब्याह जैसा होगा। पहले शादी करलो और बाद में दुल्हन की खोज करते रहना। आज की हालात में तो यह हालात है कि न दुल्हा है न दुल्हन है केवल बारात है। ऐसी बारात की क्या हालात हो सकती है?
बड़ी विकट स्थिति है। आँदोलन के लिए हजारों लोगों को एकत्रित करना आसान हो सकता है लेकिन नियंत्रित रखना आसान नहीं होता।
प्रशासन ने आँदोलनकारियों से वार्ता का रास्ता खुला रखा और बातचीत करता रहा तथा सुरक्षा का व्यापक प्रबंध भी करता रहा। इलाके के एसडीएम रामचन्द्र पोटलिया ने धारा 144 लगा दी है जिससे थर्मल गेट तक पहुंचना असंभव है। इसके अलावा चाहे किसान मजदूर कोई भी हो वह लाठी, फावड़ा दरांती आदि कुछ भी लेकर वहां से निकल नहीं सकता। जो लोग पहुंचेंगे वे निहत्थे होंगे और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था में लाठी गोली सब कुछ होगा। संभव है कि वहां कूच कर रहे आँदोलनकारियों को पहले ही रोक लिया जाए। यह भी संभव है कि 24 अप्रेल का दिन निकलने से पहले ही सरकार नेताओं की धरपकड़ करले।
थर्मल गेट तक पहुंचना तो हर हालत में असंभव लगता है लेकिन उससे पहले भी बीच में भी क्या कुछ हो जाए कि आशंका कम नहीं है।
इलाके का किसान पहले कभी टकराव की हालत में नहीं पहुंचा है और अभी भी टकराव की हालत में नहीं पहुंचने में ही भलाई है। 

ऐटा सिंगरासर माइनर की पहले की बहुत सी सामग्री पढऩे देखने के लिए ऐटा सिंगरासर माइनर स्तंभ देखें।
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