शनिवार, 24 अक्तूबर 2015

कविता: मुखौटा


लो तुम्हारा मुखौटा भी उतर गया
लोगों के सामने
बहरूपिये स्वांग रचते हैं
अलग अलग
बड़ा ध्यान रखते हैं
कोई लट निकल न जाए
और जहां जाए वैसी बोली
निकालते हैं हाथ पांव जोड़
माई बाप तो कहीं राजा सा रौब
अपनाए।
कम तो तुम भी न थे
होशियारी में
बोली में
जितने मासूम से
मन में चालाकी से।
कितने सालों से
तुम्हारा चेहरा
छुपा था मुखौटे में।
अनेक लोगों ने देखा था
पहले मगर चुप थे।
अब तुम्हारा बहरूपियापन
छिपाए नहीं छिपा
तुम्हारी एक लट
नहीं हटी
पूरा स्वांग ही उतर गया।
अच्छे स्वांग की
प्रशंसा जो थी सालों से
वह उजागर हुई
तुम तो साधु भेष में
रावण के सैनिक निकले।
तुम कैसे चला सकते हो
रावण पर तीर।
अब रावण लंका में नहीं रहता
हर शहर हर कस्बे में
हमारे देश में
रहता है।
एक तुम्हें क्या दोष
रावण से स्वर्ण लेने की
ईच्छा तो सभी की
होती आई है
तुम्हारी ईच्छा
कोई अलग नहीं
बस,
इतना हुआ कि वह
लोगों के सामने
उजागर हो गई।
रावण की स्तुति
में तुम्हारा मुखौटा
उतर गया।
तुम थे तो पक्के बहरूपिए
मगर कच्चे निकले।
रावण की प्रशंसा
किसी काल में नहीं हुई
तुम तो महज
उसके सैनिक निकले।
रामलीला का मंचन
होता है तब
कलाकार छोटे बड़े
सब राम की सेना में
नाम लिखाते हैं
और तुमने
अपना नाम लिखाया
रावण की सेना में।
लो, तुम्हारा भी मुखौटा
उतर गया लोगों के सामने।


- करणीदानसिंह राजपूत
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
94143 81356

गुरुवार, 22 अक्तूबर 2015

करणी मंदिर सूरतगढ़ राजपूत क्षत्रिय संघ में नवमी पर हवन:




सूरतगढ़, 22 अक्टूबर 2015.
शारदीय नवरात्रा की नवमी पर राजपूत क्षत्रिय संघ के करणी माता मंदिर परिसर में राजपूत सरदारों ने सपत्नी हवन कर शक्ति दुर्गा,लक्ष्मी,सरस्वती और करणी माँ की स्तुति करते हुए हवन किया। राजपूत सरदारों नात्थूसिंह राठौड़,करणीदानसिंह राजपूत बैंस,नगेन्द्रसिंह शेखावत,भीखसिंह शेखावत व सूरजसिंह भाटी सपत्नी हवन किया। संघ के अध्यक्ष मलसिंह भाटी,सचिव बजरंगसिंह पंवार,पूर्व अध्यक्ष कमांडेन्ट बीएसएफ हरिसिंह भाटी,पूर्व अध्यक्ष लालसिंह बीका,महेन्द्रसिंह शेखावत,ओंकारसिंह शेखावत,राजूसिंह सहित अनेक सरदारों ने हवन में आहुतियां दी।





 इस अवसर पर राजपूत महिला सरदारों की संख्या भी काफी थी। हवन पश्चात कन्याओं को जिमाया गया और प्रसाद वितरण किया गया।
देशनोक वाली मां करणी की अनुकृति शिला प्रतिमा यहां स्थापित है। हनुमानगढ़ गंगानगर बाई पास रोड पर यह मंदिर स्थित है।

बुधवार, 21 अक्तूबर 2015

सूरतगढ़ के पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा को पुलिस ने उठा चिकित्सालय में भर्ती कराया:


छाबड़ा शहीद समारक जयपुर पर शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर आमरण अनशन पर थे:
पुलिस ने वहले भी उठाकर चिकित्सालय में भर्ती कराया था मगर वहां से डिस्चार्ज करते ही वापस आमरण अनशन पर बैठ गए थे।
-छाबड़ा चिल्ला रहे थे कि सरकार मेरी सेहत बहाना कर रही है,मेरी सेहत ठीक है,सरकार को जनता की सेहत की चिंता नहीं है।
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़,21 अक्टूबर 2015.
सूरतगढ़ के पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा को आज भार पुलिस बल से शहीद समारक जयपुर से उठा कर पुलिस ने एसएमएस चिकित्सालय में भर्ती करा दिया। छाबड़ा ने राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर 2 अक्टूबर को शहीद समारक पर आमरण अनशन शुरू किया था। पुलिस ने घेराबंदी करके उठाया। छाबड़ा जोर जोर से चिल्ला रहे थे कि सरकार मेरी सेहत का बहाना बनाकर उठा रही है जबकि गरीबों की सेहत की सरकार को चिंता नहीं है। छाबड़ा कह रहे थे कि सरकार मीडिया से दूर करना चाहती है ताकि यह समाचार लोगों तक नहीं पहुंचे जो लगातार प्रसारित हो रहे हैं। छाबड़ा ने कहा कि मेरा अनशन जारी रहेगा। पुलिस द्वारा चिकित्सालय में ीारती कराए जाने के बाद भी छाबड़ा ने अनशन नहीं तोड़ा है। दाबड़ा का अनशन आज बीसवें दिन जारी है।
छाबड़ा ने जब 2 अकटूबर को अनशन शुरू किया था तब पुलिस ने 6 अक्टूबर को उठाकर चिकित्सालय में गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती करा दिया जहां पर अनशन जारी था। इसके बाद सरकार के निर्देश पर पुलिस ने उनको ऐसे वार्ड में अपराधियों के साथ रखा जहां पर उनका ईलाज किया जाता है। सरकार डराना व झुकाना चाहती थी लेकिन जब कुछ भी नहीं कर पाई तब 15 अक्टूबर को चिकित्सकों से फिट की रिपोर्ट करवाई और चिकित्सालय से डिस्चार्ज करवा दिया। छाबड़ा चिकित्सालय से डिस्चार्ज किए जाने के बाद वापस शहीद स्मारक पहुंचे और अनशन पर बैठ गए। आज उनको फिर उठा कर चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है।
इसी बीच भाजपा और कांग्रेस के बीच छाबड़ा के आमरण अनशन को लेकर बयानबाजी भी हुई है। कांग्रेस ने छाबड़ा के आमरण अनशन पर ध्यान नहीं देने पर भाजपा सरकार को संवेदनहीन बताया वहीं भाजपा की ओर से छाबड़ा को कांग्रेस का मुखौटा करार दिया गया।
गुरूशरण छाबड़ा आरएसएस के कार्यकर्ता हैं। जनसंघ से राष्ट्रीय पार्टी के सदस्य रहे हैं।आपातकाल 1975 के विरोध में जेल गए और जेल में भी आमरण अनशन किया था। जनता पार्टी के टिकट पर 1977 में सूरतगढ़ से विधायक चुने गए थे। उस समय जनता युवा संघ में जब वसुंधरा राजे उपाध्यक्ष थी तब छाबड़ा भी उपाध्यक्ष ही थे। छाबड़ा ने कांग्रेस राज में अनेक बार आँदोलन किए इसलिए उनको कांग्रेस का मुखौटा बताकर ध्यान नहीं दिया जाना गलत है।
छाबड़ा ने अपनी देह दान की घोषणा पूर्व में ही कर रखी है।
छाबड़ा ने पहले एक बयान में कहा था कि गुजरात में शराब बंद है और वहां शराब की आय के बिना सरकार चल सकती है तब राजस्थान में सरकार क्यों नहीं चल सकती।
विदित रहे कि अशोक गहलोत की सरकार के समय भी छाबड़ा ने आमरण अनशन किया था। छाबड़ा का आरोप है कि सरकार ने जो लिखित समझौता किया था उसका पालन क्यों नहीं कर रही है। 




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सोमवार, 19 अक्तूबर 2015

सरकारी व्याख्याता और कोचिंग सेंटर:एक चुनलें:चैलेंज:


छद्म कोचिंग तो छापा भी छद्म:होशियारी काम नहीं आने वाली:
नहीं चलेगा मतलब नहीं ही चलेगा-अब रहेगी नजर और शिकायत भी
- ब्लास्ट की आवाज की तीसरी आँख की चेतावनी -दिनांक 19 अक्टूबर 2013 से.
पहले सरकारी नौकरी की भागम भाग रहती है और जब सरकारी नौकरी लग जाती है तब उसमें मन नहीं लगता। हजारों रूपए मासिक वाली सरकारी नौकरी तो है ही,उसका क्या? मन में उपजने लगते हैं करोड़ों रूपए की कमाई के ख्वाब। हसलपाई लगाने वाले मिल ही जाते हैं और प्रचारतंत्र का जादू सच्चा झूठा। अपने बाप के नाम पर,अपनी लुगाई के नाम पर अपने भाई के नाम पर गुपचुप खोल लिया जाता है कोचिंग सेंटर।
अब सरकारी स्कूल में मन नहीं लगता। दिल और दिमाग बाहर भाग कर कोचिंग सेंटर में जाने को तड़पने लगते हैं।
कौन पूछता है? किसे मालूम पड़ता है? अपने ही नाम से प्रचारतंत्र में अखबारों में विज्ञापन भी देने शुरू हो जाते हैं। अब नाम का भी कोई डर नहीं। कोचिंग में से उत्तीर्ण का परिणाम अच्छा आ गया तो सरकारी नौकरी उसके नियम कानून को धत्ता बताया और साक्षात्कार तक दे देना कि मैं कोचिंग में पांच घंटे नियमित देता हूं। शिकायत हुई और तब पूछा जाएगा कि यह साक्षात्कार में बयान आने दिया? तब क्या होगा? मित्र बेली अखबार वाले एक भी काम नहीं आएंगे।
सरकारी नौकरी पर हो जाएगा खतरा।
कोई एक जगह छपे हुए का खंडन मुंडन कर दोगे लेकिन आपके मुंह से बड़ाई में निकली बात तो दूर तक पहुंची है।
कितना छिपाओगे? कहीं न कहीं तो पकड़ में आ ही जाओगे।
सरकारी व्याख्याता का शान का कर्म और प्राईवेट कोचिंग में छिप कर चोरी का कार्य।
अच्छे गुरू कहलाते हैं तो फिर चोरी क्यों?
केवल पैसे के लिए चोरी? सरकार के साथ धोखा जो संकल्प नौकरी में लिया।
सरकारी नौकरी में अच्छा वेतन,अवकाश और पेंशन की सुविधा आपको अच्छी कयों नहीं लगती?
अच्छे गुरू और उसकी पाठशाला में चोरी का पाठ।
चोर सामान चुराए वह चोर। आप क्या चोर से कम हैं?
आखिर आपको चोर क्यों नहीं कहा जाए?
यह मान कर चलिए कि जो नियम हैं उसके अनुरूप कोई भी शिकायत कर सकता है।
अब होशियार रहिए। सरकारी नौकरी करनी अच्छी है तो कोचिंग का मोह छोड़ दें।
सरकारी नौकरी करते हुए अपने परिजनों या किसी भी अन्य स्थान पर कोचिंग में गए तो नौकरी भी गई।
निशुल्क कोचिंग का बयान कैसे चलेगा? बाप लुगाई भाई फीस वसूल कर रहे हैं न?
राजस्थान के बड़े बड़े अधिकारी तक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की कार्यवाही के फंदे में हैं और बचने के लिए भाग रहे हैं।
ऐसा न हो कि प्राईवेट कोचिंग करते पकड़े गए तब आप भी भागने लग जाओ।



रविवार, 18 अक्तूबर 2015

सीता मेरे सामने:कविता


सीता मेरे सामने
धीर गंभीर मौन

अविचलित शांत स्वरूप
आती है हर युग में
चेतन करने को संसार
और खो जाती है
अनन्त में
स्मृति अपनी छोड़।
...सीता मेरे सामने

धीर गंभीर मौन
मन में तरंगित होती
हलचल मचाती

एक रेख।
रेख जो बना देती है अक्षर
गढ़ देती है काव्य आख्यान
बना देती है सुंदर कलाकृति
रच देती है वन उपवन

और सुगंधित नगर उप नगर।
एक रेख
की तरंग
रच देती है रामायण

और गीता का ज्ञान।
...सीता मेरे सामने
रेख की शक्ति को
सीता जानती है
इसलिए हर युग काल में
रहती है धीर गंभीर मौन।
सीता के ध्यान में होता है
जब रेख रचती है सृष्टि
और उसमें भरती है

नाना प्रकार का
जीवन।
रेख मात्र की परम शक्ति
इतनी अपार
तब कौन लगाए अनुमान
सीता की शक्ति का।
...सीता मेरे सामने
- --


करणीदानसिंह राजपूत
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
94143 81356.

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आनन्ददायी सत्तर वर्ष पूर्ण कर इकतरहवें में प्रवेश: करणीदानसिंह राजपूत


पत्रकारिता एवं लेखन के पचास वर्षों के आनन्ददायी अनुभवों व महान लेखकों पत्रकारों की रचनाओं को पढ़ते और उनसे मिलते हुए मेरे जीवन के सत्तर वर्ष पूर्ण हो रहे हैं एवं 19 अक्टूबर 2015 को इकतरहवें में प्रवेश की सुखद अनुभूति।
सीमान्त क्षेत्र का छोटा सा गांव जो अब अच्छा कस्बा बन गया है अनूपगढ़ जिसमें मेरा जन्म हुआ। माता पिता हीरा रतन ने और परिवार जनों ने वह दिया जिसके लिए कह सकता हूं कि मेरी माँ बहुत समझदार थी और पिता ने संषर्घ पथ पर चलने की सीख दी।
सन् 1965 में दैनिक वीर अर्जुन नई दिल्ली में खूब छपा और सरिता ग्रुप जो बड़ा ग्रुप आज भी है उसमें सपारिश्रमिक छपने का गौरव मिला।
हिन्दी की करीब करीब हर पत्रिका में छपने का इतिहास बना।
धर्मयुग और साप्ताहिक हिन्दुस्तान में छपना गौरव समझा जाता था। दोनों में भी कई बार छपा।
छात्र जीवन में वाचनालय में दिनमान पढ़ता था तब सोचा करता था कि इसके लेखक क्या खाते हैं कि इतना लिखते हैं। वह दिन भी आए जब दिनमान में भी लेख खूब छपे।
आरएसएस का पांचजन्य,वामपंथी विचारधारा और जवाहर लाल नेहरू के मित्र आर.के.करंजिया का ब्लिट्ज,कांग्रेसी टच का करंट और समाजवादी विचार धारा का जॉर्ज फरनान्डीज का प्रतिपक्ष जिसने इंदिरा गांधी की नींद हराम करके रखदी थी,में सन 1974 में खूब छपा और बाद में तो इस पर आपातकाल में बेन लग गया था।
वह काल था संघर्ष का जिसमें मेरा साप्ताहिक भारत जन भी सरकारी कोपभाजन का शिकार बना। पहले संसर लगाया गया। सरकार की अनुमति के बिना कोई न्यूज छप नहीं सकती थी। विज्ञापन रोक  गए। मुझे भी 30 जुलाई 1975 को श्रीगंगानगर में गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप लगाया गया कि पब्लिक पार्क में इंदिरा गांधी के विरोध में लोगों को भड़का रहा था। एक वर्ष की सजा भी सुनाई गई। सवा चार माह तक जेल मे बिताए और उसके बाद एक संदेश बाहर कार्य करने का मिलने पर 3 दिसम्बर 1975 को बाहर आया।
मैं सरकारी पीडब्ल्यूडी की नौकरी में था लेख कहानियां आदि दपते थे लेकिन गरीब पिछड़े ग्रामों आदि पर लिखने की एक ललक थी कि दैनिक पत्रों में लिखा जाए तब 1969 में पक्की नौकरी छोड़ कर पत्रकारिता में प्रवेश किया।
राजस्थान पत्रिका में सन 1972 से जुड़ा और 15 मई 2009 तक यह सुखद संपर्क रहा। राजस्थान पत्रिका का एक महत्वपूर्ण स्तंभ कड़वा मीठा सच्च था। इस स्तंभ में लेखन में घग्घर झीलों के रिसाव पर सन् 1990 में लेखन पर सन् 1991 में राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार मिला। इंदिरागांधी नहर पर 12 श्रंखलाएं लिखी जो सन् 1991 में छपी तथा दूसरी बार 1992 में पुन:राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। राजस्थान की शिक्षा प्रणाली पर व्यापक अध्ययन कर दो श्रंखलाओं में सन् 1993 में प्रकाशित लेख पर तीसरी बार राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके बाद सन 1996 में राजस्थान की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पद्धति पर व्यापक अध्ययन कर 4 श्रंखलाएं  लिखी। इस पर सन् 1997 में राज्य स्तरीय दूसरा पुरस्कार मिला। राजस्थान पत्रिका के श्रद्धेय कर्पूरचंद कुलिश का मेरे पर वरद हस्त रहा और उन्होंने जोधपुर में पत्रकारों के बीच में कहा कि मैं तुम्हारे हर लेख को पढ़ता हूं। यह एक महान गौरववाली बात थी। गुलाब कोठारी और मिलाप कोठारी एक घनिष्ठ मित्र के रूप में आते मिलते। गुलाब कोठारी ने श्रीगंगानगर में सर्वश्रेष्ठ संवाददाता के रूप में सम्मानित किया तब कई मिनट तक एकदूजे से गले मिले खड़े रहे। आज भी पत्रिका परिवार के साथ घनिष्ठ संबंध हैं।इसी वर्ष 1997 में शिक्षा संस्थान ग्रामोत्थान संगरिया के बहादुरसिंह ट्रस्ट की ओर से पत्रकारिता में पुरस्कार प्रदान किया गया।
रामनाथ गोयनका के इंडियन एक्सप्रेस का विस्तार जब जनसत्ता दैनिक के रूप में हुआ तब जनसत्ता दिल्ली में खूब छपा। जब चंडीगढ़ से छपने लगा तब ओमप्रकाश थानवी के कार्यकाल में चंडीगढ़ में भी छपा। साप्ताहिक हिन्दी एक्सप्रेस बम्बई में भी लेख कई बार छपे।
राजस्थान की संस्कृति,सीमान्त क्षेत्र में घुसपैठ,तस्कर,आतंकवाद पर भी खूब लिखा गया। पंजाब के आतंकवाद पर टाइम्स ऑफ इंडिया बम्बई ने लिखने के लिए कहा तब कोई तैयार नहीं हुआ। वह सामग्री वहां से छपने वाली पत्रिका धर्मयुग में छपनी थी। मैंने संदेश दिया और मेरा लेख सन् 1984 में दो पृष्ठ में छपा। धर्मयुग में लेख छपना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी।
लेख और कहानियां बहुत छपी।
आकाशवाणी सूरतगढ़ से वार्ताएं कहानियां कविताएं रूपक आदि बहुत प्रसारित हुई हैं।
इंदिरागांधी नहर पर दूरदर्शन ने एक रूपक बनाया जिसमें कई मिनट तक मेरा साक्षात्कार रहा।
मेरा लेखन कानून नियम के लिए सच्च के प्रयास में रहा। कई बार ऐसा लेखन अप्रिय भी महसूस होता है लेकिन जिन लाखों लोगों के लिए लिखा जाता है तो यह कार्य भी हुआ है।
मेरे परिवार जन,मित्रगण और कानून ज्ञाता जो साथ रहे हैं वे भी इस यात्रा में सहयोगी हैं।
मैंने मेरे पूर्व के लेखों में भी लिखा है कि यह शक्ति ईश्वर ही प्रदान करता है और वह परम आत्मा जब तक चाहेगा लेखन रहेगा और लोगों का साथ रहेगा।
दिनांक 18-10-2015.

करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
94143 81356.

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शनिवार, 17 अक्तूबर 2015

सूरतगढ़ से सच्च में कितने आरएएस चयन हुए? झूठ की संख्या चलाई गई:


- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़, 24 जुलाई 2015.
राजस्थान प्रशासनिक व अधिनस्थ सेवाओं की परीक्षा 2012 के मुख्य परिणाम में सूरतगढ़ से प्रशिक्षण ले रहे तीस से अधिक अभ्यर्थियों के चयन होने का खूब प्रचार हुआ और अखबारों में खूब रंग चढ़ाया गया। राजस्थान में ही नहीं यह प्रचार राजस्थान से बाहर तक गया और मीडिया कर्मियों ने स्पेशल रिपोर्ट तक छापी और कोचिंग वालों के साक्षात्कार तक छाप डाले।
मीडिया वालों ने ही नहीं संस्थाओं के संचालकों तक ने केवल राजस्थान प्रशासनिक सेवा शब्द का ही इस्तेमाल किया व अधिनस्थ शब्द ही गोल कर दिया।
अखबारों में वे नाम भी दे दिए गए जो पिछले कुछ सालों से सूरतगढ़ से सैंकड़ों किलो मीटर दूर सरकारी सेवाओं में लगे हुए हैं तथा उन्होंने वहीं से ही अपना पूर्व का रैंक सुधारने के लिए परीक्षा में भाग लिया। सूरतगढ़ से बाहर सरकारी सेवाओं में लगे अधिकारी व कर्मचारी सूरतगढ़ में कोचिंग लेने नहीं आए लेकिन उनके चयन को भी सूरतगढ़ का बता कर वाह वाही लूटी गई और यह झूठ तीन चार दिन तक खूब चला। सरकारी सेवाओं में सैंकड़ों किलोमीटर दूरी पर कार्य कर रहे और रेग्यूलर ड्यूटी देने वालों के नाम भी सूरतगढ़ से चयन में छापे गए। वे
लोग सूरतगढ़ में कोचिंग लेने आते तो सरकार से अवकाश लेना पड़ता और ऐसा नहीं हुआ। लेकिन उनका नाम आरएएस चयन में छपवा दिया गया। मीडिया वालों को कोचिंग संस्थाओं के संचालकों ने ही बताया और यह झूठ बताया। मीडिया को नाम तो संचालकों ने ही दिए। यह होशियारी रखी गई कि संस्थाओं ने अपने लेटर हेड पर कोई सूची नहीं दी। जबानी बताई। दूरस्थ स्थानों पर सरकारी सेवाओं में लगे हुए लोगों ने पहले कभी सूरतगढ़ से कोचिंग ली थी। हालांकि बाद में वे नए स्थानों पर अन्य कोचिंग संस्थाओं से जुड़ गए। एक बार कोचिंग सूरतगढ़ से ले ली इसलिए नाम जोड़ दिए। कौन देखता है? किसको मालूम पड़ता है? मीडिया वाले बेली हो तो बस छपवाए चलो।
दूर दराज के चयन हुए सरकारी अधिकारियों को कर्मचारियों को भी यह मालूम पड़ा। उनकी तरफ से भी कुछ हुआ। वे किसी भी विवाद में क्यों पड़ेंï? तब आगे ये नाम प्रचारित करना बंद हुए।
अब सच्च में कितने आरएएस सूरतगढ़ से चयन हुए? कोई जारी करे अपनी असली सूची तो मालूम पड़े। किसने कब कोचिंग ली और कितने समय कब से कब तक ली। तब सच्च सामने आ पाएगा।
सूरतगढ़ में कई संस्थाएं आरएएस की तैयारी करवाने में लगी थी व कई व्याख्याता अपने स्तर पर लगे हुए थे। प्रत्येक संस्था अपनी अपनी आरएएस की चयन सूची जारी कर दे तो सभी की प्रगति का ब्यौरा आ सकेगा और सही तस्वीर और सभी संस्थाओं व व्यक्तियों के नाम उपलब्ध हो जाऐंगे।
एक सच्च और कि कोचिंग वालों ने अपना ढ़ोल पीटा लेकिन सूरतगढ़ के उन लोगों का नाम कहीं नहीं लिया दिया जो बिना उनकी कोचिंग के चयन हुए थे। सूरतगढ़ की बड़ाई करनी थी तब उनका नाम भी संख्या में जुडऩा चाहिए था। उनका नाम बाद में एक एक कर सोशल मीडिया से सामने आने लगे तब कुछ अखबारो में नाम आए। 

कोचिंग संस्थाएं लैटर हेड पर आरएएस की विज्ञप्ति जारी क्यों नहीं करती?

कोचिंग संस्थाएं लैटर हेड पर आरएएस की विज्ञप्ति जारी क्यों नहीं करती?


कोचिंग संस्थाएं लैटर हेड पर हर कार्य की विज्ञप्तियां जारी करती रही हैं तब आरएएस चयन सूची की विज्ञप्ति जारी करने में डर क्यों?
राजस्थान प्रशासनिक व अधिनस्थ सेवाओं का सन 2012 की परीक्षा का मुख्य परिणाम 17 जुलाई को घोषित होने के बाद कोंचिंग संस्थाओं ने चयन संख्या के साथ अपने अपने दावे प्रचारित करने शुरू कर दिए। इन दावों में केवल संख्या ही बताई जाती रही। ऐसा प्रचारित किया गया कि सूरतगढ़ संपूर्ण राजस्थान में पहले नम्बर पर रहा है। जब दावों पर सवाल उठने लगे और जानकारियां विस्तृत मांगी जाने लगी कि अभ्यर्थी ने कब से कब तक संस्था में प्रशिक्षण लिया तब वहां अध्यापन करने वालों को ,कराने वाले को और संस्थाओं को भी चिढ़ होने लगी। संस्थाओं की ओर से फेस बुक आदि पर अध्यापन कराने वाले टीम के नाम बताए जाने लगे जबकि नाम तो उन लोगों के पूछे जा रहे हैं जो आरएएस में चुने गए व संस्थाएं उनकी संख्या के दावे कर रही है। इन अध्यापन कराने वाली टीमों में वे नाम भी हैं जो आरएएस की परीक्षाएं देते देते थक गए और चुने नहीं जा सके। उनके अवसर भी पूरे हो गए। अगर उनकी कोचिंग में ही सार था तब वे स्वयं क्यों नहीं चुने जा सके। स्पष्ट है कि अभ्यर्थी की व्यक्तिगत मेहनत अधिक पावरफुल रही। यहां बिंदु यह नहीं है कि कौन रह गया। बिंदु यह है कि जब कोचिंग संस्थाएं अपने हर कार्य की प्रेस विज्ञप्तियां जारी करती रही है और उनके अनुसार आयोजन होते रहे हैं तथा आयोजन की सफलताओं के समाचार छपते रहे हैं तब आरएएस के चयन का अति महत्वपूर्ण समाचार कोचिंग संस्थाएं विज्ञति के रूप में जारी करने से क्यों डर रही हैं? विज्ञप्ति में उनके नाम दे दिए जाएं जिन्होंने संस्था से कोचिंग ली और कब ली? संस्थाओं के पास में तो हरके अभ्यर्थी का संपूर्ण रिकार्ड है। उन्होंने कब प्रशिक्षण लिया था उसके शुल्क की रसीदें तक कटी हुई है।
आखिर नाम सहित विज्ञप्ति जारी करने में कोई तो भय है जिसके कारण सब ओट में रखा जा रहा है। संस्थाओं को डर है कि नाम दे दिया जाए व बाद में संबंधित व्यक्ति खंडन करदे तब क्या होगा? विज्ञापन में भी नाम और फोटो छपवाने में भय। लेकिन यह सच को तो नहीं होना चाहिए। किसी भी कोचिंग संस्था में सच में कोचिंग ली है तब संस्था धड़ले से नाम व फोटो सहित विज्ञप्ति जारी कर सकती है और ये जारी की जानी चाहिए।
आरएएस अधिकारी जो कार्यरत हैं,जो अभी चुने गए हैं व जो कोचिंग चलाते हैं उन सभी के सामने एक सवाल है।
सूरतगढ़ से कौन कौन अभ्यर्थी आरएएस में चुने गए?
उत्तर का ऑपशन है। अ- जिसमें संख्या दी गई। ब- जिसमें नाम दिए गए।
इसका सही उत्तर क्या होगा? सही उत्तर वह होगा जिसमें नाम दिए गए होंगे। वह उत्तर गलत होगा जिसमें संख्या दी गई होगी। कोचिंग संस्थाएं चलाने वाले और वहां अध्यापन करने कराने वाले इतना तो जानते ही हैं। जब साँच को आँच नहीं तो संस्थाओं को असली सूची जारी करनी चाहिए और वह अवधि भी जब कोंचिंग ली दी गई।

सूरतगढ़ से सच्च में कितने आरएएस चयन हुए? झूठ की संख्या चलाई गई:

शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2015

गुरूशरण छाबड़ा के आमरण अनशन पर भाजपा व कांग्रेस में राजनीति:


चिकित्सालय से छूटते ही आमरण अनशन पर बैठ गए:
कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया:
भाजपा ने छाबड़ा को कांग्रेस का मुखौटा बताया:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 16 अकटूबर। पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा को आमरण अनशन से उठा कर पुलिस ने चिकित्सालय में भर्ती कराया था मगर 15 अक्टूबर शाम को चिकित्सकों ने फिट करार देकर डिस्चार्ज कर दिया और छाबड़ा वापस शहीद स्मारक पर पहुंचे तथा आमरण अनशन पर बैठ गए।
छाबड़ा के अनशन पर कांग्रेस और भाजपा में जमकर राजनीति शुरू हो गई है।
कांग्रेस नेताओं ने छाबड़ा के अनशन पर गौर नहीं करने पर भाजपा सरकार को संवेदनहीन बताया है। इस पर भाजपा ने छाबड़ा को कांग्रेस का मुखौटा करार दिया है। मामला समाचारों के कारण और गरमा गया है जिसका कारण यह रहा है कि छाबड़ा के चिकित्सालय से छूटते ही पुन: शहीद स्मारक पर पहुंच कर अनशन शुरू कर देने की भनक पड़ते ही चौदह पन्द्रह चैनल रिपोर्टर वहां पहुंच गए तथा अचानक सभी चैनलों पर यह समाचार और दृश्य दिखलाए जाने लगे।
छाबड़ा ने मोबाइल पर शाम को पांच बजे वार्ता में बताया कि भाजपा नेता अनशन से बौखलाए हुए हैं। छाबड़ा ने कहा कि 2 अक्टूबर को शहीद समारक जयपुर में अनशन शुरू किया था। पुलिस ने 6 अक्टूबर को उठाकर चिकित्सालय में गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती करा दिया जहां पर अनशन जारी था। इसके बाद सरकार के निर्देश पर पुलिस ने उनको ऐसे वार्ड में अपराधियों के साथ रखा जहां पर उनका ईलाज किया जाता है। सरकार डराना व झुकाना चाहती थी लेकिन जब कुछ भी नहीं कर पाई तब 15 अक्टूबर को चिकित्सकों से फिट की रिपोर्ट करवाई और चिकित्सालय से डिस्चार्ज करवा दिया।
छाबड़ा ने कहा कि उन पर कांग्रेस का मुखौटा होने का आरोप लगाना अनुचित है क्योंकि शराबबंदी और शक्तिशाली लोकपाल की मांग को लेकर आमरण अनशन अशोक गहलोत की सरकार में शुरू किया था।
नोट: गुरूशरण छाबड़ा आरएसएस के कार्यकर्ता हैं। जनसंघ से राष्ट्रीय पार्टी के सदस्य रहे हैं।आपातकाल 1975 के विरोध में जेल गए और जेल में भी आमरण अनशन किया था। जनता पार्टी के टिकट पर 1977 में सूरतगढ़ से विधायक चुने गए थे। उस समय जनता युवा संघ में जब वसुंधरा राजे उपाध्यक्ष थी तब छाबड़ा भी उपाध्यक्ष ही थे।
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बुधवार, 14 अक्तूबर 2015

गोपसिंह का राम रोल रेलवे रामलीला की जान होता था:


भरत मिलाप और लक्ष्मण मूर्छा में राम के अभिनय पर पंडाल रो पड़ता था:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़,14 अक्टूबर 2015.
रेलवे रामलीला की शुरूआत हुए करीब 45 साल हो गए हैं। पुराने लोको के पास में हर साल राम लीला का मंचन होता है।
शुरूआत के सालों में गोपसिंह और प्रेमसिंह दोनों सग्गे भाई राम व लक्ष्मण का रोल निभाया करते थे। दोनों का अभिनय ऐसा होता कि लोगों में दिन रात चर्चा होती थी। घर की खिड़की में से बच्चे सारे दिन कमरे में झांकते रहते थे राम को लक्ष्मण को देखने को।
भरत मिलाप और लक्ष्मण मूर्छा के अभिनय में राम का मिलन और विलाप देख कर पंडाल में उपस्थित नर नारी रो पड़ते थे।
इन दोनों छोटे भाईयों का अभिनय देखने का अवसर बहुत मिला। लोगों की सराहना भरे वाक्य सुन सुन कर प्रसन्न होता था।
रेलवे में अभी भी रामलीला होती है।
प्रेमसिंह सूर्यवंशी प्रमुख उदघोषक मंच संयोजक के रूप में उपस्थित होते हैं।
राम लक्ष्मण का रोल कई साल पहले अन्य कलाकार प्रस्तुत करने लगे थे।
गोपसिंह सूर्यवंशी आपातकाल 1975 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में बंदी रहे। पार्षद चुने गए। अनेक सामाजिक कार्य और संघर्षों में जूझते हुए दिनांक 15-12-2014 को संसार से विदा हो गए। 


यहां पर रामलीला का एक चित्र प्रस्तुत है जिसमें बीच में गोपसिंह है।

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मंगलवार, 13 अक्तूबर 2015

करणी प्रेस इंडिया के पाठक 3 लाख 50 हजार की ऊंचाई से पार



नवरात्रों के शुभारंभ पर पाठकों को यह शुभ कामना:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़, 13 अक्टूबर 2015.
सच्च को सामने लाने में और दबे हुए लोगों की आवाज बन लोगों को जगाने का प्रयास करने में अग्रणी इंटरनेट ब्लॉग साईट करणी प्रेस इंडिया के पाठक 3 लाख 50 के शिखर को पार कर गए। यह ऊंचाई पार करना प्रसन्नता पैदा करने वाली और आगे बढऩे की प्रेरणा देने वाली रहेगी। इस साइट को देखना या इसके लिंक को फेस बुक पर देख पढ़ कर तत्काल विचार प्रगट करना पाठकों का ऐसा कदम रहा है कि उससे तेजी आई है।

राजनैतिक आपराधिक सामाजिक धार्मिक आर्थिक विषय शहरी व ग्रामीण,सरकारी व गैर सरकारी सभी में आगे रहने का प्रयास सदा सफल रहा है।

हमारे समाचार,विचार,टिप्पणियां,लेख,कहानियां,कविताएं एवं फोटो कवरेज को आसपास और देश प्रदेश में सभी वर्गों द्वारा सराहे गए हैं।
हमारे असंख्य पाठकों ने आलोचनाओं समालोचनाओं और दिल खोल कर दी गई राय ने ही इस ऊंचे शिखर पर पहुंचाया है। उनकी आलोचनाओं भरी राय से ही आगे और आगे बढऩे की प्रेरणा मिली है।
उच्च कोटि की टिप्पणियों व समाचारों के लिए लोग इस साइट पर भरोसा करते हुए देखते हैं।
सदा ऐसे मामले उठाने में आगे रहे हैं जो अखबारों आदि में नहीं होते। 




अनशनकारी गुरूशरण छाबड़ा चिकित्सालय में भर्ती से हुई बात:


करणीदानसिंह राजपूत से शाम 5:03 पर हुई बात:
आरहवें दिन आमरण अनशन जारी:
2 अक्टूबर से शराबबंदी को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे:6 अक्टूबर को एसएमएस में भर्ती कराए गए:
-विशेष समाचार-
सूरतगढ़, 13 अक्टूबर। राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और शक्तिशाली लोकपाल की मांग को लेकर पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा का आमरण अनशन बारहवें  दिन चिकित्सालय में भी जारी है। आपातकाल के लोकतंत्र साथी करणीदानसिंह राजपूत से शाम को छाबड़ा की बातचीत हुई। छाबड़ा अपने निर्णय पर अडिग हैं और सूरतगढ़ के साथियों को संदेश दिया है कि अनशन जारी रहेगा।
पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा को एसएमएस में पहले गहन चिकित्सा ईकाई में रखने के बाद पुलिस पहरे में उस स्थान पर रखा गया है जहां पर अपराधियों की चिकित्सा की जाती है। सरकार की यह पुलिसिया कार्यवाही निन्दनीय है,छाबड़ा जी कोई अपराधी नहीं है। आपातकाल में भी वे जेल में बंद रहे हैं।
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शराबबंदी को लेकर अलग अलग मत हो सकते हैं। लेकिन यह सच है कि इससे अपराध बढ़ रहे हैं।
छाबड़ा के समर्थन में जो लोग अपने विचार रखते हैं उनको अपने निकटतम प्रशासनिक अधिकारी के मारफत मुख्यमंत्री व राज्यपाल को ज्ञापन भेजने चाहिए।

रविवार, 11 अक्तूबर 2015

अनशनकारी गुरूशरण छाबड़ा को चिकित्सालय में अपराधियों वाली जगह रखा:


छाबड़ा ने कहा सरकार डराना और झुकाना चाहती है मगर न न डरूंगा न झुकूंगा:
काफी कमजोर मगर अनशन का जोश:मरते दम तक अनशन पर रहूंगा:
2 अक्टूबर से शराबबंदी को लेकर आमरण अनशन पर थे:6 अक्टूबर को एसएमएस में भर्ती कराए गए:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़, 11अक्टूबर। पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा को एसएमएस में पहले गहन चिकित्सा ईकाई में रखने के बाद पुलिस पहरे में उस स्थान पर रखा गया है जहां पर अपराधियों की चिकित्सा की जाती है। सरकार की यह पुलिसिया कार्यवाही निन्दनीय है,छाबड़ा जी कोई अपराधी नहीं है। आपातकाल में भी वे जेल में बंद रहे हैं।
छाबड़ा ने आज एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि सरकार ऐसा करके उनको डराना और झुकाना चाहती है लेकिन वे न डरेंगे न झुकेंगे। छाबड़ा ने कहा कि सरकार के साथ लिखित समझौता हुआ था जिसका पालन नहीं किया जा रहा है।
छाबड़ा का स्वास्थ्य गिरने पर पुलिस ने 6 अक्टूबर को एसएमएस में भर्ती कराया। छाबड़ा राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर 2 अक्टूबर महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री की जयंती से शहीद समारक जयपुर पर आमरण अनशन पर थे। संपूर्ण राजस्थान में उनकी इन मांगों पर अनेक संगठनों का समर्थन मिल रहा है।
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शराबबंदी को लेकर अलग अलग मत हो सकते हैं। लेकिन यह सच है कि इससे अपराध बढ़ रहे हैं।
छाबड़ा के समर्थन में जो लोग अपने विचार रखते हैं उनको अपने निकटतम प्रशासनिक अधिकारी के मारफत मुख्यमंत्री व राज्यपाल को ज्ञापन भेजने चाहिए।

शनिवार, 10 अक्तूबर 2015

मेरा परींदा मेरी चिडिय़ा -- कविता




धुंधलाती रोशनी बिखेरता
अस्तांचल में जाता सूरज हर रोज
तुम्हारा छत पर जाकर
चुग्गा बिखेरना हर रोज।
चिडिय़ां कबूतर कमेडिय़ों को
निहारती तुम्हारी आँखे हर रोज
छत के किनारे पर बनी
चौकी पर बैठी तुम हर रोज।
कभी तुम चिडिय़ों को निहारती
कभी ध्यान में कबूतरों की गटर गूं
कभी कमेडिय़ों की घूं घूं पर
नजर उठाती तुम हर रोज।



तुम्हारा यह चुग्गा डालना हर रोज
सूरज की अस्तांचल लाली में
लाल होता दमकता तुम्हारा चेहरा
संपूर्ण लाली में नहा जाती हो हर रोज।
परींदे आते एक एक चुगते दाने
और उड़ जाते एकदम से सब
तुम निहारती ओझल होने तक
छत से उतरती सपना लिए हर रोज।
मैंने सालों बाद तुम्हें देखा
चुग्गा बिखेरते
कितनी खोई तन्मयता में
गुनगुना रही थी कोई गीत।
तुम्हारा चेहरा बता रहा था
मन के भाव खुशियां समाये
मैं इतना समीप था तुम्हारे
कि छू सकूं चुग्गे का कटोरा
अहसास करा दूं अपनी उपस्थिति
लेकिन तुम खोई थी परींदों में।
यह ध्यान ही तुम्हारा है शक्तिदाता
तुम नहीं थकी और न थकोगी
चुग्गा खिलाते परींदों को हर रोज।
मैं साथ हूं तुम्हारे हर रोज
साढिय़ां चढ़ती हो तब पीछे
सीढिय़ां उतरती हो तब आगे
मैं चलता हूं साथ हर रोज
क्यों कि मैं समय हूं
जो तुम्हें गति देता हूं हर रोज।
कितने सालों से चुग्गा खिला रही तुम
मौन व्रत चेहरा लिए हर रोज
आओ मैं सिखलाता हूं बोलो
आओ री चिडिय़ों खाओ री चिडिय़ों
आती रहना रोज आती रहना रोज।



पंखेरू आते चुग्गा खाते और उड़ जाते
तुम्हारी आँखें उनमें कुछ खोजती
आते जाते और चुग्गा खाते
हर पंखेरू चिडिय़ा तक को निहारती।
मैं हर रोज देखता तुम्हारे हाव भाव
और एक दिन पूछ लिया तुमसे
तुमने जवाब दिया दर्द भरा
मेरा परींदा और मेरी चिडिय़ा
ना जाने कहां उड़ गए हैं।
मैं इंतजार में हूं कभी तो आयेंगे
मेरा परींदा मेरी चिडिय़ा।
तुम्हारा विश्वास साल दर साल
दृढ़ और दृढ़ होता रहा है
एक परींदे और एक चिडिय़ा का इंतजार।
तुम खिला रही हो चुग्गा सालों से
ये सैंकड़ों परींदे और प्यारी सी चिडिय़ां
तुम्हारी ही हैं यह मानो
और चुग्गा खिलाती रहो रोज।
--


करणीदानसिंह राजपूत
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़ 
94143 81356

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गुरुवार, 8 अक्तूबर 2015

ममता सारस्वत को पोषाहार घोटाले से बचाने में सूरतगढ़ प्रेस मुंह क्यों छिपा रही है?


प्रेस क्लब पत्रकार वार्ता आयोजित कर ममता का बयान लेकर बता सकता है सच्च।
सूरतगढ़ में पोषाहार गायब होने में कई बार जाँचें हो गई:99 हजार की रिकवरी के नोटिस जारी हो गए:
लेकिन प्रेस क्लब के सदस्य पत्रकारों ने पांच दस लाइन की न्यूज तक नहीं बनाई:
ममता सारस्वत सूरतगढ़ की बेटी है तो फिर सूरतगढ़ के पत्रकारों का कुछ तो सोच होगा?
स्पेशल रिपोर्ट-
सूरतगढ़। महिला बाल विकास विभाग सूरतगढ़ में बच्चों के लिए आने वाले पोषाहार में लाखों की गड़बड़ी होने और जाँच में सारस्वत धर्मशाला में काफी संख्या में भरे हुए थैले सारस्वत धर्मशाला में बरामद होने,कई बार जांच हो जाने,93 हजार रूपए की तत्कालीन सीडीपीओ व स्टोरकीपर से वसूली के आदेश हो जाने के समाचार श्रीगंगानगर से पत्रिका में लगते रहे हैं।
जिस अविधि में यह गड़बड़ी हुई उस अवधि में ममता सारस्वत यहां पर महिला बाल विकास अधिकारी यानि कि सीडीपीओ थी। आजकल वे हनुमानगढ़ में इसी पोस्ट पर हैं।
ममता सारस्वत का पीहर सूरतगढ़ में है और उनके पहले राजस्थान की अधिनस्थ सेवाओं में चयन होने,सर्विस लगने के बाद तथा अब सन 2012 की राजस्थान प्रशासनिक सेवा प्रतियोगिता में चुनी जाने के समाचार लगे हैं तथा बधाई के बोर्ड अभी लगे हुए हैं।
ममता सारस्वत के कार्यकाल में पोषाहार में गड़बड़ी हुई वह निश्चित रूप से गरीब बच्चों के मुंह में जाने वाला था। उसमें जो भी दोषी हो वह बचना नहीं चाहिए।
लेकिन सूरतगढ़ के जो पत्रकार चयन होने पर कसीदे काढ़ते रहे हैं,उन्होंने कभी एक समाचार भी नहीं बनाया। सूरतगढ़ के पत्रकारों ने यह जाानने की कोशिश भी नहीं की कि सच्च क्या है?
श्रीगंगानगर से पत्रिका में कई समाचार छपे। लेकिन यहां के प्रेस क्लब के अध्यक्ष हरिमोहन सारस्वत व सदस्य पत्रकारों व अखबारों ने कभी भी ममता के लिए एक लाइन लिखने की कोशिश नहीं की। ममता से पूछा तक नहीं। उसका पक्ष भी जानने की कोशिश क्यों नहीं की? ममता के बचाव में खोजबीन करना तो दूर रहा।
सूरतगढ़ प्रेस क्लब के अध्यक्ष व सदस्य पत्रकार तथा अन्य पत्रकार जो स्वागत सत्कार करते रहे हैं वे अब पीछे क्यों हैं?
प्रेस क्लब के सदस्य बाहर के अधिकारियों को बचाने में उनको क्लीन चिट देने में ऐसे समाचार छापने में आगे रहे हैं तो फिर ममता तो सूरतगढ़ की है उसके लिए एक लाइन क्यों नहीं लिखी।
सूरतगढ़ के थानाधिकारी सीआई रणवीर साईं पर आरोप था कि पकड़े गए तीन चोरों को छोड़ दिया गया। आंदोलन चला। जांच की गई और पुलिस की जाँच में एक हैडकांस्टेबल को आरोपी बना कर जाँच का पत्र थमा दिया गया। पत्रकारों ने घटना की सच्चाई पर दो लाइन नहीं लिखी। सीआई को क्लीन चिट का शीर्षक लगा कर समाचार छापा। यह संदेश पत्रकार किसको देना चाह रहे थे? इस सीआई के कार्यकाल में आधी कीमत सस्ती कीमत पर सामान देने की बुकिंग के नाम पर लाखों रूपए लेने वाले थाने ले जाने के बाद छोड़ दिए गए थे।
अब विकलांगों को नौकरी देने के नाम पर तीस तीस हजार के ड्राफ्ट लेने वाले कस्टडी में तो लिए गए हैं मगर कार्यवाही क्या हुई है? कसीदे काढऩे वाले पत्रकार कैसे भूल गए वह घटना। क्लीन चिट का समाचार इस तरह से लगाया मानों कोई बहुत बड़ा किला फतह करके थानाधिकारी आया हो और अब सदा के लिए यहां पर पोस्टिंग हो गई हो। नगरपालिका के ईओ पर आरोपों के समाचार व एसीबी की जाँचें होने व कार्यवाही के समाचार भी नहीं लगाए गए। उपखंड अधिकारी के आवास पर नगरपालिका के 8 लाख रूपए लगा दिए गए। गलत लगाए गए लेकिन पालिका को हर घोटाले में क्लीन चिट देकर बचाव करते रहे। बाहरी अधिकारियों को बचाने में जब आगे आते रहे। तब अब क्या हो गया कि ममता सूरतगढ़ की होते हुए भी उसके लिए कोई समाचार नहीं बनाया गया?

बुधवार, 7 अक्तूबर 2015

आमरण अनशनकारी गुरूशरण छाबड़ा एसएमएस में भर्ती कराए गए:अनशन जारी:


2 अक्टूबर से शराबबंदी को लेकर आमरण अनशन पर थे:6 अक्टूबर को एसएमएस में भर्ती कराए गए:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़, 7 अक्टूबर। पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा का स्वास्थ्य गिरने पर पुलिस ने 6 अक्टूबर को एसएमएस में भर्ती कराया। छाबड़ा राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर 2 अक्टूबर महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री की जयंती से शहीद समारक जयपुर पर आमरण अनशन पर थे। संपूर्ण राजस्थान में उनकी इन मांगों पर अनेक संगठनों का समर्थन मिल रहा है।
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रविवार, 4 अक्तूबर 2015

वर्कशॉप के प्लॉट नं 174 व 175 के टुकड़े करना कानूनी गलत:जाँच रिपोर्ट में माना:


विधि सलाहकार की राय भी नहीं मानी गई:
उप निदेशक स्वायत शासन विभाग बीकानेर ने जाँच रिपोर्ट में माना:

पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु ने की थी शिकायत:
- स्पेशल रिपोर्ट  करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। पूर्व विधायक वरिष्ठ वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु ने दो वर्ष पूर्व मई 2013 में मुख्य सचिव व स्वायत्त शासन विभाग को अनेक मुद्दों पर नगरपालिका की शिकायत की थी। जिसमें वर्कशॉप ट्रक ट्रांसपोर्ट योजना के प्लॉट नं 174 व 175 के  खरीदारों द्वारा टुकड़े करना कानूनी गलत बताते हुए ईओ राकेश मेंहदी रत्ता और पृथ्वीराज जाखड़,पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल पर आरोप गलाए गए थे। सिद्धु ने आरोप में लिखा था कि इससे सरकारी कोष को भी हानि पहुंचाई गई।
उप निदेशक स्वायत्त शासन विभाग बीकानेर ने 31 मई 2013 को मौके पर पहुंच कर जांच की और उसकी रिपोर्ट बना कर 10 जून 2013 को शासन उप सचिव ,स्वायत्त शासन विभाग विभाग जयपुर को भेज दी। वह रिपोर्ट वहां पर 12 जून 2013 को पहुंच गई। इसके बाद नगरपालिका को भी यह मिली। नगरपालिका सूरतगढ़ में तो हाथी जैसे मैटर तक गायब हो जाते हैं सो यह रिपोर्ट भी दब गई। अब यह रिपोर्ट हाथ लगी है।/ सिद्धु ने यह शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में अलग से दी हुई है।/
रिपोर्ट में लिखा गया है कि उक्त विभाजन व नामान्तरण किए जाने से ट्रक ट्रांसपोर्ट योजना के उक्त भूखंड संख्या 174 व 175 का उपयोग  प्रयोजन एवं ले आऊट विचलित हो गया है। नगरपालिका की पत्रावलियों के अवलोकन से स्पष्ट है कि नगरपालिका के विधि सलाहकार द्वारा स्पष्ट रिपोर्ट लिखी गई कि उक्त उपविभाजन राज्य सरकार शहरी क्षेत्र /उप विभाजन पुनर्गठन सुधार/ नियम 1975 व राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धरा 171 के अध्यधीन परिपत्र दिनांक 19-2-2010 के तहत कार्यवाही की जाए। 
लेकिन नगरपालिका सूरतगढ़ ने उक्त अधिनियम व परिपत्रों की अवहेलना करते हुए उप विभाजन की कार्यवाही की। राजस्थान सरकार के नगरीय विकास विभाग के परिपत्र क्रमांक प.10/65/न.वि.वि.3/04 दिनांक 19 फरवरी 2010 का पूर्णत: उल्लंघन करते हुए नगरपालिका ने उक्त भूखंडों का उप विभाजन किया है। भूखंडों का उपविभाजन करने से नीलामी में बेचे भूखंडों का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो गया है। इस कारण से उक्त क्षेत्र का लैंड यूज /भू उपयोग भी प्रभावित हुआ है। इसके लिए भूमि शाखा के लिपिक व अधिषाषी अधिकारी स्पष्ट रूप से दोषी हैं।
इस प्रकरण का मुकद्दमा भ्रष्आचार निरोधक ब्यूरो में भी दर्ज हो गया है तथा जाँच तेजी से चल रही है। जिन लोगों को लाभ हुआ है उनको भी आरोपी माना गया है। ब्यूरो में सभी के बयान भी होने की सूचना है। एक संजय धुआ के बयान नहीं होने की सूचना कुछ दिन पहले तक थी।
एक सूचना यह भी है कि प्रभावित व्यक्तियों में से किसी ने राजस्थान उच्च न्यायालय में निगरानी याचिका भी सीआरसीपी धारा 482 के तहत लगा दी है जिसकी तारीख 16 अक्टूबर बताई जा रही है। उधर शिकायतकर्ता स.हरचंदसिंह सिद्धु ने बताया उक्त सीआरसीपी धारा 482 के तहत दायर की गई याचिका में शिकायतकर्ता को भी सुना जाने का नियम है। उनके पास अभी तक कोई सूचना नहीं है।

नींद न जाने कितनी दूर थी,,,,कविता.



नींद न जाने कितनी दूर थी
मैं देखते हुए तुम्हें,
जाग रहा था।
तुम बेचैन थी
नींद न जाने कितनी दूर थी।
प्यार की चाहत में
मधुर क्षण पाने को
मैं देखते हुए तुम्हें,
जाग रहा था।
तुम बेचैन थी
नींद न जाने कितनी दूर थी।
धीमी धीमी सी हवा
उड़ा रही थी आँचल।
तुम संवारती रही बार बार
कपोलों पर आती
झूमती लटों को।
तुम बेचैन थी
नींद न जाने कितनी दूर थी।
कपोल सुर्ख चाँदनी में
बेचैनी में भी शरमा रहे थे
गेसू काले काले झिलमिल करते
मिलन सुख की आस में,
इतरा रहे थे।
मैं देखते हुए तुम्हें,
जाग रहा था।
तुम बेचैन थी
नींद न जाने कितनी दूर थी।
तुम मिलन की आस में
नीची निगाहें धरती पर गड़ाए
मौन में मंथन कर रही थी।
मैं पाने की चाहत में
शांत था तुम्हें देखते हुए,
न जाने कब लहर आ जाए
और आलिंगन सपना बन जाए।
दोनों का धैर्य चरम पर था
लहर के इंतजार में।
न तुम खोना चाहती थी
न मैं खोना चाहता था।
मैं देखते हुए तुम्हें,
जाग रहा था।
तुम बेचैन थी
नींद न जाने कितनी दूर थी।
तुम मेरे समीप थी,
मैं तुम्हारे समीप था।
मिलने को आतुर थे दोनों,
बीच में हवा की दीवार थी।
--

करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
94143 81356.

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शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2015

पाकिस्तान के कब्जे का कश्मीर छुड़ाने की आशा बलवती:मोदी पर आशा:


- करणीदानसिंह राजपूत -
पाकिस्तान ने देश की आजादी के तुरंत बाद ही काबायलियों का आक्रमण करवाया और कश्मीर की आजादी के नाम पर एक हिस्से पर अतिक्रमण कर लिया। कश्मीर के राजा हरिसिंह ने भारत में मिलने का रास्ता अपनाया था। लेकिन उस समय के राजनेता जवाहरलाल नेहरू की राजनीति से यह मामला यूएनओ में चला गया। उसके बाद से आजतक पाकिस्तान में कश्मीर के नाम पर राज चलते हैं। और राज बदलते हैं। पाकिस्तानी सेना चाहे जो करे लेकिन वहां के सत्ताधारी चूं तक नहीं कर पाते। वे केवल समूचे कश्मीर की आजादी का राग अलापते रहते हैं।
पाकिस्तान ने कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा कर रखा है वहां पर दुनिया में चल रहे विकास को नहीं देखा जा सकता। पाकिस्तान वहां पर ऐसे राज कर रहा है मानो वहां के रहने वाले उसके गुलाम हैं। वहां के रहने वालों को रोजी रोटी तक का संकट आए दिन झेलना पड़ता है। लोग विरोध में आवाज तक उठाने में कतराते रहे हैं। आवाज उठाने पर सेना गोलियों से भून देती रही है। तंग हाल फटे हाल लोगों ने दुनिया में विकास को देखा है। वे लोग भारत वाले कश्मीर में भी विकास की बहती गंगा को देखते हैंञ तो उनके दिल दिमाग में भी आने लगा है कि वे पाकिस्तान में ठगे जा रहे हैं और आने वाली पीढिय़ां भी गुलामी जैसा जीवन जीयेगी।
पाकिस्तान ने वहां पर एक गड़बड़ी और कर रखी है कि काफी इलाका सड़क के नाम पर चीन के हवाले कर दिया है।
अब वहां पर स्वतंत्रता की आवाज उठाई जाने लगी है। वहां की सत्ता और सेना का कुछ कुछ विरोध होने लगा है। लोग अपने घरों से बाहर आकर विरोध करने लगे हैं।
वहां पर इतना ही नहीं भारत के पक्ष में प्रदर्शन होने लगे हैं। अब अधिक समय तक उनको गुलाम बनाए रखना संभव नहीं है।
लोगों को अब विश्वास होने लगा है कि भारत के प्रधानमंत्री कोई साहसिक कदम उठाएं और पीओके यानि कि पाकिस्तान ओक्यूपाई कश्मीर आजाद हो जाए और भारत में वापस आ जाए।
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