Friday, February 28, 2014

राजस्थान में आपातकाल के बंदियों की पेंशन अब शुरू हो जाएगी:



 आपातकाल के मीसी व रासुका बंदियों को पेंशन जनवरी 2014 से मिलेगी
30 अप्रेल तक आवेदन करना होगा
सूरतगढ़, 28 फरवरी।
राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की वसुंधरा राजे सरकार ने अपनी घोषणा के अनुसार आपातकाल के बंदियों को पेंशन देने की घोषणा कर दी है। पेंशन जनवरी 2014 से दी जाएगी। यह पेंशन 12 हजार रूपए मासिक होगी व इसके साथ में 12 सौ रूपए प्रतिमाह चिकित्सा भत्ता भी दिया जाएगा। यदि बंदी पुरूष रहा है तो उसके बाद में पत्नी को मिलेगी। यदि स्त्री है तो उसके बाद उसके पति को मिलेगी।
राजस्थान सरकार ने इस पेंशन को लागू करने के लिए 2008 में जो नियम बनाए थे उसी में संशोधन कर इसे लागू करने की अधि सूचना जारी हुई है।
अभी इसके लिए कोई नया आवेदन फार्म नहीं दिया गया है।
इसका राजपत्र प्रकाशन इंटरनेट पर सरकारी साइट पर नजर नहीं आया।

इसमें शांति भंग में बंदी बनाए गए राजनैतिक सामाजिक कार्यकर्ताओं को शामिल नहीं किया गया है।
लोकतांत्रिक मंच पिछले सालों से लगातार यह मांग करता रहा है कि यह पेंशन आपातकाल में शांति भंग नियमों में बंदी बनाए गए लोगों को भी मिलनी चाहिए। इसके लिए अदालत में रिट भी की हुई है। लोकतांत्रिक मंच के अशोक मलेठी मो.94138 29952 ने बताया है कि रिट को   कायम रखा जाएगा व अदालत में न्याय मांगा जाएगा।
श्रीगंगानगर जिले में तो शांति भंग में बंदी बनाए गए लोगों को राजनैतिक दर्जा भी दिया गया था,लेकिन उनको भी पेंशन में शामिल नहीं किया गया है।
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आपातकाल- शांतिभंग में जेलों में बंदियों को भी मिलेगी पेंशन 
 
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से आपातकाल में शांति भंग करने के आरोप में जेलों में बंद रहे कार्यकर्ता मिले
 

मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि पेंशन वास्ते जो कोई बिंदु छूट गया है उस पर विचार कर लिया जाएगा
 

खास रपट- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, x फरवरी w®vy. इंदिरागांधी द्वारा v~|z में आपातकाल लागू कर अनेक लोगों को जेलों में बंद कर दिया गया था। उनमें मीसा और रासुका बंदियों को पेंशन देने की घोषणा कर दी गई थी।
आपातकाल में शांतिभंग कानून के तहत भी हजारों लोगों को जेलों में बंद कर दिया गया था। उनके परिवार भी परेशान हुए व व्यवसाय आदि
बरबाद हो गए थे। अब शांतिभंग के तहत बंदी रहे लोगों को भी पेंशन सुविधा प्रदान की जाने का
बिंदु भी शामिल कर लिया जाएगा।
शांतिभंग में बंदी बनाए लोग यह पिछले सालों से कर रहे थे।
मुख्यमंत्री की जनसुनवाई में आज कई कार्यकर्ता मिले और इस मांग से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि जो बिंदु छूट गया है उस पर विचार कर शामिल कर लिया जाएगा।

इस आश्वासन पर प्रतिनिधि मंडल के लोग पूरे आश्वस्त हो गए हैं।
पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने दोपहर को यह सूचना मुझे दी और उसके बाद ईटीवी पर भी यह समाचार रिलीज हुआ है।
राजस्थान के हजारों परिवारों को इससे लाभ मिल सकेगा।
सूरतगढ़ से शांति भंग में vw कार्यकर्ता बंदी बनाए गए।
पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत को श्रीगंगानगर में wz जुलाई को पकड़ा गया।  गुरूशरण छाबड़ा पूर्व विधायक जो अब जयपुर में रहते हैं व पत्रकार मुरलीधर उपाध्याय पूर्व पार्षद जो अब आफसेट प्रेस व्यवसाय में हैं,ने सूरतगढ़ में गिरफ्तारी दी जिनको श्रीगंगानगर जेल में भेज दिया गया था। वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु पूर्व विधायक, स.गुरनामसिंह लाइनपार रहते हैं,स्व.कुशालचंद चिलाना,स्व.श्यामलाल चिलाना,इनका भाई भगवानदास चिलाना जो अब घड़साना में व्यवसाय करते हैं। स्व. हरिराम चीनिया,मांगीलाल जैन जो अब घड़साना में हैं। स्व. भगवानदास धाणका,सोहनसिंह सोढ़ा जो आजकल बीकानेर में रहते हैं।
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इंदिरा गांधी ने अपने शासन की विफलता में सन v~|z में आपातकाल लगा कर जो जुल्म ढ़हाए वे आज के y®-z® वर्ष के लोगों को मालूम नहीं हैं। बिना किसी कारण के राजनैतिक लोगों को डीआइआर और मीसा में तथा शांति भंग में जेलों में ठूंस दिया गसा था। जबरन नसबंदियां कही गई जिनमें नव विवाहितों बुड्ढों व कुंवारों को भी पकड़ कर नसें काट दी गई थी व प्रपत्र पुलिस की मौजूदगी में झूठे भरवा लिए गए थे। अखबारों पर सेंसर लगा दिया गया था। इतना भय पैदा कर दिया गया था कि बंदी लोग बाहर आए व तारीखों पर आए तब लोग नमस्कार करने और मिलने तक से कतराते थे। व्यवसाय बरबाद हो गए थे।
सूरतगढ़ में आपातकाल के विरोध में आमसभा की जाने के बाद नेता और कार्यकर्ता भूमिगत हो गए थे। बाद में पकड़े गए व नारे प्रदर्शन के साथ गिरफ्तारियां दी। सच्च में जांबाज और जोशीले लोगों ने यह कार्य किया था।
सूरतगढ़ से डीआईआर यानि कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में vv कार्यकर्ता बंदी बनाए गए थे। इस कानून में एक वर्ष तक तो न्यायालय में चुनौती ही नहीं दी जा सकती थी।
एक दल में  { जने गोपसिंह सूर्यवंशी पूर्व पार्षद निवासी लाइनपार वार्ड नं v~ सूरतगढ़, सुगनपुरी जो अब अध्यापक है,महावीर प्रसाद तिवाड़ी जो फार्म में सर्विस में है, नेमीचंद छींपा पूर्व पार्षद हैं,मदनलाल मेघवाल जो अब जैतसर में रहते हैं,चम्पालाल जो आजकल हैदराबाद में रेस्टोरेंट चलाते हैं। इन्होंने vz  दिसम्बर v~|z  को गिरफ्तारी दी थी।
दूसरे दल में पांच जने बलराम वर्मा कांगे्रस नेता,हनुमान प्रसाद मोट्यार जो आजकल ग्राम सचिव हैं,लक्ष्मण शर्मा माकपा नेता हैं,रामकुमार पारीक जो आजकल ग्राम कीकरवाली रायसिंहनगर में रहते हैं। मेघसिंह यहां दुग्ध बेचते थे और अब भीलवाड़ा में अन्य व्यवसाय कर रहे हैं।

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आपातकाल के बंदियों को पेंशन वसुंधरा राज मंत्रीमंडल का निर्णय
भाजपा की सरकार के मंत्रीमंडल में x जनवरी w®vy को निर्णय हुआ।
 
हजारों परिवारों को लाभ मिलेगा-वसुंधरा के पिछले राज में पेंशन देने का कानून बनाया गया था। अशोक गहलोत सरकार ने इसे रोक दिया था। अब भाजपा का राज आने के बाद इसे लागू कर दिया। भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र में भी यह घोषित था।

पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने मोबाइल फोन पर यह सूचना दी। इसके बाद लोकतांत्रिक मंच से भी बात हुई। इतने में ही टीवी पर न्यूज भी आनी शुरू हो गई।

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मीसा एवं डीआइआर बंदियों की पेंशन अब शुरू हो जाएगी:
 

वसुंधरा राजे ने पिछले कार्यकाल में कानून बनाया मगर राज बदल गया तथा अशोक गहलोत सरकार ने शुरू होने पर रोक लगा दी थी 
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तीसरे स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों व परिवारों को मिलेगा लाभ
सूरतगढ़ से 16 लोगों ने इंदिरा गांधी के आपातकाल को चुनौती देते हुए गिरफ्तारी दी थी
आपातकाल में शांतिभंग में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था
 

-------विशेष लेख- करणीदानसिंह राजपूत:आपातकाल में शांतिभंग में बंदी बना गए थे---------


इंदिरागांधी ने अपने प्रधानमंत्रीत्व काल के कुशासन में जनता को कुचलने के लिए सन 1975 में आपातकाल की घोषणा कर भयानक क्रुरताएं की थी जिसका पूरे देश में विरोध हुआ था। 
सूरतगढ़ देश का पहला एकमात्र शहर था जिसमें आपातकाल लगाते ही  विरोध में आमसभा हुई थी।
आपातकाल के विरोध में कई लोगों ने गिरफ्तारियां दी व कई लोगों को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार कर जेलों में ठूंस दिया गया था।
श्रीमती वसुंधरा राजे ने अपने पिछले मुख्यमंत्रीत्व काल में राजस्थान मीसा एवं डीआइआर बंदियों की पेंशन नियम 2008 बनाया था जो राजस्थान के राजपत्र के विशोषांक में दिनांक 17 सितम्बर 2008 को प्रकाशित हुआ था। इस नियम के तहत प्रति माह 6000 रूपए पेंशन व 600 रूपए मेडिकल भत्ता मिलना था। संभव है कि वसुंधरा राजे प्रपत्र भरे जाने के समय से इसे लागू करदे और अब महंगाई आदि को ध्यान में रखते हुए राशि में वृद्धि भी करदे। इसके अलावा जो लोग शांति भंग में जेलों में ठूंसे गए उनको भी पेंशन लागू करदे।
इस कानून के तहत प्रभावित लोगों ने अपने प्रपत्र राज्य सरकार के लिए जिला कलक्टर को सौंपे। उन पर पेंशन देने की प्रक्रिया शुरू होने ही वाली थी कि राज बदल गया। राजस्थान में अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार को सत्ता मिलने के बाद इस पर रोक लगा दी गई। इसे लागू ही नहीं किया गया। कांग्रेस ने कहा कि आपातकाल के बंदियों को स्वतंत्रता सेनानियों के बराबर का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
    इसके बाद राजस्थान में लोकतंत्र रक्षा मंच का गठन किया गया और उसके तहत संघर्ष शुरू किया गया व कई बार सम्मेलन आयोजित किए गए। इस मंच के वर्तमान में अध्यक्ष नंदलाल नागर हैं।
पूर्व अध्यक्ष कौशल किशोर जैन की ओर से राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर बैंच में एक याचिका केस नं 7176-2010 प्रस्तुत की गई जिसके पैरवीकार प्रसिद्ध वकील भरत व्यास हैं जिसकी जनवरी 2014 में तारीख है।
    वर्तमान में मंच के संरक्षक फरीदुल्लाह कोटा मो.9214528581 और कोटा संभाग संयोजक अशोक मलेठी मो.94138 29952 से व्यापक जानकारी ली जा सकती है।
सम्पूर्ण प्रदेश में इसके लिए संभाग संयोजक बनाए हुए हैं।
फरीदुल्लाह व अशोक मलेठी ने इस लेखक से अनेक बार बात की है और बताया है कि मंच की यह मांग है कि शांतिभंग के आरोप में बंदी बना गए लोगों को भी पीड़ा और आर्थिक हानि उठानी पड़ी व परिवार पीडि़त हुए थे इसलिए उनको भी पेंशन शुरू की जाए।
अशोक मलेठी से मोबाइल वार्ता में ताजा जानकारी दिनांक 15 दिसम्बर 2013 को मिली है।
उन्होंने बताया कि आपातकाल की पेंशन 4 राज्यों में प्राप्त हो रही है। यूपी में 3 हजार रू, बिहार में 5 हजार रू,मध्यप्रदेश में 15 हजार रू तथा छत्तीसगढ़ में 15 हजार रू. प्रतिमाह है। मंच की मांग यह है कि सभी राज्यों में एकरूपता करते हुए प्रतिव्यक्ति यह राशि 15 हजार रूपए की जाए।
 

-- लेखक राजस्थान सरकार के जन संपर्क विभाग द्वारा अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार हैं। सूरतगढ़। मोबा.9414381356
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