Tuesday, April 26, 2011

आंचल संस्थान द्वारा चलाये जा रहे वृद्वाश्रम पर लगे आरोप

आंचल संस्थान द्वारा चलाये जा रहे वृद्वाश्रम पर लगे आरोप
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को शिकायत 
सामुदायिक भवन वृद्वाश्रम
दोषियों पर कार्यवाही की मांग आन्दोलात्मक कदम की चेतावनी
करणीदान सिंह राजपूत
सूरतगढ़ 25 अप्रैल:- नागरिक अधिकार मंच के सचिव सुरैष कौल व सदस्य हरीष गिरी ने मुख्यमंत्री व एडीजी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरों को ईमेल व डाक के जरिये सूरतगढ में चल रहें वृद्वाश्रम के लिए सामुदायिक भवन को नियम विरूद्व हस्तान्तरण करने के मामले में जांच की मांग की है। कौल व गिरी ने अपनी षिकायत में कहा कि एक अनुभवनहीन संस्था को बिना नियम व कायदे के लोगों के उपयोग में आने वाला सामुदायिक भवन हस्तान्तरित कर दिया है। उन्होंने अपने षिकायत पत्र मे उल्लेख किया है कि नगरपालिका अध्यक्ष बनवारी लाल मेघवाल ने स्वयं को व अपने परिचित एक स्थानीय दैनिक अखबार से जुडे लोगों को फायदा पहुचाने के लिए ईओ भॅंवरलाल सोनी के साथ मिलकर 22-9-2010 की नगरपालिका की बैठक में इस आषय का प्रस्ताव रखा कि वार्ड न0 2 माणकसर लिंक रोड पर नगरपालिका द्वारा निर्मित सामुदायिक भवन का वृद्धाश्रम के रूप में उपयोग किया जाये। उक्त प्रस्ताव पार्षदों द्वारा पारित किया गया जो मंडल की बैठक में रखा गया और अध्यक्ष व ईओ को इस बारे में कार्यवाही करने के सभी अधिकार दिये गये। बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पास होने के बाद ईओ व चेयरमैन ने किसी अखबार में न तो विज्ञप्ति निकाली और न ही विज्ञापन निकाला कि नगरपालिका की ओर से वृद्धाश्रम का संचालन करने हेतु क्लब/एन.जी.ओ./संस्था आवेदन कर सकती है तथा किस दिनांक तक इस हेतु आवेदन लिये जायेगें तथा इस हेतु पात्रता क्या होगी। नगरपालिका के नोटिस बोर्ड आदि पर भी इस बाबत् कोई सूचना चस्पा नहीं की गई। बिना किसी सार्वजनिक सूचना के आष्चर्यजनक रूप से दिनांक 27 अक्टूबर 2010 को आंचल नामक सार्वजनिक प्रन्यास की ओर से हरिमोहन सारस्वत ने नगरपालिका सूरतगढ में वृद्धाश्रम संचालन हेतु आवेदन प्रस्तुत किया जिसकी कमेटी में चेयरमैन बनवारी लाल मेघवाल सहित, एक दैनिक अखबार से जुडे लोग, पार्षद, पार्षद पति शमिल थे। आंचल प्रन्यास की कमेटी में चेयरमैन नगरपालिका सूरतगढ स्वयं थे इसलिए बिना कोई जॉंच किये ईओ किषनाराम संगवा ने वार्ड न0 2 स्थित माणकसर लिंक रोड पर नगरपालिका द्वारा निर्मित सामुदायिक भवन जो कि गरीब, मजलूम व वार्ड के निवासियों के सार्वजनिक उपयोग के काम आता था आंचल प्रन्यास को हस्तांतरित कर दिया और यह सुविधा भी दे दी कि बिजली पानी के बिल का भुगतान भी नगरपालिका करेगी। जबकि बिजली पानी के बिल का भुगतान बाबत् नगरपालिका की बैठक में कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था। दिनांक 22-9-2010 की नगरपालिका बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव पास हुआ था कि कोई समाज सेवी संस्था अपने पंजीकरण दस्तावेजों सहित आवेदन करती है तो मंडल बैठक में प्रस्ताव रखा जा सकता हैं लेकिन आवेदन आने के बाद मंडल की बैठक में प्रस्ताव पास करवाये बगैर आंचल ट्रस्ट को सामुदायिक भवन हस्तांतरित कर दिया गया जबकि पहले इसे मंडल की बैठक में रखा जाना था इसके बाद निर्णय लिया जाना था कि किस संस्था को वृद्वाश्रम संचालन हेतु दिया जाना है। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं में कम से 3 वर्ष पुराने रजिस्टेषन वाली संस्था/ट्रस्ट/एन.जी.ओ. को योजनाओं में शमिल किया जाता है लेकिन ऑंचल सार्वजनिक प्रन्यास 20-5-2010 को रजिस्टर्ड हुआ था तथा ऑंचल सार्वजनिक प्रन्यास ने वृद्वाश्रम चलाने के लिए आवेदन करते समय ट्रस्ट के सदस्यों के संकल्प (कार्यवाही रजिस्टर की प्रति) की प्रति आवेदन के साथ संलग्न नहीं की थी। आंचल ट्रस्ट को पूर्व में समाजोत्थान के कार्यों को करने का अनुभव है इस बाबत् कोई दस्तावेज न तो अधिषाषी अधिकारी द्वारा मॉंगे गये और न ही ट्रस्ट द्वारा प्रस्तुत किये गये। ऑंचल सार्वजनिक प्रन्यास ने आवेदन के समय बेलेन्सषीट व 3 वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट की प्रति भी पेष नहीं की जिससे ट्रस्ट की वृद्वाश्रम चला सकने की आर्थिक सक्षमता तय होती। आंचल सार्वजनिक प्रन्यास ने ट्रस्ट की डीड की प्रति जरूर संलग्न की जिससे मुताबिक 500-500 रूपये की प्रारम्भिक पूजी वाला ट्रस्ट सुनियोजित योजना वाले एक वर्ष के प्रोजेक्ट को कैसे चला सकता है। ऑंचल सार्वजनिक प्रन्यास किस तरह वृद्वाश्रम चलायेगा तथा कितना बजट, किस मद में तथा कितने स्वयंसेवको व कर्मचारियों की सहायता से योजना को पूर्ण रूप दिया जायेगा पूरी रूपरेखा प्रस्तुत नहीं। ऑंचल सार्वजनिक प्रन्यास में जब खुद नगरपालिका चेयरमेन बनवारीलाल मेघवाल एवं एकाउंटेट राकेष मेहन्दीरत्ता सदस्य है वे अपनी सदस्यता वाले ट्रस्ट को ही बिना नियमों व शर्तो के सार्वजनिक उपयोगार्थ बनाये गये सामुदायिक भवनों को देते है तो यह पद के दुरप्रयोग का स्पष्ट मामला है। आंचल ऐसा ट्रस्ट है जिसमें प्रारम्भिक पूजी तो 500-500 रूपये थी लेकिन ट्रस्ट से पैसा निकालने का अधिकार 5,000,00 रूपये हरिमोहन सारस्वत व आषा शर्मा सारवाल को था।
नगरपालिका सूरतगढ ने वृद्वाश्रम खोलने एवं चलाने बाबत् न तो  कोई नियम, उपनियम व शर्ते तय की और न ही उन्हें बोर्ड की बैठक में रखकर पास करवाया और न ही शहर की संस्थाओं से विज्ञप्ति प्रकाषित कर आवेदन मॉंगे, न ही कोई प्रक्रिया अपनाई गई तथा बिना किसी योजना व निदेर्षेंां के तहत वृद्वाश्रम के लिए सामुदायिक भवन एक अनुभवहीन संस्था को हस्तांतरित कर दिया गया। नगरपालिका की 22-9-2010 की मीटिंग में वृद्वाश्रम के प्रस्ताव में जानबूझकर लूप होल रखे गये ताकि स्वयं की सदस्यता वाली संस्था को अपने बनाये नियमों पर सामुदायिक केन्द्र हस्तान्तरित किया जा सके। वृद्वाश्रम का प्रस्ताव भी नपा अध्यक्ष बनवारी ने रखा तथा अधिकृत भी अध्यक्ष को किया तथा हस्तांन्तरण भी अध्यक्ष की सदस्यता वाले ट्रस्ट को किया गया। दिनांक 22-9-2010 की मीटिंग की कार्यवाही के अनुसार संस्थाओं के आवेदन के बाद बोर्ड की मीटिंग में प्रस्ताव रखा जाने का निर्णय हुआ था लेकिन ऑंचल सार्वजनिक प्रन्यास को सामुदायिक केन्द्र हस्तान्तरित करने के बाद 14-2-2011 की मीटिंग में रखा गया जो कि 22-9-2010 के प्रस्ताव का उल्लंघन था। इसके अलावा 14-2-2011 को रखे गये अनुमोदन प्रस्ताव में पार्षदों को पूर्ण जानकारी नहीं दी गई और विषिष्ट षीर्षक व सम्पूर्ण प्रस्ताव का विवरण नहीं दिया गया।
कौल व गिरी ने आरोप लगाया है कि इस मामले में नपा अध्यक्ष बनवारी लाल मेघवाल, ईओ भॅंवरलाल सोनी, ईओ किषनाराम सेंगवा, हरिमोहन सारस्वत, आषा शर्मा सारवाल व अन्य ने शडयन्त्र रचकर, पद का दुरप्रयोग करके सामुदायिक भवन की भूमि को स्वयं की सदस्यता वाले ट्रस्ट को हस्तान्तरित कर दिया तथा सामुदायिक भवन को सार्वजनिक उपयोग से होने वाली आय से वंचित कर आर्थिक नुकसान कारित किया।

उन्होने यह भी कहा कि यदि इस प्रकरण में दोषियों पर कार्यवाही नही की गई तो मुकदमा दर्ज करवाये जायेगे तथा आन्दोलात्मक कदम उठाया जायेगा।

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