शनिवार, 27 अप्रैल 2024

वसुंधरा ने कांंग्रेसी राज में सभी 25 सीटें जिताई.भजनलाल राज में 10 हारने की आशंका

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

वसुंधरा राजे के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के अशोक गहलोत राज सन् 2019 में राजस्थान से लोकसभा की सभी 25 सीटें एनडीए ने जीती। उनमें 24 सीटें भाजपा और एक सीट आरएलपी की थी।लेकिन अब सन् 2024 में राजस्थान में डबल ईंजन भाजपा राज और भजनलाल शर्मा के काल में अव्यवस्थित चुनाव में 10 से अधिक सीटें हारने की आशंका सामने आ रही है। ऐसा लगता है कि प्रदेश नेतृत्व ने जो टिकटें दिलवाई वे सही नहीं रही और प्रदेश में सरकार होने न होने का अहसास लोगों को भाजपा के लिए प्रभावित नहीं कर पाया। भाजपा प्रदेश नेता सभी 25 सीटों के जीत लेने का ही दावा करते रहेंगे लेकिन आज के सूचना युग में 10 से अधिक सीटें हारने की आशंका छिपाई नहीं जा सकती। चुनाव परिणाम आने पर जब सभी 25 सीटों पर जीत नहीं होगी तब प्रदेश के टिकट चयन कराने वाले नेता,रिपोर्ट और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा समीक्षा के घेरे में होंगे। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 400 पार की घोषणा जो देश भर में मिशन बनाई गई उस पर राजस्थान की कम सीटों का भारी दुष्प्रभाव होगा। हो सकता है कि इस चोट से राजस्थान में बहुत बड़ा उलटफेर संगठन और सरकार में हो जाए।

निवृत हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 26 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के बाद  राजस्थान में दो अंको में सीटें जीतने का बड़ा दावा किया है। दो अंको का मतलब 10 और अधिक सीटों पर जीत का दावा बहुत भारी है।

इस दावे से लगता है कि भारतीय जनता पार्टी यहां अपने ही राज में डबल इंजन सरकार में जनता की नजरों में बुरी तरह से गिरी है।

 * 10 सीटें हाथ से निकल जाने का खतरा बहुत बड़ा होता है।  भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को इसका एहसास है।

👍 राजस्थान प्रदेश के बादशाह बने नेताओं ने विधानसभा चुनाव के वक्त सही रिपोर्ट ऊपर केन्द्रीय नेताओं नहीं भेजी जिसके कारण टिकटों का गलत निर्धारण हुआ और चुनाव  परिणाम प्रभावित हुए।प्रधानमंत्री मोदी के नारे के तहत पहले 152 सीटें  फिर 135 सीटें फिर 125 सीटों के जीतने के बयान आते रहे और आखिर जीत 115 सीटों पर हुई। 

इन सीटों  के हारने का कारण जयपुर नेताओं की गलत रिपोर्ट दिल्ली भेजना था गलत नेताओं के नाम भेजना था और टिकट दिलवाना था। सीटें मामूली वोटो से नहीं हारी 40, 50, 60 हजार तक की हार हुई। 👍👍दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह रही की जयपुर से लोकसभा के नाम के लिए भी उन्हीं नेताओं और संगठन के नेताओं की ओर से दिल्ली रिपोर्ट भेजी गई जो सही नहीं थी। * प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमित शाह को जेपी नड्डा को जब सही रिपोर्ट नहीं की गई। लोकसभा में फिर से  टिकटों का बंटवारा सोच और समझ करके नहीं हुआ।  इस कारण से राजस्थान की 25 सीटों में से दहाई अंक तक भारतीय जनता पार्टी सीटें गंवा देती है तो बहुत बड़ा नुकसान पार्टी को होता है।

👍👍 भारतीय जनता पार्टी के जयपुर के नेता हर बात को दबाने के  और दिल्ली को झूठी बातें भेजने के लिए दोषी है। 

**भारतीय जनता पार्टी को विधानसभा में चाहे हे सत्ता मिल गई लेकिन बहुत कम सीटें मिली। विधानसभा में जिन्होंने 40-50-60 हजार से सीटें हारी वे ही बाद में नेतृत्व करते रहे। वे ही जिलाध्यक्ष लोकसभा के लिए रिपोर्ट्स भेजने वाले रहे। लोकसभा चुनाव में सीटों की कमजोरी को छिपाया गया। नाराज और चुनाव में नहीं लगे नेताओं की भी सही रिपोर्ट जयपुर को नहीं दी गई। विधानसभा में हारे हुए नेताओं से मित्रता निभाई गई ताकि वे और उनके परिवार ही स्थानीय स्तर पर नेतागिरी करते रहें। लोकसभा में सीटों पर खतरा इन कारणों से भी रहा। पराजित नेताओं की जनता शक्ल नहीं देखना चाहती थी तब वोट कैसे देती। जीत के दावों की रिपोर्टें भेजी गई।

👍 राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का प्रशासन प्रदेश में किस स्तर का रहा है? कैसा कंट्रोल रहा है?इस राज को जनता किस स्तर का मान रही है? उससे भी वोटिंग प्रभावित होने की शंका है? इसकी भी समीक्षा की जानी बहुत जरूरी है कि राज्य केवल भाषणों से घोषणाओं से कागजी कार्रवाई से चलाया या वास्तव में धरातल पर आम जनता को कोई सुख सुविधा और योजनाओं का लाभ हुआ। राजस्थान में भाजपा सरकार आने के बाद से दफ्तरों में कार्य प्रणाली में कोई सुधार नहीं हुआ। अधिकारी नागरिकों के कार्यों को प्रभावित करते रहे जनता को कोई लाभ नहीं हुआ और इससे भी वोटिंग प्रभावित हुई। 

👍 मेरे एक लेख में प्रथम चरण और दूसरे चरण की शुरुआत में एक लेख लिखा था की राजस्थान में प्रथम चरण में पांच सीटें और दूसरे चरण में भी पांच छह सीटें  भारतीय जनता पार्टी की खतरनाक हालत में फंसी हुई हैं। ये सीटें भारतीय जनता पार्टी के हाथ से निकल सकती हैं।

*कारण भी बताया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से वोट मिलेंगे इसलिए भाजपा के नेता कार्यकर्ता घरों से बाहर नहीं निकले मतदाताओं से संपर्क नहीं किया प्रथम चरण में वोटिंग बहुत कम हुई। दूसरे चरण में वोटिंग कम तो नहीं हुई कुछ बढी लेकिन भारतीय जनता पार्टी की अनेक सीटों पर बहुत जबरदस्त घमासान हुआ है। 

* भाजपा के बड़े-बड़े नेता वहां बुरी तरह से हांफते रहे हैं और उन सीटों पर हार जाने का खतरा है।  लोगों ने बड़े पद और बड़े नामों को नहीं देखा। लोगों ने नरेंद्र मोदी की गारंटी, 400 पर के नारे को भी नहीं सुना। पीएम की सभाएं भी असर हीन की चर्चाएं और दावे रहे।

👌 लोगों ने पिछले 5 साल में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति को देखा। 10 साल से केंद्रीय सरकार की नीतियों से हुए कार्यक्रमों को देखा और उसके उपरांत भाजपा को सबक सिखाने का तरीका अपनाते हुए वोटिंग की। चुनाव का परिणाम 4 जून 2024 को होगा लेकिन उससे पहले एक बार चर्चा करें कि भारतीय जनता पार्टी बुरी तरह से दबी हुई क्यों है?  

👌 टिकट वितरण की गलत नीति रही। विधानसभा टिकटें प्रधानमंत्री मोदी बांटे और मुख्यमंत्री का नाम भी पर्ची से भेजे। लोकसभा की टिकटें भी प्रधानमंत्री ही बांटे। ये बादशाही जनता को बहुत चुभी है। कांग्रेसियों भ्रष्टाचारियों दुष्कर्मियों को भाजपा में लेना और उनमें से चुनाव भी लड़ाया जाना न जनता को सुहाया न पुराने कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ताओं को भाया। मोदीजी की पिछले पांच साल की नीतियों फैसलों को जनता ने अप्रिय माना है।इलेक्ट्रोल बांड के चंदे खुलासे से भाजपा और मोदी की छवि प्रभावित हुई है अहंकार के कारण मानते नहीं लेकिन लोकतंत्र में अहंकार चलता नहीं।०0०

27 अप्रैल 2024.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकारिता 60 वां वर्ष,

सूरतगढ़ ( राजस्थान )

94143 81356.

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