सोमवार, 18 मार्च 2024

भाजपा में आने से पूजा छाबड़ा और पार्टी दोनों को क्या लाभ:सूरतगढ़ में क्या प्रभाव.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

शराबबंदी और नशामुक्ति आंदोलन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूजा भारती छाबड़ा के भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश को इलाके की राजनीति के दृष्टिकोण से एक शक्तिशाली नारी नेता मिला है। जिसकी सूरतगढ़ से जयपुर तक मंत्रियों बड़े नेताओं अधिकारियों तक पहुंच है।

* सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र ही नहीं बल्कि श्रीगंगानगर अनूपगढ़ और हनुमानगढ़ जिलों में लोकसभा चुनाव में पूजा छाबड़ा की लोकप्रियता आंदोलनकारी छवि व जनता को प्रेरित करने का प्रभावशाली गुण भाजपा को लोकसभा चुनाव में

बड़ा लाभ पहुंचाएगा। पूजा के लिए भी लोकसभा चुनाव एक मार्ग दर्शक होंगे।

* पूजा छाबड़ा का भाजपा में आने का निर्णय देरी से हुआ। यह कार्य सन् 2018 के आसपास होता तो संभवतः सूरतगढ़ से 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उतार देती। पूजा को निश्चित रूप से टिकट की दावेदारी में प्राथमिकता मिलती। 

* सूरतगढ़ में वर्तमान में सशक्त नेतृत्व की आवश्यकता महसूस हो रही थी जो कुछ हद तक  पूजा छाबड़ा पूरा करेगी।  सन् 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के रामप्रताप कासनिया के 50 हजार से अधिक वोटों से पराजित होने के बाद से लोगों का मन उचाट होने लगा कि पावर किसके पास रहेगी। कासनिया जी ने अपने बेटे संदीप कासनिया को राजनीति में आगे कर दिया लेकिन लोगों को स्वीकार नहीं हो रहा। संदीप कासनिया सर्वमान्य नहीं माने जा रहे।वैसे भी हर क्षेत्र की तरह सूरतगढ़ में भी भाजपा के खेमे हैं। जनता को कासनिया ही स्वीकार होते तो 2018 में विधायक चुनने वाली जनता 2023 में पुनः चुन लेती और बुरी तरह से नहीं हराती। भाजपा के गुटों ने भी इसमें भूमिका निभाई।इस स्थिति में संदीप कासनिया को नेता थरपना भी लोगों को जंच नहीं रहा।

पूजा छाबड़ा ने भाजपा में प्रवेश लिया है तो निश्चित है कि वह घर में बैठने के लिए नहीं बल्कि राजनीतिक भविष्य के लिए लिया है। पूजा भी सन् 2028 के विधानसभा चुनाव में सूरतगढ़ से शक्तिशाली दावेदार होगी। सूरतगढ़ जिला नहीं बना लेकिन पूजा छाबड़ा का संघर्ष आमरण अनशन और फिर अन्न त्याग को सभी ने देखा परखा।





* इस छाबड़ा परिवार की भाजपा में करीब 35-37 साल बाद वापसी हुई है। पूजा छाबड़ा के ससुर स्व.गुरूशरण छाबड़ा का जीवन ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ,जनसंघ जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टियों में बीता। गुरूशरण छाबड़ा  आपातकाल 1975-77 के बाद सन्1977 में सूरतगढ़ से विधायक चुने गये। उस समय सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र अनूपगढ़ अंतर राष्ट्रीय सीमा तक विशाल था। सूरतगढ़ का राजकीय महाविद्यालय उन्हीं के कार्यकाल में 1977 में शुरू हुआ। सन् 2019 में अशोक गहलोत सरकार ने इसका नाम स्व.गुरूशरण छाबड़ा राजकीय महाविद्यालय कर दिया।यह बहुत बड़ी उपलब्धि रही है।

* पूजा छाबड़ा भाजपा में आने के बाद किस तरह से अपने कदम रखती है। यह बड़ा विचारणीय है। अपना स्वतंत्र निर्णय और घोषणाएं नहीं कर सकती। पार्टी के अनुशासन में ही रहना होगा। भाजपा में प्रवेश से पहले यह सब सोचा होगा।छाबड़ा जी के मित्र किरोड़ी लाल मीणा और अरूण चतुर्वेदी आदि से भी कुछ मार्गदर्शन लिया होगा।

18 मार्च 2024.

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करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार,

सूरतगढ़

94143 81356.

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