गुरुवार, 3 मई 2018

मैं पत्रकार: न चैनल न अखबार फिर भी हूं पत्रकार

* करणीदानसिंह राजपूत *

आज से कुछ वर्ष पहले एक TV सीरियल आता था जिसका नाम था रिपोर्टर। वह रिपोर्टर  सरकार की गोपनीय सचिवालय तक की बैठकों में हिस्सा लेते हुए बताया जाता था। मगर यह नहीं बताया कि वह किस अखबार का रिपोर्टर है। यह

स्थिति अनेक स्थानों पर नहीं बल्कि हिंदुस्तान में हर छोटे-मोटे शहर व कस्बे में मिलती है,जहां 5-7 या 10-12 व्यक्ति अपने आप को पत्रकार कहलाते हैं, लेकिन उनके पास मैं कोई अखबार  कोई चैनल न कोई  समाचार एजेंसी मगर मैं फिर भी पत्रकार । ऐसे पत्रकारों के पास अखबार चैनल न्यूज एजेंसी का कोई परिचय पत्र तक नहीं होता।

कस्बे के लोग उन्हें सिर आंखों पर बिठाते हैं लेकिन कभी यह जानने की कोशिश नहीं करते कि आखिर में उनके समाचार विज्ञप्तियां वह पत्रकार कहां भेजता है और कहां छपती हैया प्रसारित होती है। 

विश्व प्रेस दिवस 3 मई पर पत्रकारों को ही यह सोचना होगा कि उनके पत्रकारिता के स्तर को चोट कहां पहुंच रही है।उनके समाचार उनके विचार आखिर किस कारण से पिट रहे हैं। कहीं यह कारण पत्रकारिता क्षेत्र में आए फर्जी लोगों के कारण तो नहीं हो रहा है?  जो फर्जी पत्रकार हैं वे केवल गप गोष्ठियां करते हैं। 

 कभी कह दिया जाए कि एक कागज पर विज्ञप्ति बनाकर दिखाएं समाचार बनाकर दिखाएं तो वे एक लाइन भी लिख नहीं पाएं। 

यही हालत चैनल वाले पत्रकारों की भी है अनेक चैनल पत्रकार जिन्हें शूटिंग करनी नहींआती है न वीडियो ग्राफी आती है न समाचार की कटिंग करनी आती है न समाचार भेजना आता है लेकिन फिर भी वे चैनल के पत्रकार हैं। यह कारण क्या है?

 आपको आश्चर्य लगता होगा कि इस प्रकार के पत्रकारों को जीवित रखने वाले भी असली पत्रकार ही हैं जो पत्रकारिता करते हैं। वे अपने समाचार अपने वीडियो क्लिप आदि ऐसे लोगों को दे देते हैं जो आगे कहीं ना कहीं महीने 2 महीने में एक आधी जगह भिजवा देते हैं।

 जनता को भी इस प्रकार के पत्रकारों से बचना चाहिए प्रेस वार्ता आदि में इस प्रकार के कथित पत्रकारों को आमंत्रित भी नहीं किया जाना चाहिए।

जहां पत्रकार संगठन बने हुए हैं उन्हें भी सचेत रहने की आवश्यकता है। जो सच में पत्रकारिता लाइन में नहीं हैं वे पत्रकार संघ के अंदर किसी भी हालत में सदस्य नहीं बनाए जाएं। अगर पूर्व में कोई व्यक्ति संगठन का सदस्य बना हुआ है और कोई भी कार्य पत्रकारिता का नहीं कर रहा है तो उसे तत्काल सदस्यता से मुक्त कर दिया जाना चाहिए। पूर्व में कोई अखबार या चैनल का पत्रकार रहा है लेकिन बाद में काम छोड़ कर किसी अन्य क्षेत्र में काम करने लगा है तो इस प्रकार के व्यक्ति को भी संगठनों से मुक्त कर दिया जाना चाहिए।


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