गुरुवार, 28 दिसंबर 2017

भारत में पुरानी है कांग्रेस पार्टी-जानिए

भारत के राजनीतिक दलों में कांग्रेस पार्टी सबसे पुरानी पार्टी के नाम से जानी जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होनी चाहिए।

 कांग्रेस पार्टी में देश आजादी के​ पहले वे  बाद में कितने उतार-चढ़ाव आए और नेताओं में विचार भिन्नता भी रही।

28 दिसंबर 1885 में बनी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का आज 133वां स्थापना दिवस है. ये स्थापना दिवस इस बार खास होगा क्योंकि 19 साल बाद पार्टी को राहुल गांधी के तौर पर नया अध्यक्ष मिला है. राहुल कांग्रेस के 60वें अध्यक्ष हैं. वहीं आजादी के बाद की बात करें तो राहुल पार्टी के 19वें अध्यक्ष हैं. उनकी मां सोनिया गांधी ने 19 साल तक पार्टी की कमान संभाले रखी थी।


कांग्रेस की स्थापना एक अंग्रेज ऑफिसर रहे ए ओ ह्यूम (एलन ऑक्टेवियन ह्यूम) ने की थी. 28 दिसंबर 1885 को 72 सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और वकीलों के दल ने कांग्रेस के पहले सेशन में हिस्सा लिया.


बम्बई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुए उस पहले सेशन के अध्यक्ष थे बैरिस्टर व्योमेश चंद्र बनर्जी. वहीं पार्टी का दूसरा सेशन ठीक एक साल बाद 27 दिसंबर 1886 में कोलकाता में हुआ था. सेशन की अध्यक्षता दादाभाई नैरोजी ने की थी।


इतिहासकारों के मुताबिक, कांग्रेस के शुरुआती सालों में इसका मकसद ब्रिटिश सरकार के साथ मिलकर देश की दिक्कतों को दूर करना था. लेकिन 1905 में बंगाल के विभाजन के बाद कांग्रेस ने खुले तौर पर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिए.


कांग्रेस की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आजादी के आंदोलन के ज्यादातर बड़े नेताओं का इस पार्टी से सरोकार रहा है. मदन मोहन मालवीय, महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं ने आजादी से पहले इस पार्टी की अध्यक्षता की।

आजादी के बाद कांग्रेस के पहले अध्यक्ष आचार्य कृपलानी रहे. वहीं पार्टी ने जवाहरलाल नेहरू के चेहरे पर चुनाव लड़ा और पहले आम चुनावों में जबरदस्त सफलता पाई. देश के पहले पीएम के तौर पर नेहरू ने लोकतांत्रिक मूल्यों को अपना आधार बनाया, साथ ही देश की विदेश नीति भी कांग्रेस सरकार की खासियत बनी. कांग्रेस ने इसके बाद के सालों में कई अहम फैसले लिए जिसका आज के भारत की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में अहम योगदान है.

साल 2017 में राहुल गांधी के तौर पर कांग्रेस को आजादी के बाद का 19वां अध्यक्ष मिला. राहुल नेहरू-गांधी परिवार की 5वीं पीढ़ी के 5वें ऐसे शख्स हैं जिन्होंने ये कुर्सी संभाली है. इससे पहले उनके नाना जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री रहते समय 5 साल, इंदिरा गांधी- राजीव गांधी ने करीब 5-5 साल, सोनिया गांधी ने 19 साल तक इस पद को संभाला है.

कांग्रेस अध्यक्ष पद को महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, मदन मोहन मालवीय, सुभाष चंद्र बोस समेत कुल 59 लोगों ने अबतक संभाला है. राहुल गांधी 60वें अध्यक्ष हैं.कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर पहला मतभेद साल 1939 में सामने आया था, जब सुभाष चंद्र बोस ने इस पद से इस्तीफा दे दिया था.आजादी के बाद पार्टी का नेतृत्व करने वाले कुल 18 नेताओं में से 14 नेहरू-गांधी परिवार से नहीं हैं.राहुल गांधी नेहरू-गांधी परिवार की 5वीं पीढ़ी के 5वें ऐसे व्यक्ति हैं जो कांग्रेस अध्यक्ष बनने जा रहे हैं.आजादी के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद पर नजर डाले तो जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री रहते समय 5 साल, इंदिरा गांधी- राजीव गांधी ने करीब 5-5 साल और पीवी नरसिंह राव ने भी करीब 4 साल तक इस जिम्मेदारी को संभाला.कांग्रेस में लालबहादुर शास्त्री और मनमोहन सिंह दो ऐसे नेता हैं जो प्रधानमंत्री तो बने लेकिन वो पार्टी के अध्यक्ष नहीं बन पाये.सोनिया गांधी ने सबसे ज्यादा 19 साल बतौर कांग्रेस अध्यक्ष पद संभाला, वहीं उनकी सास इंदिरा गांधी ने अलग-अलग कार्यकाल में कुल 7 साल इस दायित्व को निभाया है.सोनिया गांधी ने साल 1997 में पार्टी की सदस्यता ली थी और साल 1998 में अध्यक्ष बनी जो 2017 तक पदासीन रहीं। सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी ने पार्टी की बागडोर अध्यक्ष के रूप में संभाली है।


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