Tuesday, October 31, 2017

छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार में पत्रकार को जान जाने का खतरा क्यों ?





पत्रकार विनोद वर्मा ने कहा- जज साहब जेल जाउंगा तो मैं मारा जाउंगा

कथित सेक्स सीडी के मामले में गिरफ्तार पत्रकार विनोद वर्मा को आज 31.10.2017 को  सुबह 11 बजे कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट में पत्रकार विनोद वर्मा ने कहा कि जज साहब जेल जाउंगा तो मारा जाउंगा। इस पर विनोद वर्मा के वकील ने भी जेल में विनोद के जान का खतरा और स्लिप Dick की प्रॉब्लम बताया। इस पर कोर्ट ने जेल में मैनुअल के तहत दोनों बातों को लेकर व्यवस्था करने को कहा। वकील ने जेल में विनोद को दूसरे कैदियों से अलग रखने की मांग की है।

पुलिस के बड़े अफसरों ने की पूछताछ

रविवार 28 अक्टूबर को पुलिस ने पत्रकार विनोद वर्मा को न्यायाधीश एसके त्रिपाठी के कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट ने विनोद को तीन दिन की पुलिस रिमांड दी। इसके बाद सोमवार को रायपुर पुलिस के बड़े अफसरों ने विनोद से पूछताछ की। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस पूछताछ में विनोद वर्मा से कुछ भी उगलवा नहीं पाए और आज पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद न्यायाधीश एसके त्रिपाठी के कोर्ट में पेश किया।


भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस पहुंची कोर्ट

रायपुर पुलिस को उस वक्त काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा जब पत्रकार विनोद वर्मा को लेकर कोर्ट पहुंची। कोर्ट परिसर में भारी भीड़ थी। सुनवाई पूरी होने के बाद विनोद वर्मा को कोर्ट परिसर से बाहर निकालने में पुलिस को भीड़ का सामना करना पड़ा। मीडिया के सवालों से बचते पुलिस अफसर काफी जद्दोजहद के बाद पुलिस विनोद वर्मा को कोर्ट परिसर से बाहर निकाल पाई।

(पत्रिका)

रायपुर। सेक्स सीडी कांड में आरोपी पत्रकार विनोद वर्मा को मंगलवार को कड़ी सुरक्षा के बीच आज अदालत में पेश किया गया। वहां से उन्हें कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। विनोद वर्मा ने अदालत से गुहार लगाई कि उन्हें संगीन मामले के अपराधियों और विचाराधीन कैदियों के साथ न रखा जाए। अदालत ने उनकी ये बात मान ली और उन्हें स्पेशल सेल में रखने का आदेश दिया। ऐसे मिली थी सीडी की सूचना...




- तीन दिनों से राज्य की राजनीति में भूचाल मचाने वाली सीडी का खुलासा अनायास नहीं हुआ है बल्कि इस बात की गोपनीय सूचना पुलिस के पास पहले से आ गई थी कि राज्य के एक प्रमुख नेता पर आधारित सीडी की कापियां गाजियाबाद में तैयार कराई जा रही हैं।

- पुलिस के खुफिया तंत्र को इसकी पहली सूचना 23 अक्टूबर को मिल गई थी। उसके बाद ही पूरा अमला सक्रिय हुआ। पहली सूचना जब मिली थी तब यह स्पष्ट नहीं था किस नेता की सीडी है। उसी दिन तत्काल जांच शुरू कर दी गई।

- सरकार के कुछ खास लोगों को इसकी सूचना दी गई। 26 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे पुलिस के पास पुख्ता सूचना आ गई थी कि तीन-चार क्लिपिंग छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक करने की तैयारी चल रही है।

- पुलिस की सूचना के अनुसार 27 अक्टूबर को वीडियो को वायरल कर छत्तीसगढ़ में धमाका करने की तैयारी थी। इसके बाद रायपुर से दिल्ली तक कुछ लोगों की फोन की गतिविधियों पर नजर रखी गई और इस जांच में राज्य ही नहीं, दिल्ली के साइबर एक्सपर्ट भी लगा दिए गए।

- सैकड़ों मोबाइल नंबरों की पड़ताल के बाद कन्फर्म हुआ कि वीडियो वायरल करने की तैयारी हो गई है। गाजियाबाद में छापे के बाद मिले 500 सीडी से खुलासा हुआ कि इसके जरिये छत्तीसगढ़ में किसे निशाना बनाया गया है।

- भास्कर की पड़ताल में पता चला कि 26 अक्टूबर को ही पुलिस मुख्यालय और रायपुर पुलिस के अफसरों को इमरजेंसी मैसेज देकर बुलाया गया और उन्हें बताया गया कि दिल्ली या रायपुर से एक-दो दिन में एक वीडियो वायरल किया जाने वाला है।

- यह साफ नहीं था कि सीडी में टेम्परिंग वगैरह कहां से की गई, लेकिन पुलिस के पास यह जानकारी आ गई थी कि एक डिजिटल शॉप से इसकी 1000 कॉपियां बनवाई जा रही हैं। वक्त कम था, इसलिए पुलिस की एक टीम को तुरंत दिल्ली भेजने प्लेन से टिकट करवाए गए।

- दूसरी टीम सड़क मार्ग से दिल्ली और फिर गाजियाबाद भेजी गई। पूरा ऑपरेशन गोपनीय रखा गया। यहां तक कि दो टीमों में रवाना किए गए किसी भी पुलिस अफसर या कर्मचारी को पता नहीं था कि उन्हें करना क्या है?



गाजियाबाद पहुंचने पर पता चला छापा मारना है



- सुबह सवा तीन बजे पुलिस की एक टीम गाजियाबाद पहुंची। प्लेन से जाने वाले पुलिस अधिकारी पहले से वहां मौजूद थे। पूरी टीम को इंदिरापुरम थाने बुलवाया गया। इंदिरापुरम पुलिस को उसके पहले ही राज्य सरकार के आला अफसरों के माध्यम से ये मैसेज मिल चुका था कि छत्तीसगढ़ पुलिस की मदद करना है।

- इंदिरापुरम पुलिस की टीम के सामने आला अफसरों ने जब विनोद वर्मा के नाम का जिक्र किया, तब यहां से जाने वाले अफसरों को पता चला कहां जाना है। उसी समय टीम विनोद वर्मा के घर पहुंच गई।



क्या हुआ विनोद वर्मा के घर



- सुबह करीब 4:10 बजे पुलिस की टीम पत्रकार विनोद वर्मा के घर पहुंची। उस समय पूरे महागुल मेंशन में सन्नाटा पसरा था। गाजियाबाद पुलिस की टीम ने दरवाजा खुलवाने के लिए बेल बजायी। दो-तीन बार बेल बजाने पर वर्मा की पत्नी ने दरवाजा खोला और आने वालों से परिचय पूछा।

- पुलिस बताने पर वह खीझ उठीं और कहा - ये कोई आने का टाइम है? बाद में आइए, लेकिन पुलिस धड़धड़ाते ही भीतर घुस गई। पत्नी ने कुछ देर तक विरोध भी किया।

- इसी फ्लैट से पुलिस ने सीडी का बंडल जब्त किया और वर्मा को लेकर सीधे इंदिरापुरम थाने पहुंच गई। पुलिस के जाने के बाद वर्मा के परिजनों ने अपने परिचितों और बाद में दिल्ली की मीडिया को खबर दी।



दिल्ली गई पुलिस की टीम भी थी सर्विलांस पर



- सीडी को वायरल होने के पहले जब्त करने का ऑपरेशन बेहद गोपनीय था। खबर कहीं से भी लीक होने पर पूरा ऑपरेशन फेल होने का खतरा था।

- इसलिए पुलिस वालों के फोन या तो ऑफ करवा दिए गए थे या कह दिया गया था कि उनके फोन सर्विलांस में हैं। उन्हें परिवार के सदस्यों के अलावा किसी का भी कॉल रिसीव न करने की सख्त हिदायत दी गई थी।

- अफसरों को अंदेशा था कि अगर बात खुली तो पूरी योजना फेल हो सकती है। सीडी मामले में सीबीआई में एफआईआर से पहले की जांच पूरी करने के लिए रायपुर पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) बना दी है।

- यह टीम मामले के तकनीकी पहलुओं से लेकर आरोपियों तक की तलाश करेगी।

- एसआईटी ने जांच शुरू करते हुए सिविल लाइंस थाने में दर्ज केस के आधार पर नेताओं की 


इस मामले में भूमिका और उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए। इस मामले में भिलाई के एक फर्नीचर कारोबारी समेत 5 और लोगों के नाम आ गए हैं, जिनकी पड़ताल चल रही है।

 - रायपुर एसपी डॉ. संजीव शुक्ला ने क्राइम ब्रांच के एसपी अजातशत्रु बहादुर सिंह को एसआईटी का जिम्मा सौंपा है। इसमें दो डीएसपी तथा आधा दर्जन इंस्पेक्टर शामिल हैं, जिन्हें जांच से लेकर आईटी तक का विशेषज्ञ माना जाता है। एसआईटी ने अलग-अलग टीमें बनाकर पड़ताल शुरू कर दी है।


 - सूत्रों के मुताबिक एक टीम को इस केस में पुख्ता चालान बनाने का जिम्मा सौंपा गया है। एक टीम दिल्ली की शॉप के सीसीटीवी फुटेज के अलावा संदिग्ध लोगों की कॉल डिटेल खंगाल रही है।


 - टीम को 13 मिनट के वीडियो में 58 सेकंड के हिस्से में मंत्री का चेहरा लगाने की साजिश का खुलासा करने का जिम्मा दिया गया है। 


 - एक टीम को मामले में गिरफ्तार विनोद वर्मा का बयान लेने में लगाया गया है। अब तक मिली जानकारी के आधार पर इस मामले में छह लोगों के घेरे में आने की खबर है।


 - इनमें दुर्ग का कारोबारी भी है, जिसे कांग्रेस के आला नेता का नजदीकी बताया गया है। यही नहीं, नेताओं के पास सीडी कहां से आई थी, उन्होंने सीडी किन लोगों को दी, यह पड़ताल भी शुरू कर दी गई है। इस मामले में भी पूछताछ के लिए दर्जनभर से ज्यादा लोगों को नोटिस देने की तैयारी है।


वर्मा का बयान - तीन दिन पहले ही मिला था वीडियो



 - पुलिस अफसरों ने बताया कि विनोद वर्मा ने पूछताछ में पुलिस से लेकर अपने वकील तक को यही बताया है कि गिरफ्तारी से तीन दिन पहले एक व्यक्ति यह वीडियो लेकर आया था। वर्मा ने वीडियो कॉपी करके अपने पेन ड्राइव में रख ली थी।

 - वर्मा ने यह दावा भी किया कि उनके पास कोई सीडी नहीं थी और वीडियो देख नहीं पाए हैं। पुलिस अब तक यह पता नहीं कर पाई है कि वर्मा के पास वीडियो कौन लेकर पहुंचा था और उसे किसने दिया था?


रायपुर-दिल्ली के कॉल खंगाले

 

 - 23 अक्टूबर को जब दिल्ली से पहला इनपुट मिला, तभी यहां हाईटेक जांच शुरू कर दी गई थी। दिल्ली से आने वाले फोन कॉल की जांच की गई। ये छानबीन की गई कि कौन से नंबर से अचानक कॉल बढ़ गई है।


 - किसके नंबरों पर कितने कॉल आ रहे हैं, और कितनी देर तक बातें हो रही हैं। सूत्रों के अनुसार इनसे उन लोगों का क्लू मिला जो सीडी बनवाना चाह रहे थे। 


 - आने वाले दिनों में एक-दो गिरफ्तारियां और होंगी, जिनके बारे में भी क्लू उसी जांच से मिला है।

(भास्कर)



राजनीति की चाशनी में नेताओं और पत्रकारों का चरित्र कैसा होना चाहिए?


छत्तीसगढ़ के मंत्री की कथित सैक्स सीडी मामले के बाद में देशबंधु अखबार में  31.10.2017 में संपादकीय  '  छत्तीसगढ़ में यह भी होना था' छपा है। बहुत उजागर करता है यह संपादकीय।


हाइलाइट्स


हमने देखा कि कैसे अनेक अखबार मालिक और पत्रकार राजनीति की चाशनी में डूबने के लिए आतुर होने लगे। एम.जे. अकबर, चंदन मित्रा, स्वप्न दासगुप्ता, तरुण विजय, हरिवंश, प्रफुल्ल माहेश्वरी और भी बहुत से नाम इस संदर्भ में ध्यान आते हैं। छत्तीसगढ़ में ऐसे अखबार मालिक और पत्रकारों की कमी नहीं है जो पत्रकारिता का इस्तेमाल व्यापार के लिए कर रहे हैं।


विशेष संपादकीय


ललित सुरजन


छत्तीसगढ़ के नए सीडी कांड की खबर जिस दिन आई तब से मन उद्विग्न और विक्षुब्ध है। मेरी तरह और भी बहुत से लोगों के मन में ऐसा ही विक्षोभ होगा। मैंने वह दौर देखा है जब राजनीति में शिष्टता और शालीनता अनिवार्य गुण माने जाते थे। समय बदला, स्थितियां बदलीं, गुणों में गिरावट आई, यह भी देखा। किन्तु आज जो स्थिति बन गई है इसकी कभी कल्पना भी नहीं की थी। दूसरी तरफ पत्रकारिता के बेहतरीन दिनों का भी मैं साक्षी रहा हूं। अधिकतर लोग पत्रकारिता के पेशे में इसलिए आते थे कि वे अपनी कलम के माध्यम से एक बेहतर समाज की रचना में भागीदार बनना चाहते थे। सत्यनिष्ठा और संघर्षशीलता पत्रकारिता के अनिवार्य गुण होते थे। इस अंग में समय के साथ जो गिरावट आई उसे भी लगातार देख रहा हूं, लेकिन फिर यह भी कल्पना से परे था कि पत्रकारिता कहां से कहां पहुंच जाएगी।


मैं छत्तीसगढ़ के मंत्री राजेश मूणत को पिछले कुछ वर्षों से जानता हूं। उन्होंने काफी तेजी के साथ राजनीति में अपनी पकड़ बनाई है। वे रायपुर नगर के कायाकल्प के लिए जो अनेकानेक प्रकल्प चला रहे हैं उनमें से बहुत से मुझे पसंद नहीं हैं और अखबार के माध्यम से मैं अपनी असहमति दर्ज करा चुका हूं।


श्री मूणत से मेरा विशेष परिचय नहीं है, लेकिन उनके बारे में जितना जाना सुना है उस आधार पर विश्वास नहीं होता कि वे इस कोटि के दुर्बल चरित्र व्यक्ति हैं। दूसरी ओर विनोद वर्मा को मैं शायद तब से जानता हूं जब वे विद्यार्थी थे। देशबन्धु स्कूल में ही उन्होंने पत्रकारिता के पाठ पढ़े। उनके गुणों को देखकर ही उन्हें देशबन्धु के दिल्ली ब्यूरो का प्रमुख बनाकर भेजा जिसका उन्होंने कुशलतापूर्वक निर्वाह किया। अतएव आज मेरे लिए यह विश्वास करना भी कठिन है कि वे भयादोहन जैसे कुकृत्य में लिप्त अथवा सहयोगी हो सकते हैं।



मेरा मानसिक उद्वेग सिर्फ सैद्धांतिक कारणों से नहीं है। इसलिए भी है कि जिन दो व्यक्तियों- एक राजनेता, एक पत्रकार की, जो छवि मेरे मन में थी वह इस कांड के कारण टूटने की नौबत आ रही है। लेकिन हो सकता है कि जो सामने दिख रहा है वह कुछ भी सच न हो और समय आने पर जनता के सामने सारी स्थितियां स्पष्ट हो जाएं। मैं ऐसा सही वक्त आने की प्रतीक्षा करूंगा, इस विश्वास के साथ कि दोनों व्यक्तियों के बारे में मेरी अब तक की जो राय है वह कायम रही आएगी। मेरे मन में विक्षोभ कुछ अन्य कारणों से भी है। एक तो मुझे छत्तीसगढ़ पुलिस की भूमिका समझ में नहीं आ रही है। ये प्रकाश बजाज कौन हैं? इन्होंने किन्हीं अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई और फिर लापता हो गए। इन अज्ञात व्यक्तियों का विनोद वर्मा से क्या संबंध है? विनोद के घर से जो पांच सौ सीडी जब्त होने की बात की गई क्या उसका पंचनामा किया गया? पुलिस को गिरफ्तार करने की इतनी जल्दी थी कि हवाई जहाज से जाकर सुबह साढ़े तीन बजे विनोद वर्मा को नींद से उठाया गया? यह तत्परता रिमांड पर रायपुर लाने में क्यों नहीं दिखाई गई? यह एक अनोखा प्रकरण होगा जहां दिल्ली से रायपुर एक आरोपी को हवाई जहाज या ट्रेन के बजाय सड़क मार्ग से लाया गया।


बहरहाल मैं कानून का जानकार नहीं हूं। एक सामान्य व्यक्ति के मन में जो सवाल उठ सकते हैं वही मेरे दिमाग में भी आ रहे हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि अदालत में ऐसे तमाम प्रश्नों के तार्किक उत्तर प्राप्त होंगे। लेकिन मैं यहां एक अन्य बिन्दु पर कुछ विस्तार के साथ बात करना चाहता हूं कि क्या विनोद वर्मा पत्रकार नहीं हैं या पत्रकार रहते हुए उन्हें किसी राजनैतिक दल के साथ सक्रिय रूप से जुडऩा चाहिए था या नहीं। मेरे अपने विचार में आदर्श स्थिति तो वही है जब पत्रकार पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष हो। देशबन्धु में प्रारंभ में हमारी नीति रही है कि कोई भी सहयोगी किसी राजनैतिक दल का सदस्य नहीं बनेगा और सक्रिय राजनीति अथवा चुनावी राजनीति में भाग नहीं लेगा। मेरे मित्र और सहयोगी राजनांदगांव के बलवीर खनूजा को 1985 में जब कांग्रेस का टिकट मिला तो मैंने उनसे देशबन्धु से त्यागपत्र ले लिया। उसके पूर्व 1977 में जबलपुर संस्करण के संपादक राजेन्द्र अग्रवाल जनता पार्टी टिकट पर केवलारी विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बने तो उनसे भी त्यागपत्र ले लिया गया था।


यह पुराने दौर की बात हो गई। देशबन्धु आज भी उसी नीति पर कायम है, लेकिन अन्यत्र स्थितियां बदल चुकी हैं। वैसे तो पहले भी आर.आर. दिवाकर, राधानाथ रथ, हीरालाल शास्त्री जैसे उदाहरण हमारे सामने थे, लेकिन ये तमाम पत्रकार स्वाधीनता संग्राम की उपज थे और इन्होंने उस दौर में राजनीति और पत्रकारिता साथ-साथ की थी जिसका जारी रहना स्वाभाविक था। किन्तु उसके बाद हमने देखा कि कैसे अनेक अखबार मालिक और पत्रकार राजनीति की चाशनी में डूबने के लिए आतुर होने लगे। एम.जे. अकबर, चंदन मित्रा, स्वप्न दासगुप्ता, तरुण विजय, हरिवंश, प्रफुल्ल माहेश्वरी और भी बहुत से नाम इस संदर्भ में ध्यान आते हैं। छत्तीसगढ़ में ऐसे अखबार मालिक और पत्रकारों की कमी नहीं है जो पत्रकारिता का इस्तेमाल व्यापार के लिए कर रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार गोविंदलाल वोरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष रहे। किसी ने नहीं कहा कि वे पत्रकार नहीं हैं। मेरे स्नेही मित्र और पूर्व सहयोगी रमेश नैय्यर कई वर्षों तक छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी के पूर्णकालिक वेतनभोगी संचालक रहे, लेकिन मैं उन्हें उस समय भी बुनियादी रूप से एक पत्रकार ही मानता रहा, जो कि वे हैं। ऐसे भी अनेक अन्य पत्रकार हैं जो इस या उस राजनैतिक दल से संबद्ध हैं और प्रत्यक्ष या परोक्ष उसके लिए काम करते हैं। इसलिए आज विनोद वर्मा के पत्रकार होने पर प्रश्नचिह्न लगाया जा रहा है या उनके एक राजनैतिक दल हेतु काम करने पर आपत्ति की जा रही है तो वर्तमान परिस्थिति में इसे अनुचति कैसे माना जाए? लगता है कि मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए इधर-उधर की बातें की जा रही हैं। ऐसे में श्रेयस्कर यह होगा कि सभी संबंधित पक्ष चरित्र हनन की राजनीति से ऊपर उठें और इस अशोभनीय, अवांछित प्रकरण का फैसला आने और पटाक्षेप होने का इंतजार करें।


सरदार पटेल की जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनायी गई

दोरन फॉर यूनिटी को जिला कलक्टर ने दिखाई हरी झण्डी



श्रीईगंगानगर, 31 अक्टूबर। सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर 31 अक्टूबर 2017 को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया गया। मंगलवार को प्रातः 7.30 बजे रन फॉर यूनिटी एवं 11 बजे कलेक्ट्रेट में राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई गई। 

जिला कलक्टर श्री ज्ञानाराम ने 31 अक्टूबर राष्ट्रीय एकता दिवस के दिन प्रातः 7.30 बजे रामलीला मैदान से हरी झण्डी दिखाकर रन फॉर यूनिटी की शुरूआत की। रन फॉर यूनिटी में अधिकारी व युवा वर्ग दौडे़। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी जिला खेल अधिकारी थे। रन फॉर यूनिटी रामलीला मैदान से प्रारम्भ होकर गौशाला रोड़ होते हुए बीरबल चौक, भगतसिंह चौक से महाराजा गंगासिंह चौक पर समापन हुआ। रन फॉर यूनिटी में राजस्थान पुलिस, एनसीसी, स्काउट, युवा, शहर के नागरिकों व अधिकारियों ने भाग लिया। 

इस अवसर पर अतिरिक्त जिला कलक्टर शहर श्री वीरेन्द्र कुमार वर्मा, यूआईटी सचिव श्री कैलाशचंद शर्मा, पूर्व जिला प्रमुख एवं जिला स्तरीय पुलिस जवाबदेही समिति के सदस्य श्री सीताराम मोर्य, जिला स्तरीय पुलिस जवाबदेही समिति के अध्यक्ष श्री सुखदेव सिंह मान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सुरेन्द्र कुमार, सीओ सीटी श्री तुलसीदास पुरोहित, पूर्व पार्षद श्री सजीव सैनी, खेल अधिकारी श्री सरजीत सिंह, श्री प्रेम चुघ तथा श्री लक्ष्मीनारायण शर्मा सहित युवा व नागरिक उपस्थित थे। 

कलेक्ट्रेट में दिलाई गई राष्ट्रीय एकता की शपथ

जिला कलक्टर ने प्रातः 11 बजे कलेक्ट्रेट परिसर में विभिन्न शाखाओं के अधिकारियों, कर्मचारियों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलवाई। इस अवसर पर एडीएम शहर श्री वीरेन्द्र कुमार, एसडीएम श्री यशपाल आहूजा सहित कलेक्ट्रेट के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।



आधार कार्ड की अनिवार्यता है राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा- भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी


डिजिटलाइजेशन की मुहिम में जुटी केंद्र सरकार आधार को देशभर में अनिवार्य करने की कोशिश में लगी है वहीं इसका विरोध भी हो रहा है। 

भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी  भी आधार की अनिवार्यता के विरोध में उतर आए हैं। आधार की अनिवार्यता का मामलासुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मैं आधार के मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखूंगा कि आखिर कैसे ये जरूरी है।सुब्रमण्यम स्वामी ने आधार पर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा तक बता डाला। स्वामी ने ये भी कहा कि मुझे उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट आधार की अनिवार्यता के मामले को खारिज कर देगी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आधार कार्ड की अनिवार्यता का विरोध कर चुकी हैं आधार कार्ड का विरोध देश भर में अनेक लोग कर चुके हैं सभी का मानना है कि इस से व्यक्ति की समस्त प्रकार की जानकारी इधर उधर हो सकती है।



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आप में अमानतुल्लाह का निलंबन खत्म- आगे के आसार क्या होंगे

राजस्थान प्रभारी विश्वास कुमार ने कहा'मेरा राज्य सभा में प्रवेश रोकने वाला कदम'

आम आदमी पार्टी ने विधायक अमानतुल्लाह खान की निलंबन रद्द कर दिया जिससे पार्टी के अंदर नई रस्साकशी शुरू होने के आसार हैं। अमानतुल्लाह  के निलंबन खत्म होने पर पार्टी के वरिष्ठ नेत कुमार विश्वास ने कहा कि खान “केवल मुखौटा हैं” और ये उन्हें राज्य सभा सदस्य बनने से रोकने की साजिश है। दिल्ली की ओखला विधान सभा से विधायक खान को मई 2017 में पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। खान ने उस समय कुमार विश्वास पर हमला करते हुए उन्हें “राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दलाल” बताया था। खान ने आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य विश्वास पर पार्टी के खिलाफ साजिश करने का आरोप लगाया था। खान की पार्टी ऐसे समय में हुई है जब दो नवंबर को आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक होने वाली है। राष्ट्रीय परिषद आम आदमी पार्टी की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई है।हालांकि आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट किया है कि खान का निलंबन वापस ले लिया गया है  लेकिन ये पुरानी तारीख से नहीं किया गया है। पार्टी के एक सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “इसका ये मतलब नहीं है कि उन्हें क्लीन चिट मिल गयी है।” इस साल मई में जब खान के हमले के बाद विश्वास ने पार्टी छोड़ने की धमकी दी तो राज्य के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया उनके घर जाकर उनसे मिले थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार केजरीवाल और सिसोदिया को आशंका थी कि कई विधायकों का समर्थन होने की वजह से विश्वास पार्टी तोड़ने में सक्षम हैं इसलिए खान को निलंबित करके संकट टाला गया था।खान को पार्टी से निलंबित करने के बाद तीन सदस्यों की एक जांच कमेटी बनायी गयी थी जिसे मामले की जांच करनी थी। इस कमेटी में आप के तीन नेता आशुतोष, पंकज मिश्रा और अतिशी मारलेना शामिल थे। इस कमेटी ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट सौंपी और खान का निलंबन रद्द करने की घोषणा की। खान ने इंडयिन एक्सप्रेस को फोन पर बताया, “मुझे आशुतोष का फोन आया जिन्होंने बताया कि मेरा निलंबन रद्द कर दिया गया है। मैं पार्टी द्वारा किए गये काम पर ध्यान दूंगा।” कुमार विश्वास के बारे में पूछे पर खान ने कहा, “अब कहने को क्या रह गया है?आम आदमी पार्टी के एक सूत्र ने कहा, “अभी हर विधायक का महत्व है। खासकर हमारे 21 विधायकों के खिलाफ चल रहे लाभ के पद के मामले को देखते हुए। ऐसे में पार्टी उन्हें हमेशा के लिए निलंबित नहीं रख सकती। आखिर हर पार्टी में आपसी समझौतों की जगह होनी चाहिए।”

( जनसत्ता)

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आम आदमी पार्टी के ओखला से विधायक अमानतुल्ला खान का निलंबन बहाल कर दिया गया है. कुमार विश्वास को बीजेपी एजेंट बताने पर पहले पोलिटिकल अफेयर कमेटी से हटाने के साथ-साथ पार्टी से अमानतुल्ला खान को निलंबित कर दिया गया थाअमानतुल्ला खान के बयान को लेकर खड़े हुए विवाद का असर कुमार विश्वास और अरविंद केजरीवाल के रिश्तों पर भी दिखा. विवादित बयान के बाद कुमार विश्वास और अरविंद केजरीवाल के बीच कथ‍ित तौर पर शीत युद्ध भी देखने मिला था.उस वक्त हालात इतने बिगड़ गए थे किअमानतुल्ला खान के बयान से नाराज कुमार विश्वास को मनाने के लिए मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल को आधी रात गाजियाबाद स्थ‍ित कुमार विश्वास के घर  भी जाना पड़ा था30 अप्रैल को बयान जारी करने के बाद 'आज तक' से बातचीत में विधायकअमानतुल्ला खान ने कुमार विश्वास पर तीन बड़े आरोप लगाए थे. खान ने कहा था कि कैबिनेट मंत्री के घर में चार विधायकों की बैठक हुई थीवहीं कुमार विश्वास बीजेपी के इशारे पर पंजाब और एमसीडी के चुनाव में कैम्पेन करने नहीं आए थे. साथ ही टिकट बंटबारे में कुमार विश्वास मौजूद थे, लेकिन अब सवाल उठाकर एक षड्यंत्र रचा जा रहा है.इस बयान पर हुआ था विवादजिस बयान से विवाद खड़ा हुआ था उसमेंअमानतुल्ला खान ने आरोप लगाते हुए कहा था कि 'कुमार विश्वास आम आदमी पार्टी को हड़पना चाहते हैं और तोड़ना चाहते हैं. कुमार अपने घर में विधायकों को बुलाकर यह कह रहे हैं कि मुझे पार्टी का संयोजक बनवाओ, नहीं तो बीजेपी में चलो. बीजेपी हर एक को 30 करोड़ देने के लिए तैयार है.विश्वास पर पार्टी तोड़ने का गंभीर आरोपजामिया से AAP विधायक ने कहा था कि मुझे लगता है ये सब बीजेपी के इशारे पर हो रहा है और इस काम के लिए इन्होंने 4 विधायक छोड़े हुए हैं. ये चारों विधायक AAP के विधायकों को कुमार विश्वास के घर ले जाते हैं, इस बात की तस्दीक AAP के तमाम विधायकों ने की

(अमर उजाला)

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आम आदमी पार्टी(आप) ने ओखला से पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान का निलंबन रद्द कर दिया है। करावल नगर से पार्टी के निलंबित विधायक कपिल मिश्रा ने आज कई ट्वीट कर खान के निलंबन को रद्द किए जाने को लेकर निशाना साधा। पार्टी के वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ(आरएसएस) के लिए काम करने का आरोप लगाने पर पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति ने खान को तीन मई को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया था।मिश्रा ने ट्वीट में लिखा केजरीवाल के बारे में सच बोलो तो सजा, कुमार के बारे में झूठ बोलो तो मजा। क्या अमानत पर बनी 3 सदस्यीय समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी। एक अन्य ट्वीट में पूर्व मंत्री ने लिखा आप के पास अमानतुल्ला से ज्यादा तेज तर्रार मुसिलम चेहरा है नहीं। बिना मुस्लिम वोट पार्टी कहीं और तो छोडि़ए दिल्ली भी नहीं जीत सकती। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा 67 विधायक जीतने के लिए किसी जाति या धर्म के चेहरे नहीं चाहिए थे। अमानतुल्ला उन लोगों में से हैं, जो अफजल गुरु और बुरहान वानी को हीरो मानते हैं। दिल्ली के मुसलमान ऐसे लोगों को पसंद नहीं करते। गौरतलब है कि मिश्रा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, जिसके बाद उन्हें केजरीवाल मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था।

(उत्तम हिंदु न्यूज)



Monday, October 30, 2017

सौ साल की बुढ़िया से बलात्कार,मौत और गिरफ्तारी

यह  दिल दहला देने वाली घटना मेरठ के रघुनाथ पुरा गांव में घटित होने के समाचार के बाद से बवाल मचा हुआ है। सभी सोचने पर मजबूर कि आहैं कि हम किस तरह के वातावरण  में रह रहे हैं।

 यह सवाल भी जेहन में कौंध उठेगा कि क्या हमारी इंसानी बस्तियों में इतने वहशी दरिंदे पैदा हो गये हैं।

 यह पूरा मामला जानी थाना इलाके के रघुनाथपुर गांव का है, जहां एक वहशी दरिंदे ने 100 साल की बुजुर्ग महिला के साथ कथित तौर पर रेप किया। दुष्कर्म का शिकार बनी दलित महिला ने सोमवार 30.10.2017  की सुबह उपचार के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया। 

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बारे में पुलिस का कहना है कि आरोपी का मेडिकल कराने के बाद उसे कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। 

 महिला के परिजनों के अनुसार रविवार 29.10.2017 की रात सौ वर्ष की वृद्धा बीमारी के कारण अपने बरामदे में सो रही थीं। रात को उनके कराहने की आवाज सुनकर जब परिवार के सदस्य कमरे से बाहर निकले, तो गांव का ही 35 वर्षीय अंकित पूनिया नाम का शख्स दुष्कर्म कर रहा था। 

 परिजनों के मुताबिक उस समय अंकित नशे में बुरी तरह से धुत था।दौरान जब उसे पकड़ने का प्रयास किया गया, तो वह मौके से फरार हो गया।

इस दौरान 108 नंबर पर कॉल कर परिजनों ने ऐंबुलेंस बुलाई और पीड़ित वृद्धा को लेकर थाने पहुंचे। जानी के एसएचओ (थानाधिकारी) प्रेमचंद शर्मा ने बताया कि रविवार की रात को ही आरोपी अंकित पूनिया को नामजद करते हुए उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 458 और 376 व 3(2)5 एससी/एसटी ऐक्ट के तहत मुकदमा दायर किया गया।

 पुलिस का कहना है कि वृद्धा को उपचार के लिए मेरठ जिला अस्पताल भेज दिया गया था। सोमवार 30.10.2017 की सुबह 4 बजे अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

एसएचसो का कहना है कि मौत की खबर मिलने पर मुकदमे में आईपीसी की धारा 302 (हत्या) भी जोड़ दी गई है।

एसएचओ ने बताया कि सोमवार को करीब एक बजे आरोपी अंकित को हिंडन नदी के पुल के पास से गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे मेडिकल के लिए भेजा गया है। वहीं इस घटना को लेकर गांव में भारी तनाव देखा जा रहा है। गांव की गलियां सूनी पड़ी हुई हैं। वहीं एक बिरादरी के लोग इसे झूठा मामला बता रहे हैं। मेरठ पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है।



महात्मा गांधी की हत्या की दुबारा जांच का पड़पोते द्वारा विरोध

महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी 70 वर्ष पहले हुई महात्मा की हत्या के मामले को फिर से खोलने की मांग करने वाली याचिका का विरोध करते हुए सोमवार को उच्चतम न्यायालय पहुंचे। न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एमएम शांतानागौदर की पीठ ने यह जानना चाहा कि तुषार किस हैसियत से इस याचिका का विरोध कर रहे हैं। तुषार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि अगर अदालत इस मामले पर आगे बढ़ती है और नोटिस जारी करती है तो वह स्थिति के बारे में समझा सकेंगी।पीठ ने कहा कि इस मामले में कई सारे किंतु-परंतु हैं और अदालत न्यायमित्र अमरेंद्र शरण की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहेगी। अमरेंद्र शरण ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगते हुए कहा था कि उन्हें राष्ट्रीय अभिलेखागार से दस्तावेज अभी नहीं मिले हैं। जयसिंह ने कहा कि वह महात्मा गांधी की हत्या के 70 वर्ष पुराने मामले को फिर से खोले जाने का विरोध कर रही हैं और याचिकाकर्ता के याचिका दायर करने के अधिकार पर भी सवाल उठा रही हैं।जयसिंह ने कहा कि महात्मा गांधी की हत्या के 70 साल बाद मामले की दोबारा जांच नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यह बुनियादी आपराधिक कानून है। याचिकाकर्ता मुंबई के रहने वाले पंकज फड़नीस हैं। वह अभिनव भारत के न्यासी और शोधकर्ता हैं। इस मामले को पीठ ने चार सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध किया। शीर्ष अदालत ने इस मामले में सहयोग के लिए छह अक्टूबर को वरिष्ठ अधिवक्ता शरण को न्यायमित्र नियुक्त किया था।


मातृ भाषा में मिले हर विद्यार्थी को शिक्षा

रावतसर 30.10.2017.हर बालक का यह मौलिक अधिकार है कि उसको प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में मिले।अध्ययनों से पता चला है कि मातृभाषा में दी गई शिक्षा बालक जल्दी ग्रहण करता है।चीन,फ्रांस,स्पेन आदि देशों में न केवल प्राथमिक शिक्षा बल्कि उच्च शिक्षा भी विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा में दी जाती है।चाणक्य कोचिंग क्लासेज तथा द साइंस कॉलेज क्लासेज रावतसर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राजस्थानी भाषा पर केंद्रित कार्यक्रम में ये विचार उपस्थित साहित्यकारों ने रखे।चाणक्य कोचिंग क्लासेज के प्रबंधक मुकेश शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षाविद् प्रह्लाद राय पारीक थे।राजस्थानी भाषा मान्यता समिति के जिला प्रचार मंत्री हरीश हैरी ने उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मातृभाषा का स्थान कोई दूसरी भाषा नहीं ले सकती।हर प्रांत ने राजभाषा के नाम पर बाड़ लगा रखी है।उस बाड़ को पार करना राजस्थानी विद्यार्थियों के लिए नामुमकिन है क्योंकि हर प्रांत में यह नियम है कि किसी भी नौकरी के लिए उस प्रांत की भाषा में 10 वीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है।राजस्थान हिंदी भाषी क्षेत्र घोषित होने के कारण बाहर के लोग यहां नौकरियों में शामिल हो जाते हैं।अपनी मातृभाषा राजस्थानी को मान्यता न होने के कारण यहां के विद्यार्थी पिछड़ जाते हैं।शिक्षाविद् प्रह्लाद राय पारीक ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि उनके हक की लड़ाई उनको स्वयं लड़नी होगी।राजस्थानी भाषा का शब्दकोश विश्व में सबसे बड़ा शब्दकोश है। राजस्थानी भाषा में हस्तलिखित अढाई लाख से ज्यादा ग्रंथों की पांडुलिपियां विभिन्न संग्रहालयों में सुरक्षित हैं।11 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं होने के कारण हर राजस्थानी से उसका हक छीना जा रहा है।इससे पूर्व छात्र पवन कुमार बिश्नोई ने अपनी राजस्थानी कविता पढ़कर सुनाई।युवा कवि अशोक परिहार उदय ने तरन्नुम में राजस्थानी गीत व कविता सुनाकर दाद पाई।इस अवसर पर राजस्थानी छात्र मोर्चा के तहसील संयोजक व्याख्याता सूरजमल राठौड़,व्याख्याता सुभाष सोनी अनाम,डॉ.विजय पटीर,मुरारी लाल,सुरेंद्र शर्मा,राजेंद्र,महेंद्र,रामलाल जोशी,संजय भार्गव,प्रकाश नवल,राजकुमार सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।कार्यक्रम का मंच संचालन राजस्थानी के युवा साहित्यकार राजू सारसर राज ने किया।कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु चाणक्य कोचिंग क्लासेज के प्रबंधक मुकेश शर्मा ने सब का आभार व्यक्त किया।




आरक्षण पर ब्राह्मण राजपूत जाट क्या कहते हैं?

जयपुर। राजस्थान सरकार द्वारा दो दिन पूर्व गुर्जर सहित पांच जातियों को पांच फीसद आरक्षण देने संबंधी विधेयक विधानसभा में पारित कराए जाने के बाद अब सवर्ण आरक्षण की मांग तेज होने लगी है।

 सर्व ब्राह्माण महासभा ने चेतावनी दी है कि आरक्षण की मांग को लेकर दिसंबर से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के उपाध्यक्ष एपी सिंह ने जातिगत आरक्षण व्यवस्था को तुरंत समाप्त कर आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग की है। जयपुर स्थित राजपूत सभा भवन में जुटे प्रदेश के प्रमुख जाट नेताओं ने आर्थिक आधार पर आरक्षण व्यवस्था लागू करने को लेकर सरकार पर दबाव डालने की रणनीति बनाई।

अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने राज्य सरकार से क्रीमीलेयर की सीमा बढ़ाने की मांग की है।

30.10.2017.

Sunday, October 29, 2017

हम जागे हुए थे, जागे हुए हैं- बोलते नहीं सो हमारी मर्जी:


भारत में कुल 4120 MLA और 462 MLC हैं अर्थात कुल 4,582 विधायक। प्रति विधायक वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 2 लाख का खर्च होता है। अर्थात श91 करोड़ 64 लाख रुपया प्रति माह। इस हिसाब से प्रति वर्ष लगभ 1100 करोड़ रूपये।भारत में लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कुल 776 सांसद हैं। इन सांसदों को वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 5 लाख दिया जाता है। अर्थात कुल सांसदों का वेतन प्रति माह 38 करोड़ 80 लाख है। और हर वर्ष इन सांसदों को 465 करोड़ 60 लाख रुपया वेतन भत्ता में दिया जाता है।अर्थात भारत के विधायकों और सांसदों के पीछे भारत का प्रति वर्ष 15 अरब 65 करोड़ 60 लाख रूपये खर्च होता है ये तो सिर्फ इनके मूल वेतन भत्ते की बात हुई। इनके आवास, रहने, खाने, यात्रा भत्ता, इलाज, विदेशी सैर सपाटा आदि का का खर्च भी लगभग इतना ही है। अर्थात लगभग 30 अरब रूपये खर्च होता है इन विधायकों और सांसदों पर।अब गौर कीजिए इनके सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के वेतन पर। एक विधायक को दो बॉडीगार्ड और एक सेक्शन हाउस गार्ड यानी कम से कम 5 पुलिसकर्मी और यानी कुल 7 पुलिसकर्मी की सुरक्षा मिलती है। 7 पुलिस का वेतन लगभग (25,000 रूपये प्रति माह की दर से) 1 लाख 75 हजार रूपये होता है। इस हिसाब से 4582 विधायकों की सुरक्षा का सालाना खर्च 9 अरब 62 करोड़ 22 लाख प्रति वर्ष है।  इसी प्रकार सांसदों के सुरक्षा पर प्रति वर्ष 164 करोड़ रूपये खर्च होते हैं। Z श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त नेता, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए लगभग 16000 जवान अलग से तैनात हैं। जिनपर सालाना कुल खर्च लगभग 776 करोड़ रुपया बैठता है। इस प्रकार सत्ताधीन नेताओं की सुरक्षा पर हर वर्ष लगभग 20 अरब रूपये खर्च होते हैं।अर्थात हर वर्ष *नेताओं पर कम से कम 50 अरब रूपये खर्च होते हैं। इन खर्चों में राज्यपाल, भूतपूर्व नेताओं के पेंशन, पार्टी के नेता, पार्टी अध्यक्ष , उनकी सुरक्षा आदि का खर्च शामिल नहीं है। यदि उसे भी जोड़ा जाए तो कुल खर्च लगभग 100 अरब रुपया हो जायेगा।*अब सोचिये हम प्रति वर्ष नेताओं पर 100 अरब रूपये से भी अधिक खर्च करते हैं, बदले में गरीब लोगों को क्या मिलता है ?*क्या यही है लोकतंत्र ?* यह 100 अरब रुपया हम भारत वासियों से ही टैक्स के रूप में वसूला गया होता है।)और एक सर्जिकल स्ट्राइक यहाँ भी बनती हैभारत में दो कानून अवश्य बनना चाहिए  पहला - चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध नेता केवल टेलीविजन ( टी वी) के माध्यम से प्रचार करेंदूसरा - नेताओं के वेतन भत्तो पर प्रतिबंध |तब दिखाओ देशभकित |प्रत्येक भारतवासी को जागरूक होना ही पड़ेगा और इस फिजूल खर्ची के खिलाफ बोलना पड़ेगा ? ( वाट्स अप से मिला। लेकिन यह सब तो जानते हैं।)



पुलिस कर्मी आतंकी बन गया-इस पर किससे मांगा जाए इस्तीफा?




यहाँ समाचार पत्रों की  एक छोटी सी खबर की ओर ध्यान दिलाना चाहूंगा । खबर ये है कि श्रीनगर में एक पुलिस कर्मी अपनी  सरकारी नौकरी छोड़ कर एक आतंककारी बन गया।पता चला है कि श्रीमाल गांव का निवासी अशफाक अहमद नाम का यह युवक अपनी पुलिस की नौकरी छोड़ कर लश्करे तैयबा में भर्ती हो गया । वहां उसका कोड नाम अबू अकरम है जिसकी फोटो एके 47 के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो गयी है।पुलिस कह रही है कि मामले की जाँच की जा रही है।इससे मिलती जुलती दूसरी बड़ी खबर गुजरात से आयी है जिसके अनुसार गुजरात में दो आतंकी एटीएस द्वारा पकड़े गए हैं।खबर बड़ी इसलिए क्योंकि इनमें से एक व्यक्ति एक अस्पताल जो अहमद पटेल का बताया गया, में टेक्नीशियन के पद पर काम कर चुका था।खबर इतनी बड़ी थी की मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को तुरंत एक प्रेस कांफ्रेंस करके इसकी जानकारी देनी पड़ी।रूपाणी ने बताया कि वो  आतंकी जिस अस्पताल में नौकरी कर रहा था वो कांग्रेस नेता और सोनिया गांधी के नजदीकी अहमद पटेल की है।रूपाणी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आतंकियों को शह देती है व उन्होंने अहमद पटेल से इस कारण राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा देने की मांग की है । जबकि उस अस्पताल की तरफ से लिखित प्रेस नोट द्वारा सफाई दी गयी है कि अहमद पटेल या उनके परिवार का कोई  सदस्य इस अस्पताल के किसी लाभ के पद पर नहीं है।अहमद पटेल ने स्वयं भी कहा है कि इस अस्पताल के वे सन 2014 तक ट्रस्टी रहे है व 2014 में उन्होंने ये पद छोड़ दिया था।एटीएस की कार्रवाई की तारीफ करते हुए अहमद पटेल ने उक्त आतंकी को सख्त सजा देने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर राजनीती न करने की अपील की है।लेकिन बीजेपी को इससे कोई मतलब नहीं है उसे तो अहमद पटेल का इस्तीफा चाहिए चाहे उसका यहाँ कोई अर्थ हो या न हो ।अब देखिये कश्मीर में एक पुलिस कर्मी अशफाक अहमद आतंकी बन गया तो किससे इस्तीफा लिया जायेगा? क्या कश्मीर के गृहमंत्री देंगे इस्तीफा?बीजेपी के आई टी सेल का अध्यक्ष ध्रुव सक्सेना जब पाकिस्तान को सेना की ख़ुफ़िया जानकारियां देता पकड़ा गया तो बीजेपी के किस नेता का इस्तीफा मांगा गया ?मतलब साफ है जब राजनीतिक हित साधना हो तो देश की बात कौन करे? बड़ी मुश्किल से एक मुद्दा हाथ लगा है और वो भी अहमद पटेल का जो कांग्रेस से हैं और मुस्लिम  है तथा जिसने हाल के राज्य सभा चुनाव में बीजेपी को पटकनी दी है। इसलये उसे कैसे छोड़ा जाएँ? यह आम तौर पर देखा गया है कि राजनीतिक दल अपनों और दूसरों के लिए अलग अलग मानदंड रखते है।यहाँ गुजरात चुनाव सर पर है!विपक्ष हावी हो रहा है।बीजेपी से गुजरात मॉडल और विकास का जवाब नहीं बन रहा।ऐसे  ऐसा लगता है कि बीजेपी एक आतंकी का सहारा लेकर वो हिन्दू मुस्लिम का सवाल खड़ा करके राजनितिक हित साधने की कोशिश कर रही है।कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसा कर रही है । कुल मिला कर बात यही क़ि  राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मामलो पर राजनीती न करने की बात करने वाले अवसर पर हकीकत और व्यवहार में  वो सब नहीं करते जिसकी दुहाई देते है।



रमेश छाबड़ा

सूरतगढ़



सर्व समाज की एकजुटता की सोच रखता हैं ब्राह्मण समाज : विधायक पं. भंवरलाल शर्मा



- ब्राह्मण समाज ने किया गौड़ सभा के पूर्व अध्यक्ष जगदीश गौड़ के

नेतृत्व में विप्र नेता विधायक पं. भंवरलाल शर्मा का जोरदार सम्मान

श्रीगंगानगर 29.10.2017.

सर्व समाज की एकजुटता की सोच अगर कोई रखता हैं तो वह सिर्फब्राह्मण समाज ही हैं, क्योंकि अगर सभी समाज एकजुट होगें तो हमें जातिगतआरक्षण की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। यह बात जी मॉडल टाऊन फस्र्ट (सरकारीअस्पताल के सामने) गौड़ सभा के पूर्व अध्यक्ष जगदीश गौड़ के नेतृत्व मेंआयोजित विशाल अभिनंदन समारोह में ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ नेता औरसरदारशहर विधायक पं. भंवरलाल शर्मा ने कहीं। उन्होंने  कहा कि मेरा माननाहैं कि जातिगत आरक्षण को खत्म कर आर्थिक आरक्षण देना चाहिये। जिससे कोईजाति-पाति में न फंसकर सीधे आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को लाभ मिल सकें। इसलिये कई साल पहले भी हमनें जयपुर में अमरूदों के बाग में विशालजनसभा कर इस मुद्दे को उठाया था। वहीं सरदारशहर विधायक पं. भंवरलाल शर्मा ने कहा कि आज का समय हक मांगने का नहीं, बल्कि हक छीनने का हैं। क्योंकि आजकल की सरकारें जरूरतमंद का हक छीनने में विश्वास रखती हैं, इसलिये विप्र समाज को अपना हक छीनना पड़ेगा।

 अभिनंदन समारोह में विधायक पं.भंवरलाल शर्मा ने कहा कि श्रीगंगानगर का विप्र समाज आज भी उन्हें उतना ही स्नेह करता हैं, जितना पहले से करते आ रहा हैं। जिसकी बदौलत आज का ये अभिनंदन समारोह हैं, जिसमें गौड़ सभा के पूर्व अध्यक्ष जगदीश गौड़ ने थोड़े से समय में इतना बड़ा तामझाम करके इस समारोह का आगाज किया और मुझे प्रेम-प्यार दिया। जिसके लिये में सदा विप्र समाज ओर गौड़ सभा के पूर्व अध्यक्ष जगदीश गौड़ का आभारी रहूंगा। 

कार्यक्रम के दौरान यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार गौड़ ने कहा कि हमें खुशी हैं कि हमारे समाज के कुछ वरिष्ठ नेता आज विधानसभा और संसद में हैं और समाजहित के बारे में सोचते हैं। जिसके जीते-जागते सबूत सरदारशहर विधायक पं. भंवरलाल शर्मा हैं। वहीं गौड़ ने भी समाज एकजुटता पर बल दिया और एकजुट होकर समाज को प्रगति के पथपर ले जाने के लिये कहा। 

अभिनंदन समारोह के दौरान गौड़ सभा के पूर्व अध्यक्ष जगदीश गौड़ के नेतृत्व में समस्त ब्राह्मण समाज के गणमान्यों ने सरदारशहर विधायक पं. भंवरलाल शर्मा को राजस्थानी पगड़ी पहनाकर और शॉल ओढ़ाकर तथा स्मृति चिन्ह देकर जोरदार अभिनंदन किया। 

 यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार गौड़, वरिष्ठ पत्रकार ललित शर्मा, शिक्षाविद् पी.सूदन, जगदीश तिवाड़ी, आरपी भारद्वाज, विनोदइन्दौरिया, ओमप्रकाश पारीक, बजरंग सारस्वत, परमेश्वरलाल शर्मा, ओमप्रकाश शर्मा (मंहियावाली), नरेश शर्मा, पूनम पारीक, केसी शर्मा, बनवारीलाल ओझईया मंच पर आसीन रहें।

 इस दौरान सरदारशहर विधायक पं. भंवरलाल शर्मा व मंच पर आसीन अतिथियों को परमेश्वरलाल शर्मा, गौड़ सभा के पूर्व अध्यक्ष जगदीश गौड़, पवन गौतम, महेश जोशी, चन्द्रशेखर गौड़, राजेन्द्रप्रसाद शर्मा, रवि गौड़, मनोहरलाल शर्मा, राजेन्द्र लाटा, प्रवीण गौड़, सतपाल शर्मा, महावीर शर्मा, राजेन्द्र जेटली, रतन शर्मा, पवन लाटा, दीपक, धीरज शर्मा, देवेन्द्र कौशिक, अमित शर्मा, विनीत शर्मा, विजयशर्मा, मदन जोशी, ओमप्रकाश शर्मा (गोलूवाला), किशन शर्मा, जगदीश शर्मा,रविकान्त शर्मा, प्रेम खण्डेलवाल, आशाराम शर्मा, मीडिया कोर्डिनेटरलक्ष्मीकांत शर्मा, सुभाष शर्मा, सरपंच सुरेन्द्र पारीक, छबीलदास शर्मातेजपाल शर्मा, सुरेन्द्र शर्मा, हीरालाल गौड़, श्रवण पारीक, डॉ. अन्नारामशर्मा, किशन लाटा, विशाल गौड़, सचिन सारद, नरेश शर्मा, राजकुमार जोग,मनीराम शर्मा, कृष्णदत्त शास्त्री, सुबोध शर्मा ने फूलमाला पहनाकरअतिथियों का स्वागत किया।

 इस दौरान सरदारशहर विधायक एवं राजस्थानब्राह्मण महासभा के प्रदेशाध्यक्ष पं. भंवरलाल शर्मा ने अतिथियों विप्रसमाज की मानव दर्पण पुस्तक का भी विमोचन किया। जिसमें समाजहित से जुड़ी अनेक जानकारियां प्रकाशित हैं। वहीं मंच संचालन प्रवीण गौड़ ओर महेश जोशी ने किया।




मौत की गुफा रेलवे अंडर ब्रिज में सावधान रहें


- करणीदानसिंह राजपूत +

सूरतगढ़ का यह रेलवे अंडर ब्रिज मौत की गुफा बना हुआ है। यह सेठ राम दयाल राठी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय  और बड़ोपल रोड के चरण सिंह चौक पर मेल करता है। 

यह अंडर ब्रिज हालात से मौत की गुफा बना हुआ है।इसकी चौड़ाई कम है तथा पैदल के लिए दोनों तरफ फुट पाथ नहीं हैं। वाहनों के आमने-सामने होने पर रोशनी से चालकों की आंखें चुंधिया जाती हैं और खुल नहीं पाती। ऐसी हालत में ट्क्टरों जीपों भारवाहनों का आना जाना मौत के संकट को पक्का बनाता है।

यह रेलवे अंडर ब्रिज इसकी बनावट के अनुसार चार पहिया वाहन के लिए नहीं है। मगर इसके अंदर से चार पहिया वाहन ट्रैक्टर ट्राली सहित जीप कार व अन्य भार वाहन शोर करते हुए निकलते हैं आने जाने के वक्त बहुत बार बीच में दो वाहन आमने सामने होते हैं तो निकलते वक्त साइड में मामूली सी जगह बचती है। उस जगह पर कोई पैदल निकलने वाला होता है तो वह भयानक संकट में होता है। उसे दीवार के साथ चिपक कर खड़ा होना पड़ता है। पैदल की सुरक्षा के लिए कोई फुटपाथ प्लेटफार्म नहीं है कोई भी वाहन अनियंत्रित हुआ तब सर्वाधिक घायल होने वालों में पैदल चलने वाले और दुपहिया पर चलने वाले होंगे।किसी की जान चली गई तो कौन होगा जिम्मेदार? ऐसे हालात हैं दुपहिया वाहन भी हॉर्न बजाते हुए बहुत तेज गति से निकलते हैं।अंडर ब्रिज में कान फोड़ शोर होता है। अंदर रोशनी नहीं है वाहनों की रोशनी आमने सामने होती है तब टक्कर हो जाने की स्थिति अधिक होती है। 

निर्माण के होते ही 17 अक्टूबर 2017 को धनतेरस के दिन जल्दबाजी में इस का लोकार्पण विधायक राजेंद्र सिंह भादू और नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती काजल छाबड़ा के द्वारा किया गया। आश्चर्य यह है कि इस रेलवे अंडर ब्रिज की  सड़क पूरी तरह से उखड़ चुकी है। अंडर ब्रिज की छत का पलस्तर कुछ स्थानों से उखड़ कर गिर गया। एक दीवार में काफी लम्बी दरार पड़ गई।ऐसा घटिया निर्माण कैसे हुआ?

 यह केवल जांच का विषय नहीं है बल्कि लोकार्पण करने वालों को मौके पर पहुंचकर खुद अपनी आंखों से यह हालात देखने चाहिए। उनकी जिम्मेदारी बनती है। केवल वक्तव्य देने से काम नहीं चल सकता। जहां दुर्घटना का खतरा हो और मानव की जान जा सकती हो, नुकसान हो सकता हो, वहां वक्तव्य काम नहीं देते। 

विधायक राजेंद्र सिंह भादू को खुद मौके पर जाकर के देखना और जांच खुद करनी चाहिए कि इतना घटिया निर्माण क्यों हुआ? उन्होंने खुद ने बिना जांचे परखे क्यों इसका लोकार्पण किया? सूरतगढ़ के लोगों को,राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को,सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं को अपनी आंखों से देखना चाहिए कि यह अंडर ब्रिज मौत की गुफा जैसा क्यों बना? 

इसके भीतर से निकलने के 5- 10 सेकंड का समय कितना खतरनाक हालत में है और इस खतरे से बचने के लिए क्या किया जा सकता है?

  यहां पर कुछ तस्वीरें दे रहा हूं जो आंखें खोल देने वाली है और इस अंडर ब्रिज को मौत की गुफा शीर्षक देने के लिए प्रमाणिक है। एक तस्वीर में तो दो वाहन निकल रहे हैं और एक महिला को दीवार के साथ मजबूरी में अपने बचाव के लिए खड़ा होना पड़ा है। टूटी हुई सड़क का फोटो भी है।पूरी सड़क टूटी हुई है। अंडर ब्रिज में दो वाहन निकलते हैं तब जगह नहीं बचती। चार पहिया वाहनों को प्रवेश निषेध है मगर ट्रैक्टर ट्राली सहित भरे हुए निकल रहे हैं।

 



Saturday, October 28, 2017

निहाल चंद मेघवाल को दुष्कर्म​ मुकदमें में कोर्ट से राहत: महिला की रिवीजन याचिका खारिज:



- करणीदानसिंह राजपूत-

इस मुकदमें में सूरतगढ़, गंगानगर, पीलीबंगा के लोगों के, राजनेताओं, पुलिस वालों के नाम भी थे।

साल 2011 में दर्ज करवाए दुष्कर्म मामले में अदालत ने महिला की रिवीजन याचिका को खारिज कर दिया है। सिरसा की रहने वाली इस महिला ने निहाल चंद सहित 17 लोगों पर  दुष्कर्म के आरोप लगाए थे। पुलिस इस मामले में पहले एफआर लगा चुकी थी। इसके बाद महिला ने एफआर के विरुद्ध  रिवीजन अर्जी दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

मामले के अनुसार हरियाणा निवासी विवाहिता ने मेघवाल सहित 17 लोगों के खिलाफ कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए वर्ष 2011 में वैशाली नगर थाने में मामला दर्ज कराया था। पीड़िता का आरोप था कि उसका पति अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए उसे बेहोश कर कई लोगों से दुष्कर्म कराता था। वैशाली नगर पुलिस जाना जयपुर ने प्रकरण में एफआर लगा दी थी। इसके खिलाफ पीड़िता की ओर से प्रोटेस्ट पिटिशन दायर की गई। जिसे खारिज करते हुए अदालत ने एफआर को स्वीकार कर लिया था। इसके खिलाफ पीड़िता की ओर से रिवीजन अर्जी दायर की गई थी।

आरोपों में कौन कौन ?

1. ओमप्रकाश गोदारा पति।2. राजकुमार गोदारा देवर।3. विकास अग्रवाल।4. निहालचंद मेघवाल/ मुकद्दमा हुआ तब पूर्व सांसद थे/।5. पुष्पेन्द्र भारद्वाज/ राजस्थान विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष।6. विवेकानन्द/ जो भाजपा के कई नेताओं के निजी सचिव रहे/7. अनिल राव/ पुलिस उप अधीक्षक/इस8. महावीर / पुलिस इंस्पेकटर/9. राधेराम गोदारा/ सूरतगढ़ तहसील के अमरपुरा जाटान के निवासी/10.विकास अग्रवाल।11.आरिफ।12.हरीश।13.कुलदीप हुंदल।14.भगवान।15. मनीष / श्रीगंगानगर निवासी/16.पिंटू / श्रीगंगानगर निवासी/17.कुलदीप / पीलीबंगा निवासी/

----निहाल चंद मेघवाल ने कहा था कि झूठा आरोप है।

राधेराम ने भी कहा था कि आरोप झूठा है।


Friday, October 27, 2017

सोनिया गांधी की हालत अब काफी अच्छी-राहुल: सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती हैं

नई दिल्ली: शिमला दौरे पर गयीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पेट में परेशानी होने के बाद शुक्रवार को दिल्ली लौट आईं और उन्हें सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि अब उनकी स्थिति काफी बेहतर है.

राहुल ने ट्वीट कर बताया, 'मां (सोनिया) शिमला में थीं और उनके पेट में समस्या हो गई लिहाजा हम उन्हें वापस लेकर आए. चिंता की कोई बात नहीं, वह अब काफी बेहतर हैं. असीम प्रेम एवं चिंता दिखाने के लिए धन्यवाद.'

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अचानक तबियत बिगड़ गई है. उन्हें शिमला से लाकर दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उन्हें पेट से संबंधित किसी परेशानी की शिकायत है. उन्हें निगरानी में रखा गया है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया शिमला के निजी दौरे पर गई थी, जहां अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, इसके बाद उन्हें दिल्ली लाया गया. उन्हें गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया.

अस्पताल के चेयरमैन (प्रबंधन बोर्ड) डीएस राणा ने बताया कि 70 वर्षीय सोनिया गांधी डॉक्टरों की देखरेख में हैं. राणा ने एक बयान में कहा, "सोनिया गांधी को आज शाम पांच बजे अस्पताल लाया गया. उन्हें पेट में परेशानी थी और निगरानी रखने के लिए उन्हें भर्ती किया गया है." सूत्रों के अनुसार सोनिया को शिमला से एक एयर-एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया. वह छुट्टी मनाने शिमला गई थीं. सोनिया को शिमला से वापस लाने के लिए अस्पताल के डॉक्टरों के एक दल को भेजा गया था. कांग्रेस के सूत्रों ने कहा कि उनकी हालत स्थिर है.

27.10.2017.


छत्तीसगढ़ के भाजपा मंत्री की सैक्स सीडी है या नहीं? पत्रकार की गिरफ्तारी फिर क्यों? देश में हंगामा

- करणीदानसिंह राजपूत -

छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार के मंत्री राजेश मूणत की सेक्स CD है या नहीं है यह पूरी जांच से मालूम होगा लेकिन वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा की सूर्योदय से पूर्व की गई गिरफ्तारी के बाद देशभर में हंगामा मचा हुआ है। पत्रकार का कहना है कि सीडी मंत्री की होने के कारण उसे गिरफ्तार किया गया।  मंत्री का कहना है कि CD देखी है और वह फर्जी है। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि उन्हें किसी ने ब्लेकमैल नहीं किया और न फोन किया। तो फिर पत्रकार को गिरफ्तार करने के हालात कैसे हुए और जिस तरीके से छत्तीसगढ़ की पुलिस ने उत्तर प्रदेश की पुलिस से मिलकर पत्रकार विनोद वर्मा की गिरफ्तारी की,वह आश्चर्यजनक रही। अनेक पत्रकारों ने इसे प्रेस पर हमला बताया है।


जानिए की यह सब क्या है?


‌सेक्स सीडी मामले में छत्तीसगढ़ के मंत्री राजेश मूणत सामने आये हैं. उन्होंने कहा कि विनोद वर्मा की जिस सेक्स सीडी के मामले में गिरफ्तारी हुई है और जिस कथित सेक्स सीडी के बारे में चर्चा हो रही है, वह पूरी तरह से फर्जी है.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के एक मंत्री​ की कथित सेक्स सीडी के मामले में पुलिस ने शुक्रवार 27.10.2017 को वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को गिरफ्तार किया है. वर्मा ने दावा किया है कि उनके पास छत्तीसगढ़ के एक मंत्री का सेक्स टेप था, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया है। रायपुर के पंडरी थाने में प्रकाश बजाज नामक एक व्यक्ति ने कल 26.10.2017 को एक रिपोर्ट दर्ज करवाई गई थी कि उन्हें फोन कर उनके आका की एक सेक्स सीडी के नाम पर बदनाम करने की धमकी दी गई है.

इसी मामले में सफाई देने के लिये भाजपा के नेता और मंत्रियों ने रायपुर में प्रेस कांफ्रेस की.

छत्तीसगढ़ में पीडब्‍ल्‍यूडी, आवास एवं पर्यावरण और परिवहन मंत्री राजेश मूणत ने कहा कि राजनीतिक जीवन के 24 साल हो चुके हैं. छोटे पद से लेकर बड़े पद पर रहा. राजनीति में ऐसी गिरावट मैंने नहीं देखी.

उन्होंने कहा कि किसी की सीडी है तो 500 सीडी बनाने का औचित्य क्या है? मुख्यमंत्री से बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष से इस मामले पर जांच कराने को कहूंगा. मूणत ने कहा कि उनके पास किसी का भी फोन नहीं आया और ना ही उन्हें ब्लैकमेल करने की कोशिश की गई.

रायपुर से विधायक और युवा नेता राजेश मूणत ने कहा कि ये मेरी चरित्र हत्या का प्रयास है. जिस भी एजेंसी से जांच कराना चाहें, वो कर सकते हैं.

मंत्री मूणत ने कहा कि मेरे उपर जो चीज दिखा रहे हैं, घिनौना कृत्य करने की कोशिश की, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिये. मूणत ने कहा कि पूरी की पूरी सीडी फर्जी है. मैंने सीडी देखी है. देखकर ही कह रहा हूं, सीडी फर्जी है, फर्जी है, फर्जी है.


इधर पत्रकारों ने जब भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक से पूछा कि क्या सीडी कांड की जांच होने तक राजेश मूणत इस्तीफा देंगे तो उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की.


रायपुर (छत्तीसगढ़)। सेक्स सीडी मामले पर छत्तीसगढ़ के पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि जिस सीडी पर विवाद हो रहा वो बिल्कुल फर्जी सीडी है। उन्होंने कहा कि मैंने खुद सीडी देखी है। ये पूरी तरह से फर्जी है। बता दें कि राजेश मूणत पर सेक्स सीडी का आरोप है। मुझे करीब 34 साल राजनीति में हो गए हैं। इस सीडी की जितनी जल्दी हो जांच कराई जाए। इस सीडी का सच सामने आना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी को घेरने के लिए जिस तरह से सीडी को लेकर सवाल उठाए गए हैं, इसकी जल्द से जल्द जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने छत्तीसगढ़ के सीएम से इस सीडी की किसी भी एजेंसी से जांच कराने की बात कही है।


बीजेपी ने इस मामले में सीधे तौर पर विनोद वर्मा पर सवाल उठा दिए। बीजेपी विधायक शिवरतन यादव ने कहा कि विनोद वर्मा पत्रकार हैं या कांग्रेस के एजेंट है। बीजेपी विधायक ने कहा कि हम इस मामले की निंदा करते हैं। पूरा मामला ब्लैकमेलिंग का है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने पूरे मामले में मुख्यमंत्री से जांच का आदेश देने की मांग की है। बीजेपी विधायक ने भी कहा कि सीडी बिल्कुल फर्जी है। इसकी प्रामाणिकता की जांच होनी चाहिए।


इससे पहले पत्रकार विनोद वर्मा ने अपनी गिरफ्तारी के बाद पहली प्रतिक्रिया दी थी कि मेरे पास मंत्री की सेक्स सीडी थी, इसलिए मुझे निशाना बनाया गया। विनोद वर्मा ने कहा कि मुझे फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सरकार मुझसे खुश नहीं है मेरे पास एक पेन ड्राइव है, सीडी के साथ मेरा कोई लेना देना नहीं है। मुझे फंसाया जा रहा है। वर्मा ने कहा कि मेरे पास राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत की सेक्स सीडी थी जिसके चलते सरकार खुश नहीं थी। वर्मा ने कहा कि उनके पास बहुत बड़ा मामला है जिसे दबाने के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया। सीडी सार्वजनिक तौर पर मौजूद है।

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नई दिल्ली

जाने-माने पत्रकार विनोद वर्मा को छत्तीसगढ़ पुलिस ने उनके गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके में स्थित घर से गिरफ्तार किया है। रायुपर पुलिस की एक टीम ने वर्मा को ब्लैकमेलिंग और उगाही के केस में गिरफ्तार किया है।  विनोद वर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं और बीबीसी के लिए काम कर चुके हैं। फिलहाल वह छत्तीसगढ़ कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। 

अपनी गिरफ्तारी के बाद विनोद वर्मा ने हमारे सहयोगी न्यूज चैनल टाइम्स नाउ के साथ बातचीत में दावा किया कि उनके पास छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री राजेश मूणत की सेक्स सीडी है इसलिए सरकार उन्हें फंसा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सीडी पहले से ही पब्लिक डोमेन में है और उनका इससे कुछ लेना-देना नहीं है।

दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण मंत्री मंत्री राजेश मूणत ने विनोद वर्मा के दावों को खारिज किया है। मूणत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि उन्हें सोशल मीडिया के जरिए सीडी के बारे में जानकारी मिली और सीडी पूरी तरह फर्जी है। मंत्री ने कहा कि जिस भी एजेंसी से जांच करानी हो जांच हो जाए, वह जांच के लिए तैयार हैं। छत्तीसगढ़ बीजेपी ने पत्रकार विनोद वर्मा पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि वर्मा पत्रकार हैं या कांग्रेस के एजेंट। 


जब मूणत से यह पूछा गया कि क्या वह उसी तरह इस्तीफा देंगे जिस तरह दिल्ली सरकार में मंत्री रहे संदीप कुमार ने सेक्स स्कैंडल के बाद इस्तीफा दिया तो उन्होंने कहा कि संदीप कुमार के खिलाफ बीजेपी ने पुख्ता तथ्य रखे थे। मूणत ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रमुख भूपेश बघेल को चुनौती दी कि दम हो तो वह उनके खिलाफ पुख्ता तथ्य रखें।

वर्मा के खिलाफ छत्तीसगढ़ के पंडरि थाने में आईपीसी की धारा 384, 506 और आईटी ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है, जिसके आधार पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। उन पर एक नेता को ब्लैकमेल करके अवैध उगाही करने का आरोप है। पुलिस को वर्मा के घर से करीब 500 सीडी मिली हैं जिन्हें जब्त कर लिया गया है। इसके अलावा पुलिस ने 2 लाख रुपये कैश भी जब्त किया है। पुलिस ने एक लैपटॉप और डायरी भी अपने कब्जे में लिया है।

वर्मा को गिरफ्तार करने वाली रायपुर पुलिस टीम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि प्रकाश बजाज नाम के एक शख्स की शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि बजाज ने अपनी शिकायत में कहा है कि खुद को विनोद वर्मा बताने वाले एक शख्स ने उसे फोन पर धमकी दी और किसी अश्लील सीडी का हवाला देकर ब्लैकमेल करने की कोशिश की। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में कहा है कि फोन करनेवाले शख्स ने उससे कहा कि उनके पास उसके आका की सीडी है और अगर मांगें नहीं मानी गई तो वह उन सीडी को बांट देगा। 

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रायपुर पुलिस ने बताया कि विनोद वर्मा के बारे में सुराग एक सीडी बनानेवाले से मिला। पुलिस का दावा है कि सीडी बनानेवाले ने ही उसे विनोद वर्मा का नंबर दिया और बताया कि उन्होंने सेक्स सीडी की 1000 प्रतियां बनवाई हैं। रायपुर पुलिस ने बताया कि वर्मा के पास से 500 सीडी बरामद हुई है और ये एक ही की कॉपी थी।

ऐसा आरोप है कि वर्मा सेक्स सीडी के जरिए नेता को ब्लैकमेल कर रहे थे और उनसे अवैध उगाही की कोशिश में थे। कांग्रेस ने वर्मा की गिरफ्तारी का तीखा विरोध किया है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने भी आरोप लगाया है कि वर्मा की गिरफ्तारी के पीछे मंत्री के सेक्स स्कैंडल का मामला है। वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया

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 वर्मा इडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्य भी हैं. वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश उर्मिल ने भी फेसबुक पोस्ट के जरिए वर्मा की गिरफ्तारी की जानकारी दी है. उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 384 और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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विनोद इन दिनों छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल के सोशल मीडिया प्रभारी हैं.

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विनोद वर्मा की गिरफ्तारी की निंदा आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष ने भी की है. उन्होंने ट्वीट किया, सुबह के 3.30 बजे रहस्यमयी परिस्थितियों में बीबीसी और अमर उजाला से जुड़े रहे पत्रकार विनोद वर्मा को गिरफ्तार किया गया है. यह प्रेस पर हमला है।


पत्रकार विनोद वर्मा

Thursday, October 26, 2017

भाजपा की साथी शिवसेना गुजरात चुनाव में हार्दिक पटेल के साथ

शिवसेना के सांसद संजय राउत ने कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी देश का नेतृत्व करने में सक्षम हैं और साथ ही क मेंहा कि देश में अब नरेंद्र मोदी लहर खत्म हो चुकी है। राउत का यह बयान भारतीय जनता पार्टी के लिए परेशानी खड़ा कर सकता है। उन्होंने कहा कि जीएसटी को लेकर गुजरात के लोगों में काफी गुस्सा है, इसकी वजह से दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ेगा। राउत ने एक टीवी चैनल की बहस में हिस्सा लेते हुए यह बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस नेता राहुल गांधी देश का नेतृत्व करने में सक्षम हैं। उन्हें ‘पप्पू’ बोलना गलत है।’ इस टीवी बहस में राज्य शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता विनोद तावड़े भी मौजूद थे। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए सांसद ने कहा, ‘इस देश में सबसे बड़ी शक्ति जनता… मतदाता हैं। वो किसी को भी पप्पू बना सकते हैं।’

राउत ने साथ ही कहा, ‘2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर थी, लेकिन यह लहर खत्म हो चुकी है। जीएसटी लागू होने के बाद गुजरात में जिस तरह से लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, उससे लगता है कि भाजपा को चुनाव में कड़ी टक्कर मिलेगी।’

एनडीए की साथी पार्टी शिवसेना समय-समय पर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधती रहती है। पार्टी के मुखपत्र सामना के जरिए अकसर ये निशाने साधे जाते हैं। राउत का यह बयान गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के एक दिन बाद आया है। नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में शिवसेना का कोई बेस नहीं है, ऐसे में उसने अपना समर्थन पाटिदार नेता हार्दिक पटेल को दिया है। हार्दिक पटेल ने इस साल शिवेसना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी।





सेवानिवृत्त नायबतहसीलदार किशनलाल पारीक का देहांत: सुभाष चंद्र बोस संघ के अध्यक्ष रहे:


- करणीदानसिंह राजपूत -

किशनलाल पारीक जी का  70 वर्ष की आयु पूर्ण होते निधन हो गया और 26 अक्टूबर 2017 को उनका अंतिम संस्कार किया गया।

 पारीक राज्यसेवा में पटवारी से नायब तहसीलदार पद तक पहुंचकर सेवानिवृत्त हुए। राज्य कर्मचारी संगठन के सूरतगढ़ में अध्यक्ष भी रहे।अध्यक्ष उनके  अध्यक्ष काल के दौरान काफी लंबी हड़ताल भी चली थी। उन्होंने राज्य सरकार की सेवा से पूर्व एक व्यवसायिक के यहां भी कार्य किया।

समाज सेवा में अग्रणीय रहे। ब्राह्मण धर्मशाला के निर्माण में उनका बड़ा योगदान रहा।  

सूरतगढ़ में नेताजी सुभाष चंद्र बोस संघ के अध्यक्ष भी रहे। नेताजी की जयंती पर सुभाष चौक पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के पास में मनाए जाने वाले समारोहों में शामिल होते रहे और संदेश भी देते रहे थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस संघ उत्साही नौजवानों का संघ था। (मैं भी संघ का अध्यक्ष रहा था। मेरे अध्यक्षीय कार्यकाल में सन 1972 में पाकिस्तान ने युद्ध थोपा था। श्रीकरणपुर सीमा के परिवार सूरतगढ़ आए,तब उनके रहने खाने आदि की सूचनाएं देने में संघ की भूमिका प्रमुख थी। मुझे अध्यक्ष पद किशनलाल पारीक ने सौंपा था। मेरे बाद में भी अन्य अध्यक्ष रहे)

स्व. किशनलाल पारीक के  कार्य काफी हैं। 

उनके दो पुत्र हैं कन्हैयालाल पारीक और मुरलीधर पारीक। दोनों व्यावसायिक क्षेत्र में हैं। मुरलीधर पारीक  शिक्षण संस्थान चलाते हैं और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं में प्रमुख हैसियत रखते हैं।

स्व.पारीक ने दीपावली 2017 की रामरमी पर  20.10.2017 को मित्रों के साथ फोटो खिंचवाई,जो यहां दी गई है।


पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के गिरफ्तारी वारंट

पाकिस्तान की एक अदालत ने भ्रष्टाचार के दो मामलों में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ गुरुवार 26.10.2017 को गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। नवाज शरीफ के वकील ने बताया कि उनके खिलाफ पनामा पेपर और भ्रष्टाचार के एक अन्य  मामले में वारंट जारी किया है। 


वर्तमान में नवाज शरीफ अपनी पत्नी के कैंसर के इलाज के लिए लंदन गए हुए हैं और इसी महीने की शुरुआत में उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद से वो लंदन से नहीं लौटे हैं। 


मीडिया से बातचीत में बचाव पक्ष के एक वकील ज़फर खान ने बताया कि, "अकाउंटेबल कोर्ट ने आज पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के दो मामलों में जमानती वारंट जारी किया और 3 नवंबर तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी है।"

सूरतगढ़ रेलवे कॉलोनी में नाले का हो रहा घटिया निर्माण​


सूरतगढ़ 26.10.2017.पुराने लोको के पास की रेलवे कॉलोनी में गंदे पानी के पुराने नाले को ऊंचा उठाने का कार्य चल रहा है जो संपूर्ण रूप में बेहद घटिया है। पुराने नाले के पुराने पलस्तर को उखाड़े बिना ही,उसके ऊपर ही ईंटों की चिनाई की जा रही है। इससे चिनाई की पकड़ नहीं होती। आधी लम्बाई में यह घटिया निर्माण किया जा चुका है।

ईंटें भी घटिया चार या पांच नंबर की लगाई गयी है, जो टूटी हुई है और अभी भी खुरी हुई। लाखों रुपए के इस कार्य पर न ठेकेदार है और कोई अधिकारी भी उपस्थित नहीं है।

यह जगह रामलीला मंच के पास में बने उत्तर दिशा के रेलवे के मकानों के पीछे है जहां गंदे पानी का कुआं है। उसके साथ यह निर्माण चल रहा है।

इस निर्माण को नागरिक रेल संघर्ष समिति के संयोजक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता कामरेड लक्ष्मण शर्मा ने देखा है और रोकने का कहा है। उन्होंने मौके पर उपस्थित मिस्त्री से कहा कि यह पुराना पलस्तर उखाड़ने के बाद ही दूसरा किया जाए। इस संबंध में ठेकेदार को मौके पर बुलाया गया तो ठेकेदार नहीं मिला। खुलेआम यह घटिया निर्माण हो रहा है जो अधिक समय तक चल नहीं पाएगा। रेलवे को निर्माण शाखा के इंजीनियर वह ठेकेदार लाखों रूपए का चूना लगाने में लगे हुए हैं।

Wednesday, October 25, 2017

सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में लोगों के आतंक में जीने को मजबूर परिवार

सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अनुसूचित जाति खेतिहर किसान की दुख भरी गाथा।सत्ता के नजदीक प्रभावशाली लोगों ने आवारा पशु डालकर उस के खेत को उजाड़ा फसल नष्ट की बार बार की गुहार पर  पुलिस राजियासर ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। अदालत के आदेश से मुकदमा दर्ज किया मगर ढीली कार्यवाही किसान को परेशान करने में लगी है। 

राजस्थान की सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है मगर भारतीय जनता पार्टी के सूरतगढ़ विधायक राजेंद्र सिंह भादू के क्षेत्र की पुलिस दीन हीन पीड़ित के साथ कैसा बर्ताव कर रही है?

 

चक 2 जीबीएम( हरिसिंह पुरा ) का किसान ओम प्रकाश पुत्र मघाराम मेघवाल जिसकी कृषि भूमि इसी चक में है और इस वर्ष उस भूमि पर उसने नरमे की फसल उगाई। यह चक  नहर अनूपगढ शाखा  के किनारे है जहां आरडी 42 की पुलिया है। यह पुलिया और उसकी सड़क बीरमाणा संगीता हरदास वाली  सव अन्य गांवों को जोड़ती है। इस पुलिया से प्रभावशाली किसान आवारा पशुओं को लाकर पास के खेतों में छोड़ देते हैं और खेत नष्ट होते हैं।

पशुओं को रोकने के बाबत 4 सितंबर 2017 को श्योकरण कुम्हार के घर पर पंचायत हुई जिसमें श्योकरण कुम्हार,पूर्व सरपंच ओमप्रकाश गेधर, नेतराम स्वामी, डायरेक्टर बिरजा राम कुम्हार,गोपी राम जाट,उदराम कुम्हार, ओम जालप, मघाराम मेघवाल आदि लोग शामिल हुए। पंचायत में यह फैसला किया गया कि अब कोई भी व्यक्ति पुलिया के पास आवारा पशुओं को लाकर के नहीं छोड़ेगा। 

यह निर्णय सत्ता के नजदीक लोगों को पसंद नहीं आया और उसी रात यानी कि 4 सितंबर 2017 की मध्यरात को लाठियां गंडासियां लिए हुए लोग आवारा पशुओं को घेर कर के लाए और ओम प्रकाश मेघवाल के खेत के दरवाजे को खोलकर पशुओं को उस में घुसेड़ दिया। ओमप्रकाश को गालियां निकाली गई धक्का-मुक्की की गई और ओमप्रकाश लाठियों के डर से वहां से भाग निकला। उसकी नरमे की करीबन 1 लाख रुपए की फसल आवारा पशुओं के द्वारा नष्ट करवा दी। इस घटना को अन्य काश्तकारों राजू राम मेघवाल और सुनील कुमार आदि ने भी देखा।

पीड़ित ओमप्रकाश ने अगले दिन 5 व बाद में 8  सितंबर 2017 को राजियासर थाने में प्रार्थना पत्र दिये।।

 पुलिस ने एक सिपाही नटवरलाल को मौके पर भेजा लेकिन अपराधियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं हुई। पीड़ित ओमप्रकाश थाना अधिकारी से मिलता रहा और जब कार्यवाही नहीं हुई तब उसने 12 सितंबर को रजिस्टर्ड डाक से अपनी पुकार  जिला पुलिस अधीक्षक को भेजी लेकिन उस पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। लगातार परेशानियां भोगते हुए पीड़ित ओमप्रकाश मेघवाल ने 25 सितंबर 2017 को माननीय विशिष्ट न्यायालय अनुसूचित जाति-जनजाति  अत्याचार निवारण श्रीगंगानगर की अदालत में परिवाद दायर किया।  माननीय न्यायालय ने सीआरपीसी की धारा 156 /3 के तहत राजियासर पुलिस थाने को निर्देशित किया।पुलिस ने प्राथमिकी नंबर 218 दि. 6.10.2017 को भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 447, 427,  323, 504,149 व अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज की। 

इसकी जांच उप पुलिस अधीक्षक ओनाड़सिंह को सौंपी गई। 

यह प्राथमिकी 6 अक्टूबर 2017 को दर्ज की गई । पुलिस उप अधीक्षक की ओर से 10 अक्टूबर को मौके का नक्शा बनाया गया मुआयना किया गया। 5-6 गवाहों के बयान लिए गए। नुकसान वाली फसल की पैमाइश की गई लेकिन आश्चर्य है कि अभी तक अभियुक्तों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई। नहर की बुर्जी नंबर 42 की पुलिया की सड़क बीरमाना बीरमाना हरदासवाली संगीता आदि कई गांवों को जोड़ती है वहां पर रात को सुनसान होता है।

 पीड़ित ओमप्रकाश का खेत पड़ता है और वह वहां अपने परिवार के साथ रह रहा है पुलिस की कार्रवाई नहीं होने के कारण प्रभावशाली लोग रात को पुलिया पर एकत्रित होते हैं और यह दहशत ओमप्रकाश को अपने परिवार के साथ सहन करने पड़ रही है।ओम प्रकाश ने आशंका है कि उसके परिवार के साथ रात को आने वाले लोग कुछ भी बुरी घटना कर सकते हैं। उसने सुरक्षा की मांग की लेकिन अभी तक पुलिस ने ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की जिससे वह अपने को सुरक्षित समझ सके। 

सूचना है कि पुलिस आरोपियों के साथ सामने बैठा कर कोई बात कराना चाहती है। ओम प्रकाश भयभीत है और उसे आशंका है कि पुलिस ने जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया वह आमने सामने के नाम की कार्यवाही में उसे दबाने की कार्यवाही में ही लगी हुई है। 

पुलिस मौके की जांच कर चुकी है तब उसे अपनी रिपोर्ट अदालत को पेश कर देनी चाहिए।

इस मामले में आरोपी पंचायत में आए और रात को खेत में पशुओं को घुसाने में भी शामिल रहे।

पीड़ित ओमप्रकाश  ने जिनके विरूद्ध मामला दर्ज कराया है। उनमें भालाराम पुत्र लालचंद 2GBM, गुरमीत सिंह पुत्र भोला सिंह 4 एपी,राजू पुत्र चंदू राम कुम्हार चक 2GBM,  रामचंद्र पुत्र काशीराम कुम्हार  4 एपी, जगपाल पुत्र जीत सिंह 4 एपी,लाल चंद पुत्र जगदीश स्वामी चक 4 एपी, कालूराम कुम्हार पुत्र राम कुमार चक 3 जीबीएम, गणेशाराम जाट  3 एपी, धर्माराम जाट पुत्र जगदीश जाट चक 4 एपी, रामलाल कुम्हार पुत्र लालचंद 2GBM,रामकरण पुत्र लालचंद ब्राह्मण चक 4एपी और इनके अलावा कई लोग अन्य। 

पुलिस जब तक कार्यवाही नहीं करती ओमप्रकाश मेघवाल का परिवार आतंकित हैं। सवाल यह है कि इस परिवार की सुरक्षा की जाएगी या लोगों के आतंक में छोड़ा हुआ रखा जाएगा। सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की है या नहीं?

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गुजरात चुनाव 2017 की घोषणा: आचार संहिता लागू


अहमदाबाद: 25.10.2017. गुजरात  विधानसभा की  चुनावी तारीखों की घोषणा हो गई है। चुनाव दो चरणों में होंगे पहले चरण में 89 सीटों पर 9 दिसंबर को और दूसरे चरण में 93 सीटों पर 14 दिसंबर को मतदान होगा। परिणाम 18 दिसंबर को आएंगे.( इसी दिन हिमाचल प्रदेश चुनाव के भी नतीजे आयेंगे)

 गुजरात में कुल 182 सीटों पर  4 करोड़ 33 लाख मतदाता वहां मतदान करेंगे. 50, 128 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे. मतदान से 7 दिन पहले मतदाता के घर वोटिंग स्लिप पहुंचाई जाएगी. चुनाव में VVPAT का इस्तेमाल होगा. अभी से ही गुजरात में आचार संहिता लागू कर दी जाएगी. 102 बूथों पर महिला पोलिंग स्टाफ होगा. बॉर्डर चेकपोस्ट पर सीसीटीवी कैमरे से निगरानी होगी. सभी बड़ी चुनावी रैलियों की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी. प्रत्येक प्रत्याशी 28 लाख रुपये तक  खर्च कर सकता है. पेड न्यूज पर निगरानी रहेगी। हर उम्मीदवार को एक अलग बैंक अकाउंट खोलना होगा। वर्तमान गुजरात विधानसभा का कार्यकाल 23 जनवरी  2018 को खत्म होगा। 

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खुफिया एजेंसी द्वारा होटल के कमरे की तलाशी पर अशोक गहलोत ने मोदी से किये सवाल



गुजरात के होटल ताज में मिलने पहुंचे पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक होने पर गुजरात कांग्रेस प्रभारी अशोक गहलोत ने कहा है कि खुफिया ब्यूरो (आईबी) ने उनके कमरे की तलाशी भी ली। गहलोत ने इस मामले को निजता पर हमला बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष कई सवाल उठाए हैं।

अशोक गहलोत ने होटल से सीसीटीवी फुटेज ले जाने पर एतराज जताते हुए कहा कि आईबी को ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी। गहलोत ने ट्वीट कर बताया कि आईबी और पुलिस ने उनके नाम से होटल ताज में बुक कमरे की तलाशी ली। उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई को निजता पर हमला बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया- 'प्रधानमंत्रीजी गांधीजी के गुजरात में यह क्या हो रहा है?' इस मामले में गहलोत ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पुत्र जय को भी लपेटा है। उन्होंने एक के बाद एक ट्वीट कर जहां गुजरात की सरकार और पुलिस के रवैये पर सवाल उठाए, वहीं एक पूर्व मुख्यमंत्री के कमरे की तलाशी पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि ये कमरा उनके नाम से बुक था जहां हार्दिक आकर रुका, यहीं पर उनकी हार्दिक से मुलाकात हुई। 

उन्होंने सवाल उठाया- 'हार्दिक व जिग्नेश न तो भगोड़े हैं और न ही आपराधिक छवि के लोग फिर उनकी व मेरी निगरानी क्यों की जा रही है?' गहलोत अगले ट्वीट में लिखते हैं कि होटल ताज में उनकी हार्दिक व जिग्नेश से मुलाकात हुई और आगे भी वह उनसे मिलते रहेंगे। आगामी चुनाव में कांग्रेस चुनाव जीत रही है और गुजरात में किसान, युवा व गरीबों की सरकार बनेगी। नेता हार्दिक पटेल ने समर्थन के एवज में कांग्रेस के समक्ष समाज को आरक्षण, नौकरी, पाटीदार आयोग के गठन सहित कई मांगें रखी हैं। गुजरात के कांग्रेस प्रभारी अशोक गहलोत इन मांगों पर आगामी एक सप्ताह में पार्टी का रख स्पष्ट करेंगे।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की सोमवार को गुजरात यात्रा के दौरान उनसे पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की होटल ताज में मुलाकात को लेकर कई अटकलें चल रही हैं। लेकिन राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की बात खुद हार्दिक ने स्वीकार की है। हार्दिक ने कहा है कि उनका उद्देश्य गुजरात में भाजपा को हराना है। गहलोत आगामी 7-8 दिनों में इस पर अपना रख स्पष्ट करेंगे। 

हार्दिक की प्रमुख मांगों में पाटीदार समाज को आरक्षण, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए अनारक्षित वर्ग के विद्यार्थियों को आरक्षण, उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति, पाटीदार आयोग के गठन और पाटीदार युवकों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेना प्रमुख हैं।


राजस्थान विधानसभा वैल में विपक्षी विधायकों का धरना :रात को वहीं खाना सोना हुआ:


जयपुर 25.10.2017.

कांग्रेस के अलावा चार गैर भाजपाई विधायकों ने किसानों के कर्ज माफी मांग को लेकर विधानसभा वैल में  24 अक्टूबर से धरना दे रहे हैं। विधानसभा में सबने साथ किया भोजन, अब दरी-गद्दे लगाकर सदन में जमा हैं विपक्षी​ विधायक।

नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी के नेतृत्व में डटा है सरकार का विरोधी खेमा।

डूडी के अलावा कांग्रेस के रमेश मीणा, गोविंद डोटासरा, महेंद्रजीतसिंह मालवीय, बृजेंद्र ओला, श्रवण कुमार, भंवरसिंह भाटी, सुखराम विश्नोई, धीरज गुर्जर, भजन लाल, हीरालाल भी हैं मौजूद। इनके अलावा निर्दलीय विधायक डाॅ. राजकुमार शर्मा, हनुमान बेनीवाल, नंदकिशोर महरिया व बसपा के मनोजसिंह न्यांगली भी वहीं जता रहे हैं विरोध। सब एक सुर में बोले, जनहित के लिए विधानसभा में ही डटकर करेंगे खाना-सोना और नहाना-धोना।


मदन लाल छाबड़ा का देहांत (पूर्व पार्षद सुनील छाबड़ा के पिता पालिकाध्यक्ष काजल के ससुर)


श्री मदन लाल छाबड़ा का निधन बीती रात करीब 10:00 बजे व उनका अंतिम संस्कार आज 25 अक्टूबर बुधवार को सुबह 11 बजे  आदर्श कल्याण भूमि में किया जाएगा।

Tuesday, October 24, 2017

तानाशाहीपूर्ण कदम है राज्य सरकार का नया अध्यादेश -श्रीगंगानगर चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने जताया विरोध


श्रीगंगानगर। राज्य सरकार द्वारा जजों, न्यायिक अधिकारियों, अफसरों और लोक सेवकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने से रोकने संबंधी अध्यादेश को श्रीगंगानगर चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने तानाशाहीपूर्ण कदम बताया है। मीडिया के लिए प्रस्तावित हिदायतें भी लोकतंत्रात्मक व्यवस्था के खिलाफ हैं। 

श्रीगंगानगर चैम्बर ऑफ कॉमर्स के मुख्य संरक्षक जयदीप बिहाणी, अध्यक्ष विजय जिन्दल व महामंत्री तेजेंद्रपालङ्क्सह 'टिम्मा' ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि यह लोकतंत्र के दो स्तंभों न्यायपालिका और मीडिया पर हमला है। मीडिया का गला घोंटा जा रहा है। अगर अदालत को सुनवाई और जांच के आदेश से रोका जा रहा है तो समझा जा सकता है कि लोकतंत्र का कोई अर्थ ही नहीं रह जाएगा। लोग कहां फरियाद करेंगे? अध्यादेश के अनुसार अब मजिस्ट्रेट भी बिना सरकार की अनुमति के ऐसे मामलो में जांच का आदेश नहीं दे सकेगा। सरकार का कहना है कि उसे कानून के दुरुपयोग की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है। इसके तहत दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय दंड संहिता में संशोधन किया जा रहा है। अध्यादेश के मुताबिक अब कोई भी व्यक्ति जजों, अफसरों और लोक सेवको के खिलाफ अदालत के जरिए एफआईआर दर्ज नहीं करा सकेगा। मजिस्ट्रेट बिना सरकार की इजाजत के न तो जांच का आदेश दे सकेंगे, न ही प्राथमिकी का दर्ज कराने का। अध्यादेश के अनुसार अगर कोई नागरिक जजों, लोक सेवकों और अफसरों के खिलाफ शिकायत लेकर पहुंचेगा तो मजिस्ट्रेट बिना सरकार की इजाजत के कार्यवाही नहीं कर सकेंगे। इसमें सरकार अधिकतम 180 दिन में अनुमति दे सकेगी। अगर इस मियाद में सरकार इजाजत न दे तो स्वत: ही इजाजत समझी जाएगी। श्रीगंगानगर चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए कहा है कि इसमें अधिनायकवाद की बू आती है।

अखिल भारतीय किसान सभा सूरतगढ़ का संयोजक मंडल गठित:आइजीएनपी में पानी की मांग

अखिल भारतीय किसान सभा सूरतगढ़ की बैठक करनाणी धर्मशाला में हुई जिसमें 7 सदस्य संयोजक मंडल का गठन कर जसराम बुगालिया को तहसील संयोजक चुना गया। 

उसके बाद इंदिरा गांधी नहर परियोजना में 4 में से 2 समूह में मार्च माह तक सिंचाई पानी देने ,IPC में संशोधित विधेयक काला कानून वापिस लेने  सहित अन्य मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।


राजस्थान विधानसभा भवन पर काले कानून के विरोध में प्रदर्शन: गिरफ्तार

राजस्थान विधानसभा में पेश किए गए सीआरपीसी संशोधन विधेयक 2017 के विरोध में मंगलवार   24.10.2017 को पत्रकार भी सड़क पर उतरे और एकजुट होकर विधानसभा पहुंचे. यहां विधेयक के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया गया. यहां से जयपुर पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल सभी पत्रकारों काे गिरफ्तार लिया.


इससे पहले पिंकसिटी प्रेस क्लब से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल पत्रकार बाहों पर काली पट्टी बांधकर विधानसभा पहुंचे. यहां विधानसभा के पास पत्रकारों ने सामूहिक रूप से प्रदर्शन करते हुए दंड विधियां संशोधन विधेयक का विरोध किया.



पत्रकारों के विरोध प्रदर्शन के दौरान मौके पर भारी तादाद में पुलिस जाब्ता मौजूद रहा. प्रदर्शन के बीच वरिष्ठ पत्रकार अशोक भटनागर की बिगड़ी तबियत बिगड़ गई. जिन्हें बाद में पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया. वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी समेत बड़ी संख्या में पत्रकार इस प्रदर्शन में शामिल हुए.


यह विरोध प्रदर्शन पिंकसिटी प्रेस क्लब, राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ, राजस्थान पत्रकार संघ, राजस्थान पत्रकार परिषद, आईएफडब्लूजे, कौंसिल ऑफ जर्नलिस्ट, आरएफडब्लूजे, पत्रकार ट्रस्ट ऑफ इंडिया समेत सभी संघो के बैनर तले किया गया.



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