रविवार, 18 जून 2017

कल तक जलाए थे पाक झंडे- कविता :करणीदानसिंह राजपूत






भारतीय सैनिकों के,
सिर काट ले गए थे,
पाकिस्तानी।
एक के बदले,
दस सिर लाने की,
सौगंध खाई थी।
कोई बाकी नहीं रहा था,
सौगंध खाने में।

चौराहों पर,
जलाए थे पाक झंडे,
वे सिर ले जाते रहे,
हमारे नेता,
सच्चे देशभक्त होने की,
कसमें खाते रहे।

वचन पर मर मिट जाते थे,
पुराना इतिहास कहता है।
देश की शान पर,
कोई दाग न लगे,
आन पर कोई अंगुली ना,
उठा पाए।
ऐसी मरदानगी थी,
कण कण में।

कल तक एक को,
मौनी बाबा कह,
खिल्ली उड़ाते थे।
आज मन की बात,
कहने वाले के साथ,
सब मौनी​ हो गए।

दुश्मन से क्या खेल,
दुश्मन से क्या प्यार,
कल तक पाकिस्तानी,
झंडे जलाए थे,

अब पाकिस्तानी​ टीम समर्थक,
पाकिस्तानी झंडा लहराएंगे।
दिखाएंगे टीवी चैनल,
रोक नहीं पाएंगे।

सीमा पर शहीद,
होने वाले खिलौने थे,
कौन देगा जवाब,
उनके परिजनों को।

समय मांगेगा जवाब,
दोगले नेताओं से।
जो तिरंगा फहराते हैं,
और झूठी कसमें खाते हैं।
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करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार,
सूरतगढ़।
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अपडेट 18-6-2017.

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