Thursday, May 11, 2017

सूरतगढ़ पंचायत समिति प्रधान बिरमा देवी का भाजपा से इस्तीफा देना मामूली बात नहीं

- करणीदान सिंह राजपूत-

 सूरतगढ़ 11 मई 2017 पंचायत समिति सूरतगढ़ की प्रधान बिरमा देवी नायक और उसके साथ नौ डायरेक्टरों का  बीडियो रोमा सहारण पर आरोप है कि वह काम नहीं करती और जातिगत भेदभाव रखती है।
भारतीय जनता पार्टी के 3 साल बेमिसाल पूरे होने पर समारोह आयोजित हुए और उसके तुरंत बाद इस प्रकार की घटना हो तो उसे क्या कहा जाएगा ?
सरकार का सरकारी अधिकारियों पर कोई नियंत्रण नहीं है।बिरमा देवी नायक ने त्यागपत्र अचानक नहीं दिया है।उससे पहले बिरमा देवी नायक ने प्रैस कॉन्फ्रेंस बुलाकर 2 मार्च से पंचायत समिति कार्यालय के आगे धरना देने की घोषणा की थी। उस समय भाजपा के जिलाध्यक्ष हरि सिंह कामरा  ने आश्वासन दिया था कि विकास अधिकारी रोमा सहारण का स्थानांतरण करवा दिया जाएगा ।यह भरोसा टूट गया इसलिए एक साथ इतने पदाधिकारियों का त्यागपत्र दिया गया।
 एक तरफ तो भारतीय जनता पार्टी विस्तार कार्यक्रम चला रही है और दूसरी और भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को सुने नहीं जाने के कारण भाजपा से त्यागपत्र देने पड़ रहे हैं।
 भारतीय जनता पार्टी के जिला पदाधिकारियों को और प्रदेश पदाधिकारियों को गौर करना चाहिए कोई जनप्रतिनिधि जब सरकारी प्रशासनिक अधिकारी पर आरोप लगाता है तो उसकी तुरंत जांच होनी चाहिए थी। जातिगत भेदभाव का आरोप संगीन है और इसकी जांच तो हर हालत में होनी चाहिए थी भाजपा के राज में अगर जातिगत भेदभाव रखते हुए कार्यों का संचालन होता हो जवाहर होता हो तो बड़ा संगीन आरोप है।
 जांच भी नहीं हुई और स्थानांतरण भी नहीं हुआ प्रशासनिक अधिकारी कुछ काल के लिए आता है स्थाई नहीं होता।जांच होनी चाहिए थी और उसके बाद तुरंत कार्यवाही होनी चाहिए थी।ऐसा नहीं किया जाना भाजपा राज की ढील माना जाना चाहिए। सबसे बड़ी बात यह भी है कि भाजपा के स्थानीय नगर देहात के पदाधिकारी और जिला पदाधिकारी जिला अध्यक्ष विधायक राजेंद्र सिंह भादू क्या करते रहे? क्या इनकी किसी की भी कोई जिम्मेदारी नहीं है?
बिरमा देवी नायक और पंचायत समिति सूरतगढ़ के नौ डायरेक्टरों तथा जिला परिषद के एक डायरेक्टर का भाजपा से त्यागपत्र स्थानीय नेताओं की और भाजपा संगठन पदाधिकारियों की जिम्मेदारी है ये सभी लोग दोषी हैं।

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