गुरुवार, 10 मार्च 2016

डिग्री फर्जी है.नजरें नीची रखें:तुम्हारे किसी भी फैसले से गड़बड़:


आरएसएस,आरपीएस,आइएएस कुछ भी बन जाओ.
डिग्री बी.एड,एम.एड हो.फर्जीवाड़े से ली गई सदा अपराध ही रहेगा जब भी पकड़ा जाए।
- करणीदानसिंह राजपूत -
डिग्री फर्जी है। नजरें नीची रखें। नजरें ही नहीं गरदन भी नीचे ताकि नजरें ऊपर उठ नहीं सके। नजरें आमने सामने किसी ऐसे से टकरा गई जो तुम्हारी गड़बड़ी को जानता होगा तो फिर अच्छे पद चाहे आरएसएस का हो चाहे आरपीएस का हो चाहे आइएएस का हो तुम वहां कुर्सी पर बैठ कर काम नहीं कर सकते। पद तो चाहे कितना ही ऊंचा हो चाहे कितना ही बड़ा हो उसकी पावर तुम्हारे में नहीं रहेगी। अपराध बोध तो सदा ही रहेगा। न जाने कब कोई शिकायत करदे? न जाने कब यह किसी सोशल मीडिया में आ जाए? कोई अखबार वाला न जाने कब भेद छाप डाले? गड़बड़ फर्जीवाड़ा भी ऐसा कि उसे किसी प्रकार से छुपाया नहीं जा सके और गायब भी नहीं किया जा सके। ऊंचे पर पावर फुल पद पर जाने के बाद अपराध बोध सताता ही रहेगा कि यह फर्जीवाड़ा क्यों किया? नौकरी कर सरकार के लाखों रूपए पचा लिए चाहे वे वेतन के रूप में मिले लेकिन जिस पद पर लगे वह डिग्री तो फर्जीवाड़े से हथियाई हुई थी। तुम कितने ही होशियार हो मगर अपराध तो कर ही लिया।
डिग्री फर्जीवाड़े से प्राप्त कर सरकारी नौकरी, एक पद से दूसरा पद  और ऊंचा अच्छा पद प्राप्त कर लिया हो चाहे आरएएस बन गए चाहे आइएएस बन गए।
तुम्हारे सामने भी लोगों के मामले आऐंगे। उनके निर्णय पर कोई भी नाराज होकर कभी भी तुम्हारा भेद खोल देगा। सभी के पक्ष में तो निर्णय दिए भी नहीं जा सकते?
तुम्हारा मामला भी कभी न कभी खुल जाएगा।
जितेन्द्र तोमर दिल्ली के कानून मंत्री आम आदमी पार्टी के राज के मंत्री तो बहुत बड़े थे। वे सामना नहीं कर पाए और कई दिनों तक जेल में रहने के बाद बड़ी मुश्किल से जमानत मिली। उनका प्रकरण 18 सालों तक छिपा रहा और जग जाहिर हुआ तो सामने केवल जेल ही थी। कानून मंत्री पद तो कम नहीं होता। कहां से कहां पहुंच गए?उनके पास में डिग्री फर्जीवाड़े से कबाड़ी हुई ही थी। जब वकालत के रजिस्ट्रेशन के लिए डिग्री पेश हुई तब किसी वकील ने शंका प्रगट की लेकिन उस समय गौर नहीं किया गया और वे वकालत करते करते आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक चुने जाने के बाद कानूनमंत्री बन गए।
कानूनमंत्री बनाए जाने के बाद वही पुरानी शिकायत चल पड़ी और एक के बाद एक जाँचें और गिरफ्तारी।
तुमने फर्जीवाड़ा कर यानि फर्जी दस्तावेज तैयार करवा कर एक डिग्री ली और उसकी नौकरी से सरकार को लाखों रूपए का चूना लगा दिया। वह डिग्री चाहे पांच साल पहले ली चाहे दस ग्यारह साल पहले। तुम चाहे नए पद पर पहुंच गए हों लेकिन तुम भी जितेन्द्र तोमर की तरह कब  गिरफ्त में आ जाओगे? किसी को भी मालूम नहीं? इसे स्थानीय बोलचाल की भाषा बोली में समझा देना चाहता हूं कि ना जाने कब झल जाओगे?
इसलिए नजरें नीची रखना। यह मजबूरी है।
ये तुम्हारे संगी साथी मीडिया वाले नहीं बचा पाऐंगे। इनकी भी आवाज कितनी है? ये भी तो दो हजार छाप कर दसियों हजार और उससे अधिक रिकार्ड में दिखाकर बताने वाले। तुम्हें न बचा पाऐंगे न कोई इमदाद कर पाऐंगे। इनकी बेचारों की कितनी पावर है। ये तो तुम्हारी पकड़ के फंसने के समाचार छापने में भी देरी नहीं करेंगे। इनको भी यह डर तो सताता ही रहेगा कि रिकार्ड तो ये भी फर्जी तैयार करते हैं।
बस इसलिए यह सीख है। नजरें नीची ताकि बवाल आने का वक्त टलता रहे। खत्म तो नहीं हो सकता। जितेन्द्र तोमर तो फर्जीवाड़े में बनना ही पड़ता है। खतरा तो ऊंचे पद पर पहुंचने के बाद ही शुरू होता है।




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