Friday, April 17, 2015

हर की पौड़ी हिन्दुओं का तीर्थ है गैर हिन्दुओं के घूमने का नहीं:


हिन्दुओं के पूजा स्थल पर हिन्दु तरीके रीति रिवाज से पूजा आराधना होती है।
मुस्लिमों के आस्था स्थलों पर उनके तरीके रीति रिवाज से अल्लाह की इबादत की जाती है।
ईसाईयों के चर्च में उनके रीति रिवाज से गौड भगवान से प्रार्थना की जाती है।
मुस्लिम इबादत स्थानों पर अन्य धर्मों हिन्दु ईसाई आदि के तरीके से अल्लाह को याद नहीं किया जाता।
ईसाईयों के चर्च में मुस्लिम व हिन्दु तरीके से पूजा नहीं होती।
ठीक इसी तरह हिन्दु पूजा स्थलों तीर्थ स्थलों पर मुस्लिम व ईसाई तरीकों से भगवान की पूजा प्रार्थना नहीं की जा सकती।
गैर हिन्दु लोग दूसरे धर्मों के मानने वाले लोग वहां हिन्दु तरीके से पूजा प्रार्थना के लिए तो जाते नहीं है।
हिन्दुस्तानी मीडिया खासकर चैनल वाले पत्रकार बंधु अन्य धर्मों के अनुयायियों को वहां पर भेजने को उत्सुक कयों है?
हिन्दु साधु संत जब भी कोई बात कहते हैं या आह्वान करते हैं तब मीडिया के मरोड़ उठने लगते हैं। मीडिया हर बयान को अपने आप विवादित कहते हुए समाचार देना शुरू कर देता है और उस पर बहस तक करवाने लग जाता है। चाहे उस बयान पर कोई बवाल मचा ही न हो। हिन्दुओं के पूजा आराधना स्थान घूमने फिरने और मौज मस्ती के स्थान तो है नहीं है जो वहां पर इस ईच्छा से जाएं?

हर की पौड़ी बाबत भाजपा सांसद आदित्य नाथ के बयान को मीडिया ने अपनी मन मर्जी से विवादित बयान देना बतला कर उस पर खबरें शुरू करदी। आदित्य नाथ का बयान था कि हर की पौड़ी पर गैर हिन्दुओं को रोका जाना चाहिए। इसी बयान पर मीडिया ने तूफान मचा दिया।
मीडिया वाले बताएं कि इसमें विवादित वाले शब्द और भावना कौन सी है?
हर की पौड़ी पर हिन्दुस्तान के कोने कोने से लोग अपने बुजुर्गों की अस्थियां पूजा पाठ से गंगा के जल में प्रवाहित करने आते हैं। वहां पर अन्य धर्मों के लोग तो अस्थियां लेकर नहीं पहुंचते और न पूजा पाठ करने जाते हैं।
तब गैर हिन्दु वहां आखिर किस लिए जाना चाहते हैं?
इनके अलावा फिर उत्तर यही हो सकता है कि वहां पर गैर हिन्दु घूमने फिरने जाते हैं।
और हर की पौड़ी इसके लिए नहीं बनी है?
वह स्थान हिन्दुओं का पवित्र स्थान है तीर्थ है तो उसे उसी अनुरूप ही रहने दिया जाना चाहिए। मीडिया वालों को खासकर चैनल वालों को अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए तूल नहीं देना चाहिए।
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