Friday, January 27, 2017

हाथ जोड़े वे नजर आ रहे हैं




कविता चुनाव काल:

हाथ जोड़े फेस बुक पर
नित नए नए पोज में
नए नए परिधान में
वे नजर आ रहे हैं।
गौर करके देखें
वे खास वार्ड को अपना नमस्कार
दिखला रहे हैं।
वार्ड नं पर ध्यान दें
वहां से पालिका चुनाव का
मानस बना रहे हैं।
फेस बुक पर मुस्कुराता मुखड़ा,
गली में मिले तो कर लेते हैं किनारा
चुनाव का खर्च तो
सरकारी खाते से करने का
बंदोबस्त तो बहुत पहले से
कर चुके हैं।
नगरपालिका का भूखंड
करोड़ों का इनके कब्जे में है।
गौर करेंगे तो अनेक पाएंगे।
आपकी हमारी नजरों में
ये अतिक्रमण हैं
मगर उनकी नजरों में
यह बिना लागत
बिना किसी छीजत का
व्यवसाय है।
घाटा तो कभी हुआ नहीं
खरीदा लाख दो लाख में
बेचा आठ दस लाख में।
समाजसेवी भी पक्के
स्कूल चला रहे हैं तो
कहीं समाजसेवी संस्था
चला रहे हैं।
चरित्र एकदम साफ सुथरा
बेदाग उज्जवल
बगुले के पंख सरीखा।
पार्षद बन कर करेंगे
सेवा।
खुद जीमेंगे और आपको भी
जिमाऐंगे होशियार हुए तो।
हाथ जोड़े वे नजर आ रहे हैं।
गौर करें
पुरूष भी हैं
स्त्री भी हैं
तीसरा लिंग भी है।
वोट आपका है
उसका कोई लिंग नहीं
किसी को भी दिया जा सकता है।
चाहे हाथ जोड़े चरित्रवान को
चाहे उस दूर खड़े नजर आ रहे को
जो धूर्त चालाकियों में नजर नहीं आता
हो सकता है,
उसके पास आपको हमको जाना पड़े।
घर से खींच कर लाना भी पड़े।
लेकिन क्या आप और हम
ऐसा कर पाऐंगे।
इतनी मेहनत कौन करे?
जो हाथ जोड़े मुस्कुरा रहे हैं।
हम सब उन पर ही गुलाल उछालेंगे
उनको ही मालाएं पहनाऐंगे।
यही तो वर्षों से करते रहे हैं।
पहले चरित्रवान को चुनेंगे
और बाद में वे अपना चरित्र दिखलाऐंगे
तब हम पीड़ाओं के हरने की
अर्जी लगाऐंगे।
-
करणीदानसिंह राजपूत
स्वतंत्र पत्रकार,
राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत,
सूरतगढ़।   94143 81356

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17-10-2014.
Up date 27-1-2017.




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