रविवार, 5 जनवरी 2020

वह नहीं आई मैं इंतजार करता रहा- कविता-करणीदानसिंह राजपूत.



मैं निहारता रहा

धरती से आकाश

शाम हो गई,

वह नहीं निकली

कल का भी कोई

वचन वादा नहीं है।


इंतजार और इंतजार

मै करूं चाहे तुम करो

कल भी नहीं आई 

तब भी कुछ नहीं होगा।


वह जब आएगी तब 

हम सभी खुशामद करेंगे

किसी की हिम्मत ही नहीं

शिकायत करने की।


बादलवाही शीतलहर में

खूबसूरती ने फोन मिलाया

और पूछा धूप बोल रही हो

तुम आई नहीं आज

परेशान हो गए 

इंतजार करते करते।


स्पीकर आन में 

सुनाई पड़ा

मेरा तो कल का भी,

भरोसा नहीं है।


हां,मेरे से पहले 

वर्षा आ सकने की

पकायत है,

वह अपने साथ 

ओले भी ला सकती है।


खूबसूरती प्यार से बोली

वर्षा की बात छोड़

तूं तो मेरी सहेली है 

आ कल गले मिलेंगे।


धूप ने उत्तर दिया

तेरी बात तो ठीक है

मगर वर्षा भी मेरी सहेली है

उससे भी तो नाता है।


खूबसूरती बोली

मानी तेरी बात

पर वह ओले क्यों 

लाएगी अपने साथ।


धूप का उत्तर था

वह उसका भाई है

नाराज न हो जाए इसलिए

कभी कभी उसे भी

रखना पड़ता है साथ।

कुछ भी हो

मै कल भी उसके निकलने का

इंतजार करूंगा

और मैं,

कुछ कर भी नहीं सकता।

***

करणीदानसिंह राजपूत,

सूरतगढ़.

94143 81356.

********






कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यह ब्लॉग खोजें