Wednesday, October 25, 2017

खुफिया एजेंसी द्वारा होटल के कमरे की तलाशी पर अशोक गहलोत ने मोदी से किये सवाल



गुजरात के होटल ताज में मिलने पहुंचे पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक होने पर गुजरात कांग्रेस प्रभारी अशोक गहलोत ने कहा है कि खुफिया ब्यूरो (आईबी) ने उनके कमरे की तलाशी भी ली। गहलोत ने इस मामले को निजता पर हमला बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष कई सवाल उठाए हैं।

अशोक गहलोत ने होटल से सीसीटीवी फुटेज ले जाने पर एतराज जताते हुए कहा कि आईबी को ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी। गहलोत ने ट्वीट कर बताया कि आईबी और पुलिस ने उनके नाम से होटल ताज में बुक कमरे की तलाशी ली। उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई को निजता पर हमला बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया- 'प्रधानमंत्रीजी गांधीजी के गुजरात में यह क्या हो रहा है?' इस मामले में गहलोत ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पुत्र जय को भी लपेटा है। उन्होंने एक के बाद एक ट्वीट कर जहां गुजरात की सरकार और पुलिस के रवैये पर सवाल उठाए, वहीं एक पूर्व मुख्यमंत्री के कमरे की तलाशी पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि ये कमरा उनके नाम से बुक था जहां हार्दिक आकर रुका, यहीं पर उनकी हार्दिक से मुलाकात हुई। 

उन्होंने सवाल उठाया- 'हार्दिक व जिग्नेश न तो भगोड़े हैं और न ही आपराधिक छवि के लोग फिर उनकी व मेरी निगरानी क्यों की जा रही है?' गहलोत अगले ट्वीट में लिखते हैं कि होटल ताज में उनकी हार्दिक व जिग्नेश से मुलाकात हुई और आगे भी वह उनसे मिलते रहेंगे। आगामी चुनाव में कांग्रेस चुनाव जीत रही है और गुजरात में किसान, युवा व गरीबों की सरकार बनेगी। नेता हार्दिक पटेल ने समर्थन के एवज में कांग्रेस के समक्ष समाज को आरक्षण, नौकरी, पाटीदार आयोग के गठन सहित कई मांगें रखी हैं। गुजरात के कांग्रेस प्रभारी अशोक गहलोत इन मांगों पर आगामी एक सप्ताह में पार्टी का रख स्पष्ट करेंगे।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की सोमवार को गुजरात यात्रा के दौरान उनसे पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की होटल ताज में मुलाकात को लेकर कई अटकलें चल रही हैं। लेकिन राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की बात खुद हार्दिक ने स्वीकार की है। हार्दिक ने कहा है कि उनका उद्देश्य गुजरात में भाजपा को हराना है। गहलोत आगामी 7-8 दिनों में इस पर अपना रख स्पष्ट करेंगे। 

हार्दिक की प्रमुख मांगों में पाटीदार समाज को आरक्षण, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए अनारक्षित वर्ग के विद्यार्थियों को आरक्षण, उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति, पाटीदार आयोग के गठन और पाटीदार युवकों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेना प्रमुख हैं।


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