Friday, June 30, 2017

नागौर और चूरु जिलों में इंटरनेट सेवाओं पर रोक

आनंदपाल के एनकाउंटर को सात दिन पूरे होने को है, लेकिन उसको लेकर चल रहा बवाल थम नहीं रहा है। उसका अंतिम संस्कार पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। सोशल मीडिया पर भी इस एनकाउंटर और आनंदपाल को लेकर फर्जी सूचनाएं दी जारी है। 

इन अफवाहों को रोकने के इरादे से नागौर और चूरू जिले में शुक्रवार से इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई। इस संबंध में नागौर कलेक्टर कुमारपाल गौतम और चूरू कलेक्टर ललित कुमार गुप्ता ने शुक्रवार दोपहर को आदेश जारी किए। जानकारी के अनुसार चूरू में इंटरनेट सेवा बंद का आदेश आज दोपहर एक बजे से और नागौर में शाम पांच बजे से प्रभावी हो गया है। ये आदेश अगले 48 घंटे तक लागू रहेंगेे। 


इससे पहले इन जिलों के पुलिस अधीक्षकों ने जिला प्रशासन को बताया गया था कि कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा सोशल मीडिया पर अनेक प्रकार की अफवाहें फैलाई जा रही है। ये कानून व्यवस्था को प्रभावित कर साम्प्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे है। इस पर ​चुरू और नागौर के जिला कलेक्टरों ने अपने जिले की सीमाओं में इंटरनेट सेवा बंद करने की निषेधाज्ञा जारी कर दी।


आनंदपाल के शव का पोस्टमार्टम दुबारा हुआ

30-6-2017.

एडीजे कोर्ट के आदेश पर गैंगस्टर आनंदपाल के शव का पोस्टमार्टम दोबारा करवाया गया। उधर, अंतिम संस्कार को लेकर गति​रोध जारी है। 

एडीजे कोर्ट के आदेश पर डॉक्टरों के बोर्ड ने आनंदपाल के शव का पोस्टमार्टम चूरू में किया। उधर, उसके अंतिम संस्कार को लेकर गतिरोध अभी तक बरकरार है। शव मोर्चरी में रखवा दिया है। 

आनंदपाल का एनकाउंटर पिछले शनिवार को हुआ था। तब से उसके अंतिम संस्कार को लेकर परिजनों और प्रशासन के बीच गतिरोध बना हुआ है। इस बीच शुक्रवार को आनंदपाल की मां निर्मल कंवर ने रतनगढ़ एडीजे कोर्ट में आनंदपाल का दुबारा पोस्टमार्टम कराने के लिए याचिका दायर की थी। 


इसके बाद शव को रतनगढ़ से भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच चूरू मुख्यालय लाया गया। जहां मेडिकल बोर्ड ने दुबारा पोस्टमार्टम किया। यह पोस्टमार्टम सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन की पालना करते हुए किया गया। पोस्टमार्टम शाम छह बजे तक चला। इसके बाद उसे मोर्चरी में रखवा दिया है। मोर्चरी पर आनंदपाल के वकील एपी सिंह, राजपूत करणी सेना के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। उनकी पुलिस से तकरार भी


अशोक जैन राजस्थान के नए मुख्य सचिव बनाए गए



जयपुर 30जून।

 मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी अशोक जैन पर भरोसा करते हुए उन्हें राज्य का नया मुख्य सचिव बनाया है। इस संबंध में कार्मिक विभाग ने आज आदेश जारी कर दिए। ओमप्रकाश मीणा मुख्य सचिव पद से शुक्रवार को सेवानिवृत हो गए। जैन ने उन्हीं से कार्यभार संभाला।


सामाजिक न्याय और अधिकारिता एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा वर्ष 1981 बैच के आईएएस जैन अपनी कार्यप्रणाली की मजबूती से सरकार की पहली पसंद बने हैं। ओमप्रकाश मीणा 1979 बैच के हैं और जैन 1981 बैच के है। जैन को सीएस बनाने के लिए वर्ष 1980 बैच के अफसर अशोक शेखर को नजरअंदाज करना पड़ा, लेकिन अगले साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव के कारण मुख्य सचिव पद पर नियुक्ति भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। वरिष्ठता सूची के अनुसार जैन तीसरे नंबर पर हैं और अगले साल जनवरी में सेवानिवृत होंगे।

जीवन परिचय

राज्य के नए मुख्य सचिव अशोक जैन मूलत: जोधपुर के रहने वाले हैं। वर्ष 1981 में भारतीय प्रशासनिक सेवा के बेडे में शामिल हुए और उन्हें राजस्थान कैडर मिला। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद मरू प्रदेश में उनकी पहली पोस्टिंग एक अक्टूबर 1983 को उपखण्ड अधिकारी बीकानेर उत्तर के पद पर हुई। जैन जैसलमेर जिले के कलेक्टर भी रहे हैं। वे जयपुर विकास प्राधिकारण के आयुक्त भी रहे। कुछ समय के लिए जैन राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी रहे। वर्ष 2013 में राजस्थान विधानसभा के चुनाव उन्हीं की देखरेख में हुए थे


राजस्थान में सूरतगढ़ के इलाके में बसपा नेता की हत्या: एक घायल



सूरतगढ़ 30 जून। करड़ू गांव में बहुजन  समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता और सेक्टर प्रभारी लेख राम नायक की निर्मम हत्या कर दी गई। 

आज प्रातः 9:00 बजे चेतनराम नायक  और नत्था सिंह के बीच जमीन का विवाद चल रहा था।

 विवाद सुलझाने के लिए पंचायत रखी गई थी। चेतनराम नायक ने  लेखराम नायक  और भगवानाराम मेघवाल को पंचायत में नत्था सिंह  को समझाने व राजीनामा के लिए बुलाया ।जैसे ही लेख राम नायक और भगवानाराम मेघवाल नत्था सिंह के पास पहुंचे तो नत्था सिंह व उसके  लड़के छिंन्दा  सिंह, मांगे सिंह,  मोहन सिंह और काले सिंह आदि ने कस्सी  और कुल्हाड़ी से लेख राम नायक और भगवानाराम मेघवाल के सिर पर वार कर दिया जिससे लेख राम नायक की मौके पर ही मृत्यु हो गई। भगवानाराम को घायल अवस्था में ट्रोमा सेंटर सूरतगढ लाया गया। उसे इलाज के लिए गंगानगर जिला राजकीय चिकित्सालय में रेफर कर दिया गया । जैसे ही यह खबर फैली तो बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता डूंगरराम गेदर , बसपा नगर अध्यक्ष पवन सोनी,  अमित कल्याणा, श्रवण सिंगाठिया  ,संदीप दोलिया,  अमीचंद आदि बड़ी संख्या में बसपा कार्यकर्ता ट्रोमा सेंटर पहुंचे। शाम करीब 4:00 बजे FIR करवाने के बाद पोस्टमार्टम की कार्यवाही करवाकर शव को दाहसंस्कार के लिये करडू़ गांव लाया गया।





राजस्थान में चुरू जिले की सीमा में 48 घंटे वास्ते इंटरनेट पर रोक

 जिला कलेक्टर चुरू ने 30 जून की दोपहर 1:00 बजे से 48 घंटे तक के लिए जिले की सीमा में इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध लगा दिया है।

 इस प्रतिबंध में मोबाइल से फोन करने और लैंडलाइन से फोन करने की ही छूट दी गई है।

 जिला कलेक्टर ने आदेश में लिखा है कि असामाजिक तत्व अफवाहें फैला रहे हैं।


एडीजे कोर्ट का निर्णय आनंदपाल के शव का पोस्टमार्टम दुबारा करवाया जाए

एडीजे कोर्ट रतनगढ ने शुक्रवार 30 जून को फैसला सुनाते हुए आनंदपाल  के शव का दोबारा पोस्टमार्टम करवाने के आदेश दिए। इस संबंध में निर्मल कंवर की ओर से उसके बेटे आनंदपाल के शव का दोबारा पोस्टमार्टम करवाने की याचिका कोर्ट में दायर की थी।

एडीजे कोर्ट ने एसपी चुरु को आदेश दिया कि सुप्रीम कोर्ट के​ निर्देशानुसार पोस्टमार्टम करवाया जाए। 

यदि चुरु हॉस्पिटल में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार पोस्टमार्टम नहीं करवाया जा सकता हो तो बीकानेर मेडिकल कॉलेज या फिर जयपुर मेडिकल कॉलेज में आनंदपाल के शव का दोबारा पोस्टमार्टम करवाया जाए।

आनंदपाल की मां की दोबारा पोस्टमार्टम की याचिका दायर करने के बाद इस प्रकरण में जिला न्यायाधीश के आदेश के बाद रतनगढ़ के एडीजे ने गुरुवार को विशेष सुनवाई की थी। सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से चूरू के लोक अभियोजक  गोपाल शर्मा और आनंदपाल की मां निर्मल कंवर की ओर से एडवोकेट कानसिंह राठौड़ व एडवोकेट गोवेर्धन सिंह ने अपना पक्ष रखा। इस दौरान जिला पुलिस अधीक्षक राहुल बाहरठ अतिरिक्त जिला क्लेक्टर राजपाल सिंह सहित पुलिस के आला अधिकारी उपस्थित थे।

गुरुवार शाम को सुनवाई के बाद एडीजे कोर्ट ने शुक्रवार सुबह फिर से सुनवाई करने के आदेश दिए थे। इसके बाद शुक्रवार को फिर से सुनवाई शुरु हुई। कोर्ट ने सुप्रीमकोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार आनंदपाल के शव का दोबारा पोस्टमार्टम करवाने काम आदेश दिया।


Thursday, June 29, 2017

जलसंसाधन विभाग के दफ्तरों में 60 कर्मचारी अनुपस्थित मिले


श्रीगंगानगर, 29 जून। सरकार से अच्छा खासा वेतन और भत्ता लेने वाले कर्मचारी समय पर नआते हैं न जाते हैं और पूरे पूरे दिन भी गायब रहते हैं। जल संसाधन विभाग के कार्यालयों का श्रीगंगानगर जिले में अचानक निरीक्षण करवाया गया तब स्थिति सामने आई। 60 कर्मचारी ड्यूटी से अनुपस्थित मिले।


जिला कलक्टर श्री ज्ञानाराम के निर्देश पर गुरूवार को श्रीगंगानगर जिले के जलसंसाधन विभाग, सीएडी के जिले में संचालित कार्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया था। 

एडीएम शहर श्री वीरेन्द्र कुमार वर्मा ने बताया कि एसडीएम गंगागनर श्री यशपाल आहूजा द्वारा सीएडी कार्यालय का निरीक्षण किया गया, जिसमें कुल 7 कार्मिकों में से 6 अनुपस्थित पाये गये। इसी प्रकार ओएफडी आईटी में कुल 8 कार्मिक है, जिनमें 3 अनुपस्थित पाये गये। एडीएम शहर द्वारा जलसंसाधन दक्षिण का निरीक्षण किया जिसमें कुल 22 कार्मिकों में से 9 अनुपस्थित पाये गये। न्यास सचिव श्री कैलाशचंद शर्मा द्वारा अधीक्षण अभियंता आरडब्ल्यूएसआरपी कार्यालय का निरीक्षण किया। कुल 13 कार्मिकों में से 12 कार्मिक अनुपस्थित तथा तहसीलदार द्वारा ओएफडीसीएडी कार्यालय का निरीक्षण किया गया, जिनमें कुल पांच कार्मिकां में से 2 कार्मिक अनुपस्थित पाये गये। 


उन्होंने बताया कि एसडीएम सूरतगढ़ द्वारा एसई सिंचाई क्षेत्र विभाग टेस्टिंग सर्तकता एवं गुण नियंत्रण कार्यालय का निरीक्षण किया गया, जिसमें 4 कर्मचारी उपस्थित, 2 दौरे पर व 2 अवकाश पर थे। अधिशाषी अभियंता गंगनहर सूरतगढ़ कार्यालय में कुल 10 कार्मिकों में 7 कार्मिक अनुपस्थित पाये गये। अधिशाषी अभियंता फिल्ड टेस्टिंग कार्यालय में तीन कार्मिकों में 2 उपस्थित व 1 दौरे पर थे। अधिशाषी अभियंता सूरतगढ़ ब्रांच खण्ड में 18 कार्मिकों में से 11 अनुपस्थित पाये गये। अधिशाषी अभियंता फिल्ड टेस्टिंग खण्ड द्वितीय में 1 कर्मचारी अनुपस्थित पाया गया। सहायक अभियंता जलसंसाधन सूरतगढ़ में कुल तीन कार्मिकों में 1 अनुपस्थित पाया गया। सहायक अभियंता गंगनहर ओएफडी में एक कार्मिक वही अनुपस्थित पाया गया। सहायक अभियंता गंगनहर सिंचाई क्षेत्र 6 में तीन कार्मिकों में से एक अनुपस्थित पाया गया। सहायक अभियंता सिंचाई क्षेत्रा 6 में एक कार्मिक वही अनुपस्थित पाया गया। 


सहायक अभियंता जलसंसाधन पदमपुर में 3 कार्मिकां में 2 उपस्थित थे। सहायक अभियंता जलसंसाधन रेगुलेशन में तीन कार्मिकां में से 1 अनुपस्थित पाया गया। इसी प्रकार सहायक अभियंता जलसंसाधन सादुलशहर में 12 कार्मिकों में से 3 अनुपस्थित पाये गये। सहायक अभियंता जल संसाधन रायसिंहनगर में कुल 5 कार्मिकों में 2 अनुपस्थित पाये गये। कार्यालय सहायक अभियंता सीएडी, सहायक अभियंता सिंचाई क्षेत्र 22 पीएस निरीक्षण के दौरान कार्यालय बंद पाये गये। सहायक अभियंता जलसंसाधन घडसाना के दोनों कार्यालयों में शत-प्रतिशत उपस्थिति पाई गयी। सहायक अभियंता जलसंसाधन बिजनौर अनूपगढ में चारों ही उपस्थित पाये गये। सहायक अभियंता जलसंसाधन 196 आरडी में कुल 3 में से 1 कार्मिक अनुपस्थित पाया गया। सहायक अभियंता जलसंसाधन करणपुर में 7 कार्मिकों में से 5 अनुपस्थित पाये गये। अधिशाषी अभियंता श्रीबिजयनगर में 12 कार्मिक उपस्थित मिलें। अधिशाषी अभियंता खण्ड द्वितीय में 14 कार्मिकों में से 1 अनुपस्थित तथा 2 अवकाश पर पाये गये। 


गंगानगर जिले में मेधावी 50 छात्राओं को स्कूटी भेंट

श्रीगंगानगर, 29 जून। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राजस्थान सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई देवनारायण छात्रा स्कूटी वितरण एवं प्रोत्साहन राशि योजना के तहत गुरूवार को जिला मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में 50 मेधावी छात्राओं को स्कूटी प्रदान की गई। इस अवसर पर नगर विकास न्यास के अध्यक्ष श्री संजय महिपाल ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा जनकल्याण एवं शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये देवनारायण छात्रा स्कूटी वितरण एवं प्रोत्साहन राशि योजना के अलावा विभिन्न प्रकार की छात्रावृतियां भी दी जा रही है। न्यास अध्यक्ष ने महाविद्यालय की छात्राओं को ठंडा एवं शुद्ध पेयजल के लिये 2000 लीटर के वाटर कूलर देने की घोषणा की। 


देवनारायण छात्रा स्कूटी वितरण एवं प्रोत्साहन राशि योजना में प्रत्येक जिले को 50 मेधावी छात्राओं को स्कूटियां प्रदान की जाती है। जिन छात्राओं ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किये है, उन्हें इस योजना का लाभ दिया जाता है। श्रीगंगानगर जिले में चौधरी बल्लूराम गोदारा राजकीय कन्या महाविद्यालय की 40 छात्राओं को तथा भीमराव अम्बेडकर राजकीय महाविद्यालय श्रीगंगानगर, राजकीय महाविद्यालय अनूपगढ, राजकीय महाविद्यालय सूरतगढ़, राजकीय महाविद्यालय सादुलशहर की 10 छात्राओं को स्कूटी प्रदान की गई। 


आयोजित कार्यक्रम में ग्रीन गंगानगर द्वारा 50 छात्राओं को पर्यावरण की रक्षा के लिये 1-1 पौधा भी दिया गया, जिनमें नीम, ऐलिस्टोनिया, गुलमोहर के पौधे शामिल है। चौधरी बल्लूराम गोदारा कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में कॉलेज प्रार्चाय श्री श्रवणसिंह, ग्रीन इंडिया के शंकर सलूजा, श्री आदित्य बवेजा, सुश्री अमरीक कौर सहित छात्राएं, शिक्षक एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।




सालासर जसरासर व दूजोद में प्रदर्शन जाम:आनंदपाल प्रकरण

आनंदपाल के एनकाउंटर की आग पांचवे दिन पूरे शेखावाटी में फैल गई। लोगों ने सड़कों पर टायर जलाकर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिए। पुलिस से कई जगह झड़प भी हो गई। चूरू व सालासर सहित कई स्थानों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। पूरे जिले में तनाव का महौल बन गया है। जिला मुख्यालय से करीब 18 किमी दूर सरदारशहर मार्ग पर जसरासर गांव में राजपूत समाज के लोगों ने मार्ग पर पत्थर डालकर जाम लगा दिया। इसके बाद मौजूद दर्जनों लोगों ने सरकार व पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। जाम के कारण मार्ग पर यातायात ठप हो गया। 

चूरू से पुलिस रवाना

सूचना मिलते ही चूरू से दो बज्र वाहनों में सवार होकर पुलिस व थानाधिकारी रवाना हो गए। मौके पर तनाव बना हुआ है। लोग अब मरने और मारने पर उतारू होने लगे हैं। पूरे शेखावाटी में विरोध का आग जलने लगी है। पुलिस कानून व्यवस्था संभालने में नाकामयाब होती जा रही है। स्थिति को संभालने के लिए चूरू में दो आईजी व एसओजी के अधिकारी सुबह से ही डेरा डाले हुए हैं। जिले में दूसरे जिले से पुलिस मंगवाई गई है।

सालासर में भी करणी सेना ने लगाया जाम

सालासर में भी करणी सेना के युवाओं ने हाइवे पर जाम लगा दिया। हाइवे पर टायर जला कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। जाम के कारण हाइवे पर दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। सूचना मिलते ही मौके​ पर सालासर पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने युवाओं को शांत करने का प्रयास किया लेकिन युवा आनंदपाल के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए मांग पर अड़े हैं। 

सीकर ।

दूजोद में आनंदपाल एनकाउंटर से गुस्साए उनके समर्थकों ने गुरुवार को तहसीलदार की गाड़ी में आग लगा दी। इसके बाद लोगों ने वहां जाम लगा दिया। जाम की सूचना पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया। आनंदपाल एनकाउंटर मामले में सीबीआई की जांच की मांग कर रहे राजपूत समाज के लोगों ने दूजोद में जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद लोगों में गुस्सा इस कदर बढ़ गया कि उन्होंने तोडफ़ोड़ करनी शुरू कर दी। इसके बाद समाज के लोगों ने आनंदपाल के समर्थन में सड़क पर जाम लगा दिया। जाम की सूचना पर धोद तहसीलदार अशोक रणवां मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को काफी समझाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं माने। उल्टा उन्होंने तहसीलदार की गाड़ी में तोडफ़ोड़ करनी शुरू कर दी। जब बात तोडफ़ोड़ से भी नहीं बनी तो उन्होंने तहसीलदार की गाड़ी आग के हवाले कर दी। 


आनंदपाल एनकाउंटर मामले में बढ़ रही है पुलिस की अड़चनें

चूरू  29-6-2017.

आनंदपाल सिंह के एनकांउटर के बाद बढते विरोध विरोध सीबीआई जांच की मांग से पुलिस अधिकारियों की नींद हराम हो रही है। 

परिजन अपनी पांच सूत्री मांगों पर अड़े हैं। उधर पुलिस की ओर से शव लेने के लिए परिजनों में से कोई नहीं पहुंचा।


अधिवक्ता कानसिंह के नेतृत्व में चार अधिवक्ताओं ने रतनगढ़ डीएसपी नारायण दान चारण को नोटिस का जवाब दे दिया है।माहौल को देखते हुए रतनगढ़ सहित लाडनूं व सांवराद में पुलिस का जाप्ता और बढ़ा दिया गया। चूरू से लेकर सांवराद तक भारी तनाव है। राजपूत समाज के लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रही। किसी भी वक्त कहीं भी बड़ी घटना हो सकती है।

पुलिस कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जुटी हुई है।  

पांचवे दिन भी शव लेने पर सहमति नहीं बनी।

आनंदपालसिंह का एनकाउंटर 24 जून की रात रतनगढ़ के गांव मालासर स्थित एक मकान में हुआ था। 25 को रतनगढ़ अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ था। पांचवे दिन दोपहर तक परिजन शव लेने को राजी नहीं हुए। 

बीकानेर आईजी ने लिया जिले में कानून व्यवस्था का जायजा, आईजी (क्राइम) महेन्द्र चौधरी चूरू पुहंचे 

गुरुवार को शव के संस्कार को लेकर बीकानेर संभाग के आला पुलिस अधिकारी रतनगढ़ पहुंच गए। आईजी विपिन पांडेय, एसपी राहुल बारहठ ने कानून व्यवस्था का जायजा लिया। एक दर्जन से अधिक थानों के थानाधिकारी और 100 सौ अधिक पुलिस कस्बे में तैनात है। आईजी जिले के पुलिस अधिकारियों के साथ चूरू पुहंचे हैं। आईजी (क्राइम) महेन्द्र चौधरी, एसओजी एएसपी करण शर्मा व संजीव भटनागर, कुचामन डीएसपी भी चूरू पुहंच हैं। 

वकील कानसिंह की ओर से दिए गए नोटिस के जवाब को लेकर आईजी, एसपी व एएसपी व डीएसपी ने मंथन शुरू कर दिया है। कानूनी अड़चनों को देखते हुए पुलिस भी शायद अदालत की शरण ले सकती है। 

आनंदपाल के शव को रतनगढ़ मोर्चरी से चूरू लाने के कयास बढ़ गए हैं। जगह-जगह पुलिस सहित अन्य लोगों में चर्चा चल रही है कि आनंदपाल का शव सुरक्षा के वास्ते गुरुवार को चूरू के भरतीया होस्पीटल में रखवाया था सकता है।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट व सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया

 _ करणीदानसिंह राजपूत  _


आनंदपाल के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने के मामले में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया सो रहे थे और जागती हुई मुख्यमंत्री  वसुंधरा राजे तथा पुलिस प्रशासन के एनकाउंटर विशेषज्ञों के द्वारा इन काउंटर मामलों में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय का पालन नहीं किया गया।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पुलिस अधिकारियों के कसीदे काढे जा रहे हैं। कितने ही प्रकार के खिताब दिए जा रहे हैं। उन स्पेशलिस्ट पुलिस अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए निर्णय का तो मालूम होना ही चाहिए था। राजस्थान सरकार, राजस्थान सरकार का गृह मंत्रालय और पुलिस प्रशासन इस मामले में सभी कटघरे में हैं कि आनंदपाल के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार उसका पोस्टमार्टम क्यों नहीं करवाया गया?

यह मामूली बात नहीं कही जा सकती और न टाली जा सकती है।

 इतनी बड़ी गंभीर बात को सरकार ने टाला है तो निश्चित रुप से इसमें बहुत बड़े घपले का, सच छुपाने का राज संभावित है।

 सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार पुलिस एनकाउंटर के मामले में पोस्टमार्टम जिला चिकित्सालय में करवाया जाए। दो चिकित्साधिकारी पोस्टमार्टम करेंगे जिनमें एक संभव होतो जिला चिकित्सालय का प्रभारी/या मुख्य हो। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी हो और सुरक्षित रखी जाए। 

अगर ऐसा नहीं हो, पुलिस ऐसा नहीं करवाए तब एनकाउंटर से संबंधित पीड़ित परिवार सेशन न्यायालय में अपना आवेदन कर सकता है और सेशन न्यायालय आगे की कार्यवाही करेगा।

राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री एनकाउंटर के समय जाग रही थी और उसने सोते हुए गृहमंत्री को जगवा कर आनंदपाल के इनकाउंटर में मारे जाने की बधाई दी।


आनंदपाल  अपराध के आरोपों के मुकदमों में फंसा हुआ था लेकिन एनकाउंटर के बाद उसका पोस्टमार्टम तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ही किया जाना चाहिए था।


आनंदपाल  अपराधों के आरोपों में घिरा हुआ था लेकिन राजस्थान सरकार तो अपराधी नहीं,सच्ची है। मुख्यमंत्री और गृह मंत्री सच्चे हैं तब उनको कानून का पालन करने में हिचक क्यों रही? 

गृह मंत्री ना जाने कितनी बार वक्तव्य दे चुके हैं कि कानून अपना काम करेगा, कानून ने अपना काम किया है,कानून अपना काम आगे करता रहेगा। 

 गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया  से एक बहुत बड़ा सवाल है कि आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर प्रकरण में कानून ने अपना काम क्यों नहीं किया? 

आनंदपालसिंह के एनकाउंटर के बाद पोस्टमार्टम कराने में पुलिस अधिकारियों की मनमर्जी कैसे चलाई गई?


 आनंदपाल का पोस्टमार्टम जिला चिकित्सालय चूरू में कराने के बजाए रतनगढ़ के सामुदायिक चिकित्सालय में क्यों करवाया गया?

सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों निर्णयों के अनुरूप कार्यवाही नहीं किए जाने पर जो पुलिस प्रशासन के अधिकारी दोषी हैं उनके विरुद्ध राजस्थान सरकार क्या कार्यवाही करेगी?

आनंदपाल सिंह तो एक कमरे में पुलिस के सैंकड़ों जवानों के घेरे में था तब अमावस की रात के अंधेरे में ही इन काउंटर जरूरी क्यों समझा गया जिसमें पुलिसकर्मियों को भी खतरे में डाला गया। रात के 5-7 घंटे ही बिताने थे,आगे की कार्यवाही सुबह की जा सकती थी जो अधिक सुरक्षित होती और पुलिसकर्मियों पर खतरा नहीं होता। आखिर क्या कारण रहे हैं?यह सब राज है?

इंग्लिश कोई कार्यवाही करती है तो अपने उचा दायक उच्चाधिकारी को सबसे पहले अवगत कराते हैं।दिशा-निर्देश लेते हैं।

इस मामले में गृह मंत्री को किसी प्रकार की सूचना पूर्व में नहीं दी गई और एनकाउंटर के बाद भी गृह मंत्री को सबसे पहले अवगत कराया जाना चाहिए था जो नहीं कराया गया। आखिर क्या कारण रहा है कि गृह मंत्री को अवगत नहीं करा कर सबसे पहले सूचना मुख्यमंत्री को दी गई?

 जिस अधिकारी ने मुख्यमंत्री को यह सूचना दी ,इन काउंटर से लेकर मुख्यमंत्री को सूचना देने वाले अधिकारी तक कोई कड़ी भी बनी होगी?लेकिन इसमें कुछ राज की आशंका तो है।

आनंद सिंह जब फरारी में था तब आरोप लग रहे थे कि उसे बड़े-बड़े सत्ताधारी राजनीतिज्ञों का संरक्षण मिला हुआ है। क्या आनंद सिंह को इसलिए मारना जरूरी था कि उन सत्ताधारी  राजनीतिज्ञों के चेहरे कभी भी सामने न आ सकें? लेकिन इस प्रकरण में आनंदपाल सिंह अकेला ही मारा गया है। उसके दो भाई जीवित हैं जो बहुत कुछ राज खोल सकते हैं। सच्चाई सामने आ सकती है। जिन लोगों के नाम अभी तक सामने नहीं आए वे नाम सामने आ सकते हैं इसलिए CBI जांच की आवश्यकता है।  यह मांग पूरे राजस्थान से उठ रही है इस मांग को पूरा किया जाना चाहिए। राजस्थान सरकार व  राजस्थान का पुलिस प्रशासन दोषी नहीं है तो उसे सीबीआई जांच का डर क्यों है?


(यहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश फोटो दिया जा रहा है)




Wednesday, June 28, 2017

यह घोटाला नगरपालिका ईओ की सहमति से ही संभव: एसीबी में घिर सकता है मामला

_ करणीदानसिंह राजपूत _

सूरतगढ़ नगरपालिका के शहरी अभियान शुरू हो जाने के कुछ दिन बाद  शुरू आती तिथि से प्रचार के विज्ञापन अखबारों में छपे हैं,जिन पर जारी करने की तिथि और क्रमांक नहीं है। सरकारी विज्ञापन प्रकाशित किए जाते हैं तब उनके साथ ही उनका क्रमांक और जारी करने की दिनांक दोनों ही छापना अनिवार्य है और उसके बिना छापे विज्ञापन का भुगतान नहीं किया जा सकता।


 नगरपालिका सूरतगढ़ का शहरी वार्ड वाइज अभियान शुरू हुआ तो उसका प्रचार समाचार पत्रों में शुरू होने के पहले होना चाहिए था,लेकिन मिलीभगत से विज्ञापन बाद में छपे अंकों में प्रकाशित हुए। उनका भुगतान किसी भी स्थिति में नहीं हो सकता। विज्ञापन बिना क्रमांक और बिना तारीख के छपने का स्पष्ट भ्रष्टाचार प्रमाणित होता है कि अभियान शुरू होने के बाद विज्ञापन मिलीभगत से जारी हुआ और उसमें जारी करने की तिथि और क्रमांक आम जनता से छुपाए ताकि चहेते अखबार के मालिक प्रकाशक को भुगतान आसानी से किया जा सके।


 नगरपालिका सूरतगढ़ में ऐसे अनेक विज्ञापनों का भुगतान हुआ है,जिसमें पालिका को  हजारों रुपए का नुकसान हुआ है।

अगर विज्ञापन अभियान से पहले जारी हुआ और अभियान शुरू हो जाने के बाद विज्ञापन छपा गया तब भी उसका भुगतान करना अवैध और भ्रष्टाचार की संज्ञा में आता है।

इस प्रकार के घोटाले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में सीधे पकड़ में आते हैं अगर कोई भी व्यक्ति इसकी जानकारी ब्यूरो को दे देता है। एक खास बात और है कि इस प्रकार के विज्ञापन उन अखबारों में छपे हैं जिनका आम जनता में कोई अस्तित्व नहीं है तथा वे केवल सौ पचास फाइल कॉपियां ही छापते हैं।

अगर कोई अखबार मालिक प्रकाशक अपने अखबार में बिना आदेश के अपनी मनमर्जी से  दूसरे समाचार पत्रों में छपा विज्ञापन अपने अखबार में प्रकाशित करता है तो वह भी अपराध की श्रेणी में आता है। इस प्रकार के विज्ञापन छपने के बाद नगरपालिका प्रशासन को ऐसे अखबारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और सरकार को लिखना चाहिए।

ऐसे प्रकाशित विज्ञापन सामने आने और सूचना लगने के बाद पालिका प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जाती है तो यह प्रशासनिक बहुत बड़ी गलती नहीं बल्कि घोटाले बाज अखबार मालिक व प्रकाशक के  प्रति एक प्रकार की सहमति ही होती है। ऐसी सहमति से बच कर अखबार के विरूद्ध सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। किसी प्रकार की हिचकीचाहट नहीं होनी चाहिए।

ऐसे तो अखबार का मालिक अपनी मनमर्जी से चाहे जो छाप देगा और कह देगा कि उसने भुगतान नहीं लिया है। लेकिन सच्चाई है कि सरकारी सूचना विज्ञापन आदि कोई भी अखबार बिना आदेश के नहीं छाप सकता।

आनंदपाल एनकाउंटर की जांच सीबीआई से कराने की मांग सूरतगढ़ में भी उठी


सूरतगढ़ 28 जून 2017 आनंदपाल के एनकाउंटर मैं मौत पर अनेक सवाल उठाते हुए राजपूत क्षत्रिय​ संस्था सूरतगढ़ में सीबीआई से जांच कराने की मांग की गई है। यह ज्ञापन स्थानीय प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा गया है जिसमें मांग के साथ अनेक सवाल किए गए हैं। 

इसकी एक प्रति केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को भी भेजी गई है।

 आनंदपाल का एनकाउंटर रात्रि को किए जाने पर संदेह व्यक्त किया गया है। जहां पर एनकाउंटर हुआ उस घर की राजपूत महिलाओं को रिहा करने की मांग भी की गई है।कहा गया है कि राजपूतानी पर्दे में रहती हैं और घर में आए हुए व्यक्ति के बारे में उनकी जानकारी नहीं होती। आनंदपाल सिंह के पास में हथियारों के बारे में भी सवाल किया गया है।






आनंदपाल का अंतिम संस्कार पुलिस कर देगी यदि परिजनों ने नहीं लिया शव

पुलिस प्रशासन ने आनंदपाल की मां निर्मल कंवर, पत्नी राज कंवर, मामा अमरसिंह व साला बलबीर सिंह को शव लेने के लिए 27 जून को नोटिस जारी किया है। नोटिस प्राप्त होने के 24 घंटे में अगर परिजन शव नहीं लेते हैं तो  पुलिस की ओर से शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा। रतनगढ़ डीएसपी नारायणदान ने नोटिस में लिखा है कि मृतक आनंदपाल सिंह का शव राजकीय जालान अस्पताल की मोर्चरी के कोल्ड स्टोरेज में रखा हुआ है।
शव का 25 जून को बलबीर सिंह (साला) की उपस्थिति में पंचनामा तैयार कर मेडिकल बोर्ड की टीम से पोस्टमार्टम करवाकर शव अंतिम संस्कार के लिए उसी दिन आपको सुपुर्द किया गया था। मगर आप शव को लावारिश हालत में छोड़कर चले गए। मंगलवार तक भी शव को प्राप्त नहीं किया है। शव मोर्चरी के कोल्ड स्टोरेज में रखा हुआ है।
शव को सही स्थिति में रखने के बावजूद भी शव का क्षरण होने लगा है। जिसकी वजह से वातावरण दूषित होने लगा है। इस संबंध में पीएमओ डा. राजेंद्र गौड़ ने रतनगढ़ थानाधिकारी को पत्र भी लिखा है कि ऐसी स्थिति में हिंदू धार्मिक रीति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार नहीं किया जाना शव का अपमान है।
नोटिस में स्पष्ट आदेश दिए हैं कि नोटिस प्राप्त होने के 24 घंटे में शव प्राप्त करें अन्यथा राजस्थान पुलिस नियम 1965 के नियम 6.36 मृत्योपरांत परीक्षण (पोस्टमार्टम) और पुलिस की ओर से की जाने वाली कार्रवाई के उप नियम 6  के अंतर्गत दाह संस्कार पुलिस की ओर से विधि सम्मत तरीके से किया जाएगा।
रतनगढ़ में लगाई धारा 144
एपी के परिजनों को नोटिस जारी करने के बाद एसडीएम ने कस्बे में धारा 144 लागू कर दी है।
इनका कहना है
नोटिस तामिल करवाने के लिए व्यक्ति को भेज दिया गया है। यदि नोटिस प्राप्ति के 24 घंटे बाद भी परिजन शव नहीं लेते है तो पुलिस स्वयं के स्तर पर अंतिम संस्कार करेगी।

सूरतगढ़ इलाके में बुधवार दिन में बन रहा है मौसम सुहाना



फोटो- करणीदानसिंह राजपूत



पत्रकारों को भूखंड आवंटन: मुख्य नियम जानिए:


विशेष- करणीदानसिंह राजपूत -

नगर निकाय संस्थाओं की सीमा में इन नियमों से आवंटित भूखंड सही आवंटन में आते हैं।
इन नियमों को छुपा कर,अनदेखी कर आवंटित किए गए और लिए गए, गलत झूठी,फर्जी दस्तावेजों से प्राप्त भूखंड भ्रष्टाचार की श्रेणी में आते हैं। 






निकाय के अध्यक्ष,सदस्य,आवंटन कमेटी के सदस्य पत्रकारों को भूखंड आवंटन में नियमों की अनदेखी कर कार्य करते हैं ताकि पत्रकार खुश रहें,लेकिन इसमें लेने और देने वाले दोनों ही कानून की नजर में दोषी और दंड के पात्र होते हैं।

आजकल कई स्थानों पर पत्रकारों को आवंटित भूखंडों पर आरोप लगे हैं तथा कई स्थानों पर मुकद्दमें भी हो चुके हैं।
यहां पर एक महत्वपूर्ण सवाल पैदा होता है कि भूखंड प्राप्ति के लिए कोई पत्रकार बन कर आवंटन का आवेदन करता है या करती है,या नियमों को पूर्ण नहीं करता अथवा नहीं करती है तब उनको नियम विरूद्ध आवंटन कर अधिकारी क्यों कानून के दायरे में आ कर मुकद्दमों में फंसते हैं और अपनी लाखों रूपए की नौकरी को दांव पर लगाते हैं? कुछ लोगों का घर बसाने के चक्कर में अपना बसा बसाया घर उजाडऩा और अपने परिवार की जिंदगी को खराब करना मूर्खता ही कही जाएगी।

निकाय बोर्डों के अध्यक्ष व सदस्य स्थानीय होते हैं वे लिहाज से अथवा किसी लाभ के लिए गलत कार्य करने को तत्पर हो सकते हैं,लेकिन अधिकारियों को जो साल दो साल के लिए एक स्थान पर आते हैं,उनको फर्जीवाड़ा करने की जरूरत क्यों रहती है?

up date on 29-12-2015.
up date on 3-5-2016. 
Up date on 22-1-2017.
Up date on 28-6-2017.


निहालचंद पर यौन शोषण आरोप में पीड़िता के रिवीजन याचिका पर सुनवाई शुरू




एक विवाहिता ने सन 2011 में अपने पति देवर निहालचंद मेघवाल सहित कुल 17 लोगों पर यौन शोषण का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट यानी एफ आर लगा दी थी। इस मामले में जयपुर में  DJ कोर्ट के साथ 4 अदालतों में सुनवाई हो चुकी है। 

अब पीड़ित महिला की पेश पुनरीक्षण याचिका पर 27 जून 2017 को सुनवाई शुरू हुई  है। 

पीड़ित महिला ने 17 लोगों के विरुद्ध जयपुर के वैशाली नगर थाने में 17 नवंबर 2011 में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने उसे झूठा मानते हुए थाने में एफ आर लगा दी थी। अब रिवीजन याचिका की सुनवाई के समय अधिवक्ता ए. के.जैन ने अदालत से जल्दी सुनवाई की प्रार्थना की है।

 इस प्रकरण के अन्य समाचारों के लिए क्लिक करें यह शीर्षक


देह शोषण जयपुर मुकद्दमें में 17 आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग प्रदर्शन:विशेष खबर-करणीदानसिंह राजपूत:

Tuesday, June 27, 2017

मोदी का मौसम खुशगवार आने वाला है









जोश में लग रहे हैं नारे
मोदी की लहर है।
मोदी का तूफान है।

 
दबी पिटी मरी मरी सी,
आवाजें भी आ रही हैं।
मोदी की कोई लहर नहीं।

मोदी का कोई तूफान नहीं।
 
वे दबे पिटे मरे मरे से लोग भी
कितना सच्च कह रहे हैं,
जो मोदी की लहर और
तूफान को नकार रहे हैं।


मोदी के सांस से
उठने लगे हैं जो कम्पन्न
उनसे ही घबरा रहे हैं।
वो सच्चे हैं अपने मन में
ना मोदी की लहर है
ना मोदी का कोई तूफान है।

 
उमड़ी घटाएं 

चमकती गर्जती बिजली
सुगंधित पवन,
धरा का कण कण हर्षाता,

यह जो आने के संकेत हैं,
मोदी के खुशगवार मौसम के।

 
मोदी मौसम में सब पनपेंगे।
छोटा हो चाहे बड़ा हो।
चाहे शहर वाला हो,
चाहे छोटे गांव वाला हो।
गरीब किसान मजदूर हो या 
उद्योग चलाने वाला।

 
लहर और तूफान तो

आकर निकल जाते हैं। 
थोड़े समय हर्षाते हैं।
मोदी मौसम रहेगा बरसों,
आगे यही विधान है।


मोदी का मौसम
खुशगवार आने वाला है

- करणीदानसिंह राजपूत -

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 20-4-2014.
अपडेट 27-6-2017.
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अजमेर में भी उठी आनंदपाल एनकाउंटर सीबीआई जांच की मांग

27-6-2017.

आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग अब प्रदेश के दूसरे इलाकों में भी जोर पकड़ने लगी है। 


राजपूत समाज के लोगों ने मंगलवार को अजमेर के कुंदन नगर स्थित छात्रावास में राजस्थान क्षत्रिय महासभा, राजपूत विकास परिषद, जयमल ट्रस्ट पुष्कर, करणी सेना सहित अन्य राजपूत समाज के संगठनों के पदाधिकारियों की बैठक हुई। 


उन्होंने आनंदपाल के एनकाउंट की निंदा की और इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग का राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन जिला कलक्टर को सौंपा। इस ज्ञापन में पांच मांगें और की गई हैं जिनमें बीकानेर जेल में आनंदपाल पर किए हमले की सीबीआई जांच, आनंदपाल की अंत्येष्टि में उसके भाइयों को शामिल होने की इजाजत देने आदि की मांग की गई है। 

आनंदपाल एनकाउंटर का मामला सीबीआई को देने की मांग :राजनाथ सिंह से मिले

आनंदपाल एनकाउंटर की जांच सीबीआई से कराने समेत छह मांगों को लेकर क्षत्रिय महासभा के प्रतिनिधि और आनंदपाल के वकील ए.पी. सिंह ने मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की।

राजनाथ सिंह और प्रतिनिधिमंडल के बीच यह मुलाकात करीब 15 मिनिट तक हुई। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान पुलिस की कार्रवाई को गैर जिम्मेदारान बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि आनंदपाल को सरेंडर करने का मौका दिए बिना उसे मार गिराया।

उन्होंने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने, दाह संस्कार में उसके भाइयों को शामिल होने देने, परिजनों पर दबाव बनाने के लिए पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई को रोकने, परिजनों पर लगाए कथित झूठे मुकदमें वापस लेने आदि मांगों का पत्र सौंपा।

आनंदपाल एनकाउंटर के मामले की जांच को लेकर आनंदपाल के परिजनों और क्षत्रिय समाज की ओर से सीएम वसुंधरा राजे को भी पत्र भेजा गया है। 


इसमें भी उन्होंने आरोप लगाया है कि आनंदपाल के दाहसंस्कार में आने वाले समाज के लोगों पर पुलिस द्वेषपूर्ण कार्रवाई कर रही है। उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है। इस पत्र में उन्होंने 

करीब ढाई साल पहले बीकानेर जेल में बंद आनंदपाल पर की गई फायरिंग की भी सीबीआई जांच कराने की मांग की है।


उन्होंने एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की


राजस्थान में जीएसटी के विरोध में क्या क्या होगा जानिए

27-6-2017.

राजस्थान में जीएसटी के विरोध में आज से तीन दिन तक के लिए कपड़े की दुकानें बंद रहेंगी। साथ ही, 30 जून से तीन जुलाई तक प्रदेश की मंडियां बंद रहेंगी। कयास लगाए जा रहे हैं, सात दिन के बंद के दौरान करीब 20 हजार करोड़ से ज्यादा का व्यवसाय प्रभावित होगा।


वहीं 30 जून को जो देशव्यापी बंद का आह्वान किया गया है, उसे राजस्थान के भी विभिन्न व्यापारिक संगठनों का समर्थन हासिल है। गौरतलब है कि राजस्थान में साड़ी व अन्य कपड़ा व्यवसाय से सम्बंधित करीब एक लाख से ​अधिक दुकानें हैं। जो अब चार दिन बंद रहेंगी। जबकि राजस्थान में ​मंडियों की संख्या 240 से अधिक है।


एक दिन में मंडियों से करीब 1000 करोड़ से अधिक का कारोबार होता है। जीएसटी लागू होने के बाद उन्हें एक माह में तीन बार रिटर्न भरना होगा। ऐसा नहीं करने पर सजा का प्रावधान है।


जबकि व्यापारियों की मांग है कि इस रिटर्न को तिमाही करना चाहिए व सजा के स्थान पर जुर्माने का प्रावधान होना चाहिए।


पालिका बाबू सुरेश गुप्ता के साथ कौन अध्यक्ष अधिशासी अधिकारी भी नपेंगे

- करणी दान सिंह राजपूत -

नगर पालिका कर्मचारी सुरेश चंद्र गुप्ता के नौकरी लगाने और पदोन्नति देने में कौन अधिशाषी अधिकारी व अध्यक्ष  शामिल रहे हैं?भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो संपूर्ण जांच व सही जांच करता है तो पालिका के अधिशाषी अधिकारियों और पालिका अध्यक्षों​ पर भी तलवार लटकना निश्चित होगा।

 गुप्ता पर आरोप है कि उसने पालिका प्रशासन की मिलीभगत करके फर्जी रूप से नौकरी प्राप्त की व उसमें फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया। सुरेश चंद्र गुप्ता की सेवानिवृत्ति में कुछ महीने बाकी हैं। उस पर भ्रष्टाचार के आरोप में जांच शुरू हुई है, इसीलिए कहा जाता है कि फाइल में दबा हुआ भ्रष्टाचार कभी भी राक्षसी रूप में अचानक प्रकट होता है तब सब कुछ तहस-नहस कर सकता है। सालों का खाया पिया और कमाया खतरे में डाल देता है।

 सुरेश चंद्र गुप्ता पर भ्रष्टाचार के आरोप कई सालों से लगते रहे हैं लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं हो पाई। 

सुरेश चंद्र गुप्ता पर आरोप है कि वह सच में अपंग नहीं है। उसकी केवल दो अंगुलियां ही आपस में जुड़ी हुई हैं।इसी का अपंगता प्रमाण पत्र पेश करके और नगर पालिका प्रशासन से मिलीभगत करके नौकरी प्राप्त की।आरोप यह है कि अपंगता का प्रमाण पत्र फर्जी  दिया गया था जो यूपी से प्राप्त किया दर्शाया गया। नगरपालिका सूरतगढ़ में कोई पद नहीं था फिर भी उसे नौकरी दी गई,स्थाई किया गया। गुप्ता  के विरोध में पत्रकार  कृष्ण सोनी आजाद ने एसीबी में शिकायत की है लेकिन कोई  व्यक्ति अकेला, अपने आप खुद नौकरी प्राप्त नहीं कर सकता,प्रशासन की मिलीभगत से ही फर्जी रूप से नौकरी प्राप्त की जा सकती है। नगरपालिका में अधिशासी अधिकारी और नगर पालिका अध्यक्ष के हस्ताक्षरों से ही नौकरी और पदोन्नति मिल सकती है और वेतन दिया जा सकता है। गुप्ता के मामले में भी यही हुआ है। नगरपालिका में यह होता रहा है कि जो बाबू चेयरमैन का खास  होता है उसे लूट-खसोट में आगे और कमाई वाली सीट पर लगाया जाता है।  प्रशासनिक अधिकारी उसे लूट की छूट देते हैं ताकि उन्हें भी गड्डियां मिलती रहें। 

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की बीकानेर टीम के एडिशनल SP रजनीश पूनिया के नेतृत्व में 23 जून 2017 को नगर पालिका से रिकॉर्ड जब्त किया  गया है। आरोप लगाने वाले पत्रकार कृष्ण सोनी 'आजाद' के बयान लिए गए हैं, वहीं सुरेश चंद्र गुप्ता के बयान लिए गए। इस प्राथमिक जांच की प्रक्रिया के जल्दी ही पूरी होने की संभावना है और उसके बाद पक्का मुकदमा।एसीबी की यही प्रक्रिया है। इस प्रकरण में केवल रिकॉर्ड है जो जब्त किया जा चुका उसकी जांच महीने 2 महीने में पूरी की जा सकती है। अब देखना यह है कि भ्रष्टाचार निरोधक विभाग इस जांच को कितनी जल्दी निपटा कर मुकदमा दर्ज करेगा। जांच में अधिशासी अधिकारियों व पालिका अध्यक्षों के भी बंधने की संभावना है,क्योंकि सुरेश चंद्र गुप्ता को नौकरी व पदोन्नति दी गई उसमें अधिशासी अधिकारी के साथ पालिका अध्यक्ष के हस्ताक्षर भी हुए हैं। इन दोनों के हस्ताक्षरों के बिना कोई कार्यवाही पूरी नहीं होती।



Monday, June 26, 2017

यात्री को पीटने वाला टीटीई सस्पेंड

जयपुर रेलवे जंक्शन पर रेलवे टीटीई द्वारा यात्री को बेटिकट बताकर उसके साथ मारपीट करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। मारपीट की घटना के वक्त उसके पत्नी-बच्चे भी साथ थे। 


23 जून को आश्रम एक्सप्रेस जयपुर जंक्शन पहुंची। यहां एक यात्री को बेकिटक बताकर हैड टीटीई के कमरे में लाया गया और तीन टीटीई ने मिलकर जमकर मारा। यात्री ने विरोध किया, लेकिन टीटीई रुके। इस दौरान जमकर लात-घूंसे बरसाए गए। इस दौरान यात्री की पत्नी और बच्चा भी थे। दोनों बिलखते रहे और उसे छोड़ने के लिए रहम की भीख मांगते रहे। बताया जा रहा है कि यात्री के पास जनरल का टिकट था और वह आरक्षित डिब्बे में पकड़ा गया। इसके बाद कुछ कहासुनी हुई। इसके बाद वे उसे टीटीई उसे कमरे में ले आए। सोमवार सुबह टीटीई के यात्री को पीटने का वीडियो सोशल साइट्स पर वायरल होने लगा। इससे रेलवे प्रशासन भी हरकत में आया। इसके बाद आरोपी टीटीई नेतराम मीणा को निलंबित कर दिया गया।


सूरतगढ़ में 26 जून की शाम का नयनाभिराम दृश्य

 फोटो -करणीदानसिंह राजपूत





"राजस्थानी मांय रामलीला" पोथी रो विमोचन

राजस्थानी साहित्यकार मनोज स्वामी री नुई रचना "राजस्थानी मांय रामलीला" रो विमोचन रविवार 25 जून  नै अठै होयो। 

 विमोचन समारोह का खास पावणा राजस्थान धरोहर प्रन्यास रा अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत विमोचन करता थका कहयो, राजस्थानी केवल भाषा ही नहीं है बल्कि करोड़ां राजस्थानियां री आस्था है। इण अवसर मांय साहित्यकार डॉक्टर राजेंद्र सिंह बारहट जोधपुर,चेतन स्वामी डूंगरगढ,प्रमोद शर्मा बीकानेर मौजूद रहया। इण अवसर मांय राजनीतिक सामाजिक संगठनां रा पदाधिकारी अर कार्यकर्ता भी आपकी उपस्थिति दर्ज करवाई। विधायक राजेंद्र सिंह भादू पूर्व विधायक हरचंद सिंह सिद्धू इण मौके मान्य सामल होया। राजस्थानी साहित्यकार मनोज स्वामी राजस्थानी मांय रामलीला पोथी रो आपरै शब्दां मांय बखान कर्यौ।






जम्मू कश्मीर में ईद की नमाज के बाद युवकों ने हिंसा भड़काई :पाकिस्तान के नारे और झंडे दिखाए


जम्मू एवं कश्मीर 

26-6-2017.

 सोमवार को ईद के अवसर पर घाटी के कई स्थानों पर सुरक्षा बलों और पत्थरबाजों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं।दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में जंगलात मंडी इलाके में नमाज के तुरंत बाद भीड़ ने सुरक्षा बलों पर पथराव शुरू कर दिया, जिसमें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी समेत पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। उसके बाद अनंतनाग जिले के अचबल इलाके में भी झड़पें हुईं।भीड़ ने सुरक्षा बलों पर पथराव किया। दक्षिण कश्मीर के सोपोर, कुलगाम और पुलवामा शहरों में भी ऐसी ही झड़पें  हो गईं। श्रीनगर के ‘ओल्ड सिटी’ इलाके में भी युवाओं ने सुरक्षा बलों पर पथराव किया, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के(सीआरपीएफ) के दो जवान घायल हो गए। उत्तरी कश्मीर के सोपोर और पट्टन शहरों से भी ऐसी ही झड़पों की सूचना है। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।प्रत्यक्षदर्शियों और आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “सुरक्षा बल इन स्थानों पर पत्थरबाजों से निपटने के लिए अत्यधिक संयम बरत रहे हैं।” घाटी में अन्य स्थानों पर ईद की नमाज शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुई। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने उच्च सुरक्षा वाले सोनावार इलाके की एक मस्जिद में ईद की नमाज अदा की। घाटी में हजरतबल मस्जिद और अन्य मस्जिदों तथा ईदगाहों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु ईद की नमाज अदा करते देखे गए। सुरक्षा कारणों से कई मंत्रियों, शीर्ष असैन्य और पुलिस अधिकारियों ने जिला पुलिस लाइन्स मस्जिद में सुबह 6.30 बजे नमाज अदा की।

पिछले हफ्ते गुरुवार-शुक्रवार की रात को जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी मोहम्मद अयूब पंडित की नौहट्टा स्थित जामिया मस्जिद में भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। डीएसपी अयूब पंडित मस्जिद की सुरक्षा व्यसव्था में तैनात थे। डीएसपी की हत्या के बाद भीड़ ने उनके शव को गटर में फेंक दिया था। घटना के बाद राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि राज्य का पुलिस बल अधिकतम संयम का परिचय देता रहा है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अपने जवानों और अधिकारियों को सार्वजनिक स्थलों पर नमाज पढ़ने से बचने के लिए कहा था। पुलिस ने निर्देश जारी किए हैं कि पुलिसवाले विशेष सुरक्षा इंतजाम वाली मस्जिदों इत्यादि में ही ईद की नमाज पढ़ें। पिछले कुछ महीनों में कश्मीर में पुलिसवालों पर हमले की घटनाएं बढ़ी हैं। इन हमलों में कुछ पुलिसवालों की जान भी चली गई।

डीएसपी अयूब पंडित की हत्या के बाद पुलिस ने श्रीनगर समेत कई जिलों में ईद के मद्देजनर सुरक्षा बंदोबस्त के लिए विशेष निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों के अनुसार राज्य के कई संवदेनशील सार्वजनिक स्थलों पर नमाज या सार्वजनिक इबादत पर रोक लगाई गई है। श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में ईद के मुबारक मौके पर भी हिंसा और पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं हैं. इन घटनाओं में दो सीआरपीएफ जवानों और कई लोगों के घायल होने की खबर है. श्रीनगर की हनफिया और अहले हदीस ईदगाह में नमाज़ के बाद लोगों ने नारेबाज़ी और प्रदर्शन करते हुए पुलिस पर पथराव किया. श्रीनगर के अलावा पुलवामा, कुलगाम, शोपियां, बारामुला और अनन्तनाग में भी छिटपुट हिंसा की खबर है. कश्मीर के अनंतनाग की जंगलातमंडी में 400 से 500 कट्टरपंथियों ने सीआरपीएफ कैंप पर हमला किया और पत्थरबाजी की. पुलवामा में नकाबपोश कट्टरपंथियों ने हिज्बुल आतंकी ज़ाकिर मूसा के समर्थन में नारे लगाए.


भाजपा नेता चाहते हैं राजस्थान में 2018 में भाजपा हारे

जयपुर 26-6-2017.

आम आदमी पार्टी ने रविवार 25 जून को सिविल लाइंस क्षेत्र में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया। 

 पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने कार्यकर्ताओं में जोश भरने का प्रयास किया। साथ ही राजस्थान में आप को भाजपा व कांग्रेस का विकल्प बताया।

सम्मेलन के बाद विश्वास ने पत्रकारों के समक्ष दावा किया, भाजपा के दिल्ली में बैठे नेता चाहते हैं कि भाजपा राजस्थान में 2018 का विधानसभा चुनाव हारे। प्रदेश में भाजपा 5 धड़ों में बंट गई है। घनश्याम तिवाड़ी जैसे वरिष्ठ नेता सड़क पर उतर रहे हैं, सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं। इससे जाहिर है कि चुनाव में भाजपा की हार तय है। 

वहीं, कांग्रेस में तीन धड़े हैं। कांग्रेस में पूर्व नेतृत्व की ही अनदेखी हो रही है। ऐसे में लोग आप की ओर देख रहे हैं। आप राजस्थान में मजबूत विकल्प बनकर उभरेगी।

दिल्ली में आप में चल रही अंदरूनी लड़ाई पर विश्वास ने कहा, जो आरोप लगा रहे हैं, वे पार्टी से निष्कासित हैं। उनके आरोपों का जवाब नहीं दिया जा सकता। 

सत्रह विधायकों की सदस्यता के मामले में उन्होंने कहा, यह सरकार का मामला है, संगठन का नहीं। इसका जवाब दिल्ली सरकार दे चुकी है।

कार्यकर्ता सम्मेलन में विश्वास ने कहा, पार्टी पूर्ण शराबबंदी का समर्थन नहीं करती। लेकिन पार्टी की मांग है कि सरकार जहां भी शराब की दुकान खोले, उससे पहले वहां शिक्षा, चिकित्सा, बिजली और पानी का पुख्ता इंतजाम करे।

प्रदेश प्रवक्ता देवेन्द्र शास्त्री ने बताया कि कार्यकर्ता सम्मेलन में किसानों के प्रत्येक आंदोलन के समर्थन का निर्णय किया गया। अगस्त के पहले सप्ताह में किसान रैली निकाली जाएगी। छह माह तक संगठन को मजबूत करने का काम चलेगा। कॉलेजों के छात्रसंघ चुनावों में भी आप का अग्रिम संगठन मैदान में उतरेगा। 

भाजपा के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी को पुलिस ने हिरासत में लिया बाद में छोड़ा:


जयपुर  26-6-2017.

राजस्थान भाजपा के वरिष्ठ नेता और बागी तेवर दिखाने वाले विधायक घनश्याम तिवाड़ी सीएम को चुनौती देने के लिए धरने पर बैठते उससे पहले ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया। तिवाड़ी अकेले एकात्म सत्याग्रह करने निकले थे। उनका पहले स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सम्मान किया गया, उसके बाद वे एकात्म सत्याग्रह पर रवाना हुआ। वे पैदल ही सीएम हाउस के लिए रवाना हुए।


वे सीएम हाउस तक पहुंचते उससे पहले ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया। सोडाला पहुंचने के बाद पुलिस ने उन्हें आगे जाने से मना किया, लेकिन तिवाड़ी आगे जाने पर अड़ गए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें वहां से हिरासत में ले लिया और जालूपुरा स्थित उनके आवास पर छोड़ दिया।


विदित रहे कि तिवाड़ी ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर निशाना साधते हुए पिछले दिनों कहा था कि   सिविल लाइन्स स्थित बंगला नं. 13 को 10 दिन में खाली कर दें, अन्यथा वे सीएम निवास  के आगे अनशन करेंगे।इसके बाद दीनदयाल वाहिनी के द्वारा प्रदेशभर में एकात्म सत्याग्रह किया जाएगा। इसके लिए तिवाड़ी को परमिशन नहीं मिल पाई थी।


एक दिन पहले ही तिवाड़ी के बेटे अखिलेश तिवाड़ी ने भी सरकार पर आरोप लगाए थे और कहा था कि प्रशासन द्वारा 25 जून को घनश्याम तिवाड़ी द्वारा किए जा रहे एकात्म सत्याग्रह को अनुमति ना दिए जाना अलोकतांत्रिक है। उन्होंने इसे अघोषित आपातकाल की संज्ञा दी।



Sunday, June 25, 2017

न्यू संस्कार कोचिंग एकेडमी के पोस्टरों से चौराहे को गंदा किया


सूरतगढ़ 25 जून 2017. 

बीकानेर रोड का महाराजा अग्रसेन चौराहा न्यू संस्कार कोचिंग एकेडमी के पोस्टरों की गंदगी से खराब कर दिया गया है तथा आते जाते लोगों को ये पोस्टर अखर रहे हैं।

जो संस्था शहर में इस तरह से पोस्टर गंदगी फैला रही है उसके द्वारा दिए जाने वाली संस्कारित​ कोचिंग तो  कैसे हो सकती है? बीकानेर रोड पर यह चौराहा बस स्टैंड के पास और अग्रवाल धर्मशाला के उसके आगे बना हुआ है।

 कुछ दिन पूर्व जिला कलेक्टर ने नगरपालिकाओं को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पोस्टरों की गंदगी फैलाने वाली संस्थाओं के विरुद्ध पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाएं।अब नगर पालिका का दायित्व है कि इस न्यू संस्कार कोचिंग एकेडमी के विरुद्ध पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाए और चौक की सफाई भी करवाए।



राजस्थान में ओसियां में बन रहा है 25 लाख रुद्राक्ष से शिवलिंग

राजस्थान में जोधपुर जिले के ओसियां कस्बे में विश्व का अनूठा और सबसे उंचा रूद्राक्ष से बना शिवलिंग तैयार हो रहा है। इसके बनाने में 25 लाख रूद्राक्ष इस्तेमाल होंगे।

रुद्राक्ष नेपाल के विराट नगर एवं नेपाल गंज से मंगवाए हैं। इस शिवलिंग की ऊंचाई सवा तेतीस फुट होगी।

आयोजन समिति के रमेश कुमार सोनी ने बताया कि यह शिवलिंग तीन लाख स्क्वायर मीटर जगह में बनाया जा रहा है।


धर्मपुर (गुजरात) के 160 कारीगर इसे तैयार करने में लगे हैं। यहां 9 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) से 17 जुलाई (अष्टमी) तक महारुद्राभिषेक, महारुद्र यज्ञ तथा शिव महापुराण कथा का आयोजन होगा। इस शिवलिंग के निर्माण का काम अप्रेल से शुरू हो गया था।


दो महीने तक इन रुद्राक्ष को साफ किया गया। यह भी देखा गया कि कहीं कोई रूद्राक्ष खंडित तो नहीं है। इसके बाद इन सभी रूद्राक्ष की मालाएं बनाई गई। जो शिवलिंग बनाने में काम आएंगी।


फिलहाल शिवलिंग की शक्ति पीठ का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसमें करीब 40 हजार ईंटे लगी है। शिवलिंग तक पहुंचने के लिए अलग से प्लेटफार्म बनाया जाएगा।


आयोजन में महाशिवलिंग का अभिषेक कैलाश मानसरोवर के नाम से होगा। साथ ही रूद्राक्ष के पौधे का पूजन भी किया जाएगा।


एनकाउंटर के बाद पैतृक गांव सांवराद में तनाव: पुलिस पर पथराव

25-6-2017.

गैंगस्टर आनंदपाल के एनकाउंटर के बाद उसके पैतृक गांव लाडनूं के सांवराद में तनाव बना हुआ है। बड़ी संख्या में उसके समर्थक जुट गए हैं। वहां पर पुलिस टीम पर भी हमला किया गया है। जानकारी मिली है कि गांव में कहीं हवाई फायर भी किए गए हैं। 

आनंदपाल की मौत की खबर सुनकर आसपास से बड़ी संख्या में आनंदपाल के समर्थक और रिश्तेदार गांव पहुंचने लगे,वहीं उसके गांव में लोगों ने पुलिस और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। बताया गया है कि दोपहर में वहां हजारों की संख्या में लोग पहुंच चुके थे और वे सरकार तथा पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।


इस दौरान पुलिस टीम पहुंची तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने पुलिस पर पथराव कर दिया और पुलिस को जान बचाकर गांव से भागना पड़ा। इसमें कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें भी आई है। इससे पहले आनंदपाल के परिजनों ने आनंदपाल के एनकाउंटर मामले में सीबीआई जांच की मांग की और आनंदपाल के शव को लेने से भी इंकार कर दिया।


आनंदपाल के परिजनों ने मांग की है कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए उसके दोनों भाई देवेन्द्र और रुपेन्द्र को उसकी अंतिम यात्रा में शामिल किया जाए। 


श्रीगंगानगर जिले के आपातकाल 1975 के बंदी क्रांतिकारियों को पेंशन शुरू:


स्वर्गवास हो चुके क्रांतिकारियों के आश्रितों को पेंशन:
पेंशन जनवरी 2014 से मिलेगी।
इंदिरागांधी के शासन की क्रूरता के विरूद्ध आवाज उठाई:राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में जेल में ठूंस दिया गया था:
विशेष खबर - करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़, 22 अक्टूबर 2014.
अपडेट 25-6-2017.
राजस्थान की भाजपा वसुंधरा राजे सरकार ने आपातकाल के बंदी सूरतगढ़ क्रांतिकारियों को पेंशन शुरू कर दी है। जिला कलक्टर आर.एस.जाखड़ श्रीगंगानगर ने 21 अक्टूबर को समिति की बैठक कर आदेश जारी कर दिए। जिनकी पेंंशन शुरू की गई है उनके नाम निम्र हैं।
सूरतगढ़
1.गोपसिंह सूर्यवंशी पूर्व पार्षद निवासी लाइनपार वार्ड नं 23,सूरतगढ़। पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत के छोटे भाई हैं। स्व.गोपसिंह की पत्नी रोमिला को पेंशन मिलती है।
2.सुगनपुरी वार्ड 13 सूरतगढ़
3.महावीर प्रसाद तिवाड़ी सूरतगढ़
4.नेमीचंद छींपा पूर्व पार्षद हैं। सूरतगढ़
5.बलराम वर्मा कांगे्रस नेता लाइन पार रहते हैं। सूरतगढ़
6.हनुमान प्रसाद मोट्यार  सूरतगढ़
7.लक्ष्मण शर्मा माकपा नेता हैें। सूरतगढ़

8. लीलाधर सेन रामदेव कॉलोनी, श्री गंगा नगर।
9.रामस्वरूप मांझू रिड़मलसर।
10.श्रीमती शांतिदेवी पत्नी स्व.उदाराम चक 4 जेएसडी बुगिया।
11.रामकुमार पुत्र मोहनलाल कीकरवाली रायसिंहनगर। आंदोलन में सूरतगढ़ में गिरफ्तारी दी थी।
12.श्रीमती कैलाशवंती पत्नी स्व.रामप्रकाश सूढ़ा वासुदेवनगर श्रीगंगानगर।
13. मदनलाल श्रीगंगानगर।
14. श्रीमती सावित्री पत्नी स्व.श्रीराम शर्मा दुर्गा विहार श्रीगंगानगर।
15.श्रीमती प्रकाश देवी पत्नी मिल्ख राज श्रीगंगानगर।
16. भंवरलाल भार्गव देवनगर श्रीगंगानगर।
17. एडवोकेट हुलासमल चौपड़ा  अग्रसेन नगर श्रीगंगानगर।
18.मंजुबाला टांटिया पत्नी गोविंदराम टांटिया आनन्द विहार श्रीगंगानगर।
19.श्रीमती सरोज चुघ स्व.श्याम चुघ महाराणा प्रताप कॉलोनीश्रीगंगानगर। श्याम चुघ पत्रकार थे।
20.गंगाराम अरोड़ा जवाहर नगर श्रीगंगानगर।
21.द्वारका प्रसाद पुरानी धानमंडी श्रीगंगानगर।
22.लक्ष्मीनारायण कालड़ा मुकर्जीनगर श्रीगंगानगर।
23.श्रीमती लक्ष्मीदेवी पत्नी ओमप्रकाश अग्रवाल अशोकनगर श्रीगंगानगर।
24.दीनदयाल अरोड़ा आदर्शनगर श्रीगंगानगर।
25.श्रीमती त्रिवेणी देवी पत्नी स्व.मदनलाल श्रीबिजयनगर। मदनलाल ने भी आंदोलन में सूरतगढ़ में गिरफ्तारी दी थी।
विस्तृत जानकारी कलक्टर श्रीगंगानगर कार्यालय से प्राप्त हो सकती है।

इंदिरा गांधी के राज के अत्याचार भरे सच : 37 साल पहले लगाया था आपातकाल

राजस्थान में भाजपा के राज में वसुंधरा के मुख्यमंत्री काल में 17 सितम्बर 2008 को असाधारण आदेश राजपत्र में प्रकाशित किया गया। इस आदेश पर कार्य शुरू हो गया। आपातकाल के पीडि़तों की ओर से प्रमाणपत्र आदि दे दिए गए, मगर पेंशन लागू होने से पहले ही चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई और सरकार कुछ कर नहीं पाई। इसके बाद में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार बनी जिसने इस योजना को लागू करने से मना कर दिया।

सामयिक टिप्पणी: तीखे तेवर

31-10-2011.

अपडेट 25-6-2017.

इंदिरा गांधी के राज के अत्याचार भरे सच : 42 साल पहले लगाया था आपातकाल

आपातकाल की पीड़ाओं में  हजारों परिवार खत्म हो गए और जो बाकी हैं वे पीड़ाएं भोग रहे हैं

राजस्थान में 2008 में पेंशन लागू करने की योजना बनाई गई, मगर  चुनाव घोषणा की आचार संहिता लागू होने से अटकी और बाद में आई कांग्रेस सरकार  ने  लागू नहीं की

- करणीदानसिंह  राजपूत

इंदिरा गांधी की हत्या के दिवस पर संपूर्ण देश में अखबारों में विज्ञापनों के माध्यम से केन्द्र व राज्य सरकारों की ओर से सरकारी स्तर पर परंपरागत श्रद्धांजलि अर्पित की गई है। उनके अनुगामी जिसमें केवल कांग्रेस है या उसके संगठन के सत्ताधारियों,पदाधिकारियों के द्वारा भी श्रद्धाजलि देने के कार्यक्रम 31 अक्टूबर को यत्र तत्र चलेंगे जिनके समाचार भी परंपरागत अखबारों में अगले दिन छपे हुए मिलेंगे।       

इंदिरा गांधी के राज में सब कुछ वह नहीं हुआ जो सराहा जाए। सन 1975 में 25 जून को आपातकाल लागू कर संपूर्ण देश को जेल बना दिया गया था उसकी आलोचना संपूर्ण संसार में हुई थी। बहुत दर्दनाक हालात में लोग गुजरे। हजारों लोग तबाह हो गए। अनेक लोग मौत के शिकार हुए अनेक के कारोबार ठप हुए तथा बाद में पनप ही नहीं सके।

    देश के कई लेखकों ने अपने लेखों में लिखा है कि आपातकाल के घावों को समय ने मरहम लगाई है। लेकिन यह सच नहीं है। केवल शब्दों में लिख देने मात्र से मरहम नहीं लग पाती। उन लेखकों को मालूम नहीं कि अनेक परिवार वे पीड़ाएं अभी भी भोग रहे हैं। जिनके रोजगार बंद हो गए, कारोबार उजड़ गए वापस पनपे ही नहीं,उनके मरहम कैसे लग गया? आपातकाल लागू करने की तिथि को संैतीस साल हो चुके हैं। आपातकाल को भोगने वाले लोग करीब सतर प्रतिशत तो अब इस संसार में नहीं है, जो हैं वे सब 50 साल से उपर की आयु में यानि कि वृद्धावस्था में है। जो जीवित हैं वे वृद्धावस्था में भयानक अभावों व कष्टों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं और जो संसार से विदा हो चुके हैं उनके परिवार कष्टों भरा जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

यह मान भी लें कि उनको तीन साल बाद बदलाव के बाद आने वाली सरकारें लाभ दे भी दें तो उस बदलाव तक अनेक लोग और कालकल्वित हो चुके होंगे। इस पीड़ा को कोई समझ नहीं पा रहा है। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है जिसने यह योजना लागू करने से मनाही करदी। हालांकि आपातकाल की पीड़ाएं और जेलों के कष्ट भोगने वाले हजारों लोग कांग्रेस में भी है, जो किसी न किसी रूप में उस समय पुलिस व सिविल प्रशासन की मनमानियों का शिकार हुए। बिना किसी अपराध के केवल अधिकारियों के साथ किसी कारण से अनबन थी तो उनको भी जलों में ठूंस दिया गया था। उस समय तो कोई सुनने वाला ही नहीं था। शांति भंग जैसे साधारण मामले बना कर भी लोगों को जेल पहुंचा दिया गया। इस प्रकार के मामले तो प्रशासनिक अदालतें ही सुनती है और उस समय प्रशासन तो बौना हो चुका था।

    राजस्थान में आपातकाल में सन 1975-77 में मीसा,डीआईआर और भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता  की धाराओं 107-151 के तहत बंदी और नजरबंद किए गए राजनैतिक कार्यकर्ताओं व सत्याग्रहियों के लिए लोकतंत्र रक्षा मंच कार्य कर रहा है। इस मंच का गठन राजनैतिक बंदियों की ओर से जनतांत्रिक अधिकारों के लिए किया गया है। मंच के अध्यक्ष कौशल किशोर जैन की ओर से राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर बैंच में एक याचिका केस नं 7176-2010 प्रस्तुत की हुई है जिसके पैरवीकार प्रसिद्ध वकील भरत व्यास हैं।

आपातकाल के 35 वर्ष पूर्ण होने पर आजादी की तीसरी लड़ाई का दर्जा देते हुए जयपुर में एक सम्मेलन भी आयोजित किया गया था। इसके बाद भी एक कार्यक्रम हुआ। मंच के महा सचिव फरीदुल्लाह कोटा राजस्थान निरंतर कार्यरत हैं।

 सामयिक लेख के लिखने का एक ही कारण है कि इंदिरागांधी को आयरन लेडी का संबोधन देते हुए जो श्रद्धांजलि दी जा रही है, महान बताया जा रहा है। वहां पर उनके द्वारा लादे गए आपातकाल के कलंक को भी याद रखा जाए जिसमें आजाद भारत में लोगों की आजादी छीनी गई और इसको कभी भुलाया नहीं जा सकता और आने वाली कोई भी सरकार इतिहास के इन पृष्ठों को चाहकर भी हटा नहीं सकती।

- स्वतंत्र पत्रकार,

सूरतगढ़।

मोबा.  94143 81356
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अपातकाल लोकतंत्र सेनानियों को केंद्र वह राज्य सरकारें सम्मान व सहायता करें

दिल्ली 21मार्च 2017.

अपडेट 25 जून  2017.

केन्द्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कहा है कि वर्तमान केन्द्र सरकार और कई राज्य सरकारें आपातकाल के दौरान त्याग और बलिदान करने वाले लाखों कार्यकर्ताओं के सहयोग से बनी है। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की बहाली के लिए जिन कार्यकर्ताओं ने त्याग और बलिदान किया उस पीढ़ी को यथोचित सम्मान और सहायता देने का फर्ज वर्तमान केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों का है। सरकार लोकतंत्र सेनानियों को सभी प्रकार की आर्थिक और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवायेगी। श्री गडकरी  ताल कटोरा स्टेडियम में लोकतंत्र सेनानियोें के अखिल भारतीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि थे। 


श्री गडकरी ने कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र सेनानियों को अनेक जुल्म और ज्यादतियां सहनी पड़ी थी, अनेक लोगों की जेलों में मौत हो गयी थीं, तत्कालीन जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हजारों कार्यकर्ताओं ने 1975 से 1977 तक आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष किया था जिसके फलस्वरूप देश में पुनः लोकतंत्र कायम हुआ। आज भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र और राज्यों में जो सरकारें हैं वे राष्ट्रवाद की विचारधारा की जीत के परिणामस्वरूप है। हमारी सरकारें भारत के निर्माण के लिए सदैव प्रयत्नशील रहेंगी। लोकतंत्र सेनानियों की उस पीढ़ी ने संघर्ष और त्याग किया। अनेक युवकों ने अपनी जवानी को भी कुर्बान कर दिया। अनेक कार्यकर्ताओं ने भूमिगत रहकर लोकतंत्र की लड़ाई में अपना योगदान दिया। उनकी तपस्या को भी सरकार सम्मानित करेगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री कैलाश सोनी ने कहा कि आपातकाल के दौरान लाखों युवकों ने त्याग और बलिदान किया है। लोकतंत्र सेनानी वह पीढ़ी है जिसकी प्रमाणिकता असंदिग्ध है। श्री सोनी ने कहा कि केन्द्र सरकार आपातकाल के दौरान जेलों में बन्द और भूमिगत रहने वाले कार्यकर्ताओं को सूचीबद्ध कर उन्हें सम्मानित करे जिससे भावी पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सके।

केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि जब-जब देश की संस्कृति और सभ्यता पर आक्रमण हुआ, देश में अत्याचार हुए तब-तब भारत माता ने ऐसे पुत्रों को जन्म दिया जिन्होंने अन्याय और अत्याचारों से मुक्ति दिलायी। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की हत्या का प्रयास किया गया तब उसकी रक्षा के लिए लोकतंत्र सेनानियों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। आज जो परिस्थिति है उसमें कभी भी देश में आपातकाल नहीं लगाया जा सकता। लोकतंत्र बना रहे इसके लिए जरूरी है कि आपातकाल की कड़वी यादें बनी रहें। आपातकाल की संघर्ष गाथाओं को याद रखकर भावी पीढी को अवगत कराते रहें जिससे भावी पीढ़ी को आपातकाल के संघर्ष की गाथा याद रहे। लोकतंत्र सेनानियों के प्रयासों से ही देश में लोकतंत्र बहाल हुआ था। 


केन्द्रीय सूचना और प्रोद्योगिकी मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने 1975 से 1977 के बीच में आपातकाल के दौरान चलाये गये दमन और आतंक की कहानी सुनायी। उन्होंने स्वयं आपातकाल में लोकतंत्र की बहाली के लिए आंदोलन किया और जेल में बन्द रहे। आपातकाल के विरूद्ध काम करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को प्रणाम करते हुए कहा कि  आप में वह ताकत और जोश है जिसने हिन्दुस्तान की तत्कालीन सरकार को भी बदल दिया था। 

 भविष्य में भी देश को जागृत करते रहने के लिए लोकतंत्र सेनानी कार्य करते रहेंगे।केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री श्री प्रकाश जावडे़कर ने कहा कि आपातकाल के इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विचार किया जायेगा।


केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने घोषणा की कि लोकतंत्र सेनानियों को सी.जी.एच.एस. की तरह स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवायीं जायेंगी। क्योंकि ज्यादातर लोकतंत्र सेनानी अधिक उम्र के हैं। 


लोकतंत्र सेनानी संघ ऊके सम्मेलन में संघ के उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने,  कन्दकुमार चेन्नई, सचिवगण  सूर्यमणि सिंह रांची,  रविन्द्र कासखेडिकर नागपुर,  अजय बिश्नोई, दिल्ली के राजन ढींगरा धर्मवीर शर्मा, हेमन्त बिश्नोई, कोषाध्यक्ष संतोष शर्मा कार्यालय सचिव  सुरेश अग्रवाल सहित देश के 18 राज्यों से करीब चार हजार लोकतंत्र सेनानी उपस्थित थे।



आनंदपाल की कुख्यात कहानी का अंत 21 लोगों को था जान का खतरा

राजाराम मील विधायक हनुमान बेनीवाल सहित 21 लोगों को जान को खतरा था।

जयपुर. 25-6-2017.


करीब डेढ़ साल से फरार चल रहा कुख्यात बदमाश आनंदपाल सिंह आखिरकार मारा गया। शनिवार रात करीब 11:25 बजे एसओजी ने चूरू के मालासर में मुठभेड़ के दौरान उसे मार गिराया। मुठभेड़ के दौरान आनंदपाल और उसके दो साथियों ने एके 47 व अन्य हथियारों से 100 राउंड फायर किए। इस दौरान आनंदपाल को छह गोलियां लगी। एसओजी के सीआई सूर्यवीर सिंह के हाथ में फ्रेक्चर आया, जबकि पुलिसकर्मी सोहन सिंह गोलियां लगने से घायल हो गया। आनंदपाल के पास से 2 एके-47 व 400 कारतूस मिले हैं। 

एसओजी ने आनंदपाल के दो भाइयों देवेंद्र उर्फ गुट्‌टू और विक्की को हरियाणा के सिरसा से गिरफ्तार किया था।


मालासर में छिपा था


पूछताछ में पता चला कि आनंदपाल मालासर में श्रवण सिंह के घर पर छिपा हुआ है। डीजीपी मनोज भट्ट ने बताया कि पिछले डेढ़ माह से एसओजी के आईजी दिनेश एमएन के सुपरविजन में एडिशनल एसपी संजीव भटनागर हरियाणा में डेरा डाले हुए थे। इस दौरान संजीव भटनागर को आनंदपाल के भाई विक्की व देवेन्द्र को सिरसा में दबिश देकर शाम छह बजे गिरफ्तार किया। इसके बाद एसओजी की एक टीम करण शर्मा के नेतृत्व में चूरू जिले के मालासर गांव में पहुंची। यहां आनंदपाल दो दिन पहले आया था। एसओजी ने घेराबंदी कर आनंदपाल को जीवित पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह छत पर जाकर पुलिस पर फायरिंग करने लगा। आनंदपाल ने करीब 100 राउंड फायर किए। एसओजी की जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।




21लोगों को जान का खतरा था


इंटेलीजेंस ने सरकार को रिपोर्ट भेजी थी कि आनंदपाल के खिलाफ दर्ज केसों में बने गवाह, विरोधी राजू ठेहट की गैंग का सहयोग और उसका विरोध करने वाले लोगों की जान को खतरा है। इंटेलीजेंस के अफसरों का मानना था कि आनंदपाल के फरार होने के बाद कई नेताओं को भी खतरा था। 

इनमें विधायक 1.हनुमान बेनीवाल, 2.चेतन डूडी, 3.बजरंगलाल फोगड़ी,4. गोपालराम, 5.रामप्रकाश, प्रमोद,6. इंद्रचंद जाट, 7.एडवोकेट रामेश्वर भाकर, 8.चूरू निवासी वीरेन्द्र कुमार, 9.सीताराम,10. रामनारायण 11

रामनिवास, 12.बीकानेर निवासी हनुमान जाखड़, 13.ओमप्रकाश ठेहट, 14.सीकर निवासी हरिराम रणवां, 15.ओमप्रकाश जिगर, 16.दिनेश, 17.मनोज आेला, 18.रामचन्द्र और 19.जयपुर निवासी राजाराम मील 20.गगन शर्मा आदि के नाम शामिल थे। इन सभी पर कभी आनंदपाल या फिर उसकी गैंग के सदस्य कभी भी जानलेवा हमला कर सकते थे। 

5 राज्यों में 12 ठिकाने


आनंदपाल के पांच राज्यों में 12 ठिकाने थे। आनंदपाल लूट, डकैती, गैंगवार, हत्या जैसे 24 मामलों में अपराधी था।


पेशी के दौरान भागा था


3 सितंबर 2015 को अजमेर पुलिस आनंदपाल को नागौर के लाडनूं में पेशी पर लेकर आई थी। पेशी से लौटते समय योजना के अनुसार परबतसर के पास बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी और आनंदपाल, श्रीवल्लभ व सुभाष मूंड को छुड़ाकर ले गए। आनंदपाल पुलिस की एक एके-47 भी अपने साथ ले गया था।


बेटी की भूमिका भी संदिग्ध


 एसओजी ने आनंदपाल की बेटी की भूमिका को भी संदिग्ध माना था। अब एसओजी आनंदपाल की बेटी को भी गिरफ्तार कर सकती है। आनंदपाल की बेटी ने जीवनराम गोदाराम हत्याकांड के गवाहों को मैनेज करने के लिए अपने पिता के साथ मिलकर फरारी की रणनीति बनाई थी। इसके बाद वह महेन्द्र सिंह व केसर सिंह के माध्यम से कमांडो शक्ति सिंह से मिली थी। इसके बाद आनंदपाल की गैंग के सदस्यों ने योजना बनाई थी। इसके लिए शक्ति सिंह ने पैसे लिए थे।


एसओजी पहुंचती उससे पहले आनंदपाल गायब हो जाता


- फरारी के पांच माह बाद नागौर पुलिस ने आनंदपाल का पीछा किया, लेकिन वह कमांडो खूमाराम पर फायरिंग कर भाग गया। फायरिंग से खुमाराम की मौत हो गई थी।

- एसओजी ने आनंदपाल के साथी को भरतपुर से गिरफ्तार किया था। आनंदपाल तब ग्वालियर में था। एसओजी कुछ घंटों बाद ग्वालियर उसके ठिकाने पर पहुंची तो वह भाग गया।

- जोधपुर के फलौदी इलाके में एक माह पहले एसओजी ने दबिश दी, लेकिन आनंदपाल एक दिन पहले ही वहां से भाग गया। ऐसे में एसओजी ने शरण देने वाले आरोपियों को  गिरफ्तार किया।

- बीकानेर अमनदीप सिंह के फार्म हाउस से पुलिस व एसओजी की दबिश से तीन दिन पह पबले आनंदपाल भाग गया था। एेसे में एसओजी को अमनदीप सिंह को ही गिरफ्तार करना पड़ा।

- किशनगढ़ में आनंदपाल अपनी गैंग के सदस्य के पास डेढ़ माह पहले आया हुआ था, लेकिन एसओजी के पहुंचने से पहले वह भाग गया। इसके अलावा पंचकुला हरियाणा से भी पुलिस के पहुंचने से पहले आनंदपाल भाग गया था।


सीआई सूर्यवीर व सिपाही सोहन घायल

आनंदपाल से मुठभेड़ के दौरान एसओजी के सीआई सूर्यवीर सिंह के हाथ में फ्रेक्चर आया। इसके अलावा  पुलिसकर्मी सोहन सिंह गोलियां लगने से घायल हो गया। सोहन की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 



जयपुर: 

आनंदपाल करीब दो दर्जनों मामलों में डीडवाना, जयपुर, सीकर, सुजानगढ, चूरू, सांगानेर सहित अन्य स्थानों पर वांछित था. वह नागौर के डीडवाना में जीवन राम गोदारा की हत्या, सीकर जिलें में गोपाल फोगावट हत्या मामले में वांछित था.


फेसबुक पर भी एक्टिव था आनंदपाल

आनंदपाल फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने फैन्स के लिए एक सोशल पेज भी चलाता था. वह अपने समाज से जुड़ी समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों की कतरन अपने फैंन्स को पोस्ट करता था. फैन फॉलोविंग हजारों भी में है. फेसबुक पर आनंदपाल सिंह के नाम से ही प्रोफाइल है जिसमें उसका फोटो इस्तेमाल किया गया है. 


लेडी डॉन अनुराधा चौधरी से था खास संपर्क

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आनंदपाल के गैंग की सदस्य रही अनुराधा चौधरी फिलहाल जेल में है. अनुराधा उर्फ अनुराग सीकर में रानी सती रोड की मूल निवासी है. 33 साल की इस लेडी डॉन की शादी सीकर के ही दीपक मिंज नाम के व्यक्ति के साथ हो चुकी है. वह शेयर बाजार में काम करती थी. नुकसान होने के बाद उसने गैंगस्टर आनंदपाल से संपर्क बढ़ाया. धीरे-धीरे वह गैंग की अहम सदस्य बन गई.

बता दें कि आनंदपाल पर हत्या, डकैती, अवैध वसूली समेत 28 दूसरे मामले दर्ज हैं। आनंदपाल एके-47, कारबाइन और एसएलआर जैसे अत्याधुनिक हथियार भी वारदातों को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल करता है। आनंदपाल नागौर जिले के लाडनूं का निवासी है। 2006 में उसने छात्र नेता जीवनराम गोदारा की हत्या की थी। साल 2011 में वह गिरफ्तार हुआ। तभी से जेल में था।




उस पर अलावा गैंगवार, हत्या, अवैध वसूली, अपहरण के 28 अन्य मामले भी हैं।  

2001 में अपराध की दुनिया में आया। 300 से ज्यादा गुर्गों की गैंग रखता है। राजस्थान के नागौर, सीकर, चूरू, झुंझुनूं और बीकानेर जिलों में एक छत्र राज था। तीन सितंबर 2015 को जयपुर में पेशी के दौरान पुलिस के हथियार लूटे और तब से फरार था।


गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने अपने ताज़ा बयान में एनकाउंटर में आनंदपाल के मारे जाने पर पुलिस को बधाई दी है वही कहा है कि पुलिस आनंदपाल को जीवित पकड़ना चाहते थी।






राजस्थान क्रिकेट संघ के अध्यक्ष ललित मोदी और सचिव आर सी नांदू को निलंबित कर दिया गया

राजस्थान क्रिकेट संघ की नवनिर्वाचित कार्यकरिणी की शनिवार को आयोजित बैठक में नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष ललित मोदी तथा आरसीए व नागौर क्रिकेट संघ के सचिव आर.सी.नांदू को निलं​बित कर दिया। नांदू ने बैठक में मोदी के निलंबन का कड़ा विरोध किया था।


आरसीए अध्यक्ष डॉ.सी.पी. जोशी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में बीसीसीआई से आरसीए के निलंबन को वापस लेने की तैयारियों पर विचार किया गया। इसी के तहत नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष ललित मोदी का निलंबन किया गया है। गौरतलब है कि बीसीसीआई ने साफ कहा है कि जब तक ललित मोदी को आरसीए से बाहर नहीं किया जाता, तब तक निलंबन जारी रहेगा। 


दूसरी तरफ, नांदू ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने इस फैसले को अंसवैधानिक बताया। इस पर आरसीए कार्यकारिणी ने नांदू को भी निलंबित कर दिया। उनका काम आरसीए के संयुक्त सचिव महेन्द्र नाहर देखेंगे। 


डॉ सी.पी. जोशी के अनुसार आरसीए का निलंबन खत्म करने के लिए मोदी को निलंबन करने का निर्णय आवश्यक था। जोशी का कहना था कि यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। अब बीसीसीआई को पुन: पत्र भेजकर आरसीए का निलंबन रदद करने की मांग करेगा। 


Saturday, June 24, 2017

मां ने तीन बेटियों को विषाक्त खिलाकर खुद भी सेवन किया

जोधपुर 2462017.

शनिवार शाम चौंकाने वाली घटना सामने आई है। 

 एक मां ने अपनी तीन बेटियों के साथ विषाक्त खा लिया।


जानकारी के अनुसार, बालेसर थाना क्षेत्र के बिराई गांव में मां धापू देवी ने अपने ही कलेजे के टुकड़े तीन बच्चियों को विषाक्त पदार्थ खिला दिया। इसके बाद खुद ने भी विषाक्त का सेवन कर लिया। इससे एक पांच वर्षीय मासूम की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि मां धापू देवी और उसकी दो बच्चियों को गंभीर हालत में जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में भर्ती कराया जहां इलाज चल रहा है। हालांकि विषाक्त पदार्थ सेवन करने या कराने के कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है। बालेसर पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

बालेसर थाना के बिराई गांव निवासी ओमाराम व उसकी पत्नी धापू देवी में विवाद चल रहा था। हालांकि अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।पुलिस ने महिला के पीहर पक्ष के लोगों को भी सूचना दी है। उनके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। 


आपातकाल दिवस 26 जून को काला दिवस मनाएगी भाजपा

जयपुर में राजस्थान लोकतांत्रिक सेनानी संघ की ओर से  पंचायती राज संस्थान भवन में जवाहर लाल नेहरू मार्ग पर यह कार्यक्रम होगा।

- करणीदानसिंह राजपूत - 


भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान के महामंत्री ने केंद्रीय निर्देश पर राजस्थान में 26 जून को काला दिवस मनाने का निर्देश जारी किया है यह निर्देश जिला प्रभारियों को भी जारी किया गया है व वापसी रिपोर्ट भी मांगी गई है ।आपातकाल 26 जून 2000 1975 को कांग्रेस राज्य में इंदिरा गांधी के द्वारा लगाया गया था उस समय भयानक अत्याचार हुए थे ।

भाजपा के निर्देश में कहा गया है कि लोक नायक जयप्रकाश नारायण को याद किया जाए उनका वर्णन समारोह में किया जाए मीसा में गिरफ्तार हुए लोगों को बुलाकर सम्मानित किया जाए। प्रेस वार्ता में भी आयोजित की जाएगी।

 26 जून को जब आपातकाल लागू हुआ तो सूरतगढ़ में उसी दिन शाम को आपातकाल के विरोध में गुरुशरण छाबड़ा के नेतृत्व में आम सभा की गई। आम सभा सुभाष चौक पर की गई और उसके बाद सारे कार्यकर्ता वहां से गायब हो गए थे, जिनकी  गिरफ्तारियां हुई और गिरफ्तारियां प्रदर्शनों के साथ भी दी गई। 

सूरतगढ़ से 12 लोग राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंदर गिरफ्तार हुए और वह व्यक्ति सीआरपीसी की धाराओं के तहत गिरफ्तार हुए ।

केंद्रीय निर्देश के अनुसार 21 जून को योग दिवस मनाने का 23 जून को श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद करने का निर्देश था। आपातकाल का विरोध राजस्थान में सबसे पहले सूरतगढ़ में किया गया था और उसी दिन दिल्ली के अंदर अरुण जेटली के नेतृत्व में विरोध किया गया था। पहले दिन यानी कि उसी दिन दो स्थानों पर आपातकाल का जबरदस्त विरोध किया गया था।



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