शुक्रवार, 30 जून 2017

अशोक जैन राजस्थान के नए मुख्य सचिव बनाए गए



जयपुर 30जून।

 मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी अशोक जैन पर भरोसा करते हुए उन्हें राज्य का नया मुख्य सचिव बनाया है। इस संबंध में कार्मिक विभाग ने आज आदेश जारी कर दिए। ओमप्रकाश मीणा मुख्य सचिव पद से शुक्रवार को सेवानिवृत हो गए। जैन ने उन्हीं से कार्यभार संभाला।


सामाजिक न्याय और अधिकारिता एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा वर्ष 1981 बैच के आईएएस जैन अपनी कार्यप्रणाली की मजबूती से सरकार की पहली पसंद बने हैं। ओमप्रकाश मीणा 1979 बैच के हैं और जैन 1981 बैच के है। जैन को सीएस बनाने के लिए वर्ष 1980 बैच के अफसर अशोक शेखर को नजरअंदाज करना पड़ा, लेकिन अगले साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव के कारण मुख्य सचिव पद पर नियुक्ति भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। वरिष्ठता सूची के अनुसार जैन तीसरे नंबर पर हैं और अगले साल जनवरी में सेवानिवृत होंगे।

जीवन परिचय

राज्य के नए मुख्य सचिव अशोक जैन मूलत: जोधपुर के रहने वाले हैं। वर्ष 1981 में भारतीय प्रशासनिक सेवा के बेडे में शामिल हुए और उन्हें राजस्थान कैडर मिला। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद मरू प्रदेश में उनकी पहली पोस्टिंग एक अक्टूबर 1983 को उपखण्ड अधिकारी बीकानेर उत्तर के पद पर हुई। जैन जैसलमेर जिले के कलेक्टर भी रहे हैं। वे जयपुर विकास प्राधिकारण के आयुक्त भी रहे। कुछ समय के लिए जैन राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी रहे। वर्ष 2013 में राजस्थान विधानसभा के चुनाव उन्हीं की देखरेख में हुए थे


गुरुवार, 29 जून 2017

सालासर जसरासर व दूजोद में प्रदर्शन जाम:आनंदपाल प्रकरण

आनंदपाल के एनकाउंटर की आग पांचवे दिन पूरे शेखावाटी में फैल गई। लोगों ने सड़कों पर टायर जलाकर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिए। पुलिस से कई जगह झड़प भी हो गई। चूरू व सालासर सहित कई स्थानों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। पूरे जिले में तनाव का महौल बन गया है। जिला मुख्यालय से करीब 18 किमी दूर सरदारशहर मार्ग पर जसरासर गांव में राजपूत समाज के लोगों ने मार्ग पर पत्थर डालकर जाम लगा दिया। इसके बाद मौजूद दर्जनों लोगों ने सरकार व पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। जाम के कारण मार्ग पर यातायात ठप हो गया। 

चूरू से पुलिस रवाना

सूचना मिलते ही चूरू से दो बज्र वाहनों में सवार होकर पुलिस व थानाधिकारी रवाना हो गए। मौके पर तनाव बना हुआ है। लोग अब मरने और मारने पर उतारू होने लगे हैं। पूरे शेखावाटी में विरोध का आग जलने लगी है। पुलिस कानून व्यवस्था संभालने में नाकामयाब होती जा रही है। स्थिति को संभालने के लिए चूरू में दो आईजी व एसओजी के अधिकारी सुबह से ही डेरा डाले हुए हैं। जिले में दूसरे जिले से पुलिस मंगवाई गई है।

सालासर में भी करणी सेना ने लगाया जाम

सालासर में भी करणी सेना के युवाओं ने हाइवे पर जाम लगा दिया। हाइवे पर टायर जला कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। जाम के कारण हाइवे पर दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। सूचना मिलते ही मौके​ पर सालासर पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने युवाओं को शांत करने का प्रयास किया लेकिन युवा आनंदपाल के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए मांग पर अड़े हैं। 

सीकर ।

दूजोद में आनंदपाल एनकाउंटर से गुस्साए उनके समर्थकों ने गुरुवार को तहसीलदार की गाड़ी में आग लगा दी। इसके बाद लोगों ने वहां जाम लगा दिया। जाम की सूचना पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया। आनंदपाल एनकाउंटर मामले में सीबीआई की जांच की मांग कर रहे राजपूत समाज के लोगों ने दूजोद में जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद लोगों में गुस्सा इस कदर बढ़ गया कि उन्होंने तोडफ़ोड़ करनी शुरू कर दी। इसके बाद समाज के लोगों ने आनंदपाल के समर्थन में सड़क पर जाम लगा दिया। जाम की सूचना पर धोद तहसीलदार अशोक रणवां मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को काफी समझाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं माने। उल्टा उन्होंने तहसीलदार की गाड़ी में तोडफ़ोड़ करनी शुरू कर दी। जब बात तोडफ़ोड़ से भी नहीं बनी तो उन्होंने तहसीलदार की गाड़ी आग के हवाले कर दी। 


आनंदपाल एनकाउंटर मामले में बढ़ रही है पुलिस की अड़चनें

चूरू  29-6-2017.

आनंदपाल सिंह के एनकांउटर के बाद बढते विरोध विरोध सीबीआई जांच की मांग से पुलिस अधिकारियों की नींद हराम हो रही है। 

परिजन अपनी पांच सूत्री मांगों पर अड़े हैं। उधर पुलिस की ओर से शव लेने के लिए परिजनों में से कोई नहीं पहुंचा।


अधिवक्ता कानसिंह के नेतृत्व में चार अधिवक्ताओं ने रतनगढ़ डीएसपी नारायण दान चारण को नोटिस का जवाब दे दिया है।माहौल को देखते हुए रतनगढ़ सहित लाडनूं व सांवराद में पुलिस का जाप्ता और बढ़ा दिया गया। चूरू से लेकर सांवराद तक भारी तनाव है। राजपूत समाज के लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रही। किसी भी वक्त कहीं भी बड़ी घटना हो सकती है।

पुलिस कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जुटी हुई है।  

पांचवे दिन भी शव लेने पर सहमति नहीं बनी।

आनंदपालसिंह का एनकाउंटर 24 जून की रात रतनगढ़ के गांव मालासर स्थित एक मकान में हुआ था। 25 को रतनगढ़ अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ था। पांचवे दिन दोपहर तक परिजन शव लेने को राजी नहीं हुए। 

बीकानेर आईजी ने लिया जिले में कानून व्यवस्था का जायजा, आईजी (क्राइम) महेन्द्र चौधरी चूरू पुहंचे 

गुरुवार को शव के संस्कार को लेकर बीकानेर संभाग के आला पुलिस अधिकारी रतनगढ़ पहुंच गए। आईजी विपिन पांडेय, एसपी राहुल बारहठ ने कानून व्यवस्था का जायजा लिया। एक दर्जन से अधिक थानों के थानाधिकारी और 100 सौ अधिक पुलिस कस्बे में तैनात है। आईजी जिले के पुलिस अधिकारियों के साथ चूरू पुहंचे हैं। आईजी (क्राइम) महेन्द्र चौधरी, एसओजी एएसपी करण शर्मा व संजीव भटनागर, कुचामन डीएसपी भी चूरू पुहंच हैं। 

वकील कानसिंह की ओर से दिए गए नोटिस के जवाब को लेकर आईजी, एसपी व एएसपी व डीएसपी ने मंथन शुरू कर दिया है। कानूनी अड़चनों को देखते हुए पुलिस भी शायद अदालत की शरण ले सकती है। 

आनंदपाल के शव को रतनगढ़ मोर्चरी से चूरू लाने के कयास बढ़ गए हैं। जगह-जगह पुलिस सहित अन्य लोगों में चर्चा चल रही है कि आनंदपाल का शव सुरक्षा के वास्ते गुरुवार को चूरू के भरतीया होस्पीटल में रखवाया था सकता है।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट व सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया

 _ करणीदानसिंह राजपूत  _


आनंदपाल के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने के मामले में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया सो रहे थे और जागती हुई मुख्यमंत्री  वसुंधरा राजे तथा पुलिस प्रशासन के एनकाउंटर विशेषज्ञों के द्वारा इन काउंटर मामलों में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय का पालन नहीं किया गया।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पुलिस अधिकारियों के कसीदे काढे जा रहे हैं। कितने ही प्रकार के खिताब दिए जा रहे हैं। उन स्पेशलिस्ट पुलिस अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए निर्णय का तो मालूम होना ही चाहिए था। राजस्थान सरकार, राजस्थान सरकार का गृह मंत्रालय और पुलिस प्रशासन इस मामले में सभी कटघरे में हैं कि आनंदपाल के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार उसका पोस्टमार्टम क्यों नहीं करवाया गया?

यह मामूली बात नहीं कही जा सकती और न टाली जा सकती है।

 इतनी बड़ी गंभीर बात को सरकार ने टाला है तो निश्चित रुप से इसमें बहुत बड़े घपले का, सच छुपाने का राज संभावित है।

 सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार पुलिस एनकाउंटर के मामले में पोस्टमार्टम जिला चिकित्सालय में करवाया जाए। दो चिकित्साधिकारी पोस्टमार्टम करेंगे जिनमें एक संभव होतो जिला चिकित्सालय का प्रभारी/या मुख्य हो। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी हो और सुरक्षित रखी जाए। 

अगर ऐसा नहीं हो, पुलिस ऐसा नहीं करवाए तब एनकाउंटर से संबंधित पीड़ित परिवार सेशन न्यायालय में अपना आवेदन कर सकता है और सेशन न्यायालय आगे की कार्यवाही करेगा।

राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री एनकाउंटर के समय जाग रही थी और उसने सोते हुए गृहमंत्री को जगवा कर आनंदपाल के इनकाउंटर में मारे जाने की बधाई दी।


आनंदपाल  अपराध के आरोपों के मुकदमों में फंसा हुआ था लेकिन एनकाउंटर के बाद उसका पोस्टमार्टम तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ही किया जाना चाहिए था।


आनंदपाल  अपराधों के आरोपों में घिरा हुआ था लेकिन राजस्थान सरकार तो अपराधी नहीं,सच्ची है। मुख्यमंत्री और गृह मंत्री सच्चे हैं तब उनको कानून का पालन करने में हिचक क्यों रही? 

गृह मंत्री ना जाने कितनी बार वक्तव्य दे चुके हैं कि कानून अपना काम करेगा, कानून ने अपना काम किया है,कानून अपना काम आगे करता रहेगा। 

 गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया  से एक बहुत बड़ा सवाल है कि आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर प्रकरण में कानून ने अपना काम क्यों नहीं किया? 

आनंदपालसिंह के एनकाउंटर के बाद पोस्टमार्टम कराने में पुलिस अधिकारियों की मनमर्जी कैसे चलाई गई?


 आनंदपाल का पोस्टमार्टम जिला चिकित्सालय चूरू में कराने के बजाए रतनगढ़ के सामुदायिक चिकित्सालय में क्यों करवाया गया?

सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों निर्णयों के अनुरूप कार्यवाही नहीं किए जाने पर जो पुलिस प्रशासन के अधिकारी दोषी हैं उनके विरुद्ध राजस्थान सरकार क्या कार्यवाही करेगी?

आनंदपाल सिंह तो एक कमरे में पुलिस के सैंकड़ों जवानों के घेरे में था तब अमावस की रात के अंधेरे में ही इन काउंटर जरूरी क्यों समझा गया जिसमें पुलिसकर्मियों को भी खतरे में डाला गया। रात के 5-7 घंटे ही बिताने थे,आगे की कार्यवाही सुबह की जा सकती थी जो अधिक सुरक्षित होती और पुलिसकर्मियों पर खतरा नहीं होता। आखिर क्या कारण रहे हैं?यह सब राज है?

इंग्लिश कोई कार्यवाही करती है तो अपने उचा दायक उच्चाधिकारी को सबसे पहले अवगत कराते हैं।दिशा-निर्देश लेते हैं।

इस मामले में गृह मंत्री को किसी प्रकार की सूचना पूर्व में नहीं दी गई और एनकाउंटर के बाद भी गृह मंत्री को सबसे पहले अवगत कराया जाना चाहिए था जो नहीं कराया गया। आखिर क्या कारण रहा है कि गृह मंत्री को अवगत नहीं करा कर सबसे पहले सूचना मुख्यमंत्री को दी गई?

 जिस अधिकारी ने मुख्यमंत्री को यह सूचना दी ,इन काउंटर से लेकर मुख्यमंत्री को सूचना देने वाले अधिकारी तक कोई कड़ी भी बनी होगी?लेकिन इसमें कुछ राज की आशंका तो है।

आनंद सिंह जब फरारी में था तब आरोप लग रहे थे कि उसे बड़े-बड़े सत्ताधारी राजनीतिज्ञों का संरक्षण मिला हुआ है। क्या आनंद सिंह को इसलिए मारना जरूरी था कि उन सत्ताधारी  राजनीतिज्ञों के चेहरे कभी भी सामने न आ सकें? लेकिन इस प्रकरण में आनंदपाल सिंह अकेला ही मारा गया है। उसके दो भाई जीवित हैं जो बहुत कुछ राज खोल सकते हैं। सच्चाई सामने आ सकती है। जिन लोगों के नाम अभी तक सामने नहीं आए वे नाम सामने आ सकते हैं इसलिए CBI जांच की आवश्यकता है।  यह मांग पूरे राजस्थान से उठ रही है इस मांग को पूरा किया जाना चाहिए। राजस्थान सरकार व  राजस्थान का पुलिस प्रशासन दोषी नहीं है तो उसे सीबीआई जांच का डर क्यों है?


(यहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश फोटो दिया जा रहा है)




बुधवार, 28 जून 2017

आनंदपाल का अंतिम संस्कार पुलिस कर देगी यदि परिजनों ने नहीं लिया शव

पुलिस प्रशासन ने आनंदपाल की मां निर्मल कंवर, पत्नी राज कंवर, मामा अमरसिंह व साला बलबीर सिंह को शव लेने के लिए 27 जून को नोटिस जारी किया है। नोटिस प्राप्त होने के 24 घंटे में अगर परिजन शव नहीं लेते हैं तो  पुलिस की ओर से शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा। रतनगढ़ डीएसपी नारायणदान ने नोटिस में लिखा है कि मृतक आनंदपाल सिंह का शव राजकीय जालान अस्पताल की मोर्चरी के कोल्ड स्टोरेज में रखा हुआ है।
शव का 25 जून को बलबीर सिंह (साला) की उपस्थिति में पंचनामा तैयार कर मेडिकल बोर्ड की टीम से पोस्टमार्टम करवाकर शव अंतिम संस्कार के लिए उसी दिन आपको सुपुर्द किया गया था। मगर आप शव को लावारिश हालत में छोड़कर चले गए। मंगलवार तक भी शव को प्राप्त नहीं किया है। शव मोर्चरी के कोल्ड स्टोरेज में रखा हुआ है।
शव को सही स्थिति में रखने के बावजूद भी शव का क्षरण होने लगा है। जिसकी वजह से वातावरण दूषित होने लगा है। इस संबंध में पीएमओ डा. राजेंद्र गौड़ ने रतनगढ़ थानाधिकारी को पत्र भी लिखा है कि ऐसी स्थिति में हिंदू धार्मिक रीति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार नहीं किया जाना शव का अपमान है।
नोटिस में स्पष्ट आदेश दिए हैं कि नोटिस प्राप्त होने के 24 घंटे में शव प्राप्त करें अन्यथा राजस्थान पुलिस नियम 1965 के नियम 6.36 मृत्योपरांत परीक्षण (पोस्टमार्टम) और पुलिस की ओर से की जाने वाली कार्रवाई के उप नियम 6  के अंतर्गत दाह संस्कार पुलिस की ओर से विधि सम्मत तरीके से किया जाएगा।
रतनगढ़ में लगाई धारा 144
एपी के परिजनों को नोटिस जारी करने के बाद एसडीएम ने कस्बे में धारा 144 लागू कर दी है।
इनका कहना है
नोटिस तामिल करवाने के लिए व्यक्ति को भेज दिया गया है। यदि नोटिस प्राप्ति के 24 घंटे बाद भी परिजन शव नहीं लेते है तो पुलिस स्वयं के स्तर पर अंतिम संस्कार करेगी।

सूरतगढ़ इलाके में बुधवार दिन में बन रहा है मौसम सुहाना



फोटो- करणीदानसिंह राजपूत



पत्रकारों को भूखंड आवंटन: मुख्य नियम जानिए:


विशेष- करणीदानसिंह राजपूत -

नगर निकाय संस्थाओं की सीमा में इन नियमों से आवंटित भूखंड सही आवंटन में आते हैं।
इन नियमों को छुपा कर,अनदेखी कर आवंटित किए गए और लिए गए, गलत झूठी,फर्जी दस्तावेजों से प्राप्त भूखंड भ्रष्टाचार की श्रेणी में आते हैं। 






निकाय के अध्यक्ष,सदस्य,आवंटन कमेटी के सदस्य पत्रकारों को भूखंड आवंटन में नियमों की अनदेखी कर कार्य करते हैं ताकि पत्रकार खुश रहें,लेकिन इसमें लेने और देने वाले दोनों ही कानून की नजर में दोषी और दंड के पात्र होते हैं।

आजकल कई स्थानों पर पत्रकारों को आवंटित भूखंडों पर आरोप लगे हैं तथा कई स्थानों पर मुकद्दमें भी हो चुके हैं।
यहां पर एक महत्वपूर्ण सवाल पैदा होता है कि भूखंड प्राप्ति के लिए कोई पत्रकार बन कर आवंटन का आवेदन करता है या करती है,या नियमों को पूर्ण नहीं करता अथवा नहीं करती है तब उनको नियम विरूद्ध आवंटन कर अधिकारी क्यों कानून के दायरे में आ कर मुकद्दमों में फंसते हैं और अपनी लाखों रूपए की नौकरी को दांव पर लगाते हैं? कुछ लोगों का घर बसाने के चक्कर में अपना बसा बसाया घर उजाडऩा और अपने परिवार की जिंदगी को खराब करना मूर्खता ही कही जाएगी।

निकाय बोर्डों के अध्यक्ष व सदस्य स्थानीय होते हैं वे लिहाज से अथवा किसी लाभ के लिए गलत कार्य करने को तत्पर हो सकते हैं,लेकिन अधिकारियों को जो साल दो साल के लिए एक स्थान पर आते हैं,उनको फर्जीवाड़ा करने की जरूरत क्यों रहती है?

up date on 29-12-2015.
up date on 3-5-2016. 
Up date on 22-1-2017.
Up date on 28-6-2017.


निहालचंद पर यौन शोषण आरोप में पीड़िता के रिवीजन याचिका पर सुनवाई शुरू




एक विवाहिता ने सन 2011 में अपने पति देवर निहालचंद मेघवाल सहित कुल 17 लोगों पर यौन शोषण का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट यानी एफ आर लगा दी थी। इस मामले में जयपुर में  DJ कोर्ट के साथ 4 अदालतों में सुनवाई हो चुकी है। 

अब पीड़ित महिला की पेश पुनरीक्षण याचिका पर 27 जून 2017 को सुनवाई शुरू हुई  है। 

पीड़ित महिला ने 17 लोगों के विरुद्ध जयपुर के वैशाली नगर थाने में 17 नवंबर 2011 में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने उसे झूठा मानते हुए थाने में एफ आर लगा दी थी। अब रिवीजन याचिका की सुनवाई के समय अधिवक्ता ए. के.जैन ने अदालत से जल्दी सुनवाई की प्रार्थना की है।

 इस प्रकरण के अन्य समाचारों के लिए क्लिक करें यह शीर्षक


देह शोषण जयपुर मुकद्दमें में 17 आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग प्रदर्शन:विशेष खबर-करणीदानसिंह राजपूत:

मंगलवार, 27 जून 2017

मोदी का मौसम खुशगवार आने वाला है









जोश में लग रहे हैं नारे
मोदी की लहर है।
मोदी का तूफान है।

 
दबी पिटी मरी मरी सी,
आवाजें भी आ रही हैं।
मोदी की कोई लहर नहीं।

मोदी का कोई तूफान नहीं।
 
वे दबे पिटे मरे मरे से लोग भी
कितना सच्च कह रहे हैं,
जो मोदी की लहर और
तूफान को नकार रहे हैं।


मोदी के सांस से
उठने लगे हैं जो कम्पन्न
उनसे ही घबरा रहे हैं।
वो सच्चे हैं अपने मन में
ना मोदी की लहर है
ना मोदी का कोई तूफान है।

 
उमड़ी घटाएं 

चमकती गर्जती बिजली
सुगंधित पवन,
धरा का कण कण हर्षाता,

यह जो आने के संकेत हैं,
मोदी के खुशगवार मौसम के।

 
मोदी मौसम में सब पनपेंगे।
छोटा हो चाहे बड़ा हो।
चाहे शहर वाला हो,
चाहे छोटे गांव वाला हो।
गरीब किसान मजदूर हो या 
उद्योग चलाने वाला।

 
लहर और तूफान तो

आकर निकल जाते हैं। 
थोड़े समय हर्षाते हैं।
मोदी मौसम रहेगा बरसों,
आगे यही विधान है।


मोदी का मौसम
खुशगवार आने वाला है

- करणीदानसिंह राजपूत -

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 20-4-2014.
अपडेट 27-6-2017.
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अजमेर में भी उठी आनंदपाल एनकाउंटर सीबीआई जांच की मांग

27-6-2017.

आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग अब प्रदेश के दूसरे इलाकों में भी जोर पकड़ने लगी है। 


राजपूत समाज के लोगों ने मंगलवार को अजमेर के कुंदन नगर स्थित छात्रावास में राजस्थान क्षत्रिय महासभा, राजपूत विकास परिषद, जयमल ट्रस्ट पुष्कर, करणी सेना सहित अन्य राजपूत समाज के संगठनों के पदाधिकारियों की बैठक हुई। 


उन्होंने आनंदपाल के एनकाउंट की निंदा की और इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग का राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन जिला कलक्टर को सौंपा। इस ज्ञापन में पांच मांगें और की गई हैं जिनमें बीकानेर जेल में आनंदपाल पर किए हमले की सीबीआई जांच, आनंदपाल की अंत्येष्टि में उसके भाइयों को शामिल होने की इजाजत देने आदि की मांग की गई है। 

आनंदपाल एनकाउंटर का मामला सीबीआई को देने की मांग :राजनाथ सिंह से मिले

आनंदपाल एनकाउंटर की जांच सीबीआई से कराने समेत छह मांगों को लेकर क्षत्रिय महासभा के प्रतिनिधि और आनंदपाल के वकील ए.पी. सिंह ने मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की।

राजनाथ सिंह और प्रतिनिधिमंडल के बीच यह मुलाकात करीब 15 मिनिट तक हुई। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान पुलिस की कार्रवाई को गैर जिम्मेदारान बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि आनंदपाल को सरेंडर करने का मौका दिए बिना उसे मार गिराया।

उन्होंने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने, दाह संस्कार में उसके भाइयों को शामिल होने देने, परिजनों पर दबाव बनाने के लिए पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई को रोकने, परिजनों पर लगाए कथित झूठे मुकदमें वापस लेने आदि मांगों का पत्र सौंपा।

आनंदपाल एनकाउंटर के मामले की जांच को लेकर आनंदपाल के परिजनों और क्षत्रिय समाज की ओर से सीएम वसुंधरा राजे को भी पत्र भेजा गया है। 


इसमें भी उन्होंने आरोप लगाया है कि आनंदपाल के दाहसंस्कार में आने वाले समाज के लोगों पर पुलिस द्वेषपूर्ण कार्रवाई कर रही है। उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है। इस पत्र में उन्होंने 

करीब ढाई साल पहले बीकानेर जेल में बंद आनंदपाल पर की गई फायरिंग की भी सीबीआई जांच कराने की मांग की है।


उन्होंने एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की


सोमवार, 26 जून 2017

सूरतगढ़ में 26 जून की शाम का नयनाभिराम दृश्य

 फोटो -करणीदानसिंह राजपूत





"राजस्थानी मांय रामलीला" पोथी रो विमोचन

राजस्थानी साहित्यकार मनोज स्वामी री नुई रचना "राजस्थानी मांय रामलीला" रो विमोचन रविवार 25 जून  नै अठै होयो। 

 विमोचन समारोह का खास पावणा राजस्थान धरोहर प्रन्यास रा अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत विमोचन करता थका कहयो, राजस्थानी केवल भाषा ही नहीं है बल्कि करोड़ां राजस्थानियां री आस्था है। इण अवसर मांय साहित्यकार डॉक्टर राजेंद्र सिंह बारहट जोधपुर,चेतन स्वामी डूंगरगढ,प्रमोद शर्मा बीकानेर मौजूद रहया। इण अवसर मांय राजनीतिक सामाजिक संगठनां रा पदाधिकारी अर कार्यकर्ता भी आपकी उपस्थिति दर्ज करवाई। विधायक राजेंद्र सिंह भादू पूर्व विधायक हरचंद सिंह सिद्धू इण मौके मान्य सामल होया। राजस्थानी साहित्यकार मनोज स्वामी राजस्थानी मांय रामलीला पोथी रो आपरै शब्दां मांय बखान कर्यौ।






भाजपा नेता चाहते हैं राजस्थान में 2018 में भाजपा हारे

जयपुर 26-6-2017.

आम आदमी पार्टी ने रविवार 25 जून को सिविल लाइंस क्षेत्र में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया। 

 पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने कार्यकर्ताओं में जोश भरने का प्रयास किया। साथ ही राजस्थान में आप को भाजपा व कांग्रेस का विकल्प बताया।

सम्मेलन के बाद विश्वास ने पत्रकारों के समक्ष दावा किया, भाजपा के दिल्ली में बैठे नेता चाहते हैं कि भाजपा राजस्थान में 2018 का विधानसभा चुनाव हारे। प्रदेश में भाजपा 5 धड़ों में बंट गई है। घनश्याम तिवाड़ी जैसे वरिष्ठ नेता सड़क पर उतर रहे हैं, सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं। इससे जाहिर है कि चुनाव में भाजपा की हार तय है। 

वहीं, कांग्रेस में तीन धड़े हैं। कांग्रेस में पूर्व नेतृत्व की ही अनदेखी हो रही है। ऐसे में लोग आप की ओर देख रहे हैं। आप राजस्थान में मजबूत विकल्प बनकर उभरेगी।

दिल्ली में आप में चल रही अंदरूनी लड़ाई पर विश्वास ने कहा, जो आरोप लगा रहे हैं, वे पार्टी से निष्कासित हैं। उनके आरोपों का जवाब नहीं दिया जा सकता। 

सत्रह विधायकों की सदस्यता के मामले में उन्होंने कहा, यह सरकार का मामला है, संगठन का नहीं। इसका जवाब दिल्ली सरकार दे चुकी है।

कार्यकर्ता सम्मेलन में विश्वास ने कहा, पार्टी पूर्ण शराबबंदी का समर्थन नहीं करती। लेकिन पार्टी की मांग है कि सरकार जहां भी शराब की दुकान खोले, उससे पहले वहां शिक्षा, चिकित्सा, बिजली और पानी का पुख्ता इंतजाम करे।

प्रदेश प्रवक्ता देवेन्द्र शास्त्री ने बताया कि कार्यकर्ता सम्मेलन में किसानों के प्रत्येक आंदोलन के समर्थन का निर्णय किया गया। अगस्त के पहले सप्ताह में किसान रैली निकाली जाएगी। छह माह तक संगठन को मजबूत करने का काम चलेगा। कॉलेजों के छात्रसंघ चुनावों में भी आप का अग्रिम संगठन मैदान में उतरेगा। 

रविवार, 25 जून 2017

राजस्थान में ओसियां में बन रहा है 25 लाख रुद्राक्ष से शिवलिंग

राजस्थान में जोधपुर जिले के ओसियां कस्बे में विश्व का अनूठा और सबसे उंचा रूद्राक्ष से बना शिवलिंग तैयार हो रहा है। इसके बनाने में 25 लाख रूद्राक्ष इस्तेमाल होंगे।

रुद्राक्ष नेपाल के विराट नगर एवं नेपाल गंज से मंगवाए हैं। इस शिवलिंग की ऊंचाई सवा तेतीस फुट होगी।

आयोजन समिति के रमेश कुमार सोनी ने बताया कि यह शिवलिंग तीन लाख स्क्वायर मीटर जगह में बनाया जा रहा है।


धर्मपुर (गुजरात) के 160 कारीगर इसे तैयार करने में लगे हैं। यहां 9 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) से 17 जुलाई (अष्टमी) तक महारुद्राभिषेक, महारुद्र यज्ञ तथा शिव महापुराण कथा का आयोजन होगा। इस शिवलिंग के निर्माण का काम अप्रेल से शुरू हो गया था।


दो महीने तक इन रुद्राक्ष को साफ किया गया। यह भी देखा गया कि कहीं कोई रूद्राक्ष खंडित तो नहीं है। इसके बाद इन सभी रूद्राक्ष की मालाएं बनाई गई। जो शिवलिंग बनाने में काम आएंगी।


फिलहाल शिवलिंग की शक्ति पीठ का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसमें करीब 40 हजार ईंटे लगी है। शिवलिंग तक पहुंचने के लिए अलग से प्लेटफार्म बनाया जाएगा।


आयोजन में महाशिवलिंग का अभिषेक कैलाश मानसरोवर के नाम से होगा। साथ ही रूद्राक्ष के पौधे का पूजन भी किया जाएगा।


एनकाउंटर के बाद पैतृक गांव सांवराद में तनाव: पुलिस पर पथराव

25-6-2017.

गैंगस्टर आनंदपाल के एनकाउंटर के बाद उसके पैतृक गांव लाडनूं के सांवराद में तनाव बना हुआ है। बड़ी संख्या में उसके समर्थक जुट गए हैं। वहां पर पुलिस टीम पर भी हमला किया गया है। जानकारी मिली है कि गांव में कहीं हवाई फायर भी किए गए हैं। 

आनंदपाल की मौत की खबर सुनकर आसपास से बड़ी संख्या में आनंदपाल के समर्थक और रिश्तेदार गांव पहुंचने लगे,वहीं उसके गांव में लोगों ने पुलिस और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। बताया गया है कि दोपहर में वहां हजारों की संख्या में लोग पहुंच चुके थे और वे सरकार तथा पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।


इस दौरान पुलिस टीम पहुंची तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने पुलिस पर पथराव कर दिया और पुलिस को जान बचाकर गांव से भागना पड़ा। इसमें कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें भी आई है। इससे पहले आनंदपाल के परिजनों ने आनंदपाल के एनकाउंटर मामले में सीबीआई जांच की मांग की और आनंदपाल के शव को लेने से भी इंकार कर दिया।


आनंदपाल के परिजनों ने मांग की है कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए उसके दोनों भाई देवेन्द्र और रुपेन्द्र को उसकी अंतिम यात्रा में शामिल किया जाए। 


श्रीगंगानगर जिले के आपातकाल 1975 के बंदी क्रांतिकारियों को पेंशन शुरू:


स्वर्गवास हो चुके क्रांतिकारियों के आश्रितों को पेंशन:
पेंशन जनवरी 2014 से मिलेगी।
इंदिरागांधी के शासन की क्रूरता के विरूद्ध आवाज उठाई:राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में जेल में ठूंस दिया गया था:
विशेष खबर - करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़, 22 अक्टूबर 2014.
अपडेट 25-6-2017.
राजस्थान की भाजपा वसुंधरा राजे सरकार ने आपातकाल के बंदी सूरतगढ़ क्रांतिकारियों को पेंशन शुरू कर दी है। जिला कलक्टर आर.एस.जाखड़ श्रीगंगानगर ने 21 अक्टूबर को समिति की बैठक कर आदेश जारी कर दिए। जिनकी पेंंशन शुरू की गई है उनके नाम निम्र हैं।
सूरतगढ़
1.गोपसिंह सूर्यवंशी पूर्व पार्षद निवासी लाइनपार वार्ड नं 23,सूरतगढ़। पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत के छोटे भाई हैं। स्व.गोपसिंह की पत्नी रोमिला को पेंशन मिलती है।
2.सुगनपुरी वार्ड 13 सूरतगढ़
3.महावीर प्रसाद तिवाड़ी सूरतगढ़
4.नेमीचंद छींपा पूर्व पार्षद हैं। सूरतगढ़
5.बलराम वर्मा कांगे्रस नेता लाइन पार रहते हैं। सूरतगढ़
6.हनुमान प्रसाद मोट्यार  सूरतगढ़
7.लक्ष्मण शर्मा माकपा नेता हैें। सूरतगढ़

8. लीलाधर सेन रामदेव कॉलोनी, श्री गंगा नगर।
9.रामस्वरूप मांझू रिड़मलसर।
10.श्रीमती शांतिदेवी पत्नी स्व.उदाराम चक 4 जेएसडी बुगिया।
11.रामकुमार पुत्र मोहनलाल कीकरवाली रायसिंहनगर। आंदोलन में सूरतगढ़ में गिरफ्तारी दी थी।
12.श्रीमती कैलाशवंती पत्नी स्व.रामप्रकाश सूढ़ा वासुदेवनगर श्रीगंगानगर।
13. मदनलाल श्रीगंगानगर।
14. श्रीमती सावित्री पत्नी स्व.श्रीराम शर्मा दुर्गा विहार श्रीगंगानगर।
15.श्रीमती प्रकाश देवी पत्नी मिल्ख राज श्रीगंगानगर।
16. भंवरलाल भार्गव देवनगर श्रीगंगानगर।
17. एडवोकेट हुलासमल चौपड़ा  अग्रसेन नगर श्रीगंगानगर।
18.मंजुबाला टांटिया पत्नी गोविंदराम टांटिया आनन्द विहार श्रीगंगानगर।
19.श्रीमती सरोज चुघ स्व.श्याम चुघ महाराणा प्रताप कॉलोनीश्रीगंगानगर। श्याम चुघ पत्रकार थे।
20.गंगाराम अरोड़ा जवाहर नगर श्रीगंगानगर।
21.द्वारका प्रसाद पुरानी धानमंडी श्रीगंगानगर।
22.लक्ष्मीनारायण कालड़ा मुकर्जीनगर श्रीगंगानगर।
23.श्रीमती लक्ष्मीदेवी पत्नी ओमप्रकाश अग्रवाल अशोकनगर श्रीगंगानगर।
24.दीनदयाल अरोड़ा आदर्शनगर श्रीगंगानगर।
25.श्रीमती त्रिवेणी देवी पत्नी स्व.मदनलाल श्रीबिजयनगर। मदनलाल ने भी आंदोलन में सूरतगढ़ में गिरफ्तारी दी थी।
विस्तृत जानकारी कलक्टर श्रीगंगानगर कार्यालय से प्राप्त हो सकती है।

इंदिरा गांधी के राज के अत्याचार भरे सच : 37 साल पहले लगाया था आपातकाल

राजस्थान में भाजपा के राज में वसुंधरा के मुख्यमंत्री काल में 17 सितम्बर 2008 को असाधारण आदेश राजपत्र में प्रकाशित किया गया। इस आदेश पर कार्य शुरू हो गया। आपातकाल के पीडि़तों की ओर से प्रमाणपत्र आदि दे दिए गए, मगर पेंशन लागू होने से पहले ही चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई और सरकार कुछ कर नहीं पाई। इसके बाद में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार बनी जिसने इस योजना को लागू करने से मना कर दिया।

सामयिक टिप्पणी: तीखे तेवर

31-10-2011.

अपडेट 25-6-2017.

इंदिरा गांधी के राज के अत्याचार भरे सच : 42 साल पहले लगाया था आपातकाल

आपातकाल की पीड़ाओं में  हजारों परिवार खत्म हो गए और जो बाकी हैं वे पीड़ाएं भोग रहे हैं

राजस्थान में 2008 में पेंशन लागू करने की योजना बनाई गई, मगर  चुनाव घोषणा की आचार संहिता लागू होने से अटकी और बाद में आई कांग्रेस सरकार  ने  लागू नहीं की

- करणीदानसिंह  राजपूत

इंदिरा गांधी की हत्या के दिवस पर संपूर्ण देश में अखबारों में विज्ञापनों के माध्यम से केन्द्र व राज्य सरकारों की ओर से सरकारी स्तर पर परंपरागत श्रद्धांजलि अर्पित की गई है। उनके अनुगामी जिसमें केवल कांग्रेस है या उसके संगठन के सत्ताधारियों,पदाधिकारियों के द्वारा भी श्रद्धाजलि देने के कार्यक्रम 31 अक्टूबर को यत्र तत्र चलेंगे जिनके समाचार भी परंपरागत अखबारों में अगले दिन छपे हुए मिलेंगे।       

इंदिरा गांधी के राज में सब कुछ वह नहीं हुआ जो सराहा जाए। सन 1975 में 25 जून को आपातकाल लागू कर संपूर्ण देश को जेल बना दिया गया था उसकी आलोचना संपूर्ण संसार में हुई थी। बहुत दर्दनाक हालात में लोग गुजरे। हजारों लोग तबाह हो गए। अनेक लोग मौत के शिकार हुए अनेक के कारोबार ठप हुए तथा बाद में पनप ही नहीं सके।

    देश के कई लेखकों ने अपने लेखों में लिखा है कि आपातकाल के घावों को समय ने मरहम लगाई है। लेकिन यह सच नहीं है। केवल शब्दों में लिख देने मात्र से मरहम नहीं लग पाती। उन लेखकों को मालूम नहीं कि अनेक परिवार वे पीड़ाएं अभी भी भोग रहे हैं। जिनके रोजगार बंद हो गए, कारोबार उजड़ गए वापस पनपे ही नहीं,उनके मरहम कैसे लग गया? आपातकाल लागू करने की तिथि को संैतीस साल हो चुके हैं। आपातकाल को भोगने वाले लोग करीब सतर प्रतिशत तो अब इस संसार में नहीं है, जो हैं वे सब 50 साल से उपर की आयु में यानि कि वृद्धावस्था में है। जो जीवित हैं वे वृद्धावस्था में भयानक अभावों व कष्टों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं और जो संसार से विदा हो चुके हैं उनके परिवार कष्टों भरा जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

यह मान भी लें कि उनको तीन साल बाद बदलाव के बाद आने वाली सरकारें लाभ दे भी दें तो उस बदलाव तक अनेक लोग और कालकल्वित हो चुके होंगे। इस पीड़ा को कोई समझ नहीं पा रहा है। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है जिसने यह योजना लागू करने से मनाही करदी। हालांकि आपातकाल की पीड़ाएं और जेलों के कष्ट भोगने वाले हजारों लोग कांग्रेस में भी है, जो किसी न किसी रूप में उस समय पुलिस व सिविल प्रशासन की मनमानियों का शिकार हुए। बिना किसी अपराध के केवल अधिकारियों के साथ किसी कारण से अनबन थी तो उनको भी जलों में ठूंस दिया गया था। उस समय तो कोई सुनने वाला ही नहीं था। शांति भंग जैसे साधारण मामले बना कर भी लोगों को जेल पहुंचा दिया गया। इस प्रकार के मामले तो प्रशासनिक अदालतें ही सुनती है और उस समय प्रशासन तो बौना हो चुका था।

    राजस्थान में आपातकाल में सन 1975-77 में मीसा,डीआईआर और भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता  की धाराओं 107-151 के तहत बंदी और नजरबंद किए गए राजनैतिक कार्यकर्ताओं व सत्याग्रहियों के लिए लोकतंत्र रक्षा मंच कार्य कर रहा है। इस मंच का गठन राजनैतिक बंदियों की ओर से जनतांत्रिक अधिकारों के लिए किया गया है। मंच के अध्यक्ष कौशल किशोर जैन की ओर से राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर बैंच में एक याचिका केस नं 7176-2010 प्रस्तुत की हुई है जिसके पैरवीकार प्रसिद्ध वकील भरत व्यास हैं।

आपातकाल के 35 वर्ष पूर्ण होने पर आजादी की तीसरी लड़ाई का दर्जा देते हुए जयपुर में एक सम्मेलन भी आयोजित किया गया था। इसके बाद भी एक कार्यक्रम हुआ। मंच के महा सचिव फरीदुल्लाह कोटा राजस्थान निरंतर कार्यरत हैं।

 सामयिक लेख के लिखने का एक ही कारण है कि इंदिरागांधी को आयरन लेडी का संबोधन देते हुए जो श्रद्धांजलि दी जा रही है, महान बताया जा रहा है। वहां पर उनके द्वारा लादे गए आपातकाल के कलंक को भी याद रखा जाए जिसमें आजाद भारत में लोगों की आजादी छीनी गई और इसको कभी भुलाया नहीं जा सकता और आने वाली कोई भी सरकार इतिहास के इन पृष्ठों को चाहकर भी हटा नहीं सकती।

- स्वतंत्र पत्रकार,

सूरतगढ़।

मोबा.  94143 81356
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अपातकाल लोकतंत्र सेनानियों को केंद्र वह राज्य सरकारें सम्मान व सहायता करें

दिल्ली 21मार्च 2017.

अपडेट 25 जून  2017.

केन्द्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कहा है कि वर्तमान केन्द्र सरकार और कई राज्य सरकारें आपातकाल के दौरान त्याग और बलिदान करने वाले लाखों कार्यकर्ताओं के सहयोग से बनी है। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की बहाली के लिए जिन कार्यकर्ताओं ने त्याग और बलिदान किया उस पीढ़ी को यथोचित सम्मान और सहायता देने का फर्ज वर्तमान केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों का है। सरकार लोकतंत्र सेनानियों को सभी प्रकार की आर्थिक और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवायेगी। श्री गडकरी  ताल कटोरा स्टेडियम में लोकतंत्र सेनानियोें के अखिल भारतीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि थे। 


श्री गडकरी ने कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र सेनानियों को अनेक जुल्म और ज्यादतियां सहनी पड़ी थी, अनेक लोगों की जेलों में मौत हो गयी थीं, तत्कालीन जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हजारों कार्यकर्ताओं ने 1975 से 1977 तक आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष किया था जिसके फलस्वरूप देश में पुनः लोकतंत्र कायम हुआ। आज भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र और राज्यों में जो सरकारें हैं वे राष्ट्रवाद की विचारधारा की जीत के परिणामस्वरूप है। हमारी सरकारें भारत के निर्माण के लिए सदैव प्रयत्नशील रहेंगी। लोकतंत्र सेनानियों की उस पीढ़ी ने संघर्ष और त्याग किया। अनेक युवकों ने अपनी जवानी को भी कुर्बान कर दिया। अनेक कार्यकर्ताओं ने भूमिगत रहकर लोकतंत्र की लड़ाई में अपना योगदान दिया। उनकी तपस्या को भी सरकार सम्मानित करेगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री कैलाश सोनी ने कहा कि आपातकाल के दौरान लाखों युवकों ने त्याग और बलिदान किया है। लोकतंत्र सेनानी वह पीढ़ी है जिसकी प्रमाणिकता असंदिग्ध है। श्री सोनी ने कहा कि केन्द्र सरकार आपातकाल के दौरान जेलों में बन्द और भूमिगत रहने वाले कार्यकर्ताओं को सूचीबद्ध कर उन्हें सम्मानित करे जिससे भावी पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सके।

केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि जब-जब देश की संस्कृति और सभ्यता पर आक्रमण हुआ, देश में अत्याचार हुए तब-तब भारत माता ने ऐसे पुत्रों को जन्म दिया जिन्होंने अन्याय और अत्याचारों से मुक्ति दिलायी। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की हत्या का प्रयास किया गया तब उसकी रक्षा के लिए लोकतंत्र सेनानियों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। आज जो परिस्थिति है उसमें कभी भी देश में आपातकाल नहीं लगाया जा सकता। लोकतंत्र बना रहे इसके लिए जरूरी है कि आपातकाल की कड़वी यादें बनी रहें। आपातकाल की संघर्ष गाथाओं को याद रखकर भावी पीढी को अवगत कराते रहें जिससे भावी पीढ़ी को आपातकाल के संघर्ष की गाथा याद रहे। लोकतंत्र सेनानियों के प्रयासों से ही देश में लोकतंत्र बहाल हुआ था। 


केन्द्रीय सूचना और प्रोद्योगिकी मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने 1975 से 1977 के बीच में आपातकाल के दौरान चलाये गये दमन और आतंक की कहानी सुनायी। उन्होंने स्वयं आपातकाल में लोकतंत्र की बहाली के लिए आंदोलन किया और जेल में बन्द रहे। आपातकाल के विरूद्ध काम करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को प्रणाम करते हुए कहा कि  आप में वह ताकत और जोश है जिसने हिन्दुस्तान की तत्कालीन सरकार को भी बदल दिया था। 

 भविष्य में भी देश को जागृत करते रहने के लिए लोकतंत्र सेनानी कार्य करते रहेंगे।केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री श्री प्रकाश जावडे़कर ने कहा कि आपातकाल के इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विचार किया जायेगा।


केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने घोषणा की कि लोकतंत्र सेनानियों को सी.जी.एच.एस. की तरह स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवायीं जायेंगी। क्योंकि ज्यादातर लोकतंत्र सेनानी अधिक उम्र के हैं। 


लोकतंत्र सेनानी संघ ऊके सम्मेलन में संघ के उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने,  कन्दकुमार चेन्नई, सचिवगण  सूर्यमणि सिंह रांची,  रविन्द्र कासखेडिकर नागपुर,  अजय बिश्नोई, दिल्ली के राजन ढींगरा धर्मवीर शर्मा, हेमन्त बिश्नोई, कोषाध्यक्ष संतोष शर्मा कार्यालय सचिव  सुरेश अग्रवाल सहित देश के 18 राज्यों से करीब चार हजार लोकतंत्र सेनानी उपस्थित थे।



आनंदपाल की कुख्यात कहानी का अंत 21 लोगों को था जान का खतरा

राजाराम मील विधायक हनुमान बेनीवाल सहित 21 लोगों को जान को खतरा था।

जयपुर. 25-6-2017.


करीब डेढ़ साल से फरार चल रहा कुख्यात बदमाश आनंदपाल सिंह आखिरकार मारा गया। शनिवार रात करीब 11:25 बजे एसओजी ने चूरू के मालासर में मुठभेड़ के दौरान उसे मार गिराया। मुठभेड़ के दौरान आनंदपाल और उसके दो साथियों ने एके 47 व अन्य हथियारों से 100 राउंड फायर किए। इस दौरान आनंदपाल को छह गोलियां लगी। एसओजी के सीआई सूर्यवीर सिंह के हाथ में फ्रेक्चर आया, जबकि पुलिसकर्मी सोहन सिंह गोलियां लगने से घायल हो गया। आनंदपाल के पास से 2 एके-47 व 400 कारतूस मिले हैं। 

एसओजी ने आनंदपाल के दो भाइयों देवेंद्र उर्फ गुट्‌टू और विक्की को हरियाणा के सिरसा से गिरफ्तार किया था।


मालासर में छिपा था


पूछताछ में पता चला कि आनंदपाल मालासर में श्रवण सिंह के घर पर छिपा हुआ है। डीजीपी मनोज भट्ट ने बताया कि पिछले डेढ़ माह से एसओजी के आईजी दिनेश एमएन के सुपरविजन में एडिशनल एसपी संजीव भटनागर हरियाणा में डेरा डाले हुए थे। इस दौरान संजीव भटनागर को आनंदपाल के भाई विक्की व देवेन्द्र को सिरसा में दबिश देकर शाम छह बजे गिरफ्तार किया। इसके बाद एसओजी की एक टीम करण शर्मा के नेतृत्व में चूरू जिले के मालासर गांव में पहुंची। यहां आनंदपाल दो दिन पहले आया था। एसओजी ने घेराबंदी कर आनंदपाल को जीवित पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह छत पर जाकर पुलिस पर फायरिंग करने लगा। आनंदपाल ने करीब 100 राउंड फायर किए। एसओजी की जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।




21लोगों को जान का खतरा था


इंटेलीजेंस ने सरकार को रिपोर्ट भेजी थी कि आनंदपाल के खिलाफ दर्ज केसों में बने गवाह, विरोधी राजू ठेहट की गैंग का सहयोग और उसका विरोध करने वाले लोगों की जान को खतरा है। इंटेलीजेंस के अफसरों का मानना था कि आनंदपाल के फरार होने के बाद कई नेताओं को भी खतरा था। 

इनमें विधायक 1.हनुमान बेनीवाल, 2.चेतन डूडी, 3.बजरंगलाल फोगड़ी,4. गोपालराम, 5.रामप्रकाश, प्रमोद,6. इंद्रचंद जाट, 7.एडवोकेट रामेश्वर भाकर, 8.चूरू निवासी वीरेन्द्र कुमार, 9.सीताराम,10. रामनारायण 11

रामनिवास, 12.बीकानेर निवासी हनुमान जाखड़, 13.ओमप्रकाश ठेहट, 14.सीकर निवासी हरिराम रणवां, 15.ओमप्रकाश जिगर, 16.दिनेश, 17.मनोज आेला, 18.रामचन्द्र और 19.जयपुर निवासी राजाराम मील 20.गगन शर्मा आदि के नाम शामिल थे। इन सभी पर कभी आनंदपाल या फिर उसकी गैंग के सदस्य कभी भी जानलेवा हमला कर सकते थे। 

5 राज्यों में 12 ठिकाने


आनंदपाल के पांच राज्यों में 12 ठिकाने थे। आनंदपाल लूट, डकैती, गैंगवार, हत्या जैसे 24 मामलों में अपराधी था।


पेशी के दौरान भागा था


3 सितंबर 2015 को अजमेर पुलिस आनंदपाल को नागौर के लाडनूं में पेशी पर लेकर आई थी। पेशी से लौटते समय योजना के अनुसार परबतसर के पास बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी और आनंदपाल, श्रीवल्लभ व सुभाष मूंड को छुड़ाकर ले गए। आनंदपाल पुलिस की एक एके-47 भी अपने साथ ले गया था।


बेटी की भूमिका भी संदिग्ध


 एसओजी ने आनंदपाल की बेटी की भूमिका को भी संदिग्ध माना था। अब एसओजी आनंदपाल की बेटी को भी गिरफ्तार कर सकती है। आनंदपाल की बेटी ने जीवनराम गोदाराम हत्याकांड के गवाहों को मैनेज करने के लिए अपने पिता के साथ मिलकर फरारी की रणनीति बनाई थी। इसके बाद वह महेन्द्र सिंह व केसर सिंह के माध्यम से कमांडो शक्ति सिंह से मिली थी। इसके बाद आनंदपाल की गैंग के सदस्यों ने योजना बनाई थी। इसके लिए शक्ति सिंह ने पैसे लिए थे।


एसओजी पहुंचती उससे पहले आनंदपाल गायब हो जाता


- फरारी के पांच माह बाद नागौर पुलिस ने आनंदपाल का पीछा किया, लेकिन वह कमांडो खूमाराम पर फायरिंग कर भाग गया। फायरिंग से खुमाराम की मौत हो गई थी।

- एसओजी ने आनंदपाल के साथी को भरतपुर से गिरफ्तार किया था। आनंदपाल तब ग्वालियर में था। एसओजी कुछ घंटों बाद ग्वालियर उसके ठिकाने पर पहुंची तो वह भाग गया।

- जोधपुर के फलौदी इलाके में एक माह पहले एसओजी ने दबिश दी, लेकिन आनंदपाल एक दिन पहले ही वहां से भाग गया। ऐसे में एसओजी ने शरण देने वाले आरोपियों को  गिरफ्तार किया।

- बीकानेर अमनदीप सिंह के फार्म हाउस से पुलिस व एसओजी की दबिश से तीन दिन पह पबले आनंदपाल भाग गया था। एेसे में एसओजी को अमनदीप सिंह को ही गिरफ्तार करना पड़ा।

- किशनगढ़ में आनंदपाल अपनी गैंग के सदस्य के पास डेढ़ माह पहले आया हुआ था, लेकिन एसओजी के पहुंचने से पहले वह भाग गया। इसके अलावा पंचकुला हरियाणा से भी पुलिस के पहुंचने से पहले आनंदपाल भाग गया था।


सीआई सूर्यवीर व सिपाही सोहन घायल

आनंदपाल से मुठभेड़ के दौरान एसओजी के सीआई सूर्यवीर सिंह के हाथ में फ्रेक्चर आया। इसके अलावा  पुलिसकर्मी सोहन सिंह गोलियां लगने से घायल हो गया। सोहन की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 



जयपुर: 

आनंदपाल करीब दो दर्जनों मामलों में डीडवाना, जयपुर, सीकर, सुजानगढ, चूरू, सांगानेर सहित अन्य स्थानों पर वांछित था. वह नागौर के डीडवाना में जीवन राम गोदारा की हत्या, सीकर जिलें में गोपाल फोगावट हत्या मामले में वांछित था.


फेसबुक पर भी एक्टिव था आनंदपाल

आनंदपाल फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने फैन्स के लिए एक सोशल पेज भी चलाता था. वह अपने समाज से जुड़ी समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों की कतरन अपने फैंन्स को पोस्ट करता था. फैन फॉलोविंग हजारों भी में है. फेसबुक पर आनंदपाल सिंह के नाम से ही प्रोफाइल है जिसमें उसका फोटो इस्तेमाल किया गया है. 


लेडी डॉन अनुराधा चौधरी से था खास संपर्क

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आनंदपाल के गैंग की सदस्य रही अनुराधा चौधरी फिलहाल जेल में है. अनुराधा उर्फ अनुराग सीकर में रानी सती रोड की मूल निवासी है. 33 साल की इस लेडी डॉन की शादी सीकर के ही दीपक मिंज नाम के व्यक्ति के साथ हो चुकी है. वह शेयर बाजार में काम करती थी. नुकसान होने के बाद उसने गैंगस्टर आनंदपाल से संपर्क बढ़ाया. धीरे-धीरे वह गैंग की अहम सदस्य बन गई.

बता दें कि आनंदपाल पर हत्या, डकैती, अवैध वसूली समेत 28 दूसरे मामले दर्ज हैं। आनंदपाल एके-47, कारबाइन और एसएलआर जैसे अत्याधुनिक हथियार भी वारदातों को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल करता है। आनंदपाल नागौर जिले के लाडनूं का निवासी है। 2006 में उसने छात्र नेता जीवनराम गोदारा की हत्या की थी। साल 2011 में वह गिरफ्तार हुआ। तभी से जेल में था।




उस पर अलावा गैंगवार, हत्या, अवैध वसूली, अपहरण के 28 अन्य मामले भी हैं।  

2001 में अपराध की दुनिया में आया। 300 से ज्यादा गुर्गों की गैंग रखता है। राजस्थान के नागौर, सीकर, चूरू, झुंझुनूं और बीकानेर जिलों में एक छत्र राज था। तीन सितंबर 2015 को जयपुर में पेशी के दौरान पुलिस के हथियार लूटे और तब से फरार था।


गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने अपने ताज़ा बयान में एनकाउंटर में आनंदपाल के मारे जाने पर पुलिस को बधाई दी है वही कहा है कि पुलिस आनंदपाल को जीवित पकड़ना चाहते थी।






शनिवार, 24 जून 2017

आपातकाल दिवस 26 जून को काला दिवस मनाएगी भाजपा

जयपुर में राजस्थान लोकतांत्रिक सेनानी संघ की ओर से  पंचायती राज संस्थान भवन में जवाहर लाल नेहरू मार्ग पर यह कार्यक्रम होगा।

- करणीदानसिंह राजपूत - 


भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान के महामंत्री ने केंद्रीय निर्देश पर राजस्थान में 26 जून को काला दिवस मनाने का निर्देश जारी किया है यह निर्देश जिला प्रभारियों को भी जारी किया गया है व वापसी रिपोर्ट भी मांगी गई है ।आपातकाल 26 जून 2000 1975 को कांग्रेस राज्य में इंदिरा गांधी के द्वारा लगाया गया था उस समय भयानक अत्याचार हुए थे ।

भाजपा के निर्देश में कहा गया है कि लोक नायक जयप्रकाश नारायण को याद किया जाए उनका वर्णन समारोह में किया जाए मीसा में गिरफ्तार हुए लोगों को बुलाकर सम्मानित किया जाए। प्रेस वार्ता में भी आयोजित की जाएगी।

 26 जून को जब आपातकाल लागू हुआ तो सूरतगढ़ में उसी दिन शाम को आपातकाल के विरोध में गुरुशरण छाबड़ा के नेतृत्व में आम सभा की गई। आम सभा सुभाष चौक पर की गई और उसके बाद सारे कार्यकर्ता वहां से गायब हो गए थे, जिनकी  गिरफ्तारियां हुई और गिरफ्तारियां प्रदर्शनों के साथ भी दी गई। 

सूरतगढ़ से 12 लोग राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंदर गिरफ्तार हुए और वह व्यक्ति सीआरपीसी की धाराओं के तहत गिरफ्तार हुए ।

केंद्रीय निर्देश के अनुसार 21 जून को योग दिवस मनाने का 23 जून को श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद करने का निर्देश था। आपातकाल का विरोध राजस्थान में सबसे पहले सूरतगढ़ में किया गया था और उसी दिन दिल्ली के अंदर अरुण जेटली के नेतृत्व में विरोध किया गया था। पहले दिन यानी कि उसी दिन दो स्थानों पर आपातकाल का जबरदस्त विरोध किया गया था।



पंकज हत्याकांड में आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग जांच तक सब इंस्पेक्टर को हटाया गया


सूरतगढ़  सिटी पुलिस थाना के उप निरीक्षक महावीर बिश्नोई द्वारा बहुचर्चित छात्र पंकज यादव हत्या मामले में साक्ष्य नष्ट कर आरोपी को बचाने व कोई कार्यवाही नहीं करने के विरोध में उपखंड कार्यालय के आगे जारी धरने व आमरण अनशन के 18 वें दिन वरिष्ठ कांग्रेस नेता बलराम वर्मा पृथ्वीराज मील पूर्व जिला प्रमुख, बसपा के डूंगरराम गेधर, पवन सोनी, कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष सतनाम वर्मा, परसराम भाटिया व मृतक परिवार की आज  23-6-2017  को एडिशनल एस.पी. श्रीगंगानगर, ADM सूरतगढ़, विधायक राजेन्द्र भादू, DSP सूरतगढ़ के मध्य वार्ता हुई। 

उपनिरीक्षक महावीर बिश्नोई को जांच के दौरान सूरतगढ़ सिटी पुलिस थाना से हटाकर लाइन हाज़िर किया गया।

प्रकरण का अनुसंधान श्रीगंगानगर मुख्यालय से करवाए जाने पर सहमति बनी व FSL रिपोर्ट शीघ्र मांगने के आदेश पुलिस अधिकारियों ने दिए।

 इस पर पीड़ित परिवार का अनशन प्रकरण के अनुसंधान पूर्ण होने तक स्थगित किया गया।

कोचिंग लेने आई छात्रा कोमल बेनीवाल पर हत्याकांड का आरोप लगाया गया है।

(कांग्रेस के नेता बलराम वर्मा ने कहा है कि इस प्रकरण को लेकर 27 जून को सूरतगढ़ बंद का आह्वान किया हुआ था जो अब वापस ले लिया गया है।)


( इसके 2 समाचार अलग से पूर्व में दिए थे जो 24 जून को अपडेट कर दिए हैं)


पंकज हत्या मुकदमे में छात्रा कोमल की गिरफ्तारी की मांग सूरतगढ़ में धरना प्रदर्शन





करणी दान सिंह राजपूत

 6-6-017.

अपडेट 2462017.

सूरतगढ में कोचिंग लेने बाहर से आई युवती कोमल के कमरे में घायल बेहोश मिले छात्र पंकज यादव की हत्या के मुकदमे में आरोपित कोमल को गिरफ्तार करने और जांच में गड़बड़ी करने के आरोप में महावीर सिंह सब इंस्पेक्टर को निलंबित करने की मांग को लेकर यहां धरना और प्रदर्शन हुआ।





उपखंड कार्यालय पर 5 जून को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जिला उपाध्यक्ष बलराम वर्मा पूर्व जिला प्रमुख पृथ्वीराज मील बसपा नेता राजस्थान उपाध्यक्ष व जिला परिषद के  डायरेक्टर डूंगराराम गेधर की अगुवाई में प्रदर्शन वे धरना हुआ।

उपखंड अधिकारी के मार्फत राजस्थान सरकार को ज्ञापन दिया गया। उपखंड अधिकारी बनवारीलाल को इस हत्याकांड के बारे में अवगत कराया गया।

धरना प्रदर्शन करने वालों में कांग्रेस, बसपा के कार्यकर्ता नागरिक व मृतक पंकज के परिवारजन शामिल थे।

 सभी लोग पहले करनाणी धर्मशाला पार्क में एकत्रित हुए और वहां से जुलूस के रूप में उपखंड कार्यालय पर पहुंचे।


 कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष बलराम वर्मा ने पंकज यादव की हत्या के आरोप में कोमल पुत्री रामेश्वर लाल बेनीवाल जाट निवासी अजीतपुरा (भादरा) के यहां सूरतगढ के किराए के कमरे में हुई घटना के बारे में उपखंड अधिकारी को अवगत कराया।


 कोमल के विरुद्ध 18 अप्रैल 2017 को सिटी थाने में अदालत के आदेश से मुकदमा दर्ज हुआ था।

 पंकज यादव युवती कोमल के कमरे में चोटें लगा घायल बेहोश अवस्था में मिला और बाद में उसकी मृत्यु हो गई। कोमल ने उसकी चोटों के बारे में नहीं बताया और  राजकीय चिकित्सालय में पुलिस को सग्गा भाई बताया। बलराम वर्मा आदि का आरोप है कि उसने मृतक को झूठा ही अपना सगा भाई कैसे बताया और श्रीगंगानगर इलाज के लिए पंकज को प्राइवेट चिकित्सालय में भर्ती करवाया तो वहां से कोमल गायब हो गई।

 यह आरोप भी लगाया गया है कि इस कमरे में घटना घटित हुई वहां से सबूत नष्ट करने की कार्यवाही हुई जिसमें मुकदमे में यह आरोप लगाया गया है कि जांच अधिकारी महावीर सिंह ने सबूतों को खुर्द बुर्द करने में कोमल का साथ दिया।

 परिजन मुकदमा करवाने गए तो उनको धमकाया।

बलराम वर्मा और अगुवाई करने वाले नेताओं का आरोप है कि घटना 7 अप्रैल को हुई और इतना समय बीतने के बावजूद आरोपित कोमल को गिरफ्तार नहीं किया गया और मांग के अनुसार जांच अधिकारी के विरुद्ध भी कोई कार्यवाही नहीं हुई।धरना-प्रदर्शन में एक बार फिर चेतावनी दी गई है।

धरना प्र दोदर्शन में सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र युवक कांग्रेस अध्यक्ष गगन विडिंग,कांग्रेस सेवादल ब्लॉक अध्यक्ष धन्नाराम स्वामी, सतनाम वर्मा, भीम जोशी, छात्र नेता रामू जिंटा, सुनील भांभू, पार्षद ईमीलाल गोयल, आकाशदीप बंसल, पुरुषोत्तम ओझा, कुलदीप अरोड़ा बसपा के श्रवण सिंगाठया,नागरिकों व पंकज यादव के  परिवार के लोगों ने भाग लिया।






सूरतगढ़ में कोचिंग ले रही कोमल पर सूरतगढ़ के युवक की हत्या का मुकदमा






कोमल के किराए के कमरे में पंकज यादव ने आत्महत्या का प्रयास किया या उसकी हत्या की कोशिश हुई बेहोश पंकज की इलाज के दौरान जयपुर में मृत्यु हो गई पंकज रात को घर से दोस्तों के पास पढ़ने का कहकर जाता और कोमल के कमरे में रहता पुलिस पर सही जांच नहीं करने का आरोप पत्रकार वार्ता में लगाया गया।



सूरतगढ़ 2 जून 2017.


अपडेट 24-6-2017.

‌्करीब कोमल 26 साल पुत्री रामेश्वर लाल बेनीवाल जाट निवासी अजीतपुरा (भादरा) जिला हनुमानगढ के विरुद्ध अदालत के आदेश से सूरतगढ़ सिटी थाने में मुकदमा 18 अप्रैल को दर्ज हुआ। कोमल पर पंकज कुमार यादव की हत्या और सबूत नष्ट करने का आरोप लगाया गया है। घटनाक्रम 7 अप्रैल की रात्रि से शुरू हुआ।

पंकज कुमार पुत्र उम्मेद सिंह यादव उम्र 20 वर्ष निवासी भैरुगढ़ चिड़ावा अपने ननिहाल सूरतगढ़ में रहकर पिछले 4 सालों से पढ़ रहा था। पंकज के मामा मनोज कुमार यादव निवासी वार्ड नंबर 28 सूरतगढ़ ने मुकदमा दर्ज करवाया।

मुकदमे के अनुसार मनोज कुमार के मोबाइल पर पंकज के मोबाइल से 7 अप्रैल को 12 बज के 57 मिनट पर काल आई। लड़की बोल रही थी जिसने अपना नाम कोमल बताया। कोमल ने कहा कि आपके भांजे की पंकज की हालत खराब है उसे डॉक्टरों ने रेफर कर दिया है हम उसे लेकर गंगानगर जा रहे हैं। बाईपास पर आपका इंतजार कर रहे हैं। मामा मनोज कॉल आने के बाद तुरंत बाईपास पर पहुंचा।वहां एक एंबुलेंस में पंकज बेहोशी की हालत में था एक लड़की और एक युवक पास में बैठे थे ।

लड़की ने अपना नाम कोमल बताया साथ के युवक ने बताया कि वह लड़की कोमल और उक्त लड़का पंकज अपने को सगे भाई बहन बताते हुए हमारे घर में जजी के पास किराए पर रह रहे थे। आज रात को 11:30 बजे हम नीचे सोए हुए थे तब कोमल ने आवाज लगाकर कहा कि पंकज को चोट लगी है। तब एंबुलेंस नंबर 108 को फोन कर बुलाया और पंकज को हॉस्पिटल ले गए। पंकज के सिर और सीने में चोट के निशान थे। पंकज को श्रीगंगानगर ले जा रहे थे तो रास्ते में खून की उल्टियां आई कोमल को पंकज की चोटों के बारे में पूछा तो उसने कुछ नहीं बताया। गंगानगर में पंकज को गंगाराम बंसल हॉस्पिटल लेकर गए। वहां से कोमल गायब हो गई। सुबह यानी 8 अप्रैल को जयपुर रेफर किया तब जयपुर ले जाकर एस के सोनी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया जहां पंकज की मौत हो गई। उसके बाद पंकज का पोस्टमार्टम करवाकर उसकी लाश को  चिड़ावा ले गए। इस बीच कोमल सूरतगढ़ के किराए के कमरे से अपना सारा सामान आदि उठा कर ले गई।

 FIR में लिखवाया गया कि पंकज को सूरतगढ़ हॉस्पिटल ले गए थे तब वहां सूरतगढ़ पुलिस को कोमल ने पंकज को अपना सगा भाई बताया पंकज के पिता के नाम वाली जगह पर कोमल ने अपने पिता रामेश्वर लाल का नाम लिखवाया जबकि सच्चाई में कोमल का पंकज सगा भाई नहीं था।

 इसके बाद कोमल की तलाश हुई तो उसका कोई पता नहीं लगा मनोज कुमार के निवास पर 10 अप्रैल को कोमल उसका पिता और मामा आए। उस समय शोक प्रकट करने अन्य लोग आए हुए थे।

 उस समय कोमल के पिता ने माफी मांगते हुए कहा कि लड़की से गलती हो गई है,आप कोई कार्यवाही मत करना वरना लड़की का जीवन बर्बाद हो जाएगा। लड़की कोमल ने भी माफी मांगी। लड़की कोमल को बार बार पूछा गया कि पंकज के चोट कैसे लगी तो उसने चोटों के बाबत कोई उत्तर नहीं दिया। इसके बाद पुलिस थाना सूरतगढ़ सिटी में मुकदमा दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। उल्टा पुलिस अधिकारी महावीर सिंह  धमकाने लगा की बकवास मत करो यहां से भाग जाओ। FIR में आरोप लगाया गया है कि उक्त महावीर सिंह ने ही घटनास्थल से कोमल का सामान आदि उठवाया। मनोज कुमार ने इसके बाद पुलिस अधीक्षक गंगानगर को 12 अप्रैल को एक प्रार्थना पत्र दिया मगर उस पर भी पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया।


 उसके बाद में 15 अप्रैल को अदालत में इस्तगासा दायर किया गया। अदालत के आदेश से पुलिस ने 18 अप्रैल को मुकदमा दर्ज किया लेकिन डेढ माह से अधिक समय बीत जाने पर भी कोई कार्यवाही नहीं की।

काफी समय बीत जाने के बाद परिवार वालों ने रविवार 28 मई को पत्रकार वार्ता आयोजित की जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जिला उपाध्यक्ष बलराम वर्मा ने पुलिस को चेतावनी दी 7 दिन में कार्यवाही करने की कि अगर 7 दिन में पुलिस ने कोमल को गिरफ्तार नहीं किया तो पुलिस के विरुद्ध आंदोलनात्मक कार्यवाही की जाएगी। प्रेस कान्फ्रेंस में पुलिस अधिकारी महावीर सिंह को निलंबित करने की मांग भी की गई।

पत्रकार वार्ता में कांग्रेसी नेता बलराम वर्मा, वार्ड पार्षद इमी लाल घोषणा,पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष नगेन्द्र सिंह शेखावत व पंकज के मामा मनोज यादव आदि थे।

 प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि पंकज के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सिर की चोट से मृत्यु होना बताया गया है​। यह चोट कैसे लगी?इसका कोई उत्तर आज तक नहीं मिल पाया। पुलिस ने मौके की फोटोग्राफी वीडियोग्राफी भी नहीं करवाई। वहां पर एक कोल्ड ड्रिंक की बोतल थी आदि उसको भी जप्त नहीं किया गया था।

 प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनेक शंकाएं उठाई गई कोमल ने पंकज को अपना भाई क्यों बताया ? दोनों के बीच आखिर क्या बात हुई, कोई झगड़ा हुआ जिससे  घटना घटित हुई। पंकज के मामा मनोज ने बताया कि घर के मालिक से बात हुई तो उसने कहा कि कोमल की आवाज पर ऊपर गए तो पंकज फर्श पर पड़ा था।

 कोमल का पुलिस को दी गई जानकारी में बताया कि पंकज आत्महत्या के लिए प्रयास कर रहा था पंखे से लटका तब कोमल ने चुन्नी के बनाए हुए फंदे को काटा। इस हालात में चुन्नी का बंधा हुआ हिस्सा ऊपर लटका होना चाहिए था और आधा हिस्सा नीचे। मनोज ने कहा कि मकान मालिक से पूछा तो उसने यही कहा कि उसने कोई चुन्नी आदि नहीं देखी। अगर फांसी का भी माने तो

कोमल और पंकज के बीच आखिर क्या बात हुई जिससे पंकज को यह कदम उठाना पड़ा? कोमल के बयान को ही माना जाए तो कमरे में दोनों के अलावा तीसरा कोई नहीं था तब इन दोनों के बीच ही कोई ऐसी बात हुई। कोई विवाद हुआ जिस पर यह घटना हुई।क्या कोमल ने कोई दबाव इस युवक पर डाला? Don no दोनों भाई बहन के रूप में रह रहे थे तो इस संबंध को छद्म  क्यों रखा गया।पंकज ने कभी मामा आदि को नहीं बताया। अनेक सवाल हैं जिनका खुलासा पुलिस की गहन जांच से हो सकता है। पंकज के मामा ने बताया कि कोमल नाम की लड़की सूरतगढ़ में एक कोचिंग सेंटर पर कोचिंग ले रही थी और पंकज  आरजिल में ITI कर रहा था।

 मकान मालिक ने मामा मनोज को बताया कि घटना से करीब 15 दिन पूर्व कोमल और पंकज आए थे और बहन भाई बताते हुए रहने के लिए कमरा किराए पर लिया था।

 पुलिस ही अनुसंधान का कार्य करती है इसलिए इसकी सच्चाई गहन जांच से ही सामने आ सकती है।

पंकज और कोमल का संपर्क कब और कैसे शुरू हुआ पंकज मर चुका है और कोमल से ही गहन जांच हो सकती है।वह सूरतगढ़ में कब आई और कहां कहां किराए के कमरों में रही तथा किस कोचिंग संस्थान से किस प्रकार की कोचिंग ले रही थी?

कोमल से सारे सवालों के उत्तर पुलिस को प्राप्त करने ही होंगे। पंकज और कोमल के मोबाइल फोन कॉल डिटेल भी जांच में जरूरी है घटना से पहले और बाद में कोमल ने कहां-कहां फोन कॉल किए?


 पुलिस के उच्चाधिकारियों को इस पर गौर कर सच्चाई को सामने लाना चाहिए।


( सूरतगढ़ में कोचिंग लेने वाले छात्र और छात्राओं के परिजनों को अपने बच्चों को निगरानी में अवश्य रखना चाहिए।इसके अलावा मकान मालिक भी गौर करें कि वे बिना आईडी के मकान नहीं दे और एक से ज्यादा छात्र-छात्राएं रहते हैं तो सभी की ID अवश्य लें?)

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दीप विजुअल एंड आई केयर

भगत सिंह चौक सूरतगढ़।

( 25 साल में से सर्वश्रेष्ठ सेवा देने में आगे इलाके का उत्तम चश्मा घर जहां सभी सुविधाएं उपलब्ध।)


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आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों पर चुनाव आयोग की तलवार लटकी

आम आदमी पार्टी को चुनाव आयोग ने एक जोरदार झटका देते हुए ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में पार्टी की सभी दलीलों को खारिज कर दिया है। 

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने आप के 21 विधायकों के पद की नियुक्ति को अवैध ठहरा दिया था।

अब चुनाव आयोग द्वारा इस केस को जारी रखने के बाद पार्टी की मुसीबतें और बढ़ने वाली हैं। चुनाव आयोग द्वारा विधायकों के लाभ के पद केस की सुनवाई की जा रही है। इसे लेकर आप ने याचिका दायर की थी कि ज छैब दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा विधायकों की नियुक्तियों को रद्द किया जा चुका है तो चुनाव आयोग द्वारा सुनवाई किया जाना ठीक नहीं है।


आरोपी विधायकों ने अपनी याचिका में चुनाव आयोग से केस रद्द करने की मांग की थी। इस याचिका को ठुकराते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि आरोपी विधायकों पर इसी तरह केस चलता रहेगा। चुनाव आयोग के अनुसार इस मामले में केवल 20 विधायकों पर केस चलेगा क्योंकि रजौरी गार्डन से विधायक जरनैल सिंह पहले ही विधायक पद से इस्तीफा दे चुके हैं इसलिए उनपर केस नहीं चल सकता है। बता दें कि इन आरोपी विधायकों के पास 13 मार्च, 2015 से 8 सितंबर, 2016 तक संसदीय सचिव का पद था। इस लाभ के पद का इस्तेमाल करने के आरोप में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। अब इन विधायकों को यह साबित करना होगा कि वे इस लाभ के पद पर नहीं थे तभी उन्हें आरोप मुक्त किया जाएगा।


गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली विधानसभा सदस्यता (अयोग्यता का प्रावधान खत्म करने) अधिनियम, 1997 में संशोधन करके संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से बाहर निकालने का भी प्रयास किया था, लेकिन, राष्ट्रपति ने इस विधेयक को खारिज करके लौटा दिया था। इस बीच प्रशांत पटेल नाम के वकील ने राष्ट्रपति के पास इन विधायकों को अयोग्य ठहराने संबंधी याचिका डाली। राष्ट्रपति ने ये याचिका चुनाव आयोग को भेजी और इस पर कार्रवाई करके रिपोर्ट देने को कहा। मार्च 2016 में चुनाव आयोग ने इन विधायकों को नोटिस भेज जवाब मांगा था। मई में आयोग को भेजे जवाब में विधायकों ने कहा था कि उन्हें किसी तरह की सुविधा या भत्ता नहीं दिया जाता, न ही कोई दफ्तर दिया गया है। विधायकों ने आयोग से व्यक्तिगत सुनवाई की मांग की थी।



कुछ तो शर्म करो: भाजपा को क्यों बदनाम करते हो:


नई दिल्ली,24-6-2017.एक तरफ जहां योगी सरकार उत्तर प्रदेश में पुलिस और प्रशासन चुस्त-दुरुस्त करने और गुंडई खत्म करने की बात कर रही है तो दूसरी तरफ शुक्रवार को

जो नज़ारा देखने को मिला वह बेहद हैरान करने वाला था।


सीओ ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा- दर्ज करा दूंगी मुकदमा 

जहां एक ओर सीओ ने भाजपा के कार्यकर्ताओं से कहा- ‘कुछ तो शर्म करो.. क्यों भाजपा को बदनाम कर रहे हो। सरकार से कहलवा दो कि अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए रात में चेकिंग न कराए। तुम भाजपाई नहीं, जो सरकार के कामकाज पर विरोध जताकर पानी फेरने का प्रयास कर रहे हो, लेकिन इसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। वर्दी जनता की सुरक्षा के लिए पहनी है न कि गुंडों की हिफाजत के लिए। अगर सरकार को बदनाम करने के लिए गुंडई दिखाई को सभी पर मुकदमा दर्ज करा दूंगी।’

ये पूरा मामला है बुलंदशहर का है, जहां पर शुक्रवार को जिला पंचायत सदस्य प्रवेश देवी के पति प्रमोद की बाइक का चालान करने पर बखेड़ा हो गया। इस मामले को लेकर भाजपाई और पुलिस आमने-सामने आ गए। भाजपाइयों ने जिला पंचायत सदस्य के पति की गिरफ्तारी के विरोध में पुलिस आफिस और कचहरी में जमकर नारेबाजी की। देर तक हंगामा होता रहा। स्याना विधायक देवेंद्र लोधी ने एसएसपी से मिलकर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की। जैसे-तैसे हालात सामान्य हुए।



गुरुवार देर शाम स्याना की सीओ श्रेष्ठा, अपने हमराह व कोतवाल के साथ स्याना में ही वाहनों की चेकिंग कर रही थीं। इसी दौरान पुलिस ने वार्ड पांच की जिला पंचायत सदस्य के पति प्रमोद को रोक लिया। कागजात न होने पर पुलिस ने चाबी ले ली। फिर दो सौ रुपये का चालान काट दिया। प्रमोद का कहना है कि उन्होंने चालान के पैसे जमा करने के बाद चाबी मांगी तो पुलिसकर्मियों ने नहीं दी। इसकी ऐवज में सुविधा शुल्क मांगा।



सीओ श्रेष्ठा का आरोप था कि जिला पंचायत सदस्य के पति व उनके साथियों ने पुलिस के साथ अभद्र व्यवहार किया। सरकारी कार्य में बाधा डाली। बहरहाल, पुलिस ने प्रमोद के खिलाफ मुकदमा लिखकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को इसी के विरोध में स्याना विधायक देवेंद्र लोधी के नेतृत्व में भाजपाई एसएसपी मुनिराज से मिले। विधायक ने पुलिस के दुर्व्यवहार की शिकायत की। जांच के बाद दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया।


मामला उस समय बिगड़ गया, जब पेशी के दौरान कचहरी में भाजपाइयों ने प्रमोद को पुलिस से छुड़ाकर अपने कब्जे में ले लिया। सूचना मिलते ही वहां सीओ स्याना भी पहुंच गई। स्याना सीओ को देखकर भाजपाइयों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसको लेकर सीओ व भाजपाइयों की जमकर नोकझोंक हुई। मौके की नजाकत को देखते हुए भाजपाई वहां से चल दिए। उन्होंने फिर पूरे मामले की शिकायत देवेंद्र लोधी से की। देवेंद्र लोधी दोपहर को फिर एसएसपी से मिले। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए शिकायती पत्र दिया। उधर, दोपहर बाद न्यायालय ने प्रमोद को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

( जागरण स्पेशल डेस्क)


मध्यप्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्र पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: जाएंगे मंत्री विधायक पद


 मध्यप्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री नरोत्तम मिश्र को चुनाव आयोग ने 3 साल के लिए विधायक के लिए अयोग्य ठहरा दिया है. मिश्र का वर्तमान मंत्री पद और विधायक पद तो गया ही अगला विधान सभा चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे.

चुनाव आयोग को मध्य प्रदेश के कानून मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में ‘पेड न्यूज’ के सबूत मिले हैं जिसके बाद उनके चुनावी खर्चों में 42,000 रुपए और जोड़ दिए गए हैं। मिश्रा संसदीय मामलों के मंत्री भी हैं और वह दतिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

जिले में आयोग द्वारा गठित मीडिया प्रमाणन एवं निगरानी समिति (एमसीएमसी) ने एक नवंबर को एक स्थानीय समाचार में छपी खबर को ‘पेड न्यूज’ पाया। इसके बाद समिति के अधिकारियों ने मिश्रा के खर्चों में करीब 42,000 रुपए और जोड़ दिए हैं तथा इस संबंध में एक रिपोर्ट भोपाल एवं दिल्ली में चुनाव आयोग और आयकर विभाग से भी साझा की गई है। मिश्रा पहले ही 2008 के विधानसभा चुनावों में ‘पेड न्यूज’ के आरोपों का सामना कर रहे हैं। 


‌ पहले ही किसान आंदोलन से समस्याओं से घिरे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए आगामी विधान सभा चुनाव में भी इस मुद्दे को लेकर विपक्ष के हमलावर तेवरों का सामना करना मुश्किल तो होगा ही. पेड न्यूज पर सरकार की छवि चमकाने के आरोप और आयोग के आदेश को इतनी आसानी से घुमाना इतना आसान भी नहीं होगा.


चुनाव आयोग के मुताबिक मिश्र के खिलाफ 2008 के विधान सभा चुनाव के दौरान पेड न्यूज प्रकाशित कराने का इल्ज़ाम विपक्षी नेताओं ने लगाया था. इल्ज़ाम लगाने वालों ने इस बाबत किए गए भुगतान के सबूत भी चुनाव आयोग के सामने पेश किए. चुनाव आयोग ने नरोत्तम मिश्र को नोटिस भेजकर जवाब मांगा. मिश्र के जवाब से आयोग सन्तुष्ट नहीं हुआ. क्योंकि सबूत और जवाब में कोई तालमेल नहीं था. आयोग ने लम्बी चली सुनवाई प्रक्रिया में जवाब दर जवाब मिश्र को दोषी माना.



2008 के विधान सभा चुनाव के दौरान का मामला था. 2012 में चुनाव आयोग के सामने आया. 2013 से सुनवाई शुरू हुई. यानी 2013 विधान सभा चुनाव से पहले. अब अगले चुनाव आने हैं लेकिन बाज़ी उलट चुकी है. चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने ही आदेश की तलवार चला दी.


नरोत्तम मिश्र की तेजी और जनसंपर्क कौशल को ध्यान में रखते हुए ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनको जन सम्पर्क विभागकी भी ज़िम्मेदारी दी. साथ ही अनकहे अघोषित उपमुख्यमंत्री जैसी हैसियत भी. लेकिन अब चुनाव से ठीक पहले आए चुनाव आयोग का यह आदेश शिवराज सिंह के लिए बड़ा झटका है

मामला केंद्रीय चुनाव आयोग तक पहुंच गया। लंबे समय के बाद इस पर कार्रवाई की गयी है। वहीं, राजेंद्र भारती ने भी 2012 में चुनाव आयोग से मिश्रा की शिकायत की थी। भारती ने आरोप लगाया कि मिश्रा ने ही उनके खिलाफ झूठी खबर पेश करने के लिए पैसा दिया था।


नरोत्तम ने कहा था कि वे 2008 में उनके खर्चे से संबंधित किसी भी रिकॉर्ड को न दिखाए। इसके बाद मिश्रा ने चुनाव आयोग  के फैसले को चुनौती देने के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का सहारा लिया। लेकिन दोनों ही सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों ने मिलकर मिलकर मिश्रा की याचिका को खारिज कर दिया है। 



धौलपुर भरतपुर जाट आरक्षण मांग आंदोलन स्थगित

भरतपुर : 24-6-2017.

भरतपुर-धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति का आंदोलन शनिवार दोपहर स्थगित हो गया है। सरकारी प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे सामाजिक न्याय व आधिकारिता विभाग के सचिव बीएल जाटावत ने जाट नेताओं से बातचीत की। जाट नेताओं और सचिव जाटावत के साथ बातचीत सफल रही। जाटावत ने सरकार का पक्ष रखा और जाट नेताओं को समझाने में सफल रहे। 

विधायक विश्वेन्द्र सिंह, सचिव जाटावत और संघर्ष समिति के संयोजक नेमसिंह फौजदार ने पत्रकारों को बताया कि सरकार ने जाट नेताओं को आश्वासन दिया है कि वह ओबीसी कमीशन की गुरुवार को पेश की गई रिपोर्ट का जल्द अध्ययन करेगी और जाट आरक्षण को लेकर सकारात्मक रुख रखा जाएगा। राज्य सरकार की अगली कैबिनेट मीटिंग में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। गुरुवार सुबह से दो जिलों का जाट समुदाय आरक्षण को लेकर सड़क पर थे। इस कारण बीते दो दिनों से सड़क व रेलमार्ग पूर्ण रुप से प्रभावित था। भरतपुर-धौलपुर जिले के जाटों को सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2015 में ओबीसी आरक्षण सूची से हटा दिया था। इसके बाद से यहां के जाट लगातार इस सूची में वापस जोडऩे की मांग कर रहे हैं। 




रेल यात्रा में सामान चोरी हो जाए या अन्य समस्या (ध्यान से पढ़ें)



*R.T.I. 🚊उपयोगी जानकारी 🚊*


लखनऊ से जबलपुर लौटते वक्त ए.सी. कोच में जबलपुर की एक महिला प्रोफेसर का पर्स चोरी हो गया, जिसमें लाखों के जेवर और रुपए थे। अब तक उस सामान का पता नहीं लग सका है। चोरी गए सामान की कीमत अब रेलवे को देनी होगी। 


सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने रेल यात्रियों को यह सुविधा दिला दी है।

इसके लिए यात्री को उपभोक्ता फोरम में रेलवे की सेवा में कमी का मामला दायर करना होगा। 


राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के मुताबिक रिजर्व कोच में अनाधिकृत व्यक्ति का प्रवेश रोकना टी.टी.ई. की जिम्मेदारी है, और अगर वह इसमें नाकाम रहता है, तो रेलवे सेवा में खामी मानी जाएगी। 


कैसे मिला अधिकार: फरवरी 2014 में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ट्रेन से चोरी गए महिला डॉक्टर के सामान की राशि का भुगतान रेलवे को करने का आदेश दिया। रेलवे ने इस पर दलील दी की "ये मामला रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल में ही सुना जा सकता है।" जबकि यात्री के वकील के मुताबिक ट्रिब्यूनल में सिर्फ रेलवे में बुक पार्सल के मामलों को ही सुना जाता है। 

न्यायमूर्ति सी.के. प्रसाद और पिनाकी चंद्र घोष की पीठ ने 17 साल पुराने इस मामले में रेलवे की दलील को खारिज कर दिया और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के फैसले में दखल देने से इंकार कर दिया। 


 यह अधिकार यात्रियों के लिए जितना सुविधाजनक है, उतना ही रेलवे और पुलिस के लिए मुश्किल भरा। 

इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि इसकी जानकारी यात्रियों को नहीं है, और न ही इस जानकारी को उन तक पहुंचाने के लिए कोई कारगर कदम उठाए गए हैं। 


ट्रेन में चोरी होने के बाद रिपोर्ट दर्ज कराते वक्त संबंधित यात्री को इस बारे में पुलिस द्वारा जानकारी नहीं दी जाती।


 हालांकि जबलपुर जी.आर.पी. का कहना है कि 1 अप्रैल, 2014 के बाद यह आदेश जारी हुआ और 6 माह बाद यानि सितम्बर से अब तक एक भी मामले नहीं आए। 


6 माह करना होगा इंतजार चोरी गए सामान को तलाशने के लिए जी.आर.पी. के पास 6 माह का वक्त होगा। इस दरमियान यदि पुलिस पीड़ित का सामान नहीं तलाश पाती तो वह उपभोक्ता फोरम जा सकता है| 


इसके लिए एफ.आई.आर. दर्ज कराते समय पुलिस को पीड़ित से उपभोक्ता फोरम फार्म भरवाना होगा।


 ओरिजनल कॉपी पीड़ित के पास होगी, और पुलिस कार्बन कॉपी अपने पास रखेगी। एफ.आई.आर. और फार्म ही यात्री का मूल दस्तावेज होगा, जिसके आधार वह केस दर्ज कराएगा। 


ये हैं आपके अधिकार यह सुविधा सिर्फ स्लीपर या ए.सी. कोच में रिजर्वेशन कराने वाले यात्रियों के लिए है।


उपभोक्ता फोरम के जानकार एडवोकेट  बताते हैं कि रिजर्वेशन के दौरान यात्री से 2 रुपए सुरक्षा शुल्क लिया जाता है। इधर ट्रेन में स्लीपर कोच यात्री को दिया जाता है, जिसके बाद यह तय होता है कि आपने उसे ट्रेन में सोने का अधिकार दिया है और इस दौरान जो भी घटना होती है, उसका जिम्मेदार रेलवे ही होगा। ट्रेन के स्लीपर या एसी कोच में यात्रा करते समय यात्री का सामान चोरी होता है तो शिकायत दर्ज करते वक्त उससे उपभोक्ता फोरम का फार्म भरवाया जाता है। यदि 6 माह तक पुलिस उसका सामान नहीं तलाश पाती तो वह फार्म की कॉपी ले जाकर उपभोक्ता फोरम में मामला दर्ज कर सकता है, जहां पर रेलवे को पीड़ित का हर्जाना देना होगा।


💥 इसे पढ़ कर सिर्फ अपने तक सीमित मत रखिए, बल्कि इसे आगे बढ़ाइए ...💥 Centralised numbers released by Indian Railways for citizen convinience

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