रविवार, 15 नवंबर 2015

तुम मेरे दिल में हो : कविता: करणीदानसिंह राजपूत




 प्रिय अब तुम्हारे
फोन का रहता है इंतजार।
जब टिनटिनाता है
तब तब दौड़ कर
उठाना होता है।
तुम्हारे बोल दिल को
छूकर
भीतर तक उतर जाते हैं।
आखिर क्या है तुम में,
मेरा दिल क्यों हो जाता है
उतावला
बिछ जाता है
सुनने को तुम्हारी
प्यार भरी
बातें।
सच्च में तुम

मेरे दिल में हो
कब से हो
यह मालूम नहीं।
बस।
जब भी
फोन की टिनटिनाहट
होती है।
दिल कह उठता है।
तुम हो।
यही सच्च
हर बार होता है।
रात की नींद
जब उड़ जाती है
करवटें बदलते
सुबह हो जाती है।
तुम्हारी स्मृति
भी हर बार आ जाती है
सामने।
तुम्हारा वही चेहरा
और आज भी

वही नाक नक्स।
दिल को गुदगुदाते हैं
प्यार करने को।
एलबम में लगे एक फोटो पर
जब मेरी नजर ठहर
जाती है।
पल भर में दोनों की नजरें
भी मिल जाती है।

चाहती हैं जवाब मिलन का
कौन करे पहल।
सच्च तुम हिम्मती
आगे बढऩा तुम्हारा
और लिपटना
सोचा नहीं था
जो हो गया पल में।
यह तो अपनी यादों की

धरोहर है
जिसे संभालकर
रखना है
हम दोनों को।
प्रिय अब रहता है
इंतजार तुम्हारे फोन
की टिनटिनाहट का
यादों को संजोए
रखने के लिए।
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करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
94143 81356.
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