Sunday, February 16, 2014

वकील पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु की जान को खतरा:लायसेंस निरस्ती के बाद से हथियार सूरतगढ़ थाने में जमा है

वकील पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु की जान को खतरा:
लायसेंस निरस्ती के बाद से हथियार सूरतगढ़ थाने में जमा है
श्रीगंगानगर में एक वकील पर हमला हो चुका है-
वकीलों को मुकद्दमें लडऩे व बाहर आने जाने के समय हर वक्त सुरक्षा जरूरी-
सिद्धु ने जिला कलक्टर को लिखा हुआ है कि जान को खतरा है व तुम्हारी जिम्मेदारी होगी

खास रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़। वरिष्ठ वकील पूर्व विधायक सरदार हरचंदसिंह सिद्धु का लायसेंस जिला कलक्टर श्रीगंगानगर द्वारा निरस्त करने के बाद से हथियार सूरतगढ़ सिटी पुलिस थाने में जमा है तथा हर समय जान पर खतरा मंडराता रहता है।
श्रीगंगानगर में कुछ दिन पूर्व अदालत में ही एक व्यक्ति ने हमला कर दिया था। उसके बाद से यह चिंता बहुत बढ़ गई है कि वकीलों की सुरक्षा का प्रयाप्त प्रबंध हो। श्रीगंगानगर में वकीलों की तरफ से यह मांग भी उठी थी। स.हरचंदसिंह सिद्धु सूरतगढ़ न्यायिक बार संघ के वरिष्ठतम सदस्य हैं और उनको अनेक प्रकार के प्रकरणों पर बाहर की अदालतों में जाना आना पड़ता है। सिद्धु राजनैहितक व्यक्ति भी हैं तथा 4 बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं व 2 बार विधायक रह चुके हैं।
सिद्धु ने अपनी आत्मरक्षा के लिए 32 बोर रिवाल्वर ले रखा था और उसका लायसेंस 2014 तक नवीनीकृत होते हुए भी जिला कलक्टर ने चुनाव से पहले लायसेंस दिनांक 25-10-2013 को निरस्त कर दिया व 12-11-2013 को कोई विरोध हो तो पेश होने की तारीख दी। सिद्धु ने आदेश की अनुपालना में थाने में तत्काल ही हथियार जमा करवाया व  31-10-2013 को जिला कलक्टर को पत्र दिया। सिद्धु ने उस पत्र में साफ साफ लिखा कि उसका लायसेंस दुर्भावना से निरस्त किया गया है व कोई षडय़ंत्र है। शस्त्र दुरूपयोग का कोई प्रकरण नहीं है।
इसी पत्र में सिद्धु ने लिखा था कि वे सक्रिय राजनैतिक कार्यकर्ता हैं व नेताओं व अधिकारियों के विरूद्ध संघर्षरत हैं तथा लगातार जान की धमकियां मिल रही हैं जिनकी लिखित शिकायतें लगातार राज्य सरकार को की जाती रही हैं।
सिद्धु ने जिला कलकटर को चेतावनी भी दी कि कोई जानी नुकसान हो गया तो आपकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी।
इस पत्र के बाद जिला कलक्टर ने स्थानीय समिति को रिपोर्ट के लिए लिखा और वह रिपोर्ट यहां से चली गई।
इसके बाद लायसेंस को अविलम्ब बहाल कर दिया जाना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।
श्रीगंगानगर में वकील पर हमले के बाद से यह मामला बहुत गंभीर हो गया है।
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