रविवार, 13 अक्तूबर 2013

दशहरा उत्सव सूरतगढ़ 2013:विशेष रिपोर्ट करणीदानसिंह राजपूत


रावण कुंभकरण मेघनाथ के पुतले पटाखों के धमाकों से धू धू हो गए
नगरपालिका के आयोजन में उमड़ी भीड़:





आशाराम डूडी

सूरतगढ़, 13 अक्टूबर। राष्ट्रीय उत्थान रामलीला क्लब के रामलीला कलाकारों की आरती के साथ आतिशबाजी संग मनाए गए दशहरा उत्सव में अच्छी खासी भीड़ नर नारी बच्चे और बच्चियां रंग बिरंगे परिधानों में शोभायमान हो रहे थे। चुनाव आचार संहिता के कारण जन प्रतिनिधि उपस्थित नहीं थे,लेकिन अतिरिक्त जिला कलक्टर आशाराम डूडी ने अपने उदबोधन में राम का जयकारा लगवा कर आनन्दित किया।
रावण के एक छोटे पुतले को पहले राम ने अग्रि दी। इसके बाद हुई आतिशबाजी। कुछ पलों के लिए लोग आकाश की ओर ही खो गए।
इसके बाद प्रवीण डी जैन की ओर से घोषणा हुई कि दशहरे पर्व में रावण पुतले को जलाना माना जाता है, बुराई पर अच्छाई की जीत।
बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए पुतलों को जलाने के लिए अधिकारी वर्ग को आमंत्रित किया गया।
अधिकारियों अतिरिक्त जिला कलक्टर आशाराम डूडी,राजस्व तहसीलदार राकेश न्यौल,उप अधीक्षक पुलिस मदनसिंह बुडानिया,थानाधिकारी रणबीर सांई,पालिका के अधिशाषी अधिकारी सुरेन्द्र यादव व सहायक अभियंता कर्मचंद अरोड़ा व रामलीला कलाकारों ने इन पुतलों को जलाया।

प्रवीण डी जैन

पहले मेघनाथ को अग्रि दी गई। मेघनाथ का पुतला जला। उसके बाद कुंभकरण के पुतले को अग्रि दी गई। वह भी जल उठा। अंत में रावण के पुतले को अग्रि दी गई। सभी पुतले धू धू हो गए।

पुरानी परंपरा के अनुसार लोग रावण की अस्थियां लेने को दुघर्टना की परवाह किए बिना बांस खपचियां आदि ले ले कर भागे। ये अस्थियां लोग अपने घरों की सुरक्षा के लिए रखते हैं। मान्यता है कि इससे चोरी नहीं होती।

इस पर्व के कुछ फोटो यहां दिए जा रहे हैं।


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यह ब्लॉग खोजें