सोमवार, 20 फ़रवरी 2023

सूरतगढ़ में पी जी हॉस्टलों पर पुलिस की छापेमारी:संभालो अपने युवा कहां हैं?

 👍 वर्तमान स्थिति बहुत खतरनाक। मीडिया तो लिखता रहा है। लोग चर्चा कर सो जाते हैं। 


* करणीदानसिंह राजपूत *
आपराधिक और असामाजिक तत्वों के छुपे होने की तलाश में पुलिस की ओर से सूरतगढ़ के पी जी हॉस्टलों और लायब्रेरियों पर छापेमारी  हुई। उसमें कुछ गिरफ्तारियां भी हुई।
यह समाचार उन अभिभावकों के लिए संभलने का है जिनके युवा बच्चे सूरतगढ़ में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की कोचिंग लेने आते हैं और अभी आए हुए हैं।
युवा भविष्य के आईएएस आईपीएस
आरएएस आरपीएस  और विभिन्न प्रकार की सेवाओं में अधिकारी बनने के बजाय यदि नशा पता करने लगे या अन्य अपराध करने लगे या साथ देने लग जाए तो ऊंचे पद तो शायद नहीं मिले लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में नाम आ जाए। सपूतों की जमानतें करवानी पड़े तो इसे अनहोनी नहीं कहा जा सकता।
अखबार और चैनल वाले चाहे समाचार नहीं बना रहे लेकिन सूरतगढ़ में कोचिंग लेने आने वालों की चर्चाएं तो आसमान छूती हैं। पीजी हॉस्टलोंऔर कोचिंग सेंटरों के क्षेत्रों में सूर्यास्त के बाद जो होता है उस पर आंखें मींच कर रहना उन लोगों के लिए भी उचित नहीं है जो हॉस्टलों और कोचिंग सेंटरों का संचालन कर रहे हैं।
असामाजिक तत्वों में नाम आया तो एक नई मुश्किल शुरू हो जाएगी।
अभिभावक सूरतगढ़ में अपने युवा बच्चों को  कोचिंग सेंटरों और पीजी हॉस्टलों में प्रवेश दिला कर निश्चिंत हो जाते हैं।यह निश्चिंतता खतरे से खाली नहीं है। समय-समय पर अपने बच्चों को संभालते रहना चाहिए। अभिभावकों के पास बच्चों को संभालने के लिए समय नहीं है।
कोचिंग सेंटरों और पीजी हॉस्टलों के संचालकों को केवल अपनी आमदनी से मतलब है।
वैसे भी वे किसी बच्चे की कितनी देखरेख कर सकते हैं? एक एक युवा की निगरानी रखना संभव नहीं। 
पीजी हॉस्टल में रहने वाले की तलाशी संचालक क्यों लें और किस अधिकार से लें?सबको अपने यहां दुकानदारी करनी है?
किस युवा के सामान में नशा या शराब है? कौन नशा करता है और रात को बाहर रह जाता है? नशे की लत संपूर्ण इलाके में बढ रही है और युवा चपेट में आ रहे हैं।सूरतगढ़ को इलाके से अलग नहीं किया जा सकता।
ताजा घटनाक्रम सचेत करने वाला है। अकेले सूरतगढ़ सिटी पुलिस ने छापा नहीं मारा था। सूरतगढ़ की सिटी थाना पुलिस, सदर थाना पुलिस और जिला रिजर्व पुलिस का संयुक्तदल था जिसने दिन निकलते ही छापेमारी की।
पुलिस संयुक्त दल की कार्रवाई से साबित होता है कि पढाई की आड़ में अपराध और अपराधी संरक्षण पाते हुए पनप रहे हैं। संयुक्त पुलिस दल ने उच्च निर्देश पर कार्रवाई की जो सीमित हास्टलों व लायब्रेरियों तक रही। सूरतगढ़ में सभी की और समय समय पर पुलिस जांच जरूरी है लेकिन इससे यह निश्चिंतता खतरनाक है कि अभिभावक बिल्कुल ध्यान ही नहीं रखें।
प्रतियोगी परीक्षाओं की अच्छी सस्ती तैयारी के नाम और प्रचार से सूरतगढ़ सभी और छा रहा है मगर बच्चे क्या बन रहे हैं? पुलिस की अपराधियों और असामाजिक तत्वों की खोज में छापेमारी बिना आवाज और बिना लिखी रिपोर्ट के बहुत कुछ संकेत कर रही है।
जो भी बच्चे कोचिंग लेने सूरतगढ़ आते हैं उनके अभिभावकों को सचेत रहने की जरूरत है।
प्रथम. 28 नवंबर 2021.
अपडेट 20 फरवरी 2023.
।०0०।
करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार (राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ (राजस्थान)
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