मंगलवार, 30 जून 2020

श्रीगंगानगर-रेलवे के सीआरएस उम्मेदपाल सिंह सेवानिवृत्त हुए


श्रीगंगानगर, 30 जून 2020.

 रेल आरक्षण केंद्र के चीफ रिजर्वेशन सुपरवाइजर श्री उम्मेदपाल सिंह  लगभग 35 वर्ष की सेवा के बाद आज मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गये। इस अवसर पर रेलवे स्टेशन परिसर में एक लघु कार्यक्रम के अंतर्गत उन्हें विदाई दी गयी। बहुत ही कम संख्या वाले इस कार्यक्रम में स्टेशन अधीक्षक श्री दिनेश त्यागी, जेडआरयूसीसी सदस्य श्री भीम शर्मा, पूर्व सीआरएस श्री जगदीश अरोड़ा सहित रेलवे की वाणिज्यिक व अन्य शाखा के कर्मचारी अधिकारी उपस्थित रहे। 

इस अवसर पर श्री भीम शर्मा ने कहा कि श्री उम्मेदपाल सिंह की शुरू से सेवानिवृत्त होने तक सेवा के साक्षी रहे है। इन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अपनी सरल, सौम्य व मृदुभाषी शैली के चलते सभी पर अमिट छाप छोड़ी हैं। इन्होने 21 मई 1985 में पहली ज्वाइनिंग रिजर्वेशन क्लर्क के रूप में गंगानगर में ही की थी। उस समय मैन्युअल रिजर्वेशन होता था। आज से ठीक 25 वर्ष पूर्व जब तत्कालीन रेलवे बोर्ड अध्यक्ष श्री अशोक भटनागर श्रीगंगानगर पधारे थे, उस समय उन्होनेे अपने कर कमलों से की बोर्ड का बटन दबाकर आधुनिक आरक्षण प्रणाली की शुरूआत की थी, उस दिन भी उम्मेदपाल सिंह श्रीगंगानगर में ही नियुक्त थे। इस अवसर पर भीम शर्मा ने श्री उम्मेदपाल सिंह को शाॅल ओढाकर उनका सम्मान किया। श्री जगदीश अरोड़ा ने कहा कि श्री उम्मेद सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान हर जगह अच्छे संबंधों के चलते पूरे शहरभर में अपनी शानदार पहचान बनाई है। शहर में लगभग सभी लोग श्री उम्मेदपाल सिंह को पहचानते हैं। 


स्टेशन अधीक्षक श्री दिनेश त्यागी ने कहा कि उम्मेद पाल सिंह सदैव मिलनसारिता के साथ काम करते रहे है।

 इस अवसर पर पार्सल कार्यालय के श्री ए.के. सिंह सहित अन्य कर्मचारियों ने भी उनके कार्यकाल को सराहा। 

श्री उम्मेदपाल सिंह को वर्ष 1989 में हैड रिजर्वेशन, 1998 में रिजर्वेशन सुपरवाइजर के पद पर पदोन्नत किया। वर्ष 2011 में इनको रिजर्वेशन के सबसे बडे पद चीफ रिजर्वेशन सुपरवाइजर के पद पर पदोन्नत किया गया। विभाग द्वारा वर्ष 1995, 2006, 2013 व 2018 में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।००

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रविवार, 28 जून 2020

बिजली पानी संकट में सुलगता सूरतगढ़- बेकाबू हालात * करणीदानसिंह राजपूत*

सूरतगढ़ कोरोना लॉकडाउन की समस्या से भी अधिक बिजली,पेयजल में सीवरेज की गंदगी से लग रहा है कि हालात बेकाबू से है। 

सूरतगढ़ शहर और इलाका सुपर ताप विद्युत परियोजना के होते हुए भी बार-बार के अघोषित कट और पूरे वोल्टेज नहीं मिलने से गर्मी के दिनों में भयानक परेशानी से जूझ रहा है।


 विद्युत वितरण निगम के अधिकारी लापरवाही और अनदेखी में भारी भरकम वेतन उठा रहे हैं। उनकी लापरवाही से सूरतगढ़ में भारी रोष पैदा होने पर सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के नगर के प्रथम व्यक्ति ओमप्रकाश कालवा नगर पालिका अध्यक्ष को बिजली विभाग पर धरना देते हुए अधिकारियों को बहुत कुछ सुनाना पड़ा। ब्लॉक कांग्रेस पार्टी के  आह्वान पर 1 दिन का सांकेतिक धरना देते हुए अधिकारियों को चेतावनी दी गई जिसमें गंगाजल मील पूर्व विधायक ब्लॉक अध्यक्ष परसराम भाटिया उपाध्यक्ष सलीम कुरेशी धर्मदास सिंधिया आदि अनेक पदाधिकारियों ने विद्युत वितरण निगम को व्यवहार और कार्य में सुधार कर लेने की बातें गरमा गरम शब्दों से कही।

 बिजली की  कमी से कांग्रेस जनों की बेहद नाराजगी से स्पष्ट है कि अधिकारियों की लापरवाही से ही व्यवस्था बिगड़ी हुई है। शहर के नगर पालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा पूर्व विधायक गंगाजल मील को धरना प्रदर्शन करना पड़े यह बहुत बड़ा प्रमाण है।

ओमप्रकाश कालवा ने तो कहा है कि ऐसे अधिकारियों को यहां से चले जाना चाहिए।अधिकारी खुद तो नहीं जाएंगे सत्ताधारी पार्टी है इसलिए इनका रिपोर्ट कार्ड उच्चाधिकारियों को पेश हो कि वह लापरवाही करने वाले अधिकारियों को यहां से कहीं स्थानांतरित करें।


 सूरतगढ़ में शुद्ध पेयजल के नाम पर अभी भी मिट्टी मिला हुआ पानी वितरित किया जा रहा है जिससे अनेक प्रकार की बीमारियां और पथरी की शिकायत आम हो गई है।

गंदे पानी से अनेक लोग पीलिया की बीमारी का शिकार भी हो रहे हैं।

 आश्चर्यजनक है कि अशुद्ध जल में कई वार्डों में सीवरेज का मल मूत्र वाला पानी शामिल हो रहा है और यह वितरित हो रहा है। नागरिक चिल्ला रहे हैं लेकिन इसका कोई सही इलाज अभी तक नहीं हो पाया है।

नगर पालिका में सीवरेज की गड़बड़ी को लेकर पहली बैठक प्रशिक्षु जुनैद मोहम्मद आईएएस अधिकारी ने की थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि सरकारी धन को अव्यवस्थित तरीके से लगाया जाना तो दुरूपयोग है जो सहन नहीं किया जा सकता। उन्होंने सीवरेज के सारे त्रुटिपूर्ण निर्माणों को ठीक किया जाने का सख्त निर्देश दिया था। उस बैठक के अंदर शहर के नागरिक नगर पालिका अध्यक्ष पार्षद जलदाय विभाग के अभियंता सीवरेज सिस्टम से जुड़े हुए अभियंता व स्टाफ शामिल था। इस महत्वपूर्ण मीटिंग के बाद भी पूरा ध्यान नहीं दिया गया।

इसके बाद सिवरेज और मल मिले पेयजल को लेकर अतिरिक्त जिला कलेक्टर अशोक कुमार मीणा की अध्यक्षता में एक बैठक उन्हीं के कार्यालय में हुई।जिसमें नगर पालिका अध्यक्ष नगर पालिका के इंजीनियर जलदाय विभाग के इंजीनियर और सीवरेज सिस्टम के इंजीनियर स्टाफ शामिल हुआ।

अशोक कुमार मीणा ने स्पष्ट कहा था कि सीवरेज निर्माण कंपनी सही निर्माण नहीं कर रही सुधार नहीं कर रही तो इसको नोटिस दिया जाए ब्लैक लिस्ट की कार्रवाई में डाला जाए। 

एडीएम की अध्यक्षता में इसके बाद एक और बैठक हो चुकी है।  लोग सीवरेज की शिकायतें लगातार कर रहे हैं। 

यह आश्चर्यजनक है कि सीवरेज से मल मूत्र वाला पानी शहर से बाहर संयंत्र में जाना था लेकिन वह पेयजल के साथ यत्र तत्र घरों में पहुंच रहा है। यह शर्मनाक है कि लोगों को मल मूत्र युक्त पानी मजबूर होकर के पीना पड़ रहा है। 

अशुद्ध पानी वितरण में दोषी अधिकारियों के विरुद्ध न तो कोई कार्रवाई हो रही है और न कोई मुकदमा हो रहा है। 

पेयजल के स्रोत कुआ बावड़ी तालाब नहर में गंदगी डालने फैलाने पर मुकदमा हो जाता है। यहां किसी भी नागरिक की ओर से अभी तक शुद्ध पेयजल सप्लाई में दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कोई मुकदमा दर्ज नहीं करवाया गया है। सीवरेज सिस्टम के सही निर्माण में गड़बड़ी और शुद्ध पेयजल में गंदगी मिलाने  का मुकदमा आईपीसी की धाराओं के अंदर भी करवाया जा सकता है,जब तक मुकदमा नहीं होता तब तक यह गड़बड़ी और अधिकारियों की मीटिंग को में लीपापोती आदि चलती रहेगी। सीवरेज सिस्टम ने शहर के अंदर जगह जगह गड्ढे बना दिए उनकी भराई में सही कार्य नहीं होने से वह गड्ढे अभी भी बने हुए हैं। मुख्य सड़कों पर मेन हॉल ऊंचे नीचे लगे हुए हैं जहां हर समय दुर्घटनाएं होती रहती हैं। समाचार भी छपते रहते हैं।फोटो छपते रहते हैं लेकिन कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हुई। 

सीवरेज सिस्टम की इस गड़बड़ी में एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि नगर पालिका के अधिकारी इंजीनियर का ध्यान नहीं है और मौके पर कोई रहता नहीं है। 

नगर पालिका की ओर से देखरेख के लिए करमचंद अरोड़ा सहायक अभियंता को लगाया हुआ है जो कार्यकारी अधिशासी अभियंता के रूप में यहां से सैकड़ों किलोमीटर दूर बालोतरा में नियुक्त है। वे इतनी दूरी से क्या निरीक्षण करते हैं?

 यह व्यवस्था आश्चर्यजनक ढंग से इसलिए की गई है कि करमचंद अरोड़ा बालोतरा से सूरतगढ़ अपने घर सीवरेज की सार संभाल में आते रहें। बालोतरा में सीवरेज की इसी कंपनी का कार्य चल रहा है जिसने सूरतगढ़ में निर्माण किया है। यह भी आश्चर्यजनक है कि सीवरेज सिस्टम में गड़बड़ी होने के बावजूद नगर पालिका की ओर से जनवरी 2020 में बहुत बड़ी रकम का भुगतान किया जाने की चर्चा है।

चर्चा है कि यह भुगतान करमचंद अरोड़ा के कारण हुआ। सीवरेज सिस्टम जब बिगड़ा हुआ है लोगों को मल मूत्र युक्त पानी पीना पड़ रहा है तो हरेक भुगतान किस आधार पर हुआ।

 सूरतगढ़ के विधायक रामप्रताप कासनिया ने सीवरेज में गड़बड़ी का आरोप करोड़ों रुपए के गलत भुगतान आदि पर विधानसभा में प्रमाणों सहित वक्तव्य दिया था। 

सीवरेज सिस्टम पर गड़बड़ी के समाचार रिपोर्ट समाचार पत्रों में लगातार आ रही है मगर सुधार की कोई गुंजाइश नजर नहीं आ रही।

शहर के लोग सिस्टम से बुरी तरह से पीड़ित है और उनकी मजबूरी है कि पेयजल मल मूत्र युक्त पीना पड़ रहा है। शहर में जहां सिवरेज नहीं है वहां भी पेयजल रेतीला मटमैला वितरित होना आम बात है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिक विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कभी मोहल्लों और गलियों में घूमे तो अशुद्ध पेयजल का मालूम हो।

बिजली पानी के कारण शहर में उबाल हो रहा है। 

प्रशासनिक अधिकारियों को भी शहर में भ्रमण करके मालूम करना चाहिए कि यह आग सुलग रही है जो कभी भी भड़क कर आंदोलन का रूप ले सकती है। प्रशासनिक अधिकारी विभागों के लापरवाह अधिकारियों और अव्यवस्था पर अपनी रिपोर्ट जिला कलेक्टर को भेजें तो शायद कोई सुधार की उम्मीद हो या फिर नाकाम अधिकारियों का यहां से स्थानांतरण हो।०००ब्लास्ट की आवाज/कापी नहीं करें।






वीर तेजाजी जाट संस्था सूरतगढ़- डा.दलीप-अध्यक्ष ओम चाहर सचिव,मोहन डेलु कोषाध्यक्ष निर्वाचित.



सूरतगढ़ 28 जून  2020.

वीर तेजाजी जाट संस्था की संचालन समिति के अध्यक्ष डॉ दिलीप सिंह सिहाग सचिव ओम प्रकाश चाहर और कोषाध्यक्ष मोहनलाल डेलु सर्वसम्मति से चुने गए।

 महासभा की बैठक 28 जून में इन पदाधिकारियों का चुनाव सर्वसम्मति से हुआ। 

 डॉक्टर दलीप सिंह सिहाग को अध्यक्ष ओम चाहर को सचिव और  मोहनलाल डेलु को कोषाध्यक्ष चुना गया। ओमप्रकाश चाहर पहले भी पदाधिकारी रह चुके हैं। 

चुने जाने के बाद सभीने अपने विचार रखे। मंदिर और धर्मशाला निर्माण पर विचार प्रगट हुए।

महासभा की इस बैठक में सूरतगढ़ के वर्तमान विधायक रामप्रताप कासनिया,पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह भादू,पूर्व विधायक गंगाजल मील,पूर्व पंचायत समिति प्रधान चंदू राम लेघा, उप प्रधान रामकुमार भांभू,पूर्व उप प्रधान पंचायत समिति कृष्ण गोदारा, वीर तेजाजी जाट संस्थान के पूर्व अध्यक्ष राजाराम गोदारा आदि उपस्थित थे। 

निवर्तमान अध्यक्ष विजय सिंह ताखर ने अपनी कार्यकारिणी और संस्था सदस्यों का आभार प्रकट किया। विजय सिंह ताखर 3 साल तक अध्यक्ष रहे हैं और उनके कार्यकाल में संस्था में अनेक विकास कार्य हुए हैं।००

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नशे के विरुद्ध समाज को संदेश देती बच्चों की चित्रकारी-हनुमानगढ़

नशेड़ी व्यक्ति परिवार व समाज पर बोझ: जाकिर हुसैन कलक्टर 


हनुमानगढ़, 26 जून, 2020.

 दवाओं के दुरूपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ आज अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर स्थानीय एएनएम ट्रेनिंग सैण्टर में ‘‘नशे के दुष्प्रभाव‘‘ विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में जिला कलक्टर जाकिर हुसैन, सीएमएचओ डॉ. अरूण कुमार, पीएमओ डॉ. एमपी शर्मा, आरसीएचओ डॉ. विक्रम सिंह, एसीएमएचओ डॉ. पवन कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी डॉ. अभिषेक, एएनएम प्रशिक्षण केन्द्र के अधीक्षक रणवीर सिहाग, डॉ. एमएस बेनीवाल, पीआरओ सुरेश बिश्नोई, आईईसी-सीओ मनीष शर्मा एवं प्रशिक्षण केन्द्र का स्टॉफ उपस्थित था।





जिला कलक्टर जाकिर हुसैन ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप्र प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत की। उन्होंने उपस्थित बालिकाओं को बताया कि नशा एक ऐसी बुराई है जो हमारे समूल जीवन को नष्ट कर देती है। नशे की लत से पीड़ित व्यक्ति परिवार के साथ समाज पर बोझ बन जाता है। युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा नशे की लत से पीड़ित है। सरकार इन पीड़ितों को नशे के चुंगल से छुड़ाने के लिए नशा मुक्ति अभियान चलाती है, शराब और गुटखे पर रोक लगाने के भी प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि हमें अपने परिजनों एवं परिचितों को इस बुराई से दूर रखने की हरसम्भव कोशिश करनी चाहिए ताकि हम एक समृद्ध समाज बनाने में सहयोग कर सकें। इस अवसर पर सीएमएचओ डॉ. अरूण कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी डॉ. अभिषेक व अन्य अतिथियों ने भी नशे पर अपने-अपने विचार रखें। अतिथियों ने बालिकाओं द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स का अवलोकन किया। चित्रकारी प्रतियोगिता में अच्छी पेंटिंग्स बनाने वाली छात्राओं एवं अच्छा परिणाम लाने वाली छात्राओं को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।००




उद्यान आभा को सुपरफास्ट बनवाने और चालू रखने के सभी प्रयास होंगे-पूर्वी रेलवे के अधिकारियों से भीम शर्मा मिलेंगे।



श्रीगंगानगर, 27 जून 2020.

पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री व सांसद श्री निहालचंद ने कहा हैं कि उद्यान आभा तूफान एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 13007/13008) का संचालन जारी रखने के लिये हर सम्भव प्रयास जारी हैं। सांसद के अनुसार हमने हमेशा रेलवे से इस ट्रेन की संचालन सम्बन्धी बिगड़ी हुई व्यवस्था में सुधार की बात उठाई हैं। विगत 21 सितम्बर 2003 को तत्कालीन रेल मंत्री श्री नीतीश कुमार के श्रीगंगानगर आगमन के अवसर पर श्रीगंगानगर रेलवे स्टेशन पर सरूपसर-श्रीगंगानगर रेल खण्ड के आमान परिवर्तन परियोजना के शिलान्यास कार्यक्रम के अवसर पर उन्होंने इस ट्रेन की लेट लतीफी की चर्चा की थी। तब रेलमंत्री ने इसकी माॅनिटरिंग करवाने का आश्वासन दिया था। उसके बाद कुछ समय के लिये सुधार हुआ भी था लेकिन उसके बाद वही हाल हो गया। इसके बाद भी इसमे सुधार के लिये लिखा गया, लेकिन अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नही दिया व अब एकदम बंद करने की योजना तैयार कर रेलवे बोर्ड को भेज दी। उन्होंने कहा कि हर हाल में ट्रेन बन्द नही होने दी जायेगी। इस सम्बंध में लगातार रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से फोन पर सम्पर्क किया जा रहा हैं व जल्द ही दिल्ली में रेलमंत्री श्री पीयूष गोयल से मुलाकात करेंगे। जेडआरयूसीसी के पूर्व सदस्य  भीम शर्मा के अनुसार वे खुद इस सम्बंध में ईस्टर्न रेलवे के अधिकारियों के सम्पर्क में हैं।शर्मा के अनुसार उन्होंने कल ही ईस्टर्न रेलवे के सीपीडी श्री एण् के दुबे से फोन पर बात की हैं। ईस्टर्न रेलवे की ओर से ट्रेन को बन्द करने के पीछे जो मुख्य तकनीकी व संचालन सम्बंधी समस्या बताई गयी हैं उसके समाधान के लिये एक प्रस्ताव तैयार किया गया हैं। इस प्रस्ताव पर अधिकारियों से चर्चा के लिये वे खुद जल्द ही कोलकाता जायेंगे। जो प्रस्ताव तैयार किया गया हैं उसके अंतर्गत श्रीगंगानगर से हावड़ा के मध्य इस ट्रेन के एक सौ से ज्यादा ठहराव में से अधिकांश को बन्द करवा इसे सुपरफास्ट गाड़ी का दर्जा दिलवाना हैं।

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शनिवार, 27 जून 2020

👌 तेरी बांसुरी बजेगी मौसम खुशनुमा होगा* कविता- करणीदानसिंह राजपूत.




तेरी बांसुरी बजाने को
मेरा जी करता रहता है
तूं बुलाले या मैं आऊं
यह तुझे ही सोचना है।
तेरी बांसुरी बजाने को
मेरा जी करता रहता है।
मैं आकर बांसुरी बजाऊं
इससे मुझे खुशी तो होगी
तूं मुझे बुलाकर  बजवाए
उससे तुझे भी खुशी होगी।
तेरी बांसुरी बजाने को
मेरा जी करता रहता है।
मेरे बजाने से बांसुरी की
नयी गूंज नयी बहार होगी
समझ में आए तब बुलाना
वह समय मनोरम   होगा।
तेरी बांसुरी बजाने को
मेरा जी करता रहता है।
यह मौसम बदलते रहना
कभी गरमी कभी बरखा
बांसुरी बजेगी तो और
खुशनुमा सुगंधित होगा।
तेरी बांसुरी बजाने को
मेरा जी करता रहता है।
०००००
काव्य शब्द:-


करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
94143 81356.
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रेलगाड़ियां चलाने की मांग को लेकर 4 जुलाई से आंदोलन की चेतावनी



*करणीदानसिंह राजपूत*
सूरतगढ़, 27 जून 2020.
विभिन्न राजनैतिक सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए चुनिंदा नेताओं कार्यकर्ताओं ने कोरोना लाकडाउन के चक्कर में बंद की गई रेलों को शुरू करने की मांग को लेकर रेलवे प्रशासन को एक चेतावनी पत्र दिया है।
इस चेतावनी पत्र में लिखा गया है कि पहले एक पत्र 2 जून को दिया गया था और अब रेलें  चलाई जाए अन्यथा 4 जुलाई से आंदोलन की शुरुआत की जाएगी।
लॉकडाउन काफी खुल गया। श्रमिक ट्रेनों को चलाया गया है।
ऐसे में इस इलाके में रेलवे बंद है और श्रीगंगानगर जिले में राजस्थान के कई स्थानों पर बसों का आना-जाना शुरू हो चुका है।
आज 27 जून को प्रबुद्ध नागरिकों की ओर से स्टेशन अधीक्षक को ज्ञापन उत्तर पश्चिम रेलवे के बीकानेर मंडल अधीक्षक को भेजा गया है और महाप्रबंधक को इसकी कॉपी दी गई है।


नागरिकों की ओर से श्री गंगानगर हनुमानगढ़ सूरतगढ़ क्षेत्र में चलने वाली पैसेंजर और एक्सप्रेस गाड़ियों का तथा दूरस्थ जाने वाली सूरतगढ़ को क्रॉस करने वाली एक्सप्रेस रेलगाड़ियों का भी हवाला दिया गया है। गाड़ियों के नंबर दिए गए हैं जिनके चलाने की मांग की गई है।
यह गाड़ियां श्री गंगानगर हनुमानगढ़ और सीमा क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इन गाड़ियों में
बाड़मेर हरिद्वार लिंक एक्सप्रेस, हनुमानगढ़ कोटा सुपरफास्ट जो श्रीगंगानगर से भीलवाड़ा तक चलती है,
अहमदाबाद जम्मू तव्वी जिसका भी विस्तार हुआ है। 
इनके अलावा सूरतगढ़ से जयपुर पैसेंजर गाड़ी,श्री गंगानगर सूरतगढ़, सूरतगढ़ अनूपगढ़ आने जाने वाली पैसेंजर गाड़ियों के चलाने की मांग की गई है। मुद्दा यह दिया गया है की बसें चल रही है।
स्टेशन अधीक्षक को यह ज्ञापन बलराम वर्मा के नेतृत्व में दिया गया। बलराम वर्मा वर्तमान में कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष हैं। इनके अलावा कांग्रेसी अंकुश गाबा, नौरंगसिंह राजपूत,विमलसिंह राजपूत,एडवोकेट ललित शर्मा, हरनेक सिंह मान
,बसपा के अमित कल्याणा, ब्लॉग राइटर हेमंत चांडक,कुलदीप सिंह, पवन कुमार, गुरचरण सिंह कंबोज, राजेश कुमार और संजय की ओर से दिया गया।००





शुक्रवार, 26 जून 2020

👌आपातकाल काला दिवस पर लोकतंत्र सेनानी स्व.गुरूशरण छाबड़ा की प्रतिमा पर माल्यार्पण-


*सूरतगढ़ 26 जून 2020.
लोकतंत्र सेनानी गुरूशरण छाबड़ा की प्रतिमा पर आज 26 जून को लोकतंत्र सेनानी पत्रकार करणी दान सिंह राजपूत और पत्रकार महेंद्र सिंह जाटव ( संपादक ब्लास्ट की आवाज़) ने माल्यार्पण किया।

गुरुशरण छाबड़ा के नेतृत्व में यहां सूरतगढ़ में आपातकाल लगने के दिन ही 26 जून 1975 को आम सभा हुई थी। आम सभा में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जबरदस्त विरोध किया गया था।
लोकतंत्र सेनानी गुरुशरण छाबड़ा ने बाद में प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तारी भी दी और कई महीनों तक जेल में रहे थे। उनके नेतृत्व में चले सरकार विरोधी कार्यक्रम में 12 लोग सीआरपीसी की धाराओं और 12 लोग रासुका में जेलों में बंद किए गए थे। करणीदानसिंह राजपूत स्व.छाबड़ा के अनेक आंदोलनों और संघर्षों के साथी रहे हैं।
गुरूशरण छाबड़ा ने राजस्थान में पूर्ण शराबबंदी की मांग को लेकर आमरण अनशन करते हुए 3 नवंबर 2016 को जयपुर में प्राण त्यागे। उनके नाम पर सूरतगढ़ के राजकीय महाविद्यालय का नाम गुरूशरण छाबड़ा राजकीय महाविद्यालय किया गया है। ००


गुरुवार, 25 जून 2020

जयप्रकाश नारायण अमर रहे जयघोष से लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान



* भारतसरकार लोकतंत्र सेनानी सम्मान और सम्मान निधि व स्वतंत्रता सेनानी समान सुविधाएं प्रदान करे- करणीदानसिंह राजपूत*
सूरतगढ़ 25 जून 2020.
भारतीय जनता पार्टी सूरतगढ़ द्वारा विधायक श्री रामप्रताप कासनियां के नेतृत्व में आपातकाल दिवस पर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता आपातकाल लोकतंत्र सेनानी 85 वर्षीय स.गुरनामसिंह कम्बोज ने की। बाबू जयप्रकाश नारायण के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पण के बाद आपातकाल 1975 के लोकतंत्र रक्षक सेनानी श्री गुरनाम सिंह, पत्रकार श्री करणीदान सिंह,श्री मुरलीधर उपाध्याय को विधायक रामप्रताप कासनिया ने मालाएं पहनाकर शाल ओढा कर सम्मानित किया।
कासनिया ने आपातकाल के बारे में बताते हुए कहा कि 25 जून, 1975 की रात को भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास के काला अध्याय को पढ़ना चाहिए। देश के लोकतंत्र पर पहरा बैठा दिया गया था।पूरा देश सड़कों पर उतरा और सरकार को जनता की चुनौती मिली।
करणीदानसिंह राजपूत व मुरलीधर उपाध्याय ने आपातकाल में संघर्ष और जेलयात्रा के बारे में संस्मरण सुनाए।
करणीदानसिंह राजपूत ने कहा कि भारतसरकार को लोकतंत्र सेनानी सम्मान,सम्मान निधि और स्वतंत्रता सेनानी समान सुविधाएं दी जाए और इसके लिए संपूर्ण भारत के लिए एक कानून बनाया जाए। सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस तक यह कार्य करने के मांगपत्र और ज्ञापन देशभर से सेनानियों और संगठनों द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और गृहमंत्री अमितशाह को भेजे गए हैं तथा यह प्रक्रिया अभी चल रही है।
सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने तो स्वतंत्रता आंदोलन के लोगों को अपना मानते हुए स्वतंत्रता सेनानी घोषित करने में तुरंत पहल की अब भाजपा ग्रुप सरकार को लोकतंत्र सेनानियों को लोकतंत्र सेनानी सम्मान प्रदान करने में देरी नहीं करनी चाहिए। 

इस अवसर पर नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा,जिला उपाध्यक्ष शरणपालसिंह मान व प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित थे। मंडल सचिव सुभाष गुप्ता ने आपातकाल पर अनेक विवरण देते हुए कार्यक्रम का संचालन किया। सभी ने आपातकाल का विरोध करते हुए बांहों पर काले रिबन बांधे।
भाजपा प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार यह 25 जून को आपातकाल कार्यक्रम किया गया। राष्ट्रगान और भारतमाता के जयघोष के साथ कार्यक्रम सम्पन्न किया गया।**


रविवार, 21 जून 2020

योग दिवस पर नेता:कविता


योग दिवस पर अनेक नेता
कसमसा रहे थे।
अपने तम्बूरे से पेट पर
हाथ फिरा फिरा
मन की बात
अपने ही मन से
कर रहे थे।
खाली पेट
कैसे करें योग,
हर समय खाते
रहे हैं और
खा खा कर पेट
तम्बूरा बना चुके हैं।
अब मोदी जी के
कहने पर
पेट को खाली
कैसे करें?
इसमें तो
सारा धन दौलत
जमा हैं।
नोटों की कितनी गड्डियां,
कितनी खदानें
कितनी फाईलें
कितने दफ्तर
पेट में भरे हैं।
कैसे करें योग
पेट को कैसे करें खाली?
मानलें मन की बात भी
मगर पेट को खाली करना
इतना आसान नहीं।
पेट
कैसे हो सकता है खाली
हर वक्त कोई न कोई
आ जाता है
और ठूंस जाता है
पेटी खोका।
कैसे समझाऐं
पी एम को
पार्टी के माननीयों
को भी भेंट चढाने
होते हैं
पेटी और खोके।
पार्टी का जन्म,
सत्ता के साल
हर साल की सफलता
के समारोह तो
खुशियों खुशियों में
कर जाते हैं
करोड़ों के वारे न्यारे।
सच्चे मन से भी
खाली करना शुरू
करें पेट आज से
तो भी
कई साल लग जाऐंगे।
भरे पेट से योग नहीं होता
लेकिन भरे पेट से
मन की बात हो जाती है।
बड़े विचित्र है
मन और तन
भरे पेट हो तो
दोनों
सब समझ जाते हैं
अब कैसे समझाऐं
कि खाली पेट
रहो योग करने को।
एक दिन के वास्ते
आदत बदलनी
कितनी होगी
खतनाक।
ऊपर वाले ने
मांग ली पेटी
या मांग लिया खोका
तो वह कैसे मानेगा कि
हम योग करने लगे हैं
और खाली पेट रहने लगे हैं।
तब आप कैसे बचाऐंगे?
फंस गए या फंसा दिए गए
तब क्या होगा?
कितनी गजब ढाऐगी
वह दशा
जब फंदे से छूटने के लिए
अलग से भेंट
चढ़ानी होगी?
मोदी जी
एक काम करो
देश को पेपर लैस
करने में लगे हो।
सरकारी इन्सान को
हैंड लैस करदो।

ना लेना होगा
ना देना होगा
लुढ़कता हुआ
योग करता रहेगा।
........

सर्जन 21 जून 2016.
अपडेट 21 जून 2020.





करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।

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मंगलवार, 16 जून 2020

हिन्दु देवी देवताओं में अपार शक्ति चमत्कार:बाबाओं की पूजा भेड़चाल

👌हिन्दु देवी देवताओं में बाबाओं से ज्यादा शक्ति है ज्यादा चमत्कार है तो फिर किसी भी हिन्दु मंदिर में हिन्दु देवी देवताओं के साथ किसी बाबा की प्रतिमा की ना तो जरूरत है और न उनकी पूजा पाठ की।
विशेष टिप्पणी- करणीदानसिंह राजपूत

अपार अतुलनीय बलशाली हनुमानजी ने बाल्यकाल में फल जान कर सूरज को मुंह में डाल लिया था। युद्ध में लक्ष्मण के मूच्र्छित होन पर उनकी मूच्र्छा दूर करने को संजीवनी बूटी के लिए पर्वत ही उखाड़ लाए। ऐसे बलशाली हनुमान के मंदिरों में किसी बाबा की प्रतिमा लगाना और पूजना कि उसकी पूजा अर्चना से बड़े बड़े लाभ मिलते हैं, या लाभ हो सकते हैं। जब आपके पास में शक्तिशाली हनुमान हैं तब उनसे किसी भी प्रकार से शक्ति में रती भर भी मुकाबला नहीं कर सकने वाले बाबाओं की पूजा आराधना की जरूरत कहां है? मेरे विचार में तो किसी भी बाबा में हनुमान जी जितनी शक्ति तो नहीं बताई गई और न किसी बाबा के चमत्कार में प्रगट हुई। जब ऐसी स्थिति है तब हनुमान मंदिर में किसी बाबा की प्रतिमा लगाना और पूजा करना और करवाना केवल भेड़चाल है। सुने सुनाए चमत्कार के पीछे भाग दौड़ करना और कुछ लोगों के कहने सुनने मात्र से किसी बाबा के पीछे लग जाना। यही तो भेड़चाल है।
जब अपार शक्तिशाली और अपार चमत्कारी आपके पास में है तो फिर मामूली शक्ति वाले के पीछे दौडऩे की जरूरत ही नहीं होनी चाहिए।
एक हनुमान तो उदाहरण मात्र है।
हिन्दु देवी देवताओं में बाबाओं से ज्यादा शक्ति है ज्यादा चमत्कार है तो फिर किसी भी हिन्दु मंदिर में हिन्दु देवी देवताओं के साथ बाबाओं की प्रतिमाओं की ना तो जरूरत है और न उनकी पूजा पाठ की। वैसे भी किसी अन्य धर्म मुस्लिम ईसाई व अन्य को मानने वाले बाबाओं की प्रतिमाओं को तो हिन्दु मंदिरों में लगाया ही नहीं जाना चाहिए। पूजा आराधना पद्धतियां अलग अलग होती है तो उनसे अवरोध तो पैदा होता ही है।
कोई किसी बाबा की पूजा पाठ आराधना करता है तो अलग से कहीं भी प्रतिमा लगा सकता है,लेकिन वह हिन्दु मंदिरों में लगाने को तत्पर क्यों रहता है?
बाबा का पूजा स्थल अलग हो और प्रतिमा अलग स्थान पर लगाई हो तो ना किसी का आपसी विवाद ना आलोचना ना कोई झगड़ा फसाद।
अगर पहले कहीं हिन्दु मंदिरों में किसी बाबा की प्रतिमा लगा दी गई है तो भी बाबा के अनुयायी भक्त दूसरे स्थान पर लगा कर विवाद की उत्पति को ही रोक सकते हैं।
पुन एक बार कहना चाहता हूं कि अपार शक्तिशाली हिन्दु देवी देवताओं को मानने वाले को किसी बाबा के फेरे में पडऩे की आवश्यकता ही नहीं है।
जहां तक बाबाओं की प्रतिमाओं की बात है और किसी भी बाबा की प्रतिमा किसी भी मंदिर में पूर्व में किसी उत्सुकता में भुलावे में लगादी हुई हो तो हटनी ही चाहिए।
इसके अलावा देव प्रतिमाओं के पास में व उनके चरणों के पास में कथा वाचकों साधु संतों की मंढी हुई तस्वीरें और कैलेंडर आदि लगा दिए जाते हैं। किसी प्रभावशाली दानदाता ने भेंट कर दी और पुजारी ने लगादी। इनसे भी ध्यान बंटता है। ऐसी हर तस्वीर को भी हटा दिया जाना चाहिए।
नोट- किसी बाबा विशेष से जोड़ कर देखने की जरूरत नहीं कोई भी बाबा हो उसकी प्रतिमा मंदिर में लगनी ही नहीं चाहिए।

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15 जुलाई 2014
अपडेट 16 जून 2020.

रविवार, 14 जून 2020

राजस्थान में उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की ताकत को किनारे नहीं लगाया जा सकता.


- करणीदानसिंह राजपूत-
राजस्थान की कांग्रेस में सचिन को किनारे पर फेंक देना अशोक गहलोत के वश में नहीं है।
यदि यह संभव होता तो सरकार के गठन में देरी नहीं होती। बहुमत के बावजूद यह  तय नहीं हो पाया था कि मुख्यमंत्री कौन होगा? सचिन का भी दावा था सीएम पद पर। राहुल का नारा था युवाओं को आगे लाने का? सचिन को विधानसभा में आने से रोका नहीं जा सका। आखिर उप मुख्यमंत्री बनाए गए। वैसे यह पद होता ही नहीं है। एक प्रकार से डंडे के बल पर सचिन ने यह पद लिया। यह पद तो मिला लेकिन मंत्रालय गृह विभाग अशोक ने अपने पास रख लिया। सचिन ने उप मुख्यमंत्री पद लिया मगर अशोक गहलोत के कार्य में अप्रत्यक्ष रूप में अड़गें डलने शुरू हो गए। ऐसे में सचिन के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं हो सकती। सचिन के विरुद्ध कार्रवाई का सीधा विस्फोट सत्ता में होने का खतरा। यह खतरा कभी खत्म नहीं होने वाला। अशोक गहलोत की सरकार पर हर समय नंगी तलवार। सचिन के पास इतनी ताकत है तभी तो उसे फेंका नहीं जा सकता। कुछ भी सचिन के विरुद्ध हुआ तो सचिन और उसके समर्थक विधायकों को को अशोक गहलोत के विरूद्ध होने का मौका मिल जाएगा।
अशोक गहलोत समर्थकों को सचिन के विरुद्ध कार्रवाई की काफी समय से उम्मीद है और कुछ कुछ समय बाद वे हवा भी देते रहते हैं। सचिन पायलट प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं और उनके विरुद्ध कार्यवाही की बातें फैलाते रहना हवाई किले बनाना है। आशोक समर्थकों की
मान लें कि राज्यसभा के चुनाव के बाद सचिन पर कोई कार्यवाही होती है तब भी सरकार पर खतरा तो रहेगा बल्कि विस्फोटक स्थिति हो जाएगी। राजस्थान की कांग्रेस सरकार में क्या एकेले सचिन समर्थकों की गलतियां है? इसका जवाब ना में मिलेगा। विस्तार से बिंदु तलाशने पर अशोक गहलोत की कमियां भी बहुत मिलेंगी।
राजस्थान में कांग्रेस की सत्ता में विरोध पनपने का मुख्य अशोक गहलोत भी हैं। मंत्री मंडल का विस्तार नहीं करना एक प्रमुख कारण है। अभी मंत्री मंडल में 30 सदस्यों में से केवल 25 हैं। मंत्री मंडल विस्तार करने से असंतोष पैदा होने का संभावित खतरा तो रहेगा लेकिन अब बिना विस्तार के भी खतरा तो चल ही रहा है। इसके अलावा विभिन्न बोर्डों के अध्यक्ष आदि भी नहीं बनाए गए। यह इंतजार से इंतजार की घड़ियां भी अशोक गहलोत सरकार के लिए खतरा बनी हुई हैं।**
दि. 14  जून 2020.
* करणीदानसिंह राजपूत.
पत्रकार,
सूरतगढ़.( राजस्थान)
94143 81356.
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शुक्रवार, 12 जून 2020

भाजपा नेता पूर्व विधायक राजेंद्र भादू व दो भाईयों के सीज शापिंग काम्पलेक्स की पुनः नापजोख .रिपोर्ट डीडीआर को पेश होगी.


* करणीदान सिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 12 जून 2020.
भाजपा नेता पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह भादू और उनके दो भाइयों देवेंद्र व रविंद्र का शहर के मुख्य बाजार में निर्माणाधीन विशाल कटला (शॉपिंग कांप्लेक्स) का आज पुनः नापजोख किया गया। नगर परिषद श्रीगंगानगर के नगर नियोजक सहायक फरसा राम बिश्नोई ने नापजोख किया। नगर पालिका के एईएन सुमित माथुर और भूमि शाखा के लिपिक रामप्रकाश भी नाप जोख कराने में शामिल थे।

नगरपालिका ने यह कटला छ माह पहले 13 दिसंबर 2019 को सीज किया था जिसमें 6 माह तक की अवधि नोटिसों पर लिखी थी।
सील करते वक्त तीनों भाईयों के नाम से अलग अलग नोटिस कटले पर चिपकाए गए थे।
नगरपालिका ने यह प्रकरण। स्वायत्त शासन के बीकानेर स्थित उपनिदेशक को पेश कर दिया।
उपनिदेशक के समक्ष राजेंद्रसिंह भादू व दोनों भाईयों की ओर से अपना पक्ष पेश किया गया जिसमें पालिका सूरतगढ़ के बजाय किसी अन्य एजेंसी से नाप आदि करवाने की मांग की गई थी।
उपनिदेशक ने कुछ दिन पहले नगरपालिका को अन्य से नापजोख कराने का निर्देश दिया। इस निर्देश पर पहले यूआईटी श्रीगंगानगर को लिखा गया।वहां से इन्कार के बाद यह कार्य नगर परिषद श्रीगंगानगर से करवाया गया है। यह रिपोर्ट उपनिदेशक को सौंपी जाएगी। इसके बाद उपनिदेशक निर्णय करेंगे।
नगरपालिका के तत्कालीन ईओ लालचंद सांखला ने निर्माण स्वीकृति के अनुसार निर्माण नहीं करने का आरोप लगाते हुए कटले को सीज किया था। शिकायतें थी कि तीनों भाईयों की तीन अलग अलग निर्माण स्वीकृति थी और अलग अलग तीन निर्माण करने के बजाय एकल विशाल निर्माण कर लिया गया। कटला लगभग पूर्णता के अंतिम चरण में था तब सीलमोहर लगा कर सीज कर दिया गया था। विशाल कटले के कुल तीन तल हैं। दो तल ऊपर और एक भूतल के नीचे है।



%% पाठकों की जानकारी ताजा करने के लिए सीज के समय का समाचार यहां दिया जा रहा है।%%

सूरतगढ़ 13 दिसंबर 2019.
नगर पालिका सूरतगढ़ की ओर से आज दोपहर बाद पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह भादू और उनके दो भाइयों देवेंद्र और रविंद्र द्वारा बनाया जा रहा कटला सील मोहर के साथ 6 माह के लिए सीज कर दिया गया।
अधिशासी अधिकारी लालचंद सांखला के नेतृत्व में नगरपालिका अधिकारियों व कर्मचारियों का बड़ा दल आज कार्यवाही के लिए पहुंचा।
 अधिशासी अधिकारी एवं प्राधिकृत अधिकारी लालचंद सांखला के निर्देशन में एक लंबी रस्सी ताले लगाए जाने वाले स्थानों को लपेटते हुई सभी सटरों के साथ बांधी गई और बाद में चपड़ी मोहर करके और जब्ती की कार्यवाही की गई।
 नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी की ओर से तीनों भाइयों के नाम से निर्माणाधीन कटले पर नोटिस चिपकाए गए हैं। उनमें लिखा गया है कि मानचित्र के अनुसार निर्माण नहीं हुआ। 
यह जानते हुए सीज की यह कार्यवाही नगरपालिका की ओर से की गई है। नगरपालिका की कार्रवाई के समय कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और फोटोग्राफी के लिए समाचार पत्रों से चैनल से जुड़े हुए पत्रकार और कैमरामैन मौके पर पहुंच गए। लालचंद सांखला के बयान भी लिए गए जिसमें उन्होंने कहा कि सभी कार्यवाही नियमानुसार की गई है।  पूर्व में नोटिस दिये गये और अवैध निर्माण रोका नहीं गया तब नगरपालिका ने नियमानुसार कार्रवाई की है।
 कार्रवाई के समय उत्सुकता से भारी भीड़ इकट्ठे हो गई थी जो काफी देर तक वहां जमी भी रही।
भादू सूरतगढ़ की राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं इसलिए पालिका की इस कार्यवाही  पर जनता की ओर से आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा था,और कहां जा रहा था कि समय समय की बात है  जो पालिका ने इतने बड़े नेता पर हाथ डाला है। राजेंद्र सिंह भादू 2013 से 18 तक सूरतगढ़ से भाजपा टिकट पर जीते विधायक रहे हैं। भादू राज में नगरपालिका में भाजपा का बोर्ड रहा व काजल छाबड़ा अध्यक्ष रहीं।अब कांग्रेस का बोर्ड है तथा 2 दिसंबर को ही ओमप्रकाश कालवा ने अध्यक्ष पद पर कार्य शुरू किया है।
समझा जा रहा है कि राजेंद्र सिंह भादू व भाइयों की ओर से नगरपालिका की कार्यवाही के बाद अब अदालत का सहारा लिया जाएगा।**



गुरुवार, 11 जून 2020

सीएम अशोक गहलोत का दावा है कि कांग्रेस विधायकों को 25 करोड़ रुपए का ऑफर दिया गया है। गहलोत ही है एसीबी के बॉस।


* एस. पी. मित्तल *

* राजस्थान की एसीबी की जांच के दायरे में मध्यप्रदेश, कर्नाटक और गुजरात में हुए दल बदल की घटनाएं भी आएंगी?*


राजस्थान में कांग्रेस सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के महानिदेशक को एक शिकायत दी है। इस शिकायत में कहा गया है कि मध्यप्रदेश और कर्नाटक की तरह राजस्थान में भी चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने के लिए विधायकों को 25 करोड़ रुपए का ऑफर दिया जा रहा है। पत्र में गुजरात में कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे का भी उल्लेख है। यह भी कहा गया है कि विधायकों को खरीदने के लिए जयपुर में बड़ा कैश ट्रांसफर हुआ है। ऐसे तत्वों को चिन्हित कर कानूनी कार्यवाही की जाए। जोशी ने यह पत्र 10 जून को दिया। 11 जून को एसीबी के बॉस माने जाने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जिनके पास गृह विभाग का भी प्रभार है ने कहा कि एक विधायक को 25 करोड़ रुपए का ऑफर दिया गया है। 10 करोड़ रुपए एडवांस देने की बात कही गई है। 15 करोड़ रुपए बाद में दिए जाएंगे। सवाल उठता है कि जब सरकार के मुख्य सचेतक और मुख्यमंत्री इतनी जानकारी दे दी है तब एसीबी क्या जांच करेगी। जांच का निष्कर्ष तो आ ही गया है। यदि मुख्यमंत्री कोई बात कह रहे हैं तो वह झूठ नहीं हो सकती। अब तो एसीबी को उन लोगों को पकडऩा है, जिन्होंने ऑफर दिए हैं। एसीबी को यह भी पता लगाना है कि 25 करोड़ रुपए के ऑफर किस किस निर्दलीय और कांग्रेस के विधायकों को दिए। हो सकता है कि एसीबी का यह काम भी एक दो दिन में मुख्यमंत्री गहलोत आसान कर दें। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में दो-तीन विधायक कह सकते हैं कि उन्हें 25 करोड़ रुपए वाला ऑफर मिला है। जैसे जैसे राज्यसभा चुनाव की 19 जून की तिथि नजदीक आएगी, वैसे वैसे मुख्यमंत्री गहलोत और शिकायतकर्ता महेश जोशी बहुत सारे सबूत एसीबी को उपलब्ध करवा देंगे। 19 जून के बाद जोशी की शिकायत का क्या होगा, यह एसीबी के बॉस अच्छी तरह जानते हैं। लेकिन एक बात अहम है कि गहलोत के अधीन काम करने वाली राजस्थान की एसीबी की जांच का दायरा मध्यप्रदेश, कर्नाटक और गुजरात में हुए दल बदल तक बढ़ सकता है। चूंकि महेश जोशी की शिकायत में इन राज्यों का उल्लेख किया गया है, इसलिए राजस्थान एसीबी की टीम जांच के लिए संबंधित राज्यों में जा सकती है। मालूम हो कि कर्नाटक में कांग्रेस जेडीएस के विधायकों के इस्तीफे से सत्ता परिवर्तन हो गया। इसी प्रकार मध्यप्रदेश में कांग्रेस के 22 विधायकों की बगावत की वजह से कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस गिर गई, जबकि गुजरात में कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस का गणित गड़बड़ा गया है। हालांकि गुजरात में भाजपा की ही सरकार है। अब देखना है कि सरकार के मुख्य सचेतक की शिकायत और मुख्यमंत्री के दावों के बीच एसीबी किस प्रकार से जांच शुरू करती है। 

साभार

(एस.पी.मित्तल) 

(11-06-2020)


मंगलवार, 9 जून 2020

👌 लोकतंत्र सेनानी पूर्व विधायक स्व. गुरूशरण छाबड़ा की जयंती 9 जून को प्रतिमा पर माल्यार्पण.👌



* करणी दान सिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 9 जून 2020.
लोकतंत्र सेनानी पूर्व विधायक शराबबंदी आमरण अनशन में प्राण त्यागने वाले गुरुशरण छाबड़ा की जयंती 9 जून 2020 को सूरतगढ़ में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
छाबड़ा जी के साथ आंदोलनों और  श्रीगंगानगर जेल साथी करणीदानसिंह राजपूत,मुरलीधर उपाध्याय, रासुका बंदी सुगनपुरी ने भाग लिया।
आंदोलनों में शामिल रहे डा.टी.एल.अरोड़ा, बलदेवराज तनेजा,बलदेव छाबड़ा,नारी उत्थान केन्द्र की अध्यक्ष श्रीमती राजेश  सिडाना,मुरलीधर पारीक बाबूसिंह खीची, ,पूरण कवातड़ा,शहर के मान्य योगेश स्वामी( विविधा) इंजी.रमेश माथुर,आकाशदीप बंसल,रामेश्वरदयाल तिवाड़ी ने भाग लिया।
प्रतिमा स्थल पर पेड़ों के पास ही एक पौधा लगाया गया।
गुरुशरण छाबड़ा के साथ विभिन्न आंदोलनों में संघर्षों में साथ रहने वाले साथी गण और शराबबंदी विचारधारा के मानने वाले एकत्रित हुए छाबड़ा जी के कार्य संस्मरण आदि पर विचार रखे। लोकडाउन के कारण बहुत नजदीकी लोगों ने सोशलडिस्टेंस को अपनाते हुए भाग लिया।**
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