Friday, November 4, 2016

लोगों का सांस पीती खतरनाक दिल्ली - पीवणा सांप बनी दिल्ली - लोगों में डर बनी दिल्ली-

 - करणीदान सिंह राजपूत -
दिल्ली और आसपास का इलाका खतरनाक प्रदूषण का बना हुआ है और यहां लोगों का सांस लेना मुश्किल हो रहा है। दिल्ली के कई स्कूलों ने बच्चों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए अवकाश घोषित कर दिए हैं। अनेक लोग मुंह नाक पर मास्क लगाकर घरों से बाहर निकल रहे हैं या अपने कार्य स्थलों पर जा रहे हैं।  दिल्ली की वायु इतनी खतरनाक हो गई है की भोर में घूमने वालों को मनाही करते हुए सलाह दी जा दी गई है की 8:00 बजे के बाद में घूमना सुरक्षित है।दीपावली पर फोड़े गए पटाखों के धुएं और कोहरे को मिलकर बना धुंध दिल्ली और आसपास के व्यावसायिक इलाकों में व आकाश में छाया हुआ है।दीपावली को इस बार पटाखे 50% ही फोङे गए लेकिन फिर भी वायु प्रदूषण बहुत अधिक बढ़ा हुआ है।सूचना मिल रही है कि सामान्य वायु प्रदूषण से वर्तमान वायु प्रदूषण 4 गुना अधिक है जिससे वृद्ध बीमार दमे के लोग और बच्चों पर बुरा असर पङ रहा है। दीपावली को बीते हुए 5 दिन हो गए हैं मगर यह खतरनाक धुआं और कोहरा फिर भी आकाश में छाया हुआ है। इसका बुरा असर घरों और सड़कों पर भी है। इस खतरनाक वायु प्रदूषण में दिल्ली के आसपास के प्रदेशों में धान की पराली जलाने से भी धुआँ और अधिक शामिल हो रहा है। हरियाणा में खेतों में जहां चावल की फसल प्राप्त कर ली गई है वहां खेतों में पराली को जलाया जा रहा है। यह धुआँ भी दिल्ली को प्रभावित कर रहा है। दिल्ली नोएडा और अन्य व्यावसायिक इलाकों में वायु प्रदूषण का खतरा बहुत बढा हुआ है तथा लोगों को भयभीत कर रहा है। लोगों का मानना है कि इस वायु प्रदूषण से गंभीर बीमारियां फैल सकती है इसलिए सलाह दी जा रही है और उसके अनुरूप लोग मास्क लगाकर घरों से बाहर निकल रहे हैं।दिल्ली और आसपास के इलाकों में गंदगी और कचरे के ढेर पहले से ही वायु प्रदूषण फैला रहे थे अब उसमें यह दीपावली के पटाखों का धुआं और कोहरा मिलकर वायुमंडल को अधिक बिगाड़ रहे हैं।
दिल्ली का यह खतरनाक वातावरण राजस्थान के पीवणा सांप जैसा खतरनाक हो रहा है। राजस्थान के मरू इलाके खासकर बीकानेर के जंगलों में पाए जाने वाले पीवणे सांप जैसा। पीवणे सांप के बारे में कहा जाता है कि वह सोते हुए व्यक्ति के सीने पर बैठकर सांस पी लेता है जिससे व्यक्ति की मौत हो जाती है। पीवणा सांप व्यक्ति के ऊपर से जाते वक्त फुंकार मार कर या पूंछ की चोट मारकर जगा जाता है मगर  व्यक्ति की हालत उठने जैसी भी नहीं रहती। कोई आस-पास होता है और बेहोश व्यक्ति को देख लेता है तब इलाज होने की उम्मीद होती है अन्यथा व्यक्ति मर जाता है। वर्तमान में दिल्ली इस पीवणा सांप जैसी हो रही है जो लोगों की सांसो को पी रही है तथा बेदम कर के मौत की तरफ धकेल रही है। दिल्ली से  जो सावधान होकर बचाव  करने में सफल होते हैं वे जानलेवा बीमारियों का शिकार होने से बच पाते हैं तथा अपने बच्चों को भी बचा लेते हैं। दिल्ली आकर वापस जाने वाले  न जाने कितने लोग दिल्ली के वायु प्रदूषण का शिकार होकर जाते हैं, यह उनको कई दिन बाद मालूम पड़ता है।

No comments:

Post a Comment

Search This Blog