गुरुवार, 23 अगस्त 2018

पत्रकार कुलदीप नैयर का निधन:(95 वर्ष) आपातकाल विरोधी रहे।


नई दिल्ली 23-8-2018.

प्रख्यात पत्रकार, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता कुलदीप नैयर का निधन 22 -8-2018 बुधवार देर रात हो गया. उनकी उम्र 95 साल थी और वह पिछले तीन दिनों से राजधानी नई दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती थे.


काफी समय से उनकी सेहत नासाज़ थी. आज यानी 23 अगस्त की दोपहर तकरीबन एक बजे लोधी रोड पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.


कुलदीप नैयर उन लोगों में से एक थे, जिन्होंने आपातकाल का खुलकर विरोध किया और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (मीसा) के तहत जेल भी गए.


‘बियॉन्ड द लाइंस’, ‘इंडिया आफ्टर नेहरू’, ‘डिस्टेंट नेबर्स: अ टेल आॅफ द सबकॉन्टिनेंट’, ‘वॉल ऐट वाघा – इंडिया पाकिस्तान रिलेशंस’, ‘सप्रेशन आॅफ जजेस’, ‘द जजमेंट: इन्साइड स्टोरी आॅफ इमरजेंसी इन इंडिया’, ‘विदाउट फीयर: द लाइफ एंड ट्रायल आॅफ भगत सिंह’ और ‘इमरजेंसी रिटोल्ड’ समेत तकरीबन 15 किताबें लिखने वाले कुलदीप नैयर ने इंडियन एक्सप्रेस अख़बार का संपादक रहने के साथ ही 1990 में ब्रिटेन स्थित भारतीय उच्चायोग में बतौर उच्चायुक्त अपनी सेवाएं भी दी थीं.


14 अगस्त 1923 को सियालकोट (अब पाकिस्तान) में जन्मे कुलदीप नैयर ने अपनी पत्रकारिता की शुरुआत उर्दू अख़बार ‘अंजाम’ से की थी. वह अंग्रेज़ी अख़बार ‘द स्टेट्समैन’ के दिल्ली संस्करण के संपादक रहे. इसी दौरान आपातकाल का विरोध करने की वजह से उन्हें जेल भी जाना पड़ा.


पत्रकार और लेखक होने के साथ-साथ वह सामाजिक कार्यकर्ता भी रहे हैं. वर्ष 1996 में संयुक्त राष्ट्र गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का भी वह हिस्सा थे. 1997 में उन्हें राज्यसभा का सदस्य नामांकित किया गया.


अमृतसर में भारत-पाकिस्तान (अटारी बाघा) सीमा पर साल 2000 से 14 और 15 अगस्त को शांति बनाए रखने के उद्देश्य से वह मोमबत्तियां जलाया करते थे. यह सिलसिला एक दशक से ज़्यादा समय तक चला.


इसके अलावा भारतीय जेलों में बंद पाकिस्तानी क़ैदी और पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीय क़ैदी, जिनकी सज़ा पूरी होने के बाद भी उन्हें रिहा नहीं किया गया था, उनके लिए भी वह मुहिम चलाते थे.


वर्ष 1985 से कुलदीप नैयर तकरीबन 80 पत्र-पत्रिकाओं में 14 भाषाओं में कॉलम लिख चुके थे. इनमें बेंगलुरु का ‘डेक्कन हेरल्ड’, ‘द डेली स्टार’, ‘द संडे गार्जियन’, ‘द न्यूज़’, ‘द स्टेट्समैन’, ‘प्रभा साक्षी’ और पाकिस्तान के अख़बार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ और ‘डॉन प्रमुख’ हैं.


पाकिस्तान के लाहौर स्थित फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज से उन्होंने बीए आॅनर्स किया और लाहौर में ही लॉ कॉलेज से एएलबी की डिग्री हासिल की. वह सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर के पिता थे.


इसके अलावा 1953 में कुलदीप नैयर ने एक स्कॉलरशिप मिलने के बाद अमेरिका की नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के मेडिल स्कूल आॅफ जर्नलिज़्म से पत्रकारिता की पढ़ाई की थी.


साल 2015 में पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके अलावा उनके नाम से कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान भी मीडिया में काम करने वाले लोगों को दिया जाता है.


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