शुक्रवार, 31 मार्च 2017

जैन आचार्य विजय आनंद जी महाराज साहब का सूरतगढ़ 8 अप्रैल को आगमन


सूरतगढ।

जैन आचार्य विजयानंद जी  महाराज सा. 8 अप्रैल को यहां पर पधारेंगे। 

उनके संग  मुनिराज  जय कीर्ति विजय महाराज व मुनि दिव्यांश विजय महाराज भी पधारेंगे।  सूरतगढ़ में 2 दिन का प्रवास रहेगा। जैन आचार्य का मंगल प्रवेश 8 अप्रैल को सुबह 8:00 बजे PWD रेस्ट हाउस के पास होगा। यहां से जैन संत श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर पहुंचेंगे। श्री पार्श्वनाथ जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ के सुशील सेठिया ने बताया कि जैन मंदिर में कार्यक्रम होगा। अगले दिन 9 अप्रैल को भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। यह महोत्सव श्री माहेश्वरी सदन में सुबह करीब 8:30 बजे से प्रारंभ होगा। उस दिन जैन समाज की ओर से प्रभात फेरी भी निकाली जाएगी।

आचार्य 10 अप्रैल को श्रीगंगानगर के लिए विहार करेंगे।

गुरुवार, 30 मार्च 2017

राजथानी दिवस माथै राजस्थानी नै मान्यता लेवण सारूं सरकार नै खुली ललकार


पैलां मूं माथै पट्टी बांध जुलूस निकाल्यौ अर बाद मांय जलसे मांय दीन्हीं ललकार

सूरतगढ़ 30 मार्च 2015.अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति री ओर स्यूं राजस्थानी दिवस 30 मार्च रे अवसर माथै राजस्थानी भाषा नै संवैधानिक मान्यता लेवण सारूं जुलूस अर जलसे मांय सीधी ललकार दीन्हीं कै अब चुप रहण री वेळा नीं है। सरकार ललकार  री भाषा जाणै अर ललकार री भाषा ही मानै। अब सगळां रै भेळप रै मजबूत ललकार सूं  ही मनावांगा। 

मंगलवार, 28 मार्च 2017

बीकानेर में विशाल हिंदू यात्रा:भगवा साफे भगवा ध्वज

सूरतगढ़ 28 मार्च 2017 बीकानेर में आज शाम को विशाल हिंदू धर्म यात्रा और महा आरती के जुलूस में लाखों लोगों ने भाग लिया। भगवा ध्वज लहराते पैदल और वाहनों में सवार जोश से वंदे मातरम और भारत माता  जयकारों के साथ यह यात्रा निकाली गई। लोगों के अनुसार यात्रा करीब 5 किलोमीटर थी।

भगवा ध्वज में ओम का चिन्ह बना हुआ था। लोग भगवा साफा, भगवा पटका धारे जोश में थे।अनेक लोगों के हाथों में तलवारें भी थी। इस धर्म यात्रा की चर्चा दूर तक चली।

धर्म यात्रा के कुछ चित्र देखें।।







नई








मलकाना कलां में नशा मुक्ति शिविर आयोजित हुआ:



श्रीगंगानगर, 28 मार्च। जिला पुलिस अधीक्षक श्री राहुल कोटोकी के निर्देशानुसार पुलिस थाना केसरीसिंहपुर द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मलकाना कलां में नशा मुक्ति जन जागृति कार्यशाला एंव निशुल्क नशा मुक्ति परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में राजकीय उ0मा0वि0 मलकाना कलां के विद्यार्थियों सहित भारी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया ।


       कार्यशाला के मुख्य वक्ता नशा मुक्ति विशेषज्ञ डॉ.रविकान्त गोयल ने इस अवसर पर कहा कि नशे में खुशियां तलाशना अपने विनाश को आह्वान देना है। जीवन  में  बढ्ते  तनाव निराशाओं और भौतिक संसाधन जुटाने की अंधी दौड में असफल  रहने  पर  जो लोग नशे में अपनी खुशियां तलाशते है वे धीरे-धीरे अपने और अपने परिवार के जीवन को बर्बादी के रास्ते पर ला के खडा कर देते हैं। नशा किसी भी समस्या का हल नहीं है। जो लोग किसी भी कारणवश नशे की चपेट में आ चुके हैं वे अपने परिवार और समाज के लोगों की सलाह पर नशा छोडे़। दृढ संकल्प से बिना कोई नुकसान उठाए नशा छोडा जा सकता है ।


       सामाजिक कार्यकर्ता श्री बलवन्त सिंह ने विशिष्ठ अतिथि के रूप में सबोंधित करते हुए कहा कि जो लोग समय बिताने के लिए गलत संगति में पड कर नशा करते है। वे सामाजिक कार्यां में जुटकर अपना कीमती समय समाज के विकास में लगाए ताकि एक स्वच्छ नशा मुक्त भारत का निर्माण किया जा सके ।


       कार्यक्रम को संबोधित करते हुए थानाधिकारी श्री जीतराम ने कहा की बच्चों को शिक्षित कर नशा मुक्ति का वातावरण निर्माण करने में बडी मदद मिलेगी।  


       डायरेक्टर प्रतिनिधि श्री अमृतपाल सिंह बराड ने भी इस विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि नशे को समाप्त कर युवा पीढी को राष्ट निर्माण में जोडा जा सकता है ।


        कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री मती रेखा गोयल ने कहा कि आम लोग नशा बेचने वाले लोगों की सूचना पहुंचाए ताकि समाज में जहर फैला रहे लोगों पर प्रभावी कार्यवाही की जा सके। जो लोग किसी भी कारण नशे की चपेट में आ गये हैं वे जिला पुलिस प्रशासन द्वारा संचालित राजकीय नशा मुक्ति परामर्श एंव उपचचार केन्द्र की सेवांए लेकर नशा छोडें ।


        उक्त कार्यक्रम में शाला के, श्री बलजिन्द्र सिंह, श्री सुनील कुमार, श्री तरूण गुप्ता, श्री जगमेल सिंह, श्री गौरव काठपाल, श्री गुरकमल सिंह, श्रीमती सरोज सहित गांव के गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अन्त में डॉ. रविकान्त गोयल ने भविष्य में नशा नहीं करने की शपथ दिलाई ।





सोमवार, 27 मार्च 2017

सूरतगढ: अकाल में पशु आहार खाकर जिंदा रहने की मजबूरी:

-  करणीदानसिंह राजपूत -

सूरतगढ़ तहसील का टिब्बा क्षेत्र जहां अकाल में पशु आहार ( चापड़ )खाकर लोगों को जिंदा रहना पड़ा​ था। यह दर्दनाक दास्तान भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन विधायक हंसराज मिढा और​ मेरे ( करणीदानसिंह राजपूत ) के सामने करीब 34-35 साल पहले उजागर हुआ था। सूरतगढ़ तहसील के अकालग्रस्त टिबा क्षेत्र की रिपोर्टिंग के लिए मैं करणीदान सिंह राजपूत विधायक हंसराज जी मिढा के साथ इलाके के दौरे कर रहा था। हंसराज जी मिढा का कार्यकाल 1980 से 1985 तक का था। सूरतगढ़ तहसील का टिबा क्षेत्र अकाल के समय तड़प उठता था। अकाल राहत कार्यों से भी पार नहीं पड़ती थी। सांवल सर के आसपास ग्रामीण इलाकों में घूमते हुए सांवलसर पहुंचे तब लोगों ने अपनी दर्दनाक दास्तान सुनाई। अकाल राहत कार्य में खुदाई करने का कार्य करवाया जाता था। वहां के लोगों ने बताया कि पक्की जमीन जहां चूना पत्थर भी है खोदना बहुत मुश्किल है। भयानक गर्मी में कुछ घंटों का कार्य होता है। निर्धारित माप की जगह खोदी नहीं जा सकती। वह स्थल भी दिखाए। विधायक हंसराज जी मिढा और मैं पहुंचे पानी वानी पिया और चारपाईयों पर बैठे।लोगों से हाल-चाल जान रहे थे। लोगों ने कहा कि असलियत बताते हुए बड़ा दर्द हो रहा है।शर्म भी आती है कि हमारे हालात और जिस प्रकार का जीवन गुजार रहे हैं वह कितना दर्दनाक है। बार बार पूछा तब लोगों ने बताया कि अकाल के इस भीषण काल में पशु चापड़ (पशु आहार) खा रहे हैं। लोगों ने बताया पशु आहार का थैला लाते हैं। पशु आहार गिट्टियों में होता है। उसे पहले कूटते हैं और बाद में अनाज में मिलाकर पीसते हैं। वह अनाज के आटे में शामिल हो जाता है और उस आटे की रोटियां बनाकर खाते हैं।अकाल में जीवन गुजारते हैं जो जानवरों जैसा है। यह दास्तान सुनकर विधायक जी और मैं दोनों ही हतप्रभ रह गए। पशु आहार या पशु चापड़ कहें वह चावल की कणी भूसी दालों के छिलके चनों के छिलके आदि को मिलाकर के बनाया जाता है । मैं उस समय राजस्थान पत्रिका से जुड़ा हुआ था और मेरी यह रिपोर्ट और इसके साथ अकाल ग्रस्त इलाकों की अन्य रिपोर्टें राजस्थान पत्रिका में चित्रों सहित प्रकाशित हुआ करती थी। आज जब अकालग्रस्त रहने वाले इलाके के लोगों द्वारा एटा सिंगरासर माइनर की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है, तब यह दर्दनाक संस्मरण मैं लोगों के सामने रख रहा हूं। इतनी विकट स्थिति में लोग कैसे जीवन गुजारते हैं। इलाके के लोगों को पानी चाहिए तभी उनका जीवन संवर सकता है।इलाके के जनप्रतिनिधियों को सामाजिक संगठनों को एक राय होकर कार्य करना होगा।एक दिन निश्चित रूप से यह मांग मंजूर होगी। मेरा इलाके के सोशल मीडिया चलाने वालों से निवेदन है कि अगर पसंद है तो इसे सांझा करें काट पीट कर कॉपी करके अपने वाल पर लगाने आदि से बचें। कारण यह है कि जो बात मैं सामने रख रहा हूं वह सही तरीके से पहुंचे।जब काट पीट हो जाती है तब सही रिपोर्ट लोगों तक नहीं पहुंच पाती, इसलिए इसे सांझा करें। 


-करणीदान सिंह राजपूत,

 राजस्थान सरकार द्वारा  अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,

सूरतगढ ( राजस्थान )

संपर्क   94143 81356.


रविवार, 26 मार्च 2017

सीमांत रक्षक अखबार के मालिक के विरूद्ध रजनीमोदी का अदालत में इस्तगासा:




संपादक सत्यपाल मेघवाल,उनकी धर्मपत्नी मीनाक्षी व बेटे योगेश को प्रतिपक्षी बनाया गया था।



सूरतगढ़ 24 अगस्त 2016. 

up date


दैनिक सीमांत रक्षक अखबार के विरूद्ध भाजपा नेता श्रीमती रजनी मोदी ने स्थानीय अदालत में इस्तगासा किया था। 

 अखबार के मालिक संपादक सत्यपाल मेघवाल,उनकी धर्मपत्नी मीनाक्षी व बेटे योगेश को प्रतिपक्षी बनाया गया था।  । इस्तगासे में अखबार का लाखों रूपए का आय व्यय ब्यौरा व कागजात फर्जी तैयार किए जाने का आरोप है। रजनी मोदी की पूर्व में की गई शिकायतों में आरोप था कि लाखों रूपए का अखबार का टर्न ओवर होते हुए भी बीपीएल कार्ड बनवा कर गरीबों को मिलने वाला राशन लेता रहा।
इस्तगासा 23 अगस्त को पेश किया गया है। रजनी मोदी ने पहले विभागों में शिकायतें की व सीएम सूरतगढ़ आई तब उनको शिकायत दी।

रजनी मोदी के इस्तगासे पर सूरतगढ़ सिटी पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा में दिनांक 1-9-2016 को मुकदमा नंबर 437 दर्ज हुआ यह धाराएं थी 386 466 468 469 471 420 और 120 बी में दर्ज हुआ था। रजनी मोदी और अखबार मालिक के बीच समझौता हो गया ऐसी चर्चा है। 

मोदी ने जो आरोप लगाया उसमें सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप भी था। क्या इस बिंदु पर रजनी मोदी समझौता कर सकती है? 

 रजनी मोदी की शिकायत पर सरकारी विज्ञापनों की मंजूरी अखबार को नहीं मिली और वह फाइल जयपुर में अभी भी अटकी हुई पड़ी है। देखते हैं आगे क्या होता है? उस फाइल का निस्तारण कब तक होता है? समाचार पत्रों की फाइलों का निस्तारण निदेशालय में और मंत्रालय में तीव्र गति से होना चाहिए। अगर किसी की शिकायत है तो उन बिंदुओं पर जांच तुरंत की जानी चाहिए। सरकार एक तरफ त्वरित गति से कार्य करने का निर्देश देती है लेकिन सरकार के पास ही फाइल महीनों तक अटकी रहे। इसे नीति और निर्देश के पक्ष में नहीं माना जा सकता।



24-8-2016.
up date 26-3-2017.





एटा सिंगरासर माइनर आंदोलन में टकराव नहीं हो


-  करणीदानसिंह राजपूत - 

सूरतगढ़ 25 मार्च2017.

 एटा सिंगरासर माइनर आंदोलन के नेताओं की ओर से 27 मार्च को सूरतगढ़ बंद करने के साथ ही प्रशासन को ठप करने की चेतावनी भी जारी की हुई है। प्रशासनिक कार्यालयों के चारों तरफ लक्कड़ के अवरोधक लगाकर रास्ते बंद किए हुए हैं।SDM कार्यालय के एडीएम और तहसील कार्यालय सभी के रास्तों पर अवरोधक लगे हुए हैं।  पहले प्रशासन ने शहर में धारा 144 लगाई। आंदोलनकारी शहर में घुसे और इंदिरा सर्किल पर सभा की। प्रशासन पर दबाव बनाया और आखिर प्रशासन को पुलिस थाने के सामने प्रशासनिक कार्यालयों से थोड़ी सी दूरी पर महापड़ाव डालने की अनुमति देनी पड़ी। यह महापड़ाव वाली जगह कोई ज्यादा दूर नहीं है। प्रशासन तो सरकार के नीति निर्देश पर कार्य करता है। सरकार की इच्छा इससे प्रगट हो रही है। वैसे जिला कलेक्टर जिला पुलिस अधीक्षक और सूरतगढ़ के प्रशासनिक अधिकारी किसी प्रकार का भी टकराव का आरोप अपने सिर पर लेने के इच्छुक नहीं हैं। आंदोलन कब शांत रहे और कब अशांत हो जाय।उसका कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। आंदोलनकारियों ने 27 मार्च को प्रशासन ठप करने की चेतावनी दी है तो यह मान कर ही चलना चाहिए थी प्रशासन की मामूली सी चूक होते ही मामला गड़बड़ हो सकता है। आंदोलन में महिलाओं की संख्या भी काफी है जिन्हें रोका जाना निश्चित रूप से असंभव होगा। महिला पुलिस आंदोलनकारियों से जूझे और रोक पाए यह  समय बताएगा। आंदोलनकारियों में बहुत जोर व  जोश है और वे हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि सरकार उनकी मांग को मान ले। टिब्बा क्षेत्र निश्चित रूप से सिंचाई के लिए प्यासा है, बल्कि समुचित पेयजल भी अनेक बार उपलब्ध नहीं होता। इलाके के लोग और इस इलाके के सभी राजनेता इस स्थिति को समझते हैं लेकिन वे सत्ता में आते ही बेबस हो जाते हैं और मुख्यमंत्री जो चाहे उस हिसाब से खुद को बांधकर चलते हैं। विदित रहे कि राजेंद्र सिंह भादू पर निष्क्रियता का आरोप लग रहा है। ये वर्तमान में सूरतगढ़ से विधायक हैं। राजेंद्र सिंह भादू ने 2008 के चुनाव से पहले एटा सिंगरासर माइनर की मांग उठाई थी और कानौर हेड पर इलाके के किसानों को महिलाओं को एकत्रित करके और संगठित रूप से आंदोलन की शुरुआत की थी। इसके बाद 2008 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी गंगाजल मील राजेंद्र सिंह भादू की इस मांग को ले उड़े। भादू पीछे रह गये। गंगाजल मील ने लोगों को प्रभावित किया यह समझो कि इस मांग को अच्छे ढंग से प्रचारित किया और वे चुनाव जीते तथा विधायक बन गए। गंगा जल मील ने इस महत्वपूर्ण मांग में बड़ा परिवर्तन करवा दिया। राजेंद्र सिंह भादू की ओर से मांग थी इंदिरा गांधी नहर से एटा सिंगरासर माइनर निकालने की ताकि इंदिरा गांधी नहर से पानी लगातार इस माइनर को मिलता रहे। गंगाजल मील  ने और तत्कालीन सरकार ने इसमें महत्वपूर्ण परिवर्तन किया। इसे लघु सिंचाई योजना बना दिया और 5 गांव तक सीमित कर दिया। इसके अलावा इंदिरा गांधी नहर के बजाए घग्घर कृत्रिम झील से पानी देने की योजना बना ली झील का पानी इंदिरा गांधी नहर में डाला जाएगा और आगे एटा सिंगरासर माइनर में निकाल लिया जाएगा।झील में पानी होगा तब ही मिल पायेगा। इसके लिए बजट भी उपलब्ध हुआ सर्वे भी हुआ मगर योजना सिरे ही नहीं चढ़ पाई। किसानों को सच्चाई नहीं बताई गई। इसके बाद सरकार बदल गई। गंगाजल मील को हरा कर राजेंद्र सिंह भादू भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर विधायक बन गए। अब चूंकि राजेंद्र सिंह भादू की ही शुरुआत में मांग थी इसलिए उनकी जिम्मेदारी भी बन गई कि किसी भी हालत में सरकार पर दबाव बनाए या अपनी मांग की अपील में इतना दम पैदा करते कि सरकार यह बात तुरंत मान लेती। राजेंद्र सिंह भादू की कार्यप्रणाली जैसी है वह इलाके के लोग भली-भांति जानते हैं। उस पर यहां किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है। यह कहा जा सकता है कि आंदोलनकारियों में और विधायक के बीच में जो सामंजस्य होना चाहिए वह बन नहीं पाया। यह कहना भी उचित होगा कि विधायक को इसके लिए अधिक से अधिक प्रयास करके आंदोलनकारियों के दिल में जगह बनानी चाहिए थी। दोनों के बीच बातचीत का अभाव रहा है। राजेंद्र सिंह भादू ने आंदोलनकारियों से जहां तक ध्यान में है एक बार बात की। पानी की मांग को लेकर वसुंधरा राजे से भेंट भी करके आए लेकिन जो बात प्रभावशाली ढंग से वसुंधरा राजे को समझाई जानी चाहिए थी,,वह हो नहीं पाई। जल संसाधन मंत्री डा राम प्रताप  इस इलाके के हैं।  वे  हनुमानगढ़ से जीतते रहे हैं, और इंदिरा गांधी नहर बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। अनुभवी हैं लेकिन वह भी अपने अनुभव के हिसाब से कार्य नहीं कर पाए। कम से कम डॉ राम प्रताप जी को एटा सिंगरासर माइनर की मांग को मनवाने का काम करवाना चाहिए था। यह काम  केवल इस इलाके के किसान की मांग नहीं है बल्कि इस इलाके के हर प्रकार के विकास का कदम है। यहां से जो उत्पादन होगा वह किसान अपने घर में जमा करके नहीं रखेगा। उस उत्पादन से राजस्थान का लाभ होगा और साथ में राष्ट्र का भी लाभ होगा। जब खेती विकसित होती है तो उसके साथ साथ खेती से संबंधित विभिन्न उद्योग-धंधे भी पनपते हैं।रोजगार पनपते हैं। डॉक्टर रामप्रताप को यह सब मालूम है लेकिन ना जाने क्यों वे मुख्यमंत्री के आगे इस महत्वपूर्ण मांग को रख नहीं पाए। इलाके के दूसरे राज्य मंत्री हैं सुरेंद्र पाल सिंह टीटी उनकी भी जिम्मेदारी बनती है लेकिन वे कन्नी काटते रहे। एटा सिंगरासर माइनर जिन जिन गांवों में पानी पहुंचा सकती है। वहां के सभी विधायकों को भी इस मांग के साथ जुड़कर सरकार पर दबाव बनाना चाहिए था, लेकिन सभी सत्ता के अंदर जाने के बाद पत्थर बन गए हैं। लेकिन इतिहास को भी नहीं जानते कि जब क्रांति आती है तब यह मजबूत पहाड़ भी पत्थर टुकड़े टुकड़े होकर खंडित हो कर बिखर जाते हैं। कोई पावर इनकी नहीं रह पाती।  यहां एक महत्वपूर्ण बात और है कि कहा जाता है कि सिंगरासर माइनर मैं पांच लिफ्ट होंगी, जिनका बनाना असंभव है। करोड़ों रुपए लगेंगे आदि आदि। और पानी भी नहीं है। पानी की खोज हो रही है। जम्मू कश्मीर में बहुत ऊंचाई पर रेल लाइन डाली जा सकती है गाड़ी चलाई जा सकती है तो सिंगरासर माइनर क्यों नहीं बनाई जा सकती। वह काम केंद्र सरकार ने किया लेकिन क्या राजस्थान की सरकार पानी नहीं पहुंचा सकती। करोड़ों रुपए सरकार के 3 साल बेमिसाल समारोहों में खर्च हो सकते हैं लेकिन किसानों की मांग पर सरकार के पास बजट नहीं है। वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार का बजट अभी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पेश किया। उसमें एटा सिंगरासर माइनर का अंश मात्र वर्णन नहीं है। मुख्यमंत्री अनजान नहीं है। बजट बनाए जाने से पूर्व समस्त इलाकों से सूचनाएं मांगी जाती है। सूचना सरकार के पास थी।वसुंधरा राजे जब इस इलाके में आई थीं तब जनता ने अभूतपूर्व स्वागत करके साथ दिया था लेकिन अब जनता का भरोसा टूट रहा है। जनता जिस तरीके से आंदोलन में जुटी है उससे उनके जोश को कम आंकना सरकार की और इलाके के जनप्रतिनिधियों की मूर्खता होगी। सूरतगढ़ में 25 मार्च को बाजारों में से जुलूस निकला। भयानक गर्मी में दोपहर में महिलाएं इस जलूस में छोटे-छोटे बच्चों को अपनी गोदी में उठाए नारे लगाते हुए चल रही थी।  जब इतना जोश हो तो उस जोश को कुचला नहीं जा सकता। सरकार को इसके लिए शीघ्र ही अविलंब रास्ता निकालना चाहिए और अपनी सरकार का भरोसा दिलाना चाहिए। वसुंधरा राजे सूरतगढ़ में झूम झूम कर नाची थी और उनके साथ राजेंद्र सिंह भादू भी थे। ऐसा नहीं हो कि इलाके के किसान ग्रामीण व्यापारी और अन्य संगठन वसुंधरा राजे और विधायक राजेंद्र सिंह भादू को नाचने को मजबूर कर दें। किसानों को आंदोलनकारियों को पुलिस बल से सुरक्षाबलों से 23 मार्च को सूरतगढ़ में प्रवेश करने पर रोकने की  असफल  कोशिश भी की गई। सरकार ने भारी भरकम सुरक्षा बलों को लगा रखा था। आश्चर्य है कि एक वाहन दंगा नियंत्रण लिखा हुआ भी था। आश्चर्य है कि मांग कर रहे किसानो को सरकार ने दंगाई माना और दंगाई लोगों से मुकाबला करने वाले सुरक्षा बलों को यहां लगाया। आंदोलनकारी किसानों में और दंगाइयों में बहुत अंतर होता है। सरकार को यह समझना चाहिए। अभी भी वक्त है । सब कुछ सरकार के हाथ में है।सरकार के पास कभी भी बजट की कमी नहीं होती। सिंगरासर एटा माइनर निर्माण की बात स्वीकार करते हुए किसानों के साथ उचित समझौता कर लेना चाहिए।

गुरुवार, 23 मार्च 2017

सूरतगढ़ मॉडल स्टेशन सच में गंदगी का मॉडल बना हुआ है

- करणीदान सिंह राजपूत -

सूरतगढ़ 23 मार्च ।

उत्तर पश्चिम रेलवे का मॉडल रेल स्टेशन सूरतगढ़ अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही से सड़ांध मार रहा है। अधिकारियों को परवाह नहीं है कि रेल यात्रियों को सीफ सफाई की सुविधा दी जाए।

 स्टेशन का प्लेटफार्म नंबर 4 और उस पर बने हुए टॉयलेट आपको यहां दिखा रहे हैं। पुरुषों के टॉयलेट में कोई शौच करे तो साफ करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। वह टट्टी से भरा पड़ा है। बाहर हाथ धोने के लिए वास बेसिन की हालत बुरी है। वह टूटा पड़ा है। पेशाब करने वाले स्थान को देखें। भयानक गंदगी है और उस पर लगी हुई टूंटी में गुल्ला ठोका हुआ है। 

क्या स्टेशन अधीक्षक अन्याय अधिकारीगण टिकट खिड़की बुकिंग अधिकारी वादियों के कार्यालयों के शौचालय इस तरह से गंदगी से भरे हुए हैं यह अधिकारी भारी भरकम वेतन लेते हैं तो इनकी क्या जिम्मेदारी बनती है यात्रियों को गंदगी और सड़ांध में मारना इस भयानक गंदगी के कारण रेल प्लेटफार्म पर निश्चित रूप से यात्री अपने साथ कोई न कोई बीमारी लेकर के जाते हैं।

स्टेशन अधीक्षक सहित अनेक अधिकारियों के कार्यलय प्लेट फार्म मुख्य भवन पर हैं क्या उनके कार्यालयों के शौचालय इस प्रकार से गंदगी से भरे हुए हैं?

इस मॉडल स्टेशन पर आखिर किसकी जिम्मेदारी है?









सूरतगढ़ में एटा सिंगरासर माइनर आंदोलनकारियों का महापड़ाव

-  करणीदान सिंह राजपूत -

 सूरतगढ़ 23 मार्च 2017.

 सूरतगढ़ तहसील के टीबा क्षेत्र के गांव के किसानों ने एटा सिंगरासर माइनर की मांग को लेकर पूर्व घोषणा के अनुसार आज 23 मार्च को सूरतगढ़ के इंदिरा सर्किल पर बिगुल बजा दिया। इंदिरा सर्किल पर नेताओं ने वक्तव्य दीजिए सभी की एक ही मांग थी। एटा सिंगरासर माइनर हर हालत में लेकर रहेंगे। आंदोलनकारियों के साथ काफी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थी। 

नारेबाजी के साथ आंदोलनकारी आज सूरतगढ़ पहुंचे आंदोलनकारियों का महापड़ाव उपखंड कार्यालय के आगे शुरू होना था जहां पर सभी कार्यालयों के रास्तों पर लकड़ों के अवरोधक लगा दिए गए हैं।

 किसानों की यह मांग लगातार जारी है। आज किसानों के महापड़ाव और सूरतगढ़ की ओर बढ़ने के जोशीले चित्र यहां दिए जा रहे हैं।

 सूरतगढ़ शहर में करीब 80 हजार की आबादी है। अनेक संगठन है, लेकिन ऐसा लग रहा है सभी संगठन और नेता भाषणों से सहयोग दे रहे हैं। मौके पर केवल ग्रामीण नजर आते हैं। क्या शहर और गांव का इतना ही नाता है कि गांव के लोग शहरों से चीजें खरीदते रहें शहर वालों की बिक्री कराते रहें और शहर वाले कमाई करते रहे? बस । 

शहर में समस्त राजनीतिक दलों के हजारों कार्यकर्ता है और होना तो यह चाहिए था की इस महापड़ाव में किसानों की संख्या से 4-5 गुना अधिक संख्या में शहरी लोग पहुंचते और हर प्रकार का सहयोग करने में आगे रहते। हो सकता है अब शहर के लोग अपनी जिम्मेदारी समझते हुए किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस महापड़ाव में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएं।




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बुधवार, 22 मार्च 2017

ईश्वर अल्लाह को क्यों बांटे हैंःकविता- करणीदान सिंह राजपूत

तुम्हें समझाते सदियां बीती,

भरे पड़े इतिहास। 

क्यों लड़ते रहते हो?

क्यों झगड़ा करते हो?

सब कुछ यहीं रह जायेगा। 

काया का चोला भी, 

नहीं रहेगा साथ।

अब जिन से लड़ते हो,

अगले जन्म में वहां, 

पैदा हो सकते हो।

 जीवन मरण का खेल है,

उस ईश्वर अल्लाह के हाथ।

स्वर्ग की अभिलाषा तुम्हारी,

 उनकी जन्नत की तैयारी।

 इतना तो बतला दो, 

दुनिया को।

यह एक है या अनेक? 

तुम प्रवेश पा लोगे,

वहां दूजा घुस नहीं पाएगा।

 न यह है विश्वास,

न यह निश्चित है।

इस अनिश्चय के भंवर में, 

क्यों करते हो विषपान।

स्वर्ग और जन्नत के भ्रम में,

क्यों करते हो यह जीवन बरबाद? 

धर्म के नाम पर सुंदर जीवन को छोड़, 

क्यों मौत से मिल हो?

दंड दूजों को मिले या ना मिले,

तुमने तो नर्क दोजख  के,

 द्वार खोले हैं।

 इस लोक का अभिमान,

 यहीं धरा रह जाएगा।

 आये खाली,

 हाथ भरे नहीं जा पाओगे।

 ईश्वर अल्लाह,

 क्या अलग-अलग हैं?

 यह भी तो समझा दो।

यह सब के सांझे हैं,

फिर तुमने क्यों बांटे हैं?

धरती आकाश समुंदर,

सूरज चांद और तारे,

 सब सांझे हैं,

फिर ईश्वर अल्लाह को,

तुमने क्यों बांटे हैं ?

क्यों लड़ते रहते हो, 

क्यों झगड़ा करते हो?

क्यों लड़ते रहते हो,

क्यों झगड़ा करते हो?

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यह रचना करीब 15 -16 साल पूर्व लिखी गई थी । उस समय आकाशवाणी से भी प्रसारित हुई थी।

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 करणी दान सिंह राजपूत,

 राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,

 सूरतगढ़, राजस्थान ।

संपर्क.  94143 81356.

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श्रीकरणपुर में नशा मुक्ति जन जागृति कार्यशाला आयोजन किया गया

 
श्रीगंगानगर, 21 मार्च। जिला पुलिस अधिक्षक श्री राहुल कोटोकी के निर्देशानुसार पुलिस थाना श्रीकरणपुर के माध्यम से अमर ज्योति पब्लिक उच्च माध्यमिक विद्यालय, श्रीकरणपुर में नशा मुक्ति जन जागृति कार्यशाला एवम् नशामुक्ति परामर्श शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में राजकीय नशा मुक्ति परामर्श एवं उपचार केन्द्र श्रीगंगानगर के प्रभारी डा. रवि कान्त गोयल ने अपने सम्बोधन में कहा कि घरों में अभिभावकों के नशा सेवन करने से बच्चें बीड़ी, सिगरेट के टुकडे़ और प्याली में बची शराब का सेवन कर बच्चे भी नशे की और अग्रसर हो रहे है। ऐसे बच्चे धीरे धीरे नशे के दलदल में फसतें चले जाते है। नशा मुक्ति जन जागृति कार्यशाला के माध्यम से दृढ शक्ति से बिना किसी नुकसान के नशा छोड़ा जा सकता है।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथी डिप्टी एसपी श्रीकरणपुर श्री सुनिल के0 पंवार ने अपने सम्बोधन में कहा कि नशा करने वाला व्यक्ति, समाज, देश, अपने स्वयं के परिवार व अपना सबसे बड़ा दुश्मन है। नशा किसी भी रूप में हो उसके परिणाम घातक होते है। नशे रूपी गन्दगी का सेवन करने से बचें। 
कार्यक्रम में अमर ज्योति पब्लिक उच्च माध्यमिक विद्यालय व साथ-साथ चौधरी चानन राम मैमोरियल महाविद्यालय के विद्यार्थियों व अध्यापकों ने भाग लिया। ग्रामीण व जनप्रतिनिधी भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे। ड़ा. गोयल ने उपस्थित विद्यार्थियों व ग्रामिणों को नशा न करनें व नशा छुडवाने की सामूहिक शपथ दिलवायी।
कार्यक्रम में नगरपालिका चेयरमेन श्रीमति अनिता जोईया ने अपने सम्बोधन में कहा कि गाँव की चोपाल पर नशे को हमने बीड़ी, सिगरेट, हुक्का और शराब सेवन को जो सामाजिक स्वीकृति प्रदान की है, उसी कारण आज समाज नशे के दलदल में धंसता जा रहा है। ऐसी परिस्थियों में पुलिस विभाग द्वारा चलाया जा रहा नशा मुक्ति अभियान एक नई दिशा देने में सफल होगा।
कार्यक्रम में डायरेक्टर अमर ज्योति शिक्षण संस्थान श्री हरभजन सिंह ने अपनें सम्बोधन में कहा की विद्यार्थियों का मन कोरे कागज की तरह होता है आज इनके मन पर नशा मुक्ति की टीम द्वारा जो नशा मुक्ति का संदेश अकित किया गया है इसके दूरगामी सकारात्मक परिणाम हमारे सामने आयेंगे। मैं सस्था की तरफ से पुलिस, स्वास्थय, शिक्षा विभाग के सयुक्त प्रयासों की सहराना करता हूँ।
कार्यक्रम में पुलिस थाना श्रीकरणपुर के थाना अधिकारी श्री अनिल मून्ड ने कहा कि पुलिस प्रशासन गांव ढाणी, ढाणी जाकर नशा मुक्ति शिविर आयोजित कर रहा है। आप सब इस नशा मुक्ति शिविरों के सहयोगी बने और इस नेक कार्य में आगें आयें।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री मान विक्रमजीत ने विद्यार्थियों को नशे की बुराइयों से अवगत करवाकर नशे को जड़ से उखाडने का आहवान किया।
कार्यक्रम को समाजसेवी श्री लक्ष्मी नारायण जोईया, वाइस चेयरमेन श्री श्याम सुन्दर, एएसआई पुलिस श्री लखवीर सिंह ने भी सम्बोधित किया।
कार्यक्रम के अन्त में ड़ा. गोयल ने नशा मुक्ति प्रकाशित पम्पलेटस वितरित कराये एवं विद्यार्थियों द्वारा पुछे प्रश्नों का उतर दिया। 
 

 

अर्जुन नहीं कर पाया,तुझे करना है




कविता-     


अर्जुन नहीं कर पाया,तुझे करना है
वक्त को जान वक्त को पहचान
क्यों सोया है,गहरी नींद
जाग उठ, सवेरा तुझे करना है
वक्त पल दर पल बदलता है।

अर्जुन कुछ नहीं कर पाया
गांडीव था पास
गोपियां लुटती रही
काल बड़ा बलवान
उठ,बदलदे ये कहावत


तूं धारण कर नया धनुष
मत रख गांडीव नाम
निशाने पर तीर चला
तेरे बाण से होगी रक्षा

बतलादे समाज को
दिखलादे शक्ति
पुरानी कथाओं को
सुनने सुनाने का
वक्त नहीं।

अब अर्जुन का वक्त नहीं
वक्त तेरा है
जागना तुझे है
जागते रहना भी तुझे है
कमान धारण भी तुझे करना है
तीर चलाना भी तुझे है

पुराना सब कुछ भूलना भुलाना है,
मगर कृष्ण को नहीं भूलना
दुष्टों का संहार करने को
तुझे ही तो तीर चलाना ।

मैं वक्त,
बनूंगा तेरे रथ का सारथी
काल बनूंगा
धरती पर आए
छली कपटी बगुला मनुषों का
मगर तीर तुझे चलाना होगा।

ये संगी साथी मित्र प्यारे
फुसलाऐंगे,
ये परिजन प्यारेदुहाई देंगे,
अपनों पर ही वार
करने को रोकेंगे टोकेंगे बतलाऐंगे
पीढी दर पीढ़ी के रिश्ते
तूं किसका करने वाला है संहार

वक्त तो सच्च में सोच को
बदलने को प्रबल होगा
कमान उठाने को
तीर चलाने को
तूं रथ पर चढऩे को तैयार न होगा
नाते रिश्तेदार सखाओं की भीड़
रोने लगेगी,आँसूओं की धारा
बनाएगी रिश्तों की गांठे।

लेकिन काल बड़ा बलवान
पुरानी कहावत बदल कर
संशोधित करके,
मैं वक्त, हां मैं वक्त
नए सिरे से लिखूंगा

मैं वक्त हूं,
मेरी ताकत को ये नाते रिश्तेदार
संगी साथी पहचानते नहीं
मेरी ताकत को जानते नहीं
मैं वक्त,तुझे रथ तक लाऊंगा
मैं ही शक्ति से रथ पर चढाऊंगा

और मेरी ताकत से तूं
तीर चलाएगा दुष्टों पर
जिनको तूं भ्रम में अपने सखा संगी
नाते रिश्तेदार समझ बैठा है।
मैं वक्त, तुझे नया अर्जुन तो नहीं बनाऊंगा
अर्जुन और कृष्ण तो चेतना है,
लेकिन मैं तुझे उनसे कम भी नहीं रखूंगा।

तेरा नामकरण तो दुनिया करेगी
तेरा नाम तो दुनिया धरेगी
मैं वक्त,
शब्दकोश में रचूंगा नया नाम
जो दुनिया तुझको देगी।
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करणीदानसिंह राजपूत,

राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत पत्रकार,
23 करनाणी धर्मशाला,
सूरतगढ़. मो.       94143 81356
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31-7-2015.
up date 22-3-2017.

आपातकाल में लोकतंत्र सेनानियों ने प्रजातंत्र को बचाने का कार्य किया



लखनऊ 21 मार्च 2017.

 भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री श्रीपाद नाईक ने लोकतंत्र सेनानियों के कार्यो को याद करते हुए कहा कि उनके त्याग से ही देश एक बार और गुलामी के बंधनसे बाहर निकला था। वे आज भाजपा मुख्यालय पर आपातकाल के 40 वर्ष पूरे होने पर लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह में बतौर मुख्यअतिथि मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम देश-प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मनाया जा रहा है जिसमें केन्द्र सरकार के मंत्री एवं सांसदगण अपनी भागेदारी सुनिश्चित कर रहे है। उन्होंने कैबिनेट के उस ऐतिहासिक निर्णय को सामने रखा जिसमें लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जन्मस्थली सिताबदियरा में स्मारक बनवाया जायेगा।


लोकतंत्र के इस काले अध्याय को याद करते हुए कहा कि यह आपात काल केवल इंदिरा गांधी की सरकार को बचाये रखने के लिए था न कि देश हित में। समाचार पत्र बंद हो चुके थे कही भी कोई सभा नहीं हो सकती थी जिसके ऊपर भी सरकार को शक होता था वो जेल भेज दिया जाता था ऐसे में जिन्होंने लोकतंत्र की लौ को जलाये रखा उन्हें शत-शत नमन। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोकतंत्र सेनानियों को यह विश्वास दिलाया कि उनकी बेहतरी के लिए भारत सरकार कटिबद्ध है। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा0 लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने मांग किया कि आपातकाल लगाने के लिए कांग्रेस देश की जनता से सार्वजनिक रूप से मांफी मांगे। आज देश जय प्रकाश जी का एवं उन लोकतंत्र सेनानियों का ऋणी है जिन्होंने अपने सुख को तिलाजंली देकर लोकतंत्र को बचाया। डा0 बाजपेयी ने कहा जिन गांधी जी ने देश को आजादी दिलाई उन्ही गांधी के परम्परा पर चलने का ढोंग करने वाले कांग्रेसियों ने देश में आंतरिक आपातकाल लगाकर लोकतंत्र की हत्या करनी चाही। उस समय के अधिकांश नेतागण एवं समाजिक कार्यकर्ता खोज-खोजकर जबरन जेलों में भर दिये गये जब सरकार का इससे भी पेट नहीं भरा तो उसने स्कूलों और कालेजो के छात्रों को भी जेल भेजा। गांधी का नाम बेचकर घोटाले दर घोटाले कर कांग्रेस ने विश्व पटल पर भारत की छवि को धूल धूसरित किया है।


डा0 बाजपेयी ने कहा कि यदि कांग्रेस गांधी जी के आर्दशों से दशांश भी प्रेरणा लेती है तो उसे कांग्रेस की समाप्ति कर देनी चाहिए। लेकिन बेहयाई का इससे बड़ा सबूत और क्या होगा कि उसके प्रवक्ता और नेतागण समय-समय पर सार्वजनिक मंचों पर आपातकाल को जायज ठहराते रहते हैं।  इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्जवलन एवं लोक नायक जयप्रकाश नारायण के चित्र पर माल्र्यापण किया गया। लोकतंत्र सेनानियों को डा0 लक्ष्मीकांत बाजपेयी एंव श्रीपाद नाईक ने माला एवं अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया जिनमें प्रमुख रूप से भारत दीक्षित, बृज किशोर मिश्र, रामाधीन सिंह, रमाशंकर त्रिपाठी, प्यारेलाल कनौजिया, राजेन्द्र त्रिपाठी, अनिरूद्ध यादव, राजेन्द्र गौण, महेन्द्र सिंह आदि रहे।


कार्यक्रम की अध्यक्षता महानगर अध्यक्ष मनोहर सिंह एवं संचालन मुकेश शर्मा ने किया। लालजी टण्डन ने आपातकाल के संस्मरण को याद करते हुए बताया कि लोगों को जबरिया दो दिनों तक थानों में बिठाये रखा गया सरकार यह तय नहीं कर पा रही थी कि इन्हे किन धाराओं में जेल भेजे लोगों के ऊपर फर्जी मुकदमें लगाये गये। जनसंघ एक मात्र ऐसा संगठन था जिसने कश्मीर से कन्या कुमारी तक राष्ट्र का पुनः जागरण किया ऐसा माहौल तैयार किया जिससे इंदिरा गांधी को आपातकाल वापस लेने पर मजबूर किया जो लोग जेल में थे उनसे कही कम उनका भी योगदान नहीं था जिन लोगों ने छुप-छुपकर गिरफ्तार हुए लोगों के परिवारों की चिंता की। आज राष्ट्र इनके प्रतिकृतज्ञ है एवं अपनी आने वाली पीढि़यों को लेकर आशान्वित है कि जब भी राष्ट्र को जरूरत होगी नौजवान बढ़-चढ़कर अपनी भागेदारी सुनिश्चित करेंगे। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोगों में प्रदेश उपाध्यक्ष गोपाल टण्डन (विधायक), प्रदेश मंत्री वीरेन्द्र तिवारी, प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक, डा0 चन्द्रमोहन, हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनीष शुक्ला, राजेन्द्र तिवारी, अंनू मिश्र, राकेश श्रीवास्तव, श्रीमती सुषमा खर्कवाल, सुरेश श्रीवास्तव, सुरेश तिवारी, विन्ध्यवासिनी कुमार आदि लोग रहे।

मंगलवार, 21 मार्च 2017

संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ



संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश
तूं चलते जाना निर्भय
बिना रूकेे बिना झुके
विचलित करने को
राह बदलने को
भटकाने को
बीच राह में
मखमली चट्टाईयों के
मोड़ बनाऐ होंगे
मगर,तूं कांटों भरे कंकड़ीले पथ पर
सीधे बढ़ते जाना
जो पहुंचाएगा
जन जन के बीच

संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश

जन जन के दुख पीड़ाओं को
झेलना तूं
कभी इनकार न करना
तेरा नाम दान सार्थक करना,

संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश

तूं पाए जो संघर्ष का फल
और जो मिले पुण्य प्रताप
उसे कभी अपना मत कहना
उसे दान करते रहना
तूं मालिक मत बनना
उसकी मालिक जनता को
अर्पण करते चलना

संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश

सत्ता के ऊंचे ऊंचे पद
विशाल अट्टालिकाएं
लोभ लालच मोह के
फंदों में राजनेता
धनपति जनपथ से
भटकाने को ना जाने कैसे कैसे
स्वांग भरेंगे,मीठे बोलेंगे।
तूं सबको छोड़ता
आगे बढ़ते रहना


संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश

 ये देश हमारा गौरवशाली
 इसको बनाने में
तेरे से पहले असंख्य दे गए कुर्बानी
किसी ने आह तक नहीं की
फांसी का फंदा चूमा हंसते
गोली सीने में खाई
या झेली यातनाएं काला पानी
तूं कांटों वाले कंकड़ीले राह
पर चलने का एहसान मत जता देना।

संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश

सत्यम् शिवम् सुंदरम् को
अपने भीतर रखते
सत्यमेव जयते को
सदा याद करते
तूं चलते जाना निर्भय
बिना रूकेे बिना झुके
बस बोलते जाना
उदघोष करते जाना
सत्यम् शिवम् सुंदरम्
सत्यम् शिवम् सुंदरम्
सत्यमेव जयते
सत्यमेव जयते

़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़

जननी माँ हीरा जनक पिता रतनसिंह  जी को समर्पित।
़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़

कविता-   

  
करणीदानसिंह राजपूत,


राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत पत्रकार,
 
23 करनाणी धर्मशाला,
सूरतगढ़. मो.       94143 81356

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8-1-2015.
update  18-10-2016.
up date 21-3-2017.!

सोमवार, 20 मार्च 2017

आपातकाल 1975 के लोकतंत्र सेनानियों का मामला विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव


-  करणीदान सिंह राजपूत  -

जयपुर 20 मार्च 2017.

आपातकाल  1975 के दौरान राजस्थान  में भारतीय दण्ड संहिता की धाराओं  107/116/151 के तहत जेल गए सत्याग्रहियों को मीसा बंदियों की तरह पेंशन एवं चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ आपातकाल के सत्याग्रहियों को लोकतंत्र के सेनानी का दर्जा देने की मांग की गई।

भाजपा के मोहन लाल गुप्ता एवं ज्ञानदेव आहूजा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मामला उठाते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान मीसा बंदियों एवं डिफेन्स आॅफ इंडियन रूल्स के तहत बंदी बनाये गए सत्याग्रहियों को पेंशन एवं चिकित्सा सुविधाएं दे दी गई लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा 107 एवं 116 तथा 151 के तहत गिरफ्तार सत्याग्रहियों को इससे वंचित रखा गया।

उन्होंने बताया कि राजस्थान से पच्चीस सौ सत्याग्रहियों को पेंशन आदि देने के साथ ही लोकतंत्र सेनानी का सम्मान दिया जाना चाहिए। 

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज विधानसभा में मीसाबंदियों का मामला सदन में गूंजा। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा में जेल जाने वाले मीसाबंदियों को सुविधाएं दिए जदाने पर सदन में चर्चा हुई। विधायक ज्ञानदेव आहूजा, मोहनलाल गुप्ता ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में मीसाबंदियो का मामला उठाया। ज्ञानदेव आहूजा ने कहा कि पेंशन शब्द के स्थान पर सम्मानदेय शब्द प्रयोग में लाया जाए। साथ ही मीसाबंदियो को यूपी, बिहार की तर्ज पर राशि 12 हजार से बढाकर 25 हजार की जाए। मेडिकल सुविधाएं, टोल फ्री, डांक बंगलों में रुकने की सुविधा देने की मांग भी सदन में उठी।


चर्चा के दौरान आपात काल के हालातों को बताते हुए घनश्याम तिवाड़ी, ज्ञानदेव आहूजा ने खुद के साथ हुए अत्याचार की भी जानकारी सदन मे रखी। तिवाडी ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष के कारण ही आज लोकतंत्र जिंदा है। इनके संघर्ष के कारण ही 1977 में सत्ता परिवर्तन की लहर आई, 3 लाख लोगों को देशभर में जेल भेजा गया। तिवाड़ी ने कहा कि मीसाबंदियो को सुराज संकल्प पत्र के वादे के अनुसार स्वतंत्रता सेनानी के समान सुविधाएं देनी चाहिए, अगर ऐसा नहीं होता है तो यह बेवफाई होगी।



उन्होंने लोकतंत्र सेनानी कानून लाने की भी मांग की। यह सम्मान की लडाई है और इससे मीसाबंदियों पर लगे भारत की सुरक्षा के खतरा वाला तमगा तो दूर होगा। मंत्री हेमसिंह भडाना ने सदन को जानकारी देते हुए बताया 19-6-2009 को पूर्ववती सरकार ने बंद कर दिया था। हमारी सरकार ने 28-2-14 को शुरु किया। बाकी मांगों पर संसदीय कार्यमंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि मीसाबंदियों की मांगों के लेकर मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाकर उचित कार्रवाई करेंगे।

शनिवार, 18 मार्च 2017

सब अपराध हो की जड़ शराब को बंद करे सरकार - पूनम अंकुर छाबड़ा



जयपुर ग्रामीण के रोजदा में शराब बंदी के लिए मतदान के लिए ग्राम वासियों को समर्थन दिया-पूनम छाबड़ा


  जयपुर ।


           प्रदेश के झुंझनू जिले के पिलानी कस्बे में सात साल की मासुम बालिका के साथ हुए दरिंदगी भरे कृत्य पर रोष प्रकट करते जस्टिस फॉर छाबड़ा जी संगठन राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम अंकुर छाबड़ा ने कहा कि इस प्रकार के आरोपियों को मौत से कम सजा नहीं मिलनी चाहिये और हम सरकार से मांग करते हैं कि प्रदेश में तुरंत शराब बंदी लागु करे क्योकि अब तक जितने ऐसे घिनोने जुर्म के वाक्यात सामने आये हैं उन सब की जड़ शराब ही है। हर आरोपी शराब के नशे में इस प्रकार के घृणित कृत्य करता है। सरकार को तुरंत प्रदेश मे शराब बंद करनी चाहिये जिससे प्रदेश में अपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगे और ऐसे आरोपियों को मौत से कम सजा नहीं मिलनी चाहिये।

गौरतलब है की झुंझनू जिले के पिलानी कस्बे में रिश्तों को शर्मशार कर देने वाली वारदात सामने आई है, सात साल की मासूम को उसके ही करीबी रिश्तेदार ने हवस का शिकार बना डाला। यही नहीं दरिंदगी के बाद जब मासूम रोई तो आरोपी ने उसे पीटा और उसका मुंह भी नोच भी डाला। खून से लथपथ पीड़िता जब घर पहुंची तो परिजनों के होश उड़ गए। जानकारी के मुताबिक पिलानी कस्बे में कच्ची बस्ती की रहने वाली सात साल की मासूम को उसका करीबी रिश्तेदार शमशाद अपने साथ दोपहर को चॉकलेट दिलाने के बहाने ले गया। करीब तीन-चार घंटे बाद शमशाद शराब के नशे में आया और बच्ची को घर छोड़ गया। बच्ची के घर आने के बाद जब उसकी बुआ ने देखा तो उसके होश उड़ गए। बच्ची खून से बुरी तरह लथपथ थी। इस बालिका को पिलानी के बिड़ला अस्पताल ले जाया गया, जहां पर हालत गंभीर होने पर उसे झुंझुनूं रैफर किया गया। यहां पर देर रात तक उसका इलाज जारी था। शुक्रवार को पीड़िता का मेडिकल करवाया गया। उधर इस घटना के बाद परिवार वालों का रो-रो कर बुरा हाल है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने खून के कपड़ों से लथपथ ही आरोपी को हिरासत में लिया, अब सरकार को तुरंत कार्यवाही करते आरोपी को सजा के साथ इन सब की जड़ शराब को प्रतिबंधित करना चाहिये।

जयपुर ग्रामीण के रोजदा में रविवार 19 मार्च को शराब बंदी के लिए होने वाले मतदान में पूनम अंकुर छाबड़ा ने रोजदा में सभा को संबोधन किया व ग्रामीणों को अधिक से अधिक मतदान के लिए निवेदन किया और जस्टिस फ़ॉर छाबड़ा संगठन की तरफ से समर्थन दिया। गाँव के संघर्ष के लिए जो पिछले 1 साल से सतत् प्रयासरत है उसके लिए गाँव की तारीफ की।




शुक्रवार, 17 मार्च 2017

पूर्व पार्षद राजा राम गोदारा पार्षद परमेश्वरी देवी गोदारा के भवन निर्माण पर अापत्ती:





 सूरतगढ़ 16 मार्च शिव विहार कॉलोनी मैं पूर्व पार्षद राजा राम गोदारा के परिवार ने 7 भूॉखंडों पर मकानों के निर्माण करने की नगर पालिका से मंजूरी मांगी जिस पर पूर्व विधायक वरिष्ठ वकील हरचंद सिंह सिद्धू ने  16 मार्च को आपत्ती के पत्र नगरपालिका प्रशासन को दिये हैं।



निर्माण की स्वीकृति राजा राम गोदारा पुत्र पत राम गोदारा ने 4 भूखंडों पर निर्माण की स्वीकृति चाही है। पार्षद परमेश्वरी देवी गोदारा पत्नी राजा राम गोदारा की ओर से एक भूखंड पर निर्माण की स्वीकृति चाही है। महेंद्र कुमार गोदारा पुत्र राजा राम गोदारा की ओर से एक भूखंड पर निर्माण की स्वीकृति चाही है। भानू गोदारा पुत्र राजा राम गोदारा की ओर से एक भूखंड पर निर्माण की स्वीकृति चाही है। कुल सात भूखंडों पर निर्माण की स्वीकृति चाही है। ये सभी भूखंड शिव विहार कॉलोनी सूरतगढ़ में हैं।



 पूर्व विधायक सरदार हरचंद सिंह सिद्धू ने नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी जुबैर खां को अलग-अलग पत्र दे कर आपत्तियां उठाई है और निर्माण की स्वीकृति न दिए जाने का लिखा है।

 सिद्धू ने अापत्ती में लिखा है कि शिव विहार कॉलोनी के प्रकरण भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में विचाराधीन है। यह कॉलोनी जिस जमीन पर बनाई गई है वह अनुसूचित जाति के किसान की थी जो इस तरह से नहीं दी जा सकती। इस भूमि के  रूपांतरण पर भी नगर पालिका में कार्रवाई नहीं हो सकती। सिद्धू ने आपत्ती में लिखा है कि राजस्थान काश्तकारी अधिनियम की धारा 42 के तहत अनुसूचित जाति के व्यक्ति की भूमि स्वर्ण को अंतरण नहीं की जा सकती। राजा राम गोदारा स्वर्ण जाति का है। भूमि जिस तरह से रुपांतरित की गई है उससे मूल कानूनी स्थिति में कोई फर्क नहीं पड़ता कानून वह कायम है।ै

 सिद्धू ने लिखा है कि निर्माण की स्वीकृति देना अपराध कारित करना होगा, अतः निर्माण की स्वीकृति नहीं दी जाए।

गुरुवार, 16 मार्च 2017

रामदेवरा में होली की लपटों में घोड़े पर सवार बाबा का अनोखा दृश्य



रामदेवरा की होली की लपटों  का यह अनोखा दृश्य ऐसे लग रहा है मानो घोड़े पर सवार बाबा रामदेव हों।
 यह छाया चित्र रीतेश के मिस्त्री जोधपुर की फेस बुक पर था।
सन्  2017 की होली।

बुधवार, 15 मार्च 2017

पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा के घोटाले वाली मालचंद की संपूर्ण शिकायत: सबसे पहले: जबरदस्त हड़कंप मचा हुआ है:


- करणीदानसिंंह राजपूत -
सूरतगढ़ 15 मार्च 2017.

नगरपालिका अध्यक्ष काजल छाबड़ा ने भ्रष्टाचार मुक्त सूरतगढ़ का वादा किया और वह अपने वादे पर कायम नहीं रह सकी। काजल छाबड़ा के काल में भ्रष्टाचार व अनियमितताएं बहुत हुई क्योंकि कोई रोक टोक करने वाला नहीं है।
मालचंद जैन पत्रकार की शिकायत में काजल छाबड़ा, पालिका के सहायक अभियंता तरसेम अरोड़ा,कनिष्ठ अभियंता मोहित व्यास, कनिष्ठ अभियंता महेन्द्र थलौड़,लेखाकार लालचंद सांखला,निर्माण शाखा के लिपिक राजकुमार छाबड़ा पर भ्रष्टाचार के आरोप में 23 अप्रेल 2015 को शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में की थी।
राजकुमार छाबड़ा रिश्वत के मामले में गिरफ्तार व सस्पैंड है। लालचंद सांखला का स्थानान्तरण नोहर हो गया था।
इसकी प्रतियां अन्य अधिकारियों को भी दी गई थी।
भाजपा को चुनाव में स्पष्ट बहुमत में एक पार्षद कम रहा मगर निर्दलीयों का समर्थन लेकर काजल छाबड़ा को अध्यक्ष बनाया गया। विधायक राजेन्द्रसिंह भादू ने उनको अध्यक्ष पद पर जितवाने में सहयोग दिया लेकिन पालिका के घोटालों में काजल छाबड़ा पर परेशानियां आने वाली हैं उनमें विधायक क्या बचाव कर पाऐंगे?
मूल शिकायत पहली बार आपके सामने पेश है।












लोकतंत्र सेनानी संघ हिसार की बैठक हुई

लोकतंत्र सेनानी संघ हिसार जिला इकाई की बैठक प्रदेशाध्यक्ष बलवन्त सिंह निडर की अध्यक्षता में, स्थानीय बिंदल धर्मशाला में आयोजित की गयी ।

आपातकाल के आन्दोलनकारियों के,

दिल्ली में  21 मार्च 2017 को होने वाले अखिल भारतीय सम्मेलन में भाग लेने की योजना तैयार की गयी ।

                   बैठक में अम्बाला के जय प्रकाश गुप्ता ने लोकतंत्र सेनानियों को ,सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर चिकित्सा सुविधा देने का स्वागत किया ।उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि दूसरे प्रदेशों की तरह हरियाणा में भी लोकतंत्र सेनानियों को मासिक मानदेय राशि  मिलनी चाहिए। श्री गुप्ता ने बताया कि अखिल भारतीय सम्मेलन में केन्द्र सरकार से,आपातकाल के आन्दोलनकारियों को स्वतंत्रता सेनानियों का दर्जा देने का आग्रह किया जाएगा।

   एडवोकेट विनोद गुप्ता ने सरकार  से माँग की कि लोकतंत्र सेनानियों को मिलने  वाली चिकित्सा सुविधा अत्यंत सरल और कागजी औपचारिकताओं से मुक्त होनी चाहिए । हाँसी के निहाल  चन्द चावला ने माँग की काफी संख्या में ऐसे लोकतंत्र सेनानी भी हैं जिनके पास इलाज राशि के अग्रिम भुगतान की क्षमता नहीं है ; उनके लिए सरकार कैशलैस इलाज की सुविधा उपलब्ध करवाए।  जिलाध्यक्ष राम सरूप पोपली ने बैठक में आए सभी सेनानियों  का धन्यवाद किया ।जिला संरक्षक सुभाष मल्होत्रा के अतिरिक्त दयानंद बिंदल, पुरुषोत्तम, ओ3म प्रकाश, वेद छाबड़ा, राजेंद्र सिंह, हरबंस लाल, डा.बलदेव नाशा,और ओंकार नाथ ने बैठक में भाग लिया ।



मंगलवार, 14 मार्च 2017

पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा पर करोड़ों के भ्रष्टाचार की एसीबी जाँच शुरू:स्पेशल रिपोर्ट




कार्यवाहक ईओ सहायक अभियंता तरसेम अरोड़ा,कनिष्ठ अभियंताओं महेन्द्र थालौड़ व मोहित व्यास और कर्मचारियों पर शिकंजा:
कई बड़े ठेकेदारों पर भी भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में सबसे अधिक शिकायतें सूरतगढ़ नगरपालिका की:
काजल छाबड़ा का  भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दिखावा केवल बोर्डों में:
स्पेशल रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत
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प्रथम 7-6-2015

अप डेट 14-3-2017.

***********************************



सूरतगढ़। 

पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा द्वारा जम कर भ्रष्टाचार किए जाने के आरोप लगातार लगते रहे हैं और एक दस्तावेजी शिकायत में सरकार को करोड़ों रूपए की चपत लगाने के मामले में पी दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है। यह जाँच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की हनुमानगढ़ चौकी को सौंपी गई है और उसके जाँच शुरू करते ही यहां हड़कंप मच गया। काजल छाबड़ा वह चर्चित अध्यक्ष बन गई है जिस पर चुने जाने के अल्प काल में ही करोड़ों के घोटाले की जाँच शुरू हुई है। 

सोमवार, 13 मार्च 2017

सूरतगढ़ पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा व ईओ पर बड़े घोटाले का आरोप


- करणी दान सिंह राजपूत -

सूरतगढ़ 13 मार्च। नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती काजल छाबड़ा, अधिशाषी अधिकारी कार्यवाहक (सहायक अभियंता) पर निविदा में घोटाले का आरोप है जिसकी जांच के लिए मूल शिकायत उपनिदेशक स्वायत्त शासन विभाग बीकानेर को सौंपे गए हैं। 

जिला कलेक्टर श्री गंगानगर को यह शिकायत मालचंद जैन की ओर से की गई थी। जिला कलेक्टर ने यह मूल शिकायत उपनिदेशक स्वायत्त शासन विभाग बीकानेर को भिजवा दी है।

 इसमें निर्माण शाखा के क्लर्क आदि पर भी आरोप लगाया गया है। मालचंद जैन के अनुसार इसमें अध्यक्ष की मिलीभगत से बहुत बड़ा घोटाला हुआ है। 



मालचंद जैन की ओर से एसीबी में भी यह शिकायत की गई थी जिसकी न्यूज़ पूर्व में 7 -6 -2015 को प्रकाशित की गई थी जिसे अब 14- 3 -2017 में अपडेट कर दिया है जो अन्यत्र पढ़ी जा सकती है।यह शिकायत अलग-अलग विधियों और धाराओं पर चलती है। जांच शीघ्र होगी तो पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा मुसीबतों में घिर सकती हैं जहां सत्ताधारी पार्टी भी कुछ सहायता नहीं कर पाएंगी।










रविवार, 12 मार्च 2017

गांधी वध क्यों ?एक पुस्तक जिस पर कांग्रेस ने प्रतिबंध लगाया था जानिएअनेक सच

 - बदल रहे भारत में यह सच्च जानिए जो करोड़ो लोगों ने भोगा-गांधी की तस्वीरों से सरकारों की ना समझी से आज भी भोग रहे हैं। करणीदान सिंह राजपूत


*गांधी वध क्यों* एक ऐसी पुस्तक जिससे डरकर कांग्रेस ने इस पर *प्रतिबंध* लगा दिया था। अब हमारे पास आपके लिए उपलब्ध है। *जिसको चाहिए वो इस नंबर 9129462859 (whatsapp, राहुल राय) पर संपर्क करें उनको डाक से भेज दी जाएगी।*

।कृपया पूरी पोस्ट अवश्य पढ़े।

गाँधी वध क्यों ?

क्या थी विभाजन की पीड़ा ?

विभाजन के समय हुआ क्या क्या ?

विभाजन के लिए क्या था विभिन्न राजनैतिक पार्टियों दृष्टिकोण ?

क्या थी पीड़ा पाकिस्तान से आये हिन्दू शरणार्थियों की ... मदन लाल पाहवा और विष्णु करकरे की?

क्या थी गोडसे की विवशता ?

क्या गोडसे नही जानते थे की आम आदमी को मरने में और एक राष्ट्रपिता को मरने में क्या अंतर है ?

क्या होगा परिवार का ?

कैसे कैसे कष्ट सहने पड़ेंगे परिवार और सम्बन्धियों को और मित्रों को ?

क्या था गांधी वध का वास्तविक कारण ?

क्या हुआ 30 जनवरी की रात्री को ... पुणे के ब्राह्मणों के साथ ?

क्या था सावरकर और हिन्दू महासभा का चिन्तन ?

क्या हुआ गोडसे के बाद नारायण राव आप्टे का .. कैसी नृशंस फांसी दी गयी उन्हें l

यह लेख पढने के बाद कृपया बताएं कैसे उतारेगा भारतीय जनमानस पंडित नाथूराम गोडसे जी का कर्ज....

आइये इन सब सवालों के उत्तर खोजें ....

पाकिस्तान से दिल्ली की तरफ जो रेलगाड़िया आ रही थी, उनमे हिन्दू इस प्रकार बैठे थे जैसे माल की बोरिया एक के ऊपर एक रची जाती हैं.अन्दर ज्यादातर मरे हुए ही थे, गला कटे हुए lरेलगाड़ी के छप्पर पर बहुत से लोग बैठे हुए थे, डिब्बों के अन्दर सिर्फ सांस लेने भर की जगह बाकी थी l बैलगाड़िया ट्रक्स हिन्दुओं से भरे हुए थे, रेलगाड़ियों पर लिखा हुआ था,," आज़ादी का तोहफा " रेलगाड़ी में जो लाशें भरी हुई थी उनकी हालत कुछ ऐसी थी की उनको उठाना मुश्किल था, दिल्ली पुलिस को फावड़ें में उन लाशों को भरकर उठाना पड़ा l ट्रक में भरकर किसी निर्जन स्थान पर ले जाकर, उन पर पेट्रोल के फवारे मारकर उन लाशों को जलाना पड़ा इतनी विकट हालत थी उन मृतदेहों की... भयानक बदबू......

सियालकोट से खबरे आ रही थी की वहां से हिन्दुओं को निकाला जा रहा हैं, उनके घर, उनकी खेती, पैसा-अडका, सोना-चाँदी, बर्तन सब मुसलमानों ने अपने कब्जे में ले लिए थे l मुस्लिम लीग ने सिवाय कपड़ों के कुछ भी ले जाने पर रोक लगा दी थी. किसी भी गाडी पर हल्ला करके हाथ को लगे उतनी महिलाओं- बच्चियों को भगाया गया.बलात्कार किये बिना एक भी हिन्दू स्त्री वहां से वापस नहीं आ सकती थी ... बलात्कार किये बिना.....?

जो स्त्रियाँ वहां से जिन्दा वापस आई वो अपनी वैद्यकीय जांच करवाने से डर रही थी....

डॉक्टर ने पूछा क्यों ???

उन महिलाओं ने जवाब दिया... हम आपको क्या बताये हमें क्या हुआ हैं ?

हमपर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं हमें भी पता नहीं हैं...उनके सारे शारीर पर चाकुओं के घाव थे.

"आज़ादी का तोहफा"

जिन स्थानों से लोगों ने जाने से मना कर दिया, उन स्थानों पर हिन्दू स्त्रियों की नग्न यात्राएं (धिंड) निकाली गयीं, बाज़ार सजाकर उनकी बोलियाँ लगायी गयीं और उनको दासियों की तरह खरीदा बेचा गया l

1947 के बाद दिल्ली में 400000 हिन्दू निर्वासित आये, और इन हिन्दुओं को जिस हाल में यहाँ आना पड़ा था, उसके बावजूद पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने ही चाहिए ऐसा महात्मा जी का आग्रह था... क्योकि एक तिहाई भारत के तुकडे हुए हैं तो भारत के खजाने का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान को मिलना चाहिए था l

विधि मंडल ने विरोध किया, पैसा नहीं देगे....और फिर बिरला भवन के पटांगन में महात्मा जी अनशन पर बैठ गए.....पैसे  दो, नहीं तो मैं मर जाउगा....
एक तरफ अपने मुहँ से ये कहने वाले महात्मा जी, की हिंसा उनको पसंद नहीं हैं l दूसरी तरफ जो हिंसा कर रहे थे उनके लिए अनशन पर बैठ गए... क्या यह हिंसा नहीं थी .. अहिंसक आतंकवाद की आड़ में

दिल्ली में हिन्दू निर्वासितों के रहने की कोई व्यवस्था नहीं थी, इससे ज्यादा बुरी बात ये थी की दिल्ली में खाली पड़ी मस्जिदों में हिन्दुओं ने शरण ली तब बिरला भवन से महात्मा जी ने भाषण में कहा की दिल्ली पुलिस को मेरा आदेश हैं मस्जिद जैसी चीजों पर हिन्दुओं का कोई ताबा नहीं रहना चाहिए l निर्वासितों को बाहर निकालकर मस्जिदे खाली करे..क्योंकि महात्मा जी की दृष्टी में जान सिर्फ मुसलमानों में थी हिन्दुओं में नहीं...

जनवरी की कडकडाती ठंडी में हिन्दू महिलाओं और छोटे छोटे बच्चों को हाथ पकड़कर पुलिस ने मस्जिद के बाहर निकाला, गटर के किनारे रहो लेकिन छत के निचे नहीं l क्योकि... तुम हिन्दू हो....

4000000 हिन्दू भारत में आये थे,ये सोचकर की ये भारत हमारा हैं....ये सब निर्वासित गांधीजी से मिलाने बिरला भवन जाते थे तब गांधीजी माइक पर से कहते थे क्यों आये यहाँ अपने घर जायदाद बेचकर, वहीँ पर अहिंसात्मक प्रतिकार करके क्यों नहीं रहे ??

यही अपराध हुआ तुमसे अभी भी वही वापस जाओ..और ये महात्मा किस आशा पर पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने निकले थे ?

कैसा होगा वो मोहनदास करमचन्द गाजी उर्फ़ गंधासुर ... कितना महान ...

जिसने बिना तलवार उठाये ... 35 लाख हिन्दुओं का नरसंहार करवाया

2 करोड़ से ज्यादा हिन्दुओं का इस्लाम में धर्मांतरण हुआऔर उसके बाद यह संख्या 10 करोड़ भी पहुंची l

10 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को खरीदा बेचा गया l

20 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को जबरन मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया, तरह तरह की शारीरिक और मानसिक यातनाओं के बाद

ऐसे बहुत से प्रश्न, वास्तविकताएं और सत्य तथा तथ्य हैं जो की 1947 के समकालीन लोगों ने अपनी आने वाली पीढ़ियों से छुपाये, हिन्दू कहते हैं की जो हो गया उसे भूल जाओ, नए कल की शुरुआत करो ...

परन्तु इस्लाम के लिए तो कोई कल नहीं .. कोई आज नहीं ...वहां तो दार-उल-हर्ब को दार-उल-इस्लाम में बदलने का ही लक्ष्य है पल.. प्रति पल विभाजन के बाद एक और विभाजन का षड्यंत्र ...

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आपने बहुत से देशों में से नए देशों का निर्माण देखा होगा, U S S R टूटने के बाद बहुत से नए देश बने, जैसे ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान आदि ... परन्तु यह सब देश जो बने वो एक परिभाषित अविभाजित सीमा के अंदर बने l

और जब भारत का विभाजन हुआ .. तो क्या कारण थे की पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान बनाए गए... क्यों नही एक ही पाकिस्तान बनाया गया... या तो पश्चिम में बना लेते या फिर पूर्व में l

परन्तु ऐसा नही हुआ .... यहाँ पर उल्लेखनीय है की मोहनदास करमचन्द ने तो यहाँ तक कहा था की पूरा पंजाब पाकिस्तान में जाना चाहिए, बहुत कम लोगों को ज्ञात है की 1947 के समय में पंजाब की सीमा दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र तक होती थी ...

यानी की पाकिस्तान का बोर्डर दिल्ली के साथ होना तय था ... मोहनदास करमचन्द के अनुसार l

नवम्बर 1968 में पंजाब में से दो नये राज्यों का उदय हुआ .. हिमाचल प्रदेश और हरियाणा l

पाकिस्तान जैसा मुस्लिम राष्ट्र पाने के बाद भी जिन्ना और मुस्लिम लीग चैन से नहीं बैठे ...

उन्होंने फिर से मांग की ... की हमको पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने में बहुत समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं l

1. पानी के रास्ते बहुत लम्बा सफर हो जाता है क्योंकि श्री लंका के रस्ते से घूम कर जाना पड़ता है l

2. और हवाई जहाज से यात्राएं करने में अभी पाकिस्तान के मुसलमान सक्षम नही हैं l इसलिए .... कुछ मांगें रखी गयीं 1. इसलिए हमको भारत के बीचो बीच एक Corridor बना कर दिया जाए....

2. जो लाहोर से ढाका तक जाता हो ... (NH - 1)

3. जो दिल्ली के पास से जाता हो ...

4. जिसकी चौड़ाई कम से कम 10 मील की हो ... (10 Miles = 16 KM)

5. इस पूरे Corridor में केवल मुस्लिम लोग ही रहेंगे l

30 जनवरी को गांधी वध यदि न होता, तो तत्कालीन परिस्थितियों में बच्चा बच्चा यह जानता था की यदि मोहनदास करमचन्द 3 फरवरी, 1948 को पाकिस्तान पहुँच गया तो इस मांग को भी ...मान लिया जायेगा l

तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार तो मोहनदास करमचन्द किसी की बात सुनने की स्थिति में था न ही समझने में ...और समय भी नहीं था जिसके कारण हुतात्मा नाथूराम गोडसे जी को गांधी वध जैसा अत्यधिक साहसी और शौर्यतापूर्ण निर्णय लेना पडा l

हुतात्मा का अर्थ होता है जिस आत्मा ने अपने प्राणों की आहुति दी हो .... जिसको की वीरगति को प्राप्त होना भी कहा जाता है l

यहाँ यह सार्थक चर्चा का विषय होना चाहिए की हुतात्मा पंडित नाथूराम गोडसे जीने क्या एक बार भी नहीं सोचा होगा की वो क्या करने जा रहे हैं ?

किसके लिए ये सब कुछ कर रहे हैं ?

उनके इस निर्णय से उनके घर, परिवार, सम्बन्धियों, उनकी जाती और उनसे जुड़े  संगठनो पर क्या असर पड़ेगा ?

घर परिवार का तो जो हुआ सो हुआ .... जाने कितने जघन्य प्रकारों से समस्त परिवार और सम्बन्धियों को प्रताड़ित किया गया l

परन्तु ..... अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले मोहनदास करमचन्द के कुछ अहिंसक आतंकवादियों ने 30 जनवरी, 1948 की रात को ही पुणे में 6000 ब्राह्मणों को चुन चुन कर घर से निकाल निकाल कर जिन्दा जलाया l

10000 से ज्यादा ब्राह्मणों के घर और दुकानें जलाए गए l

सोचने का विषय यह है की उस समय संचार माध्यम इतने उच्च कोटि के नहीं थे, विकसित नही थे ... फिर कैसे 3 घंटे के अंदर अंदर इतना सुनियोजित तरीके से इतना बड़ा नरसंहार कर दिया गया ....

सवाल उठता है की ... क्या उन अहिंसक आतंकवादियों को पहले से यह ज्ञात था की गांधी वध होने वाला है ?

जस्टिस खोसला जिन्होंने गांधी वध से सम्बन्धित केस की पूरी सुनवाई की... 35 तारीखें पडीं l

अदालत ने निरीक्षण करवाया और पाया हुतात्मा पनदिर नाथूराम गोडसे जी की मानसिक दशा को तत्कालीन चिकित्सकों ने एक दम सामान्य घोषित किया l  पंडित जी ने अपना अपराध स्वीकार किया पहली ही सुनवाई में और अगली 34  सुनवाइयों में कुछ नहीं बोले ... सबसे आखिरी सुनवाई में पंडित जी ने अपने शब्द कहे ""

गाँधी वध के समय न्यायमूर्ति खोसला से नाथूराम ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर सुनाने की अनुमति मांगी थी और उसे यह अनुमति मिली थी | नाथूराम गोडसे का यह न्यायालयीन वक्तव्य भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था |इस प्रतिबन्ध के विरुद्ध नाथूराम गोडसे के भाई तथा गाँधी वध के सह अभियुक्त गोपाल गोडसे ने ६० वर्षों तक वैधानिक लडाई लड़ी और उसके फलस्वरूप सर्वोच्च न्यायलय ने इस प्रतिबन्ध को हटा लिया तथा उस वक्तव्य के प्रकाशन की अनुमति दे दी। नाथूराम गोडसे ने न्यायलय के समक्ष गाँधी वध के जो १५० कारण बताये थे उनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं -

1. अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (1919) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाए। गान्धी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया।

2. भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व गान्धी की ओर देख रहा था कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचाएं, किन्तु गान्धी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया। क्या आश्चर्य कि आज भी भगत सिंह वे अन्य क्रान्तिकारियों को आतंकवादी कहा जाता है।

3. 6 मई 1946 को समाजवादी कार्यकर्ताओं को अपने सम्बोधन में गान्धी ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।

4.मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए 1921 में गान्धी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी केरल के मोपला में मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग 1500 हिन्दु मारे गए व 2000 से अधिक को मुसलमान बना लिया गया। गान्धी ने इस हिंसा का विरोध नहीं किया, वरन् खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में वर्णन किया।

5.1926 में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या अब्दुल रशीद नामक एक मुस्लिम युवक ने कर दी, इसकी प्रतिक्रियास्वरूप गान्धी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दु-मुस्लिम एकता के लिए अहितकारी घोषित किया।

6.गान्धी ने अनेक अवसरों पर छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोविन्द सिंह जी को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा।

7.गान्धी ने जहाँ एक ओर काश्मीर के हिन्दु राजा हरि सिंह को काश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दिया, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दु बहुल हैदराबाद में समर्थन किया।

8. यह गान्धी ही था जिसने मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आज़म की उपाधि दी।

9. कॉंग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिए बनी समिति (1931) ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र पर निर्णय लिया किन्तु गाँधी कि जिद के कारण उसे तिरंगा कर दिया गया।

10. कॉंग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गान्धी पट्टभि सीतारमय्या का समर्थन कर रहा था, अत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व असहयोग के कारण पदत्याग कर दिया।

11. लाहोर कॉंग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु गान्धी की जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।

12. 14-15 जून, 1947  को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कॉंग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, किन्तु गान्धी ने वहाँ पहुंच प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।

13. मोहम्मद अली जिन्ना ने गान्धी से विभाजन के समय हिन्दु मुस्लिम जनसँख्या की सम्पूर्ण अदला बदली का आग्रह किया था जिसे गान्धी ने अस्वीकार कर दिया।

14. जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया, किन्तु गान्धी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।

15. पाकिस्तान से आए विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली तो गान्धी ने उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध, स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया।

16. 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तान ने काश्मीर पर आक्रमण कर दिया, उससे पूर्व माउँटबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को 55 करोड़ रुपए की राशि देने का परामर्श दिया था। केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने को टालने का निर्णय लिया किन्तु गान्धी ने उसी समय यह राशि तुरन्त दिलवाने के लिए आमरण अनशन किया- फलस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत के हितों के विपरीत दे दी गयी।

उपरोक्त परिस्थितियों में नथूराम गोडसे नामक एक देशभक्त सच्चे भारतीय युवक ने गान्धी का वध कर दिया।

न्य़यालय में चले अभियोग के परिणामस्वरूप गोडसे को मृत्युदण्ड मिला किन्तु गोडसे ने न्यायालय में अपने कृत्य का जो स्पष्टीकरण दिया उससे प्रभावित होकर उस अभियोग के न्यायधीश श्री जे. डी. खोसला ने अपनी एक पुस्तक में लिखा-

"नथूराम का अभिभाषण दर्शकों के लिए एक आकर्षक दृश्य था। खचाखच भरा न्यायालय इतना भावाकुल हुआ कि लोगों की आहें और सिसकियाँ सुनने में आती थींऔर उनके गीले नेत्र और गिरने वाले आँसू दृष्टिगोचर होते थे। न्यायालय में उपस्थित उन प्रेक्षकों को यदि न्यायदान का कार्य सौंपा जाता तो मुझे तनिक भी संदेह नहीं कि उन्होंने अधिकाधिक सँख्या में यह घोषित किया होता कि नथूराम निर्दोष है।"

तो भी नथूराम ने भारतीय न्यायव्यवस्था के अनुसार एक व्यक्ति की हत्या के अपराध का दण्ड मृत्युदण्ड के रूप में सहज ही स्वीकार किया। परन्तु भारतमाता के विरुद्ध जो अपराध गान्धी ने किए, उनका दण्ड भारतमाता व उसकी सन्तानों को भुगतना पड़ रहा है। यह स्थिति कब बदलेगी?

प्रश्न यह भी उठता है की पंडित नाथूराम गोडसे जी ने तो गाँधी वध किया उन्हें पैशाचिक कानूनों के द्वारा मृत्यु दंड दिया गया परन्तु नाना जी आप्टे ने तो गोली नहीं मारी थी ... उन्हें क्यों मृत्युदंड दिया गया ?

नाथूराम गोडसे को सह अभियुक्त नाना आप्टे के साथ १५ नवम्बर १९४९ को पंजाब के अम्बाला की जेल में मृत्यु दंड दे दिया गया। उन्होंने अपने अंतिम शब्दों में कहा था...

यदि अपने देश के प्रति भक्तिभाव रखना कोई पाप है तो मैंने वो पाप किया है और यदि यह पुन्य हिया तो उसके द्वारा अर्जित पुन्य पद पर मैं अपना नम्र अधिकार व्यक्त करता हूँ

– पंडित नाथूराम गोडसे

आशा है कि लोग पंडित नाथूराम को समझे व् जानें। प्रणाम हुतात्मा को।

भारत माता की जय

"तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें!

अगर आप नाथूराम गोडसे के समर्थक है तो इस पोस्ट को और तक भी पहुँचाए। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो तक सच्चाई पहुँचे। निश्चित ही एक दिन सत्य की विजय होगी।


वाट्स अप पर मिला।


होली रेलवे सीमा 2017 परिक्रमा का उत्साह

* करणी दान सिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 12 मार्च 2017।

 रेलवे परिसीमा जहां रामलीला मंच है उससे कुछ दूरी पर सामने होली का सजाई गई। पूजन हुआ और उसके बाद होली मंगलाई गई। राजस्थानी भाषा में मंगलाने का मतलब जलाना होता है। इस पर्व को यहां आसपास के लोगों ने मौज मस्ती हर्ष और उल्लास के साथ मनाया। आसपास के जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। व्यवसाइयों ने भाग लिया।सरकारी कर्मचारियों ने परिवारजनों ने भाग लिया।
 यहां पर होली का महोत्सव कई सालों से मनाया जा रहा है। बड़ा उत्साह होता है। दिन भर पूजन होता है जो सूर्यास्त तक होता रहा।
 विधिवत पूजन मंत्रोचार के साथ किए जाने के बाद होलिका को अग्नि प्रदान की गई। एक युवा ने जलती हुई होली में से प्रहलाद रूपी हरी पेड़ की डाल को निकाला और उसे पानी में ले जाकर छोड़ा। परंपरा है प्रहलाद को बचाने की। मान्यता है कि जो युवा प्रहलाद को जलती हुई होली में से बचाता है उसका विवाह शीघ्र ही होता है। इस होली महोत्सव के कुछ चित्र लिए गए जो यहां दिए जा रहे हैं


















































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