Friday, March 31, 2017

जैन आचार्य विजय आनंद जी महाराज साहब का सूरतगढ़ 8 अप्रैल को आगमन


सूरतगढ।

जैन आचार्य विजयानंद जी  महाराज सा. 8 अप्रैल को यहां पर पधारेंगे। 

उनके संग  मुनिराज  जय कीर्ति विजय महाराज व मुनि दिव्यांश विजय महाराज भी पधारेंगे।  सूरतगढ़ में 2 दिन का प्रवास रहेगा। जैन आचार्य का मंगल प्रवेश 8 अप्रैल को सुबह 8:00 बजे PWD रेस्ट हाउस के पास होगा। यहां से जैन संत श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर पहुंचेंगे। श्री पार्श्वनाथ जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ के सुशील सेठिया ने बताया कि जैन मंदिर में कार्यक्रम होगा। अगले दिन 9 अप्रैल को भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। यह महोत्सव श्री माहेश्वरी सदन में सुबह करीब 8:30 बजे से प्रारंभ होगा। उस दिन जैन समाज की ओर से प्रभात फेरी भी निकाली जाएगी।

आचार्य 10 अप्रैल को श्रीगंगानगर के लिए विहार करेंगे।

Thursday, March 30, 2017

देश नै ताकत देवै आपणो राजस्थान अर आपणी राजस्थानी :कविता:


देश नै ताकत देवै
आपणो राजस्थान
अर आपणी राजस्थानी।
जीणै रा आधार दोनूं
राजस्थान अर राजस्थानी।
डूंगरा मांय आवाज गूंजै
धोरिया सोने सिरखा चमकै
हरा हरा खेतां री महक
जीणै रा आधार दोनूं।
देश रै कण कण मांय
राजस्थान बोलै
बठै बठै राजस्थानी
सगळा नै जोडै़।
राजस्थानी गळै मिलावै
सागै सागै कदम बढावै
देश री शान है राजस्थान
देश री ताकत है राजस्थानी।
राजस्थान मांय उपजै
नुंई नुंई उम्मीदां
अर बिंयानै सींचै
सरचै राजस्थानी।
राजस्थानी सूं
सज्योड़ौ है
साहित्य संसार,
वीर रस सगळौ
राजस्थानी भरयौ
सीनो चोड़ौ
करै राजस्थानी।
देश नै ताकत देवै
आपणो राजस्थान
अर आपणी राजस्थानी।


                                     
करणीदानसिंह राजपूत 
स्वतंत्र पत्रकार,
                                              

सूरतगढ़।
                                         

94143 81356                               
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5-12-2015.
update 30-3-2017.









राजथानी दिवस माथै राजस्थानी नै मान्यता लेवण सारूं सरकार नै खुली ललकार


पैलां मूं माथै पट्टी बांध जुलूस निकाल्यौ अर बाद मांय जलसे मांय दीन्हीं ललकार

सूरतगढ़ 30 मार्च 2015.अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति री ओर स्यूं राजस्थानी दिवस 30 मार्च रे अवसर माथै राजस्थानी भाषा नै संवैधानिक मान्यता लेवण सारूं जुलूस अर जलसे मांय सीधी ललकार दीन्हीं कै अब चुप रहण री वेळा नीं है। सरकार ललकार  री भाषा जाणै अर ललकार री भाषा ही मानै। अब सगळां रै भेळप रै मजबूत ललकार सूं  ही मनावांगा। 

Tuesday, March 28, 2017

बीकानेर में विशाल हिंदू यात्रा:भगवा साफे भगवा ध्वज

सूरतगढ़ 28 मार्च 2017 बीकानेर में आज शाम को विशाल हिंदू धर्म यात्रा और महा आरती के जुलूस में लाखों लोगों ने भाग लिया। भगवा ध्वज लहराते पैदल और वाहनों में सवार जोश से वंदे मातरम और भारत माता  जयकारों के साथ यह यात्रा निकाली गई। लोगों के अनुसार यात्रा करीब 5 किलोमीटर थी।

भगवा ध्वज में ओम का चिन्ह बना हुआ था। लोग भगवा साफा, भगवा पटका धारे जोश में थे।अनेक लोगों के हाथों में तलवारें भी थी। इस धर्म यात्रा की चर्चा दूर तक चली।

धर्म यात्रा के कुछ चित्र देखें।।







नई








मलकाना कलां में नशा मुक्ति शिविर आयोजित हुआ:



श्रीगंगानगर, 28 मार्च। जिला पुलिस अधीक्षक श्री राहुल कोटोकी के निर्देशानुसार पुलिस थाना केसरीसिंहपुर द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मलकाना कलां में नशा मुक्ति जन जागृति कार्यशाला एंव निशुल्क नशा मुक्ति परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में राजकीय उ0मा0वि0 मलकाना कलां के विद्यार्थियों सहित भारी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया ।


       कार्यशाला के मुख्य वक्ता नशा मुक्ति विशेषज्ञ डॉ.रविकान्त गोयल ने इस अवसर पर कहा कि नशे में खुशियां तलाशना अपने विनाश को आह्वान देना है। जीवन  में  बढ्ते  तनाव निराशाओं और भौतिक संसाधन जुटाने की अंधी दौड में असफल  रहने  पर  जो लोग नशे में अपनी खुशियां तलाशते है वे धीरे-धीरे अपने और अपने परिवार के जीवन को बर्बादी के रास्ते पर ला के खडा कर देते हैं। नशा किसी भी समस्या का हल नहीं है। जो लोग किसी भी कारणवश नशे की चपेट में आ चुके हैं वे अपने परिवार और समाज के लोगों की सलाह पर नशा छोडे़। दृढ संकल्प से बिना कोई नुकसान उठाए नशा छोडा जा सकता है ।


       सामाजिक कार्यकर्ता श्री बलवन्त सिंह ने विशिष्ठ अतिथि के रूप में सबोंधित करते हुए कहा कि जो लोग समय बिताने के लिए गलत संगति में पड कर नशा करते है। वे सामाजिक कार्यां में जुटकर अपना कीमती समय समाज के विकास में लगाए ताकि एक स्वच्छ नशा मुक्त भारत का निर्माण किया जा सके ।


       कार्यक्रम को संबोधित करते हुए थानाधिकारी श्री जीतराम ने कहा की बच्चों को शिक्षित कर नशा मुक्ति का वातावरण निर्माण करने में बडी मदद मिलेगी।  


       डायरेक्टर प्रतिनिधि श्री अमृतपाल सिंह बराड ने भी इस विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि नशे को समाप्त कर युवा पीढी को राष्ट निर्माण में जोडा जा सकता है ।


        कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री मती रेखा गोयल ने कहा कि आम लोग नशा बेचने वाले लोगों की सूचना पहुंचाए ताकि समाज में जहर फैला रहे लोगों पर प्रभावी कार्यवाही की जा सके। जो लोग किसी भी कारण नशे की चपेट में आ गये हैं वे जिला पुलिस प्रशासन द्वारा संचालित राजकीय नशा मुक्ति परामर्श एंव उपचचार केन्द्र की सेवांए लेकर नशा छोडें ।


        उक्त कार्यक्रम में शाला के, श्री बलजिन्द्र सिंह, श्री सुनील कुमार, श्री तरूण गुप्ता, श्री जगमेल सिंह, श्री गौरव काठपाल, श्री गुरकमल सिंह, श्रीमती सरोज सहित गांव के गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अन्त में डॉ. रविकान्त गोयल ने भविष्य में नशा नहीं करने की शपथ दिलाई ।





Monday, March 27, 2017

सूरतगढ: अकाल में पशु आहार खाकर जिंदा रहने की मजबूरी:

-  करणीदानसिंह राजपूत -

सूरतगढ़ तहसील का टिब्बा क्षेत्र जहां अकाल में पशु आहार ( चापड़ )खाकर लोगों को जिंदा रहना पड़ा​ था। यह दर्दनाक दास्तान भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन विधायक हंसराज मिढा और​ मेरे ( करणीदानसिंह राजपूत ) के सामने करीब 34-35 साल पहले उजागर हुआ था। सूरतगढ़ तहसील के अकालग्रस्त टिबा क्षेत्र की रिपोर्टिंग के लिए मैं करणीदान सिंह राजपूत विधायक हंसराज जी मिढा के साथ इलाके के दौरे कर रहा था। हंसराज जी मिढा का कार्यकाल 1980 से 1985 तक का था। सूरतगढ़ तहसील का टिबा क्षेत्र अकाल के समय तड़प उठता था। अकाल राहत कार्यों से भी पार नहीं पड़ती थी। सांवल सर के आसपास ग्रामीण इलाकों में घूमते हुए सांवलसर पहुंचे तब लोगों ने अपनी दर्दनाक दास्तान सुनाई। अकाल राहत कार्य में खुदाई करने का कार्य करवाया जाता था। वहां के लोगों ने बताया कि पक्की जमीन जहां चूना पत्थर भी है खोदना बहुत मुश्किल है। भयानक गर्मी में कुछ घंटों का कार्य होता है। निर्धारित माप की जगह खोदी नहीं जा सकती। वह स्थल भी दिखाए। विधायक हंसराज जी मिढा और मैं पहुंचे पानी वानी पिया और चारपाईयों पर बैठे।लोगों से हाल-चाल जान रहे थे। लोगों ने कहा कि असलियत बताते हुए बड़ा दर्द हो रहा है।शर्म भी आती है कि हमारे हालात और जिस प्रकार का जीवन गुजार रहे हैं वह कितना दर्दनाक है। बार बार पूछा तब लोगों ने बताया कि अकाल के इस भीषण काल में पशु चापड़ (पशु आहार) खा रहे हैं। लोगों ने बताया पशु आहार का थैला लाते हैं। पशु आहार गिट्टियों में होता है। उसे पहले कूटते हैं और बाद में अनाज में मिलाकर पीसते हैं। वह अनाज के आटे में शामिल हो जाता है और उस आटे की रोटियां बनाकर खाते हैं।अकाल में जीवन गुजारते हैं जो जानवरों जैसा है। यह दास्तान सुनकर विधायक जी और मैं दोनों ही हतप्रभ रह गए। पशु आहार या पशु चापड़ कहें वह चावल की कणी भूसी दालों के छिलके चनों के छिलके आदि को मिलाकर के बनाया जाता है । मैं उस समय राजस्थान पत्रिका से जुड़ा हुआ था और मेरी यह रिपोर्ट और इसके साथ अकाल ग्रस्त इलाकों की अन्य रिपोर्टें राजस्थान पत्रिका में चित्रों सहित प्रकाशित हुआ करती थी। आज जब अकालग्रस्त रहने वाले इलाके के लोगों द्वारा एटा सिंगरासर माइनर की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है, तब यह दर्दनाक संस्मरण मैं लोगों के सामने रख रहा हूं। इतनी विकट स्थिति में लोग कैसे जीवन गुजारते हैं। इलाके के लोगों को पानी चाहिए तभी उनका जीवन संवर सकता है।इलाके के जनप्रतिनिधियों को सामाजिक संगठनों को एक राय होकर कार्य करना होगा।एक दिन निश्चित रूप से यह मांग मंजूर होगी। मेरा इलाके के सोशल मीडिया चलाने वालों से निवेदन है कि अगर पसंद है तो इसे सांझा करें काट पीट कर कॉपी करके अपने वाल पर लगाने आदि से बचें। कारण यह है कि जो बात मैं सामने रख रहा हूं वह सही तरीके से पहुंचे।जब काट पीट हो जाती है तब सही रिपोर्ट लोगों तक नहीं पहुंच पाती, इसलिए इसे सांझा करें। 


-करणीदान सिंह राजपूत,

 राजस्थान सरकार द्वारा  अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,

सूरतगढ ( राजस्थान )

संपर्क   94143 81356.


Sunday, March 26, 2017

सीमांत रक्षक अखबार के मालिक के विरूद्ध रजनीमोदी का अदालत में इस्तगासा:




संपादक सत्यपाल मेघवाल,उनकी धर्मपत्नी मीनाक्षी व बेटे योगेश को प्रतिपक्षी बनाया गया था।



सूरतगढ़ 24 अगस्त 2016. 

up date


दैनिक सीमांत रक्षक अखबार के विरूद्ध भाजपा नेता श्रीमती रजनी मोदी ने स्थानीय अदालत में इस्तगासा किया था। 

 अखबार के मालिक संपादक सत्यपाल मेघवाल,उनकी धर्मपत्नी मीनाक्षी व बेटे योगेश को प्रतिपक्षी बनाया गया था।  । इस्तगासे में अखबार का लाखों रूपए का आय व्यय ब्यौरा व कागजात फर्जी तैयार किए जाने का आरोप है। रजनी मोदी की पूर्व में की गई शिकायतों में आरोप था कि लाखों रूपए का अखबार का टर्न ओवर होते हुए भी बीपीएल कार्ड बनवा कर गरीबों को मिलने वाला राशन लेता रहा।
इस्तगासा 23 अगस्त को पेश किया गया है। रजनी मोदी ने पहले विभागों में शिकायतें की व सीएम सूरतगढ़ आई तब उनको शिकायत दी।

रजनी मोदी के इस्तगासे पर सूरतगढ़ सिटी पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा में दिनांक 1-9-2016 को मुकदमा नंबर 437 दर्ज हुआ यह धाराएं थी 386 466 468 469 471 420 और 120 बी में दर्ज हुआ था। रजनी मोदी और अखबार मालिक के बीच समझौता हो गया ऐसी चर्चा है। 

मोदी ने जो आरोप लगाया उसमें सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप भी था। क्या इस बिंदु पर रजनी मोदी समझौता कर सकती है? 

 रजनी मोदी की शिकायत पर सरकारी विज्ञापनों की मंजूरी अखबार को नहीं मिली और वह फाइल जयपुर में अभी भी अटकी हुई पड़ी है। देखते हैं आगे क्या होता है? उस फाइल का निस्तारण कब तक होता है? समाचार पत्रों की फाइलों का निस्तारण निदेशालय में और मंत्रालय में तीव्र गति से होना चाहिए। अगर किसी की शिकायत है तो उन बिंदुओं पर जांच तुरंत की जानी चाहिए। सरकार एक तरफ त्वरित गति से कार्य करने का निर्देश देती है लेकिन सरकार के पास ही फाइल महीनों तक अटकी रहे। इसे नीति और निर्देश के पक्ष में नहीं माना जा सकता।



24-8-2016.
up date 26-3-2017.





एटा सिंगरासर माइनर आंदोलन में टकराव नहीं हो


-  करणीदानसिंह राजपूत - 

सूरतगढ़ 25 मार्च2017.

 एटा सिंगरासर माइनर आंदोलन के नेताओं की ओर से 27 मार्च को सूरतगढ़ बंद करने के साथ ही प्रशासन को ठप करने की चेतावनी भी जारी की हुई है। प्रशासनिक कार्यालयों के चारों तरफ लक्कड़ के अवरोधक लगाकर रास्ते बंद किए हुए हैं।SDM कार्यालय के एडीएम और तहसील कार्यालय सभी के रास्तों पर अवरोधक लगे हुए हैं।  पहले प्रशासन ने शहर में धारा 144 लगाई। आंदोलनकारी शहर में घुसे और इंदिरा सर्किल पर सभा की। प्रशासन पर दबाव बनाया और आखिर प्रशासन को पुलिस थाने के सामने प्रशासनिक कार्यालयों से थोड़ी सी दूरी पर महापड़ाव डालने की अनुमति देनी पड़ी। यह महापड़ाव वाली जगह कोई ज्यादा दूर नहीं है। प्रशासन तो सरकार के नीति निर्देश पर कार्य करता है। सरकार की इच्छा इससे प्रगट हो रही है। वैसे जिला कलेक्टर जिला पुलिस अधीक्षक और सूरतगढ़ के प्रशासनिक अधिकारी किसी प्रकार का भी टकराव का आरोप अपने सिर पर लेने के इच्छुक नहीं हैं। आंदोलन कब शांत रहे और कब अशांत हो जाय।उसका कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। आंदोलनकारियों ने 27 मार्च को प्रशासन ठप करने की चेतावनी दी है तो यह मान कर ही चलना चाहिए थी प्रशासन की मामूली सी चूक होते ही मामला गड़बड़ हो सकता है। आंदोलन में महिलाओं की संख्या भी काफी है जिन्हें रोका जाना निश्चित रूप से असंभव होगा। महिला पुलिस आंदोलनकारियों से जूझे और रोक पाए यह  समय बताएगा। आंदोलनकारियों में बहुत जोर व  जोश है और वे हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि सरकार उनकी मांग को मान ले। टिब्बा क्षेत्र निश्चित रूप से सिंचाई के लिए प्यासा है, बल्कि समुचित पेयजल भी अनेक बार उपलब्ध नहीं होता। इलाके के लोग और इस इलाके के सभी राजनेता इस स्थिति को समझते हैं लेकिन वे सत्ता में आते ही बेबस हो जाते हैं और मुख्यमंत्री जो चाहे उस हिसाब से खुद को बांधकर चलते हैं। विदित रहे कि राजेंद्र सिंह भादू पर निष्क्रियता का आरोप लग रहा है। ये वर्तमान में सूरतगढ़ से विधायक हैं। राजेंद्र सिंह भादू ने 2008 के चुनाव से पहले एटा सिंगरासर माइनर की मांग उठाई थी और कानौर हेड पर इलाके के किसानों को महिलाओं को एकत्रित करके और संगठित रूप से आंदोलन की शुरुआत की थी। इसके बाद 2008 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी गंगाजल मील राजेंद्र सिंह भादू की इस मांग को ले उड़े। भादू पीछे रह गये। गंगाजल मील ने लोगों को प्रभावित किया यह समझो कि इस मांग को अच्छे ढंग से प्रचारित किया और वे चुनाव जीते तथा विधायक बन गए। गंगा जल मील ने इस महत्वपूर्ण मांग में बड़ा परिवर्तन करवा दिया। राजेंद्र सिंह भादू की ओर से मांग थी इंदिरा गांधी नहर से एटा सिंगरासर माइनर निकालने की ताकि इंदिरा गांधी नहर से पानी लगातार इस माइनर को मिलता रहे। गंगाजल मील  ने और तत्कालीन सरकार ने इसमें महत्वपूर्ण परिवर्तन किया। इसे लघु सिंचाई योजना बना दिया और 5 गांव तक सीमित कर दिया। इसके अलावा इंदिरा गांधी नहर के बजाए घग्घर कृत्रिम झील से पानी देने की योजना बना ली झील का पानी इंदिरा गांधी नहर में डाला जाएगा और आगे एटा सिंगरासर माइनर में निकाल लिया जाएगा।झील में पानी होगा तब ही मिल पायेगा। इसके लिए बजट भी उपलब्ध हुआ सर्वे भी हुआ मगर योजना सिरे ही नहीं चढ़ पाई। किसानों को सच्चाई नहीं बताई गई। इसके बाद सरकार बदल गई। गंगाजल मील को हरा कर राजेंद्र सिंह भादू भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर विधायक बन गए। अब चूंकि राजेंद्र सिंह भादू की ही शुरुआत में मांग थी इसलिए उनकी जिम्मेदारी भी बन गई कि किसी भी हालत में सरकार पर दबाव बनाए या अपनी मांग की अपील में इतना दम पैदा करते कि सरकार यह बात तुरंत मान लेती। राजेंद्र सिंह भादू की कार्यप्रणाली जैसी है वह इलाके के लोग भली-भांति जानते हैं। उस पर यहां किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है। यह कहा जा सकता है कि आंदोलनकारियों में और विधायक के बीच में जो सामंजस्य होना चाहिए वह बन नहीं पाया। यह कहना भी उचित होगा कि विधायक को इसके लिए अधिक से अधिक प्रयास करके आंदोलनकारियों के दिल में जगह बनानी चाहिए थी। दोनों के बीच बातचीत का अभाव रहा है। राजेंद्र सिंह भादू ने आंदोलनकारियों से जहां तक ध्यान में है एक बार बात की। पानी की मांग को लेकर वसुंधरा राजे से भेंट भी करके आए लेकिन जो बात प्रभावशाली ढंग से वसुंधरा राजे को समझाई जानी चाहिए थी,,वह हो नहीं पाई। जल संसाधन मंत्री डा राम प्रताप  इस इलाके के हैं।  वे  हनुमानगढ़ से जीतते रहे हैं, और इंदिरा गांधी नहर बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। अनुभवी हैं लेकिन वह भी अपने अनुभव के हिसाब से कार्य नहीं कर पाए। कम से कम डॉ राम प्रताप जी को एटा सिंगरासर माइनर की मांग को मनवाने का काम करवाना चाहिए था। यह काम  केवल इस इलाके के किसान की मांग नहीं है बल्कि इस इलाके के हर प्रकार के विकास का कदम है। यहां से जो उत्पादन होगा वह किसान अपने घर में जमा करके नहीं रखेगा। उस उत्पादन से राजस्थान का लाभ होगा और साथ में राष्ट्र का भी लाभ होगा। जब खेती विकसित होती है तो उसके साथ साथ खेती से संबंधित विभिन्न उद्योग-धंधे भी पनपते हैं।रोजगार पनपते हैं। डॉक्टर रामप्रताप को यह सब मालूम है लेकिन ना जाने क्यों वे मुख्यमंत्री के आगे इस महत्वपूर्ण मांग को रख नहीं पाए। इलाके के दूसरे राज्य मंत्री हैं सुरेंद्र पाल सिंह टीटी उनकी भी जिम्मेदारी बनती है लेकिन वे कन्नी काटते रहे। एटा सिंगरासर माइनर जिन जिन गांवों में पानी पहुंचा सकती है। वहां के सभी विधायकों को भी इस मांग के साथ जुड़कर सरकार पर दबाव बनाना चाहिए था, लेकिन सभी सत्ता के अंदर जाने के बाद पत्थर बन गए हैं। लेकिन इतिहास को भी नहीं जानते कि जब क्रांति आती है तब यह मजबूत पहाड़ भी पत्थर टुकड़े टुकड़े होकर खंडित हो कर बिखर जाते हैं। कोई पावर इनकी नहीं रह पाती।  यहां एक महत्वपूर्ण बात और है कि कहा जाता है कि सिंगरासर माइनर मैं पांच लिफ्ट होंगी, जिनका बनाना असंभव है। करोड़ों रुपए लगेंगे आदि आदि। और पानी भी नहीं है। पानी की खोज हो रही है। जम्मू कश्मीर में बहुत ऊंचाई पर रेल लाइन डाली जा सकती है गाड़ी चलाई जा सकती है तो सिंगरासर माइनर क्यों नहीं बनाई जा सकती। वह काम केंद्र सरकार ने किया लेकिन क्या राजस्थान की सरकार पानी नहीं पहुंचा सकती। करोड़ों रुपए सरकार के 3 साल बेमिसाल समारोहों में खर्च हो सकते हैं लेकिन किसानों की मांग पर सरकार के पास बजट नहीं है। वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार का बजट अभी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पेश किया। उसमें एटा सिंगरासर माइनर का अंश मात्र वर्णन नहीं है। मुख्यमंत्री अनजान नहीं है। बजट बनाए जाने से पूर्व समस्त इलाकों से सूचनाएं मांगी जाती है। सूचना सरकार के पास थी।वसुंधरा राजे जब इस इलाके में आई थीं तब जनता ने अभूतपूर्व स्वागत करके साथ दिया था लेकिन अब जनता का भरोसा टूट रहा है। जनता जिस तरीके से आंदोलन में जुटी है उससे उनके जोश को कम आंकना सरकार की और इलाके के जनप्रतिनिधियों की मूर्खता होगी। सूरतगढ़ में 25 मार्च को बाजारों में से जुलूस निकला। भयानक गर्मी में दोपहर में महिलाएं इस जलूस में छोटे-छोटे बच्चों को अपनी गोदी में उठाए नारे लगाते हुए चल रही थी।  जब इतना जोश हो तो उस जोश को कुचला नहीं जा सकता। सरकार को इसके लिए शीघ्र ही अविलंब रास्ता निकालना चाहिए और अपनी सरकार का भरोसा दिलाना चाहिए। वसुंधरा राजे सूरतगढ़ में झूम झूम कर नाची थी और उनके साथ राजेंद्र सिंह भादू भी थे। ऐसा नहीं हो कि इलाके के किसान ग्रामीण व्यापारी और अन्य संगठन वसुंधरा राजे और विधायक राजेंद्र सिंह भादू को नाचने को मजबूर कर दें। किसानों को आंदोलनकारियों को पुलिस बल से सुरक्षाबलों से 23 मार्च को सूरतगढ़ में प्रवेश करने पर रोकने की  असफल  कोशिश भी की गई। सरकार ने भारी भरकम सुरक्षा बलों को लगा रखा था। आश्चर्य है कि एक वाहन दंगा नियंत्रण लिखा हुआ भी था। आश्चर्य है कि मांग कर रहे किसानो को सरकार ने दंगाई माना और दंगाई लोगों से मुकाबला करने वाले सुरक्षा बलों को यहां लगाया। आंदोलनकारी किसानों में और दंगाइयों में बहुत अंतर होता है। सरकार को यह समझना चाहिए। अभी भी वक्त है । सब कुछ सरकार के हाथ में है।सरकार के पास कभी भी बजट की कमी नहीं होती। सिंगरासर एटा माइनर निर्माण की बात स्वीकार करते हुए किसानों के साथ उचित समझौता कर लेना चाहिए।

Saturday, March 25, 2017

गंगाजल मील को ही सूरतगढ़ से तीसरी बार कांग्रेस टिकट संभावित

करणीदानसिंह राजपूत  - 

जयपुर से आ रही राजनीति की हवा से लग रहा है कि कांग्रेस की ओर से सूरतगढ़ सीट पर आगामी 2018 के चुनाव में गंगाजल मील को तीसरी बार चुनाव मैदान में उतारने की प्रबल संभावना है। 


सूरतगढ़ में भाजपा के राजेंद्र सिंह भादू को पटखनी देने में गंगाजल मील को ही मजबूत माना जा रहा है।

उच्चस्तरीय नेताओं में माना जा रहा है कि गंगाजल मील का दबदबा पब्लिक टच के सूरतगढ़ के सरकारी विभागों में कम नहीं हुआ है। राजस्व,  पुलिस और नगर पालिका में  गंगाजल मील का कहना चल रहा है।

 गंगाजल मील की पुलिस राजस्व और नगर पालिका में अभी भी अच्छी पकड़ है।

 अधिकारी और कर्मचारी मील के निर्देश पर काम करते हैं और काम इधर उधर भी कर देते हैं। 

भारतीय जनता पार्टी के इन सवा तीन साल के शासन में कांग्रेस की ओर से जितने प्रदर्शन हुए हैं वे मील के बिना संभव नहीं हुए। कांग्रेस पार्टी का संचालन सूरतगढ सीट पर मील ही कर रहे हैं।

गंगाजल मील के अलावा पार्टी में ऐसा व्यक्ति नजर नहीं आ रहा जिसे भाजपा को हराने की ताकत वाला माना जाए।

गंगाजल मील  2008 में सूरतगढ़ से विधायक चुने गए थे। उन्होंने निर्दलीय रूप से चुनाव में उतरे राजेंद्र भादू को और भाजपा के रामप्रताप कासनिया को पराजित किया था। राजेंद्र भादू उस चुनाव में दूसरे नंबर पर और भाजपा के कासनिया तीसरे क्रम पर रहे थे। हालांकि 2013 के चुनाव में मील राजेंद्र भादू से पराजित हुए तीसरे क्रम पर पहुंच गए थे। इसके बावजूद

गंगाजल मील का दबदबा सरकारी कार्यालयों में कम नहीं होना बहुत बड़ी ताकत माना जा रहा है। उक्त चुनाव में बसपा के डूंगरराम गेदर दूसरे क्रम पर रहे थे लेकिन सरकारी विभागों में ताकतवर पकड़ नहीं है इसलिए सत्ता परिवर्तन में कांग्रेस को ही ताकत माना जा रहा है। गंगाजल मील के अलावा जयपुर में किसी अन्य राजनीतिक नेता का संपर्क नहीं है। गंगाजल मील को फिर से सूरतगढ़ सीट पर उतारे जाने की संभावना में ये संपर्क एक ताकत के रूप में काम आ रहे हैं।

कांग्रेसी नेताओं का यह मानना है कि भारतीय जनता पार्टी जनता से दूर हो रही है और उस को पराजित करना अधिक कठिन नहीं है,मगर राजेंद्र भादू ने 2013 के चुनाव में जीतने के बाद सूरतगढ़ शहर और ग्रामीण क्षेत्रों पर अपनी राजनीतिक सूझबूझ से कार्यकर्ताओं की ऐसे टोलियां बना ली हैं जो भादू के लिए चुनाव में पूरा जोर लगाएंगे।

भाजपा की ओर से राजेंद्र भादू को ही सीेटिंग एमएलए मानते हुए टिकट दी जाएगी। इसलिए भादू का मुकाबला करने के लिए मील को ही सशक्त माना जा रहा है।

 आने वाले डेढ़ साल में राजनीतिक उठा पटक कांग्रेस पार्टी में होने की कोई संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही। कांग्रेस पार्टी के उच्च स्तरीय नेता मील को अलग करने की स्थिति में नहीं है। कांग्रेस को मील के अलावा कोई अन्य मजबूत नेता नजर नहीं आ रहा। 

मील के पास अभी भी हर  सहयोग करने के लिए सशक्त मीडिया भी है जो चुनाव में मील को विजयी बनाने में पूरी ताकत लगा देगा।

Friday, March 24, 2017

जेठ नाथ तंवर सूरतगढ़ व्यापार मंडल अध्यक्ष निर्वाचित

 सूरतगढ़ 23 मार्च 2017. व्यापार मंडल की नई कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी बिना किसी विरोध के निर्वाचित हुए। निर्वाचन अधिकारी लक्ष्मीनारायण मुदड़ा के अनुसार सभी पदों पर एक-एक नामांकन प्राप्त हुआ था। इस स्थिति में सभी प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।

चुनाव अधिकारी के अनुसार जेठ नाथ तंवर अध्यक्ष,सुशील धानुका उपाध्यक्ष,बलवंत जाखड़ सचिव,जिनेद्र नौलखा कोषाध्यक्ष और नवनीत सारडा सह सचिव निर्वाचित हुए हैं।

शपथ ग्रहण का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।



Thursday, March 23, 2017

सूरतगढ़ मॉडल स्टेशन सच में गंदगी का मॉडल बना हुआ है

- करणीदान सिंह राजपूत -

सूरतगढ़ 23 मार्च ।

उत्तर पश्चिम रेलवे का मॉडल रेल स्टेशन सूरतगढ़ अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही से सड़ांध मार रहा है। अधिकारियों को परवाह नहीं है कि रेल यात्रियों को सीफ सफाई की सुविधा दी जाए।

 स्टेशन का प्लेटफार्म नंबर 4 और उस पर बने हुए टॉयलेट आपको यहां दिखा रहे हैं। पुरुषों के टॉयलेट में कोई शौच करे तो साफ करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। वह टट्टी से भरा पड़ा है। बाहर हाथ धोने के लिए वास बेसिन की हालत बुरी है। वह टूटा पड़ा है। पेशाब करने वाले स्थान को देखें। भयानक गंदगी है और उस पर लगी हुई टूंटी में गुल्ला ठोका हुआ है। 

क्या स्टेशन अधीक्षक अन्याय अधिकारीगण टिकट खिड़की बुकिंग अधिकारी वादियों के कार्यालयों के शौचालय इस तरह से गंदगी से भरे हुए हैं यह अधिकारी भारी भरकम वेतन लेते हैं तो इनकी क्या जिम्मेदारी बनती है यात्रियों को गंदगी और सड़ांध में मारना इस भयानक गंदगी के कारण रेल प्लेटफार्म पर निश्चित रूप से यात्री अपने साथ कोई न कोई बीमारी लेकर के जाते हैं।

स्टेशन अधीक्षक सहित अनेक अधिकारियों के कार्यलय प्लेट फार्म मुख्य भवन पर हैं क्या उनके कार्यालयों के शौचालय इस प्रकार से गंदगी से भरे हुए हैं?

इस मॉडल स्टेशन पर आखिर किसकी जिम्मेदारी है?









सूरतगढ़ में एटा सिंगरासर माइनर आंदोलनकारियों का महापड़ाव

-  करणीदान सिंह राजपूत -

 सूरतगढ़ 23 मार्च 2017.

 सूरतगढ़ तहसील के टीबा क्षेत्र के गांव के किसानों ने एटा सिंगरासर माइनर की मांग को लेकर पूर्व घोषणा के अनुसार आज 23 मार्च को सूरतगढ़ के इंदिरा सर्किल पर बिगुल बजा दिया। इंदिरा सर्किल पर नेताओं ने वक्तव्य दीजिए सभी की एक ही मांग थी। एटा सिंगरासर माइनर हर हालत में लेकर रहेंगे। आंदोलनकारियों के साथ काफी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थी। 

नारेबाजी के साथ आंदोलनकारी आज सूरतगढ़ पहुंचे आंदोलनकारियों का महापड़ाव उपखंड कार्यालय के आगे शुरू होना था जहां पर सभी कार्यालयों के रास्तों पर लकड़ों के अवरोधक लगा दिए गए हैं।

 किसानों की यह मांग लगातार जारी है। आज किसानों के महापड़ाव और सूरतगढ़ की ओर बढ़ने के जोशीले चित्र यहां दिए जा रहे हैं।

 सूरतगढ़ शहर में करीब 80 हजार की आबादी है। अनेक संगठन है, लेकिन ऐसा लग रहा है सभी संगठन और नेता भाषणों से सहयोग दे रहे हैं। मौके पर केवल ग्रामीण नजर आते हैं। क्या शहर और गांव का इतना ही नाता है कि गांव के लोग शहरों से चीजें खरीदते रहें शहर वालों की बिक्री कराते रहें और शहर वाले कमाई करते रहे? बस । 

शहर में समस्त राजनीतिक दलों के हजारों कार्यकर्ता है और होना तो यह चाहिए था की इस महापड़ाव में किसानों की संख्या से 4-5 गुना अधिक संख्या में शहरी लोग पहुंचते और हर प्रकार का सहयोग करने में आगे रहते। हो सकता है अब शहर के लोग अपनी जिम्मेदारी समझते हुए किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस महापड़ाव में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएं।




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Wednesday, March 22, 2017

ईश्वर अल्लाह को क्यों बांटे हैंःकविता- करणीदान सिंह राजपूत

तुम्हें समझाते सदियां बीती,

भरे पड़े इतिहास। 

क्यों लड़ते रहते हो?

क्यों झगड़ा करते हो?

सब कुछ यहीं रह जायेगा। 

काया का चोला भी, 

नहीं रहेगा साथ।

अब जिन से लड़ते हो,

अगले जन्म में वहां, 

पैदा हो सकते हो।

 जीवन मरण का खेल है,

उस ईश्वर अल्लाह के हाथ।

स्वर्ग की अभिलाषा तुम्हारी,

 उनकी जन्नत की तैयारी।

 इतना तो बतला दो, 

दुनिया को।

यह एक है या अनेक? 

तुम प्रवेश पा लोगे,

वहां दूजा घुस नहीं पाएगा।

 न यह है विश्वास,

न यह निश्चित है।

इस अनिश्चय के भंवर में, 

क्यों करते हो विषपान।

स्वर्ग और जन्नत के भ्रम में,

क्यों करते हो यह जीवन बरबाद? 

धर्म के नाम पर सुंदर जीवन को छोड़, 

क्यों मौत से मिल हो?

दंड दूजों को मिले या ना मिले,

तुमने तो नर्क दोजख  के,

 द्वार खोले हैं।

 इस लोक का अभिमान,

 यहीं धरा रह जाएगा।

 आये खाली,

 हाथ भरे नहीं जा पाओगे।

 ईश्वर अल्लाह,

 क्या अलग-अलग हैं?

 यह भी तो समझा दो।

यह सब के सांझे हैं,

फिर तुमने क्यों बांटे हैं?

धरती आकाश समुंदर,

सूरज चांद और तारे,

 सब सांझे हैं,

फिर ईश्वर अल्लाह को,

तुमने क्यों बांटे हैं ?

क्यों लड़ते रहते हो, 

क्यों झगड़ा करते हो?

क्यों लड़ते रहते हो,

क्यों झगड़ा करते हो?

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यह रचना करीब 15 -16 साल पूर्व लिखी गई थी । उस समय आकाशवाणी से भी प्रसारित हुई थी।

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 करणी दान सिंह राजपूत,

 राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,

 सूरतगढ़, राजस्थान ।

संपर्क.  94143 81356.

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श्रीकरणपुर में नशा मुक्ति जन जागृति कार्यशाला आयोजन किया गया

 
श्रीगंगानगर, 21 मार्च। जिला पुलिस अधिक्षक श्री राहुल कोटोकी के निर्देशानुसार पुलिस थाना श्रीकरणपुर के माध्यम से अमर ज्योति पब्लिक उच्च माध्यमिक विद्यालय, श्रीकरणपुर में नशा मुक्ति जन जागृति कार्यशाला एवम् नशामुक्ति परामर्श शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में राजकीय नशा मुक्ति परामर्श एवं उपचार केन्द्र श्रीगंगानगर के प्रभारी डा. रवि कान्त गोयल ने अपने सम्बोधन में कहा कि घरों में अभिभावकों के नशा सेवन करने से बच्चें बीड़ी, सिगरेट के टुकडे़ और प्याली में बची शराब का सेवन कर बच्चे भी नशे की और अग्रसर हो रहे है। ऐसे बच्चे धीरे धीरे नशे के दलदल में फसतें चले जाते है। नशा मुक्ति जन जागृति कार्यशाला के माध्यम से दृढ शक्ति से बिना किसी नुकसान के नशा छोड़ा जा सकता है।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथी डिप्टी एसपी श्रीकरणपुर श्री सुनिल के0 पंवार ने अपने सम्बोधन में कहा कि नशा करने वाला व्यक्ति, समाज, देश, अपने स्वयं के परिवार व अपना सबसे बड़ा दुश्मन है। नशा किसी भी रूप में हो उसके परिणाम घातक होते है। नशे रूपी गन्दगी का सेवन करने से बचें। 
कार्यक्रम में अमर ज्योति पब्लिक उच्च माध्यमिक विद्यालय व साथ-साथ चौधरी चानन राम मैमोरियल महाविद्यालय के विद्यार्थियों व अध्यापकों ने भाग लिया। ग्रामीण व जनप्रतिनिधी भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे। ड़ा. गोयल ने उपस्थित विद्यार्थियों व ग्रामिणों को नशा न करनें व नशा छुडवाने की सामूहिक शपथ दिलवायी।
कार्यक्रम में नगरपालिका चेयरमेन श्रीमति अनिता जोईया ने अपने सम्बोधन में कहा कि गाँव की चोपाल पर नशे को हमने बीड़ी, सिगरेट, हुक्का और शराब सेवन को जो सामाजिक स्वीकृति प्रदान की है, उसी कारण आज समाज नशे के दलदल में धंसता जा रहा है। ऐसी परिस्थियों में पुलिस विभाग द्वारा चलाया जा रहा नशा मुक्ति अभियान एक नई दिशा देने में सफल होगा।
कार्यक्रम में डायरेक्टर अमर ज्योति शिक्षण संस्थान श्री हरभजन सिंह ने अपनें सम्बोधन में कहा की विद्यार्थियों का मन कोरे कागज की तरह होता है आज इनके मन पर नशा मुक्ति की टीम द्वारा जो नशा मुक्ति का संदेश अकित किया गया है इसके दूरगामी सकारात्मक परिणाम हमारे सामने आयेंगे। मैं सस्था की तरफ से पुलिस, स्वास्थय, शिक्षा विभाग के सयुक्त प्रयासों की सहराना करता हूँ।
कार्यक्रम में पुलिस थाना श्रीकरणपुर के थाना अधिकारी श्री अनिल मून्ड ने कहा कि पुलिस प्रशासन गांव ढाणी, ढाणी जाकर नशा मुक्ति शिविर आयोजित कर रहा है। आप सब इस नशा मुक्ति शिविरों के सहयोगी बने और इस नेक कार्य में आगें आयें।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री मान विक्रमजीत ने विद्यार्थियों को नशे की बुराइयों से अवगत करवाकर नशे को जड़ से उखाडने का आहवान किया।
कार्यक्रम को समाजसेवी श्री लक्ष्मी नारायण जोईया, वाइस चेयरमेन श्री श्याम सुन्दर, एएसआई पुलिस श्री लखवीर सिंह ने भी सम्बोधित किया।
कार्यक्रम के अन्त में ड़ा. गोयल ने नशा मुक्ति प्रकाशित पम्पलेटस वितरित कराये एवं विद्यार्थियों द्वारा पुछे प्रश्नों का उतर दिया। 
 

 

अर्जुन नहीं कर पाया,तुझे करना है




कविता-     


अर्जुन नहीं कर पाया,तुझे करना है
वक्त को जान वक्त को पहचान
क्यों सोया है,गहरी नींद
जाग उठ, सवेरा तुझे करना है
वक्त पल दर पल बदलता है।

अर्जुन कुछ नहीं कर पाया
गांडीव था पास
गोपियां लुटती रही
काल बड़ा बलवान
उठ,बदलदे ये कहावत


तूं धारण कर नया धनुष
मत रख गांडीव नाम
निशाने पर तीर चला
तेरे बाण से होगी रक्षा

बतलादे समाज को
दिखलादे शक्ति
पुरानी कथाओं को
सुनने सुनाने का
वक्त नहीं।

अब अर्जुन का वक्त नहीं
वक्त तेरा है
जागना तुझे है
जागते रहना भी तुझे है
कमान धारण भी तुझे करना है
तीर चलाना भी तुझे है

पुराना सब कुछ भूलना भुलाना है,
मगर कृष्ण को नहीं भूलना
दुष्टों का संहार करने को
तुझे ही तो तीर चलाना ।

मैं वक्त,
बनूंगा तेरे रथ का सारथी
काल बनूंगा
धरती पर आए
छली कपटी बगुला मनुषों का
मगर तीर तुझे चलाना होगा।

ये संगी साथी मित्र प्यारे
फुसलाऐंगे,
ये परिजन प्यारेदुहाई देंगे,
अपनों पर ही वार
करने को रोकेंगे टोकेंगे बतलाऐंगे
पीढी दर पीढ़ी के रिश्ते
तूं किसका करने वाला है संहार

वक्त तो सच्च में सोच को
बदलने को प्रबल होगा
कमान उठाने को
तीर चलाने को
तूं रथ पर चढऩे को तैयार न होगा
नाते रिश्तेदार सखाओं की भीड़
रोने लगेगी,आँसूओं की धारा
बनाएगी रिश्तों की गांठे।

लेकिन काल बड़ा बलवान
पुरानी कहावत बदल कर
संशोधित करके,
मैं वक्त, हां मैं वक्त
नए सिरे से लिखूंगा

मैं वक्त हूं,
मेरी ताकत को ये नाते रिश्तेदार
संगी साथी पहचानते नहीं
मेरी ताकत को जानते नहीं
मैं वक्त,तुझे रथ तक लाऊंगा
मैं ही शक्ति से रथ पर चढाऊंगा

और मेरी ताकत से तूं
तीर चलाएगा दुष्टों पर
जिनको तूं भ्रम में अपने सखा संगी
नाते रिश्तेदार समझ बैठा है।
मैं वक्त, तुझे नया अर्जुन तो नहीं बनाऊंगा
अर्जुन और कृष्ण तो चेतना है,
लेकिन मैं तुझे उनसे कम भी नहीं रखूंगा।

तेरा नामकरण तो दुनिया करेगी
तेरा नाम तो दुनिया धरेगी
मैं वक्त,
शब्दकोश में रचूंगा नया नाम
जो दुनिया तुझको देगी।
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करणीदानसिंह राजपूत,

राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत पत्रकार,
23 करनाणी धर्मशाला,
सूरतगढ़. मो.       94143 81356
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31-7-2015.
up date 22-3-2017.

आपातकाल में लोकतंत्र सेनानियों ने प्रजातंत्र को बचाने का कार्य किया



लखनऊ 21 मार्च 2017.

 भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री श्रीपाद नाईक ने लोकतंत्र सेनानियों के कार्यो को याद करते हुए कहा कि उनके त्याग से ही देश एक बार और गुलामी के बंधनसे बाहर निकला था। वे आज भाजपा मुख्यालय पर आपातकाल के 40 वर्ष पूरे होने पर लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह में बतौर मुख्यअतिथि मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम देश-प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मनाया जा रहा है जिसमें केन्द्र सरकार के मंत्री एवं सांसदगण अपनी भागेदारी सुनिश्चित कर रहे है। उन्होंने कैबिनेट के उस ऐतिहासिक निर्णय को सामने रखा जिसमें लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जन्मस्थली सिताबदियरा में स्मारक बनवाया जायेगा।


लोकतंत्र के इस काले अध्याय को याद करते हुए कहा कि यह आपात काल केवल इंदिरा गांधी की सरकार को बचाये रखने के लिए था न कि देश हित में। समाचार पत्र बंद हो चुके थे कही भी कोई सभा नहीं हो सकती थी जिसके ऊपर भी सरकार को शक होता था वो जेल भेज दिया जाता था ऐसे में जिन्होंने लोकतंत्र की लौ को जलाये रखा उन्हें शत-शत नमन। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोकतंत्र सेनानियों को यह विश्वास दिलाया कि उनकी बेहतरी के लिए भारत सरकार कटिबद्ध है। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा0 लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने मांग किया कि आपातकाल लगाने के लिए कांग्रेस देश की जनता से सार्वजनिक रूप से मांफी मांगे। आज देश जय प्रकाश जी का एवं उन लोकतंत्र सेनानियों का ऋणी है जिन्होंने अपने सुख को तिलाजंली देकर लोकतंत्र को बचाया। डा0 बाजपेयी ने कहा जिन गांधी जी ने देश को आजादी दिलाई उन्ही गांधी के परम्परा पर चलने का ढोंग करने वाले कांग्रेसियों ने देश में आंतरिक आपातकाल लगाकर लोकतंत्र की हत्या करनी चाही। उस समय के अधिकांश नेतागण एवं समाजिक कार्यकर्ता खोज-खोजकर जबरन जेलों में भर दिये गये जब सरकार का इससे भी पेट नहीं भरा तो उसने स्कूलों और कालेजो के छात्रों को भी जेल भेजा। गांधी का नाम बेचकर घोटाले दर घोटाले कर कांग्रेस ने विश्व पटल पर भारत की छवि को धूल धूसरित किया है।


डा0 बाजपेयी ने कहा कि यदि कांग्रेस गांधी जी के आर्दशों से दशांश भी प्रेरणा लेती है तो उसे कांग्रेस की समाप्ति कर देनी चाहिए। लेकिन बेहयाई का इससे बड़ा सबूत और क्या होगा कि उसके प्रवक्ता और नेतागण समय-समय पर सार्वजनिक मंचों पर आपातकाल को जायज ठहराते रहते हैं।  इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्जवलन एवं लोक नायक जयप्रकाश नारायण के चित्र पर माल्र्यापण किया गया। लोकतंत्र सेनानियों को डा0 लक्ष्मीकांत बाजपेयी एंव श्रीपाद नाईक ने माला एवं अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया जिनमें प्रमुख रूप से भारत दीक्षित, बृज किशोर मिश्र, रामाधीन सिंह, रमाशंकर त्रिपाठी, प्यारेलाल कनौजिया, राजेन्द्र त्रिपाठी, अनिरूद्ध यादव, राजेन्द्र गौण, महेन्द्र सिंह आदि रहे।


कार्यक्रम की अध्यक्षता महानगर अध्यक्ष मनोहर सिंह एवं संचालन मुकेश शर्मा ने किया। लालजी टण्डन ने आपातकाल के संस्मरण को याद करते हुए बताया कि लोगों को जबरिया दो दिनों तक थानों में बिठाये रखा गया सरकार यह तय नहीं कर पा रही थी कि इन्हे किन धाराओं में जेल भेजे लोगों के ऊपर फर्जी मुकदमें लगाये गये। जनसंघ एक मात्र ऐसा संगठन था जिसने कश्मीर से कन्या कुमारी तक राष्ट्र का पुनः जागरण किया ऐसा माहौल तैयार किया जिससे इंदिरा गांधी को आपातकाल वापस लेने पर मजबूर किया जो लोग जेल में थे उनसे कही कम उनका भी योगदान नहीं था जिन लोगों ने छुप-छुपकर गिरफ्तार हुए लोगों के परिवारों की चिंता की। आज राष्ट्र इनके प्रतिकृतज्ञ है एवं अपनी आने वाली पीढि़यों को लेकर आशान्वित है कि जब भी राष्ट्र को जरूरत होगी नौजवान बढ़-चढ़कर अपनी भागेदारी सुनिश्चित करेंगे। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोगों में प्रदेश उपाध्यक्ष गोपाल टण्डन (विधायक), प्रदेश मंत्री वीरेन्द्र तिवारी, प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक, डा0 चन्द्रमोहन, हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनीष शुक्ला, राजेन्द्र तिवारी, अंनू मिश्र, राकेश श्रीवास्तव, श्रीमती सुषमा खर्कवाल, सुरेश श्रीवास्तव, सुरेश तिवारी, विन्ध्यवासिनी कुमार आदि लोग रहे।

Tuesday, March 21, 2017

संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ



संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश
तूं चलते जाना निर्भय
बिना रूकेे बिना झुके
विचलित करने को
राह बदलने को
भटकाने को
बीच राह में
मखमली चट्टाईयों के
मोड़ बनाऐ होंगे
मगर,तूं कांटों भरे कंकड़ीले पथ पर
सीधे बढ़ते जाना
जो पहुंचाएगा
जन जन के बीच

संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश

जन जन के दुख पीड़ाओं को
झेलना तूं
कभी इनकार न करना
तेरा नाम दान सार्थक करना,

संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश

तूं पाए जो संघर्ष का फल
और जो मिले पुण्य प्रताप
उसे कभी अपना मत कहना
उसे दान करते रहना
तूं मालिक मत बनना
उसकी मालिक जनता को
अर्पण करते चलना

संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश

सत्ता के ऊंचे ऊंचे पद
विशाल अट्टालिकाएं
लोभ लालच मोह के
फंदों में राजनेता
धनपति जनपथ से
भटकाने को ना जाने कैसे कैसे
स्वांग भरेंगे,मीठे बोलेंगे।
तूं सबको छोड़ता
आगे बढ़ते रहना


संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश

 ये देश हमारा गौरवशाली
 इसको बनाने में
तेरे से पहले असंख्य दे गए कुर्बानी
किसी ने आह तक नहीं की
फांसी का फंदा चूमा हंसते
गोली सीने में खाई
या झेली यातनाएं काला पानी
तूं कांटों वाले कंकड़ीले राह
पर चलने का एहसान मत जता देना।

संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश

सत्यम् शिवम् सुंदरम् को
अपने भीतर रखते
सत्यमेव जयते को
सदा याद करते
तूं चलते जाना निर्भय
बिना रूकेे बिना झुके
बस बोलते जाना
उदघोष करते जाना
सत्यम् शिवम् सुंदरम्
सत्यम् शिवम् सुंदरम्
सत्यमेव जयते
सत्यमेव जयते

़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़

जननी माँ हीरा जनक पिता रतनसिंह  जी को समर्पित।
़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़

कविता-   

  
करणीदानसिंह राजपूत,


राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत पत्रकार,
 
23 करनाणी धर्मशाला,
सूरतगढ़. मो.       94143 81356

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8-1-2015.
update  18-10-2016.
up date 21-3-2017.!

Monday, March 20, 2017

आपातकाल 1975 के लोकतंत्र सेनानियों का मामला विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव


-  करणीदान सिंह राजपूत  -

जयपुर 20 मार्च 2017.

आपातकाल  1975 के दौरान राजस्थान  में भारतीय दण्ड संहिता की धाराओं  107/116/151 के तहत जेल गए सत्याग्रहियों को मीसा बंदियों की तरह पेंशन एवं चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ आपातकाल के सत्याग्रहियों को लोकतंत्र के सेनानी का दर्जा देने की मांग की गई।

भाजपा के मोहन लाल गुप्ता एवं ज्ञानदेव आहूजा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मामला उठाते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान मीसा बंदियों एवं डिफेन्स आॅफ इंडियन रूल्स के तहत बंदी बनाये गए सत्याग्रहियों को पेंशन एवं चिकित्सा सुविधाएं दे दी गई लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा 107 एवं 116 तथा 151 के तहत गिरफ्तार सत्याग्रहियों को इससे वंचित रखा गया।

उन्होंने बताया कि राजस्थान से पच्चीस सौ सत्याग्रहियों को पेंशन आदि देने के साथ ही लोकतंत्र सेनानी का सम्मान दिया जाना चाहिए। 

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज विधानसभा में मीसाबंदियों का मामला सदन में गूंजा। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा में जेल जाने वाले मीसाबंदियों को सुविधाएं दिए जदाने पर सदन में चर्चा हुई। विधायक ज्ञानदेव आहूजा, मोहनलाल गुप्ता ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में मीसाबंदियो का मामला उठाया। ज्ञानदेव आहूजा ने कहा कि पेंशन शब्द के स्थान पर सम्मानदेय शब्द प्रयोग में लाया जाए। साथ ही मीसाबंदियो को यूपी, बिहार की तर्ज पर राशि 12 हजार से बढाकर 25 हजार की जाए। मेडिकल सुविधाएं, टोल फ्री, डांक बंगलों में रुकने की सुविधा देने की मांग भी सदन में उठी।


चर्चा के दौरान आपात काल के हालातों को बताते हुए घनश्याम तिवाड़ी, ज्ञानदेव आहूजा ने खुद के साथ हुए अत्याचार की भी जानकारी सदन मे रखी। तिवाडी ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष के कारण ही आज लोकतंत्र जिंदा है। इनके संघर्ष के कारण ही 1977 में सत्ता परिवर्तन की लहर आई, 3 लाख लोगों को देशभर में जेल भेजा गया। तिवाड़ी ने कहा कि मीसाबंदियो को सुराज संकल्प पत्र के वादे के अनुसार स्वतंत्रता सेनानी के समान सुविधाएं देनी चाहिए, अगर ऐसा नहीं होता है तो यह बेवफाई होगी।



उन्होंने लोकतंत्र सेनानी कानून लाने की भी मांग की। यह सम्मान की लडाई है और इससे मीसाबंदियों पर लगे भारत की सुरक्षा के खतरा वाला तमगा तो दूर होगा। मंत्री हेमसिंह भडाना ने सदन को जानकारी देते हुए बताया 19-6-2009 को पूर्ववती सरकार ने बंद कर दिया था। हमारी सरकार ने 28-2-14 को शुरु किया। बाकी मांगों पर संसदीय कार्यमंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि मीसाबंदियों की मांगों के लेकर मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाकर उचित कार्रवाई करेंगे।

गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया पर हठधर्मी होने व कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप

उदयपुर में भारतीय जनता पार्टी के भारतीय जनसंघ स्थापना से चल रहे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए भैरो सिंह शेखावत जागृति मंच का गठन किया है।

 गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया पर हठधर्मिता का आरोप लगाया गया है।

 जागृति मंच के संयोजक मांगीलाल जोशी का आरोप है कि राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी के राज के 3 साल कार्यकाल के कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई यह वह कार्यकर्ता थे जो भारतीय जनसंघ की स्थापना से अब तक पार्टी में कर्तव्य निष्ठा से कार्य कर रहे थे।उनको गुमनामी में धकेल दिया गया। 

 भारतीय जनसंघ की स्थापना के समय देश में राम राज्य और हर हाथ को काम का सोच था। वह छोड़ दिया गया। मांगीलाल जोशी पहले भारतीय जनता पार्टी में शहर जिला अध्यक्ष के पद पर रह चुके हैं।

 जागृति मंच के कार्यकारी अध्यक्ष रोशन लाल ने आरोप लगाया है कि निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है और नैतिक मूल्यों को अनदेखा किया जा रहा है कार्यकारी अध्यक्ष रोशनलाल पूर्व में भारतीय जनता पार्टी में देहात जिला अध्यक्ष रह चुके हैं।

Sunday, March 19, 2017

भगवा साधुत्व व केसरिया बलिदानी जीवन को आतंकवाद बताना मूर्खता है


- करणीदान सिंह राजपूत - 


उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद से भगवा आतंक और कट्टर हिंदूवादी आदि शब्दों से बहस चलाई जा रही है।ऐसा लग रहा है की अच्छे अच्छे महान पत्रकार व लेखक भी कल्पना की कथाएं लिख रहे हैं और उनको अपने सपनों के हिसाब से सारांश में आतंकवाद साबित करते हुए पूर्ण कर रहे हैं।

भगवा वस्त्र धारण करना बहुत मुश्किल है। हर कोई भगवा धारण नहीं कर सकता। भगवा धारण करने में वर्ष पर वर्ष बीत जाते हैं और कई सालों बाद व्यक्ति इस गौरवपूर्ण जीवन को अपनाने के लिए तैयार होता है।

 भगवा केवल वस्त्र नहीं है। यह साधुत्व की गौरवगाथा है। आजकल भगवा कृत्रिम रंग से रंग लिया जाता है लेकिन पहले कपड़ों को गेरू से रंगा जाता था। भगवा का एक एक पल साधुत्व की पहचान कराता है । भगवा जीवन को समझना बहुत मुश्किल है। 


भगवा धारण करने वाले को सत्ता में आने पर भगवा आतंकवादी की संज्ञा से विभूषित करना, आलोचना करना, अविश्वास करना केवल मूर्खता का परिचायक है। 

जो लोग इस प्रकार की आलोचना करते हैं,लिखते हैं, या मुंह से बोलते हैं,वे सच में भगवा वस्त्र की व्याख्या ही नहीं जानते।भगवा वस्त्र हजारों सालों से भारत में और अन्य देशों में भी धारण किए जाते रहे हैं लेकिन भगवाधारी कहीं विनाश के दूत बने हों ऐसा इतिहास में नहीं मिलता।  केवल सत्ता में आने से साधुत्व को  आतंकवाद बतलाना बुद्धिहीनता व मूर्खता है। 


भारतवर्ष में कहीं एक भी उदाहरण भगवा आतंकवाद का नहीं मिलता। अभी योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री चुना गया है। उनके कार्यकाल को देखा जाना चाहिए।


 ऐसा लग रहा है की परीक्षक बने लोग उत्तर पुस्तिका को देखे बिना ही परीक्षार्थी को अनुत्तीरण करने में लगे हैं,और शून्य अंक दे कर जोर शोर से प्रचारित भी करने में लगे हैं। अनेक लोग जो खुद को बड़े मीडियाकर्मी पत्रकार बड़े राजनेता राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि मानते हैं वे अपने आप को सबसे बड़ा सबसे अधिक बुद्धि वाला साबित करने के लिए तेज से तेज आवाज में बोलना शुरू कर चुके हैं।उनके अधिक बोलने से जोर जोर से चिल्लाने से अशिष्ट भाषा की शैली में लिखने से भगवा साधुत्व आतंकवाद में परिवर्तित नहीं माना जा सकता।

भगवा हजारों सालों से जीवन देने का पहनावा माना गया है। जो पहनावा जीवन देता है वह कभी किसी के प्राण नहीं लेता। भगवा कभी प्राण लेने की सोच भी नहीं सकता। भगवा राजनीति में आए और सत्ता के शिखर पर पहुंच जाए तब वह अपने संपूर्ण क्षेत्र में जीवनदाता के रूप में सामने आता है। प्रतिपक्षी या आलोचक उसे आतंकवादी के रूप में प्रचारित करें समाज में भय पैदा करें तो वह शोभनीय नहीं कहा जा सकता। इस प्रकार की कार्यवाहियां कभी अधिक समय तक चल नहीं पाती।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ का चयन होना कुछ पत्रकारों लेखकों के गले नहीं उतर रहा मगर उनके कहने से लिखने से योगी आदित्य नाथ आतंकवादी नहीं हो सकते। कई सालों का जीवन होता है भगवा वह कुछ पल की सत्ता में आतंकवाद में नहीं बदला जा सकता। 

भगवे पर भरोसा करना ही अच्छा रहेगा लेकिन जो  भरोसा नहीं करना चाहते उन लोगों को समय की चाल को कुछ  इंतजार करके समझना चाहिए।

योगी आदित्यनाथ के कार्य को मासिक, 6 माही,सालाना के हिसाब से समीक्षा करके फिर अपने विचार प्रगट करने चाहिए। 

भगवा के साथ केसरिया पर भी बहस चल रही है बहुत कुछ लिखा जा चुका है और आगे ना जाने कितना नासमझ लोग लिखते रहेंगे।

केसरिया पहनावा धारण करना भी आसान नहीं है। केसरिया पहनावा प्राणों का त्याग करने की गारंटी देता है। आज कोई भी व्यक्ति समाज को अपने प्राण त्याग करने की गारंटी नहीं देता। अधिकांश लूटपाट की सोच में लगे हुए हैं। ऐसे लोगों को मालूम ही नहीं है की केसरिया वस्त्र धारण करना कितना गौरवपूर्ण है। केसरिया धारण करने का मतलब है कि देश के लिए जब जरूरत होगी प्राण त्याग करने में पीछे नहीं हटूंगा।

 इतिहास इसका गवाह है। भगवा और केसरिया को आतंकवाद कहना पूरी तरह से नासमझी और मूर्खता की बात है।जो लोग अपने किन्हीं कारणों से तात्कालिक प्रतिक्रिया में भगवा और केसरिया को आतंकवाद से जोड़ने में लगे हुए हैं उन्हें कुछ समय के बाद यह मालूम होगा की सच में आतंकवाद क्या है? उसके दुष्परिणाम भारत देश कितने सालों से भोग रहा है।

सच में तो यह होना चाहिए कि जो आतंकवाद भारत के लोग किसी न किसी रूप में सहन कर रहे हैं वह सदा सदा के लिए इस धरती से समाप्त हो जाए।


Saturday, March 18, 2017

जिप्सम वाले खेत के मालिक ही होंगे जिप्सम खनन के लाइसेंसी

-  करणीदान सिंह राजपूत-

18-3-2017.

राजस्थान के राज्यमंत्री श्री टीटी ने बताया कि सरकार द्वारा एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जिसके तहत जिस किसान के खेत में जिप्सम है, उसे ही जिप्सम निकालने का अनुज्ञापत्र दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि अब तक 950 किसानों ने आवेदन किया है। इन किसानों को जयपुर चक्कर नही लगाने पड़ेगें। संबंधित जिला कलक्टर ही अनुमति जारी करेंगे। उन्होंने बताया कि ढ़ाई फिट गहरी भूमि के बाद नीचे की सम्पति भारत सरकार की होती है। राजस्थान सरकार ने भूमि सुधार कार्यक्रम के तहत जिप्सम निकालने का कार्यक्रम हाथ में लिया है। जिप्सम वाली भूमि में न तो पेड़ उगते है और भूमि भी सेमग्रस्त हो जाती है।

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सब अपराध हो की जड़ शराब को बंद करे सरकार - पूनम अंकुर छाबड़ा



जयपुर ग्रामीण के रोजदा में शराब बंदी के लिए मतदान के लिए ग्राम वासियों को समर्थन दिया-पूनम छाबड़ा


  जयपुर ।


           प्रदेश के झुंझनू जिले के पिलानी कस्बे में सात साल की मासुम बालिका के साथ हुए दरिंदगी भरे कृत्य पर रोष प्रकट करते जस्टिस फॉर छाबड़ा जी संगठन राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम अंकुर छाबड़ा ने कहा कि इस प्रकार के आरोपियों को मौत से कम सजा नहीं मिलनी चाहिये और हम सरकार से मांग करते हैं कि प्रदेश में तुरंत शराब बंदी लागु करे क्योकि अब तक जितने ऐसे घिनोने जुर्म के वाक्यात सामने आये हैं उन सब की जड़ शराब ही है। हर आरोपी शराब के नशे में इस प्रकार के घृणित कृत्य करता है। सरकार को तुरंत प्रदेश मे शराब बंद करनी चाहिये जिससे प्रदेश में अपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगे और ऐसे आरोपियों को मौत से कम सजा नहीं मिलनी चाहिये।

गौरतलब है की झुंझनू जिले के पिलानी कस्बे में रिश्तों को शर्मशार कर देने वाली वारदात सामने आई है, सात साल की मासूम को उसके ही करीबी रिश्तेदार ने हवस का शिकार बना डाला। यही नहीं दरिंदगी के बाद जब मासूम रोई तो आरोपी ने उसे पीटा और उसका मुंह भी नोच भी डाला। खून से लथपथ पीड़िता जब घर पहुंची तो परिजनों के होश उड़ गए। जानकारी के मुताबिक पिलानी कस्बे में कच्ची बस्ती की रहने वाली सात साल की मासूम को उसका करीबी रिश्तेदार शमशाद अपने साथ दोपहर को चॉकलेट दिलाने के बहाने ले गया। करीब तीन-चार घंटे बाद शमशाद शराब के नशे में आया और बच्ची को घर छोड़ गया। बच्ची के घर आने के बाद जब उसकी बुआ ने देखा तो उसके होश उड़ गए। बच्ची खून से बुरी तरह लथपथ थी। इस बालिका को पिलानी के बिड़ला अस्पताल ले जाया गया, जहां पर हालत गंभीर होने पर उसे झुंझुनूं रैफर किया गया। यहां पर देर रात तक उसका इलाज जारी था। शुक्रवार को पीड़िता का मेडिकल करवाया गया। उधर इस घटना के बाद परिवार वालों का रो-रो कर बुरा हाल है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने खून के कपड़ों से लथपथ ही आरोपी को हिरासत में लिया, अब सरकार को तुरंत कार्यवाही करते आरोपी को सजा के साथ इन सब की जड़ शराब को प्रतिबंधित करना चाहिये।

जयपुर ग्रामीण के रोजदा में रविवार 19 मार्च को शराब बंदी के लिए होने वाले मतदान में पूनम अंकुर छाबड़ा ने रोजदा में सभा को संबोधन किया व ग्रामीणों को अधिक से अधिक मतदान के लिए निवेदन किया और जस्टिस फ़ॉर छाबड़ा संगठन की तरफ से समर्थन दिया। गाँव के संघर्ष के लिए जो पिछले 1 साल से सतत् प्रयासरत है उसके लिए गाँव की तारीफ की।




Friday, March 17, 2017

डाबला में नशा मुक्ति कार्यशाला:




श्रीगंगानगर 17 मार्च 2017.
नशा करने वाला न केवल अपना जीवन बर्बाद करता है बल्कि अपने परिवार को भी पीड़ा, दुख, परेशानी, बैईज्जती व आर्थिक संकट भी सोगात में देता है तथा समाज पर बोझा बन कर स्वंयम नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो जाता है। ये शब्द नशा मुक्ति परामर्श एवं उपचार केन्द्र श्रीगंगानगर के प्रभारी अधिकारी डाँ. रविकान्त गोयल ने मुख्य वक्ता के रूप मे श्री गुरू जम्भेशवर मन्दिर डाबला में आयोजित नशा मुक्ति कार्यक्रम मे ग्रामीण एवं विद्यार्थियों से कहे।

जिला पुलिस अधीक्षक  निर्देशानुसार चलाये जा रहे नशा मुक्ति अभियान के अन्तर्गत शुक्रवार को पुलिस थाना मुकलावा के माध्यम से श्री गुरू जम्भेशवर मन्दिर डाबला  में निःशुल्क नशा मुक्ति शिविर व कार्यशाला का आयोजन किया गया।

       नशा मुक्ति परामर्श एवं उपचार केन्द्र श्रीगंगानगर के प्रभारी डा. रविकान्त गोयल ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने सम्बोधन में कहा कि नशा मानवता का दुशमन है नशा बहुत तेजी से फैलता हुआ अपनी गिरफ्त में बङो, स्त्री  व पुरूषाें को लेकर समाज को बेइंतहा नुकसान पहुंचा रहा है। डा. गोयल ने नशे के दोषों, दुष्प्रभावों पर वैज्ञानिक जानकारी देते हुये इससे बचने व छोड़ने के सरल उपाय बताये तथा उपस्थित जन समूह को जीवन भर नशा न करने व औरों को नशा मुक्त करने की शपथ दिलाई।

       कार्यक्रम में थानाधिकारी पुलिस थाना मुकलावा श्री रामप्रताप (उ.नि.) ने अपने सम्बोधन में कहा कि नशा मानवता का दुशमन है। नशे के कारण व्यक्ति मानव को मानव नहीं समझता तथा अत्याचारी बनकर मानवता के विरूद्ध गलत राह पर चलने लग जाता है, जबकि हमें गुरूओं के बताये मार्ग पर चलकर नशे से ना केवल खुद बचना चाहिए बल्कि दूसरे लोगो को भी नशों से बचाना चाहिए। नशे की वजह से अपराधो की संख्या मे बढोतरी होती है इससे हमे बचना चाहीए। कार्यक्रम में समाजसेवी श्री श्रीसीताराम जी बिशनोई श्रीगुरू जम्भेशवर मन्दिर डाबला के प्रधान  ने उपस्थित लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करते हुये श्रीगंगानगर जिले में पुलिस प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से चल रहे नशा मुक्ति अभियान व नशा मुक्ति परामर्श एवं उपचार केन्द्र की सेवाओं के बारे में अवगत करवाया।

इस अवसर पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डाबला के प्रधानाचार्य श्रीमहावीर प्रसाद ने अपने विचार वक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थियो को न केवल नशे से स्वंय बचना चाहिए बल्कि अपने घर परिवार व गाँव को नशा मुक्त बनाने में अपना हर समभव सहयोग करना चाहिए।

कार्यक्रम मे समाज सेवी श्रीशिवराज जी भादु, श्री भुपराम जी डारा, पुर्व सरपंच श्रीरामकुमार कङवासरा, श्रीनत्थुरामजी सुथार, कोषाध्यक्ष श्रीदिनेश गोदारा  ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नशे से न केवल स्वंय बचे बल्कि अपने घर परिवार व गाँव शहर को नशा मुक्त बनाने मे अपना हर सम्भव सहयोग करना चाहिए।

कार्यक्रम मे उपस्थित जन समुह ने जीवन भर नशा न करने की प्रतिज्ञा की, डाँ. गोयल द्वारा नशे के आदी रोगीयो की मौके पर जाँच कर परामर्श प्रदान किय गया।






पूर्व पार्षद राजा राम गोदारा पार्षद परमेश्वरी देवी गोदारा के भवन निर्माण पर अापत्ती:





 सूरतगढ़ 16 मार्च शिव विहार कॉलोनी मैं पूर्व पार्षद राजा राम गोदारा के परिवार ने 7 भूॉखंडों पर मकानों के निर्माण करने की नगर पालिका से मंजूरी मांगी जिस पर पूर्व विधायक वरिष्ठ वकील हरचंद सिंह सिद्धू ने  16 मार्च को आपत्ती के पत्र नगरपालिका प्रशासन को दिये हैं।



निर्माण की स्वीकृति राजा राम गोदारा पुत्र पत राम गोदारा ने 4 भूखंडों पर निर्माण की स्वीकृति चाही है। पार्षद परमेश्वरी देवी गोदारा पत्नी राजा राम गोदारा की ओर से एक भूखंड पर निर्माण की स्वीकृति चाही है। महेंद्र कुमार गोदारा पुत्र राजा राम गोदारा की ओर से एक भूखंड पर निर्माण की स्वीकृति चाही है। भानू गोदारा पुत्र राजा राम गोदारा की ओर से एक भूखंड पर निर्माण की स्वीकृति चाही है। कुल सात भूखंडों पर निर्माण की स्वीकृति चाही है। ये सभी भूखंड शिव विहार कॉलोनी सूरतगढ़ में हैं।



 पूर्व विधायक सरदार हरचंद सिंह सिद्धू ने नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी जुबैर खां को अलग-अलग पत्र दे कर आपत्तियां उठाई है और निर्माण की स्वीकृति न दिए जाने का लिखा है।

 सिद्धू ने अापत्ती में लिखा है कि शिव विहार कॉलोनी के प्रकरण भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में विचाराधीन है। यह कॉलोनी जिस जमीन पर बनाई गई है वह अनुसूचित जाति के किसान की थी जो इस तरह से नहीं दी जा सकती। इस भूमि के  रूपांतरण पर भी नगर पालिका में कार्रवाई नहीं हो सकती। सिद्धू ने आपत्ती में लिखा है कि राजस्थान काश्तकारी अधिनियम की धारा 42 के तहत अनुसूचित जाति के व्यक्ति की भूमि स्वर्ण को अंतरण नहीं की जा सकती। राजा राम गोदारा स्वर्ण जाति का है। भूमि जिस तरह से रुपांतरित की गई है उससे मूल कानूनी स्थिति में कोई फर्क नहीं पड़ता कानून वह कायम है।ै

 सिद्धू ने लिखा है कि निर्माण की स्वीकृति देना अपराध कारित करना होगा, अतः निर्माण की स्वीकृति नहीं दी जाए।

Thursday, March 16, 2017

रामदेवरा में होली की लपटों में घोड़े पर सवार बाबा का अनोखा दृश्य



रामदेवरा की होली की लपटों  का यह अनोखा दृश्य ऐसे लग रहा है मानो घोड़े पर सवार बाबा रामदेव हों।
 यह छाया चित्र रीतेश के मिस्त्री जोधपुर की फेस बुक पर था।
सन्  2017 की होली।

Wednesday, March 15, 2017

पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा के घोटाले वाली मालचंद की संपूर्ण शिकायत: सबसे पहले: जबरदस्त हड़कंप मचा हुआ है:


- करणीदानसिंंह राजपूत -
सूरतगढ़ 15 मार्च 2017.

नगरपालिका अध्यक्ष काजल छाबड़ा ने भ्रष्टाचार मुक्त सूरतगढ़ का वादा किया और वह अपने वादे पर कायम नहीं रह सकी। काजल छाबड़ा के काल में भ्रष्टाचार व अनियमितताएं बहुत हुई क्योंकि कोई रोक टोक करने वाला नहीं है।
मालचंद जैन पत्रकार की शिकायत में काजल छाबड़ा, पालिका के सहायक अभियंता तरसेम अरोड़ा,कनिष्ठ अभियंता मोहित व्यास, कनिष्ठ अभियंता महेन्द्र थलौड़,लेखाकार लालचंद सांखला,निर्माण शाखा के लिपिक राजकुमार छाबड़ा पर भ्रष्टाचार के आरोप में 23 अप्रेल 2015 को शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में की थी।
राजकुमार छाबड़ा रिश्वत के मामले में गिरफ्तार व सस्पैंड है। लालचंद सांखला का स्थानान्तरण नोहर हो गया था।
इसकी प्रतियां अन्य अधिकारियों को भी दी गई थी।
भाजपा को चुनाव में स्पष्ट बहुमत में एक पार्षद कम रहा मगर निर्दलीयों का समर्थन लेकर काजल छाबड़ा को अध्यक्ष बनाया गया। विधायक राजेन्द्रसिंह भादू ने उनको अध्यक्ष पद पर जितवाने में सहयोग दिया लेकिन पालिका के घोटालों में काजल छाबड़ा पर परेशानियां आने वाली हैं उनमें विधायक क्या बचाव कर पाऐंगे?
मूल शिकायत पहली बार आपके सामने पेश है।












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